(ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
फोनः 22727486, 9811051133
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के ‘स्वयम्’ पोर्टल पर आयोजित ‘भाषा-प्रौद्योगिकी का परिचय’ निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम के अंतर्गत समावेशी शिक्षा, युवा सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, स्टार्टअप एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तथा डिजिटल युग में भारतीय भाषाओं का सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से दिनांक: 3 जनवरी 2026 (सावित्रीबाई फुले जयंती) से 16 जनवरी 2026 (राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस) तक भाषा प्रौद्योगिकी पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसी पखवाड़े के अंतर्गत बुधवारीय साप्ताहिक कार्यशाला शृंखला में 58वीं अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला दिनांक 7 जनवरी 2026 को शाम 6 बजे (भारतीय समयानुसार) सी-डैक, दिल्ली की वैज्ञानिक ‘एफ’ और प्रमुख न्यूरो-कॉग्निटिव AI ग्रुप डॉ. प्रियंका जैन ‘भाषा प्रौद्योगिकी के लिए AI, जेन-AI और बिहेवियरल-AI’ विषय पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करेंगी । पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. सी. जय शंकर बाबु करेंगे और कार्यक्रम का संचालन श्री उमेश कुमार प्रजापति ‘अलख’ करेंगे ।
सी-डैक दिल्ली, भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत एक अग्रणी अनुसंधान संगठन और वैज्ञानिक संस्था है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में 25 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली डॉ. जैन विज्ञान लेखन और अनुसंधान के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए भारत के राष्ट्रपति के करकमलों से ‘AWSAR-2019’ पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं । वर्तमान समय पर डॉ. प्रियंका जैन सी-डैक दिल्ली के ‘न्यूरो-कॉग्निटिव एआई और एक्सआर’ (Neuro-Cognitive AI & XR) समूह का नेतृत्व कर रही हैं। कई अनुसंधान परियोजनाओं के क्रियान्वयन सक्रिय डॉ. जैन ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस (BCI), बिहेवियरल कंप्यूटिंग, डिजिटल फॉरेंसिक और क्वांटम कंप्यूटिंग के तकनीकी प्रदर्शन में विशेषज्ञता रखती है।
भाषा-प्रौद्योगिकी निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम के जनवरी, 2026 सत्र की कक्षाएँ भारत सरकार के स्वयं पोर्टल पर 13 जनवरी 2026 से आरंभ होने वाली हैं । पाठ्यक्रम में जुड़ने के लिए स्वयं पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं । भारतीय भाषाओं की सांस्कृतिक, सामाजिक और तकनीकी पुनर्स्थापना के आत्मीय अनुष्ठान के रूप में भाषा प्रौद्योगिकी संबंधी साप्ताहिक कार्यशालाओं का नियमित आयोजन किया जा रहा है। भारत की विविधता को शक्ति में बदलने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित भाषा प्रौद्योगिकी के बहुआयामी समावेश भारत को ‘डिजिटल लोकतंत्र’ में विकसित करने तथा चेतना जागृति की पहल है। ई-शिक्षा की ओर से भाषा प्रौद्योगिकी पखवाड़ा के तहत भी कई गतिविधियों का आयोजन हो रहा है ।
पांडिच्चेरी केंद्रीय विश्वविद्यालय, पुदुच्चेरी के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित कार्यशालाओं में इच्छुक प्रतिभागी https://meet.google.com/art-
अहमदाबाद। नागरिकों को अपने नजदीकी क्षेत्र में ही आधार सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पूरे देश में डाकघरों में आधार केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन डाकघर आधार केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को नए आधार नामांकन तथा किसी भी प्रकार के संशोधन या विसंगति की स्थिति में आधार अपडेट कराने में अत्यंत सुविधा प्राप्त हो रही है। इसी कड़ी में आधार सेवाओं की निरंतर बढ़ती मांग एवं नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए गांधीनगर में सेक्टर-17 डाकघर में आधार सेवा केंद्र का शुभारंभ 7 जनवरी, 2026 को उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव द्वारा किया गया। प्रातः 08:00 बजे से सायं 06:00 बजे तक कार्यरत इन दो नए आधार काउंटर के साथ गांधीनगर में कुल 38 डाकघर आधारसेवा केंद्र कार्यरत हो गए। गांधीनगर प्रधान डाकघर में भी लोगों को समयबद्ध एवं सुगम सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रातः 08:00 बजे से सायं 06:00 बजे तक अब दो आधार काउंटर कार्यरत कर दिए गए हैं। उत्तर गुजरात परिक्षेत्र में 257 डाकघर आधारसेवा केंद्र के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध हैं। डाकघरों में आधार नामांकन एवं बच्चों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (5–7 वर्ष एवं 15–17 वर्ष की आयु वर्ग में) पूर्णतः निःशुल्क प्रदान किया जाता है। वहीं डेमोग्राफिक अपडेट, जैसे नाम, पता, जन्मतिथि अथवा मोबाइल नंबर में संशोधन के लिए ₹75 शुल्क निर्धारित किया गया है। फिंगरप्रिंट एवं फोटो अपडेट जैसे बायोमेट्रिक अपडेट हेतु ₹125 शुल्क देय है।
पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि वर्तमान में आधार सभी नागरिकों के लिए अपरिहार्य है। ऐसे में नए आधार सेवा केंद्र प्रारंभ करने की यह पहल नागरिक-केंद्रित सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसी कड़ी में भारतीय डाक विभाग द्वारा सभी स्कूलों में बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विभिन्न स्कूल अपने यहाँ आवश्यकतानुसार विशेष कैंप के लिए डाक विभाग को आग्रह भी कर सकते हैं। सुदूरतम क्षेत्रों में आम लोगों तक पहुंचने के लिए डाकघरों में लैपटॉप आधार किटों के माध्यम से शिविर मोड में आधार नामांकन व अद्यतन की सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे अंतिम छोर तक सेवाओं की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित हो रही है। यह पहल डिजिटल इंडिया, जनसेवा और अंतिम छोर तक सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में डाक विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
गांधीनगर मंडल के प्रवर अधीक्षक डाकघर श्री शिशिर कुमार ने बताया कि यूआईडीएआई द्वारा जारी निर्देशों के तहत प्रत्येक व्यक्ति को आधार नामांकन/ अपडेट केंद्र पर कम से कम तीन बार जाना अनिवार्य है। पहली बार 05 वर्ष की आयु तक नया आधार नंबर बनवाने के लिए, दूसरी बार 05 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद बच्चे के स्वयं के बायोमेट्रिक विवरण को अनिवार्य रूप से अपडेट कराने के लिए तथा तीसरी बार 15 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद व्यक्ति के अपने पुनः बायोमेट्रिक अपडेट के हेतु केंद्र पर उपस्थित होना आवश्यक होता है। बच्चों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (5–7 वर्ष एवं 15–17 वर्ष की आयु वर्ग में) पूर्णतः निःशुल्क है।
इस अवसर पर प्रवर अधीक्षक, गांधीनगर श्री शिशिर कुमार, सहायक निदेशक श्री वी एम वहोरा, डिप्टी अधीक्षक श्री दीपक वाढेर, सहायक डाक अधीक्षक श्री हेमंत कंतार, श्री दक्षेश चौहान, श्री भाविन प्रजापति, डाक निरीक्षक श्री चिराग सुथार, पोस्टमास्टर श्री खेमचंदभाई वाघेला, सुश्री रइसा मन्सुरी, श्री संजय पटेल सहित तमाम अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
सर्वविदित है कि परमपूजनीय श्रीगुरुजी माधव सदाशिवराव गोलवलकर बैतूल के कारागार के बैरक क्र. 1 में रह चुके हैं। वे यहाँ 1 जनवरी 1949 से 6 जून 1949 तक बंदी रहे थे। बैतूल कारागार के जिस बैरक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय परमपूजनीय सरसंघचालक श्रीगुरुजी को बंदी बनाकर रखा गया था वह कक्ष आज भी एक लघु स्मारक के रूप में रिक्त रहता है। इस कक्ष में श्री गुरुजी का एक चित्र लगा हुआ है व उनके कारागार प्रवास के संदर्भ में कक्ष की दीवार पर संक्षिप्त लेखन भी है। बैतूल जेल के इस लघु स्मारक को अब एक भव्य, दिव्य स्मारक में परिवर्तित करने की चाह देश भर के स्वयंसेवकों में है।
वर्ष 2017 में परमपूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहनराव जी भागवत ने भी जेल के इस कक्ष में जाकर श्रीगुरुजी को श्रद्धासुमन अर्पित किए थे।
गांधी जी की दुखद हत्या के पश्चात् नेहरू सरकार ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया था। श्री गुरुजी सहित बीस हजार अग्रणी स्वयंसेवक गिरफ्तार कर लिए गए थे। उस समय के प्रसिद्ध मराठी समाचार पत्र ‘केसरी’ के संपादक केतकर जी सरकार व संघ के मध्य संवाद करा रहे थे। केतकर जी 12 व 16 जनवरी 1649 को श्री गुरुजी से सिवनी कारागार में मिले थे। उन्होंने श्री गुरुजी से संघ के सत्याग्रह को समाप्त करने का आग्रह किया। श्रीगुरुजी ने परिस्थितियों का आकलन किया व आंदोलन स्थगित कर दिया। 22 जनवरी को संघ के सत्याग्रह प्रभारी महावीर जी ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा कर दी। तब जाकर कहीं सरकार ने राहत की साँस ली थी।
यह भी एक स्मरणीय तथ्य है कि नेहरू जी की हठधर्मिता से संघ पर 1948 में लगे प्रतिबंध हटाने की भूमिका भी बैतूल जेल के बैरक क्र. 1 में ही लिखी गई थी।
देश के प्रमुख समाचार पत्र ‘द ट्रिब्यून’ ने 22 जन. 1949 को संघ प्रतिबंध को अनैतिक बताते हुए लिखा – “अब नेहरू सरकार को संघ से प्रतिबंध हटा लेना चाहिए”।
संघ के इस आंदोलन के प्रति देश की जनता में बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए नेहरू सरकार घबरा गई थी। सरकार ने तत्काल ही पाँसा फेंका और प. मौलिचन्द्र शर्मा को संघ से चर्चा करने हेतु आगे बढ़ाया।
इस समय तक श्री गुरुजी को सिवनी कारागार से बैतूल कारागार में स्थानांतरित किया जा चुका था। 10 जुलाई को मौलिचन्द्र शर्मा श्री गुरुजी से भेंट करने बैतूल जेल आए थे। बैतूल जेल से ही श्री गुरुजी एवं मौलिचन्द्र शर्मा की चर्चा के आधार पर नेहरू जी ने 12 जुलाई को संघ से प्रतिबंध हटाया था व 13 जुलाई को प्रातः समय में श्री गुरुजी को बैतूल जेल से मुक्त कर दिया गया था। (संदर्भ – श्री गुरुजी समग्र, खंड 2, पृष्ठ 45)
बैतूल जेल से निकलने के तत्काल बाद ही श्री गुरुजी जीटी एक्सप्रेस से नागपुर चले गए थे। श्री गुरुजी के बैतूल से प्रस्थान के समय का एक किस्सा संघ क्षेत्रों में बहुधा ही कहा सुना जाता है। कहा जाता है कि, श्री गुरुजी ने बैतूल स्टेशन पर छोड़ने आए स्वयंसेवकों से कहा था – “जिस दिन बैतूल में संघ का कार्य सुदृढ़ और संपुष्ट हो जाएगा उस दिन समूचे देश में संघ विचार सुदृढ़ हो जाएगा”।
बैतूल जेल में श्रीगुरुजी के बंदी रहने के समय को दुखद किंतु ऐतिहासिक काल कहा जाता है। श्री गुरुजी ने इस विकट, दुधूर्ष अग्निपरीक्षा के समय में अद्भुत धेर्य का परिचय देते हुए बैतूल जेल से अनेकों पत्रों व संवादों के माध्यम से देश भर के स्वयंसेवकों के मनोबल को बनाए रखा था तथा देश के वातावरण में राष्ट्रीयता का प्रवाह भी बनाए रखा था। समूचे देश के लाखों स्वयंसेवकों व सामान्य जनता श्रीगुरुजी के संदेशों हेतु बैतूल जेल की ओर टकटकी लगाए देखते रहती थी। बैतूल देश की धड़कनों के केंद्र में आ गया था। बैतूल जेल में रहते हुए ही श्री गुरुजी ने नेहरू सरकार पर इतना दबाव बना लिया था कि नेहरू सरकार को न चाहते हुए भी श्री गुरुजी को जेल से मुक्त करना पड़ा था।
श्री गुरुजी के बैतूल जेल में बंदी रहने के मध्य उन्होंने देश भर में ऐसा वातावरण निर्मित कर दिया था कि गृह मंत्री वल्लभभाई पटेल ने भी नेहरू जी पर अंगुली उठाते हुए 27 फरवरी 1948 को एक पत्र लिखा था – “बापू की हत्या की जाँच में हो रही प्रगति पर मैने प्रायः प्रतिदिन ध्यान दिया है। सभी प्रमुख अपराधियों ने अपनी गतिविधियों के लम्बे और विस्तृत वक्तव्य दिए हैं। उन वक्तव्यों से यह बात भी स्पष्ट रूप से उभर कर आती है कि इस सारे मामले में संघ कहीं भी संलिप्त नहीं है।” (संदर्भ – 1.श्रीगुरुजी समग्र दर्शन-2, पृष्ठ 2-10, संदर्भ 2. पहली अग्नि परीक्षा, मामा माणिकचंद्र वाजपेयी, पृष्ठ 23-24, संदर्भ 3. Sardar Patel’s Correspondence, Vol. VI PAGE 56)
बैतूल कारागार में श्रीगुरूजी ने संघ का संविधान तैयार करने के कार्य को प्रारंभ व पूर्ण किया था व अपने हस्ताक्षर के साथ इसे जारी किया था।
श्रीगुरुजी गोलवलकर का बैतूल जेल प्रवास संघ के इतिहास का एक निर्णायक मोड़ था, और, बैतूल की यह जेल संघ के संविधान की जन्मस्थली।
बैतूल कारागार में रहते हुए श्रीगुरुजी ने संघ की राजनाति में शुचिता, पवित्रता व समाज योगदान के संदर्भ में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के साथ बहुत व्यापक पत्राचार किया। इन पत्रों को बाद में “Justice on Trial” नामक पुस्तक में प्रकाशित भी किया गया था।
श्री गुरुजी ने तत्कालीन नेहरूवियन सरकार से आग्रह किया था कि यदि संघ के विरुद्ध कोई साक्ष्य है तो उसे सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा प्रतिबंध हटाकर स्वयंसेवकों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने दिया जाए।
बैतूल कारागार में रहने के मध्य श्री गुरुजी उस समय के उदारवादी नेता टी.आर.वी. शास्त्री से सतत् संपर्क में थे। शास्त्री जी ने भी नेहरू-गांधी की सरकार और गुरुजी के बीच मध्यस्थता की थी।
उस समय की जवाहर लाल नेहरू की आत्ममुग्ध, अंग्रेजीदां शैली से चलने वाली सरकार ने संघ पर नाना प्रकार के आरोप लगाए थे। श्रीगुरुजी ने जेल में रहते हुए ही समूचे राष्ट्र को स्पष्ट कर दिया था कि संघ एक घोर राष्ट्रवादी, संस्कृति केंद्रित व समाज आधारित संगठन मात्र है।
(लेखक समसामयिक विषयों पर शोधपूर्ण लेखन करते हैं)
#परकाया_प्रवेश_विद्या_
चुनाव में केवल 8 दिन शेष – लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
अनिल गलगली की चुनाव आयुक्त एवं नगर आयुक्त से तात्कालिक कार्रवाई की मांग
RTI एक्टिविस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयुक्त तथा मुंबई महानगरपालिका आयुक्त का ध्यान इस अत्यंत गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया है कि मुंबई महानगरपालिका के सभी 227 वार्डों की अंतिम मतदाता सूची अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है, जबकि चुनाव में केवल 8 दिन शेष हैं।
अनिल गलगली ने कहा कि अंतिम मतदाता सूची का समय पर प्रकाशन न होना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि मतदाताओं के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की रीढ़ होती है। अंतिम सूची के अभाव में मतदाता अपने नाम की जांच नहीं कर पा रहे हैं। गलत प्रविष्टियों को सुधारने का अधिकार छिन रहा है। फर्जी, दोहरी और अपात्र प्रविष्टियों की आशंका बढ़ रही है। चुनाव प्रणाली पर जनता का विश्वास कमजोर हो रहा है।
इस देरी को लेकर अनिल गलगली ने सवाल उठाया कि इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है? चुनाव आयोग और प्रशासन ने कानूनी समय-सीमा का पालन क्यों नहीं किया?.अनिल गलगली की प्रमुख मांगें है कि मुंबई के सभी 227 वार्डों की अंतिम मतदाता सूची तत्काल आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित की जाए। मतदाता सूची जारी करने में हुई देरी पर लिखित और सार्वजनिक स्पष्टीकरण दिया जाए।जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए ठोस और समयबद्ध सुधारात्मक कदम घोषित किए जाएं।
अनिल गलगली ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची का समय पर सार्वजनिक होना संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसमें हुई देरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करती है। उन्होंने चुनाव आयोग और मनपा प्रशासन से तत्काल, पारदर्शी और जवाबदेह कार्रवाई की मांग की है।