“आपकी बेटी इतनी खूबसूरत नहीं है कि मैं उसे देखूं। मैं तो मोगरे की खुशबू सूंघने के लिए यहां आकर बैठा हूं। अगर ज़्यादा बोलोगी तो आपकी बेटी के बराबर में बैठ जाऊंगा। क्योंकि इस सीट पर तीन लोग बैठ सकते हैं।” एक लड़के ने सीमा देव जी की मां से मुंबई की एक लोकल ट्रेन में कहा। सीमा जी की मां उस लड़के की बात सुनकर अवाक रह गई। वो चुप हो गई। लेकिन उन्होंने सीमा जी को निर्देश दिया कि इस लड़के की तरफ़ बिल्कुल भी मत देखना।
साथियों सालों पहले की ये एक बहुत दिलचस्प घटना आज किस्सा टीवी के माध्यम से आप जानेंगे। ये हुआ था एक्ट्रेस सीमा देव जी के साथ। और सीमा देव जी की मां के साथ उस दिन बदमिजाज़ी से बात करने वाला वो लड़का भी आगे चलकर नामी एक्टर बना था। ये कहानी आज इसलिए क्योंकि आज सीमा देव जी का जन्मदिवस है। 27 मार्च 1942 को सीमा जी का जन्म हुआ था। सीमा जी बहुत उत्कृष्ट अदाकार थी। सीमा जी को नमन करते हुए ये कहानी शुरू करते हैं।
उस वक्त सीमा जी के घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब चल रही थी। किसी ने सीमा जी से कहा कि तुम्हें फ़िल्मों में काम करना चाहिए। फ़िल्म लाइन में अच्छा पैसा है। सीमा जी को बताया गया कि फ़िल्मिस्तान में बहुत सारी फ़िल्में बनती हैं। उन लोगों को हमेशा कलाकारों की ज़रूरत रहती है। सीमा जी ने अपनी मां से बात की। लेकिन उनकी मां ने मना कर दिया। क्योंकि उस दौर में जल्दी से लोग अपनी बेटी को फ़िल्म लाइन में भेजने को तैयार नहीं होते थे।
सीमा जी ने अपनी मां से कहा कि अगर फ़िल्म में काम मिल गया तो शायद घर चलाने में बहुत मदद हो जाए। उस दौर में फ़िल्मिस्तान में मराठी फ़िल्में बनना भी शुरू हो चुकी थी। और उन्हें अच्छी तादाद में मराठी कलाकारों की ज़रूरत पड़ती थी। सीमा जी को यही उम्मीद थी कि उन्हें मराठी होने के चलते फ़िल्मों में काम मिल सकता है। घर-परिवार के गुज़ारे की बात थी। तो ना चाहते हुए भी सीमा जी की मां उनके साथ फ़िल्मिस्तान चलने को तैयार हो गई।
एक-दो दिन बाद सीमा जी और उनकी मां लोकल ट्रेन से फ़िल्मिस्तान स्टूडियो की तरफ़ चल दी। रास्ते में ग्रांट रोड स्टेशन आया। गाड़ी वहां रुकी तो एक नौजवान लड़का भी उसी बोगी में आ गया जिसमें सीमा देव जी व उनकी मां बैठी थी। सुबह का समय था, तो गाड़ी लगभग खाली पड़ी थी। फिर भी वो लड़का सीमा जी के सामने वाली सीट पर आकर बैठ गया। उस वक्त सीमा जी ने अपने बालों में मोगरे के फूलों वाला एक गजरा लगा रखा था। और गजरे में से अच्छी-खासी खुशबू उठ रही थी।
उस लड़के को मोगरे की खुशबू बहुत पसंद थी। मगर सच तो ये है कि उस लड़के को सीमा जी पसंद आ रही थी। इसलिए वो सामने बैठकर बार-बार सीमा जी को घूरे जा रहा था। सीमा जी की मां को जब आभास हुआ कि ये लड़का उनकी बेटी को घूरे जा रहा है तो उन्हें बहुत खराब लगा। जब उस लड़के को काफ़ी देर हो गई तो सीमा जी की मां के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने उस लड़के को टोकते हुए कहा,”ऐ मिस्टर, क्यों तुम मेरी बेटी को ऐसे घूरे जा रहे हो? तुम्हें शर्म नहीं है क्या?”
चूंकि वो लड़का नौजवान था तो उसे सीमा जी की मां का बात करने का अंदाज़ बड़ा ख़राब लगा। उसने सीमा जी की मां को लगभग अकड़ते हुए जवाब दिया,”मैं आपकी बेटी को नहीं घूर रहा हूं। इतनी खूबसूरत नहीं है आपकी बेटी कि मैं इसे घूरूं। मैं तो मोगरे की खुशबू के लिए यहां बैठा हूं। अगर आप ज़्यादा बक-बक करेंगी तो मैं आपकी लड़की के बगल में बैठ जाऊंगा। क्योंकि उस सीट पर तीन लोगों के बैठने की जगह है।”
उस लड़के का वो अक्खड़ सा जवाब सीमा जी की मां को बहुत खराब लगा। हालांकि वो चुप ही रही। उन्होंने सीमा जी से कहा कि इसकी तरफ़ बिल्कुल भी मत देखना। जबकी उसी वक्त सीमा जी के मन में ये ख्याल चल रहा था कि फ़िल्मिस्तान स्टूडियो तक पहुंचा कैसे जाएगा। अगर इस लड़के से फ़िल्मिस्तान का पता पूछ लिया जाए तो कुछ गलत होगा? सीमा जी को ये तो मालूम था कि फ़िल्मिस्तान पहुंचने के लिए उन्हें गोरेगांव स्टेशन पर उतरना है। मगर वहां से कहां जाना है, उन्हें मालूम नहीं था।
कुछ देर बाद गोरेगांव स्टेशन आ गया। सीमा जी और उनकी मां गोरेगांव स्टेशन पर उतर गए। वो लड़का भी उसी स्टेशन पर उतरा। जब वो लड़का गोरेगांव स्टेशन पर उतरा तो सीमा जी को अंदाज़ा हो गया कि ज़रूर ये लड़का भी फ़िल्मिस्तान स्टूडियो ही जा रहा है। सीमा जी और उनकी मां उस लड़के के पीछे-पीछे चल दी। कुछ आगे चलने के बाद जब उस लड़के ने देखा कि ये दोनों मां-बेटियां भी उसके पीछे-पीछे आ रही हैं तो उसे भी यकीन हो गया कि हो ना हो, ये दोनों भी फ़िल्मिस्तान ही जा रही हैं।
उस लड़के ने सोचा कि अगर वाकई में ये लड़की फ़िल्मिस्तान जा रही है तो वो इससे दोस्ती ज़रूर करेंगे। उस लड़के को लग रहा था कि ये लड़की(सीमा देव) फ़िल्मिस्तान में आर्टिस्ट होगी। उसे नहीं पता था कि सीमा देव जी काम की उम्मीद में फ़िल्मिस्तान जा रही हैं। यहां आपको ये बताना भी ज़रूरी है साथियों की वो लड़का उस वक्त तक कुछ मराठी फ़िल्मों में हीरो व विलेन के तौर पर काम कर चुका था। उस दिन वो लड़का फ़िल्मिस्तान स्टूडियो में एक्टर की नौकरी के लिए जा रहा था।
उस लड़के के पीछे-पीछे चलते हुए सीमा देव और उनकी मां आखिरकार फ़िल्मिस्तान पहुंच गए। वो लड़का फ़िल्मिस्तान के अधिकारियों से मिला, और उसे फ़िल्मिस्तान में सात सौ रुपए महीना की नौकरी मिल गई। जबकी उससे पहले वो लड़का 1200 रुपए में पूरी फ़िल्म में काम कर रहा था। फ़िल्मिस्तान वालों ने उस लड़के को रहना-खाना भी मुफ़्त देने का वादा किया। इस तरह उस दिन उस लड़के को फ़िल्मिस्तान में एक जैकपॉट डील मिल गई।
वो लड़का जब रिसेप्शन पर कॉन्ट्रैक्ट साइन करने आया तो उसने देखा कि सुबह ट्रेन में जिस लड़की की मां से उसकी बहस हुई थी, वो लड़की भी कॉन्ट्रैक्ट साइन कर रही है। उस लड़के ने मान लिया कि ये लड़की(सीमा देव जी) तो उसके लिए शुभ है। इस लड़की के मिलने से ही उसे इतना बढ़िया कॉन्ट्रैक्ट मिला है। समय बीता, फ़िल्मिस्तान स्टूडियो में काम करते हुए सीमा जी और उस लड़के के बीच बढ़िया दोस्ती हो गई। दोनों ने कुछ फ़िल्मों में साथ काम भी किया।
एक फ़िल्म, जिसमें सीमा जी ने उस लड़के के साथ काम किया था, उसमें वो लड़का विलेन बना था। एक सीन उस फ़िल्म का कुछ यूं था कि वो लड़का सीमा जी को छेड़ता है। और सीमा जी उसे एक ज़ोरदार थप्पड़ मारती हैं। लेकिन वो सीन सही से शूट नहीं हो पा रहा था। लगभग छह टेक हो चुके थे। यानि सीमा जी उस लड़के को छह थप्पड़ मार चुकी थी। इस पर डायरेक्टर सीमा जी पर भड़क गया और उसने सीमा जी को सबके सामने डांटना शुरू कर दिया।
आखिरकार तब सातवां टेक लिया गया और सीमा जी ने उस टेक में उस लड़के के गाल पर इतना ज़ोर का थप्पड़ मारा कि वो लड़का गिरते-गिरते बचा। सीमा जी का वो थप्पड़ देख डायरेक्टर तो बड़ा खुश हुआ। लेकिन वो लड़का दंग रह गया। और सीमा जी को दुख हो रहा था कि उन्होंने कितनी ज़ोर से उसे थप्पड़ मार दिया है।। थोड़ी देर बाद वो लड़का खुद को संभालते हुए सीमा जी के पास आया और बोला,”इन सात थप्पड़ों का बदला मैं तुमसे ज़रूर लूंगा। मैं तुमसे सात फेरे लूंगा।”
यानि उस दिन उस लड़के ने सीमा जी को शादी के लिए प्रपोज़ कर दिया। और चूंकि अब तक सीमा जी भी उस लड़के को पसंद करने लगी थी तो उन्होंने भी उस लड़के के प्रपोज़ल को स्वीकार कर लिया। फिर बिना किसी परेशानी के सीमा जी और उस लड़के की शादी हो गई। जानते हैं वो लड़का कौन था? वो थे रमेश देव। रमेश देव जी से शादी करके ही इनका नाम सीमा देव हुआ था। वैसे सीमा इनका फ़िल्मी नाम था। इनका वास्तविक नाम नलिनी सराफ़ था। शादी के बाद भी सीमा देव जी व रमेश देव जी ने कई फ़िल्मों में संग काम किया था। इनमें हिंदी व मराठी भाषा की फ़िल्में थी। सीमा देव जी को किस्सा टीवी का नमन।
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साभार- https://www.facebook.com/kissatvreal से

