Homeपत्रिकाकला-संस्कृतिअजब झंडे की ग़ज़ब कहानी

अजब झंडे की ग़ज़ब कहानी

उज्जैन।  इस वर्ष विक्रम महोत्सव में यह विक्रम धर्म ध्वज और  ऐसे ही हज़ारों झंडे मध्य प्रदेश शासन द्वारा महाकाल मंदिर के शिखर से ले कर प्रदेश तथा उज्जयिनी के घर घर लगाये जा रहें हैं तीस मार्च गुडी पढ़वा को यह झंडा हर घर में फहरायेगा इस झंडे की भी अद्भुत कहानी है। २३ अप्रेल १९६१ को वैशाख शुक्ल अष्टमी के दिन दस बजे से मध्यान्ह में महाकाल मंदिर के शिखर पर सोने चाँदी के तार से गूँथा यह रेशमी सिल्क ध्वज सुबह दस बजे पद्म भूषण पंडित सूर्य नारायण व्यास के महाकाल से लगे आवास भारती – भवन में उड़कर आया और ठीक आधे घंटे के अंदर ही उसी दिन पुष्य नक्षत्र में व्यास जी के घर सबसे छोटे बालक का जन्म हुआ , बेटे को व्यास जी ने इसी ध्वज में लपेट कर गोद में लिया ।
 इस साल इस बरस के विक्रमोत्सव की तैयारी में मुख्य मंत्री के मुख्य सलाहकार श्री राम तिवारी पंडित व्यास के उसी सुपुत्र राजशेखर व्यास से महाशिवरात्रि -२०२५ को मिलने उनके नए आवास पर पधारे और उन्हें स्वर्ण मंडित यह झंडा घर के फ़ोटो फ़्रेम में दिखा उन्होंने तत्काल ही लेखक से अनुरोध किया की यह ध्वज विक्रम महोत्सव के लिए प्रदान कर दे तत्काल श्री राजशेखर व्यास ने इस ध्वज को अनुकृति बनने की इजाज़त दे कर इसे इस वर्ष के विक्रम महोत्सव की धर्म ध्वजा बनाने की अनुमति सहर्ष स्वीकृति दे दी – व्यास जी ने तो विक्रम कालिदास और उज्जयिनी के लिए अपना जीवन उत्सर्ग कर दिया और मेरे जीवन का भी प्रत्येक क्षण और कन उज्जयिनी को समर्पित हैं यूँ बना यह विक्रम धर्म ध्वजा का झंडा जो तीस मार्च गुडी पड़वा को हम देखेंगे घर -घर
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