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महुआ माजी, वीरेन्द्र सारंग व मलय जैन के उपन्यासों का लोकार्पण

विश्व पुस्तक मेले का छठा दिन पुस्तक लोकार्पणों के नाम रहा। राजकमल प्रकाशन समूह के स्टॉल (237-56) में तीन किताबों महुआ माजी की ‘मरंग गोड़ा निलकंठ हुआ’, मलय जैन की ‘ढाक के तीन पात’  व वीरेन्द्र सारंग का उपन्यास ‘हाता रहीम’ का लोकार्पण किया गया।

महुआ माजी की किताब ‘मरंग गोड़ा निलकंठ हुआ’ के लोकार्पण के अवसर पर बोलते हुए  वरिष्ठ कवि मंगलेश डबराल ने कहा कि, महुआ माजी के इस उपन्यास का पेपरबैक में आना खुशी की बात है। पेपर बैक से ही साहित्य का भविष्य है। इस उपन्यास के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस उपन्यास का समाजशास्त्रीय महत्व है। वरिष्ठ पत्रकार रामशरण जोशी ने मंगलेश जी की बातों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, आमतौर पर आदिवासी विमर्श को सतही ढंग से देखा जा रहा था, लेकिन अब बदलाव आया है। आदिवासी समस्या लेखक समझने लगे हैं। कवि संपादक लीलाधर मंडलोई ने कहा कि हमलोगों को भी एक खास तरीके की लिटरेसी की जरूरत है। इस किताब से मैं भी लिटरेट हुआ हूं।  आलोचक वीरेन्द्र यादव  ने इस मौके पर कहा कि, हिन्दी में इस विषय पर पहले उपन्यास नहीं लिखा गया था। इसका समाजशास्त्रीय महत्व तो है ही साथ में एक उपन्यास के रूप में भी महत्व है। विकास बनाम विनाश का प्रश्न एक साथ उठाया गया है। यह पारंपरिक कसौटी से इतर आस्वादपरक मनःस्थिति से मुक्त होकर नई दिशाओं का अन्वेषक है। 

कथाकार असगर वजाहत ने कहा कि, यह किताब हिन्दी साहित्य पर लगे उस आरोप का खंडन करती है जिसमें कहा गया है कि हिन्दी साहित्य मध्यमवर्ग तक ही सीमित रहा है। लेखक संपादक प्रियदर्शन ने कहा कि यह उपन्यास बहुत ही शोध कर के लिखी गयी है। इस किताब के बारे में बताते हुए उपन्यासकार महुआ माजी ने कहा कि, इस उपन्यास में मैंने विकिरण, प्रदूषण व विस्थापन से जूझते आदिवासियों की गाथा को पेश किया है। यह उपन्यास तथाकथित सभ्य देशों द्वारा किए जाने वाले सामूहिक नरसंहार के विरूद्ध निर्मित एक नई मुक्तिवाहिनी की कथा है। वास्तविक अर्थों में यह उपन्यास इक्कीसवीं सदी का और ‘आज का’ उपन्यास है।

राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित मलय जैन की किताब ‘ढाक के तीन पात’ का लोकार्पण के अवसर पर बोलते हुए आलोचक वीरेन्द्र यादव ने कहा कि यह उपन्यास गांव, पुलिस, अध्यापक की पृष्भूमि लिए हुए 21 सदी में तेजी से भागते भारत और पिछड़ते भारत के अंतर्द्वंद्व की कथा है। रोचक मुहावरे में सामाजिक यथार्थ पर लिखा हुआ उपन्यास है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार रामशरण जोशी ने कहा कि मलय जी का यह उपन्यास व्यंग प्रधान उपन्यास है। जब श्रीलाल शुक्ल का उपन्यास ‘रागदरबारी’ 1968 में आया था तब उसने ग्रामीण भारत के यथार्थ को झकझोरा था। उसी कड़ी में यह भी उपन्यास है। मलय जी ने नई जटिलताओं को इस उपन्यास में उठाया है। लेखक मलय जैन ने कहा कि यह उपन्यास नए संदर्भों में गांव व सरकारी समस्याओं को समझने का मौका देगा।

वीरेन्द्र सारंग का उपन्यास ‘हाता रहीम’ का लोकार्पण केदारनाथ सिंह, मदन कश्यप, रंजीत वर्मा, हृषिकेश सुलभ, लीलाधर मंडलोई, कृष्ण कल्पित, पंकज चतुर्वेदी, महुआ माजी व अजंतादेव की उपस्थिति में हुआ। इस मौके पर केदारनाथ सिंह ने उपन्यास की सफलता की कामना की। स्टॉल पर निरंतर बढ़ रही पाठकों के भीड़ के बीच स्टॉल पर दिन भर स्थापित व नवोदित लेखकों का आना-जाना बना रहा। राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने सदाबहार पुस्तकों के साथ-साथ नई पुस्तकों के लिए भी पाठकों का रूझान देखकर प्रसन्नता व्यक्त की।

आशुतोष कुमार सिंह
साहित्य प्रचार अधिकारी
राजकमल प्रकाशन समूह
मो.9891228151
ईमेल- publicity@rajkamalprakashan.com

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बेटियों के सुखद भविष्य के लिए डाकघरों में आरंभ हुई सुकन्या समृद्धि योजना

मिलेगा 9.1 प्रतिशत ब्याज, बेटियों की उच्च शिक्षा और उनके विवाह में होगी सुविधा

बेटियांँ पढ़ेंगी तो बेटियांँ बढ़ेंगी। बेटियों की समृद्धि और खुशहाली में ही समाज का भविष्य टिका हुआ है। इसी के मद्देनजर बेटियों की उच्च शिक्षा और उनके विवाह के लिए डाकघरों में सुकन्या समृद्धि योजना आरंभ की गयी है। इस संबंध में जानाकारी देते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत बेटी के जन्म से लेकर 10 वर्ष की आयु तक कभी भी किसी भी डाकघर में यह खाता खोला जा सकता है। इसमें एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 1,000 और अधिकतम डेढ़ लाख रूपये जमा किये जा सकते हैं । इस पर वर्तमान में 9.1 प्रतिशत ब्याज देय है और जमा धनराशि में आयकर छूट का भी प्राविधान है। इस खाते को देशभर में किसी भी डाकघर में स्थानांतरित किया जा सकता है।

डाक निदेशक श्री यादव ने बताया कि सुकन्या समृद्धि योजना की सुविधा केवल 2 बेटियों के लिए ही मिलेगी। लेकिन, पहली बेटी के बाद यदि जुड़वा बेटियाँ पैदा होती है तो तीसरी बेटी को भी उसका लाभ मिलेगा। यह खाता बालिका के अभिभावकों द्वारा खोला या संचालित किया जायेगा। वे बालिका के दस साल का होने तक खाते का परिचालन करेंगे। 10 साल की आयु पूरी होने के बाद बालिका खुद खाते का परिचालन कर सकेगी। इस योजना में खाता खोलने से 14 वर्ष तक धन जमा कराना होगा। यदि किसी वित्तीय वर्ष खाते में किसी कारणवश न्यूनतम राशि जमा नहीं हो पाती है तो दंड के रूप में पचास रूपये जमा कर खाते को पुनः संचालित किया जा सकता है।  

 निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि बालिका की उच्चतर शिक्षा और विवाह आदि आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसमें से 50 फीसदी राशि बालिका के 18 वर्ष पूरा होने पर निकाली जा सकती है। खाते की परिपक्वता अवधि उसके खोले जाने से 21 वर्ष पूरे होने या बालिका के विवाह के वक्त जो भी पहले लागू हो तक होगी, बशर्ते बालिका की आयु न्यूनतम 18 वर्ष हो चुकी हो। खाताधारक की मृत्यु होने पर इसे तत्काल बंद कर दिया जाएगा और खाते में रखी राशि का खाता बंद होने के पिछले महीने तक के ब्याज के साथ अभिभावक को भुगतान कर दिया जाएगा।

 प्रवर डाक अधीक्षक, इलाहाबाद मंडल श्री रहमतउल्लाह ने बताया कि खाता खोलने के लिए बालिका का जन्म प्रमाणपत्र, अभिभावक का फोटोग्राफ, जमाकर्ता की पहचान और आवासीय प्रमाण से संबंधित दस्तावेज देना अनिवार्य है।

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‘सार्थक’ की चौथी किताब ज़ेड प्लस हुई लोकार्पित

युवाओं के बीच ‘लप्रेक’ के चढ़े सुरूर के बीच ‘सार्थक’ ने आज विश्व पुस्तक मेले में अपनी अगली किताब ज़ेड प्लस फिल्म की औपन्यासिक कथा का लोकार्पण कराया। ‘ज़ेड प्लस’ के बारे में बोलते हुए प्रसिद्ध कवि मंगलेश डबराल ने कहा कि, ‘यह सिनेमा और साहित्य की दूरियों को पाटने का काम करेगी। इसकी भाषा पठनीय है। यह एक पोलिटिकल पार्स है।’ वहीं जाने माने पत्रकार रामशरण जोशी ने कहा कि, ऐसे समय में जब साहित्य और सिनेमा को लेकर परिस्थितियां जटिल होती जा रही है, वैसे में इस किताब का आना सार्थक पहल है। बतौर एक प्रयोग इस पुस्तक का बहुत महत्व है। पाठक प्रिय कथाकार असगर वज़ाहत ने कहा कि, मुझे खुशी है कि हिन्दी सिनेमा में कुछ बढ़ रहा है। किसी निर्देशक निर्माता को यह कहानी प्रभावित की और उसने इस पर फिल्म बनाई। हिन्दी सिनेमा और साहित्य के बीच में जो दूरी है, उस पर सोचने की आवश्यकता है। 

कथाकार व जानकीपुल व्लॉग के संपादक प्रभात रंजन ने कहा कि, यह हिन्दी में पहला मौका है, जब किसी उपन्यास पर फिल्म पहले बनी है और उसका प्रकाशन बाद में हुआ है। अपनी किताब के बारे में बताते हुए लेखक रामकुमार सिंह ने कहा कि, ‘यह उपन्यास साहित्य व सिनेमा की जर्नी है। यह एक आम आदमी की कहानी है, जो राजनीतिक खेल से परेशान है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस उपन्यास को पढ़ कर आप वाह! कहे बिना नहीं रह सकते। यह थ्रिलर की तरह चलती है। यह बहुत ही मज़ेदार है’।

ध्यान रहे कि ज़ेड प्लस से पहले राजकमल प्रकाशन समूह के नए इम्प्रिंट ‘सार्थक’ से तीन किताबें दर्दा-दर्रा हिमालय (अजय सोडानी), सफ़र एक डोंगी में डगमग (राकेश तिवारी) और ‘इश्क़ में शहर होना’ जिसे टीवी पत्रकार रवीश कुमार ने लिखा पाठकों के बीच जबर्दस्त मांग में है। इस बावत राजकमल प्रकाशन समूह के संपादकीय निदेशक सत्यानंद निरुपम ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरह से सार्थक की बाकी किताबों को पाठकों से प्यार मिला है, उसी तरह इस किताब को भी स्नेह मिलेगा।
 
लेखक परिचय
राम कुमार सिंह
दिलचस्प किस्कागोई के साथ मौलिक और जमीन से जुड़े कथाकार के रूप में पहचान।सिनेमा और साहित्य में समान रूप से सक्रिय। फतेहपुर शेखावटी, राजस्थान के बिरानियां गांव में 1975 में किसान परिवार में पैदा हुए। कहानिया लिखीं।  हिन्दी साहित्य से एम.ए.। राजस्थान में हिन्दी पत्रकारिता में नाम कमाया। पुरस्कृत भी हुए। पहला कहानी-संग्रह भोभर तथा अन्य कहानियां चर्चित और प्रशंसित। राजस्थानी की चर्चित फिल्म भोभर की कथा, संवाद और गीत लिखे। ज़ेड प्लस उपन्यास पर बनी फिल्म की पटकथा और संवाद भी निर्देशक के साथ मिलकर लिखे।
 

सादर
आशुतोष कुमार सिंह
साहित्य प्रचार अधिकारी
राजकमल प्रकाशन समूह
मो.9891228151
ईमेल- publicity@rajkamalprakashan.com

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प्रभावशाली जन-सम्बोधन की कला सिखाएंगे डॉ.चन्द्रकुमार जैन

राजनांदगांव। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अच्छा बोलने की बढ़ती महत्ता के मद्देनज़र आयोजित एक विशिष्ट प्रसंग में,शहर के जाने-माने वक्ता,लेखक और  दिग्विजय कालेज के हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ.चन्द्रकुमार जैन ख़ास मार्गदर्शन देंगे। मार्च के पहले सप्ताह में गोंदिया ( महाराष्ट्र ) में डॉ.जैन 'इमेज बिल्डिंग थ्रू इफेक्टिव पब्लिक स्पीकिंग' पावर प्वाइंट प्रेसेंटेशन के जरिए प्रभावशाली,सम्भाषण और जन-सम्बोधन से व्यक्तित्व निर्माण और संस्था की छवि में निखार लाने के गुर बताएंगे।

 स्वामी विवेकानंद शिक्षण संस्थान के तत्वावधान में यह कार्यक्रम ख़ास तौर पर डॉ.जैन के प्रस्तुतीकरण पर एकाग्र होगा जिसमें बड़ी संख्या में प्राध्यापक,शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहेंगे। आयोजक संस्थान द्वारा कार्यक्रम की भव्य तैयारी की गई है। गौरतलब है कि डॉ.चन्द्रकुमार जैन महाराष्ट्र में ही महामहिम राष्ट्रपति जी सहित जावेद अख्तर, शबाना आज़मी, महेश भट्ट, गुलाम अली जैसी मशहूर हस्तियों के सामने अपनी वक्तृत्व कला की यादगार बानगी पेश कर चुके हैं। वहीं, महाराष्ट्र के जलगांव, अमरावती, अकोला और गोवा के अलावा राजस्थान विश्वविद्यालय में देश के कई प्रांतों के जिज्ञासु लेखकों को अच्छा लिखने की बारीकियां समझा चुके हैं। लिखने और बोलने की कला की जीवंत रचनात्मक साझेदारी से डॉ.जैन ने राष्ट्रीय ख्याति अर्जित कर छत्तीसगढ़ का नाम रौशन किया है। यह सिलसिला आज भी जारी है। 
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बीबीसी करोड़ों रु. खर्च कर बाँधवगढ़ क बाघों पर फिल्म बनाएगा

बीबीसी करोड़ों रुपए खर्च करके एक बार फिर मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ के बाघों पर फिल्म बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए बीबीसी ने शुल्क की एक किस्त के रूप में 44 लाख 40 हजार रुपए बांधवगढ़ प्रबंधन के पास जमा करवाए हैं। बांधवगढ़ में फिल्म बनाने के लिए बीबीसी को पार्क में एंट्री के लिए प्रतिदिन 52 हजार रुपए शुल्क देना होगा। इस फिल्म को पूरा होने में एक साल का समय लग सकता है।
 
बंद पार्क में भी होगा कामः
 
क्षेत्र संचालक बीटीआर सीएच मुरली कृष्णन ने बताया कि बीबीसी का यह प्रोजेक्ट मार्च में शुरू हो सकता है। इस फिल्म का कुछ हिस्सा रेनी सीजन में भी शूट किया जाना है इसके लिए बीबीसी को राज्य सरकार से अलग से अनुमति लेनी होगी।
 
इसके लिए बीबीसी के लोग भोपाल में प्रयास कर रहे हैं। रेनी सीजन में जून से अक्टूबर तक जब पार्क बंद होता है तो किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं होती। सिर्फ विभाग के लोग ही आन-जाना करते हैं। हालांकि विशेष अनुमति पर बीबीसी फिल्म बना सकेगा।
 
प्रबंधन को ये भी लाभः
 
ऐसे प्रोजेक्ट पर काम होने की वजह से पार्क प्रबंधन को लाभ ही होता है। फिल्म बनाने वाले खुद ही उन जानवरों पर नजर रखते हैं जिन पर नजर रखने का जिम्मा पार्क प्रबंधन का होता है। हाल ही में जब बमेरा वाला बाघ लापता हुआ था तो इसकी जानकारी प्रबंधन को वारेन परेरा से मिली थी जो इस पर फिल्म बना रहे थे।
 
52 हजार रुपए प्रतिदिन है शुल्क
 
पार्क के अंदर फिल्म बनाने के लिए बीबीसी को 52 हजार रुपए प्रतिदिन शुल्क देना होगा। इसमें 40 हजार रुपए फोटोग्राफी के लिए है और 12 हजार रुपए हाथी का शुल्क है। आवश्यकता होने पर दूसरे शुल्क भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
 
साभार- दैनिक नईदुनिया से 

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आज के सवाल और मुक्तिबोध के ‘अँधेरे में’ की एक पड़ताल

हिन्दी कविता के महानतम सर्जकों में से एक गजानन माधव मुक्तिबोध के निधन के पचास साल इसी सितंबर में पूरे हो गए हैं। सितंबर उन्नीस सौ पैंसठ के नया ज्ञानोदय में कवि श्रीकांत वर्मा का एक लेख छपा था जिसमें उन्होंने कहा था ‘अप्रिय’ सत्य की रक्षा का काव्य रचने वाले कवि मुक्तिबोध को अपने जीवन में कोई लोकप्रियता नहीं मिली और आगे भी, कभी भी, शायद नहीं मिलेगी। कालांतर में श्रीकांत वर्मा की आशंका गलत साबित हुई और मुक्तिबोध निराला के बाद हिन्दी के सबसे बड़े कवि के तौर पर न केवल स्थापित हुए बल्कि आलोचकों ने उनकी कविताओं की नई-नई व्याख्याएं कर उनको हिंदी कविता की दुनिया में शीर्ष पर बैठा दिया। मुक्तिबोध की बहुचर्चित कविता 'अँधेरे में' ने भी अपनी अर्धशती पूरी कर ली है। कहना न होगा कि अँधेरे की शब्दावली में अपने आस-पास पसरे अँधेरे के अनगिन सवालों की शिनाख्त करने वाले मुक्तिबोध की बेकली को बकलम मुक्तिबोध ही समझने का इस से बेहतर अवसर संभव नहीं है। लिहाज़ा, समय आ गया है कि इस बात की ईमानदार पड़ताल की जाए कि मुक्तिबोध की रचनाओं में संघर्ष दिखाई देता है वह उनका अपना संघर्ष है या फिर पूरे मध्य वर्ग का, समूची मानवता का,हमारे मौजूदा समय का भी संघर्ष है। 

प्रसिद्ध कवि आशोक वाजपेयी ठीक कहते हैं कि बड़ा लेखक वह है जिसमें हम हर बार नये अर्थ को ढूढते हैं। जो कुछ मुक्तिबोध के जमाने में अंधेरे में था, आज वही उजाले में है। वो सच आज सबके सामने है जिसको मुक्तिबोध अपने समय में महसूस करके लिख चुके थे। बात साफ़ है कि मुक्तिबोध के रचना कर्म की परिधि और उसके केंद्र दोनों में हमारे आज के दौर के सवालों की समझ और उनके ज़वाब हासिल किए जा सकते हैं। वहीं, मुक्तिबोध के सम्बन्ध में डॉ. नामवर सिंह ने स्पष्ट कहा है, ‘‘नई कविता में मुक्तिबोध ने अपने युग के सामान्य काव्य-मूल्यों को प्रतिफलित करने के साथ ही उसकी सीमा को चुनौती देकर उस सृजनात्मक विशिष्टता को चरितार्थ किया, जिससे समकालीन काव्य का सही मूल्यांकन सम्भव हो सका।’’ कुल मिलाकर मुक्तिबोध को लक्षित-मूल्यांकित करने का क्रम अभी जारी है। छायावादी काव्यधारा में ‘निराला’ और नयी कविता में मुक्तिबोध का व्यक्तित्व अपवाद की सीमा तक विशिष्ट था, इसमें दो मत नहीं है। 

समरण रहे कि ‘अंधंरे में’ मुक्तिबोध की प्रसिद्ध कविता है। यह कविता परम अभिव्यक्ति की खोज में जिस तरह की फैंटेसी बुनती है लेकिन अपने मूल में यह कविता ऐसे अंधेरे की पड़ताल करती है जो देश की आजादी के बाद की व्यवस्था का अंधेरा है, इस लोकतंत्र का अंधेरा है। ‘अंधेरे में’ पूंजी की दुनिया व रक्तपाई वर्ग द्वारा पैदा की गई क्रूर, अमानवीय व शोषण की हाहाकारी स्थितियों से साक्षात्कार करती है। यह हिन्दी कविता में ‘मील का पत्थर’ है जिसमें ‘अंधेरा’ मिथ नहीं, ऐसा यथार्थ है जिससे जूझते हुए हिन्दी कविता आगे बढ़ी है। 

मुक्तिबोध की कविता जिस अंधेरे से रू ब रू है, वह इन पचास सालों में सच्चाई बनकर उभरा है। उसका विस्तार ही नहीं हुआ, वह सघन भी हुआ है। मुक्तिबोध ने मठ व गढ़ को तोड़ने की बात की है। इसलिए कि उन्होंने इन मठों व गढ़ों को बनते और इनके अन्दर पनपते खतरनाक भविष्य को देखा। कैसे हैं ये मठ व गढ़ ? आज ये पूंजी, धर्म, वर्ण, जाति के मठ व गढ में रूपांतरित हो गये है। राजनीति सेवा नहीं, मेवा पाने का माध्यम बन गई है। बड़ी बड़ी बातें की जा रही हैं। प्रगति व विकास के दावे किये जा रहे हैं। कोई गौरवान्वित हो सकता है कि हमारी संसद अरबपतियों से रौशन है। पर हमने ईमानदारी, नैतिकता, आदर्श, भाईचारा सहित जो जीवन मूल्य निर्मित किये थे, उसमें कहां तक प्रगति की है ? अब तो इस पर बात करना भी पिछड़ापन है। 

‘अंधेरे में’ मुक्तिबोध कहते हैं ‘पूंजी से जुड़ा हृदय बदल नहीं सकता’। गांधी जी पूंजीपतियों को देश का ट्रस्टी मानते थे। उनका दर्शन ‘हृदय परिवर्तन’ पर आधारित था। उनकी समझ थी कि समाज के प्रभुत्वशाली वर्गों तथा वर्चस्ववादी जातियों व शक्तियों के हृदय परिवर्तन से समाज में समता आयेगी। गांधी जी के इन विचारों के विपरीत मुक्तिबोध का चिंतन था। वे इस ‘उजली दुनिया’ के पीछे फैले काले संसार को, इसकी हृदयहीनता व मनुष्य विरोधी चरित्र को बखूबी समझते थे जिसकी प्रवृति छलना व लूटना है। पूंजीवाद की यह अमानवीयता आज के समय में कही ज्यादा आक्रामक होकर हमारे सामने आई है। आज जिस ‘महान लोकतंत्र’ की दुहाई दी जा रही है, वह मूलतः लूट और झूठ की बुनियाद पर टिका है। यह अपनी लूट को छिपाने तथा उसे बदस्तूर जारी रखने के लिए झूठ की रचना करता है। कौन नहीं जानता कि आज कॉरपोरेट हित सर्वोपरि है लेकिन इसे अर्थशास्त्रीय शब्दावली की भूल भुलैया में ले जाकर 'समावेशी' कहा जा रहा है। इस पूंजी से हमारे देश की प्राकृतिक संपदा, खनिज, जंगल, जल व जमीन की लूट जारी है। लेकिन इसे ‘विकास’ की संज्ञा दी जा रही है। 

ऐसे अनेक आज के सवाल हैं जिनका सही चेहरा दिखाने में मुक्तिबोध का रचना संसार, विशेषतः की कविता 'अँधेरे में' पूरी तरह समर्थ है।

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शासकीय दिग्विजय स्नातकोत्तर स्वशासी 
महाविद्यालय, राजनांदगांव ( छत्तीसगढ़ )

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दाउद को लेकर ज़ी न्यूज़ का धमाका

मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का नाम एक बार फिर चर्चा में है। दरसअल इस बार जी न्यूज ने दाऊद इब्राहिम पर एक बड़ा खुलासा किया है और उसने यह खुलासा एक ऑडियो टेप के जरिए किया है, चैनल के हाथ लगा है। इस टेप में दाऊद इकबाल नाम के अपने एक गुर्गे से दुबई के किसी प्रोजेक्ट को लेकर बात कर रहा है।
 
इस एक्सक्लूसिव टेप में दाऊद और इकबाल के बीच दुबई के एक प्रोजेक्ट को लेकर पैसों के लेनदेन की बात हो रही है। इस बातचीत से पता चलता है कि दाऊद पाकिस्तान के कराची में शाही ठाठ के साथ रह रहा है और अपना काला कारोबार चला रहा है। इस टेप से पता चलता है कि वह पाकिस्तान के कराची और दुबई में रियल स्टेट के कारोबार में पैसा भी लगा रहा है। इकबाल दाऊद को 3 लाख दिरहम यासिर नाम के एक शख्स को देने को कह रहा है। जवाब में दाऊद कहता है कि यासिर तो यहीं कराची में है, यानि दाऊद कराची में मौजूद है।
 
दोनों के बीच हुई इस बातचीत को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इंटरसेप्ट किया है। दाऊद की आवाज पहचानने वाले पत्रकार बलजीत परमार ने पुष्टि की है कि ऑडियो टेप में दर्ज आवाज मोस्ट वांटेड अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम की ही है। परमार ने कहा कि पाकिस्तान भारत को धोखा दे रहा है।
 
दाऊद के अपने इस कबूलनामे से आतंक के खिलाफ पाकिस्तान की दोहरी नीति बेनकाब हो गई है। पाकिस्तान की ओर से हर बार दाऊद के पाक में होने की बात से इनकार किया गया। लेकिन ऑडियो टेप ने पाक के हर झूठ को बेनकाब कर दिया है। बातचीत में दाऊद ने अपने पते और गुर्गों के बारे में भी बताया है। 
 
इस तरह हुई दाऊद और इकबाल के बीच बातचीत…
 
इकबाल: तो अभी वहां तीन एक लाख दिरहम चाहिए होंगे।
 
दाऊद: हां-हां।
 
इकबाल: तो अभी फिलहाल सब काम चलेंगे।
 
दाऊद: ठीक है, मैं भिजवा देता हूं, बोल देता हूं। किसको देना है?
 
इकबाल: यासिर को, यासिर को भिजवाते हैं तो मैं कर लूंगा।
 
दाऊद: बोल देता हूं मैं, यासिर तो यहीं है कराची में, मैं यासिर को बोल देता हूं।
 
इस बातचीत में एक और शख्स अमृत सिंह का नाम सामने आया है जिसके अकाउंट में दाऊद से पैसे डालने को कहा जा रहा है। ये अमृत सिंह कौन है? इस सवाल का जवाब भी खुफिया एजेंसियां तलाश रही हैं।
 
 
पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान अभिनीत धारावाहिक 'बेहद' एक बार फिर भारतीय दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगा। दरअसल यह शो रविवार को हिंदी चैनल 'जिंदगी' पर दस्तक दे चुका है।
 
बेहद' की कहानी मां-बेटी के रिश्ते की पेंचीदगी और कैसे एक-दूजे के प्रति उनका प्यार उनके लिए खिन्नता की वजह बनता है, के इर्दगिर्द घूमती है।
 
हिंदी चैनल जिंदगी पर 'हमसफर' और 'जिंदगी गुलजार है' जैसे धारावाहिकों के बाद 'बेहद' फवाद का एक अन्य कीर्तिमान है।
 
पहली हिंदी फिल्म 'खूबसूरत' व धारावाहिकों की वजह से फवाद को बॉलिवुड में ढेरों प्रशंसक मिल गए हैं।मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का नाम एक बार फिर चर्चा में है। दरसअल इस बार जी न्यूज ने दाऊद इब्राहिम पर एक बड़ा खुलासा किया है और उसने यह खुलासा एक ऑडियो टेप के जरिए किया है, चैनल के हाथ लगा है। इस टेप में दाऊद इकबाल नाम के अपने एक गुर्गे से दुबई के किसी प्रोजेक्ट को लेकर बात कर रहा है।
 
इस एक्सक्लूसिव टेप में दाऊद और इकबाल के बीच दुबई के एक प्रोजेक्ट को लेकर पैसों के लेनदेन की बात हो रही है। इस बातचीत से पता चलता है कि दाऊद पाकिस्तान के कराची में शाही ठाठ के साथ रह रहा है और अपना काला कारोबार चला रहा है। इस टेप से पता चलता है कि वह पाकिस्तान के कराची और दुबई में रियल स्टेट के कारोबार में पैसा भी लगा रहा है। इकबाल दाऊद को 3 लाख दिरहम यासिर नाम के एक शख्स को देने को कह रहा है। जवाब में दाऊद कहता है कि यासिर तो यहीं कराची में है, यानि दाऊद कराची में मौजूद है।
 
दोनों के बीच हुई इस बातचीत को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इंटरसेप्ट किया है। दाऊद की आवाज पहचानने वाले पत्रकार बलजीत परमार ने पुष्टि की है कि ऑडियो टेप में दर्ज आवाज मोस्ट वांटेड अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम की ही है। परमार ने कहा कि पाकिस्तान भारत को धोखा दे रहा है।
 
दाऊद के अपने इस कबूलनामे से आतंक के खिलाफ पाकिस्तान की दोहरी नीति बेनकाब हो गई है। पाकिस्तान की ओर से हर बार दाऊद के पाक में होने की बात से इनकार किया गया। लेकिन ऑडियो टेप ने पाक के हर झूठ को बेनकाब कर दिया है। बातचीत में दाऊद ने अपने पते और गुर्गों के बारे में भी बताया है। 
 
इस तरह हुई दाऊद और इकबाल के बीच बातचीत…
 
इकबाल: तो अभी वहां तीन एक लाख दिरहम चाहिए होंगे।
 
दाऊद: हां-हां।
 
इकबाल: तो अभी फिलहाल सब काम चलेंगे।
 
दाऊद: ठीक है, मैं भिजवा देता हूं, बोल देता हूं। किसको देना है?
 
इकबाल: यासिर को, यासिर को भिजवाते हैं तो मैं कर लूंगा।
 
दाऊद: बोल देता हूं मैं, यासिर तो यहीं है कराची में, मैं यासिर को बोल देता हूं।
 
इस बातचीत में एक और शख्स अमृत सिंह का नाम सामने आया है जिसके अकाउंट में दाऊद से पैसे डालने को कहा जा रहा है। ये अमृत सिंह कौन है? इस सवाल का जवाब भी खुफिया एजेंसियां तलाश रही हैं।
 
 
पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान अभिनीत धारावाहिक 'बेहद' एक बार फिर भारतीय दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगा। दरअसल यह शो रविवार को हिंदी चैनल 'जिंदगी' पर दस्तक दे चुका है।
 
बेहद' की कहानी मां-बेटी के रिश्ते की पेंचीदगी और कैसे एक-दूजे के प्रति उनका प्यार उनके लिए खिन्नता की वजह बनता है, के इर्दगिर्द घूमती है।
 
हिंदी चैनल जिंदगी पर 'हमसफर' और 'जिंदगी गुलजार है' जैसे धारावाहिकों के बाद 'बेहद' फवाद का एक अन्य कीर्तिमान है।
 
पहली हिंदी फिल्म 'खूबसूरत' व धारावाहिकों की वजह से फवाद को बॉलिवुड में ढेरों प्रशंसक मिल गए हैं।

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लोनावला में बच्ची की हत्या से नाराज लोग गृह राज्यमंत्री से मिले

मुंबई। लोनावला में हुई सात साल की बच्ची अनुषा जैन की हत्या के मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच और तेज की जाएगी। गृह राज्य मंत्री राम शिंदे ने विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा के नेतृत्व में मिले अलीबाग एवं रायगड़ से आए पीड़ित परिवार एवं समाज के प्रमुख लोगों को आश्वस्त किया कि अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।

गृह राज्य मंत्री से विधायक लोढ़ा ने बताया कि इस शर्मनाक घटना के कारण लोगों में काफी रोष है। साथ ही असुरक्षा की भावना भी फैल रही है। लोढ़ा ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आईजी स्तर के अधिकारी को घटना स्थल पर भेजकर जांच कराने की मांग की। जिसे तत्काल स्वीकारते हुए गृह राज्य मंत्री ने इस बारे में आदेश जारी दिए। विधायक लोढ़ा के साथ आए पीड़ित परिवार के रिश्तेदार एवं अनिल चौपड़ा एवं आकाश जैन सहित रायगढ़ जिले के जैन समाज के प्रमुख लोग भी गृह राज्य मंत्री से मिले। उन्होंने मांग की कि घटना की जांच में तेजी लाई जाए। गृह राज्य मंत्री ने इस प्रतिनिधि मंडल को यह भी आश्वासन दिया कि इस घटना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे नाराज लोगों पर जो केस बने गए हैं, उनमें भी मानवीय पहलू का खयाल रखा जाएगा।

लोनावला के इस रिसॉर्ट में आयोजित एक विवाह समारोह में रायगढ़ से एक जैन परिवार अपने सात साल की बच्ची अनुषा के साथ आया था। रात को 9 बजे यह बच्ची गायब हो गई थी। तो उसके परिजनों ने खोजबीन की, मगर वह नहीं मिली। फिर परिजनों ने पुलिस शिकायत दर्ज करवाई। रविवार को गायब हुई इस बच्ची की दो दिन बाद गला कटी हुई लाश छत पर मिली। इस घटना से लोगों में काफी रोष व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि विवाह समारोहों के लिए लोनावला इन दिनों एक प्रमुख जगह बनता जा रहा है। ऐसे में इस तरह की घटना से लोगों में काफी डर व्याप्त है।  

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यू ट्यूब पर भी होगा बजट का प्रसारण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आम लोगों तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर जोर दिए जाने के बीच वित्त मंत्री व रेल मंत्री के बजट बाद पहले इंटरव्यू का यूट्यूब पर लाइव प्रसारण होगा।
 
इन मंत्रियों के बजट के बाद पहले इंटरव्यू यूट्यूब पर लाइव दिखाए जाएंगे. इसके लिए लोग ‘ट्विटर’ के जरिए सवाल पूछ सकेंगे।
 
मीडिया में आईं खबरों के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यूट्यूब, ट्विटर व फेसबुक जैसी सोशल मीडिया वेबसाइटों का एक साथ इस्तेमाल करना शुरू किया है। मंत्रालय की अब बजट के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली, रेल मंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा के साक्षात्कार प्रसारित करने की योजना है।
 
ऐसा माना जाता है कि बजट बाद के साक्षात्कार दूरदर्शन करेगा जबकि आम लोग भी मंत्रियों से सवाल कर सकेंगे।
 
सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने इसकी पुष्टि की कि मंत्रालय बजट बाद इंटरव्यू के लिए ‘टाकाथन’ का इस्तेमाल कर सकता है।

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हिन्दुस्तान में रहना है तो सरकार को हिन्दी में मत लिखो

 अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का संकल्प : हम हिन्दी वेबसाइट कभी नहीं बनाएँगे और राजभाषा सम्बन्धी प्रावधानों का उल्लंघन जारी रहेगा.

आदरणीय महोदय/महोदया,
 
हम लोग पिछले तीन साल में मंत्रालय को कई बार हिंदी वेबसाइट, द्विभाषी मोबाइल एप  और द्विभाषी ऑनलाइन सेवाओं के लिए लिख रहे हैं, कई बार आरटीआई आवेदन लगा चुके हैं पर मंत्रालय के अधिकारी कोई कार्यवाही नहीं करते हैं और हमेशा एक ही जवाब मिलता है कि जल्द ही वेबसाइट और ऑनलाइन सेवाएँ द्विभाषी रूप में शुरू की जाएँगी पर तीन साल बीतने के बाद भी "जल्द ही" नहीं हो पाया. 

देश के नागरिकों पर पर अंग्रेजी को बुरी तरह थोपा गया है इसलिए आपकी योजनाओं का लाभ जनता को नहीं मिल पाता। जब नागरिक को योजना की जानकारी उसकी भाषा में नहीं मिलेगी तो वह उसका लाभ कैसे उठा पाएगा? आपकी कितनी भी योजनाएं लागू कर दीजिए उनका लाभ जनता तक नहीं पहुंचेगा जब तक सरकारी अधिकारी उन योजनाओं के दस्तावेज, फॉर्म, ऑनलाइन आवेदन, वेबसाइट आदि की सुविधा हिन्दी भाषा में उपलब्ध नहीं करवा देते। आपने हिन्दी में नहीं बताया तो समझ लीजिए आपने कुछ भी नहीं बताया, आपकी सारी मेहनत बेकार चली जाएगी। 

सरकार ने राजभाषा अधिनियम के पालन के लिए एक भी ठोस कदम नहीं उठाया, स्थिति तो इतनी बुरी है प्रधानमंत्री कार्यालय से आम नागरिकों के हिन्दी में लिखे पत्रों और आवेदनों के जवाब अंग्रेजी भेजे जाते हैं, आपके कार्यालय में रबर की मुहरें तक केवल अंग्रेजी में बनी इस्तेमाल की जा रही है, जब आपके कार्यालय में हिन्दी का यह हाल हो तो फिर सरकार के अन्य मंत्रालयों से जनता क्या उम्मीद कर सकती है? इतने अनिवार्य नियमों का उल्लंघन किस बात को दर्शाता है, यही कि सरकार राजभाषा के लिए एकदम उदासीन है और उसे केवल अंग्रेजी में काम करना है, जनता को अंग्रेजी नहीं आती तो यह जनता की अपनी समस्या है, सरकार को इस बात से कोई सरोकार नहीं. यहाँ यह कहना उचित होगा कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय मंत्रालय का कामकाज अंग्रेजी में ही हो रहा है और शायद मंत्रालय यह मानकर चल रहा है कि भारत के सभी अल्पसंख्यक इंग्लैंड से अंग्रेजी पढ़कर आए हैं ऐसे में मंत्रालय हिंदी में काम कैसे कर सकता है?
 
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा निरंतर राजभाषा अधिनियम, राजभाषा नियम, राजभाषा नीति और राजभाषा विभाग के निर्देशों का उल्लंघन किया जा रहा है:
 
उल्लंघन के उदाहरण:
1.  अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की सभी वेबसाइटे एवं ऑनलाइन सेवाएँ केवल अंग्रेजी में बनाई गई है और वेबसाइट पर दो-चार दस्तावेजों के अतिरिक्त अन्य कोई भी जानकारी हिंदी में उपलब्ध नहीं है. दो दस्तावेज हिन्दी में हैं उनके नाम वेबसाइट पर अंग्रेजी में लिखे गए हैं ताकि जनता उन्हें पढ़ ना ले.
2. एक-दो अपवाद छोड़कर  अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सभी निविदा-पत्र, परिपत्र, कार्यालय ज्ञापन, करार, अनुबंध, समझौते, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन, कार्यक्रमों के बैनर, पोस्टर, दिशा-निर्देश, फॉर्म, सूचना का अधिकार अधिनियम सम्बन्धी सभी विवरण/ सूचना अधिकारियों के नाम पते आदि का केवल अंग्रेजी में जारी किए जा रहे हैं. 
3.  अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की सभी ऑनलाइन सेवाएँ केवल अंग्रेजी में उपलब्ध हैं.
4. अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा रबर की मुहरें, लिफ़ाफ़े और योजनाओं के लाभ लेने हेतु सभी आवेदन फॉर्म द्विभाषी ना छपाकर केवल अंग्रेजी में जारी किए/छापे गए हैं.
5. अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की सम्पूर्ण कार्यवाही अंग्रेजी में की जाती है, बैनर-पोस्टर-बैज-आमंत्रण-पत्र-पाठ्य सामग्री, प्रेस विज्ञप्ति, शिलान्यास-पट आदि केवल अंग्रेजी में तैयार किये जाते/की जाती है.
6. अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा हिन्दी में प्राप्त ईमेल के कोई जवाब नहीं दिए जाते।

 
हिंदी के नाम पर ढोंग करने वाले मंत्रालयों पर कार्यवाही सख्त कीजिए ताकि भारत के नागरिकों को उनकी भाषा में सेवाएं मिलें.आपसे शीघ्र और सकारात्मक तथा कारगर कार्यवाही की अपेक्षा है.
 
भवदीय
तुषार कोठारी
२०१-बी, गोपाल कृष्ण भवन, प्लाट -९८,
श्रीमद राजचंद्र मार्ग, तिलक रोड, घाटकोपर पूर्व, मुंबई -४०००७७

प्रतिलिपि:
गृहमंत्री जी 
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री जी, राज्य मंत्री जी, सचिव तथा संयुक्त सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय  
राजभाषा विभाग 

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