महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा हेतु इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर
मुंबई। पश्चिम रेलवे द्वारा 15 दिसंबर, 2025 को मानव तस्करी विरोधी विषय पर एक क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, बचाव, पुनर्वास तथा उन्हें उनके परिवारों से पुनर्मिलन सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी। यह पहल रेलवे परिसरों को अधिक सुरक्षित, संवेदनशील एवं मानवीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री विनीत अभिषेक द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन रेलवे सुरक्षा बल (RPF), पश्चिम रेलवे द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के सहयोग से संयुक्त रूप से किया गया।
इस कार्यशाला में राष्ट्रीय महिला आयोग, नई दिल्ली की अध्यक्षा श्रीमती विजया किशोर रहाटकर; पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री विवेक कुमार गुप्ता; मुंबई पुलिस की उपायुक्त श्रीमती रागसुधा आर. (IPS); वरिष्ठ सलाहकार श्रीमती निशिता दुबे; रेलवे सुरक्षा बल के महानिरीक्षक-सह-प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त श्री अजय सदानी; पश्चिम रेलवे, मुंबई सेंट्रल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री पंकज सिंह सहित पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी तथा विशिष्ट संसाधन व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यशाला का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों एवं ट्रेनों जैसे संवेदनशील स्थानों पर मानव तस्करी की रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाना, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना तथा त्वरित एवं संवेदनशील प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना था। कार्यशाला में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। सत्र-1 का विषय “मानव तस्करी के आयाम, कानून एवं प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका” था, जबकि सत्र-2 “मानव तस्करी नेटवर्क को बाधित करने हेतु इंटर-सेक्टोरल कन्वर्जेंस को सुदृढ़ करना” विषय पर केंद्रित था। दोनों सत्रों के उपरांत संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती विजया किशोर रहाटकर ने अपने संबोधन में रेलवे परिसरों में मानव तस्करी की रोकथाम एवं महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु पश्चिम रेलवे द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों की सराहना की। उन्होंने भारतीय रेल, जिसमें पश्चिम रेलवे भी शामिल है, की “मेरी सहेली” पहल की विशेष रूप से प्रशंसा की। यह एक समर्पित सुरक्षा कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत महिला रेलवे सुरक्षा बल (RPF) टीमें अकेली यात्रा कर रही महिला यात्रियों को सुरक्षा, मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहलें महिला यात्रियों में विश्वास एवं आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं तथा रेल यात्रा को अधिक सुरक्षित, समावेशी एवं महिला-अनुकूल बनाती हैं।
श्रीमती रहाटकर ने आगे रेलवे स्टेशनों पर कार्यरत सहायकों (कुलियों), हाउसकीपिंग स्टाफ एवं अन्य फ्रंटलाइन ग्राउंड स्टाफ के नियमित प्रशिक्षण एवं संवेदनशीलता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि चौबीसों घंटे कार्यरत ये कर्मचारी प्रायः यात्रियों के प्रथम संपर्क बिंदु होते हैं और खोए हुए, घर से भागे हुए अथवा सहायता की आवश्यकता वाले बच्चों, विशेषकर बालिकाओं की शीघ्र पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जिससे स्टेशनों पर सुरक्षा एवं प्रतिक्रिया तंत्र और अधिक मजबूत हो सकता है।
सभा को संबोधित करते हुए पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री विवेक कुमार गुप्ता ने कहा कि रेलवे केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से सीधे जुड़ा एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक तंत्र है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रेलवे की सामाजिक जिम्मेदारी का अभिन्न अंग है, जिसके लिए सतर्कता, संवेदनशीलता तथा सशक्त मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन आवश्यक है।
कार्यशाला के दौरान पश्चिम रेलवे द्वारा “नन्हे फरिश्ते” एवं “ऑपरेशन डिग्निटी” अभियानों के अंतर्गत किए गए प्रयासों की जानकारी भी साझा की गई। पिछले दो वर्षों में कुल 1,573 बच्चों—जिसमें वर्ष 2024 के दौरान 842 बच्चे तथा वर्ष 2025 (अब तक) 731 बच्चे शामिल हैं—को असुरक्षित परिस्थितियों से बचाकर पुनर्वासित किया गया तथा उनके परिवारों से पुनर्मिलन सुनिश्चित किया गया है। इसके अतिरिक्त, चाइल्ड हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं, जिनका संचालन संबंधित राज्य सरकारों एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारियों के सहयोग से प्रभावी रूप से किया जा रहा है।
पश्चिम रेलवे, रेलवे सुरक्षा बल एवं राष्ट्रीय महिला आयोग महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, मानव तस्करी की रोकथाम तथा मानवीय मूल्यों की रक्षा हेतु प्रशिक्षण, जागरूकता एवं इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

