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वार त्यौहार
 

  • भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है रक्षाबंधन

    भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है रक्षाबंधन

    रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है. यह त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षाबंधन बांधकर उनकी लंबी उम्र और कामयाबी की कामना करती हैं. भाई भी अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देते हैं.

  • राखी के धागों से जुड़ी है मानवीय संवेदनाएं

    राखी के धागों से जुड़ी है मानवीय संवेदनाएं

    रक्षाबंधन यानी सामाजिक और पारिवारिक एकबद्धता एवं एकसूत्रता का सांस्कृतिक पर्व। प्यार के धागों का एक ऐसा पर्व जो घर-घर मानवीय रिश्तों में नवीन ऊर्जा का संचार करता है।

  • विश्वास की रक्षा ही रक्षाबंधन

    विश्वास की रक्षा ही रक्षाबंधन

    भारतीय परम्परा में विश्वास का बंधन ही मूल है। रक्षाबंधन इसी विश्वास का बंधन है। यह पर्व मात्र रक्षा-सूत्र के रूप में राखी बांधकर रक्षा का वचन ही नहीं देता, वरन प्रेम, समर्पण, निष्ठा व संकल्प के जरिए हृदयों को बांधने का भी वचन देता है।

  • आया बैसाखी का पावन पर्व

    आया बैसाखी का पावन पर्व

    बैसाखी ऋतु आधारित पर्व है. बैसाखी को वैसाखी भी कहा जाता है. पंजाबी में इसे विसाखी कहते हैं. बैसाखी कृषि आधारित पर्व है. जब फ़सल पक कर तैयार हो जाती है और उसकी कटाई का काम शुरू हो जाता है, तब यह पर्व मनाया जाता है.

  • बारह साल बाद महाशिवरात्रि का दुर्लभ शिवयोग संयोग

    बारह साल बाद महाशिवरात्रि का दुर्लभ शिवयोग संयोग

    इस बार महाशिवरात्रि का त्योहार सात मार्च को यानी सोमवार को मनाया जाएगा। देवों के देव महादेव की आराधना का शिवरात्रि महापर्व सोमवार के दिन शिवयोग धनिष्ठा नक्षत्र में सात मार्च को है।

  • वसंतोत्सव : प्रेम का पर्व

    वसंतोत्सव : प्रेम का पर्व

    प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में ऋतुओं का विशेष महत्व रहा है. इन ऋतुओं ने विभिन्न प्रकार से हमारे जीवन को प्रभावित किया है. ये हमारे जन-जीवन से गहरे से जुड़ी हुई हैं. इनका अपना धार्मिक और पौराणिक महत्व है. वसंत ऋतु का भी अपना ही महत्व है.

  • दीपोत्सव : अंधकार की जड़ता पर चेतना का स्वर्णिम हस्ताक्षर

    दीपोत्सव : अंधकार की जड़ता पर चेतना का स्वर्णिम हस्ताक्षर

    संसार की असंख्य दीपकों की उज्ज्वल प्रकाश रश्मियों से मन मंदिर को अालोकित करने की अनंत कामना का अपूर्व पर्व है दीपोत्सव। दीपावली केवल बाहर रोशनी जलाने का नाम नहीं, बल्कि अंतर को भी प्रज्ज्वलित करने का पर्व है। हमारी चेतना बाहर की ओर देखती है, अगर हम अंदर की ओर देखें तो कायाकल्प हो सकता है।

  • धनतेरस, दिवाली और भाई दूज के मुहुर्त

    धनतेरस, दिवाली और भाई दूज के मुहुर्त

    इस वर्ष धनतेरस 9 नवम्बर दिन सोमवार 2015 को त्रयोदशी रात्रि 7:10 बजे तक रहेगी। चौघड़िया का मुहूर्त इस प्रकार रहेगा- सांय 6:17 से 07:45 बजे तक।

  • नवसृजन का पर्व है नवरात्रि

    नवसृजन का पर्व है नवरात्रि

    भारतीय वाङमय में हर दिन और हर समय काल का महत्व है। नवरात्रि का तो विशेष महत्व है, क्योंकि यह ऋतु परिवर्तन के साथ ही प्रकृति के नवसृजन का शुभारंभ भी है। नवरात्रि के प्रथम दिवस से ही संपूर्ण प्रकृति एक नई अंगड़ाई लेती है। नवरात्रि के ये नौ दिन धर्म, अध्यात्म, साधना, मानसिक शांति, नए कार्य के शुभारंभ से लेकर जीवन के किसी भी क्षेत्र में एक नई शुरुआत करने की दृष्टि से उत्तम माने गए हैं।

  • इतिहास के आइने में रक्षाबंधन का पर्व

    रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह त्यौहार भाई बहन के प्यार का प्रतीक है। सात्विकता एवं पवित्रता का सौंदर्य लिए यह त्यौहार सभी जन के हृदय को अपनी खुशबू संवेदनाओं से महकाता है।

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