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सुने अनसुने किस्से गीतकार अंजान के

“अंजान जी, आप पर एक जानलेवा हमला होने वाला है।” उस आदमी ने गीतकार अंजान से कहा। और अंजान जी को उस आदमी पर बहुत तेज़ गुस्सा आ गया। उन्होंने अपने दोस्त से उस आदमी के बारे में बात की और कहा कि ये किस आदमी को तुमने अपने घर पर बुलाया है? साथियों ये किस्सा उस घटना पर आधारित है जो आज से कई साल पहले गीतकार अंजान जी के साथ घटी थी। चलिए विस्तार से ये किस्सा जानते हैं।
लालजी पांडे। जो फ़िल्मी दुनिया में अंजान के नाम से जाने जाते थे। साल 1954 में आई फ़िल्म “प्रिज़नर्स ऑफ़ गोलकुंडा” से बतौर गीतकार अंजान जी का करियर शुरू हुआ था। इस फ़िल्म में प्रेमनाथ व बीना राय मुख्य भूमिकाओं में थे। और प्रेमनाथ जी ने ये फ़िल्म डायरेक्ट-प्रोड्यूस की थी। लेकिन अफ़सोस, ये फ़िल्म कभी रिलीज़ नहीं हो सकी थी। मगर अब ये यूट्यूब पर उपलब्ध है। प्रेमनाथ जी के पुत्र ने इसे अपने यूट्यूब चैनल मेजर मूड एंटरटेनमेंट पर अपलोड किया है।
खरै, हम अंजान जी की बात कर रहे थे। साल 1969 में आई बंधन फ़िल्म का गीत ‘बिना बदरा के बिजुरिया कैसे चमके’ अंजान जी के करियर का पहला लोकप्रिय गीत रहा था। इस गीत की लोकप्रियता ने अंजान जी को कल्याणजी-आनंदजी का पसंदीदा गीतकार बना दिया। कल्याणजी-आनंदजी ने अपनी एक टीम बनाई जिसमें दो गीतकार उन्होंने रखे। एक थे अंजान। दूसरे थे इंदीवर। इस टीम में रहते हुए अंजान जी ने नित नई सफ़लताएं अपने करियर में हासिल की थी।
1978 में आई अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फ़िल्म डॉन का सुपरहिट गाना “खइके पान बनारस वाला” भी अंजान जी ने ही लिखा था। वैसे डॉन फ़िल्म में अंजान जी ने तीन और गीत भी लिखे थे। व एक गीत इंदीवर जी ने भी लिखा था, जिसके बोल थे ‘ये मेरा दिल प्यार का दीवाना।’ डॉन फ़िल्म के रिलीज़ और सुपरहिट होने के कुछ दिनों बाद की बात है। मुंबई के खार इलाके में अंजान जी का एक दोस्त रहा करता था। एक दिन उस दोस्त ने अंजान जी को खाने पर बुलाया।
अंजान जी अपने उस दोस्त के बुलावे पर उसके घर पहुंचे। वहां एक और आदमी पहले से मौजूद था। अंजान जी को देखते ही वो आदमी इनसे बोला,”अंजान जी, आप पर एक जानलेवा हमला होने वाला है।” अंजान इनते सीधे सादे इंसान थे कि उनके साथ किसी की दुश्मनी होगी, ये कोई सोच भी नहीं सकता था। इसलिए उस आदमी की वो जानलेवा हमला वाली बात सुनकर अंजान जी को बहुत गुस्सा आया। उन्हें बहुत बुरी लगी उस आदमी की वो बात।
अंजान जी ने गुस्से से अपने मेजबान से कहा,”ये किस आदमी को बुला लिया है तुमने। ये मेरे बारे में ऐसी-ऐसी बातें कर रहा है। डॉन इतनी बड़ी हिट हो गई है। सभी गाने भी हिट हुए हैं। और ये आदमी इस तरह की बातें कर रहा है।” अंजान जी की स्थिति समझकर इनके दोस्त ने उस आदमी को अपने घर से बाहर भेज दिया। फिर अंजान जी ने आराम से खाना खाया। और खाना खाने के बाद उनका मन केला खाने का हुआ। वैसे भी वो रोज़ खाने के बाद केला खाते थे। उनकी आदत थी वो।
मगर किसी दूसरे के घर केला मांगने में उन्हें झिझक हो रही थी। इसलिए अंजान जी अपने उस दोस्त से विदा लेकर उसके घर से निकल गए। सामने सड़क पर एक ठेले वाला व्यक्ति खड़ा था जो केले ही बेच रहा था। अंजान उससे केले खरीदने लगे। मगर तभी एक बेहद अजीब सी बात हुई। जिस जगह वो ठेला था वहां सामने की तरफ़ झोपड़पट्टी भी थी। वहां एक पागल सा दिखने वाला आदमी मौजूद थाी। वो पागल सा दिखने वाला आदमी कोई क़त्ल करके आया था।
उस पागल आदमी ने अंजान जी को ठेले से केले खरीदते हुए देखा। वो डर गया। उसे लगा कि ये आदमी(अंजान जी) पक्का पुलिस का जासूस है और उसकी तलाश में यहां तक आ गया है। फिर पता नहीं उस आदमी को क्या हुआ, उसने अंजान जी के पास आकर उन्हें चाकू मार दिया। अंजान जी बेहद घबरा गए। और बहुत हैरत में भी आ गए। क्योंकि कुछ ही देर पहले दोस्त के घर मिले एक आदमी ने उन्हें बताया था कि उन पर एक जानलेवा हमला होगा।
आस-पास मौजूद लोगों ने अंजान जी को अस्पताल पहुंचाया। और समय पर इलाज मिलने की वजह से अंजान जी की जान बच गई। उधर मीडिया में अंजान जी पर चाकू से हुए हमले की खबर आग की तरह फैल गई। अखबारों ने मोटे-मोटे शब्दों में लिखना शुरू कर दिया “खइके पान बनारस वाला” गीत लिखने वाले गीतकार पर जानलेवा हमला हुआ है। फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग भी अंजान जी पर हुए उस हमले की खबर सुनकर बहुत हैरान और परेशान हो रह थे।
उसी वक्त कल्याणजी-आनंदजी वाले कल्याणजी भाई ने मज़ाक में गीतकार इंदीवर जी से कहा कि लोग कह रहे हैं कि अंजान जी पर जानलेवा हमला आपने कराया है। सब कह रहे हैं कि इंदीवर अंजान से दुश्मनी रखते हैं। जब से डॉन फ़िल्म के गीत इंदीवर की जगह अंजान से लिखाए गए हैं तब से इंदीवर अंजान से रंजिश रखते हैं। और उन्होंने ही अंजान पर चाकू से जानलेवा हमला कराया है। कल्याणजी भाई की ये बात सुनकर गीतकार इंदीवर बुरी तरह घबरा गए।
इंदीवर को लगा कि अगर अंजान जी ने पुलिस में उनका नाम ले दिया तो उन्हें तो बहुत परेशानी हो जाएगी। पुलिस शायद उन्हें बंद कर देगी। इसलिए वो अंजान जी से मिलने अस्पताल पहुंच गए। अंजान जी इस समय तक होश में आ चुके थे। उनकी जान भी खतरे से बाहर थी। इंदीवर जी ने अंजान जी को बताया कि बात फै़ल रही है कि मैंने आप पर हमला कराया है। लेकिन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है। तब अंजान जी ने उन्हें दिलासा दिया और कहा कि मुझे यकीन है आप ऐसा नहीं कर सकते। आप तो मेरे भाई हैं। तब जाकर इंदीवर जी की जान में जान आई।
साथियों ये किस्सा खुद अंजान जी के पुत्र और बहुत नामवर गीतकार समीर जी ने आर.जे. अनमोल के साथ बात करते हुए बताया था। तो हमारी फ़िल्म इंडस्ट्री के लोगों का एक पहलू ये भी है। बेहद गंभीर बातों पर भी यहां मज़ाक हो जाते हैं। आज अंजान जी का जन्मदिवस है साथियों। 28 अक्टूबर 1930 को बनारस में लालजी पांडे उर्फ़ अंजान जी का जन्म हुआ था। एक से एक गीत लिखे थे अंजान जी ने। अंजान जी को किस्सा टीवी का नमन। शत शत नमन।
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