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जानलेवा है पेरासिटामल

ज्यादातर लोग आम बीमारियों पर दर्द निवारक दवाएं लेते हैं, जिनमें सामान्य बुखार से लेकर तेज बुखार, बदनदर्द, हरारत की बीमारी को ठीक करने के लिए पैरासीटामॉल का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हाल ही में हुए एक शोध से पता चला है कि पैरासीटामॉल का अत्यधिक सेवन दिल और लिबर पर विपरीत प्रभाव डालता है, जिससे अधिकांश लोगों का लीवर खराब हो जाता है।

 

 

इसके लगातार सेवन से काक्स 2 एन्जाइम को शरीर में काम करने से रोकता है, जो सीधा लीवर पर विपरीत असर डालता है।  एक जानकारी के अनुसार ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने लगभग छह लाख से ज्यादा मरीजों पर परीक्षण शोध कर निष्कर्ष निकला है कि हृदयघात के साथ साथ रक्तस्त्रव व उदर में छाले भी इससे संभव हैं। नियमित रूप से लंबे समय तक पैरासीटामॉल सेवन से 60 प्रतिशत से ज्यादा मरीज आकस्मिक मौत के शिकार होते हैं।

 

पैरासीटामॉल की टेबलेट अत्यधिक मात्र में नहीं लेना चाहिए। इससे इनका सीधा असर लिबर पर होता है, इसलिए बिना चिकित्सक की अनुमति के इस तरह की पेनकिलर नहीं लेना चाहिए।

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मंत्रीजी को लूट लिया चलती गाड़ी में

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मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया और उनकी पत्नी सुधा मलैया के साथ हथियारबंद बदमाशों ने ट्रेन में लूटपाट की। मथुरा के कोसीकला के पास गुरुवार तड़के बदमाशों ने बंदूक की नोक पर दक्षिण एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में इस घटना को अंजाम दिया। मलैया इस बारे में रेल मंत्री सुरेश प्रभु से बात करने के लिए लोकसभा पहुंच गए। निजामुद्दीन जीआरपी थाने में घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

 

जयंत मलैया ने बताया कि मथुरा स्टेशन के पास कुछ हथियारबंद नकाबपोश उनके कोच में घुसे। उन्होंने समूचे कोच में लूटपाट की। मुझे जान से मारने की धमकी दे कर हीरे की अंगूठी, पत्नी के जेवरात व करीब 56 हजार रुपए नकद छीन लिए। बाद में जंजीर खींच कर भाग गए।

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मुंबई के म्यूनिसिपल स्कूलों में भगवत गीता

मुंबई के सभी म्यूनिसिपल स्कूलों में भगवत गीता पढ़ाई जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि बच्चे लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें और उन्हें आध्यात्मिकता का ज्ञान हो। म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई के डिप्टी कमिश्नर रामदास भाऊसाहब ने कहा कि हम भगवत गीता की शिक्षा बच्चों को देंगे ताकि वे आत्मनिर्भर और फैसले लेने में मजबूत बन सकें।

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रेल्वे से ज्यादा तेज है चोरी का सॉफ्टवेअर

आम आदमी सुबह के समय वयस्त रूटों पर ट्रेन के टिकट क्यों नहीं बुक करावा पाते थे? इस बात का खुलासा रेलवे ने कर दिया है। रेलवे की मानें तो अब सुबह के समय व्यस्तम रूटों के ट्रेन ‌टिकट बुक करने में लोगों को ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।

 

इंडियन एक्सप्रेस की स्टोरी के मुताबिक रेलवे ने वह कारण पकड़ लिया है जिसकी वजह से हजारों लोग सुबह टिकट नहीं बुक करवा पाते थे। टिकट बुक करवाने वाले लोगों ने ‌शिकायत की थी कि सुबह आठ बजे काउंटर पर पहुंचने के बाद भी उनके टिकट बुक नहीं होते हैं।

 

रेलवे ने आंतरिक जांच करने के बाद यह बात पकड़ी कि रेलवे की ‌टिकट बुकिंग सेवा शुरू होने के एक मिनट के भीतर ही टिकट दलाल 4,000 टिकटों पर अपना कब्जा जमा लेते हैं। आंतरिक जांच में पता चला कि दलाल लोग पैसेंजर रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर का फायदा उठा रहे थे। पैसेंजर रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर के जरिए एक दिन पहले ही‌ किसी और ट्रेन में टिकट बुक करवाके अपनी जानकारी दे देते थे।

यह जानकारी सिस्टम में फीड हो जाती थी। अगले दिन टिकट बुक करवाते समय दलाल सिर्फ अपनी ट्रेन की जानकारी देते थे और उनकी सारी जानकारी खुद-ब-खुद अपडेट हो जाती थी। इसके बाद कुछ ही सेकेंड में उनका टिकट बुक हो जाता था।

 

इस सुविधा का फायदा उठाकर दलाल राजधानी, दुरंतो और अन्य लंबी दूरी की बढ़िया ट्रेन में टिकट बुक करवा लेते थे। उनको टिकट बुक करवाने में कुछ ही सेकेंड लगते थे, क्योंकि उनकी जानकारी पहले से ही सिस्टम में फीड होती थी।

 

रेलवे बोर्ड के सदस्य (ट्रैफिक) अजय शुक्ला ने बताया कि अब इस सुविधा को शुरूआती एक घंटे के लिए बंद कर दिया गया है। रेलवे ने यह जांच तब शुरू की जब उसे पता चला कि इस तरह से बहुत ज्यादा टिकट बुक किए जा रहे हैं।

 

रेल मंत्रालय ने इशारा किया है कि इस तरह के घोटाले को बुकिंग क्लर्क और अंदर के लोगों की मिलीभगत से किया जाता था। मंत्रालय ने सुनिश्चित किया है कि अब ऐसे लोगों को पकड़ा जाएगा।

 

साभार- अमर उजाला से

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शुक्रवार का प्रकाशन फिर शुरु होगा

शुक्रवार नाम की पत्रिका आगामी मई माह से बाजार में आ जाएगी। इसके नए प्रकाशक कलम मीडिया प्राइवेट लिमिटेड हैं और संपादक हैं अंबरीश कुमार। इसे र सिकंदराबाद के व्यवसायी जेबी सिंह ने खरीद लिया है। ।  अबी ये पत्रिका पाक्षिक होगी और कुछ समय बाद साप्ताहिक हो जाएगी।

इसके संपादक अंबरीश कुमार पच्चीस साल तक एक्सप्रेस समूह से जुड़े रहे हैं। उन्होंने जनसत्ता और इंडियन एक्सप्रेस दोनों अखबारों में काम किया है। जनसत्ता का छतीसगढ़ संस्करण उन्होंने ही लॉन्च किया था। पत्रिका में हिंदी पट्टी के साथ पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत की राजनैतिक कवरेज के साथ जन आंदोलन, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति आदि पर खास जोर रहेगा। बिहार के चुनाव की विशेष कवरेज की तैयारी भी की जा रही है।

अंबरीश कुमार के अनुसार, पत्रिका से विभिन्न अंचलों से न सिर्फ पत्रकारों, बल्कि सामाजिक, राजनैतिक कार्यकर्त्तोओं, पर्यावरणविदों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, अधिकारियों, किसानों और लेखकों को जोड़ा जा रहा है। समाज तेजी से बदल रहा है और पत्र पत्रिकाओं के परंपरागत ढांचे टूट रहे हैं। हम इस पत्रिका के लिए सभी के सुझावों को आमंत्रित करते हैं। सुझाव उनकी ईमेल आईडी ambrish2000kumar@gmail.com पर भेज सकते हैं।

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कांस्य पदक विजेता प्रतीति व्यास का सम्मान

उदयपुर 19 मार्च , राष्ट्रीय अंतर विश्व विद्यालयी कयाकिंग एवं केनोइंग प्रतियोगिता में  काँस्य पदक विजेता उदयपुर शहर निवासी प्रतीति व्यास का  राजस्थान कयाकिंग एवं केनोइंग संघ द्वारा फतह सागर की पाल पर एक भव्य समारोह में शहर की पूर्व मेयर रजनी डांगी,महाराज जयसिंह डूंगरपुर एवं डॉ मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय एस  मेहता द्वारा सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर रजनी डांगी ने कहा कि शहर की प्रतिभाये जब आगे आती है तो इससे शहर का नाम विश्व पटल पर स्मरण किया जाता है।डांगी ने कहा की कयाकिंग में राजस्थान के इतिहास में यह पहला पदक है।

 कयाकिंग व केनोइंग संघ के उपाध्यक्ष चन्द्र गुप्त सिंह ने कहा  महज दो वर्ष पूर्व प्रारम्भ की गयी कयाकिंग में राष्ट्रिय स्तर पर पदक प्राप्त करना शहर के लिए गौरव पूर्ण उपलब्धि है।

 फतेहसागर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतीति ने विस्वास दिलाया कि आनेवाले समय में वे स्वर्ण पदक की उम्मीद अपनी मेहनत  से करेंगी।

 इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिलीप सिंह का  कयाकिंग खेल को उदयपुर लाने एवं स्थापित करने व प्रशिक्षण की सुविधाये झुटाने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए सफा बांध कर सम्मान किया गया। टीम के कोच कुलदीपक पालीवाल का भी माल्यार्पण कर अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर प्रतीति के माता पिता को भी सम्मानित लिया गया।

झील मित्र संस्थान के तेज शंकर पालीवाल ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि  उदयपुर में वाटर स्पोर्ट्स की  सम्भावनाये है ।  कार्यक्रम का संचालन  नन्द किशोर शर्मा ने किया।

 

प्रेषक

चन्द्रगुप्त सिंह चौहान

राजस्थान कयाकिंग एसोसिएसन , उदयपुर

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पढ़ाने के साथ पढ़ने की लगन की मिसाल डॉ.जैन ने हासिल की नवीं उपाधि

राजनांदगाँव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के राष्ट्रपति सम्मानित प्रोफ़ेसर डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने हिंदी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, लोक प्रशासन जैसे पांच विषयों में एम.ए. और विज्ञान व विधि स्नातक और पीएचडी मिलाकर पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर से कुल आठ उपाधियाँ हासिल करने के अलावा सूचना के अधिकार पर भी कार्मिक, पेंशन एवं जन शिकायत निवारण विभाग, भारत सरकार का विशेष कोर्स पूर्ण कर लिया है। उच्च शिक्षा की राजकीय सेवा में लोक सेवा आयोग से चयनित होकर लगभग दो दशक पूरे कर रहे डॉ .जैन ने पढने-लिखने और बोलने की कला में अपनी गहरी पकड़ और दिलचस्पी के चलते यह उपलब्धि  हासिल कर एक मिसाल कायम की है। बहुआयामी गतिविधियों में सतत रचनात्मक सहभागिता करते हुए यह गौरव अर्जित कर डॉ.जैन नई पीढ़ी और व्यावसायिकों के लिए प्रेरक लगन का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

उल्लेखनीय है कि दिग्विजय कालेज के हिन्दी विभाग में अध्यापन कर रहे डॉ .जैन ने ज्यादातर उपाधियाँ अपनी मातृ संस्था दिग्विजय कालेज में इससे पहले सेवारत रहकर अथवा स्वाध्याय  के माध्यम से प्राप्त कीं। वे सबसे पहले अपने विद्यार्थी जीवन में नियमित छात्र के रूप में दिग्विजय कालेज से ही गणित स्नातक हुए और बाद में पांच विषय में स्नातकोत्तर कोर्स किया। यहीं रहकर डॉ .जैन ने आचार्य विद्यासागर जी महाराज के भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित बहुचर्चित व कालजयी महाकाव्य मूकमाटी पर शोध कर डाक्टर आफ फिलासफी की उपाधि अर्जित की और उसका यश देश के कोने-कोने तक पहुंचाने का सिलसिला आज भी जारी रखा है।  

डॉ .जैन का मत है कि आज का दौर बहुविषयक, बहु अनुशासनिक ( मल्टी डिस्प्लीनरी ) ज्ञान और अनुभव की मांग करता है। अब प्राध्यापक का किसी एक विषय के ज्ञान तक सीमित रहना न तो उचित है न ही उपयोगी। इसके आलावा भाषाओं के साथ-साथ प्रभावी सम्प्रेषण क्षमता और विविध विषयों की जानकारी का संगम यदि हो जाये तो शिक्षण कर्म अधिक रोचक और प्रभावी बन सकता है। इससे शिक्षक के व्यक्तित्व के साथ-साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का भी विकास होता है। डॉ .जैन ने आगे भी पढने की पक्की धुन पर और भी कुछ नया कर दिखाने की मंशा ज़ाहिर की है।
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राजनांदगाँव के दिग्विजय कालेज में यादगार पाक-कला कार्यशाला

शैफ सुभाष अग्रवाल ने व्यंजन-विधि के साथ बतायीं किफायत की बारीकियाँ

राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय दिग्विजय महाविद्यालय में पाक-पला विशेषज्ञ शैफ सुभाष अग्रवाल ने विविध व्यंजनों को बनाने की तरकीब के साथ-साथ किफायत का पथ भी बताया। महाविद्यालय की महिला सशक्तीकरण और विकास समिति के तत्वावधान में डॉ.पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सभागार में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों ने पाक-कला की महत्ता समझी और उसकी बारीकियों से रूबरू हुए। कार्यशाला की विशेषता यह भी रही कि व्यंजनों को पूरी स्वच्छता और सावधानी के साथ स्वादिष्ट बनाने के शैफ अग्रवाल के अंदाज़ ने विद्यार्थियों के साथ-साथ कालेज स्टाफ को भी लाभान्वित किया।

कार्यशाला में प्रमुख अतिथि लायंस क्लब राजनांदगांव सिटी की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता कोठारी, तेरापंथ महिला मंडल की सचिव श्रीमती ज्योति कोठारी ने आयोजन को अपनी शुभकामनाएं देते हुए अपने-अपने अनुभव के आधार पर पाक-कला के जरूरी टिप्स भी दिए। इससे श्रोताओं को नई दृष्टि, नई जानकारी मिली। अतिथियों ने माँ अन्नपूर्णा का पूजन व दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम का संयोजन कर रहीं प्रो किरणलता दामले ने प्रारम्भ में कार्यशाला की आवश्यकता प्रतिपादित कर उसकी रूपरेखा बताई और शैफ सुभाष अग्रवाल का परिचय दिया। प्राचार्य डॉ.आर.एन.सिंह, प्राध्यापक डॉ.चन्द्रकुमार जैन, छात्रसंघ सचिव कु.लाभिका टांक सहित समिति के सभी सदस्यों ने शैफ सुभाष अग्रवाल का शाल-श्रीफल भेंट कर भावपूर्ण सम्मान किया।

गौरतलब है कि शैफ सुभाष अग्रवाल ने पाक-कला के साथ किफायत पर जोर दिया। इसकी मिसालें पेश करते हुए उन्होंने तुरत-फुरत व्यंजन जैसे पनीर चिल्ली, मन्चूरियम, केक, पेस्ट्री, डेरी चॉकलेट, जालीदार समोसा जैसे व्यंजन बहुत काम खर्च में बनाने की कला रोचक ढंग से सिखायी। समिति ने अंत में सबका आभार माना।
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बाप छोड़कर भागा, ट्टविटर ने बच्चों को माँ से मिलवाया

मंगलवार की शाम एक शख्स अपने तीन छोटे बच्चों को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर छोड़कर चला गया। प्लैटफॉर्म पर लगातार रोए जा रहे इन बच्चों की मदद की ट्विटर ने और इन्हें इनकी मां तक पहुंचा दिया। अब पुलिस जांच कर रही है कि इन बच्चों के बाप ऐसी हरकत क्यों की।

बीती शाम नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लैटफॉर्म नंबर 16 पर 10 साल कम उम्र के तीन बच्चे लगातार रोए जा रहे थे। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक भीड़ में किसी ने इस बारे में ट्वीट किया और मदद मांगी। जल्द ही यह ट्वीट ट्रेंड करने लगा। जानकारी पाकर पुलिस ने बच्चों की तलाश शुरू कर दी। 30 मिनट तक तो पुलिस को निराशा हाथ लगी, लेकिन बाद में ये बच्चे प्लैटफॉर्म नंबर 1 पर मिल गए।

 

7 साल की रुमाना, 4 साल की सान्या और 5 साल का राजा बेहद घबराए हुए थे और रो रहे थे। वे इतने डरे हुए थे कि यह तक नहीं बता पा रहे थे कि अपने घर से यहां कैसे पहुंचे। उन्हें समझाने और खाने को कुछ चीज़ें देकर बहलाने के बाद पुलिस ने पाया कि शाम को उनके पिता ने उन्हें यहां लाकर छोड़ दिया था। बच्चों ने बताया कि उनसे पिता ने उनसे कहा था, 'जब तक तुम्हारी मां तुम्हें न ढूंढ ले, यहां से हिलना मत।'

बच्चों ने पुलिस को बताया कि वे कहां रहते हैं। जब पुलिस ने स्टेशन से तीन किलोमीटर दूर नबी करीम इलाके में एक घर का दरवाजा खटखटाया तो पाया कि बच्चों की मां सो रही थी। पुलिस ने कहा, 'तुम आराम से सो रही हो और तुम्हें यह तक नहीं पता कि तुम्हारे बच्चे गायब हो गए हैं?'

37 साल की तबस्सुम ने बताया कि वह काम से घर लौटी है और बच्चे नहीं मिले तो इधर-उधर पता किया और फिर सो गई। उसने कहा कि मैंने इसकी रिपोर्ट नहीं की, यह मेरी गलती है। तबस्सुम 7 बच्चों की मां है और अपने पति से अलग रहती है।

तबस्सुम ने बताया कि जब वह काम से आती है तो अक्सर बच्चे घर पर नहीं मिलते हैं। कानपुर में रहने वाला उसका पति बिन बताए उन्हें ले जाता है और वापस छोड़ जाता है। तबस्सुम के 4 बच्चे उसके पति के साथ ही रहते हैं। पिछले महीने ही वह 3 बच्चों को साथ लेकर दिल्ली आ गई थी।

रेलवे प्रॉटेक्शन फोर्स ने तबस्सुम का बयान दर्ज करके बच्चों को उसके हवाले कर दिया है। पुलिस मामले की जांच जारी रखेगी। बच्चों के पिता को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

साभार- नवभारत टाईम्स से

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आईआरसीटीसी को फ्लिपकार्ट की तर्ज पर बनाया जाएगा

रेल विभाग  आईआरसीटीसी को बुलंदी पर ले जाने के लिए  सरकार का सरकार चाहती है कि आईआरसीटीसी फ्लिपकार्ट का अनुसरण करे। इसलिए देश के बड़े ई-कॉमर्स पोर्टलों में से एक को चलाने वाले करने वाले इंडियन रेलवे कैटरिंग ऐंड टूरिजम कॉर्पोरेशन ने अपना मूल्यांकन करने और इसे बढ़ाने में मदद करने के लिए एक कंसल्टेंट की सेवा लेने की योजना बनाई है। कंपनी के इस कदम को पब्लिक लिस्टिंग की दिशा में पहले कदम के रूप में देखा जा रहा है। चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ए.के.मनोचा ने बताया, 'हम साइट से अपनी ग्रोथ बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। हमें सरकार से फ्लिपकार्ट की तरह ग्रोथ करने के लिए कहा गया है।'

नाम न छापने की शर्त पर एक सूत्र ने बताया, 'सरकार रेलवे की संपत्तियों को कमाऊ संपत्ति में बदलना चाहती है। आईआरसीटीसी ने कंसल्टेंसियों से बात करना शुरू कर दिया है। अभी यह सिर्फ मूल्यांकन है और कंपनी देखना चाहती है कि आईपीओ से कितनी कमाई हो सकती है। अभी इसने आईपीओ मॉडल को नहीं अपनाया है, सिर्फ आंकड़ा जमा कर रही है।' मनोचा ने विशेष रूप से
एमपी मॉल के वित्त निदेशक ने ईटी को बताया, 'इंडियन रेलवे की इस यूनिट को उम्मीद है कि ई-टिकटिंग में ग्रोथ और पिछले साल कई नई ट्रेनें चलाने के परिप्रेक्ष्य में 31 मार्च को समाप्त हो रहे साल में 1,000 करोड़ के राजस्व में 85 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो।' मनोचा ने बताया कि नई सर्विसेज और ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू की मदद से अगले वित्तीय वर्ष में लाभ को 35 फीसदी बढ़कर 115 करोड़ रुपये होने की उम्मीद की जाती है। आईआरसीटीसी 2025 तक 10,000 करोड़ कमाई का लक्ष्य रख रही है। अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों की तुलना में आईआरसीटीसी की स्थिति भिन्न है। अपने ऑपरेशन के 6 सालों बाद नुकसान होने के बावजूद फ्लिपकार्ट की वैल्यू 11 बिलियन डॉलर यानी करीब 700 अरब रुपये है। इसके बावजूद आईआरसीटीसी की सही वैल्यूएशन नहीं हो रही है।

सूत्रों ने ईटी को बताया कि आईआरसीटीसी के लिए ई-टिकट सेगमेंट बिजनस का अहम हिस्सा है। आईआरसीटीसी हर साल 20,000 करोड़ रुपये की ई-टिकट बेचती है जो फ्लिपकार्ड के करीब 25,000 करोड़ रुपये के ग्रॉस मर्चैंडाइज सेल्स से कम है। आईआरसीटीसी बेची गई हर टिकट पर कमिशन अर्जित करता है जो इसके रेवेन्यू का 30 फीसदी और लाभ का 60 फीसदी है। अन्य सेगमेंट्स कैटरिंग और टूर पैकेजों से 30 फीसदी रेवेन्यू प्राप्त होता है, जिनका वैल्यूएशन बहुत ही कम होता है।

यात्रा डॉट कॉम के एक निवेशक और आईडीजी वेंचर्स के संस्थापक एवं चेयरमैन सुधीर सेठी ने बताया कि आईआरसीटीसी के रेवेन्यू और वैल्यूएशन कम होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि इसका सिर्फ एक ही ग्राहक है इंडियन रेलवे। ग्राहकों का दायरा यदि बढ़ाया जाए तो कंपनी के रेवेन्यू पर असर पड़ेगा। इसलिए अब आईआरसीटीसी ने अपनी रणनीति में अपनी वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ाने और ऐडवर्टाइजरों को स्पेस बेचकर कमाई बढ़ाने को लक्ष्य को शामिल किया है।

साभार- इकॉनामिक टाईम्स से

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