मुझे 40 वर्ष हो गए मुंबई में रहते हुए। इन चार दशकों में मुंबई साहित्य के विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत की पर मन में कई बातें खटकती रही । मुख्यतः धन्नासेठों के प्रयोजन वाले बैनर! पूंजीवाद के खिलाफ़ झंडा उठाए इंकलाबी साहित्यकारों के कार्यक्रमों, लोकार्पण,सम्मान,ईनाम आदि में धन्नासेठों का झंडा क्यों लगा रहता है? फ़िर मन उचट गया और विगत 10- 15 वर्षों से किसी साहित्यिक कार्यक्रम में शिकरत नहीं की !
फ़िर इक़लाबी शायर राकेश शर्मा का फ़ोन आया और मेरी प्रकाशित किताबों का कवर फ़ोटो मांगा और कहा कि इस वर्ष प्रकाशित पुस्तकों के सामूहिक लोकार्पण का कार्यक्रम बना है आप आएं अपनी पुस्तकों के साथ । सभी साहित्यकार अपनी प्रकाशित कृतियों के साथ सहभागी हो रहे हैं। मैंने तुरंत हां कर दी ।
25 जनवरी,2026 की शाम को हिंदी साहित्य के अपने दम पर खड़े होने का सूर्योदय हुआ हालांकि कार्यक्रम शाम को था । और इस सूर्योदय के शिल्पकार हैं ‘ स्वर संगम फाउंडेशन ‘ के साथी हृदयेश मयंक,रमन मिश्रा,राकेश शर्मा जिन्होंने मीरा रोड में, विरुंगला सांस्कृतिक केंद्र के हॉल को साहित्य सृजन प्रेरणा स्थल बना दिया है।
19 साहित्यकारों की कृतियों का सामूहिक लोकार्पण हुआ । सभी ने अपनी बात रखी । लगभग चार घंटे कार्यक्रम चला और 100 के आसपास साहित्य प्रेमियों ने धैर्यपूर्वक सभी रचनाकारों को सुना ।
कार्यक्रम बिना किसी धन्नासेठ के झंडे बिना हुआ । हिंदी साहित्य को अपने पैरों पर खड़ा होते देख मन गदगद हो गया ।
साहित्यकार की रचना को पुस्तक बनाता है प्रकाशक ! इस लोकार्पण में विभिन्न प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का लोकार्पण हुआ पर सबसे ज़्यादा पुस्तकों का प्रकाशन किया था न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन ने ।
सभी ने प्रकाशक की ईमानदारी,समयबद्धता की सराहना की । किसी प्रकाशक की ऐसी प्रशंसा और कर्त्तव्यपरायणता के बारे में मैंने पहले नहीं सुना था ।
न्यू वर्ल्ड प्रकाशन की संपादक आरिफ़ा एविस ने तीन साल पहले मुझे स्वयं फ़ोन करके पांडुलिपि मंगवाई । बिना पैसे लिए पुस्तक छापी हैं वो भी तीन तीन पुस्तक , दिए हुए समय पर !
न्यू वर्ल्ड प्रकाशन के मुखिया मुकेश चंद्र बहुत विनयशील और सक्षम सृजनशील प्रबंधक हैं। मुकेश चंद्र,आरिफ़ा और उनकी टीम ने विगत 4 – 5 वर्षों में सैंकड़ों पुस्तक प्रकाशित कर साहित्यकारों में हौंसला जगा प्रकाशकों के एकाधिकार को तोड़ा है। इस साहित्य साधना में उन्होंने किया पैसा कमाया पता नहीं पर शोहरत बहुत कमाई है!
इस ईमानदार छवि, कर्त्तव्यपरायणता के लिए न्यू वर्ल्ड प्रकाशन को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं!
स्वर संगम फाउंडेशन की इस अनूठी पहल ने मुंबई में हिंदी साहित्य सृजन का इतिहास रच दिया । इस इतिहास रचने के साक्षी रहे धीरेन्द्र अस्थाना,असगर वज़ाहत,प्रेम जनमेजय, गंगाराम राजी, रमन मिश्र और सभी रचनाकार और साहित्य प्रेमी !

