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इन नेताओं पर धन कहाँ से बरसता है..

अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' ने सभी छह राष्ट्रीय पार्टियों के अध्यक्षों, दोनों सदनों के नेताओं, राज्य स्तर की 48 पार्टियों के मुखियाओं और मौजूदा पांचों चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के हलफनामों का विश्लेषण किया तो पाया कि किसी ने भी अपनी संपत्ति की असल कीमत नहीं बताई है। कुछ ने बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत बताई है, तो कुछ नेताओं ने मूल्य का जिक्र ही नहीं किया है। कई नेता तो लगातार चुनावों में संपत्ति की कीमत वही बता रहा हैं यानी उनकी संपत्ति की कीमत 5 साल बाद भी बढ़ नहीं रही है।

आइए डालते हैं नजर कुछ उदाहरणों पर…

सोनिया गांधी: 2004 और 2009 के चुनावों में दाखिल की संपत्ति के ब्योरे में सोनिया ने महरौली के पास स्थित डेरा मंडी में 3 बीघा और सुल्तानपुर में 12 बीघा 15 बिस्वा जमीन की कीमत 2.19 लाख रुपये बताई थी। सोनिया द्वारा बताई गई कीमत बाजार मूल्य से तो काफी कम है ही, इसी इलाके में संपत्ति रखने वाले दूसरे उम्मीदवार की ओर से दाखिल हलफनामे से भी काफी कम है। 2008 में इसी इलाके से विधानसभा चुनाव लड़ चुके बीएसपी के उम्मीदवार कंवर सिंह तंवर ने डेरा गांव में 12 बीघा 5 बिस्वा जमीन की कीमत 18.37 करोड़ रुपये बताई है।

राजनाथ सिंहः साल 2009 में दी गई जानकारी के अनुसार लखनऊ के गोमती नगर के विपुल खंड में अपने घर की कीमत उन्होंने 55 लाख बताई, लेकिन उन्होंने उस घर का एरिया नहीं बताया, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और चुनाव आयोग के गाइडलाइन के अनुसार एरिया बताना जरूरी है।

मीरा कुमार: लोकसभा की अध्यक्ष मीरा कुमार ने 2009 में लोकसभा चुनाव लड़ते समय यह बताया था कि उनके पास दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में 522 वर्ग गज का मकान है, जिसकी कीमत 2.4 करोड़ रुपये है। इसके अलावा उनके पास महारानी बाग में 1119 वर्ग गज का एक मकान है, जिसकी कीमत 4.95 करोड़ है। लेकिन उस समय के बाजार मूल्य के हिसाब से देखा जाए तो न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी वाले उनके मकान की कीमत 12 करोड़ और महारानी बाग वाले घर की कीमत 26 करोड़ थी।

सुषमा स्वराजः लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और उनके पति स्वराज कौशल के नाम दिल्ली के जंतर-मंतर में धवनदीप बिल्डिंग में एक-एक फ्लैट हैं। उन्होंने 2139 स्क्वेयर फीट वाले फ्लैट की कीमत 1.35 करोड़ रुपये और 2254 स्क्वेयर फीट वाले फ्लैट की कीमत 1.13 करोड़ रुपये बताई है। ये कीमतें जब फ्लैट्स खरीद गए थे तब के हैं, बाजार मूल्य नहीं हैं। इसके अलावा उन्होंने मुंबई के फ्लैट की कीमत बताई है, लेकिन एरिया नहीं बताया है।

मायावतीः बीएसपी सुप्रीमो ने 2012 में घोषणा की थी कि उनके पास दिल्ली के कनॉट प्लेस के बी ब्लॉक में दो दुकानें हैं। उन्होंने दोनों दुकानों की कीमत वर्तमान बाजार मूल्य से कम बताई हैं। इसके साथ ही चाणक्यपुरी स्थित अपने 42,907.87स्क्वेयर फीट के घर की ‌कीमत उन्होंने 61.86 करोड़ बताई है, जबकि जानकार बताते हैं कि इस एरिया में प्रति स्क्वेयर फुट की कीमत करीब 2 लाख रुपये है। अगर इस घर का वैल्यूशन एक लाख रुपये प्रति स्क्वेयर फुट के हिसाब से भी करें तो इसकी कीमत 429 करोड़ रुपये बैठेगी।

शीला दीक्षित: दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का कहना है कि उनके पास निजामुद्दीन ईस्ट में 1570 वर्ग फुट का एक मकान है। शीला ने इसकी कीमत 98.39 लाख बताई है, लेकिन इस इलाके के रीयल एस्टेट एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यहां 32 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट के रेट से इस मकान की कीमत 5 करोड़ से ऊपर है।

सुशील कुमार शिंदे: देश के गृहमंत्री और लोकसभा में सत्ता पक्ष के नेता सुशील कुमार शिंदे ने 2009 लोकसभा चुनाव के समय घोषणा की थी कि उनके पास दिल्ली के मुनिरका विहार में 1200 वर्ग फीट का फ्लैट है। उन्होंने इसकी कीमत 1 करोड़ रुपये बताई थी। इसके अलावा शिंदे के पास मुंबई के बांद्रा के पाली हिल इलाके में 131.04 वर्ग मीटर का फ्लैट है, जिसकी कीमत 2009 में 1.29 करोड़ रुपये बताई गई थी। लेकिन रीयल एस्टेट के जानकार बताते हैं कि शिंदे के दिल्ली वाले फ्लैट की कीमत 2009 में 2 करोड़ और मुंबई वाले फ्लैट की कीमत 2.5 करोड़ रुपए थी।

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उच्च न्यायालय ने पूछा-सरकारी विज्ञापनों में सोनिया गाँधी के फोटो कैसे?

मध्य प्रदेश के जबलपुर उच्च न्यायालय ने सरकारी विज्ञापनों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तस्वीरें प्रकाशित व प्रसारित करने के खिलाफ दायर की गई याचिका पर को भारत के अतिरिक्त महाधिवक्ता को सरकार की सलाह पर जवाब पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 जनवरी को होगी।

याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी अरूण शुक्ला की याचिका में कहा गया है कि केंद्र की यूपीए सरकार की नौ वर्ष की उपलब्धियों को लेकर विज्ञापन प्रकाशित किए गए हैं। इन विज्ञापनों में सोनिया गांधी की भी तस्वीर है। सोनिया केंद्र सरकार में मंत्री नहीं है, उसके बावजूद यूपीए सरकार के विज्ञापनों में उनकी तस्वीर प्रकाशित कर लोकधन का दुरूपयोग किया जा रहा है।

वहीं अतिरिक्त महाधिवक्ता राशिद सुहैल सिद्दिकी ने कोर्ट को बताया कि सोनिया गांधी यूपीए सरकार की कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की राष्ट्रीय सलाहकार हैं और उन्हें केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। इसी आधार पर विज्ञापनों में उनकी तस्वीरों का प्रकाशन किया गया है। सिद्दिकी हालांकि, अपने पक्ष में जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अजय मानिकराव खानविलकर और के.के. लाहौटी की बेंच ने सोमवार को सिद्दिकी को 15 जनवरी तक केंद्र सरकार से निर्देश प्राप्त कर जवाब पेश करने को कहा है।

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क्यों मारा जा रहा है रेलवे के तत्काल कोटे में सीनियर सिटिज़न का हक़?

आज पूरे देश में केंद्र व राज्य की सरकारें वरिष्‍ठ नागरिकों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मुहैया करवाने की कोशिश कर रही हैं। रेलवे भी वरिष्‍ठ नागरिकों को अपने यहाँ यात्रा करने पर पुरुषों को ४0 प्रतिशत व महिलाओं को ५0 प्रतिशत की छूट देती है। पर यह छूट तत्काल टिकट पर न जाने क्यों नहीं लागू होती। हर गाड़ी में लगभग ३0 प्रतिशत टिकट तत्काल के लिए आरक्षित होती है। इन ३0 प्रतिशत टिकटों पर वरिष्‍ठ नागरिकों का हक़ नहीं होता। न जाने क्या सोच कर रेलवे वरिष्‍ठ नागरिकों को इस सुविधा से वंचित रख रही है, जबकि दुनियादारी, दुःख-सुख में वरिष्‍ठ नागरिक को ही सबसे ज्‍यादा आना-जाना पड़ता है। आशा है सरकार जल्द इस सुविधा के लिए अपने कानून में बदलाव लाएगी। यह छूट न केवल किराये-भाड़े पर अपितु  तत्काल के लिए लगाने वाले सरचार्ज पर भी लागू होना चाहिए।

अधिकतर देखा जाता है कि सीनियर सिटिज़न चाहे रूटीन में टिकट अरक्षित करवाए अथवा तत्काल में उसे अपर बर्थ ही अलाट होता है। इसका कारण रेलवे बताती है कि नीचे की टिकट पहले आया पहले पाया के आधार पर अलाट कर दी जाती है। रेल यात्रा के दौरान पाया जाता है कि नीचे के बर्थ पर नौजवान यात्री यात्रा कर रहे होते हैं, जबकि वे ऊपर के बर्थ पर आसानी से यात्रा कर सकते हैं। वे अनुरोध करने पर बाद में सीनियर सिटिज़न से बर्थ बदलना भी नहीं चाहते। ऐसे मौकों पर मौजूदा टीसी भी हेल्पलेस हो जाता है। सीनियर सिटिज़न द्वारा ऊपर के बर्थ पर चढ़ने-उतरने में साँस फूल जाती है व कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है तथा उसकी जवाबदारी रेलवे पर आ सकती है। इसलिए रेलवे को नीचे की सभी स्लीपर सीनियर सिटिज़न के लिए आरक्षित रखनी चाहिए। इसके लिए रेलवे को अपने कम्प्यूटर सर्वर में हल्का सा फेर बदल करना पड़ेगा। सीनियर सिटिज़न द्वारा कम्प्यूटर में तत्काल टिकट बुक करते समय हड़बड़ी में कुछ गलती भी हो जाती है। जैसे गाड़ी या दिन की। जब वो भूल सुधर करना चाहता है उसका पैसा कटता है। हमारी मांग है कि सीनियर सिटिज़न का तत्काल टिकट यदि एक घंटे में कैंसल करावा दे तो उसे कोई चार्ज नहीं लगना चाहिए व पूरा पैसा वापस मिलना चाहिए।

 
ASHOK BHATIA
HON.SECRETARY
VASAI ROAD YATRI SANGH
A / 001 , VENTURE APARTMENT ,NEAR REGAL, SEC 6, LINK ROAD ,
VASANT NAGARI ,VASAI EAST -401208
DIST -THANE [MUMBAI] MOB. 09221232130

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संगीतकार श्रवण कुमार के खिलाफ चैक बाउंस मामले में फैसला 6 दिसंबर को

संगीतकार श्रवण कुमार के खिलाफ 15 लाख रूपए के चेक बाउंस का मामला जिला कोर्ट में चल रहा है। इस मामले का फैसला 6 दिसंबर को होगा। एडवोकेट प्रभात जैन के मुताबिक कोर्ट में समय पर पेशी पर नहीं आने से कोर्ट ने उन पर जुर्माना लगाया था।

उन्होंने जुर्माने पर आपत्ति लेते हुए आवेदन दिया था कि उनकी उपस्थिति में कोर्ट ने जुर्माना नहीं लगाया है इसलिए इस जुर्माना रद्द किया जाएं। कोर्ट ने आवेदन खारिज करते हुए कहा कि 6  दिसंबर को केस का फैसला सुनाया जाएगा।

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आफताब आलम को “बिरसा मुंडा पुरस्कार-2013”

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज भारत की प्रथम मीडिया डायरेक्टरी "पत्रकारिता कोश" के संपादक आफताब आलम को झारखंडी एकता संघ द्वारा "बिरसा मुंडा पुरस्कार-2013" प्रदान किया गया है। मुंबई के विलेपार्ले स्थित नवीन भाई ठक्कर हॉल में 24 नवंबर, 2013 को झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित वार्षिक समारोह में आफताब आलम को यह पुरस्कार विधायक अबू आसिम आजमी के हाथों प्रदान किया गया।

इस अवसर पर एन.के.टी. ट्रस्ट के संस्थापक नानजी भाई ठक्कर, वरिष्ठ पत्रकार/स्तंभकार फिरोज अशरफ, समाजसेवक व आंदोलनकर्ता शंकर केजरीवाल, लॉफ्टर चैलेंजर व हास्य व्यंग्य कलाकार सुनील पाल, रेडियो जॉकी प्रेम, सहित अनेक क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद थे। संघ के अध्यक्ष असलम अंसारी सहित मीडिया व साहित्य जगत के अनेक लोगों ने आफताब आलम को इस पुरस्कार के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

गौरतलब है कि आफताब आलम भागलपुर(बिहार) के निवासी हैं और उन्होंने झारखंड के पृथक राज्य बनने से पहले देशभर के मीडिया कर्मियों व साहित्यकारों को एकसूत्र में पिरोने के लिए पत्रकारिता कोश का प्रकाशन प्रारंभ किया था।

संपर्क

AFTAB ALAM
Editor – Patrakarita Kosh
(India's Ist Media Directory)
Limca Book Record Holder

Mumbai, Maharashtra
Mob. 09224169416

Email: aaftaby2k@gmail.com

Email: aftaby2k@hotmail.com

Website : www.hindustanimedia.com

Blog :
www.aftabalamhindustani.blogspot.com
www.mumbaisamachartimes.blogspot.com

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तहलका के पत्रकारों ने तहलका से पल्ला छुड़ाया

तरुण तेजपाल पर यौन शोषण और बलात्कार के आरोप सामने आने के बाद रेवती लाल ने तहलका से इस्तीफा दिया है।  अब खबर आई है कि तहलका के फोटो एडिटर ईशान तन्खा और फीचर एडिटर शौगत ने भी इस्तीफा दे दिया है। उल्लेखनीय है कि  गोवा पुलिस ईशान और शौगत से पूछताछ भी कर चुकी है।  पीड़िता ने ईशान व शौगत को पूरी घटना की जानकारी घटना वाले दिन ही दे दी थी। इस मामले में ईशान, शौगत समेत तहलका के तीन लोग गवाह हैं।

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मोदी के मुरीद दिग्विजय सिंह

नरेंद्र मोदी के कटु आलोचक माने जाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बृहस्पतिवार को एक अप्रत्याशित बयान देकर सबको चौका दिया है। उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री कट्टरपंथी विचारधारा को छोड़कर सांप्रदायिक सौहा‌र्द्र और भाइचारे की बात कर रहे हैं, यह अच्छा संकेत है..लोकतंत्र की यही खासियत है कि देश में एक चायवाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है। दिग्विजय की इस टिप्पणी का भाजपा ने स्वागत किया है।

इंडिया टूडे ग्रुप के दो दिवसीय सम्मेलन एजेंडा आज तक 2013 में कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने इस बात का स्वागत करते हुए कहा कि मोदी धीरे-धीरे कट्टरपंथी विचारधारा से दूरी बनाकर अटल बिहारी वाजपेयी की विचारधारा की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस और संघ यदि कांग्रेस और नेहरू की विचारधारा के करीब आ रहे हैं तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह जोड़ा कि मोदी भारत के लोगों को स्वीकार्य नहीं होंगे और भगवान न करें अगर भाजपा सत्ता में आती है तो उनकी पसंद सुषमा स्वराज होंगी।

कांग्रेस की इस बात को लेकर आलोचना पर कि इसकी बागडोर एक परिवार और कुछ लोगों के हाथ में है, जबकि भाजपा में एक सामान्य कार्यकर्ता भी पार्टी में शीर्ष स्थान पर बैठ सकता है, दिग्विजय ने कहा कि यह सच नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में केरल से आने वाला चरवाहा राष्ट्रपति बन सकता है, तो एक चायवाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है। मालूम हो कि सपा नेता नरेश अग्रवाल ने कुछ दिनों पहले कहा था कि एक चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता है।

कार्यक्रम में शिरकत कर रही भाजपा नेत्री स्मृति ईरानी ने हमने नहीं सोचा था कि दिग्विजय सिंह भी ऐसा कहेंगे कि एक चायवाला भी देश का प्रधानमंत्री बन सकता है..मैं खुश हूं कि मोदी जी की प्रशंसा दिग्विजय सिंह भी कर रहे हैं। इस पर कांग्रेस नेता ने कहा कि चाहे कोई अमीर या गरीब के घर में पैदा हुआ हो, लोकतंत्र में कोई भी अछूत नहीं होता। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए मोदी कोई मुद्दा नहीं हैं। देश का बुनियादी स्वभाव सांप्रदायिक सद्भाव के पक्ष में है इसलिए लोग वाजपेयी और स्वराज तो स्वीकार कर सकते हैं, मोदी को नहीं। कांग्रेस महासचिव ने पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर एजिग्ट पोल को खारिज करते हुए इसे अगले लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल मानने से भी इन्कार कर दिया।

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शशि थरुर की पत्नी सुनंदा पुष्कर ने मोदी के समर्थन में आगे आई

जम्मू-कश्मीर की महिलाओं के राज्य के बाहर के पुरुषों से शादी करने पर उनके साथ भेदभाव होने के नरेंद्र मोदी के बयान पर जमकर राजनीति हो रही है। इस बीच उन्हें एक ऐसे शख्स से सपोर्ट मिला है, जिसकी उम्मीद उन्हें कतई नहीं रही होगी। केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी और मूल रूप से कश्मीर की रहने वालीं सुनंदा पुष्कर ने कहा कि 'बाहर' के शख्स से शादी करने पर राज्य में महिलाओं के साथ भेदभाव होता है और कोई कहता है कि ऐसा नहीं है तो वह झूठ बोल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह इस मसले पर किसी तरह की राजनीति में नहीं पड़ना चाहती हैं।

सुनंदा पुष्कर ने अपना अनुभव बताते हुए कहा, '2006-07 और 2010 में मैंने जम्मू में जमीन खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन डीसी ऑफिस के अधिकारियों ने मुझे बताया कि बाहर के शख्स से शादी करने की वजह से मेरा 'स्टेट सब्जेक्ट' (नागरिकता) रिन्यू नहीं हुआ है, इसलिए मैं राज्य में जमीन नहीं खरीद सकती हूं। सुनंदा ने कहा, 'धारा 370 मौजूदा स्वरूप में काफी भेदभावपूर्ण है और इसकी समीक्षा की जरूरत है।'

सुनंदा के मुताबिक, सन् 1992 में उन्होंने एक मलयाली से शादी की थी और पति की मौत के बाद वह राज्य में जमीन खरीदने गई थीं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उनके पति की मौत हो गई है और वह राज्य लौट आई हैं। लेकिन अधिकारियों ने उनकी बात को अनसुना कर दिया।

उन्होंने इस मसले को एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में और अपने ट्विटर हैंडल के जरिए भी उठाया है। सुनंदा पुष्कर ने कहा कि इस मसले पर उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बात की थी और उन्होंने इसमें मदद करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने आगे कहा, 'हाई कोर्ट द्वारा महिला विरोधी कानून में सुधार लाए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं आया है। उमर ने मुझे बताया कि आपको पता होगा कि कानून में बदलाव के बावजूद आपके बच्चे इन संपत्तियों को नहीं पा सकते हैं। यह मुझे बहुत अजीब लगा। मेरे कजिन ने महाराष्ट्र की लड़की से शादी की है और उनके दोनों बच्चे के नाम से राज्य में प्रॉपर्टी हैं।'

सुनंदा ने कहा, 'जमीन खरीदने की कोशिश मैं जम्मू में कर रही थी, जबकि घाटी में हमारी पुश्तैनी जमीन है। मेरे पिता ने मुझे कहा था कि तुम अब स्टेट सब्जेक्ट नहीं रह गई हो इसलिए अपने हिस्से की जमीन भाइयों के नाम कर दो।'

थरूर की पत्नी ने इस मसले पर बीजेपी पर राजनीति करने का आरोप लगाया और दबे स्वर में इसके लिए नेहरू का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बीजेपी जब सत्ता में थी तो इसके लिए कोई कदम नहीं उठाया। इसके बाद सुनंदा ने कहा कि हो सकता है कि मेरे जबाव से मेरे पति चिढ़ जाएं लेकिन मैं एक कश्मीरी और महिला भी हूं।

सुनंदा ने कहा कि अगर मेरी जानकारी गलत नहीं है तो अनुच्छेद-370 की धीरे-धीरे विदाई होनी थी, लेकिन मुझे नहीं पता कि यह कैसे होना था। उन्होंने कहा, 'जवाहर लाल नेहरू, शेख अब्दुल्ला और राजा हरि सिंह में हुए समझौते के मुताबिक यह सब हुआ। नेहरू ने कश्मीर का विभाग अपने पास रखा और सरदार पटेल गृह मंत्री होने के बावजूद कश्मीर से अलग रहे।'

 

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बुलेट राजा [हिंदी एक्शन कथा ]

दो टूक : कहते हैं जिंदगी हमेशा उस रास्ते जाती है जिस रास्ते के लिए हम उसके लिए बने ही नहीं होते ..पर कई बार जिंदगी लौटकर हमारे उस रास्ते पर भी चल पड़ती है जिसके बारे में उसने कभी नहीं सोचा होता ..लेकिन ऐसा होने पर हमें उसकी कड़वी सचाई पर भी एक नजर डालकर देख लेनी चाहिए कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वो हमें गुंजल में फंसा रही हो . निर्देशक  तिग्मांशु धुलिया की सैफ अली खान, सोनाक्षी सिन्हा, विद्युत जामवल, जिमी शेरगिल, गुलशन ग्रोवर, राज बब्बर, रवि किशन, चंकी पांडे, माही गिल, विश्व जीत प्रधान  ,शरत  सक्सेना , विपिन शर्मा , दीप राज राणा और गौरव झा के अभिनय वाली उनकी नयी फ़िल्म बुलेट राजा भी एक ऐसी ही जिंदगी की कहानी कहती है . 

कहानी : फ़िल्म की कहानी उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रहने वाले राजा मिश्रा (सैफ अली खान) की  है जो एक रात कुछ आवारा लड़कों से बचता हुआ एक शादी में शामिल होकर शहर के दबंग [शरत सक्सेना ]  के बेटे रूद्र (जिमी शेरगिल) के घर पहुँच  जाता है . उसी रात रूद्र का  चचेरा  भाई ललन [चंकी पांडे ] अपने कुछ लोगों के साथ रूद्र पर हमला करता है और राजा उसे बचा लेता है . दोनों में दोस्ती होती है लेकिन इनकी ये दोस्ती  बदल देती है . रूद्र और उसके पिता के दुश्मन राजा के भी दुश्मन  हो जाते  हैं . खुद को बचाने की लड़ाई मे राजा बुलेट राजा  बन जाता है . राजनीति के उस्ताद राम बाबू [राज बब्बर ] उसे सहारा देते हैं लेकिन राजनीति से और अपराध से जुड़े बजाज[गुलशबन ग्रोवर ] और सुमेर [रवि किशन ] के साथ अफीम माफिया का सरगना [ विश्वजीत प्रधान ] भी उसके दुश्मन ही नही हो जाते बल्कि पुलिस अरुण सिंह उर्फ़ मुन्ना [विद्युत् जामवाल ] भी उसके पीछे पड़ जाता है . बस खुद को बचाने और दूसरों को मात देते राजा बुलेट की इतनी सी कहानी है .जिसमे उसकी प्रेमिका बनी मिताली [सोनाक्षी सिन्हा ]भी शामिल है . 

 

गीत संगीत :  फ़िल्म में संदीप नाथ , कौसर मुनीर और रफ़्तार के गीत हैं और संगीत आरडीबी और निंदी कौर की तिकड़ी ने तैयार किया है . फ़िल्म में देसी टच और पुरबिया संगीत की ताजगी है और तमंचे पर डिस्को ,डोंट टच माय बॉडी के साथ जरा ज़रा सा सरकने लगा जैसे बोलों वाले गीत सुने जा सकते हैं . 

 

अभिनय :  फ़िल्म के केंद्र में सैफ हैं लेकिन उनके पात्र का असली आधार जिमी हैं जो उनके साथ नए तरीके से संयोजन बनाकर सामने आते हैं .  ठेठ देसी किरदार में सैफ खूब  जमते हैं  . जिमी शेरगिल जब तक परदे पर रहते हैं निराश नहीं करते बस उन्हें जरा जल्दी मार दिया  गया .गुलशन ग्रोवर और रवि किशन कुछ भी नया नहीं करते लेकिन  विद्युत् जामवाल को कुछ और निथारा जा सकता था . सोनाक्षी सिन्हा को कुछ नया करने का मौका नहीं मिला जबकि चंकी पांडे अब मसखरे ख़लनायक के तौर पर खीज पैदा करते हैं .  राज बब्बर की एक अलग शैली हैं काम करने और अपने पात्रों को जीने की तो उनके साथ राजीव गुप्ता , विश्व जीत प्रधान  ,शरत  सक्सेना , विपिन शर्मा , दीप राज राणा और गौरव झा भी  अपने छोटे छोटे चरित्रों में याद रहते हैं . 

 

निर्देशन : पहली बात .  यह पान सिंह तोमर और साहेब बीवी गैंगस्टर जैसी फ़िल्में बना चुके धुलिया की शैली की फ़िल्म नहीं है . एक तरह से देखा जाये तो इसे हम तिग्मांशु की पहली व्यवसायिक फ़िल्म कह सकते हैं लेकिन फिल्मी की कहानी में ऐसा कुछ नहीं है, जिसे नया कहा जा सके . पर उनका  प्रस्तुतिकरण और कलेवर में वो  यूपी के अपराध जगत को वो एक मंझे हुए निर्देशक की तरह सामने लाते हैं . वो  परिवेश और प्रस्तुति के साथ भाषा और पहनावे का भी पूरा ख्याल रखते हैं और हमेशा अपने पात्रों को आम जीवन से चुनते हैं जिन्हे वो  रूद्र, सुमेर यादव, बजाज, मुन्ना और जेल में कैद श्रीवास्तव के  साथ शुक्ला, यादव और अन्य जातियों के नामधारी के नेताओं में बदल देते हैं . हालां कि मध्यांतर के बाद फ़िल्म एक जानी पहचानी लीक पर चलती है और अंत में खुद ही बता देती है कि हमने कुछ नया नहीं देखा पर ये भी कि तिग्मांशु अपनी तरीके की अपनी फ़िल्म बनाते हैं जिसे जब चाहे देखा सकता है . 

 

फ़िल्म क्यों देखें : सैफ के लिए .

फ़िल्म क्यों न देखें :  अब भला सैफ के साथ बनी तिग्मांशु की फ़िल्म को छोड़ने को मैं क्यों  कहूंगा .

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अय्याश रईसजादों के क्लब के लिए धन जुटाया तरुण तेजपाल ने?

कई जुगलबंदियां लहर पैदा करती हैं और कई खबर बनाती हैं। ऐसी ही एक जुगलबंदी तहलका संस्‍थापक तरुण तेजपाल और शराब व्यापारी पोंटी चड्ढा के बीच बनी थी। तरुण तेजपाल पोंटी चड्ढा के साथ मिलकर शहरी भारतीयों के लिए एक प्राइवेट क्लब खोलना चाहते थे।

बेहतरीन संपन्न, उदार समुदाय लोगों का क्लब
तेजपाल के शब्दों में कहें तो वह कुछ चुनिंदा शहरी भारतीयों के साथ एक ऐसी ‌बृहद संस्कारिक दुनिया बनाना चाहते थे, जहां बेहतरीन संपन्न, उदार समुदाय के लोग आपस में एक जगह मिलजुल सकें। वो ऐसे लोग हों जो दुनिया को बनाते और सजाते हैं। तेजपाल ने इस क्लब का नाम 'प्रूफ्रॉक' दिया था।

तेजपाल ने अपने एक ईमेल में इन बातों का जिक्र किया है। यह ईमेल उन सदस्यों को भेजा गया था, जो इस क्लब के सदस्य बन सकते थे। इस ईमेल में तेजपाल ‌आगे लिखते हैं कि यह सब कुछ बेहतरीन ड्रिंक्स और शानदार खानों के साथ हमारे लिए नामचीन शेफ तैयार करेंगे।

चड्ढा की फ्लैगशिप कंपनी, वेब इंडस्ट्रीज के अधिकारियों ने कहा कि तेजपाल ने चड्ढा के समक्ष एक बिजनेस प्रेजेंटेशन रखा था, जिसके बाद उन्होंने 2012 की शुरुआत में ही इस विशेष प्राइवेट प्रूफ्रॉक क्लब में निवेश करने का मन बना लिया था।

अधिकारियों ने बताया कि पोंटी चड्ढा की हत्या के बाद मनप्रीत मोंटी चड्ढा ने अपने पिता के सभी बिजनेस वादों को पूरा करने का फैसला लिया है। पोंटी की हत्या, उनके अपने ही फॉर्म हाउस में नवंबर 2012 में हो गई थी।

चड्ढा की कंपनी ने 2 करोड़ रुपये लगाए
इसी साल जून में बनाई गई कंपनी थ्राइविंद आर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के अंदर प्रूफ्रॉक को रखा गया था। 10 जुलाई को कंपनी ने इसके दो शेयरधारकों को 10 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बांट दिए, जिसमें 72 फीसदी शेयर तेजपाल के पास बाकी के 28 फीसदी शेयर नीना तेजपाल को दे दिया गए।

26 अगस्त को चड्ढा होटल प्राइवेट लिमिटेड ने 2 करोड़ रुपये में 1800 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से 11,111 शेयर खरीद लिए।

इंडियन एक्सप्रेस को दिए बयान में चड्ढा समूह के प्रवक्ता ने बताया कि हमने इसमें फायदा देखा और इसमें निवेश किया। हमारा इरादा था कि एक बार जब यह बिजनेस मॉडल चल निकले तो मुनाफा कमा कर हम निकल जाएं। हम इसके प्रतिदिन के काम में शामिल नहीं थे।

एक्सप्रेस ने जब नीना तेजपाल से ईमेल कर इस वेंचर के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने इसके बार में कोई जवाब नहीं दिया।

दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके, एम ब्लॉक में प्रूफॉक का काम अब भी चल रहा है। क्लब तहलका के ऑफिस के कुछ बिल्डिंग आगे की बिल्डिंग में है। वहां काम कर रहे लोगों ने बताया कि इसका काम जुलाई में शुरू हुआ था और अगले तीन महीनों में यह पूरा बनकर तैयार हो जाएगा। रियल एस्टेट एजेंटों का कहना है कि इस जगह का किराया सालाना 6.5 करोड़ रुपये के आसपास होगा।

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