कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी सम्मानित
बिहार जीत से जागी उम्मीदें भी और चुनौतियाँ भी

(ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
फोनः 22727486, 9811051133
भोपाल में बाल साहित्यकार डॉ. युगल सिंह सम्मानित
राष्ट्रीय संग्रहालय में भारत की लिपि संस्कृति के उत्सव के साथ चौथा अक्षर महोत्सव संपन्न
यह महोत्सव 14 नवंबर को राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक श्री गुरमीत सिंह चावला और अपर महानिदेशक डॉ. मीनाक्षी जॉली की गरिमामयी उपस्थिति में आरंभ हुआ। राष्ट्रीय संग्रहालय के पूर्व महानिदेशक प्रो. (डॉ.) बुद्ध रश्मि मणि उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि और ज्ञानभारतम मिशन के निदेशक श्री इंद्रजीत सिंह विशिष्ट अतिथि थे। गणमान्य व्यक्तियों ने सुलेखन कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जो संग्रहालय और सुलेख फाउंडेशन की एक क्यूरेटोरियल पहल है। इसमें भारत की 100 से अधिक समकालीन सुलेख कलाकृतियों को राष्ट्रीय संग्रहालय के संग्रहों में से सावधानीपूर्वक चयनित पांडुलिपियों और शिलालेखों के साथ प्रदर्शित किया गया है। ऐतिहासिक कलाकृतियों और आधुनिक रचनात्मक परंपराओं के बीच संवाद इस प्रदर्शनी का केंद्र बिंदु था, जिसने प्राचीन और समकालीन, विद्वतापूर्ण और कलात्मकता के बीच सेतु का काम किया।
पहले दिन मोनोलाइन सुलेख, अभिव्यंजक ब्रश अक्षरांकन, डिप पेन फाउंडेशन और देवनागरी अन्वेषण पर कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। स्क्रिप्ट क्वेस्ट ट्रेजर हंट और सीटीटीपी बैच 1 सम्मान समारोह ने इस दिन को और भी जीवंत बना दिया, जबकि मिट्टी के बर्तन, मिट्टी के अक्षरांकन, कैरिकेचर, आभूषण निर्माण, लघु चित्रकला और स्क्रैपबुक कला जैसे रचनात्मक क्षेत्रों ने हर उम्र वर्ग के आगंतुकों को आकर्षित किया।
दूसरा दिन 15 नवंबर अकादमिक संवर्धन और सांस्कृतिक समझ पर केंद्रित था। दिन की शुरुआत प्रोफेसर मनीष अरोड़ा के सत्र “शैक्षणिक क्षेत्र में सुलेख” से हुई, जिसके बाद मेंटर रघुनिता गुप्ता, नीलाक्षी ठाकुर और अवनी खुराना के नेतृत्व में एक व्यावहारिक देवनागरी कार्यशाला हुई। शिलालेख गैलरी में, कोमल पांडे और अभिषेक वर्धन ने लेखन उपकरणों और लिपि के स्वरूपों के विकास पर एक सत्र का नेतृत्व किया। इसके बाद प्रतिभागियों ने “ऐतिहासिक लिपियों की पुनर्कल्पना” में भाग लिया, एक ऐसी गतिविधि जिसने प्राचीन लिपियों की रचनात्मक पुनर्व्याख्या को प्रोत्साहित किया। एक प्रमुख आकर्षण सुदीप गांधी की कार्यशाला “देवनागरी अक्षररूपों के साथ फॉर्म-प्ले” थी, जिसने प्रतिभागियों को देवनागरी के भीतर संरचना और गति की खोज के प्रयोगात्मक तरीकों से परिचित कराया।
अंतिम दिन 16 नवंबर विचारशील चिंतन, तकनीकी अन्वेषण और कलात्मक प्रदर्शन लेकर आया। प्रो. जी.वी. श्रीकुमार ने अपने सत्र “कैलिग्राफी एक बहुसंवेदी
अक्षर महोत्सव 2025 प्रतिभागियों और आगंतुकों की ओर से हार्दिक सराहना के साथ संपन्न हुआ। तीन दिनों तक चले इस महोत्सव ने सांस्कृतिक, शैक्षिक और कलात्मक परंपरा के रूप में सुलेख के महत्व की पुष्टि करते हुए पहचान, रचनात्मकता और समकालीन अभिव्यक्ति को आकार देने में इसकी निरंतर प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
ग्लोबल टेकनालॉजी डिस्ट्रीब्यूटर काउंसिल ने तकनीक के भविष्य पर चर्चा की
सिंगापुर। टेक्नोलॉजी डिस्ट्रीब्यूटर्स के दुनिया के सबसे बड़े संघ Global Technology Distribution Council (GTDC) द्वारा आयोजित दूसरे वार्षिक Summit APJ इवेंट के लिए इस सप्ताह क्षेत्रीय टेक्नोलॉजी चैनल लीडर्स एकत्रित हुए। इस वर्ष के सम्मेलन में दुनिया के प्रमुख डिस्ट्रीब्यूटर्स, वेंडर्स, एनालिस्ट्स, मीडिया और अन्य संगठनों के अधिकारी शामिल हुए जहां महत्वपूर्ण उद्योग विषयों पर बातचीत और साझेदारी पर जोर दिया। Summit APJ के वक्ताओं ने डिस्ट्रीब्यूशन की अनूठी क्षमताओं और इस बात पर जोर दिया कि इसका निवेश भविष्य के IT ecosystems को कैसे ऑर्केस्ट्रेट (orchestrate) करेगा। नए टेक्नोलॉजी-सक्षम कार्यक्रमों, डिजिटल मार्केटप्लेस और hyperscalers के साथ गठजोड़ के माध्यम से डिस्ट्रीब्यूटर्स वेंडर्स और पार्टनर्स की वर्तमान और अगली पीढ़ी को सशक्त बना रहे हैं।
APJ क्षेत्र की आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता को भी विशेष चर्चाओं और पैनल चर्चाओं में स्वीकार किया गया जिसमें वक्ताओं ने इस क्षेत्र में चैनल संगठनों के लिए विशिष्ट जरूरतों और अवसरों पर प्रकाश डाला साथ ही यह भी बताया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स वेंडर समुदाय के लिए वैश्विक बिक्री ब्रांडिंग और साझेदारी के अवसरों का विस्तार कैसे करते हैं। उभरते बाजारों और इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज के लिए मूल्यवान समर्थन प्रदान करना इन महत्वपूर्ण चैनल ऑर्केस्ट्रेटर्स की सिद्ध क्षमताओं में से एक है।
APJ क्षेत्र ने 2025 में वैश्विक व्यापार तनावों और बदलते टैरिफ के बावजूद अप्रत्याशित विकास दिखाया है। विकास मजबूत रहा है जहां कई देशों ने मजबूत GDP आंकड़े दर्ज किए हैं। हालांकि वह निर्यात उछाल “फ्रंट-लोडिंग” (फर्मों द्वारा टैरिफ की समय सीमा से पहले ऑर्डर देने की जल्दबाजी) से प्रेरित था; उन बदलावों से प्रभावित होने वाले देशों में गिरावट की आशंका है।
GTDC के APJ के मैनेजिंग डायरेक्टर Ananth Lazarus ने कहा, “टेक्नोलॉजी डिस्ट्रीब्यूटर्स वेंडर्स और सॉल्यूशन प्रोवाइडर्स के लिए ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ (force multipliers) हैं, जो सेल्स और पार्टनर समुदायों को स्केल करते हैं और क्षेत्रीय व देश-के-भीतर की चुनौतियों पर काबू पाते हैं। उनके एनेबलमेंट प्रोग्राम और अलायंस डेवलपमेंट व इंटीग्रेशन क्षमताएं रणनीतिक मूल्य प्रदान करती हैं जो विविध बाजारों में सफलता सुनिश्चित करती हैं।“
महत्वपूर्ण निवेश डिस्ट्रीब्यूटर्स को अपने ऑपरेशंस को नया रूप देने और परिष्कृत करने तथा इन अमूल्य समुदायों के लिए समर्थन बढ़ाने में मदद करते हैं। GTDC के CEO Frank Vitagliano ने समारोह के उद्घाटन के दौरान कहा, “डिस्ट्रीब्यूटर्स को अपने सामूहिक IT ecosystems की जरूरतों का लगातार मूल्यांकन करना चाहिए और अपने वेंडर व सॉल्यूशन प्रोवाइडर पार्टनर्स को और भी अधिक मूल्य प्रदान करने के लिए इनोवेशन करना चाहिए। हमारा शोध दिखाता है कि वे निवेश रंग ला रहे हैं क्योंकि डिस्ट्रीब्यूटर्स चैनल संगठनों और उनके द्वारा समर्थित ग्राहकों की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी क्षमताओं को विकसित कर रहे हैं, खासकर AI और साइबर सुरक्षा की बढ़ती जटिलताओं के साथ।“
Summit APJ से अन्य मुख्य बातें
इस वर्ष के इवेंट ने भविष्य के टेक इकोसिस्टम और IT डिस्ट्रीब्यूशन की विकसित होती भूमिका पर प्रकाश डाला, जिसमें दक्षिण पूर्व एशिया और भारत में टेक सेक्टर की निरंतर वृद्धि शामिल है। यहाँ अन्य ज्ञानवर्धक Summit APJ सत्रों की मुख्य बातें दी गई हैं:
- EIU के Alex Holmes ने क्षेत्र में सकारात्मक वृद्धि के साथ-साथ कुछ अज्ञात (unknowns) बातों पर भी बात की, जिन पर भविष्य के विकास को बाधित कर सकने के कारण नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि जबकि उभरते बाजार के अवसर और तकनीकी इनोवेशन उद्योग के लिए मजबूत अवसर पैदा कर रहे हैं, अधिकारियों को मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों (monetary and fiscal policies) और मुद्रा के उतार-चढ़ाव (currency fluctuations) में संभावित बदलावों पर ध्यान देना चाहिए जो उन सकारात्मक रुझानों को प्रभावित कर सकते हैं।
- IDC की Sandra NG ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे AI APJ में प्रयोग से एंटरप्राइज-व्यापी ऑर्केस्ट्रेशन तक विकसित हुआ है, जिसमें संगठन पहले से ही agentic models को अपना रहे हैं जहाँ मनुष्य और इंटेलिजेंट सिस्टम स्वायत्तता के साथ कार्य करते हैं। उन्होंने टेक्नोलॉजी प्रदाताओं के लिए रणनीतिक अनिवार्यताएं भी पेश कीं, इस बात पर जोर दिया कि कैसे AI, data ecosystems और distributed intelligence भविष्य में विशिष्ट प्रतिस्पर्धी लाभ पैदा करेंगे।
- CRN Asia के Aaron Raj ने एक सफल AI रणनीति बनाने पर एक इंटरैक्टिव चर्चा का संचालन किया। समूह ने Amazon Web Services के Corrie Briscoe, CONTEXT के Joseph Turner, PTC System (S) Pte Ltd के SS Lim और Lenovo के Debdut Maiti के साथ इन कार्यक्रमों के प्रमुख तत्वों को संबोधित किया, जिसमें अपेक्षाएं निर्धारित करना, चुनौतियों पर काबू पाना और नए अवसरों पर सहयोग करना शामिल था।
- Vitagliano ने वरिष्ठ डिस्ट्रीब्यूशन अधिकारियों के साथ एक ज्ञानवर्धक “व्यू फ्रॉम द टॉप” बातचीत का भी नेतृत्व किया, जिसमें Redington Limited के V.S. Hariharan, Ingram Micro के Luis Lourenco, TD SYNNEX के Jaideep Malhotra, और Westcon-Comstor के Patrick Aronson शामिल थे। पैनलिस्टों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म में निवेश करने और इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज को सक्षम बनाने के साथ-साथ गो-टू-मार्केट रणनीतियों (go-to-market strategies) और व्यापारिक संचालन (business operations) को अनुकूलित करने पर चर्चा की।
- GTDC के Dominique Deklerck ने Summit APJ में एक प्री-डे सेशन में सस्टेनेबिलिटी-संबंधित विषयों पर अपडेट साझा किए। चर्चा में सर्कुलर इकोनॉमी के अनुकूलन के लिए हालिया नियामक परिवर्तनों और सर्वोत्तम प्रथाओं को कवर किया गया, इसके अलावा Digital Product Passport (DPP), EPEAT, CSRD और अन्य संबंधित विषयों पर अंतर्दृष्टि भी प्रदान की गई।
काउंसिल का अगला वैश्विक इवेंट GTDC Summit North America, 18-19 फरवरी, 2026 को Oceanside, CA में Mission Pacific & Seabird Resort में होगा। अधिक जानकारी के लिए अभी रजिस्टर करें या GTDC इवेंट्स पेज पर जाएँ।
GTDC के बारे में
Global Technology Distribution Council (GTDC) दुनिया के अग्रणी टेक डिस्ट्रीब्यूटर्स का प्रतिनिधित्व करने वाला उद्योग संघ है। GTDC सदस्य विविध बिजनेस चैनलों के माध्यम से उत्पादों, सेवाओं और समाधानों की $180 बिलियन से अधिक की वार्षिक वैश्विक बिक्री करते हैं। GTDC सम्मेलन रणनीतिक सप्लाई-चेन साझेदारियों के विकास और विस्तार का समर्थन करते हैं जो वेंडर्स, एंड कस्टमर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स की तेजी से बदलती बाजार की जरूरतों को लगातार संबोधित करते हैं। GTDC सदस्यों में AB S.A, Arrow Electronics, CMS Distribution, Computer Gross Italia, D&H Distributing, ELKO, Esprinet, Exclusive Networks, Exertis, Infinigate, Ingram Micro, Intcomex, Logicom, Mindware, Redington Limited, SiS Technologies, Tarsus, TD SYNNEX, TIM AG, VSTECS Holdings और Westcon-Comstor शामिल हैं।
Global Technology Distribution Council
+31621585878
ज़ी को मिला अंतर्राष्ट्रीय गौरव
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Z) ने पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस यानी ESG में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी को S&P ग्लोबल कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट (CSA) 2025 में 100 में से 51 अंक मिले हैं। इस स्कोर के साथ जी दुनिया भर में मीडिया, मूवी और एंटरटेनमेंट सेक्टर की टॉप 5% कंपनियों में शामिल हो गई है।
पिछले एक साल में कंपनी ने ESG के हर पहलू में अपने कामकाज को बेहतर करने पर जोर दिया है। जी ने खास तौर पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, क्लाइमेट गवर्नेंस और ह्यूमन कैपिटल मैनेजमेंट पर मजबूत काम किया है। इसके साथ ही कंपनी ने स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट, डबल मटेरियलिटी असेसमेंट, पॉलिसी इंफ्लुएंस, प्राइवेसी प्रोटेक्शन, साइबर सिक्योरिटी, कार्बन अकाउंटिंग, एनर्जी मैनेजमेंट और कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी कई कदम उठाए हैं।
इन पहलों की वजह से कंपनी का ESG स्कोर 96वें पर्सेंटाइल तक पहुंच गया है। पारदर्शिता से जुड़ी रिपोर्टिंग में कंपनी ने 100 पर्सेंटाइल का परफेक्ट स्कोर हासिल किया। जोखिम प्रबंधन, सप्लाई चेन, टैक्स स्ट्रैटेजी, पानी, मानव अधिकार, मानव संसाधन प्रबंधन और कस्टमर रिलेशन जैसे कई क्षेत्रों में भी जी ने 95वें पर्सेंटाइल से ऊपर प्रदर्शन किया। वहीं, पूरी इंडस्ट्री का औसत स्कोर सिर्फ 22 रहा।
जी एंटरटेनमेंट के CEO पुनीत गोयनका ने कहा कि ESG में मिला यह स्कोर कंपनी की लगातार की जा रही कोशिशों की पहचान है। उन्होंने कहा कि जी ने पिछले वर्ष में अपने वैल्यू चेन के हर हिस्से में स्थिरता को और मजबूत किया है, फिर चाहे वह मजबूत गवर्नेंस हो, पारदर्शिता से जुड़ी रिपोर्टिंग हो या स्टेकहोल्डर्स के साथ बेहतर जुड़ाव। उन्होंने कहा कि दुनिया की टॉप 5% मीडिया कंपनियों में शामिल होना जी को और बेहतर काम करने की प्रेरणा देता है।
S&P ग्लोबल का यह स्कोर बताता है कि कंपनी अपने सेक्टर की दूसरी कंपनियों की तुलना में ESG जोखिमों, अवसरों और प्रभावों को कितनी अच्छी तरह संभालती है। यह मूल्यांकन कंपनी के खुलासों और उसके वर्तमान व पिछले प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।
इस साल जी ने डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी पर बड़े कदम उठाए, जिसकी वजह से कोई भी डेटा ब्रीच नहीं हुआ। कंपनी ने कार्बन अकाउंटिंग, ऊर्जा की बचत, कचरा कम करने और रीसाइक्लिंग पर भी अच्छा काम किया है। आगे भी कंपनी अपने ESG प्रयासों को और मजबूत करने की दिशा में काम करती रहेगी ताकि व्यवसायिक विकास के साथ-साथ समाज पर सकारात्मक असर भी पड़े।
गौरतलब है कि की जी एक प्रमुख कंटेंट और टेक्नोलॉजी कंपनी है जिसकी पहुंच 190 से ज्यादा देशों में है और जिसे दुनिया भर के 1.3 बिलियन से अधिक लोग देखते हैं। टीवी, डिजिटल, फिल्म और म्यूजिक जैसे कई माध्यमों पर विभिन्न भाषाओं में कंटेंट पेश करते हुए कंपनी दुनिया भर के दर्शकों तक अपनी कहानियां पहुंचाती है। एक भारतीय ब्रांड के रूप में, जी दुनिया में उम्मीद और एकजुटता का संदेश फैलाने के लिए लगातार काम कर रही है।
शांति ही नहीं, सह-जीवन के लिये जरूरी है सहिष्णुता
विश्व में सहिष्णुता को बढ़ावा देने और जन-जन में शांति, सहनशीलता, स्वस्थता एवं संवेदना के लिये जागरूकता फैलाने के लिए हर वर्ष 16 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य संसार में हिंसा, युद्ध एवं आतंक की भावना और नकारात्मकता को खत्म कर अहिंसा को बढ़ावा देना है। दुनिया में बढ़ते अत्याचार, आतंक, हिंसा और अन्याय को रोकने और लोगों को सहनशीलता और सहिष्णुता के प्रति जागरूकता की भावना जगाने के लिये इस दिवस की विशेष प्रासंगिकता है। यह दिवस सभी धर्मों और अलग-अलग संस्कृतियों को एक होने की प्रेरणा देता है। यह केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य को बचाने की अनिवार्य पुकार है। जिस समय दुनिया विकास और तकनीक की ऊँचाइयों को छू रही है, उसी समय वह असहिष्णुता, हिंसा, युद्ध, आतंक और आक्रोश की गहराइयों में डूबती भी जा रही है। यह विरोधाभास बताता है कि मनुष्य बाहरी रूप से कितना भी समर्थ हो जाए, लेकिन यदि भीतर सहिष्णुता, धैर्य और संवेदना का प्रकाश न हो, तो सभ्यताएँ चमकते हुए भी विघटन के कगार पर खड़ी हो सकती हैं। आज के तनावपूर्ण वातावरण में सहिष्णुता मानवीय संबंधों को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है। यह कमजोरी नहीं, बल्कि वह आंतरिक सामर्थ्य है जो हमें अपने विचारों के साथ दूसरों के विचारों को समझने, स्वीकारने और सम्मान देने की क्षमता प्रदान करती है।
व्यक्तियों, समाजों एवं राष्ट्रों की एक दूसरे के लिये बढ़ती असहिष्णुता ही युद्ध, नफरत एवं द्वेष का कारण है, यही साम्प्रदायिक हिंसा एवं उन्माद का भी कारण है। असहिष्णुता, घृणास्पद भाषण और दूसरों के प्रति भय, नफरत, घृणा एवं द्वेष न केवल संघर्ष और युद्धों का एक शक्तिशाली प्रेरक है, बल्कि इसका मुख्य कारण भी है। जबकि सहिष्णुता वह बाध्यकारी शक्ति है जो हमारे बहुसांस्कृतिक, बहुजातीय और बहुधार्मिक समाज को एकजुट करती है। असहिष्णुता केवल सामाजिक एवं राजनैतिक ताने-बाने को ही छिन्न-भिन्न नहीं करती है, बल्कि इसका देश की अर्थव्यवस्था, उसके विकास एवं अंतर्राष्ट्रीय छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वैश्वीकरण के युग में अंतर्राष्ट्रीय वित्त एवं व्यापार व्यवस्था को मजबूती देने के लिये सहिष्णुता की बड़ी जरूरत है। यह व्यक्तिगत जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है। दरअसल, बदलते लाइफस्टाइल और सामाजिक माहौल की वजह से लोगों के अंदर सहनशीलता लगातार घटती जा रही है।
दुनिया भर में बढ़ते युद्ध, धार्मिक कट्टरता, नस्लीय संघर्ष, जातीय टकराव और सोशल मीडिया पर फैलती नफरत इस बात का प्रमाण हैं कि असहिष्णुता की आग कितनी तेजी से फैल रही है। ऐसे वातावरण में सहिष्णुता केवल सामाजिक मूल्य नहीं, बल्कि मानवता का आधार बन जाती है। मनुष्य जब संवाद खो देता है, जब सुनने की संस्कृति कमजोर पड़ जाती है, जब व्यक्तिगत अहंकार सामूहिक सद्भाव पर भारी पड़ने लगता है, तब असहिष्णुता जन्म लेती है। यही कारण है कि आज की दुनिया में सबसे बड़ी कमी है-संवाद, धैर्य और विविधता को सम्मानपूर्वक स्वीकारने की क्षमता। सहिष्णुता केवल अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए आवश्यक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन की भी अनिवार्यता है। घरों में तनाव बढ़ रहा है क्योंकि हम दूसरों की बात सुनने का धैर्य खोते जा रहे हैं। रिश्ते टूट रहे हैं क्योंकि हम भिन्नता को स्वीकारने के लिए तैयार नहीं। आधुनिक मनुष्य तेजी से प्रतिक्रियाशील हो गया है; छोटी-सी आलोचना भी उसे अस्थिर कर देती है। यदि हम अपने भीतर सहिष्णुता का दीपक जलाएँ, तो जीवन सरल, सुंदर और शांतिमय हो सकता है।
(ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
फोनः 22727486, 9811051133
भारत की सबसे कम उम्र की ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ विजेता नन्ही ब्लॉगर अक्षिता (पाखी)
अक्षिता (पाखी) को सबसे कम उम्र में ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार‘ पाने का गौरव, ब्लॉगर के रूप में पाई ख़्याति
21वीं सदी टेक्नॉलाजी की है। आज के बच्चे मोबाइल व लैपटॉप पर हाथ पहले से ही फिराने लगते हैं । टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के चलते बच्चे कम उम्र में ही अनुभव और अभिरुचियों के विस्तृत संसार से परिचित हो जाते हैं। ऐसी ही प्रतिभा है-भारत की सबसे कम उम्र की राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता नन्ही ब्लॉगर अक्षिता (पाखी)। उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मी अक्षिता के पिता श्री कृष्ण कुमार यादव सम्प्रति उत्तर गुजरात परिक्षेत्र, अहमदाबाद के पोस्टमास्टर जनरल हैं व मम्मी श्रीमती आकांक्षा एक कॉलेज में प्रवक्ता रही हैं। दोनों ही जन ख़्यात साहित्यकार व ब्लॉगर भी हैं। अक्षिता की आरंभिक शिक्षा देश के विभिन्न भागों – कानपुर, पोर्टब्लेयर, प्रयागराज, जोधपुर, लखनऊ, वाराणसी व अहमदाबाद में हुई। फ़िलहाल वह दिल्ली विश्विद्यालय में अध्ययनरत हैं।

अक्षिता ने न सिर्फ हिंदी ब्लॉगिंग में नए कीर्तिमान स्थापित किया, बल्कि भारत सरकार ने भी उसकी उपलब्धियों के मद्देनजर वर्ष 2011 में बाल दिवस पर उसे मात्र 4 साल 8 माह की आयु में आर्ट और ब्लॉगिंग के लिए ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री, भारत सरकार श्रीमती कृष्णा तीरथ ने यह सम्मान प्रदान किया था। अक्षिता न सिर्फ भारत की सबसे कम उम्र की ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता’ है बल्कि भारत सरकार ने पहली बार किसी प्रतिभा को ब्लॉगिंग विधा के लिए सम्मानित किया।
देश.दुनिया में आयोजित होने वाले तमाम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन में भी अक्षिता की प्रतिभा को सम्मानित किया गया। नई दिल्ली में अप्रैल 2011 में हुए प्रथम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में अक्षिता को ‘श्रेष्ठ नन्ही ब्लॉगर’ के सम्मान से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सम्मानित किया । काठमांडू, नेपाल में आयोजित तृतीय अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मलेन (2013) में भी अक्षिता ने एकमात्र बाल ब्लॉगर के रूप में भाग लिया और नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन नरसिंह केसी की प्रशंसा बटोरी। पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, श्री लंका (2015) में अक्षिता को ‘परिकल्पना कनिष्ठ सार्क ब्लॉगर सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
अक्षिता को ड्राइंग बनाना बहुत अच्छा लगता है। पहले तो हर माँ-बाप की तरह उसके मम्मी-पापा ने भी ध्यान नहीं दिया, पर धीरे-धीरे उन्होंने अक्षिता के बनाए चित्रों को सहेजना आरंभ कर दिया। इसी क्रम में इन चित्रों और अक्षिता की गतिविधियों को ब्लॉग के माध्यम से भी लोगों के सामने प्रस्तुत करने का विचार आया और 24 जून 2009 को ‘पाखी की दुनिया’ (https://pakhi-akshita.blogspot.com/) नाम से अक्षिता का ब्लॉग अस्तित्व में आया। देखते ही देखते करीब एक लाख से अधिक हिन्दी ब्लॉगों में इस ब्लॉग की रेटिंग बढ़ती गई। बच्चों के साथ-साथ बडों में भी अक्षिता (पाखी) का यह ब्लॉग काफी लोकप्रिय हुआ। इस पर जिस रूप में अक्षिता द्वारा बनाये चित्र, पेंटिंग्स, फोटोग्राफ, पर्यटन और अक्षिता की बातों को प्रस्तुत किया जाता है, वह इस ब्लॉग को रोचक बनाता है। इस ब्लॉग का संचालन आरंभ में अक्षिता के मम्मी-पापा द्वारा किया जाता था, पर धीरे-धीरे अक्षिता भी अपने इस ब्लॉग को संचालित करने लगीं।
अक्षिता की कविताएं और ड्राइंग देश की तमाम पत्र-पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुई हैं। तमाम पत्र-पत्रिकाओं में अक्षिता को लेकर फीचर और समाचार लिखे गए वहीं आकाशवाणी और कुछेक चैनलों पर भी उसके इंटरव्यू प्रकाशित हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा प्रकाशित पुस्तक “और हमने कर दिखाया” ( देश के कुछ प्रतिभावान बच्चों की कहानियाँ) में भी ‘नन्ही ब्लॉगर पाखी की ऊँची उड़ान’ शीर्षक से एक अध्याय शामिल किया गया है।
ग्रेजुएशन के बाद अक्षिता आईएएस ऑफिसर बनना चाहती है, पर सामाजिक सरोकारों के प्रति अभी से उसके मन में जज्बा है। गरीब बच्चों से लेकर अनाथों तक को कपड़े और पुस्तकें देकर वह इनके हित में सोचती है। पौधारोपण द्वारा पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरम्भ “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान से अक्षिता काफी प्रेरित हुईं और इसके प्रति भी लोगों को सचेत किया।
नन्ही प्रतिभा अक्षिता (पाखी) को देखकर यही कहा जा सकता है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं, बशर्ते उसे अनुकूल वातावरण व परिवेश मिले। अक्षिता को श्रेष्ठ नन्ही ब्लॉगर और सबसे कम उम्र में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिलना यह दर्शाता है कि बच्चों में आरंभ से ही सृजनात्मक शक्ति निहित होती है। उसे इग्नोर करना या बड़ों से तुलना करने की बजाय यदि उसे बाल मन के धरातल पर देखा जाय तो उसे पल्लवित-पुष्पित किया जा सकता है।
जो एकांत को नहीं जानता, वह स्वतंत्रता के अर्थ को नहीं समझ सकता
एक जापानी फ़िल्म ‘परफ़ेक्ट डेज़’ से — यह हिरायामा नामक एक साधारण व्यक्ति की कथा है, जो टोक्यो जैसे व्यस्त महानगर में शौचालय की सफ़ाई का कार्य करता है। फ़िल्म उसके जीवन के सूक्ष्म पहलुओं को इस प्रकार चित्रित करती है कि दर्शक उसके भीतर प्रकृति से गहरे जुड़ाव, संगीत के प्रति अनुराग और पुस्तकों के प्रति प्रेम को अनुभव कर सके। उसके जीवन का प्रत्येक क्षण गहन संतोष से भरा है। संयमित न्यूनतमवाद के माध्यम से यह कथा उसके दिनचर्या के लय, उसके सहज भाव, और उसके सूक्ष्म अवलोकनों को इस प्रकार प्रस्तुत करती है कि वह दर्शक को यह सिखाती है — एकांत में भी जीवन कितनी गहराई से खिल सकता है।
फ़िल्म के केंद्र में यह भाव निहित है कि एकांत पीड़ा नहीं, वरन् आत्मबोध की साधना है। निस्संदेह, यह अत्यंत भावुक करने वाली कथा है। एकांत बहुत कुछ उजागर कर देता है। प्रायः हम निरर्थक विचलनों और कोलाहल में उलझे रहते हैं, जो हमारी चेतना को विभाजित कर हमारे अनमोल समय को नष्ट करते हैं। इस सबके बीच हम अपने अस्तित्व की विस्मयकारी अनुभूति को भुला बैठते हैं।
मैं एकांत की प्रशंसा करती हूँ — बल्कि यह कहूँ कि अब तो मैं उससे कुछ अधिक ही अनुरक्त हो गई हूँ। इसकी अपनी एक सम्मोहन शक्ति है। जनमानस में यह धारणा प्रचलित है कि एकांत दुखदायी होता है, परंतु मेरे अनुभव में यह सुवर्ण पक्ष है। यह मुझे मेरे जीवित होने का बोध कराता है, जीवन के सुख-दुःख के द्वंद्व को अनुभूत कराता है, और यह सिखाता है कि वेदना ही जीवन की सुंदरता को निखारती है।
एक शोध में यह उल्लेख है कि भीड़भरी दुनिया में अकेले रहना अधिकांश लोगों को भयावह प्रतीत होता है। अनेक व्यक्ति इस एकांत से बचने के लिए अनुपयुक्त या विषाक्त संबंधों को भी बनाए रखते हैं। मेरे एक विद्यार्थी ने मुझसे संदेश के माध्यम से संपर्क किया। उसने कहा कि हाल ही में मिली एक युवती के साथ उसकी विचारधाराएँ मेल नहीं खातीं, अतः उनका साथ आगे नहीं चल सकता। यह सुनकर लगा, मामला सरल है। परंतु उसका वास्तविक प्रश्न यह था — विछोह के बाद उत्पन्न होने वाला शून्य उसे भयभीत कर रहा था। वह उस रिक्तता के डर से उस संबंध को ढोता रहना चाहता था।
मनोवैज्ञानिक इसे ऑटोफोबिया, मोनोफोबिया या ए
फिर भी, अकेलापन जीवन का अविभाज्य सत्य है। इसीलिए आवश्यक है कि हम एकांत में भी स्वयं को संभालना सीखें। वास्तव में यह न तो कठिन है न सरल — यह केवल समझ और अभ्यास की बात है।
लेखिका होने के नाते मैं एकांत का मूल्य भलीभाँति समझती हूँ। कई बार मैं बिना किसी योजना के यात्रा पर निकल जाती हूँ — कभी समुद्र तट की सैर के लिए, तो कभी पर्वतों से ढलती संध्या देखने। उस धुँधलाती शाम में, जब लहरें मेरे पैरों को छूतीं और ठंडी रेत मेरे भीतर के कोलाहल को शांत करती — तब प्रतीत होता कि यह ब्रह्मांड हमारी कल्पना से कहीं अधिक विराट और गहन है।
ऐसे क्षण मुझे चिंताओं और भय से ऊपर उठा देते हैं। न्यूनतम व्यवधान और परामर्श के बिना, अपने ढंग से जीना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हितकारी है। यह एकाग्रता, रचनात्मकता और आत्मस्वीकार्यता को बढ़ाता है।
हालाँकि, एकांत की रुचि हमारे व्यक्तित्व पर भी निर्भर करती है — बहिर्मुख व्यक्ति इसे नापसंद करते हैं, जबकि अंतर्मुख इसे अपना लेते हैं। परंतु अंतर्मुख होना यह नहीं दर्शाता कि व्यक्ति सदैव अकेला रहना चाहता है। सामाजिकता भी आवश्यक है। संतुलन ही कुंजी है — तभी हम एकांत के उजले पक्ष को पहचान सकते हैं।
एकांत के आलोक में महापुरुष
ग्रिगोरी पेरलमैन, रूस के यहूदी गणितज्ञ, ने पॉइनकेरे अनुमान जैसे जटिल गणितीय प्रश्न को सुलझाया — जो सात क्ले मिलेनियम पुरस्कार समस्याओं में से एक था। इसके लिए उन्हें फील्ड्स पदक और दस लाख डॉलर का पुरस्कार मिला। परंतु उन्होंने दोनों अस्वीकार कर दिए। कारण था — गणित में सामूहिक योगदान को वे व्यक्तिगत पुरस्कार से अधिक महत्त्वपूर्ण मानते थे।
पेरलमैन का एकांत-प्रेम उस समय प्रकट हुआ जब एक पत्रकार ने उनसे साक्षात्कार का अनुरोध किया। उन्होंने शांत स्वर में कहा,
“आप मुझे विचलित कर रहे हैं। मैं अभी मशरूम चुन रहा हूँ।”
इस एक वाक्य में उनके जीवन का दर्शन समाहित था — शांत एकांत में चिंतन का सुख।
भारत के डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम भी सरलता और एकांत के प्रतीक थे। वैज्ञानिक उपलब्धियों के बावजूद उन्होंने सादगी को अपना धर्म माना। राष्ट्रपति रहते हुए भी उन्होंने एक भव्य भोज में विलासिता का त्याग कर एक साधारण शाकाहारी भोजन चुना, और एक कोने में बैठकर शांतिपूर्वक भोजन किया। उनके जीवन का सार यही था — निष्काम कर्म, एकांत की साधना और विनम्रता का तेज।
पेरलमैन और डॉ. कलाम दोनों यह सिखाते हैं कि सच्ची प्रतिभा अक्सर मौन में पल्लवित होती है, और ज्ञान की खोज सांसारिक प्रशंसाओं से कहीं ऊँची होती है।
साथ में भी अकेले — समूहों में एकांत का अनुभव
क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है कि आप किसी समूह का हिस्सा होते हुए भी स्वयं को बाहरी व्यक्ति महसूस करते हैं? इसे मनोवैज्ञानिक “थ्वार्टेड बिलॉन्गिंगनेस” कहते हैं — अर्थात् सामाजिक समूहों में होते हुए भी अस्वीकार या असंगति का अनुभव। जब हमें बार-बार ऐसा लगता है कि हम किसी के लिए आवश्यक नहीं हैं, तो यह हमारे आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है।
हम समूहों का हिस्सा क्यों बनते हैं?
पहला — पहचान पाने के लिए।
दूसरा — सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु।
तीसरा — मान्यता, स्वीकृति और तुलना के लिए।
परंतु हम जितना स्वतंत्र होने का दावा करते हैं, उतना नहीं होते। हमें दूसरों की स्वीकृति की आवश्यकता रहती है। कोई हमारी प्रशंसा करे तो मन प्रसन्न हो उठता है, और आलोचना करे तो उदासी छा जाती है। इस प्रकार हमारा भावनात्मक नियंत्रण दूसरों के हाथ में होता है।
जब समूह में समानता नहीं रहती, जब कुछ लोग नियंत्रण करने लगते हैं, तो “साथ” भी “अकेलापन” बन जाता है। पाँच-दस भिन्न स्वभाव के लोगों को एक साथ रख दें तो कुछ समय में ही भावनाएँ टकराने लगती हैं। कोई व्यक्ति केंद्र में आने का प्रयास करेगा, तो कोई चुपचाप निकल जाएगा।
हम सब अपने जीवन में करियर की अनिश्चितता, मित्रताओं की जटिलता, अभिव्यक्ति की कठिनाई और असुरक्षाओं से जूझते हैं। परंतु हम इन भावनाओं पर बहुत कम बोलते हैं। यदि मैं अपने किसी मित्र से कहूँ — “मैं बात नहीं करना चाहती, मुझे घर जाना है” — और वह न पूछे कि “सब ठीक है?” तो शायद हमारी तरंगें एक जैसी नहीं हैं।
फिर भी, इसका अर्थ यह नहीं कि हमें अकेले ही रहना चाहिए। बल्कि इसका तात्पर्य यह है कि एकांत और संबंध — दोनों का संतुलन ही मानसिक शांति का मूल है।
कभी-कभी जीवन के मोड़ पर हमें सच्चे साथी, आत्मीय मित्र या गहन संबंध वहीं मिलते हैं जहाँ हम अकेलेपन को स्वीकारते हैं।
(लेखिका सामाजिक विषयों पर लेखन करती हैं)
अंतत: उच्चतम न्यायालय ने भारत संघ की राजभाषा हिंदी में तैयार अपील की स्वीकार की !
बी सी आई परिवाद पत्र संख्या- 1 /2025 महाधिवक्ता कार्यालय बिहार बनाम इंद्रदेव प्रसाद में पारित अनुशासन समिति का आदेश दिनांक 20.8.2025 के विरुद्ध अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 38 के अंतर्गत उसके उत्तरवादी इंद्रदेव प्रसाद,भारत संघ की राजभाषा हिंदी में अपील तैयार किया, जिसकी दाखिला को उत्तम न्यायालय यह लिखकर तीन बार डिसएप्रूव्ड किया कि उच्चतम न्यायालय भारत की भाषा अंग्रेजी है, जिसे उत्तरवादी इंद्रदेव प्रसाद देश की भाषा हिंदी का अपमान समझकर बार-बार हिंदी विरोधी नियम कानून की आलोचना करते हुए हिंदी में ही आवेदन देते रहे और अंततः उच्चतम न्यायालय भारत को, भारत संघ की राजभाषा हिंदी में तैयार सिविल अपील का दाखिला स्वीकार करना पड़ा, जिसका डायरी नंबर 64475 /2025 है।
बताते चलें कि उक्त बीसीआई परिवाद पत्र संख्या 1 /2025 में भी उत्तरवादी इंद्रदेव प्रसाद सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 7 नियम 11 (घ) सहपठित अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35(3) एवं 36 (3) के अंतर्गत एक आवेदन भारत संघ की राजभाषा हिंदी में दाखिल किया है, जिसका अंग्रेजी अनुवाद बीसीआई अनुशासन समिति के द्वारा इनसे सुनवाई तिथि 12.11.2025 को यह बोल कर माँगी गयी कि इस न्यायालय की भाषा अंग्रेजी है। हम हिंदी को रोक नहीं रहे हैं, सिर्फ अपने न्यायालय के नियम के सम्मान में आपसे अंग्रेजी अनुवाद मांग रहे हैं, जिस पर अधिवक्ता प्रसाद ने कहा, ‘सर हम अपने हिंदी आवेदन का अंग्रेज़ी अनुवाद देने से सविनय इनकार करते हैं।
श्री प्रसाद के उपरोक्त साहसिक कार्य के लिए ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई’ / ‘अखिल भारतीय भाषा संरक्षण संगठन, दिल्ली’/ ‘भारतीय भाषा अभियान बिहार प्रदेश’ / ‘हिंदी सेवा निधि इटावा’ / ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन, बिहार’ / ‘हिंदी शिक्षा संघ ऑस्ट्रेलिया’ / ‘अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति’ से जुड़े हुए लोगों ने उनको बधाई दी है और सब लोग सफलता की कामना कर रहे हैं।
अधिवक्ता, पटना उच्च न्यायालय
चलभाष:- 938644 2093
ईमेल:-indradeoprasad1967@
साभार- वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई
vaishwikhindisammelan@gmail.