Homeकविता‘‘प्रतिशोध की ज्वाला’’

‘‘प्रतिशोध की ज्वाला’’

जबसे हुआ है पुलवामा हमला,

हर भारतवासी माँगे पाकिस्तान से बदला।

प्रतिशोध की ज्वाला भड़क रही है,

हर माँ अपने बेटे से फौज में जाने को कह रही है।

कह रही है चुन-चुनकर बदला लेना,

उन वीरों की शहादत का।

जिन्होंने फर्ज निभाया भारत माता की हिफाजत का।

बारम्बार नमन हैं उन वीर जवानों को,

जिन्होंने हिन्दुस्तान की आन की खातिर,

अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

देश की खातिर अपनी जान देकर जिन्होंने,

हर हिन्दुस्तानी की आँखों को नम कर दिया।

ये पानी नहीं लहू है,

जो हर हिन्दुस्तानी की आँखों में भर दिया।

अब ये लहू शोला बन गया है,

अब खून का बदला खून होगा,

देश के गद्दारों का अब विनाश होगा।

जो अब कश्मीर की आजादी मांगेगा,

चढ़ छाती पर अब उसका संहार होगा।

कश्मीर भारत का था, है और रहेगा।

अब समय आ गया है पाकिस्तान को जवाब देने का,

वो एक मारेगा हम सौ-सौ को मारेंगे।

पाकिस्तान की छाती लाशों से भर देंगे।

पाकिस्तान का वजूद जड़ से खत्म कर देंगे।

नक्शे से पाकिस्तान का नामोंनिशान मिटा देंगे,

नामोंनिशान मिटा देंगे।

– ब्रह्मानंद राजपूत, आगरा

(Brahmanand Rajput), Agra

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E-Mail – brhama_rajput@rediffmail.com

 

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