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पुणे में सम्मान के तुलसीबाग गणपति

पुणे के सबसे भीड़भाड़ वाले मार्केट तुलसीबाग में विराजमान हैं. श्री तुलसीबाग गणपति. सबके लिए श्रद्धेय इस गणपति को सम्मानित गणपति में चौथा स्थान मिला है. तुलसीबाग गणपति पंडाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां हर वर्ष एक नई और आकर्षक थीम के साथ पंडाल सजाया जाता है. पंडाल में गणेश जी के चरण इतने खूबसूरत दिखते हैं कि हर भक्त एक बार इस पर मस्तक को रख कर धन्य हो जाता है. बप्पा के साथ मूषकराज भी बहुत प्यारे दिखते हैं. गणपति की दूसरी सबसे बड़ी खासियत यह है कि मूर्ति फायबर की है. इसे 1988 में विवेक खतावर ने बनाया था. ये गणपति 250 किलोग्राम चांदी के आभूषण से सजे रहते हैं. तुलसीबाग गणपति पुणे के सबसे ऊंचा गणपति माना जाता है. इसकी उंचाई 15 फीट है. इसके साथ ही ये गणपति पूरी तरह से चांदी के आभूषणों से अलंकृत रहते हैं. इनकी स्थापना 1901 में लोकमान्य गंगाधर तिलक और तुलसीबागवाले ने मिलकर की थी.

कोषाध्यक्ष नितिन पंडित ने बताया  कि धार्मिक और पौराणिक झांकी की परंपरा को आगे बढ़ानेवाले श्री तुलसीबाग सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल ट्रस्ट इस बार 124वें वर्ष में पदार्पण कर रहा है. पंडाल के माध्यम से हर साल अलग-अलग विषयों पर आधारित झांकियां बनाई जाती हैं. इस बार श्री जगन्नाथ मंदिर की प्रतिकृति बनाई जाएगी, जो 60 फीट लंबाई 20 फीट चौड़ी और 35 फीट ऊंची होगी. श्री जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा, सुदर्शन जगन्नाथ मंदिर के देवता होंगे.

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महिलाओं के सम्मान में एक दिन समर्पित
मंडल के उपाध्यक्ष विनायक कदम ने कहा कि पालकी के दौरान इस वर्ष वारकरियों को मेट्रो का सफर कराया. ये सारे वारकरी गांव से आते हैं इन्हें तकनीक आदि की जानकारी नहीं रहती है तो हमरा उद्देश्य रहता है कि उन्हें विकसित भारत की जानकारी मिले. गणपति के दौरान धार्मिक कार्यक्रम होते हैं. सम्मानित गणपति होने के कारण यहाँ पर दर्शन के लिए काफी लोग आते हैं. इसके साथ ही गणपति के दौरान एक दिन महिलाओं के नाम रहता है . तुलसीबाग और महिला का एक गहरा रिश्ता है. इसलिए उन महिलाओं के सम्मान में एक दिन उनके लिए रहता है, सुबह से लेकर शाम तक वही सब कामकाज संभालती है. वहीं अलग-अलग क्षेत्र की महिलाओं को सम्मानित करते हैं. इस ट्रस्ट के अध्यक्ष विकास पवार, उपाध्यक्ष विनायक कदम और कोषाध्यक्ष नितिन पंडित हैं.

स्वतंत्रता- पूर्व काल में गणेशोत्सव में पोवाडे, मेले, जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाते थे. यहां पर स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करनेवाले लोग भाषण देते थे. यहां बड़े-बड़े शास्त्रीय गायकों के कार्यक्रम भी हुआ करते थे, बदलते समय के साथ अब ऐसे कार्यक्रम करना संभव नहीं है. शुरुआती दौर में पौराणिक और धार्मिक झांकी रहती थी. उसके बाद अब सामाजिक कार्यक्रम होने लगे. मंडल की ओर से हर साल वंचित बच्चों को खुद की पसंद के कपड़े खरीदने का मौका दिया जाता है. इसके साथ ही मंडल के प्रत्येक कार्यकर्ता का जन्मदिन संगठन द्वारा जरूरत की विभिन्न वस्तुएं देकर मनाया जाता है. अभी तक 70 से 80 जन्मदिन इस तरह से मनाए गए हैं. मंडल हमेशा रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करता रहता है. इसके साथ ही विसर्जन शोभायात्रा के बाद फायर ब्रिगेड के सदस्यों को सम्मानित भी किया जाता है. फायर ब्रिगेड के जवान 48 घंटे ड्यूटी करते हैं. उनके कर्तव्य के प्रति निष्ठा और लगन को सलाम करने के लिए मंडल की ओर से उन्हें सम्मानित किया जाता है.

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