1964 में, 19 साल का एक ब्रिटिश नौजवान ब्रायन रॉब्सन, जो ऑस्ट्रेलिया में रहता था वो अपने देश ब्रिटेन वापस लौटन चाहता था, वापसी के लिए उसने एक साहसी और बेहद खतरनाक योजना बनाई। उसके पास हवाई जहाज का टिकट खरीदने के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए उसने एक अनोखा हल निकाला उसने खुद को एक लकड़ी के बक्से बंद कर डाक के जरिए घर भेजने का प्लान बनैया। इस काम में उसके दो दोस्तों ने उसकी मदद की उन्होने लकड़ी का एक बड़ा बक्सा बनाया, जिसमें वह फिट हो सके, उसमें जरूरी चीजें रखीं।
एक तकिया, एक छोटा सूटकेस, एक टॉर्च, एक पानी की बोतल, और एक डिब्बा। योजना के अनुसार उसे Qantas की फ्लाइट में लगेज के रूप में सवारी करना था, 36 घंटे की इस यात्रा में उसने अंधेरे और खामोशी को सहन करते हुए यात्रा की।
शुरुआत में योजना काम करती दिखी। रॉब्सन को एक फ्लाइट में लोड कर दिया गया, लेकिन रूट में गलती के कारण वो बॉक्स लंदन के बजाय लॉस एंजिल्स पहुंच गया। लॉंच एंजिल्स में वो बक्सा को कई दिनों तक एक गोदाम में पड़ा रहा। वो जगह बेहद तंग थी, जहां ऑक्सिजन की कमी थी बिना भोजन, ऑक्सीजन के रॉब्सन को बहुत तकलीफ होने लगी।
हाइपोथर्मिया ने उसे जकड़ लिया, पानी की कमी ने उसे कमजोर कर दिया, और असहनीय खामोशी व अंधेरे ने उसकी इच्छाशक्ति को लगभग तोड़ दिया। घंटों तक इस तरह बंद रहने के कारण बेहोशी छाने लगी, ये पक्का नहीं थी की कब उसे मुक्ती मिलेगी। आखिर में गोदाम कर्मचारियों ने बक्सा खोला, तो उन्होंने एक कांपते, लगभग बेहोश एक युवक को पाय वो बहुत हैरान और डरा हुआ था और लेकिन वो भाग्यशाली था वो अभी ज़िंदा था।
पूछताछ के बाद, उन्होंने उसे सख्त चेतावनी के साथ छोड़ दिया गया यह कहानी दुनिया भर में सुर्खियों में छा गई और खासकर लॉस एंजिल्स में तेजी से फैली गई, जहां “बक्से में लड़के” की अजीब कहानी ने जनता को मंत्रमुग्ध कर दिया। आश्चर्यजनक रूप से, रॉब्सन बच गया और अंतत घर लौट आया। वर्षों बाद, उसने अपनी इस रोमांचक यात्रा को द क्रेट एस्केप नामक किताब में बयान किया, जो 20वीं सदी की सबसे विचित्र यात्रा कहानियों में से एक का प्रत्यक्ष विवरण है।
साभार – https://www.facebook.com/share/1DPmDppvrg/ से

