Homeपत्रिकाकला-संस्कृतिनई दिल्ली में तीन दिवसीय “जीआई-टैग जनजातीय सांस्कृतिक उत्सव” का आयोजन

नई दिल्ली में तीन दिवसीय “जीआई-टैग जनजातीय सांस्कृतिक उत्सव” का आयोजन

नई दिल्ली।जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय जनजातीय छात्र शिक्षा समिति (नेस्ट्स) ने आज नई दिल्ली में तीन दिवसीय “जीआई-टैग जनजातीय कला कार्यशाला एवं प्रदर्शनी – सांस्कृतिक उत्सव” का उद्घाटन किया। 24-26 नवंबर, 2025 तक आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में देश भर के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) के चयनित 139 छात्र, 34 कला एवं संगीत शिक्षक और 10 कुशल कारीगर भारत की भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग जनजातीय कला परंपराओं का उत्सव मनाने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए एक साथ आएंगे।

दीप प्रज्वलन के साथ उद्घाटन समारोह शुरू हुआ, जिसके बाद नेस्‍ट्स के संयुक्त आयुक्त (प्रशासन) श्री विपिन कुमार ने स्वागत भाषण दिया। आईजीएनसीए के जनपद संपदा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार ने आदिवासी कला रूपों के अंतर्निहित सभ्यतागत संबंधों पर प्रकाश डालते हुए विशेष भाषण दिया। इसके बाद नेस्‍ट्स के
संयुक्त आयुक्त (सिविल) श्री बिपिन रतूड़ी, नेस्‍ट्स के अपर आयुक्त श्री प्रशांत मीणा और नेस्‍ट्स के आयुक्त श्री अजीत कुमार श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कार्यशाला के उद्घाटन की औपचारिक घोषणा की।

उद्घाटन सत्र में ईएमआरएस के छात्रों द्वारा जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें शामिल हैं:• धेम्सा नृत्य (ओडिशा)

• जौनसारी नृत्य (उत्तराखंड)

• मिजो लोक नृत्य (मिजोरम)

• लोक गायन एकल (दादरा और नगर हवेली)

• देशभक्ति गीत (मध्य प्रदेश)

इन प्रदर्शनों में आदिवासी युवाओं की कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन हुआ और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना प्रतिबिंबित हुई।

प्रसिद्ध जीआई विशेषज्ञ सुश्री श्वेता मेनन (ट्रूली ट्राइबल) ने जीआई-टैग कलाओं के महत्व पर एक लाइव सत्र आयोजित करते हुए तीन दिवसीय गहन कार्यशाला का नेतृत्व कर रही हैं। छात्र, कुशल कारीगरों के मार्गदर्शन में, गोंड, वारली, मधुबनी, पिथोरा, चेरियाल, रोगन, कलमकारी, पिचवाई, ऐपण, रंगवाली पिचोरा, कांगड़ा, बशोली, मैसूर चित्रकला, बस्तर ढोकरा और कच्छी कढ़ाई सहित पारंपरिक जीआई- मान्यता प्राप्त कला रूपों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

सांस्कृतिक रूप से आधारित आवासीय शिक्षा के माध्यम से, ईएमआरएस आदिवासी बच्चों में आकांक्षा, सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने वाले सशक्त संस्थानों के रूप में कार्य करते हैं। आधुनिक शिक्षा और पारंपरिक कला, दोनों से परिचित होने से छात्रों में पहचान और अपनेपन की गहरी भावना विकसित होती है, जिससे कुछ क्षेत्रों में अलगाव की ऐतिहासिक भावनाओं का प्रतिकार होता है। यह पहल अवसर, सम्मान और प्रगति की सकारात्मक भावना का संचार करती है।

इस कार्यक्रम में जीआई-टैग छात्र कला प्रदर्शनी-सह-बिक्री, इंटरैक्टिव आगंतुक संलग्नताएं और एक लाइव आर्ट वर्कशॉप शामिल है जो प्रतिदिन सुबह 9:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक जनता के लिए खुला रहता है।

यह प्रदर्शनी 24 से 26 नवंबर 2025 तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। कला प्रेमियों, छात्रों, शोधकर्ताओं और आगंतुकों को प्रामाणिक भारतीय आदिवासी कला को देखने और उसका समर्थन करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

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