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नवलकिशोर स्मृति आलोचना सम्मान के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित

दिल्ली। हिन्दी साहित्य और संस्कृति की पत्रिका बनास जन ने विख्यात आलोचक प्रो नवलकिशोर की स्मृति में आलोचना सम्मान के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित की हैं। बनास जन द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि यह सम्मान प्रतिवर्ष गद्य साहित्य पर आलोचना अथवा वैचारिक आलोचना के लिए दिया जाएगा। इस सम्मान में प्रविष्टि के लिए आलोचक को लगभग 40000 अक्षरे चालीस हजार शब्दों का एतद विषयक आलेख भेजना होगा। आलेख मौलिक और अप्रकाशित अप्रसारित होना चाहिए। प्रविष्टि भेज रहे आवेदक की कोई मौलिक पुस्तक प्रकाशित नहीं होनी चाहिए, लेख और समीक्षाएं भले ही प्रकाशित हो चुके हों। आवेदक की आयु सीमा 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। बनास जन द्वारा उक्त आलेख का स्वतंत्र अंक के रूप में प्रकाशन किया जाएगा तथा सम्मान राशि भी भेंट की जाएगी।  इस साल के लिए 30 मार्च 2026 तक प्रविष्टियां भेजी जा सकेंगी। प्रविष्टियां वर्ड फाइल में banaasjan@gmail.com पर यूनिकोड अथवा कृतिदेव 10 में टंकित कर भिजवाएं।

वर्ष 2024 के लिए उक्त सम्मान काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की शोध छात्रा निवेदिता प्रसाद  और 2025 में दिल्ली विश्वविद्यालय के असीम अग्रवाल को उनके आलोचना विनिबंध के लिए दिया गया था और इसे स्वतंत्र अंक के रूप में प्रकाशित किया गया था।

बनास जन द्वारा जारी  विज्ञप्ति में बताया गया कि आलोचना के क्षेत्र में अपने अविस्मरणीय योगदान के लिए प्रो नवलकिशोर को जाना जाता है। मानवावद और साहित्य जैसी कालजयी आलोचना कृति के रचयिता प्रो नवलकिशोर उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में आचार्य एवं अध्यक्ष रहे। उनकी स्मृति को स्थाई रखने के लिए इस सम्मान को प्रारम्भ किया गया है जिससे युवा अध्येताओं को भी नया मंच मिल सकेगा।

पल्लव
सम्पादक
Banaas Jan
393, Kanishka Appartment C & D Block
Shalimar Bagh
Delhi- 110088
Whats Up  – 08130072004

वीडब्ल्यूओ और एबी टेस्टी ने डिजिटल एक्सपीरियंस ऑप्टिमाइज़ेशन के भविष्य को पुनः परिभाषित करने के लिए मिलाया हाथ

पेरिस, फ्रांस

ऑप्टिमाइज़ेशन क्षेत्र की दो अग्रणी कंपनियों, VWO और AB Tasty ने एक होने (combine) के लिए समझौता किया है, जो प्रथागत समापन शर्तों के अधीन है। यह संयोजन उद्योग का अग्रणी डिजिटल एक्सपीरियंस ऑप्टिमाइज़ेशन प्लेटफॉर्म बनाएगा जो AI-आधारित प्रयोग (experimentation), रियल-टाइम एडाप्टिव पर्सनलाइजेशन, बिहेवियरल इनसाइट्स और एनालिटिक्स को पेश करेगा।
संयुक्त इकाई (combined entity) का पैमाना सार्थक होगा, जो वैश्विक स्तर पर 4,000 से अधिक ग्राहकों से वार्षिक राजस्व में $100 मिलियन को पार कर जाएगा। संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप के अपने दो सबसे बड़े क्षेत्रों में इसकी प्रमुख उपस्थिति होगी, जो इसके राजस्व का लगभग 90% है। 11 कार्यालयों और उत्तरी अमेरिका, LATAM, यूरोप और APAC में वितरित टीमों के साथ, यह संयोजन स्थानीय निष्पादन के साथ वैश्विक पहुंच को अनलॉक करता है। इसका लक्ष्य इन-मार्केट विशेषज्ञता के माध्यम से ग्राहकों के साथ गहरी साझेदारी बनाना और AI-नेटिव क्षमताओं की पेशकश करने वाले ‘फुल स्टैक टेक प्लेटफॉर्म’ में महत्वपूर्ण निवेश करना है।
VWO के सह-संस्थापक व CEO, Sparsh Gupta ने कहा, “VWO की स्थापना इस विश्वास पर की गई थी कि महान उत्पाद, मजबूत बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक सोच स्थायी कंपनियों का निर्माण करते हैं। AB Tasty में हमें एक ऐसी टीम मिली जो इस दर्शन को साझा करती है और उत्पाद व संगठन की क्षमताओं में हमें मजबूती से पूरा करती है, जबकि संस्कृति, दृष्टि और मिशन में भी गहरा तालमेल है। साथ में हम एक ग्लोबल लीडर बनाने का अवसर देखते हैं जो ग्राहकों को अधिक पैमाना, गहराई और स्थिरता प्रदान करता है, जबकि उस मूल उद्देश्य के लिए प्रतिबद्ध रहना है जिसने दोनों कंपनियों को सफल बनाया है।”
विलय किए गए व्यवसाय का नेतृत्व दोनों संगठनों की एक मजबूत सह-संस्थापक कार्यकारी टीम द्वारा किया जाएगा। VWO के को-फाउंडर और CEO, Sparsh Gupta संयुक्त इकाई के Chief Executive Officer के रूप में कार्य करेंगे। Ankit Jain Chief Product and Technology Officer के रूप में कदम रखेंगे। AB Tasty के को-फाउंडर और को-CEO, Rémi Aubert Chief Customer and Strategy Officer बनेंगे, जबकि AB Tasty की दूसरी को-फाउंडर और को-CEO, Alix de Sagazan Chief Revenue Officer बनेंगी। ये लीडर्स संयुक्त कंपनी में पर्याप्त व्यक्तिगत स्वामित्व (substantial individual ownerships) के साथ महत्वपूर्ण रूप से निवेशित रहकर मजबूत विश्वास और उत्साह प्रदर्शित कर रहे हैं।
AB Tasty की को-CEO, Alix de Sagazan ने कहा, “हमारी महत्वाकांक्षा हमेशा से एक्सपेरिमेंटेशन और एक्सपीरियंस ऑप्टिमाइज़ेशन में एक ग्लोबल लीडर बनाने की रही है जो ग्राहकों को ठोस, मापनीय मूल्य प्रदान करे। पिछले कुछ वर्षों में, जब हमने AB Tasty के अगले अध्याय पर विचार किया, तो यह स्पष्ट हो गया कि सही रास्ता महत्वाकांक्षा, संस्कृति, उत्पाद और भूगोल के बीच तालमेल (alignment) का था। VWO के साथ यह तालमेल शुरू से ही स्पष्ट था: साझी महत्वाकांक्षा, साझा मूल्य, पूरक ताकत और ग्राहकों के प्रति एक समान प्रतिबद्धता। यह संयोजन हमें उसी महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ाने का अवसर देता है जो हमारे पास हमेशा से थी, लेकिन अब हम यह बहुत बड़े पैमाने पर और काफी विस्तारित संसाधनों के साथ कर सकेंगे।”
इस प्रक्रिया का नेतृत्व सिंगापुर मुख्यालय वाली Everstone Capital द्वारा किया जा रहा है, जो Everstone Group की प्राइवेट इक्विटी शाखा है। यह टेक्नोलॉजी सेक्टर पर मजबूत फोकस के साथ मिड-मार्केट स्पेस में नियंत्रण निवेश (control investments) पर केंद्रित है। Everstone Capital, VWO में बहुसंख्यक शेयरधारक (majority shareholder) है और संयुक्त इकाई में सबसे बड़ा संस्थागत शेयरधारक बने रहने के लिए महत्वपूर्ण अतिरिक्त पूंजी का निवेश कर रहा है।
Everstone Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर, Sandeep Singh ने कहा, “यह निवेश एक मार्केट लीडर बनाने के लिए क्रॉस-जियोग्राफी परिप्रेक्ष्य के साथ गहरी डोमेन विशेषज्ञता को जोड़ने की Everstone की रणनीति का विस्तार है। इस मामले में यह एक ग्लोबल, श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ डिजिटल एक्सपीरियंस ऑप्टिमाइज़ेशन प्लेटफॉर्म है। साथ में, VWO और AB Tasty के पास श्रेणी में सबसे व्यापक उत्पाद पेशकश होगी और कई प्रमुख क्षेत्रों में अग्रणी बाजार हिस्सेदारी के साथ एक संतुलित भौगोलिक पदचिह्न होगा। Everstone कंपनी को एक एडवाइजरी बोर्ड के साथ भी समर्थन देगा जिसमें कुछ प्रमुख उद्योग विशेषज्ञ और संचालक शामिल होंगे।”
एक बार प्रथागत समापन शर्तें पूरी होने और लेनदेन समाप्त होने के बाद VWO और AB Tasty उचित समय पर अधिक जानकारी प्रदान करेंगे।
VWO के बारे में
2010 में स्थापित, VWO एक एकीकृत एक्सपीरियंस-ऑप्टिमाइज़ेशन प्लेटफॉर्म है जिसका उपयोग उत्पाद, विपणन, विकास और इंजीनियरिंग टीमें ग्राहक यात्रा (customer journeys) को बेहतर बनाने और डिजिटल प्रदर्शन में तेजी लाने के लिए करती हैं। एक्सपेरिमेंटेशन, एनालिटिक्स, पर्सनलाइजेशन और फीचर-डिलीवरी टूल के एक कनेक्टेड सूट के साथ, VWO संगठनों को बड़े पैमाने पर डेटा-संचालित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है। ई-कॉमर्स, SaaS, यात्रा और मीडिया में Forbes, Walt Disney, Amway, Hilton Vacations, TAP Portugal, Cigna जैसे 3,000 से अधिक ब्रांडों द्वारा भरोसा किया जाने वाला, VWO टीमों को अनुभव, रूपांतरण और राजस्व में लगातार, मापनीय सुधार लाने में मदद करता है। वेबसाइट: vwo.com.
AB Tasty के बारे में
2014 में पेरिस में स्थापित, AB Tasty एक अग्रणी एक्सपेरिमेंटेशन और पर्सनलाइजेशन प्लेटफॉर्म है जो वैश्विक ब्रांडों को A/B टेस्टिंग, फीचर मैनेजमेंट और AI-संचालित पर्सनलाइजेशन के माध्यम से डिजिटल अनुभवों को अनुकूलित करने में सक्षम बनाता है। इसका उपयोग दुनिया भर में 1000 से अधिक अग्रणी वैश्विक ब्रांडों द्वारा किया जाता है, जिनमें L’Oreal, Samsonite, USA Today, और Ganni शामिल हैं, और यह यात्रा, रिटेल, बैंकिंग और बीमा सहित कई उद्योगों में उपयोग किया जाता है। वेबसाइट: abtasty.com.
Everstone Capital के बारे में
Everstone Capital, Everstone Group की प्राइवेट इक्विटी शाखा, सिंगापुर मुख्यालय वाली एक निवेश फर्म है जिसके पास $3.5 बिलियन की संपत्ति प्रबंधन (AUM) के तहत है और सात वैश्विक कार्यालयों में उपस्थिति है। हम टेक्नोलॉजी सर्विसेज, हेल्थकेयर और फार्मा, कंज्यूमर, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंडस्ट्रियल्स सहित उच्च-विकास वाले क्षेत्रों में नियंत्रण-उन्मुख, मिड-मार्केट निवेश पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हमारा प्लेटफॉर्म-बिल्डिंग दृष्टिकोण स्थायी मूल्य को अनलॉक करने और दीर्घकालिक विकास को चलाने के लिए रणनीतिक पूंजी के साथ परिचालन विशेषज्ञता को जोड़ता है।
~100 अनुभवी पेशेवरों की एक टीम के साथ, हम हर साझेदारी में गहरी डोमेन जानकारी, स्थानीय अंतर्दृष्टि और ऑन-ग्राउंड निष्पादन में बढ़त लाते हैं। हमारा सक्रिय स्वामित्व मॉडल और अनुशासित निष्पादन हमें व्यवसायों को स्केल करने, परिवर्तन में तेजी लाने और हमारे निवेशकों के लिए लगातार मजबूत जोखिम-समायोजित रिटर्न देने में सक्षम बनाता है। वेबसाइट: everstonecapital.com.

 

मीडिया पूछताछ के लिए, कृपया लिखें: paresh.mandhyan@vwo.com (Wingify और AB Tasty के लिए) corpcomm@everstonegroup.com (Everstone Capital के लिए)

Muskan Thakur
Executive – Media Relations
+91 9877297918

रक्तदान से बड़ा दान कुछ नहीं – प्रो अंजू श्रीवास्तव हिन्दू कालेज में रक्तदान शिविर

दिल्ली। मनुष्य जीवन सर्वोपरि है और मनुष्य जीवन के लिए रक्त सबसे अधिक आवश्यक है। यदि हमारे देश में सभी स्वस्थ नागरिक रक्तदान के लिए स्वैच्छिक भागीदारी करें तो बहुत बड़ी संख्या में बीमार लोगों के जीवन की रक्षा हो सकेगी। हिन्दू कालेज में राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा ओम चेरिटेबल ब्लड सेंटर के सहयोग से आयोजित रक्तदान शिविर में प्राचार्या प्रो अंजू श्रीवास्तव ने कहा कि युवा पीढ़ी को रक्तदान जैसी गतिविधियों में बढ़ चढ़कर भाग लेना चाहिए ताकि हम अपने बीमार और जरूरतमंद मरीजों की प्राण रक्षा कर सकें। प्रो श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के इस शिविर में युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी बताती है कि हमारे देश के युवा प्रत्येक सेवा कार्य में आगे हैं।

आयोजन में महाविद्यालय की उप प्राचार्या प्रो रीना जैन ने रक्तदान करने वाले युवाओं की प्रशंसा की और उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनके द्वारा दिया गया दान किसी भी दान से बहुत बड़ा है।

इससे पहले ओम चेरिटेबल ब्लड सेंटर के निदशक अनुराग आनंद ने प्राचार्य प्रो श्रीवास्तव और उप प्राचार्य प्रो जैन का स्वागत करते हुए अपने सेंटर की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उनका सेंटर प्रतिवर्ष विभिन्न शिक्षण संस्थानों में शिविरों का आयोजन कर निस्वार्थ भावना से रक्तदान के लिए तत्पर रहता है।

राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ पल्लव ने बताया कि दिन भर चले इस विशेष शिविर में 62 यूनिट रक्तदान हुआ है जिसमें विद्यार्थियों और शिक्षकों की भी भागीदारी रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों के साथ साथ बड़ी संख्या में छात्राओं का रक्तदान के लिए आगे आना नए और संकल्पवान भारत का प्रतीक है जो निस्वार्थ भावना से सेवा के कार्यों को अपना रहा है। शिविर के दौरान हिंदी विभाग के प्रो रचना सिंह और प्रो बिमलेन्दु तीर्थंकर ने भी रक्तदाताओं का मनोबल बढ़ाया। सभी रक्तदाताओं को प्रशंसा पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किये गए।

राष्ट्रीय सेवा योजना के विद्यार्थी अध्यक्ष निशांत सिंह ने शिविर के प्रारम्भ में सभी का स्वागत किया। अंत में राष्ट्रीय सेवा योजना की विद्यार्थी उपाध्यक्ष नेहा यादव ने सभी का आभार व्यक्त किया।

अर्चिता द्विवेदी
जन संपर्क प्रमुख
राष्ट्रीय सेवा योजना
हिन्दू महाविद्यालय, दिल्ली
मो -9452536877

वैश्विक पहचान रखने वाला भारत का एक महान संगीतकारः इलैया राजा

भारत के अधिकांश लोग शायद ही  भारत के इस महान संगीतकार के बारे मे विस्तार से  जानते हों। हमारी मीडिया एआर रहमान को ही महान बताती है। मीडिया के महान संगीतकार ने अजहर सिंड्रोम खेल दिया। आइये आपको आज मिलवाता हूँ ऐसे संगीतकार से जिन्होंने 1523 फिल्मों में संगीत दिया, 20 हजार स्टेज शो किये.8600 गीत कंपोज किये दुनिया के 9वें सबसे बेहतरीन महान संगीतकार इलैया राजा ।

इलैयाराजा का जन्म 2 जून 1943 को तमिलनाडु में एक दलित ईसाई फैमिली में हुआ था। उनका नामकरण का किस्सा भी बेहद दिलचस्प है। इलैया राजा का नाम उनके पिता ने रजईया रखा था पर गांव के लोग उन्हें रासयया बुलाते थे। जिसके बाद वो संगीत की शिक्षा लेने के लिए #धनराज_मास्टर के पास पहुंचे जहां मास्टर ने उनका नाम राजा रख दिया। इसके बाद उन्होंने अपने करियर की पहली फिल्म अन्नकिली मिली। इस फिल्म में उन्हें प्रोड्यूसर पंचू अरुणाचलम के साथ काम करने का मौका मिला और यहीं पंचू ने उनके नाम राजा के आगे इलैया जोड़ दिया। दरअसल तमिल में इलैया का मतलब छोटा होता है और राजा नाम से फिल्म इंडस्ट्री में एक और म्यूजिक डायरेक्टर ए.एम. राजा मौजूद थे। जिसके चलते राजा का नाम इलैया राजा पड़ गया।

इलैया राजा गांव में पले बड़े थे इसलिए उन्हें गांव के वातावरण और म्यूजिक का बखूबी ज्ञान था। बचपन से ही उनकी संगीत में बहुत रुचि रहती थी। लिहाजा उन्होंने बचपन में ही संगीत की शिक्षा ली थी। मात्र 14 साल की उम्र में ही इलैया राजा ने रुरल फोक संगीत को एक्सपोज करना शुरू कर दिया था।उन्होंने पवलर ब्रदर्स ग्रुप ज्वाइन कर लिया था जो एक ट्रेवलिंग म्यूजिकल ग्रुप था
इलैया राजा ने लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज से म्यूजिक का कोर्स किया है। जहां पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें उनकी बेहतरीन इंस्ट्रूमेंटल परफॉर्मेंस के लिए #गोल्ड_मेडल से नवाजा गया था। उन्होंने टी.वी.गोपाल से कर्नाटक म्यूजिक की भी शिक्षा ली।
इलैयाराजा ने गिटारिस्ट के तौर पर करियर की शुरुआत की थी। लंदन से लौटने के बाद उन्होंने एक बैंड के साथ सेशन गिटारिस्ट के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। ये बैंड म्यूजिक कंपोजर और डायरेक्टर साहिल चौधरी का था। यहीं पर #साहिल_चौधरी ने इलैया राजा को कह दिया था कि आने वाले समय में वो बेस्ट म्यूजिक कंपोजर बनने वाले हैं।इलैया राजा अबतक अच्छे म्यूजिशियन माने जाने लगे थे। उन्होंने इसके बाद कंपोजर जी.के.वैंकटेश के पास असिसटेंट म्यूजिक कंपोजर को तौर पर काम करना शुरू कर दिया। दोनों की जोड़ी ने लगभग 200 कन्नड़ फिल्मों में साथ में काम किया। ऐसे में इलैया को जब भी समय मिलता वो सेशन म्यूजिक के साथ भी म्यूजिक कंपोज करने लगे। जी.के वैंकटेश के साथ इलैया राजा ने म्यूजिक कंपोजिशन के बारे में बहुत कुछ सीखा।
इलैया राजा को 1975 में फिल्म प्रोड्यूसर पंजू अरुणाचलम ने अपनी फिल्म अन्नाकली के लिए म्यूजिक कंपोज करने के लिए दिया। इस फिल्म में इलैया ने मॉडर्न और तमिल फोक म्यूजिक को मिलाकर बेहतरीन म्यूजिक बनाया। जिसे लोगों का खूब प्यार मिला और इलैया को बेहतरीन म्यूजिक कंपोजर के रुप में पहचान।
इलैयाराजा ने 1980 के दौर में तमिल कवियों के साथ मिलकर उनकी कविता के लिए म्यूजिक तैयार करना शुरू कर दिया था और फिल्मकारों को उनके कंपोजिशन बेहद पसंद भी आते थे। उन्होंने गुलजार, आर. बाल्की, मणि रत्नम, फाजिल, शंकर नाग के साथ भी कई फिल्मों में काम किया है।

इलैया राजा पहले भारतीय हैं जिन्होंने कंप्यूटर से गाने रिकॉर्ड करना शुरू किया था। 1986 में उन्होंने फिल्म विक्रम के लिए म्यूजिक कंपोज किया था। साथ ही इलैया राजा वेस्टर्न क्लॉसिक म्यूजिक हार्मोनी को भारतीय कंपोजिशन में यूज करने वाले पहले भारतीय थे।

उन्होंने फिल्म नायकन (1987) का साउंडट्रैक तैयार किया, जो एक भारतीय फिल्म है जिसे टाइम पत्रिका ने सर्वकालिक 100 सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में स्थान दिया है।
निर्देशक आर.के. सेल्वमनी की फिल्म चेम्बरुथी (1992) के लिए इलैयाराजा ने मात्र 45 मिनट में 9 गाने तैयार किए, जो एक रिकॉर्ड है। अभिनेता रजनीकांत ने कहा कि इलैयाराजा बिना सोए एक ही दिन में तीन फिल्मों की री-रिकॉर्डिंग पूरी कर लेते थे , जबकि आज की पीढ़ी के संगीतकार एक फिल्म के लिए 30 दिन लेते हैं।
भारतीय सिनेमा के 100 साल पूरे होने पर CNN-IBN द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार इलैया राजा को ऑल टाइम ग्रेटेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर के लिए सबसे ज्यादा वोट दिए गए थे। वहीं इलैया को अमेरिकी वर्ल्ड सिनेमा पोर्टल ‘टेस्ट ऑफ सिनेमा’ ने दुनिया के 25 सबसे बेहतरीन म्यूजिक कंपोजर में 9वें नंबर पर जगह दी है। इस लिस्ट में शामिल होने वाले इलैया राजा पहले भारतीय म्यूजिक कंपोजर हैं।
इलैया राजा को 3 बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन और 2 बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक के लिए 5 बार नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं इंटरटेनमेंट जगत में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने 2010 में पद्म भूषण और 2018 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया है
2012 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी  अवॉर्ड से भी सम्मानित किये जा चुके हैं। वे जुलाई 2022 से भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा में मनोनीत सांसद हैं। 2025 में, वे लंदन में एक पूर्ण पश्चिमी शास्त्रीय सिम्फनी की रचना, रिकॉर्डिंग और लाइव प्रस्तुति करने वाले पहले एशियाई और भारतीय फिल्म संगीतकार बने।
अजंता-एलोरा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल (AIFF)जो सिनेमा की दुनिया का एक बड़ा जश्न है, अपने 11वें संस्करण के साथ लौट रहा है। यह फेस्टिवल 28 जनवरी से 1 फरवरी, 2026 तक छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र में होगा। इस बार प्रतिष्ठित पद्मपाणि पुरस्कार महान संगीतकार श्री इलैयाराजा जी को मिलने वाला है।
उन्हें “(संगीत ऋषि) उपनाम से जाना जाता है और अक्सर उन्हें ” मास्ट्रो ” कहा जाता है, यह उपाधि उन्हें लंदन के रॉयल फिलहारमोनिक ऑर्केस्ट्रा
द्वारा प्रदान की गई थी ।
इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी के बोर्ड सदस्य अचिले फोरलर ने 2017 में कहा, “इलैयाराजा ने पिछले 40 वर्षों में जिस तरह का उत्कृष्ट काम किया है, उसे देखते हुए उन्हें दुनिया के शीर्ष 10 सबसे अमीर संगीतकारों में एंड्रयू लॉयड वेबर (1.2 बिलियन डॉलर) और मिक जैगर (300 मिलियन डॉलर से अधिक) के बीच कहीं स्थान मिलना चाहिए था।”
ब्रिटिश संगीतकार #एंडी_वोटेल ने एक निबंध में इलैयाराजा का वर्णन इस प्रकार किया, “संगीत की आप चाहे जिस भी शैली को पसंद करें/प्यार करें/प्रचारित करें/संरक्षित करें/राजनीतिकरण करें/अति-बौद्धिकरण करें/घृणा करें/बचाव करें या आनंद लेने का दिखावा करें, इलैयाराजा ने वह सब किया है।
कर्नाटक गायक टीएम कृष्णा ने कहा कि किसी अन्य फिल्म संगीतकार ने इलैयाराजा की तरह संगीत की व्यापक समझ का प्रदर्शन नहीं किया है, और जिस तरह से वे खुद को ढालते हैं और संगीत की रचना करते हैं। वह “अथाह” है, जो उन्हें “पूर्ण उस्ताद” बनाता है।
1991 में आई फिल्म थलपति के लिए इलैयाराजा द्वारा रचित संगीत को द गार्जियन की ” मरने से पहले सुनने लायक 100 एल्बम” सूची में शामिल किया गया था ।
2003 में BBC द्वारा 165 देशों के आधे मिलियन से अधिक लोगों के बीच किए गए एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार , थलपति फिल्म का उनका गीत ” रक्कम्मा कैया थट्टू ” सर्वकालिक 10 सबसे लोकप्रिय गीतों में चौथे स्थान पर रहा। छायाकार संतोष सिवन ने बताया कि इलैयाराजा ने फिल्म थलपति के पूरे संगीत की रचना “आधे दिन” से भी कम समय में पूरी कर ली थी। मुंबई में आर.डी. बर्मन के ऑर्केस्ट्रा के साथ फिल्म थलपति के गीत “सुंदरी” की रिकॉर्डिंग के दौरान , जब इलैयाराजा ने सुर दिए, तो सभी संगीतकार इतने भावुक हो गए कि उन्होंने श्रद्धापूर्वक हाथ जोड़कर उन्हें सम्मान के प्रतीक के रूप में स्टैंडिंग ओवेशन दिया था।
उन्होंने अनगिनत रिकॉर्ड बनाए हैं, जिनकी गिनती ही नहीं है।ईसाई धर्म में जन्म और पालन-पोषण होने के बावजूद इलैयाराजा ने हिंदू धर्म अपना लिया है,और तमिल हिंदू संत रमण महर्षि को अपना आध्यात्मिक गुरु मानते हैं। 2018 में, अमेरिका में एक टॉक शो के दौरान, इलैयाराजा ने ईसा मसीह के पुनरुत्थान में ईसाई विश्वास की विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त किया और दावा किया कि पुनरुत्थान केवल हिंदू संत रमण महर्षि के मामले में हुआ था । उन्होंने कथित तौर पर कहा, “मैं नियमित रूप से यूट्यूब पर वृत्तचित्र देखता हूं। उनमें कहा जाता है कि ईसा मसीह का पुनरुत्थान नहीं हुआ था।” विरोध में, एक ईसाई समूह ने तिरुचि के पुलिस आयुक्त के पास शिकायत दर्ज कराई और इलैयाराजा के खिलाफ पुलिस कार्रवाई या उनसे माफी मांगने की मांग की, क्योंकि उन्होंने “ईसाइयों के परम विश्वास” पर संदेह जताया था।

फ़िर भी इलैया राजा जी ने माफ़ी नहीं मांगी अडिग रहे। एक तरफ़ है दिलीप कुमार से अल्लारक्खा बने । AR रहमान जिनको भारत के सर्व समाज ने इतना प्यार सम्मान दिया की इन्हें अपच हो गयी। दूसरी तरफ हैं दूसरे संगीतकार जो ईसाई से हिंदू बन गए, विश्व के टॉप 9 महान संगीतकार बन गए ऐसे ऐसे अवार्ड जीते सम्मान मिले रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना दिए।

वैश्विक दक्षिण में भारत का नेतृत्व !

वैश्विक दक्षिण जिसे “तीसरी दुनिया” के नाम से जाना जाता है। विकासशील नवोदित राष्ट्र- राज्यों का समूह है जो वित्त,  तकनीकी, विशेषज्ञता ,तकनीकी शोध, नवाचार एवं  नवोन्मेष में पिछड़े हुए हैं। मौलिक स्तर पर ये राष्ट्र – राज्य गरीबी, बीमारी, आतंकवाद और उग्रवाद से पीड़ित हैं। विकसित राष्ट्र राज्यों के द्वारा जलवायु न्याय के लिए अत्याचार, वैश्विक स्तर के साम्यवादी  दादाओं (रूस एवं चीन) और वैश्विक दरोगा (संयुक्त राज्य अमेरिका) के भितरघाती राजनीति व नव  उपनिवेशवादी राजनीति ग्रसित राष्ट्र – राज्यों से ‘ आर्थिक सहायता ‘ की आवश्यकता है।
  हर वैश्विक मंच पर ‘ ग्लोबल साउथ’ के हितों को पूरी मजबूती से उठा रहा है। भारत का यह सदप्रयास है कि जो भी नवाचार करें उसे संपूर्ण ‘ ग्लोबल साउथ’  एवं ‘ कॉमनवेल्थ   देशों ‘ को फायदा हों। भारत वैश्विक मंचों पर विकासशील एवं अल्प- विकसित देशों के मुद्दों को मजबूती से उठा रहा है। भारत सभी लोकतांत्रिक देशों  के विकास में निरंतर सहयोग कर रहा है। लोकतांत्रिक संस्थाएं और प्रक्रियाएं वर्तमान में लोकतंत्र को स्थिरता, गति एवं व्यापकता प्रदान  कर रही है। भारत वैश्विक स्तर का तेजी से उभरता प्रमुख अर्थव्यवस्था है जिसका विकास दर 7%  के रफ्तार से उदीयमान अर्थव्यवस्था बना हुआ है। भारत के जन- केंद्रित नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं एवं  लोकसम्मत  विधियों से लोकतंत्र एवं लोकतांत्रिक संस्कृति में उन्नयन हो रहा है।
समकालीन वैश्विक परिदृश्य में भारत के दूरदर्शी और राजनय में  कौशल केंद्रित नेतृत्व इन विकासशील राष्ट्र- राज्यों को नेतृत्व दिया है। भारत सुरक्षा और संरक्षण में  दक्षिण एशिया में” बड़े भाई” की भूमिका में नेतृत्व कर रहा है तो विकासशील राष्ट्र – राज्यों को औषधि के क्षेत्र में सहयोगी राज्य प्रत्यय की भूमिका का निर्वहन कर रहा है। भारत वैश्विक उत्तर और वैश्विक दक्षिण के’ खाई’ को  मिटाने का सफलतम और दूरदर्शी प्रयास कर रहा है। भारत इन राष्ट्र- राज्यों के लिए संरक्षक की भूमिका में  भय और हताशा को मिटाने का प्रयास कर रहा है जिससे जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास पर एकीकृत और सांगठनिक दृष्टिकोण का उन्नयन किया जा  सकें।भारत अपने नेतृत्व और उभरते व्यक्तित्व के द्वारा लोकतांत्रिक शासन( वैश्विक स्तर पर तानाशाही की समाप्ति), मानवाधिकार( प्रत्येक राष्ट्र- राज्य अपने घरेलू संवैधानिक व्यवस्था में मानवाधिकार को सुरक्षा और लिपिबद्ध करें) एवं मानवाधिकार की सुरक्षा में अपना  यथोचित प्रयास करें।
बुनियादी ढांचे और औद्योगिक संरचना में निवेश को प्रोत्साहित करना है। भारत का विचार है कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों को स्थानीय चुनौतियों का सामना एवं समाधान करने के लिए सबल करना है। वैश्विक दक्षिण की जटिल सामूहिक चुनौतियों के लिए लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा ,जलवायु और बहुपक्षीय शासन को संबोधित करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की सामयिक  परिवेश में आवश्यकता है। वैश्विक दक्षिण के समूह, राष्ट्र- राज्यों में नवीकरणीय ऊर्जा, विकास क्षेत्र, टिकाऊ कृषि ,वानिकी प्रथाओं, पारिस्थितिक पर्यटन संरक्षण प्रयास, जलवायु लचीलापन और अनुकूलन पहल और हरित बुनियादी ढांचा विकास में सराहनीय पहल किया है। इन देशों ने डिजिटल तकनीकी, नवाचार  केंद्रों के उन्नयन, आईटी, सॉफ्टवेयर उद्योग, डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन ,ई-कॉमर्स, ऑनलाइन बाजार, जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा में अग्रतर उन्नति की है। इन सभी परिस्थितियों में वैश्विक दक्षिण के राष्ट्र – राज्यों के लिए भारत का नेतृत्व समकालीन में आशा की किरण प्रतीत हुआ है जो अन्य राष्ट्र- राज्यों के लिए समान सहयोग और सतत विकास के लिए अनथक प्रयास कर रहा है।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन( नाम) का नेतृत्व करने के अपने गरिमामई और उज्जवल इतिहास के साथ- साथ उभरता भारत समकालीन में वैश्विक भू- राजनीति में एक गतिशील एवं ऊर्जावान भूमिका निभाने के लिए अपने सामाजिक आर्थिक, सामरिक और भू – राजनीतिक और शक्ति संरचना को उन्नयन कर रहा है। वैश्विक स्तर पर महा शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा  बढ़ाने में सहयोग की संकल्पना दुर्लभ प्रत्यय हो चुका है। कोविड महामारी, रूस- यूक्रेन युद्ध, इजरायल ईरान संकट, वेनेजुएला संकट और वैश्विक स्तर पर गुटिकरण की राजनीति, एकाधिकार प्रभुत्व राजनीति, एकध्रवीय वैश्विक व्यवस्था बनाने की राजनीति, आर्थिक एवं राजनीतिक संगठनों ने ‘ वैश्विक दक्षिण ‘ की संकल्पना को प्रसांगिक बना दिया है। भारत  वैश्विक दक्षिण के लिए प्रमुख ‘ राज्यकारक ‘ के रूप में उभर रहा है जो वैश्विक दक्षिण के राष्ट्र – राज्यों के राष्ट्रीय हितों और भू – राजनीति के मुद्दों को वैश्विक मंच पर जोरदार ढंग से उठा रहा है। वैश्विक स्तर पर सामाजिक आर्थिक असमानता, भुखमरी, आतंकवाद ,हथियारबंद अंतरराज्यीय  समस्याएं  बढ़ी हैं।
भारत ने वर्ष 2023 में  जी- 20की अध्यक्षीय मंच से वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती से उठाया था, ब्रिक्स के मंच से भी वैश्विक दक्षिण की आवाज को, वैश्विक अध्यक्षीय सम्मेलन के मंच एवं संयुक्त राष्ट्र के मंच से भी  ‘ वैश्विक दक्षिण’ की आवाज को बढ़ाया है। वैश्विक संबंधों में यह क्रांतिकारी अवसर संस्थाओं को “समावेशी विश्व व्यवस्था” बनाने में महत्वपूर्ण और प्रेरक भूमिका निभा रहा है। भारत वैश्विक दक्षिण राष्ट्रों में ‘ अग्रणी ‘ की भूमिका में नेतृत्व कर रहा है, जिसने वैश्विक स्तर के मंचों के भीतर एवं उनमें एक मजबूत समर्थन नेटवर्क बनाने के लिए अपने ‘ राज्यकारक ‘ नेतृत्व में राजनीतिक कारक की भूमिका बना रहा है।
(लेखक  अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना केशवकुंज,  झंडेवालान  नई दिल्ली के राष्ट्रीय संगठन सचिव हैं) 

टैरिफ के बावजूद वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक विकास दर शिखर पर

दिनांक 1 फरवरी 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा भारतीय संसद में प्रस्तुत किए जाने वाले बजट के पूर्व वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के आर्थिक विकास से सबंधित प्रथम अग्रिम अनुमान के आंकड़े 7 जनवरी 2026 को जारी किए गए है। इस अनुमान के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में सकल घरेलू उत्पाद में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल हुई थी जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 7.4 प्रतिशत रहने की सम्भावना व्यक्त की गई है। सकल घरेलू उत्पाद से सम्बंधित प्रथम अग्रिम अनुमान के आंकड़ों के आधार पर ही वर्ष 2026-27 के बजट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। आर्थिक विकास से सम्बंधित द्वितीय अग्रिम अनुमान 27 फरवरी 2026 को जारी किए जाने हैं। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में भारतीय रिजर्व बैंक का अनुमान भी 7.3 प्रतिशत की वृद्धि का ही है परंतु भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक अनुसंधान विभाग का अनुमान 7.5 प्रतिशत अथवा इससे अधिक का है। भारत की आर्थिक विकास दर विश्व के सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे अधिक रहने की सम्भावना विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियन विकास बैंक (7.2 प्रतिशत), फिच नामक रेटिंग संस्थान (7.4 प्रतिशत) आदि संस्थानों ने भी व्यक्त की है।

भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वित्तीय वर्ष 2024-25 में हासिल की गई 6.5 प्रतिशत की वृद्धि से आगे बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने के कुछ मुख्य कारणों में शामिल हैं – (1) केंद्र सरकार के स्थिर उपभोग खर्च (Govt Fixed Consumption Expenditure) में वृद्धि दर जो वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2.3 प्रतिशत की रही थी, वह बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5.2 प्रतिशत रहने की सम्भावना है; (2) विनिर्माण के क्षेत्र में वृद्धि दर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4.5 प्रतिशत की रही थी जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 7.0 प्रतिशत रहने की सम्भावना है; (3) सकल मान योग (Gross Value Addition) में वृद्धि दर का 6.4 प्रतिशत से बढ़कर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है; (4) सकल स्थिर पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation) में वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत से बढ़कर 7.8 प्रतिशत रहने की सम्भावना व्यक्त की गई है; (5) सेवा एवं कृषि क्षेत्र में क्रमश: 9.1 प्रतिशत एवं 3.1 प्रतिशत की सम्भावना व्यक्त की गई है; (6) भारत से विभिन्न उत्पादों के निर्यात में वृद्धि दर का 6.3 प्रतिशत से बढ़कर 6.4 प्रतिशत रहने की सम्भावना होना भी शामिल है।

अप्रेल 2025 से नवम्बर 2025 के खंडकाल में राजकोषीय घाटा 9.8 लाख करोड़ का रहा है जो वित्तीय वर्ष 2025-26 के कुल अनुमान का 62.3 प्रतिशत है, अतः बजटीय घाटा भी अभी तक नियंत्रण में ही रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा 15.69 लाख करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया था, जो सकल घरेलू उत्पाद का 4.4 प्रतिशत होगा। इस प्रकार केंद्र सरकार की आय एवं व्यय से सबंधित स्थिति भी पूर्णत: नियंत्रण में है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर के 7.4 प्रतिशत के अनुमान को उत्साहवर्धक माना जाना चाहिए क्योंकि यह वृद्धि दर ट्रम्प द्वारा भारत से अमेरिका को होने वाले विभिन्न वस्तुओं के निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बावजूद रहने वाली है। दरअसल ट्रम्प द्वारा भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर लगाए गए टैरिफ को वित्तीय बाजार में बहुत गम्भीरता से लिया जाकर इसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर होने वाले प्रभाव को बहुत बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया है। परंतु, वास्तव में भारत के आर्थिक विकास दर पर इसका प्रभाव लगभग नहीं के बराबर रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण अमेरिका को भारत से होने वाले निर्यात की कम मात्रा भी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत से अमेरिका को 7,900 करोड़ अमेरिकी डॉलर के विभिन्न वस्तुओं के निर्यात हुए थे, जबकि भारत का सकल घरेलू उत्पाद 4.29 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहा था। अतः भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात भारत के सकल घरेलू उत्पाद का मात्र 1.85 प्रतिशत ही रहे हैं।

वैसे भी भारत की अर्थव्यवस्था निर्यात आधारित है ही नहीं (चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात आधारित है, इसीलिए चीन पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव अधिक हो सकता है), भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्यतः आंतरिक उपभोग पर आधारित है। यदि भारत के नागरिक स्वदेशी उत्पादों का अधिक से अधिक सेवन करते हैं तो ट्रम्प द्वारा भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर लगाए गए टैरिफ के भारतीय अर्थव्यवस्था पर होने वाले प्रभाव को शून्य भी किया जा सकता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा भी भारतीय समाज को लगातार प्रेरणा दी जा रही है कि वे भारत में निर्मित उत्पादों का ही उपयोग करें ताकि भारत को प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सके। संघ ने पंच परिवर्तन  नामक एक कार्यक्रम को प्रारम्भ किया है, जिसमें पांच बिंदु शामिल किए गए हैं – स्वदेशी का उपयोग, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता, पर्यावरण, कुटुंब प्रबोधन। भारत में समस्त नागरिकों का यह कर्तव्य है कि वे सनातन हिंदू संस्कृति के संस्कारों का अनुपालन सुनिश्चित करें। इन संस्कारों में भारत के नागरिकों में “देश प्रथम” के भाव का जागरण भी शामिल है। लोकतंत्र की सफलता और स्थिरता नागरिकों की भागीदारी और कर्तव्यों के प्रति सजगता पर निर्भर करती हैं। जब नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनशील होते हैं और उनका ईमानदारी से पालन करते हैं तो समाज में सकारात्मक बदलाव आते हैं और देश की प्रगति होती हैं। समाज की प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए नागरिकों की अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनशीलता तथा कटिबद्धत्ता आवश्यक है। करों का समय पर और सही राशि का भुगतान करना नागरिकों का कर्तव्य है। देश की आर्थिक प्रगति के लिए करों का उचित प्रबंधन आवश्यक है। प्रत्येक नागरिक का यह भी कर्तव्य है कि वह समाज की भलाई के लिए स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास जैसी सामाजिक सेवाओं में भाग लें।

किसी भी देश के नागरिक यदि स्वदेशी उत्पादों को अपनाना प्रारम्भ करते हैं तो इससे देश में उद्योगों को बढ़ावा मिलता है, अन्य देशों में उत्पादित वस्तुओं का आयात कम होता है और देश में ही रोजगार के नए अवसर निर्मित होते हैं। स्वदेशी का मतलब विदेशी सामान इस्तेमाल नहीं करना है परंतु यह कार्य इतना आसान नहीं है क्योंकि आज विश्व के समस्त देश एक वैश्विक गांव में परिवर्तित हो गए हैं, जिसके चलते उत्पादों का एक देश से दूसरे देश में आयात एवं निर्यात बहुत आसान बन पड़ा है। आचार्य श्री विनोबा भावे जी कहते हैं स्वदेशी का अर्थ है आत्मनिर्भरता और अहिंसा। संघ ने इसमें एक बिंदु जोड़ दिया: आत्मनिर्भरता, अहिंसा और सादगी। प्रत्येक भारतीय नागरिक से अपेक्षा की जाती है कि वह मितव्ययिता से जिए ताकि संसाधनों के दुरुपयोग को रोका जा सके। परंतु, इसका आश्य  कंजूसी करना कदापि नहीं है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे सामाजिक संगठनों के साथ ही केंद्र सरकार ने भी आर्थिक क्षेत्र में कई प्रयास किए हैं जिसके चलते हाल ही के समय में भारत की आर्थिक विकास दर में वृद्धि दर में लगातार सुधार दिखाई दिया है। विशेष रूप से ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारत से अमेरिका को होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत के टैरिफ के प्रभाव को लगभग शून्य करने के उद्देश्य से भारत ने विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते सम्पन्न किए हैं, इनमे विशेष रूप से शामिल हैं यूनाइटेड किंगडम, ओमान, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, आदि। यूरोपीयन देशों के साथ भी मुक्त व्यापार समझौता शीघ्र ही सम्पन्न होने जा रहा है। सम्भवत 27 जनवरी 2026 को इस मुक्त व्यापार समझौते पर यूरोपीयन यूनियन एवं भारत द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे। साथ ही, अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों के आयात पर लगाए गए 50 प्रतिशत के टैरिफ से प्रभावित होने वाले उत्पादों के लिए भारत ने अन्य देशों के रूप में बाजार तलाश लिए हैं एवं इन देशों को विभिन्न उत्पादों का निर्यात प्रारम्भ हो चुका है जिससे नवम्बर 2025 एवं दिसम्बर 2025 माह में भारत से विभिन्न उत्पादों के निर्यात में वृद्धि दर हासिल की जा सकी है।

वैसे, भारत और अमेरिका के बीच भी मुक्त व्यापार समझौते को लगभग अंतिम रूप दिया जा चुका है एवं शीघ्र ही इसकी घोषणा की जा सकती है। इसके बाद तो भारतीय उत्पादों के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत को भी कम अथवा समाप्त किया जा सकता है, इससे अन्य देशों के साथ साथ अमेरिका को भी भारत से होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्यात में और अधिक वृद्धि हासिल की जा सकेगी।

प्रहलाद सबनानी
सेवानिवृत्त उपमहाप्रबंधक,
भारतीय स्टेट बैंक
के-8, चेतकपुरी कालोनी,
झांसी रोड, लश्कर,
ग्वालियर – 474 009
मोबाइल क्रमांक – 9987949940

ई-मेल – prahlad.sabnani@gmail.com

शाकद्वीपीय मग ब्राह्मणों का शास्त्रीय विवेचन

शाकद्वीप के राजा प्रियव्रत के पुत्र ‘मेघातिथी’ थे। उन्होंने शाकद्वीप में एक विशाल सूर्य नारायण मंदिर का निर्माण करवाया था। उसमें स्वर्ण निर्मित सूर्य प्रतिमा स्थापित की गई थी। उस समय शाकद्वीप में सूर्य भगवान की शास्त्र विधि से पूजा करने वाला कोई ब्राह्मण नहीं था

भगवान सूर्य ने तदुपरान्त मेघातिथी की प्रार्थना पर अपने तेज से अष्ट ब्राह्मण उत्पन्न किये। इन ब्राह्मणों ने सूर्य भगवान की आज्ञा शिरोधार्य कर मंदिर में सूर्य मुर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की तथा सूर्य भगवान की विधि-विधान से नियमित पूजा-अर्चना करने लग गये। तभी से इन ब्राह्मणों को शाकद्वीपी ब्राह्मण के नाम से पुकारा जाने लगा।

द्वापर में जम्बूद्वीप में आगमन
शाकद्वीपीय ब्राह्मणों का जम्बूद्वीप में आगमन पुराणों के अनुसार द्वापर में हुआ । भगवान कृष्ण के पुत्र साम्ब को ऋषि दुर्वासा ने ही कुष्ठ रोग का श्राप दिया था, क्योंकि उन्होंने ऋषि का उपहास किया था । उनके रूप को लेकर मजाक उड़ाया था। साम्ब ने द्वारका आए ऋषि दुर्वासा का उनकी कृशता और कुरूपता पर उपहास किया, जिससे क्रोधित होकर ऋषि ने उन्हें कुष्ठ रोग का श्राप दिया था। एक अन्य कथा में नारद जी के बहकावे में आकर

राजकुमार सांब ने श्रीकृष्ण की कनिष्ठ पत्नी नंदिनी के साथ अनुचित व्यवहार किया था, जिससे क्रोधित होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें कुष्ठ रोग का श्राप दिया था। बाद में भगवान कृष्ण अपने पुत्र साम्ब के कुष्ठ रोग से अत्यन्त चिंतित भी हुए। उन्हें एक विप्र जाति के संबंध में जानकारी हुई जो शाकद्वीप में रहती थी।जो अपने सूर्यमंत्र और चिकित्सा के लिए प्रख्यात थी। भगवान नें शाक द्वीप के अट्ठारह परिवारों को जम्बू द्वीप में सम्मान पूर्वक बुलवाया। शाकद्वीपीय चिकित्सको ने साम्ब के कुष्ठ रोग को अपने आध्यात्मिक चिकित्सा से समाप्त कर दिया।

राजा धृष्टकेतु के कुष्ठ का भी इलाज :-
उन ब्राह्मणों को द्वारका में ज्यादा समय व्यतीत करना अच्छा न लगा और गरुड़ पर सवार हो कर शाकद्वीप की ओर जा रहे थे। जब वे मगध-देश के ऊपर पहुंचे तो वहाँ रोना-पीटना सुनाई पड़ा। ब्राह्मण लोग बड़े व्यग्र थे। उनके पूछने पर गरुड़ ने कहा कि मगध-देश के राजा धृष्टकेतु को कोढ़ हो गया है इसी कारण उसने मरने की ठान ली है और चिता के लिये लकड़ियों का ढेर लगा है। राजा बड़ा धर्मात्मा है और उसके राज में सब सुखी हैं। इसी से उसकी सब प्रजा उसके लिये रो रही है। ब्राह्मणों को दया आई और उन्होंने गरुड़ से कहा कि ‘क्या इस देश में ऐसा तपस्वी नहीं है जो राजा को इस रोग से मुक्त करे? गरुड़ ने उत्तर दिया यहाँ ऐसा कोई होता तो शाम्ब आप लोगों को क्यों बुलाते। ब्राह्मणों ने गरुड़ से कहा कि पृथ्वी पर उतरो। राजा उनके दर्शनों से कृतकृत्य हो गया। मिहरांशु ने उसे अपना चरणोदक पिलाया और राजा का कोढ़ अच्छा हो गया।

राजा धृष्टकेतु ने मगध में शाक द्वीपियों को बसाया
जब ब्राह्मणों ने राजा धृतकेतु को निरोग करने के बाद गरुड़ से कहा कि हमें शाकद्वीप पहुँचा दो। तब गरुड़ ने कहा कि आप से प्रतिज्ञा करा चुका हूँ अब आप यहीं रहिये। कृतज्ञ राजा ने ब्राह्मणों को अपने देश में आदर से रक्खा और गङ्गा-तट पर कई गाँव दिये। ब्राह्मणों से चार अर्थात् श्रुतिकीर्ति, श्रुतायु, सुधर्म्मा, और सुमति ने सन्यास ले लिया और तपस्या करने को बदरिकाश्रम चले गये। शेष 14 मगध में रहे और वसु ने अपनी बेटियाँ उनको विवाह दी। उन्हीं की सन्तान आज-कल मगध देश में बसी है। मगध नरेश की आग्रह पर भगवान ने शाकद्वीपीय चिकित्सको के बहत्तर परिवारों को मगध के विभिन्न पुरों में बसा दिया।

त्रेता युग में राजा प्रतर्दन द्वारा शाकद्वीपी राजवंश का विस्तार :-

काशी के राजा प्रतर्दन त्रेतायुग में हुए थे।  वे काशी के प्रसिद्ध राजा दिवोदास के पुत्र थे।

इनके अन्य नाम ‘द्युमान’, ‘शत्रुजित’, ‘वत्स’, ‘ऋतध्वज’ और ‘कुवलयाश्व’ भी मिलते हैं।

उनके पिता दिवोदास ने काशी में शासन किया था और वे त्रेतायुग के अंतिम चरण या द्वापर युग के शुरुआती दौर से पूर्व का समय मानते हैं, क्योंकि वे राम के पूर्वज के समकालीन संदर्भों में एक शक्तिशाली क्षत्रिय शासक के रूप में वर्णित किया गया है। वे अत्यंत तपस्वी और दूरदर्शी थे। उनके कठिन तप को देखकर सूर्य भगवान् स्वयं प्रसन्न हुए और उन्होंने सात ब्राह्मणों को आशीर्वाद दिया। उन ब्राह्मणों की संतानों ने पृथ्वी पर धर्म और न्याय का प्रचार किया।”

समय के साथ शाकद्वीपी राजवंश का विस्तार हुआ। मिहरांशु, शुभांशु, सुधर्मा, सुमति और अन्य ब्राह्मणों की संतानों ने विभिन्न क्षेत्रों में शाखाएँ बनाई। प्रत्येक शाखा ने अपने-अपने क्षेत्र में धर्म और ज्ञान का प्रचार किया।

गोत्र और शाखाएं
मिहरांशु, भारद्वाज, कौण्डिन्य, कश्यप, गर्ग की सन्तान बढ़ी और प्रसिद्ध हुई। इसी कारण शाकद्वीपियों के छः घर बन गये और प्रत्येक घर के मूल-पुरुष का नाम गोत्र कहलाया। आज-कल शाकद्वीपियों के 72 घर गिने जाते हैं, अर्थात् उर के 24 आदित्य के 12, मण्डल के 12 और अर्क 7 घर या पुर अस्तित्व में आए। शेष इन्हीं की शाखायें हैं।

मिहरांशु की प्रतिष्ठित शाखा रही:-

मिहरांशु की सन्तान ने बड़े – बड़े काम किये थे इसलिये उनकी शाखा अधिक प्रतिष्ठित मानी जाती है। जो शाखा जिस गाँव में बसी उसी गाँव के नाम से प्रसिद्ध हुई।

मगध चेदि नरेश ने शाकद्वीपीय ब्राह्मणों को मगध में बसाया :-
शाकद्वीपीय ब्राह्मणों की दो मुख्य शाखा ‘मग ब्राह्मण’ तथा ‘भोजक’ ब्राह्मण’ माने जाते हैं । मग ब्राह्मण मूलतः मगध (गया, बिहार) के निवासी बताये जाते हैं। शकद्वीपीय ब्राह्मण मुख्यतः मगध के थे, अतः उनको मग भी कहा गया है। मग के दो ब्राह्मण विक्रमादित्य काल में जेरूसलेम गये थे जो उस समय रोम के अधीन था। रोमन राज्य तथा विक्रमादित्य राज्य के बीच कोई अन्य राज्य नहीं था। इन लोगों ने ही ईसा के महापुरुष होने की भविष्यवाणी की थी। किन्हीं ग्रन्थों में द्वारका शाकद्वीप में स्थित कही गई है। वेद तथा पुराणों में इनका उल्लेख ब्राह्मणों की एक सर्वोत्तम जाति के रूप में है जिनका जन्म सूर्यदेव के अंश से हुआ था।

चेदि के राजा धृष्टकेतु के कुष्ठ का इलाज
चेदि राज्य का राजा और शिशुपाल का सबसे बड़ा पुत्र धृष्टकेतु है। धृष्ट का अर्थ है “साहसी,” “प्रवंचित,” या “साहसी” और केतु का अर्थ – “झंडा,” “पट्टिका,” या “प्रतीक” होता है । धृष्टकेतु शिशुपाल के पुत्र हैं , जो अपनी मातृ पक्ष से यदु के वंशज दशार्ह वंश से संबंधित हैं। धृष्टकेतु यह नाम धृष्टद्युम्न के पुत्र सहित कई अन्य व्यक्तियों के साथ साझा करते हैं । वह

एक महान धनुर्धर और महारथ थे । धृष्टकेतु को युधिष्ठिर की सेना के सात सेनापतियों में से एक नियुक्त किया गया था। युद्ध के दौरान, धृष्टकेतु ने कई दुर्जेय योद्धाओं से युद्ध किया था। वह पांडवों का वफादार सहयोगी है और कुरुक्षेत्र युद्ध में एक प्रमुख भूमिका निभाता है , जहाँ उसने उनकी सेना के सात सेनापतियों में से एक के रूप में कार्य किया है। कुरुक्षेत्र के युद्ध में उसने बहुत से योद्धाओं से युद्ध किया और वृहदवाहन का वध किया। उस सहित उसके तीनों भाइयों – पुरूजीत, धृष्टकेतु और वृहद्क्षत्र का वध चौदहवें दिन के युद्ध में द्रोणाचार्य के हाथों हुआ था। धृष्टकेतु ने अपनी मृत्यु के बाद स्वर्ग में ‘विश्वदेव’ का दर्जा प्राप्त किया था।

मगध चेदि नरेश जरासंघ के इस पूर्वज धृष्टकेतु को कुष्ठ हो गया था। जिनके उपचार के लिए शाकद्वीपीय ब्राह्मणों को मगध में लाया तथा कुष्ठ से त्राण पाकर उपहार स्वरूप उन्हें अठारह पुर (ग्राम) दिये तथा प्रत्येक के चार चार पुत्र उत्पन्न हुआ और वे सब पृथक पृथक 72 पुरों (ग्रामों) में निवास करने लगे । मगध- चेदि नरेश ने शाकद्वीपीय ब्राह्मणों के बहत्तर परिवारों को मगध के विभिन्न पुरों में बसा दिया गया । वहां से ये लोग भारत के विभिन्न भागों में फ़ैल गए । जैसे बिहार और उत्तरी भारत के अन्य भागों में एक प्रसिद्ध समुदाय है। इनकी दो उपशाखाएँ हैं- भोजक और मग। इनके गाँवों में अधिकांश सकलद्वीपी ब्राह्मणों के पास कृषि भूमि होती है, जिस पर भूमिहीन मजदूर खेती करते हैं। प्रत्येक शाक=सकलद्वीपी परिवार का अपना देवता होता है और वे पूर्वजों की पूजा करते हैं। उनके धार्मिक विशेषज्ञ भी उनके समुदाय से ही होते हैं। पुजारी और ज्योतिषी होने के नाते, सकलद्वीपी ब्राह्मणों का अन्य समुदायों के साथ संरक्षक-ग्राहक संबंध होता है।

पुराणों में उल्लेखित विवरण के पहले छठी पांचवी शताब्दी ई. पू. में शाकद्वीप से भारत आये उपयुक्त सभी साक्ष्यों से सवर्धा समर्थित हैं सूर्योपासक पुरोहितों को मग एवं भोजक इन दोनों श्रेणियों में विभाजित किया गया है । पुराणों के आन्तरिक साक्ष्य के आधार पर कहा जा सकता है कि मग और भोजक एक थे अन्तर मात्र इतना था कि –

(1) सूर्य का जो ध्यान करे उसे मग कहा जाता है । मग म अक्षर की पूजा करते थे म= मंत्र ग = गुरू मंत्रों के गुरू मग मे सूर्य गायन्तीति मगा:
(2) भोजक- धूप, दीप, माला से पूजन एवं विभिन्न उपहारों से सूर्य को भोग लगाते हैं उन्हे भोजक कहा जाता है ।

धूपमाल्यैर्मतश्चापि उपहारैस्तथैव च ।
भोजयन्ति सहस्रांशुं तेन ते भोजका: स्मृता: ।
यह भी सम्भव है कि भोजक भारतीय परम्परा के पुरोहित रहे हों। दोनों ही सूर्य के सकल एवं निष्कल रूप से उपासक थे ।

कालान्तर में भारत के कई प्रान्तों के रजवाड़ों द्वारा पूजा पाठ , रोग निवारण के लिए अपने अपने राज्यों में ले गये, जिनमें 72 पुरों में से 16 पुर के लोग पश्चिम में गये जो वहां गोत्र (खाप) से जाने गये।

लेखक परिचय:-

(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए सम सामयिक विषयों,साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करते रहते हैं। वॉट्सप नं.+919412300183)

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आत्मकथा ‘पालनिवेलु गट्स’ के हिंदी संस्करण का विमोचन किया

पुस्तक विमोचन पर उपराष्ट्रपति ने कहा, भारत एक रहा है और हमेशा एक रहेगा

अच्छा समाज बनाने के लिए व्यक्तिगत प्रयासों को पहचानना ज़रूरी है: उपराष्ट्रपति

प्रत्‍येक व्यक्ति का समाज को कुछ लौटाने का कर्तव्य है: उपराष्ट्रपति

प्रविष्टि तिथि: 19 JAN 2026 8:22PM by PIB Delhi

उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने जाने-माने सर्जन डॉ. सी. पलानीवेलु की आत्मकथा ‘पलानीवेलु गट्ज़’ के हिंदी संस्‍करण का विमोचन किया और इस किताब को साहस, लगन और मेडिसिन के क्षेत्र में नैतिक नवोन्‍मेष का एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

इस मौके पर, उपराष्ट्रपति ने डॉ. पलानीवेलु के लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी में अग्रणी योगदान को उजागर किया, और कहा कि उनके काम ने भारत में सर्जिकल तरीकों को बदल दिया है और उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देश में मिनिमली इनवेसिव सर्जरी अभी शुरुआती दौर में थी, डॉ. पलानीवेलु ने मरीज़ों की देखभाल में नवोन्‍मेष को गले लगाकर असाधारण दूरदर्शिता और साहस दिखाया।

भारत में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि 1990 के दशक की शुरुआत में डॉ. पलानीवेलु उन शुरूआती लोगों में से थे जिन्होंने इसकी क्षमता को पहचाना, तब भी जब इस तकनीक पर संदेह किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि डॉ. पलानीवेलु ने 1991 में कोयंबटूर में लेप्रोस्‍कोपिक सर्जरी शुरू की, और दक्षिण भारत में ऐसा पहला केन्‍द्र स्थापित किया।

किताब के शीर्षक, पालनिवेलु गट्स का ज़िक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह आत्मकथा सिर्फ़ एक सफल सर्जन की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे युवा की यात्रा है जिसने साधारण शुरुआत से लेकर अनुशासन, कड़ी मेहनत और नैतिक विश्वास के ज़रिए मुश्किलों और असफलताओं का मुकाबला किया। उन्होंने आगे कहा कि जब तक व्यक्तियों के ईमानदार प्रयासों और अनुकरणीय योगदान को पहचाना और सराहा नहीं जाता, तब तक एक अच्छा समाज नहीं बनाया जा सकता।

भारत की विविधता पर विचार करते हुए, उपराष्ट्रपति ने टिप्पणी की कि इतनी विविधताओं के बावजूद, भारत एक रहा है और साझा मूल्यों और सामूहिक आकांक्षाओं से बंधा हुआ हमेशा एक रहेगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदी संस्करण का विमोचन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समाज के एक बड़े वर्ग, विशेष रूप से हिंदी पढ़ने वालों को, इस उल्लेखनीय जीवन यात्रा तक पहुँचने और उससे प्रेरणा लेने में सक्षम बनाएगा।

डॉ. पलानीवेलु के अपने शिक्षकों और गुरुओं के प्रति गहरे सम्मान की सराहना करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके नाम पर पुरस्कार शुरू करने की उनकी प्रथा भारत की “गुरुओं” के प्रति श्रद्धा की सदियों पुरानी परंपरा को दर्शाती है और उत्कृष्टता की खोज में विनम्रता और कृतज्ञता के महत्व को रेखांकित करती है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि समाज हर व्यक्ति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और समाज को वापस देना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। दूरदराज के इलाकों में सर्जनों को प्रशिक्षित करने और लागत प्रभावी सर्जिकल तकनीकों को विकसित करने के डॉ. पलानीवेलु के प्रयासों की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि इन पहलों ने सामाजिक-आर्थिक समूहों में उन्नत चिकित्सा देखभाल तक पहुंच का काफी विस्तार किया है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पलानीवेलु गट्स पीढ़ियों को बड़े सपने देखने, ईमानदारी से काम करने और निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।

इस कार्यक्रम में रेल राज्य मंत्री, श्री रवनीत सिंह; नेशनल मेडिकल कमीशन के चेयरमैन, डॉ. अभिजात सेठ; इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन, प्रो. डॉ. जे. एस. राजपूत; और जीईएम हॉस्पिटल ग्रुप के सीनियर प्रतिनिधियों सहित कई लोग शामिल हुए।

शिखा अग्रवाल को अंग्रेजी कविता में डिप्लोमा प्रमाणपत्र

कोटा / लेखिका शिखा अग्रवाल को अंग्रेजी कविता में ऑन लाइन पोईट्स नेस्ट इंटरनेशनल प्लैटफॉर्म द्वारा डिप्लोमा प्रमाण पत्र जारी किया गया है। नवंबर 25 से  जनवरी 26 सत्र के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कई अंग्रेजी कवयित्रियों ने इसमें भाग लिया था। इसमें भारत से भीलवाड़ा की श्रीमती शिखा के साथ-साथ श्रीमती सीमा दीवान और ग्रीस की अन्ना मावरूफी को डिप्लोमा प्रमाण पत्र दिया गया है।
शिखा ने बताया कि उन्होंने सभी लक्ष्य पूरे करते हुए अंग्रेजी की 10 कविताएं और 3 निबंध भेजे थे। अंग्रेजी निबंध द रोमांटिक एंड विक्टोरियन पोईट्स , पोइट्री एंड मी एवं
सिगनीफिकेन्स आफ फिगर आफ स्पीच इन इंग्लिश पोईट्री विषयों पर भेजे गए थे।
 उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी अन्तर्राष्ट्रीय ऑन लाइन अंग्रेजी कविता प्रतियोगिता में शिखा को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ था।
 शिखा अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में कविताएँ लिखती हैं। इन्होंने अंग्रेजी में शृंगार विषय पर फैशन-एन इनस्टिक्ट , उदयपुर-वर्ल्ड फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन एवं सह लेखकों के साथ वर्ल्ड हेरिटेज ग्लोबल टू लोकल-लिस्टेड विथ यूनेस्को बुक्स लिखी हैं। दो पुस्तकों ए विदेश प्रवास हिंदी सेवा  संस्मरण / मेमोरीज एवं  वॉयस ऑफ नेचर ( चिल्ड्रन स्टोरीज ) का अंग्रेजी अनुवाद भी किया है।
हिंदी में  राजस्थान साहित्य अकादमी के आर्थिक सहयोग से ” मन दर्पण के प्रतिबिंब” काव्य संग्रह के साथ – साथ हेल्थ केयर,  टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा , अतुल्य अजमेर, सह लेखक , ये है हमारी रंग बिरंगी बूँदी, सह लेखक  के साथ लिखी है। शृंगार एक स्वाभाविक वृति का संपादन भी किया है। बाल कविताओं की कृति प्रकाशनाधीन है।
इनको लेखन के लिए 30 से अधिक प्रशस्ति पत्रों के साथ प्रमुख रूप से वैश्विक समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत, गांधीनगर, गुजरात द्वारा  समरस श्री साहित्य , साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा द्वारा काव्य कुमुद, श्री भारतेंदु समिति कोटा द्वारा साहित्य श्री , अणुव्रत समिति भीलवाड़ा द्वारा अणुव्रत काव्यधारा और लघु उद्योग भारती भीलवाड़ा द्वारा विदुषी नारी रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया।

बाल साहित्योदय: बच्चों को मोबाइल से दूर रह कर बाल साहित्य पढ़ने और लिखने का संदेश

कोटा । संस्कृति साहित्य  मिडिया फोरम एवं   न्यू किड्स वर्ल्ड स्कूल विज्ञान नगर के तत्वावधान में विद्यालय प्रांगण में शनिवार को आयोजित बाल साहित्योदय कार्यक्रम में साहित्यकारों ने कविताओं के माध्यम से बच्चों को साहित्य से जुड़ने का संदेश दिया। बच्चों ने सूर्य वंदना, स्वरचित कविता पाठ एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विभिन्न साहित्यिक प्रतियोगिताओं में विजेता रहे बच्चों को पुरस्कृत किया गया।
मुख्य अतिथि जितेंद्र निर्मोही और अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने बच्चों को मोबाइल से दूर रहने बाल कविता, कहानी की पुस्तकें पढ़ने तथा लिखने के प्रयास के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया मिशन बाल मन तक के अंतर्गत 36 हजार बच्चों को साहित्य से जोड़ने की दिशा में हाड़ोती में बड़ा काम हुआ है। विद्यालय निदेशक आर. के. शर्मा ने सभी का स्वागत कर ऐसे कार्यक्रमों को भावी पीढ़ी के लिए सकारात्मक पहल बताया।
मीडिया फोरम की ओर से साहित्यिक सेवाओं एवं  बाल साहित्य कार्यक्रमों में योगदान के लिए साहित्यकार श्यामा शर्मा, महेश पंचोली, पल्लवी दरक न्याति, योगीराज योगी एवं शमा फिरोज़ को प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह दे कर सम्मानित किया गया। इनके साथ विशिष्ठ अतिथि डॉ. कृष्णा कुमारी ने काव्य पाठ किया। साहित्यकारों ने बच्चों के लिए अपनी बाल पुस्तकें विद्यालय को भेंट की।
 फोरम के संयोजक डॉ. प्रभात कुमार सिंघल ने बताया कि बच्चों में साहित्य सृजन क्षमता विकसित करने के लिए इस वर्ष बाल रचना प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे। फोरम का विस्तार कर बाल साहित्य गतिविधियों से जुड़ने वाले साहित्यकारों को सदस्य बनाया जाएगा।
अतिथियों ने मां शारदे की तस्वीर के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का निर्देश प्राचार्य पलक विजयवर्गीय ने तथा संयोजन एवं संचालन निधि शर्मा ने किया। कार्यकम में इतिहासविद फिरोज़ अहमद और 200 से अधिक बच्चें उपस्थिति रहे।