(मुम्बई गुरुवार 6 नवम्बर 2025) अभी अभी बोरीवली पूर्व के दौलत नगर श्मशान गृह से लौटा हूँ। अपने बहुत प्रिय डॉ उमाकान्त बाजपेयी जी को अंतिम विदाई देकर। आज दोपहर 1 बजे के आसपास उनका निधन कांदिवली पूर्व में अपनी सुपुत्री निरुपमा के आवास पर हो गया था।
एक बहुआयामी व्यक्तित्व, हिन्दी-सेवी, डॉ. उमाकांत बाजपेयी ने अपना पूरा जीवन काल (87 वर्ष) हिन्दी की सेवा में समर्पित किया। उन्होंने स्वेच्छा से गोलोक गमन मंजूर किया क्योंकि पिछले कुछ समय से उन्होंने अन्न जल त्याग दिया था और आज 1 बजे के लगभग शान से अनंत यात्रा पर रवाना हो गए।
यह समाचार मुंबई के असंख्य लोगों को द्रवित कर गया। देवमणि पाण्डेय, डॉ नरोत्तम शर्मा, नवीन चतुर्वेदी, राजीव रोहित, कृष्णा गौतम, एन के व्यास, डॉ जेपी बघेल, डॉ बनमाली चतुर्वेदी, एड सुशील बाजपेयी, सतीश शुक्ल रक़ीब सरीखे अनेक जन उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। शाम 7.30 बजे पर अंतिम यात्रा शुरू हुई। दौलत नगर में डॉ बाजपेयी जी की पुत्रियों नीता व संगीता ने सभी रस्में पूरी की। हम सभी ने डा बाजपेयी जी को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
डॉ बाजपेयी से मेरा 35 साल का संबन्ध रहा। 1990 में भारतीय जीवन बीमा निगम कार्यालय में पहली मुलाकात हुई थी, कुछ महीने पहले मेरी पुस्तक आमची मुंबई 2 का विमोचन उन्हीं के नेतृत्व व उपस्थित में आशीर्वाद द्वारा किया गया था। बचपन से ही हिन्दी में रूझान रखने वाले “साहित्य रत्न” डॉ बाजपेयी जी ने संस्कार, संस्कृति, साहित्य एवं चिकित्सा की पृष्ठभूमि यानी होम्योपैथी की शिक्षा में गोल्ड-मेडल ग्रहण कर मुंबई को अपनी कर्मस्थली बनाया। 1969 से मुंबई में उन्होंने आशीर्वाद नाम की पत्रिका का प्रकाशन तथा सन् 1977 में आशीर्वाद साहित्यिक, सांस्कृतिक व सामाजिक संस्था का शुभारंभ किया। वे भारतीय जीवन बीमा निगम में सन् 1998 तक कार्यरत रहे। तदुपरांत स्वैच्छिक सेवानिवृत लेकर आशीर्वाद संस्था के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यों में अपने को समर्पित कर दिया। देश-विदेश के हिन्दी सेवियों को पुरस्कृत व सम्मानित करने की उनकी 56 वर्ष की अनवरत यात्रा रही।
आशीर्वाद के पुरस्कृत एकांकी, मुंबई के हिन्दी कवि तथा मुंबई की हिन्दी कवयित्रियां पुस्तकों का उन्होंने संपादन किया। एक लेखक के रूप में उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं-
1. एक था नर एक थी मादा (कहानी संग्रह 2013)
2. एक सोने का मृग (कहानी संग्रह 2015)
3. बैंड बाजा बुलेट (कहानी संग्रह 2017) मॉरिशस राष्ट्रपति द्वारा विमोचन।
4. जय राम जी की (कहानी संग्रह 2019)
डॉ उमाकांत बाजपेई ने सन् 1974 एवं 1978 में अखिल भारतीय लेखक सम्मेलन का आयोजन किया जो मुंबई में पहला हिन्दी लेखक सम्मेलन था।
सन् 1978 से आशीर्वाद फ़िल्म अवार्ड का आयोजन किया जो पच्चीस वर्षों तक लगातार आयोजित होता रहा जिसमें सिनेमा जगत की मशहूर हस्तियाँ उपस्थित होती रहीं।
सन् 1986 में अखिल भारतीय एकांकी लेखन स्पर्धा का आयोजन किया। इस आयोजन में पुरस्कृत एकांकी की एक पुस्तक आशीर्वाद के पुरस्कृत एकांकी के नाम से प्रकाशित हुई।
सन् 1991 से हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु आशीर्वाद राजभाषा पुरस्कार एवं सम्मेलन का शुभारंभ किया, जो 33 वर्षों से चल रहा है जिसमें भारत के कई प्रसिद्ध और प्रमुख सरकारी कार्यालय सहयोगी हैं। हिन्दी को बढ़ावा देने हेतु अमेरिका के कार्यक्रमों में भी अपनी सहभागिता दी है।
आशीर्वाद ने सुनामी पीडितों के लिए अनुदान तथा विभिन्न सामाजिक कार्यों के लिए समय-समय पर योगदान किए हैं। कोरोना काल में महीने भर के राशन गरीबों को वितरित किए हैं।
26/11 की घटना से प्रभावित होकर आशीर्वाद संस्था द्वारा मुंबई के सभी चैनलों के 40 से अधिक मीडिया कर्मियों एवं पत्रकारों को शौर्य सम्मान से सम्मानित किया।
राजभाषा हिन्दी के 60 वर्ष पूरे होने पर आशीर्वाद राजभाषा की हीरक जयंती का महत्वपूर्ण एवं भव्य आयोजन किया गया जिसमें 60 विशिष्ट हिन्दी सेवियों को सम्मानित किया गया।
सन् 2012 में 24 घंटे चलने वाले अखंड कवि सम्मेलन का आयोजन। किया गया। सन् 2014 में अहिन्दी भाषी तथा विदेशी प्रतिनिधियों जैसे अमेरिकी दूतावास को उनके कार्यों के लिए हिन्दी पुरस्कार दिए।
वर्ष 2019 में आशीर्वाद की स्वर्ण जयंती मनायी गयी जिसमें 50 विविध आयामी लोगों को पुरस्कृत किया गया। मुंबई के 100 कवियों का एक संकलन प्रकाशित।
डॉ उमाकांत बाजपेई को प्राप्त प्रमुख पुरस्कार :
1. महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी द्वारा राज्यस्तरीय सम्मान एवं पुरस्कार 2009-2010
2. विश्व हिन्दी अकादमी द्वारा हिन्दी सेवी पुरस्कार 2014
3. भारत सरकार विकास आयुक्त संस्थान द्वारा हिन्दी पत्रकारिता रत्न सम्मान 2011
4. हिन्दी सेवा के लिए ब्रजेश पाठक मौन सम्मान 2011- 2012
5. राष्ट्रीय हिन्दी सेवी महासंघ चतुर्थ राष्ट्रीय सम्मालन में हिन्दी सेवी सम्मान 2008
6. राइटर्स एण्ड जर्नलिस्ट एशोसिएशन- वाजा इंडिया का साहित्य गौरव सम्मान ( 2017)
7. अहिसास साहित्य सम्मान (2018),
8. आपणो राजस्थान सम्मान (2019)
9. संस्कृति गौरव सम्मान ( 2021)
डॉ उमाकांत बाजपेयी के इन संस्थाओं से संबंध रहे-
1. कान्यकुब्ज मंडल के आजीवन सदस्य एवं पूर्व महासचिव
2. महाराष्ट्र हिन्दी समाज के पूर्व महासचिव
3. राष्ट्रीय हिन्दी सेवी संघ के संरक्षक एवं पूर्व महासचिव
4. सहयोग फाउंडेशन के संरक्षक
5. पत्रकारिता कोश के संरक्षक
6. बेटी बचाओ अभियान।
डॉ बाजपेयी ने अपनी पूरी जीवन हिन्दी का साथ, हिन्दी का विकास और हिन्दी पर विश्वास के लिए समर्पित किया था।
डॉ उमाकांत बाजपेई को विनम्र श्रद्धांजलि।
राजेश विक्रांत के फेसबुक वाल https://www.facebook.com/ rajesh.vikrant.2025 से साभार

