Homeभारत गौरवइस गाँव में धातु को चमकाकर दर्पण बनाए जाते हैं

इस गाँव में धातु को चमकाकर दर्पण बनाए जाते हैं

क्या आप जानते हैं कि केरल की पम्बा नदी के तट पर स्थित अरनमुला गाँव, देश के इतिहास व इसकी विरासत का एक शानदार नमूना है! यहाँ की सबसे प्रमुख पहचान है अरनमुला कन्नाड़ी यानी अरनमुला के विशेष आइने। सबसे खास बात यह है कि ये कन्नाड़ी(आइने) शीशे की बजाय धातु(मेटल) से बनाए जाते हैं और उन्हें बनाने की प्रक्रिया पीढ़ियों से चली आ रही पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है, जिसका #इतिहास हजारों साल पुराना है।
मूल रूप से इन शिल्पकारों को देवताओं की उत्कृष्ट कांस्य मूर्तियों को बनाने के लिए जाना जाता था। लेकिन लगभग 2000 साल पहले इन्होंने अरनमुला कन्नाड़ी के रूप में जाना जाने वाला यह विशेष आइना बनाया जो इनकी मूर्ति बनाने की कला से ज्यादा प्रचलित हुआ।
तो क्या है जो अरनमुला कन्नाड़ी को बाकी आइनों से अलग बनाता है? आई जानते हैं-
दरअसल ये आइने टिन और कॉपर को गलाकर विशेष तरह से बनाए जाते हैं और यह कला सिर्फ अरनमुला के 22 परिवारों को ही आती है। ये शीशे केरल के ऑफिशियल गिफ्ट के तौर पर जाने जाते हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, प्रिंस चार्ल्स से लेकर भारत के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री तक को ये आइने बतौर गिफ्ट भेंट किए जा चुके हैं।
इस दर्पण की विशेषता का एक कारण यह भी है कि जहाँ शीशे के दर्पण में प्रतिबिंब उसकी भीतरी सतह पर किए गए पारे के लेप के कारण बनते हैं, तो वही इसमें छवि मुख्य सतह पर ही बनती है।
अरनमुला के इन शीशों के पास यूनेस्को का जीआई (जिऑग्रफिकल इंडिकेशन) टैग है। इसका अर्थ हुआ कि इन आइनों पर किसी और जगह के लोगों का दावा नहीं हो सकता।

साभार- https://www.facebook.com/share/1DgwtkU7rd/ से 

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