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भारतीय महिला क्रिकेट: नई उड़ान, नई संभावना को सलाम

2 नवंबर 2025 का रविवार भारतीय खेल जगत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया। यह वह दिन था जब नवी मुंबई का डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स अकेडमी मैदान न केवल एक विश्व कप का साक्षी बना, बल्कि भारतीय महिला शक्ति की अजेय प्रतिभा और जज्बे का भी प्रमाण देखा। शेफाली वर्मा ने 87 रन की पारी खेल कर विश्वकप को भारत के नाम कराने में अमूल्य योगदान दिया। शेफाली की यह पारी आत्मविश्वास से भरी होने के साथ-साथ सनसनीखेज पारी रही। इसी के साथ स्मृति मंधाना ने अपना सर्वश्रेष्ठ देते हुए भारत के लिये सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बनी। उनकी टाइमिंग एवं कंवर ड्राइव ने सबका दिल जीत लिया। वैसे टीम का हर खिलाड़ी इस आश्चर्यकारी जीत के लिये बधाई का पात्र है। निश्चित ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने आईसीसी महिला विश्व कप 2025 अपने नाम कर ऐसा इतिहास रचा, जो न केवल खेल का अध्याय है बल्कि सामाजिक परिवर्तन और नारी सशक्तिकरण की प्रेरक गाथा भी है। विश्व विजेता बनने के बाद भारतीय महिला क्रिकेट की टीम की चर्चा दुनिया के हर कोने में हो रही है।

यह जीत केवल एक ट्रॉफी भर नहीं, बल्कि उस नारी शक्ति का उद्घोष है जो वर्षों से अपने अस्तित्व को साबित करने में लगी थी। भारतीय बेटियों ने मैदान में यह दिखा दिया कि अब “खेल” सिर्फ पुरुषों का क्षेत्र नहीं रहा, यह वह मंच है जहां नारी की प्रतिभा, रणनीति, धैर्य और आत्मविश्वास अपनी सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति पा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर टीम को बधाई देते हुए कहा कि “यह केवल क्रिकेट की जीत नहीं, बल्कि भारत की नारी शक्ति, परिश्रम और आत्मविश्वास की जीत है।” सच भी यही है कि यह विजय भारत की नई महिला चेतना का प्रतीक है, वह चेतना जो अब हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ रही है। अब भारतीय महिलाओं को हाशिया नहीं, पूरा पृष्ठ चाहिए और यह बात उन्होंने इस ऐतिहासिक जीत को हासिल करके साबित किया है।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार महिला वनडे विश्व कप अपने नाम कर ऐतिहासिक जीत हासिल की है। भारत और दक्षिण-अफ्रीका का फाइनल विश्व कप मैच सदा के लिए इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों के साथ अतीत के पन्नों में दर्ज हो गई है। हरमनप्रीत की कप्तानी में महिला क्रिकेट टीम ने यह यादगार जीत हासिल की है। इससे पहले मिताली राज की कप्तानी में महिला क्रिकेट टीम 2005 और 2017 में फाइनल तक पहुंची थी, लेकिन यहां आकर ट्रॉफी हाथ से फिसल गई थी। भारतीय महिला टीम ने टॉस हारने के बाद भी बल्लेबाजी के लिए उतरी और 298 रन बनाए। साउथ अफ्रीक की टीम इस आंकड़े को छू नहीं पाई, भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने साउथ अफ्रीका को 52 रन से हराकर 47 साल के इंतजार को खत्म किया।

इस महान सफलता के पीछे आईसीसी अध्यक्ष जय शाह की दूरदर्शी नीतियों और नेतृत्व का भी बड़ा योगदान है। उनके कार्यकाल में महिला क्रिकेट को वह सम्मान और अवसर मिले जिसकी वह वर्षों से हकदार थी। जय शाह ने न केवल संरचनात्मक सुधार किए बल्कि महिला क्रिकेट के लिए आधारभूत ढांचे, सुविधाओं और प्रोत्साहन योजनाओं को नई दिशा दी। उन्होंने यह साबित कर दिया कि जब नेतृत्व में दृष्टि होती है, तो इतिहास बदलता है। इस विश्व कप में भारतीय खिलाड़ियों ने अपने खेल से दुनिया को चकित किया। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने जिस साहस और सूझबूझ से टीम का नेतृत्व किया, वह प्रेरणा का विषय है। उनके बल्ले से निकले हर रन ने नारी शक्ति की धुन गाई।

स्मृति मंधाना की क्लासिकल बल्लेबाजी ने विपक्षी गेंदबाजों को बेहाल कर दिया, जबकि युवा खिलाड़ी शैफाली वर्मा की आक्रामकता ने नई पीढ़ी की ऊर्जा को स्वर दिया। गेंदबाजी में रेणुका ठाकुर और पूजा वस्त्राकर की सटीक लाइन-लेंथ ने टीम को हर मुश्किल समय में संभाला, वहीं स्पिनर दीप्ति शर्मा ने अपनी जादुई गेंदों से विरोधियों के हौसले पस्त किए। इस टूर्नामेंट में भारत की फील्डिंग और फिटनेस भी अप्रतिम रही, जो यह दर्शाती है कि अब भारतीय महिला क्रिकेट केवल तकनीक नहीं, बल्कि रणनीति और समर्पण के सर्वाेच्च मानकों पर खड़ी है। महिला क्रिकेट खिलाड़ी नवीन क्षमताओं की नई उड़ान भरते हुए हर मन की मुराद पूरी कर रही है। यह जीत केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय खेल संस्कृति में परिवर्तन की दिशा का प्रतीक है। आज भारत की बेटियां छोटे कस्बों और गाँवों से निकलकर विश्व मंच पर चमक रही हैं। यह उस सामाजिक परिवर्तन का परिणाम है जिसमें परिवार, समाज और सरकार ने नारी खेल प्रतिभा को अवसर देना शुरू किया है।

महिला विश्व कप 2025 ने यह सिद्ध कर दिया कि अब भारत में खेल सिर्फ “मैदान” तक सीमित नहीं, यह राष्ट्रीय चेतना और गौरव का हिस्सा बन चुका है। यह नारी स्वाभिमान, श्रम और संघर्ष की कहानी है। क्रिकेट अब केवल पुरुषों की लोकप्रियता का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि महिलाओं की असाधारण योग्यता का उत्सव बन गया है। भारत की यह जीत उस भविष्य की ओर इशारा करती है जहाँ खेल, लिंग भेद से परे, केवल प्रतिभा और परिश्रम के आधार पर सम्मान पाएगा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की यह ऐतिहासिक विजय केवल कप जीतने की कहानी नहीं है, यह उस भारत की घोषणा है जो अपनी बेटियों को आगे बढ़ाने का साहस रखता है। यह जीत हर उस लड़की की प्रेरणा है जो गली के मैदान में क्रिकेट बैट थामे सपना देखती है कि एक दिन वह भी भारत के लिए खेलेगी। यह स्वर्णिम विजय हमें यह संदेश देती है कि भारत की नारी अब हर क्षेत्र में “खेल बदलने” के लिए तैयार है। जय शाह जैसे सक्षम नेतृत्व और खिलाड़ियों की प्रतिभा से सुसज्जित यह टीम आने वाले समय में विश्व क्रिकेट का नया अध्याय लिखेगी, जहाँ हर शॉट में आत्मविश्वास होगा, हर गेंद में संकल्प, और हर जीत में भारत की बेटियों की दमकती मुस्कान। भारत की बेटियाँ अब सिर्फ खेल नहीं रही हैं बल्कि वे इतिहास रच रही हैं।

देश पर छा रहे अनेकानेक उजालों के बीच महिला विश्व कप 2025 रूपी उजाला देशवासियों को प्रसन्नता का प्रकाश दे गया। संदेश दे गया कि देश का एक भी व्यक्ति अगर दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ने की ठान ले तो वह शिखर पर पहुंच सकता है। विश्व को बौना बना सकता है। पूरे देश के निवासियों का सिर ऊंचा कर सकता है। महिलाओं की इस करिश्माई उपलब्धि के बाद अखबारों के शीर्ष में यह समाचार छपा और सबको लगा कि शब्द उन पृष्ठों से बाहर निकलकर नाच रहे हैं। भारतीय महिला खिलाड़ियों ने खिलाड़ीपन के लम्बे रन-अप को पल-पल जीया है। इस दौरान बहुत कुछ पीया है तभी वे विश्व विजेता बनी। वरना यहां तक पहुंचते-पहुंचते कईयों के घुटने घिस जाते हैं। एक बूंद अमृत पीने के लिए समुद्र पीना पड़ता है।

सम्मान, पदवी, उपाधियां, अलंकरण बहुतों को मिलते हैं पर सही सीने पर सही तमगा और सही नाम के आगे सही सम्बोधन कभी-कभी लगता है। जैसा महिला विश्व कप 2025 की भारतीय महिला खिलाड़ियों के सीनों पर लगा है। जब भी कोई अर्जुन धनुष उठाता है, निशाना बांधता है तो करोड़ों के मन में एक संकल्प, एक एकाग्रता का भाव जाग उठता है और कई अर्जुन पैदा होते हैं। अपने देश में हर बल्ला उठाने वाला अपने को गावस्कर, तेंगुलकर विराट कोहली, रोहित समझता है, हर बॉल पकड़ने वाला अपने को कपिल-अर्शदीप, बुमराह समझता है। हॉकी की स्टिक पकड़ने वाला हर खिलाड़ी अपने को ध्यानचंद, हर टेनिस का रेकेट पकड़ने वाला अपने को रामानाथन कृष्णन समझता है। और भी कई नाम हैं, मिल्खा सिंह, पी.टी. उषा, प्रकाश पादुकोन, गीत सेठी, जो माप बन गये हैं खेलों की ऊंचाई के। आज शेफाली हो स्मृति या फिर जेमिमा हो या दीप्ति आज माप बन गयी है और जो माप बन जाता है वह मनुष्य के उत्थान और प्रगति की श्रेष्ठ स्थिति है। यह अनुकरणीय है। जो भी कोई मूल्य स्थापित करता है, जो भी कोई पात्रता पैदा करता है, जो भी कोई सृजन करता है, जो देश का गौरव बढ़ाता है, जो गीतों मंे गाया जाता है, उसे सलाम। भारतीय महिला क्रिकेट टीम को सलाम।

प्रेषकः


(ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
फोनः 22727486, 9811051133

मेरी माँ स्व. नीलिमारानीः जिसने अभावों और संघर्ष के बीच मुझे बुलंदियों का रास्ता दिखाया

संतान चाहे अमीर हो या गरीब,प्रत्येक संतान के जीवन में और उसकी सभी प्रकार की कामयाबी में उसकी अपनी मां का विशेष महत्त्व होता है,दिव्य आशीर्वाद होता है,उसका संस्कार होता है,उसका परवरिश और कठोर अनुशासन होता है। यह बात मेरे साथ भी लागू है।मेरी मां ऐसे धनाढ्य परिवार से थी जहां पर उसकी परवरिश बडे लाड-प्यार से हुई थी। उस देदीप्यमान कन्या का विवाह किसी धनी लडके के साथ होना चाहिए था लेकिन उसके भाग्य ने उसका विवाह मेरे दादाजी के चलते एक साधारण, सौम्य तथा ईमानदार गरीब लडके के साथ हो गया। मेरे पिताजी,स्वर्गीय अनादि चरण सामंत बहुत गरीब थे लेकिन वे आजीवन एक नेक,स्वच्छ मन वाले  और सदाचारी इंसान थे।

आप अवश्य सोच रहे होंगे कि मैंने यह पुस्तक- नीलिमारानीःमाई मदर,माई हीरो, क्यों लिखी- सच मानिए इसके लेखन का मूल कारण मेरा मां की अलौकिक दूरदर्शिता तथा उसकी निःस्वार्थ जनसेवा और समाजसेवा थी जिससे वह आजीवन संकल्पित भाव से जुडी रही। सच कबूं तो यथार्थ रुप में वह भारतीय नारी-जाति की गौरव थी जो नारी सशक्तिकरण को नया आयाम देना चाहती थी।

मेरी मां स्वर्गीया नीलिमा रानी सामंत जब मात्र 40 वर्ष की थी तभी मेरे पिताजी का एक रेलदुर्घटना में असामयिक निधन हो गया। मेरे परिवार के भरण-पोषण के साथ-साथ स्वयं के साथ-साथ कुल 7 बच्चों की परवरिश तथा उनकी शिक्षा –दीक्षा की पूरी जिम्मेदारी मेरी विधवा मां के कमजोर कंधों पर आ गई।

मेरे पिताजी निःस्वार्थ जनसेवा,समाजसेवा तथा लोकसेवा के लिए अपने जीवनकाल में  काबुलीवालों से ऋण लिया था। हमलोग इतने गरीब थे कि जब मेरे पिताजी का निधन हुआ तो मेरी मां ने मेरे बडे भाई से यह कहा कि वे अपने पिताजी का अंतिम संस्कार कर के ही कलराबंक,मेरे पैतृक गांव लौटे। मेरी मां अपने जीवन के उन सबसे बुरे दिनों में काफी संघर्ष करके बडे धीरज और साहस के साथ अकेले ही अपनी कुल 7 संतानों को अच्छी शिक्षा प्रदानकर उन्हें नेक तथा स्वावलंबी बनाया।

जब मैंने 192-93 में ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर में कीट-कीस की स्थापना की नींव डाली और जब उसके निर्माण कार्य बडी तेजी के साथ आरंभ हुआ उस वक्त भी मेरी मां ने मेरे पैतृक गांव कलराबंक को भी स्मार्ट विलेज के रुप में विकसित करने की सलाह मुझे दी। उसने कहा कि कलराबंक गांव की अपनी झोपडी की मरम्मत तथा अपने परिवार की खुशी के लिए पैसे-संग्रह करने की जगह कलराबंक गांव के सर्वांगीण विकास के लिए पैसे लगाना।उसने मुझसे यह भी अपने लिए कोई आभूषण खरीदने तथा जगह-जमीन खरीदने के लिए नहीं कहा। मेरे भाइयों को पैसे देने के लिए भी नहीं कहा । उसके अनुसार हम जो कुछ भी कमायें उसका इस्तेमाल हमें अपनी मातृभूमि अपने पैतृक गांव कलराबंक की सेवा में ही लगाना चाहिए।

मैंने आज जो कुछ भी अपने जीवन में असाधारण कामयाबी के रुप में हांसिल किया है, वह सबकुछ अपनी मां के द्वारा प्राप्त बाल-संस्कारों तथा उसके नैतिक जीवन-मूल्यों का प्रतिफल है,जिसे मैंने उसकी आजीवन सेवा करके उसके दिव्य आशीर्वाद के रुप में प्राप्त किया है। मेरी मां की देन मेरी अच्छी परवरिश तथा अच्छे दिव्य संस्कार हैं जिनका अक्षरशः पालन मैं अपने जीवनकाल में करते आ रहा हूं।उसीने मुझे एक नेक,भद्र,परोपकारी,सजाचारी,धार्मिक तथा अच्छा इंसान बनाया है। इसलिए मेरे विदेह जीवन की उन तमाम उपलब्धियों को आज मैं अपनी स्वर्गीया मां नीलिमारानी ,माई मदरःमेरी हीरो को समर्पित करता हूं।

मैं जीवनभर अपनी स्वर्गीया मां नीलिमारानी सामंत के जीवन से अपनाये गये शाश्वत नैतिक और सामाजिक मूल्यों,सिद्धांतों,आध्यकत्मिक विवेक व चेतना तथा उसके शुद्ध जीवन आदि के प्रति ऋणी हूं जिनके बदौलत मैं भी आज पिछले लगभग 60 सालों से एक निःस्वार्थ जननायक,महान् शिक्षाविद् तथा आध्यात्मिक जीवन यापन कर रहा हूं । आज मैं जो कुछ भी हूं,वह सबकुछ मेरी मां स्वर्गीया नीलिमारानी सामंत की ही देन है।

यह पुस्तकः स्वर्गीया नीलिमारानीःमाई मदर,माई हीरो मैंने जो लिखी है वह निश्चित रुप से अपने  जैसे लाखों-करोड़ों युवाओं तथा समस्त नारी-जाति के सशक्तिकरण के लिए ही लिखी है।

(लेखक भुवनेश्वर के प्रसिध्द कीट एवँ कीस जैसे विश्वविद्यालयों के संस्थापक हैं)

एएसबीएल के “बिऑंड फ्यूटर वाल्स ” से रियल एस्टेट में नया अध्याय शुरू

हैदराबाद, तेलंगाना। भारत के सबसे दूरदर्शी रियल एस्टेट डेवलपर्स में से एक, ASBL ने “Beyond Four Walls” कार्यक्रम की मेजबानी की जो हैदराबाद में इस प्रकार का पहला उद्योग आधारित कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम रियल एस्टेट ब्रोकर्स और सेक्टर को बढ़ावा देने में व उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को समर्पित था। यह एक पारंपरिक समारोह नहीं था जो केवल क्रय-विक्रय पर केन्द्रित होते हैं। इसके विपरीत इस पहल ने ब्रोकर्स और डेवलपर्स को एक साथ लाने के लिए एक खुले मंच (open forum) के रूप में कार्य किया, जिससे सहयोग, पारदर्शिता और रियल एस्टेट के भविष्य पर संवाद को बढ़ावा मिला।

इंडस्ट्री की आवाज़ उठाने वाला एक मंच

इस इवेंट में चर्चा एवं विचार-विमर्श के लिए देशभर से प्रमुख आवाज़ें एक साथ आईं। डेवलपर्स का प्रतिनिधित्व करते हुए, ASBL के संस्थापक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजितेश कोरुपोलू ने सैकड़ों बिल्डरों की आवाज़ उठाई जबकि ब्रोकर्स के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व रवि केवलरमानी, मयंक अग्रवाल और दीप्ती मलेक जैसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त लीडर्स ने किया।

 

ब्रोकर्स, चैनल पार्टनर्स और रियल एस्टेट पेशेवरों से बने दर्शकों के साथ इस इवेंट ने एक ऐसा स्थान बनाया जहाँ विचारों को स्वतंत्र रूप से और सीधे रखा जा सका।

 

मुख्य विषय और चर्चा

पैनल और दर्शकों ने आज के रियल एस्टेट बाजार से संबंधित मुद्दों के एक विस्तृत स्पेक्ट्रम पर विचार-विमर्श किया:

  • शहरों की तुलना और बुनियादी ढाँचा : मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद की जीवनशैली, बुनियादी ढाँचे और सामर्थ्य (affordability) के आधार पर तुलना की गई। पैनलिस्टों ने हैदराबाद के ‘प्लानिंग-फर्स्ट’ दृष्टिकोण की प्रशंसा की और इसकी बढ़ती स्थिति पर प्रकाश डाला।
  • भारतीय रियल एस्टेट का भविष्य (20-30 साल आगे): भविष्यवाणियां वर्टिकल मेगा-सिटी और सैटेलाइट टाउनशिप से लेकर टेक्नोलॉजी-संचालित योजना और NRI मांग के साथ हाइब्रिड, टिकाऊ क्लस्टर तक रहीं।
  • शहरों में खरीदारों की प्राथमिकताएं : युवा खरीदारों को अधिक तर्क-संचालित (logic-driven) के रूप में देखा गया, जो capital appreciation और रेंटल यील्ड की तलाश में हैं। Mumbai में लग्ज़री खरीददारों को स्थान और दृश्यों के लिए अत्यधिक प्रीमियम का भुगतान करते हुए देखा गया, जबकि हैदराबाद वैल्यू-संचालित, विशाल घरों के लिए सबसे अलग रहा।
  • टेक्नोलॉजी की भूमिका : पैनल ने इस बात पर चर्ची की कि डिस्कवरी ऑनलाइन कैसे हुई है और यह कि अगला कदम खरीददार और ब्रोकर के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए लेन-देन, दस्तावेज़ीकरण और एट्रिब्यूशन को डिजिटाइज़ करने में निहित है।

ब्रोकर को आने वाली चुनौतियाँ

इस चर्चा के दौरान एक समर्पित हिस्सा और दर्शकों के कई सवाल ब्रोकर्स के सामने आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित थे। क्लाइंट्स द्वारा ब्रोकर्स को बाईपास करने, कमीशन में देरी या इनकार और केंद्रीकृत नियमन की कमी जैसे मुद्दे उठाए गए। पैनलिस्टों ने मजबूत एट्रिब्यूशन सिस्टम, डेवलपर्स के साथ पारदर्शी संचार और दीर्घकालिक साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया जो ब्रोकर्स के प्रयासों की रक्षा करते हुए निष्पक्ष सहयोग सुनिश्चित करे।
यह क्यों मायने रखता है

ब्रोकर्स को मंच देकर ASBL ने निर्माण से परे सहयोग में अपना विश्वास प्रदर्शित किया। इस पहल ने डेवलपर्स और ब्रोकर्स के बीच दूरी को कम करने का काम किया व इस विचार को मजबूत किया कि भारतीय रियल एस्टेट में प्रगति साझा विश्वास और खुले संवाद पर निर्भर करती है।
इवेंट में बोलते हुए, अजितेश कोरुपोलू ने कहा, “हमारा दृष्टिकोण घर बनाने से आगे बढ़कर, भरोसे का इकोसिस्टम बनाने का है। ब्रोकर्स के लिए एक पारदर्शी, सम्मानजनक मंच बनाकर हम सुनिश्चित करते हैं कि खरीदार और विक्रेता दोनों को मजबूत अधिक सहयोगी उद्योग प्रथाओं से लाभ मिले।”
स्पॉटलाइट में हैदराबाद

पैनलिस्टों ने हैदराबाद के बुनियादी ढाँचे, सामर्थ्य और रहने योग्य होने की प्रशंसा की इसे भारत के “उभरते सितारे” के रूप में स्थापित किया। चर्चाओं में शहर के उच्च-उदय सामर्थ्य, मजबूत बुनियादी ढाँचे, और बढ़ते IT/फार्मा क्षेत्रों के संतुलन पर प्रकाश डाला गया, जिससे यह न केवल एक आकर्षक बाजार बन गया है, बल्कि भविष्य के शहरी विकास के लिए एक खाका (blueprint) भी बन गया है।

Deepika Guleria 
Senior Executive – Media Relations

सुप्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. रामदरश मिश्र का निधन, मातृभाषा ने दी श्रद्धांजलि

इंदौर। देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, पद्मश्री प्रो. रामदरश मिश्र  के निधन पर मातृभाषा ने दी श्रद्धांजलि।
प्रो. रामदरश मिश्र जी का जन्म 15 जून 1924 को गोरखपुर जिले के कछार अंचल के गाँव डुमरी में हुआ था। आपके पिता रामचन्द्र मिश्र और माता कमलापति मिश्र हैं। प्रो. मिश्र बहुआयामी रचनाकार रहे, आपकी सुदीर्घ साहित्यिक सेवाओं के लिए वर्ष 2025 में आपको भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से भी अलंकृत किया। हाल ही में मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा जीवन गौरव सम्मान से भी सम्मानित किया गया। आपने कई किताबें लिखी हैं।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने कहा कि ‘निःसंदेह एक पिता तुल्य व्यक्तित्व का देह को त्यागकर अक्षर देह में परिवर्तित हो जाना, हमारे समय की अपूरणीय क्षति है। कई स्मृतियों के साथ उनसे जुड़ाव रहा, पुस्तक मेले में हुई उनसे मुलाक़ात, घर पर पूज्य माताजी सरस्वती देवी जी की मौजूदगी में उनका आशीर्वाद और फिर कई कार्यक्रम और भेंट। ऐसी अनगिनत स्मृतियों को आज आँखों को भिगाने का अवसर मिल गया।’
संस्थान की राष्ट्रीय सचिव भावना शर्मा ने कहा कि ‘हम भाग्यशाली हैं कि हमें कीर्तिशेष रामदरश मिश्र जी का सानिध्य, साथ और सम्बल मिला है।’ उनके निधन पर कवि राजकुमार कुम्भज, मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ सहित राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नितेश गुप्ता, राष्ट्रीय सचिव भावना शर्मा, सह सचिव सपन जैन काकड़ीवाला, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शिखा जैन, कार्यकारिणी सदस्य गणतंत्र ओजस्वी, डॉ. नीना जोशी, मणिमाला शर्मा, अनुपमा समाधिया आदि सदस्यों ने गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

सियासत के पार गहलोत और माथुर की मुलाकात के मायने

राजनीति में जब विरोधी विचारधाराओं के दो दिग्गज नेता अकेले में मिलते हैं, तो हलचल होना स्वाभाविक है। परंतु कुछ मुलाकातें ऐसी होती हैं, जो राजनीति के दायरे से ऊपर उठकर मानवीय मजबूतियों और रिश्तों की सच्चाई को बयान करती हैं। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सिक्किम के राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर की जयपुर में हुई भेंट भी कुछ वैसी ही रही। यह मुलाकात न किसी राजनीतिक सौदेबाजी का संकेत थी, न कोई भावी रणनीति का हिस्सा और न ही सियासत की सांसों के सच को संवारने की कोशिश। बल्कि यह वह पल था, जब जीवन की आत्मीयता, पुरानी यादों के साये और आपसी सम्मान की भावना ने सियासत की सीमाओं को और विस्तार दे दिया। इस मुलाकात ने यह याद दिला दिया कि राजनीति के मैदान में भले ही विचारधाराएं टकराती हों, लेकिन रिश्तों का संसार सदा संवेदनाओं से सहेजा रहता है।

 

राजस्थान के दिग्गज बीजेपी नेता रहे और अब सिक्किम के राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर 1 नवंबर 2025 को सुबह जयपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सिविल लाइंस स्थित निवास पर अपने परिवार में होने वाले विवाह समारोह का निमंत्रण देने पहुंचे। यह दृश्य राजस्थान की राजनीति में एक सुकून भरा अपवाद था। गहलोत ने उनका आत्मीयता से स्वागत किया, और दोनों के बीच पारिवारिक स्तर की बातचीत हुई। कोई राजनीतिक विमर्श नहीं, कोई रणनीति नहीं — बस सिर्फ संबंधों की गर्माहट। आजकल की राजनीति के कठोर और प्रायः आरोप – प्रत्यारोप भरे माहौल में, यह मुलाकात जीवन के मानवीय पक्ष को सहेजने का अवसर बन गई। गहलोत से इस मुलाकात को राज्यपाल माथुर ने स्वयं भी रील के जरिए सोशल मीडिया पर प्रेषित करके संबंधों के सच को संवारा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी सहयोगी रहे राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते हैं कि सियासत का यही वह मानवीय पहलू है जो बताता है कि राजनेताओं के बीच मतभेद तो हो सकते हैं, लेकिन रिश्तों की डोर अगर सच्चाई और सद्भाव से बुनी हुई हो, तो वह कभी कमजोर नहीं पड़ती। परिहार कहते हैं कि वैसे भी राजस्थान की राजनीति में ओमप्रकाश माथुर और अशोक गहलोत केवल बीजेपी या कांग्रेस के नेता नहीं, बल्कि जन नेता माने जाते हैं और उससे भी आगे, दोनों नेता राजनीति की उस पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं, जिन्होंने सियासत को सेवा और संवाद का माध्यम माना है।

 

 

अशोक गहलोत आज के दौर में, कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं, जबकि राज्यपाल बनने से पहले ओमप्रकाश माथुर भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकार रहे हैं। गहलोत और माथुर दोनों की छवि अपने अपने स्तर पर वैचारिक रूप से बेहद दृढ़ नेता की रही हैं। एक जन्म से संघ परिवार का स्वयंसेवक, तो दूसरा सदा से गांधीवादी। सामान्यतः राजनीति में ऐसे नेताओं के बीच संबंध औपचारिक या स्पष्ट दूरी भरे होते हैं। परंतु गहलोत और माथुर दोनों की की विशेषता यही रही है कि वे विचारधारा से परे जाकर इंसानियत और आत्मीयता को प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है कि वे विरोधी दल के नेताओं से भी सद्भाव बनाए रखते हैं। उनके भीतर एक ‘राजनीतिक सज्जनता’ की वह परंपरा जीवित है, जो अब धीरे-धीरे राजनीति से गायब होती जा रही है। राजस्थान की राजनीति के जानकार वरिष्ठ पत्रकार हरिसिंह राजपुरोहित का मानना है कि अशोक गहलोत की यही सहजता उन्हें न केवल अपनी पार्टी में, बल्कि विपक्ष के नेताओं के बीच भी सम्मान दिलाती है। राजपुरोहित कहते हैं कि माथुर और गहलोत की यह मुलाकात भले ही विवाह के आमंत्रण के लिए थी, लेकिन असल में, यह दोनों के एक दूसरे के प्रति सहज, सरल और सुदृढ़ मानवीय दृष्टिकोण का विस्तार है।

 

 

राजस्थान की राजनीति में यह कोई रहस्य नहीं कि गहलोत के लगभग सभी दलों के नेताओं से आत्मीय संबंध रहे हैं। माथुर की गहलोत से मुलाकात के बहाने बीजेपी के बड़े नेताओं की बात करें, तो भैरोंसिंह शेखावत से उनके स्नेहपूर्ण संबंध रहे। वसुंधरा राजे के साथ भी गहलोत का संवाद सदा सौहार्दपूर्ण रहा है। गुलाबचंद कटारिया की फकीरी के गहलोत भी कायल हैं, तो डॉ सतीश पूनिया से भी उनका अपनापन रहा है। इसी तरह से शेखावत, राजे, कटारिया, पूनिया और माथुर के मन में भी गहलोत के प्रति कभी कटुता नहीं रही। ओमप्रकाश माथुर, जो भले ही वर्तमान में राज्यपाल हैं लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के संगठनात्मक स्तंभ रहे हैं, उनका केंद्र भी सदा राजस्थान ही रहा है। यही साझा भूमि गहलोत और माथुर को जोड़ती रही है। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाते हैं और उनकी राजनीति की गहराई को जानते भी हैं। परिहार बताते हैं कि गहलोत की यह सदा से मान्यता रही है कि राजनीतिक विचारधाराएं भले अलग हों, मगर आपसी सम्मान में कभी कमी नहीं आई आनी चाहिए। वे बताते हैं कि राजनीति में विचारधारा के चलते राजनीतिक आलोचना भले ही करे, लेकिन गहलोत किसी के भी प्रति राजनीतिक तौर पर व्यक्तिगत कटुता कभी नहीं रखते।

 

 

सियासत में संबंध सौदेबाजी से नहीं, बल्कि सदाशयता से बनते हैं। अशोक गहलोत इस कला में निपुण हैं। गहलोत के तीन बार के मुख्यमंत्रित्व काल के 15 वर्षों के दौरान अनेक अवसर आए, जब उन्होंने विरोधी दलों के नेताओं के सुझावों को भी दिल खोल कर अपनाया। वरिष्ठ पत्रकार हरिसिंह राजपुरोहित कहते हैं कि उदयपुर में झीलों के जल संकट को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने धुर विरोधी, भाजपा नेता गुलाबचंद कटारिया के आग्रह पर देवास द्वितीय प्रोजेक्ट के लिए 50 करोड़ रुपए एक पल में ही मंजूर कर दिए। यह निर्णय किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं था, बल्कि जनता के हित और रिश्तों के सम्मान का प्रतीक था। राजपुरोहित कहते हैं कि गहलोत की यही कार्य शैली बताती है कि राजनीति यदि मानवीय दृष्टिकोण से की जाए, तो विरोध भी सहयोग में बदल सकता है। यही संवेदनशीलता उन्हें आज भी राजस्थान की राजनीति में एक अलग पहचान देती है। वैसे भी, राजनीति की भाषा चाहे बदल जाए, लेकिन ऐसी आत्मीय मुलाकातें हमें याद दिलाती हैं कि विचारधारा अलग हो सकती है, मगर विचारशीलता और विनम्रता ही राजनीति की असली पहचान है।

 

 

दरिया दिल कहे जाने वाले दो दिग्गज नेताओं, अशोक गहलोत और ओमप्रकाश माथुर की मुलाकात ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि राजनीति सिर्फ सत्ता की जंग नहीं, बल्कि उसके साये में रिश्तों और संवेदनाओं का भी संसार सदा विकसित होता रहता है। राजनीतिक विश्लेषक संदीप सोनवलकर कहते हैं कि गहलोत और माथुर की इस मुलाकात ने, न केवल सियासत को एक नई सोच दी, बल्कि लगातार टुच्चेपन और ओछेपन से सराबोर होती सियासत के किरदारों यह भी याद दिलाया है कि संवाद और सद्भाव ही राजनीति की असली आत्मा हैं। साथ ही दोनों नेताओं की यह की मुलाकात उस परंपरा का भी प्रतीक है, जहां सियासी सीमाएं इंसानी रिश्तों के आगे सीमित पड़ जाती हैं। सच्चे नेता वही हैं जो सत्ता से परे इंसानियत के रिश्तों को निभाते रहें।

(लेखक राजस्थान की समझ रखने वाले निवेश सलाहकार हैं)

कोटा के डॉ. प्रभात कुमार सिंघल को मिला लाइफ टाइम्स अचिवमेंट्स अवॉर्ड

कोटा /  राजस्थान में कोटा के लेखक एवं पत्रकार डॉ. प्रभात कुमार सिंघल को युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच न्यास, नई दिल्ली द्वारा रविवार को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी में लाइफ टाइम्स अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।  संस्था के 12 वें अखिल भारतीय साहित्य समारोह में डॉ. सिंघल को डी.पी.चतुर्वेदी स्मृति में लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान पांच हजार एक सौ रुपए राशि के पुरस्कार से अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें विगत चार दशकों से निरंतर अपने उत्कृष्ट मौलिक सृजन के द्वारा  हिंदी भाषा,पत्रकारिता,इतिहास, कला, संस्कृति और हिंदी साहित्य के उन्नयन हेतु  उल्लेखनीय योगदान हेतु प्रदान किया गया। इनके साथ – साथ देश के 8 साहित्यकारों को भी  विविध विधाओं में मौलिक सृजन के लिए पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया।
  समारोह के प्रमुख मुख्य अतिथि पूर्व आइए एस विनोद प्रकाश गुप्ता, मुख्य अतिथि महेश दिवाकर, अध्यक्ष शैलेन्द्र कपिल एवं अन्य अतिथियों ने माला  पहना कर, शाल ओढ़ा कर सम्मान पत्र एवं पुरस्कार राशि प्रदान कर साहित्यकारों का सम्मान किया। संस्था अध्यक्ष  रामकिशोर उपाध्याय ने सभी का स्वागत किया। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। समारोह में साहित्यिक विषयों पर परिचर्चा, रामकिशोर उपाध्याय की पुस्तक लालटेन सहित कई लेखकों की पुस्तकों और संस्था की वार्षिकी का विमोचन और काव्य गोष्ठी का आयोजन भी किया गया।

भारत की गौरवशाली समुद्री सीमाएँ

भारत के व्यापार का परिमाण के लिहाज से लगभग 95 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से तकरीबन 70 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्गों के जरिए होता है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था और प्रतिस्पर्धिता में इस क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका का पता चलता है।
मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 में 3-3.5 लाख करोड़ रुपए के अनुमानित निवेश से 150 से ज्यादा पहलकदमियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा जलपोत निर्माण के लिए हाल ही में 69725 करोड़ रुपए का पैकेज दिया गया है।
वित्त वर्ष 2024-25 में प्रमुख बंदरगाहों के जरिए 85.5 करोड़ टन माल की ढुलाई हुई जिससे समुद्री व्यापार और बंदरगाह कार्यकुशलता में ठोस वृद्धि का संकेत मिलता है।
भारतीय समुद्री मार्ग की यात्रा

 

भारत की आर्थिक शक्ति का प्रवाह समंदरों से होता है। भारत के व्यापार का परिमाण के लिहाज से लगभग 95 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से तकरीबन 70 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्गों के जरिए होता है। वास्तव में समुद्र भारत के वाणिज्य की प्राणशक्ति है। कच्चे तेल और कोयले से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और कृषि उत्पादों तक देश के आयात और निर्यात का बड़ा हिस्सा व्यस्त बंदरगाहों से होकर गुजरता है। ये बंदरगाह भारत को विश्व भर के बाजारों से जोड़ते हैं।1 वैश्वीकरण से आपूर्ति श्रृंखला की अंतरनिर्भरता गहरी होने और भारत के प्रमुख मैनुफैक्चरिंग और ऊर्जा केंद्र के रूप में उभरने के साथ ही बंदरगाहों और जहाजरानी की कार्यकुशलता राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धिता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।

भारत ने खुद को वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से साहसिक कदम उठाते हुए मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 (एमआईवी 2030) की शुरुआत की।2 वर्ष 2021 में शुरू किए गए इस परिवर्तनकारी रोडमैप में 150 से ज्यादा रणनीतिक पहलकदमियों को शामिल किया गया है।3 इस विजन का उद्देश्य संवहनीयता और कौशल विकास को केंद्र में रखते हुए बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, जहाजरानी क्षमता का विस्तार और अंतर्देशीय जलमार्गों का सुदृढ़ीकरण है। एमआईवी 2030 सिर्फ माल ढुलाई का खाका होने के बजाय व्यापार, निवेश और रोजगार का उत्प्रेरक भी है। यह भारत के आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धिता के मार्ग को प्रशस्त करता है।

एमआईवी 2030 की केंद्रीय विषयवस्तु

मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 उन 10 प्रमुख विषयों की पहचान करता है जो वैश्विक समुद्री शक्ति और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अग्रणी बनने की ओर भारत की यात्रा को आकार देंगे।

 

इंडिया मैरीटाइम वीक 2025: आगे बढ़ती समुद्री महत्वाकांक्षा

इंडिया मैरीटाइम वीक 2025 (आईएमडब्ल्यू 2025) वैश्विक समुद्री कैलेंडर की एक प्रमुख घटना है। इसका आयोजन 27 से 31 अक्टूबर तक मुंबई के नेस्को प्रदर्शनी केंद्र में किया जा रहा है।5 इसमें जहाजरानी, बंदरगाह और परिवहन समुदायों से जुड़े प्रमुख हितधारक हिस्सा लेंगे। आईएमडब्ल्यू 2025 विचार-विमर्श, सहयोग और व्यवसाय विकास का एक रणनीतिक मंच होगा। इसमें 100 से ज्यादा देशों के 1 लाख से अधिक प्रतिनिधियों, बंदरगाह संचालकों, निवेशकों, नवोन्मेषकों और नीति निर्माताओं के भाग लेने की संभावना है।6 इस 5 दिवसीय कार्यक्रम में 500 प्रदर्शक, विषय से संबंधित पैविलियन, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन तथा बंदरगाह आधारित विकास, जलपोत निर्माण समूह और डिजिटल कॉरिडोर से संबंधित सत्र होंगे।7

 

समुद्री परिवर्तन का एक दशक: 2014 से 2025

भारत का समुद्री क्षेत्र आर्थिक विकास के एक नए मार्ग पर चलते हुए बंदरगाहों, तटीय जहाजरानी और अंतर्देशीय जलमार्गों में रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस क्षेत्र की प्रगति राष्ट्र को मजबूत करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।

भारतीय बंदरगाहों ने स्थापित किए नए मानदंड

  • भारत के बंदरगाह क्षेत्र ने जबर्दस्त परिवर्तनकारी छलांग लगाई है। बंदरगाहों की कुल क्षमता 140 करोड़ मीट्रिक टन से दोगुना होकर 276.2 करोड़ मीट्रिक टन हो गई है। क्षमता में यह वृद्धि आधुनिकीकरण और अवसंरचना विकास में बड़े निवेश को प्रतिबिंबित करती है।8
  • माल ढुलाई का परिमाण भी प्रभावशाली ढंग से बढ़ते हुए 97.2 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़ कर 159.4 करोड़ मीट्रिक टन हो गया है।9 इससे समुद्री व्यापार और बंदरगाहों की कार्यकुशलता में जबर्दस्त वृद्धि का संकेत मिलता है। वर्ष 2024-25 में प्रमुख बंदरगाहों के जरिए 85.5 करोड़ टन माल की ढुलाई हुई। वर्ष 2023-24 में इन बंदरगाहों के जरिए सिर्फ 81.9 करोड़ टन माल की ढुलाई हुई थी।10
  • संचालन में काफी सुधार होने के परिणामस्वरूप जलपोतों के फेरों का औसत समय 93 घंटे से घट कर सिर्फ 48 घंटे रह गया है। इससे समग्र उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धिता में बढ़ोतरी हुई है।11
  • इस क्षेत्र की वित्तीय सुदृढ़ता में भी उछाल आया है। क्षेत्र का शुद्ध वार्षिक सरप्लस 1026 करोड़ रुपए से तेजी से बढ़ते हुए 9352 करोड़ रुपए हो गया जिससे राजस्व अर्जन और व्यय प्रबंधन में सुधार का पता चलता है।12
  • कार्यकुशलता के संकेतक भी मजबूत हुए हैं। संचालन अनुपात 73 प्रतिशत से सुधर कर 43 प्रतिशत हो जाना संवहनीय और लाभकारी बंदरगाह संचालनों की ओर एक बड़ा कदम है।13

भारतीय जहाजरानी में बेड़े, क्षमता और कार्यबल का विस्तार

  • भारत का जहाजरानी क्षेत्र लगातार विकास के मार्ग पर अग्रसर है। भारतीय ध्वज वाले जलपोतों की संख्या 1205 से बढ़ कर 1549 हो गई जो राष्ट्र की विस्तृत होती समुद्री उपस्थिति का परिचायक है।
  • भारतीय बेड़े की कुल टनधारिता भी 1 करोड़ सकल टन से बढ़ कर 1.35 करोड़ सकल टन हो गई है। इससे ज्यादा मजबूत और सक्षम जहाजरानी क्षमता का पता चलता है।
  • तटीय जहाजरानी में भी काफी गति दिखाई दी है। इसके जरिए माल ढुलाई 8.7 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़ कर 16.5 करोड़ मीट्रिक टन हो गई है। इससे परिवहन के कार्यकुशल, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों की ओर झुकाव को बल मिलता है।14

भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों का विकास

  • भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने 2025 में रिकॉर्ड 14.6 करोड़ मीट्रिक टन माल ढुलाई की जानकारी दी। यह अंतर्देशीय जल परिवहन क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक घटना है।15 यह वृद्धि 2014 के 1.8 करोड़ मीट्रिक टन की तुलना में 710 प्रतिशत अधिक है।16
  • मौजूदा समय में चालू जलमार्गों की संख्या 3 से बढ़ कर 29 हो गई है। इससे भारत के अंतर्देशीय परिवहन नेटवर्क में बड़ी वृद्धि का पता चलता है।17
  • आईडब्ल्यूएआई ने हल्दिया मल्टीमोडल टर्मिनल (एमएमटी) को आईआरसी नेचुरल रिसोर्सेस के हाथों सौंप दिया है। यह सरकार और निजी क्षेत्र की साझीदारी से अंतर्देशीय जलमार्ग अवसंरचना के उन्नयन और बहुविध परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विश्व बैंक की सहायता से निर्मित पश्चिम बंगाल के इस टर्मिनल की क्षमता वार्षिक 0.30 करोड़ मीट्रिक टन है।18
  • यात्री जलयान और रो-पैक्स (सवारी और वाहन ढोने वाले जहाज) की लोकप्रियता में भी काफी इजाफा हुआ है। इनके जरिए 2024-25 में 7.5 करोड़ से ज्यादा सवारियों ने यात्रा की। इससे पता चलता है कि सुरक्षित और कार्यकुशल यात्रा के लिए लोग जल आधारित परिवहन को तेजी से अपना रहे हैं।19

महज एक दशक में भारत में “समुद्री कामगारों की संख्या 1.25 लाख से बढ़कर 3 लाख से अधिक हो गई  है, जो अब वैश्विक समुद्री कामगारों का 12% है।20 अब देश प्रशिक्षित नाविकों के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया है और देश तथा विदेश में नौवहन, जहाज संचालन, रसद और संबद्ध समुद्री उद्योगों में व्यापक अवसर पैदा हो रहे हैं।21

 

समुद्री परिवहन विकास के लिए वित्तपोषण: समर्थन और नवोन्मेष

एम्आईवी 2030 में बंदरगाहों, नौवहन और अंतर्देशीय जलमार्गों में कुल 3-3.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।22 जहाज निर्माण को बढ़ावा देने और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए हाल ही में घोषित 69,725 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक पैकेज के साथ, भारत वैश्विक समुद्री मानचित्र पर खुद को मजबूती से स्थापित करने के लिए अपनी विशाल तटरेखा का लाभ उठाने का एक रणनीतिक मार्ग तैयार कर रहा है।23 लक्षित आवंटन और रणनीतिक पहल समग्र दृष्टिकोण के साथ सहजता से जोड़े गए हैं, जिससे प्रस्तावित निवेश को कार्यान्वित करने के उपाए किये जा रहे हैं ।

25,000 करोड़ रूपए की राशि के साथ, समुद्री विकास कोष (एमडीएफ) भारत की नौवहन क्षमता और जहाज निर्माण क्षमता के विस्तार के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त, 24,736 करोड़ रूपए24 के परिव्यय वाली संशोधित जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना (एसबीएफएएस) घरेलू लागत संबंधी नुकसानों से निपटने और जहाज़-तोड़ने को बढ़ावा देने के लिए है, जबकि 19,989 करोड़ रूपए के परिव्यय के साथ जहाज निर्माण विकास योजना (एसबीडीएस) ग्रीनफील्ड क्लस्टर, यार्ड के विस्तार और जोखिम कवरेज को प्रोत्साहित करती है।25 इसके अलावा, विशाखापत्तनम में 305 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित भारतीय जहाज प्रौद्योगिकी केंद्र (आईएसटीसी) जहाज डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, इंजीनियरिंग और कौशल विकास के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में उभरेगा।26

पूर्वोत्तर भारत में अंतर्देशीय जलमार्ग अवसंरचना के विकास में 1,000 करोड़ रूपए से अधिक का निवेश किया गया है, जो देश के नदियों के नेटवर्क के माध्यम से परिवहन और व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस निवेश में से, लगभग 300 करोड़ रूपए मूल्य की परियोजनाएँ पहले ही पूरी हो चुकी हैं और शेष परियोजनाएँ भी पूरी होने वाली हैं, इससे कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय व्यपार को बढ़ावा मिलेगा। इस क्षेत्र में पर्यटन को भी बड़े पैमाने पर लाने की तैयारी की जा रही है। कोलकाता के हावड़ा स्थित हुगली कोचीन शिपयार्ड में 250 करोड़ रूपए के संयुक्त निवेश से दो लग्ज़री क्रूज़ जहाज बनाए जा रहे हैं। 2027 में शुरू होने वाले ये जहाज ब्रह्मपुत्र नदी में चलेंगे, जिससे सरकार के क्रूज़ भारत मिशन के तहत असम के नदी पर्यटन परिदृश्य में बदलाव आने की उम्मीद है।27

सागरमाला कार्यक्रम, भारत को वैश्विक समुद्री केंद्र में बदलने की एक प्रमुख पहल है। यह समुद्री भारत विजन 2030 और समुद्री अमृत काल विजन 2047 का एक प्रमुख स्तंभ है। इस कार्यक्रम को लॉजिस्टिक्स लागत में कटौती करने, व्यापार दक्षता को बढ़ाने और हरित परिवहन नेटवर्क के माध्यम से रोजगार सृजन पर केंद्रित किया गया है।28   इसके अंतर्गत 2035 तक 5.8 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 840 परियोजनाएं क्रियान्वित की जाएँगी जिनमें 1.41 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 272 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं तथा 1.65 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 217 परियोजनाओं का कार्य प्रगति पर है।29

भविष्य की ओर अग्रसर

 

भारत का समुद्री क्षेत्र एक निर्णायक दशक में प्रवेश कर रहा है, जहाँ नए कानून, बड़ी परियोजनाएँ और वैश्विक निवेश महत्वाकांक्षाएँ मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 को आकार दे रही हैं। हरित प्रौद्योगिकियों और डिजिटल नवोन्मेष पर ज़ोर देते हुए, भारत न केवल अपनी व्यापारिक माँगों को पूरा करने की तैयारी कर रहा है, बल्कि एक समुद्री क्षेत्र में अग्रणी के रूप में उभरने की भी तैयारी कर रहा है। इसी को ध्यान में रख कर समुद्री अमृत काल विज़न 2047 तैयार किया जा रहा है, जो भारत के समुद्री पुनरुत्थान का एक दीर्घकालिक रोडमैप है, जिसमें बंदरगाहों, तटीय नौवहन, अंतर्देशीय जलमार्गों, जहाज निर्माण और हरित नौवहन पहलों के लिए लगभग 80 लाख करोड़ रुपये का निवेश निर्धारित किया गया है। सरकार हरित गलियारे स्थापित करके, प्रमुख बंदरगाहों पर हरित हाइड्रोजन बंकरिंग शुरू करके और मेथनॉल-ईंधन वाले जहाजों के उपयोग को बढ़ावा देकर संवहनीय समुद्री संचालन को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।30  300 से अधिक कार्यान्वयन योग्य पहलों को रेखांकित किया गया है। यह पहलें  स्वतंत्रता के सौ साल पूरे होने तक भारत को विश्व की शीर्ष समुद्री और जहाज निर्माण शक्तियों में से एक के रूप में स्थापित करेंगी।

भारत के समुद्री परिदृश्य को नया आकार देने वाले इस विज़न को युगांतकारी  पहलों के माध्यम से आगे बढ़ाया गया है। इस यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि सितंबर 2025 में हासिल की गई जिसके अंतर्गत “समुद्र से समृद्धि-भारत के समुद्री क्षेत्र में परिवर्तन” कार्यक्रम के दौरान  27 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ, जिससे 66,000 करोड़ रूपए से अधिक की निवेश संभावनाएँ बढ़ीं और 1.5 लाख से अधिक नौकरियों का मार्ग प्रशस्त हुआ। ये समझौते बंदरगाह अवसंरचना, नौवहन, जहाज निर्माण, संवहनीय गतिशीलता, वित्त और विरासत को केंद्र में रख कर किये गए हैं, जो देश को वैश्विक समुद्री और जहाज निर्माण का केंद्र बनाने के लिए भारत के एकीकृत दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उल्लेखनीय परियोजनाओं में ओडिशा के बाहुदा में 150 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) क्षमता वाला ग्रीनफील्ड बंदरगाह जिसमें लगभग 21,500 करोड़ रुपये के  निवेश का अनुमान है, दूसरा पटना में लगभग 908 करोड़ रुपये मूल्य की इलेक्ट्रिक नौकाओं का उपयोग करते हुए जल मेट्रो परियोजना है। इसके आलावा विदेशी बेड़े पर निर्भरता कम करने और भारत में निर्मित जहाजों को बढ़ावा देने के लिए शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया  और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों  के बीच जहाज का स्वामित्व रखने वाली एक संयुक्त उद्यम कंपनी भी शामिल है। इसके साथ ही, पांच राज्यों में जहाज निर्माण समझौता ज्ञापन, प्रमुख शिपयार्ड निवेश, वित्तीय समझौते और गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर में 266 करोड़ रुपये का लाइटहाउस संग्रहालय का निर्माण जैसे कदम, भारत को  2047 तक दुनिया के शीर्ष जहाज निर्माण देशों में शुमार होने के लक्ष्य को और मजबूत करतें हैं।

न्यू मैंगलोर पोर्ट अथॉरिटी (एनएमपीए) के तहत हाल ही में आठ महत्वपूर्ण समुद्री विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें विदेशी पर्यटकों के लिए एक समर्पित क्रूज गेट का निर्माण और  107 करोड़ रुपये के निवेश के साथ सरकारी और निजी क्षेत्र की साझेदारी के तहत 150 बिस्तरों वाले मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल की स्थापना शामिल हैं। ये कदम  समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को भविष्य के लिए तैयार करने की प्रतिबद्धता को दर्शातें हैं जो व्यापार, पर्यटन और आर्थिक रूप से बढ़ावा देने के लिए जरुरी हैं।

विज़न से समुद्र यात्रा तक

भारत अपनी विशाल तटरेखा को संभावनाओं के कैनवास में बदल रहा है। मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 के साथ, देश न केवल बंदरगाहों का निर्माण कर रहा है, बल्कि भविष्य का निर्माण भी कर रहा है, लाखों लोगों को रोज़गार, कौशल और संवहनीय विकास से सशक्त बना रहा है। यह भारत के लिए विश्व में समुद्री क्षेत्र में अग्रणीय के रूप में उभरने का समय है, यह विज़न साबित करता है कि रणनीति और संकल्प समुद्री लहरों को समृद्धि के रास्ते पर ला सकते हैं। दुनिया भर के तेल और मालवाहक जहाजों में, भारत एक यात्री के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के नाविक के रूप में अपनी जगह सुरक्षित करने के लिए कृतसंकल्प है। समुद्री अमृत काल विज़न 2047 इस यात्रा को और आगे बढ़ाता है। हरित बंदरगाहों और टिकाऊ समुद्री जहाज से लेकर स्मार्ट लॉजिस्टिक्स और सांस्कृतिक विरासत परियोजनाओं तक, भारत आर्थिक विकास को पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी और वैश्विक नेतृत्व के साथ जोड़ रहा है। जहाँ विश्व मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं और स्वच्छ ऊर्जा बदलावों की ओर देख रहा है, वहीँ भारत का समुद्री क्षेत्र न केवल राष्ट्रीय हितों की पूर्ति के लिए तैयार है, बल्कि आने वाले दशकों में वैश्विक व्यापार की दिशा को भी आकार देने के लिए तैयार है।

भारत की भव्य संगीत यात्रा की वापसी: 67वां आकाशवाणी संगीत सम्मेलन 2 से 29 नवंबर 2025 तक 24 शहरों में गूंजेगा

अखिल भारतीय संगीत उत्सव, 1954 से हिंदुस्तानी, कर्नाटक और लोक परंपराओं के प्रतिष्ठित कलाकारों को एक साथ लाकर भारत की संगीत प्रतिभाओं की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ा रहा है

26 दिसंबर 2025 से 23 जनवरी 2026 तक आकाशवाणी, डीडी भारती, वेव्स ओटीटी और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश भर में यह संगीत प्रस्तुति गूंजेगी

प्रसार भारती ने संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से अपने प्रतिष्ठित वार्षिक संगीत समारोह आकाशवाणी संगीत सम्मेलन 2025 के 67वें संस्करण की घोषणा की है। यह नवंबर से 29 नवंबर 2025 तक देश भर के 24 केंद्रों पर आयोजित किया जाएगा।

वर्ष 1954 में अपनी शुरुआत से ही आकाशवाणी संगीत सम्मेलन भारत की सबसे स्थायी और सम्मानित सांस्कृतिक परंपराओं में से एक रहा है। हिंदुस्तानीकर्नाटक और सुगम एवं लोक संगीत की बेहतरीन विधाओं को देश भर के संगीत प्रेमियों तक पहुँचाने के लिए स्थापितइस सम्मेलन ने भारत की समृद्ध संगीत विरासत को संरक्षितप्रचारित और लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस लोकप्रिय परंपरा का सभी कलाकार और श्रोता हर साल बेसब्री से इंतजार करते हैं। यह सम्मेलन प्रख्यात और उभरते संगीतकारोंदोनों के लिए एक प्रतिष्ठित मंच बना हुआ हैजो उन्हें राष्ट्रीय पहचान और सम्मान प्रदान करता है।

प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी ने सम्मेलन के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कोविड19 महामारी के कारण थोड़े समय के व्यवधान के बादयह भव्य उत्सव इस वर्ष नए जोश के साथ लौट रहा है। 2025 के संस्करण में प्रत्येक स्थल पर दो संगीत कार्यक्रम होंगेएक भारतीय शास्त्रीय संगीत (गायन/वाद्यऔर दूसरा सुगम/लोक संगीत के लिए समर्पित होगा। उल्लेखनीय है कि पणजी और शिलांग में विशेष रूप से पश्चिमी शास्त्रीय संगीत प्रस्तुतियाँ होंगीजो भारत की क्षेत्रीय संगीत विविधता को दर्शाती हैं।

उद्घाटन दिवस संगीत कार्यक्रम नवंबर 2025 को दिल्लीमुंबई और चेन्नई में आमंत्रित दर्शकों के समक्ष आयोजित किए जाएँगे। इसके बाद नवंबर को उदयपुरतिरुवनंतपुरम और कटक में संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगेजो 29 नवंबर तक धारवाड़हैदराबाद और जालंधर में जारी रहेंगे।

सभी संगीत कार्यक्रमों में जनता के लिए प्रवेश निःशुल्क है। निमंत्रण पत्र संबंधित आकाशवाणी केंद्रों से पहले आओपहले पाओ के आधार पर प्राप्त किए जा सकते हैं।

सम्मेलन की मुख्य विशेषताएँ

● एक शाश्वत परंपरा का 67वाँ वर्ष – 1954 से संगीत उत्कृष्टता की विरासत निरंतर जारी है

● दोहरा संगीत कार्यक्रम प्रारूप – प्रत्येक केंद्र में शास्त्रीय और सुगम/लोक संगीत प्रस्तुतियाँ

● प्रतिष्ठित कलाकारों की भागीदारी

● संगीत कार्यक्रमों के बाद, प्रस्तुतियाँ 26 दिसंबर 2025 से 23 जनवरी 2026 तक, प्रतिदिन रात 10:00 बजे से 11:00 बजे तक आकाशवाणी नेटवर्क पर प्रसारित की जाएँगी।

· यह संगीत प्रस्तुति विभिन्न प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध होंगी:

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आकाशवाणी संगीत सम्मेलन – 2025

चुनिंदा कलाकार – तिथिवार अनुसूची

2 नवंबर 2025

• दिल्ली : पं. राकेश चौरसिया (बांसुरी), श्री नंदेश उमाप (लोक)

• मुंबई : पं. वेंकटेश कुमार (गायक), श्री हामिद अमीनभाई सय्यद एंड पार्टी (भरुद)

• चेन्नई : पुष्पवनम श्री कुप्पुस्वामी (लोक), उदयलूर श्री के. कल्याणरमन (भक्ति)

 

8 नवंबर 2025

• उदयपुर : मो. अमान खान (गायक), डॉ. विजयेंद्र गौतम (सुगम संगीत)

• तिरुवनंतपुरम: कुदामलूरमुरलीधरमरार (पंचवध्यम), विदुषी डॉ. एन.जे. नंदिनी (कर्नाटक गायन), अजित जी. कृष्णन और एस.आर. श्रीकुट्टी (लाइट)

• कटक : प्रदीप्ता शेखर महापात्र (बांसुरी), डॉ. नाज़िया सईद और संतोषी प्रसाद मिश्रा (लाइट वोकल)

 

9 नवंबर 2025

• पुणे : विदुषी ज्योति हेगड़े (रुद्रवीणा), विजयकुमार गायकवाड़ और समूह (लोक)

• पणजी : देबसंकर रॉय और ज्योति शंकर रॉय (पश्चिमी शास्त्रीय), प्राची जथार, श्रीमती शकुंतला भरणे (प्रकाश)

 

15-16 नवंबर 2025

• कोलकाता : पं. आशिम चौधरी (सितार), सबीना मुमताज इस्लाम (ख्याल), अग्निभा बंदोपाध्याय, श्रीराधा बंदोपाध्याय (लाइट), सोमा दास मंडल, कार्तिक दास (लोक)

 

15-16 नवंबर 2025

• तिरुचिरापल्ली : श्रीमती विशाखा हरि (कर्नाटक गायन), श्री एन. शिवाजी राव एंड पार्टी (कारगट्टम)

• भोपाल : पं. संतोष नाहर (वायलिन), डॉ. दीपाली वट्टल (ग़ज़ल)

• वाराणसी : श्री शुभंकर डे (ख्याल), श्री मन्ना लाल यादव एवं समूह (लोक)

• लखनऊ : पं. धर्मनाथ मिश्र (ठुमरी/दादरा), डॉ. मेनका मिश्र (लाइट)

• विजयवाड़ा : विदुषी कोल्लुरु वंदना (कर्नाटक गायन), मोडुमुदी सुधाकर (लाइट)

 

21 नवंबर 2025

• जयपुर : पं. विश्वमोहन भट्ट (गिटार), पं. सीता राम सिंह (लाइट)

22 नवंबर 2025

• बेंगलुरु : बेंगलुरु ब्रदर्स (कर्नाटक युगल), लक्ष्मी नागराज (लाइट)

• गुवाहाटी : श्री मनोज बरुआ (वायलिन), श्रीमती जाबा चक्रवर्ती दास (लोक)

 

23 नवंबर 2025

• मैसूर : डॉ. सहाना एसवी (वीणा), श्री एच.एल. शिवशंकर स्वामी (मृदंग तरंग)

• अहमदाबाद : पं. महेंद्र टोके (स्वर), पं. नकुल मिश्रा (तबला), रफीक खान (वायलिन), कल्याणी कौथलकर, हसमुख पटडिया (लाइट)

 

27 नवंबर 2025

• शिलांग: ना रिमपेई (बैंड), सुश्री ग्वेनेथ मावलोंग, कलर्स (बैंड), खोरशा कोर्डोर मारबानियांग, सिल्बीपासाह एंड पार्टी, लौवर वी. मराक एंड पार्टी (लोक)

• पटना : स्मित तिवारी (सरोद), मनोरंजन ओझा (लोक)

 

29 नवंबर 2025

• धारवाड़ : पं. भीमन्ना जाधव (सुंदरी), वेंकटेश अलकोड, आराधना हेगड़े (लाइट), महंतेशहुगर (लोक)

• हैदराबाद : विदवान श्री डी.वी. मोहना कृष्णा (कर्नाटक गायन), श्रीमती अरुणा सुब्बाराव, श्री पात्री कुमार स्वामी (लोक)

• जालंधर : भाई गुरुमीत सिंह शांत (शबद कीर्तन), सुश्री ग्लोरी बावा (लोक गीत)

सभी स्कूलों में तीसरी कक्षा से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर पाठ्यक्रम शुरू होगा

शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएंडएल) ने भविष्य के लिए तैयार शिक्षा के आवश्यक घटकों के रूप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (एआई और सीटी) को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। विभाग, परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से, स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ एसई) 2023 के व्यापक दायरे में एक सार्थक और समावेशी पाठ्यक्रम तैयार करने में राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ सीबीएसई, एनसीईआरटी, केवीएस और एनवीएस जैसे संस्थानों का समर्थन कर रहा है।

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (एआई और सीटी) सीखने, सोचने और सिखाने की अवधारणा को सुदृढ़ करेगा और धीरे-धीरे “सार्वजनिक हित के लिए एआई” की अवधारणा की ओर विस्तारित होगा। यह पहल जटिल चुनौतियों को हल करने के लिए एआई के नैतिक उपयोग की दिशा में एक नया लेकिन महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह तकनीक कक्षा 3 से शुरू होकर, आधारभूत स्तर से ही अंतर्निहित होगी।

29 अक्टूबर 2025 को एक हितधारक परामर्श आयोजित किया गया, जिसमें सीबीएसई, एनसीईआरटी, केवीएस, एनवीएस और बाहरी विशेषज्ञों सहित विशेषज्ञ निकाय एक साथ आए। केन्‍द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने एआई और सीटी पाठ्यक्रम विकसित करने के लिए आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर कार्तिक रमन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।

परामर्श में, डीओएसईएल के सचिव, श्री संजय कुमार ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की शिक्षा को हमारे आसपास की दुनिया (टीडब्‍ल्‍यूएयू) से जुड़े एक बुनियादी सार्वभौमिक कौशल के रूप में माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम व्यापक, समावेशी और एनसीएफ एसई 2023 के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट क्षमता हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने आगे कहा कि नीति निर्माताओं के रूप में हमारा काम न्यूनतम सीमा निर्धारित करना और बदलती ज़रूरतों के आधार पर उसका पुनर्मूल्यांकन करना है।

उन्होंने आगे इस बात पर प्रकाश डाला कि निष्ठा के शिक्षक प्रशिक्षण मॉड्यूल और वीडियो-आधारित शिक्षण संसाधनों सहित शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षण सामग्री, पाठ्यक्रम कार्यान्वयन की रीढ़ बनेगी। एनसीएफ एसई के अंतर्गत एक समन्वय समिति के माध्यम से एनसीईआरटी और सीबीएसई के बीच सहयोग से निर्बाध एकीकरण, संरचना और गुणवत्ता आश्वासन सुनिश्चित होगा। श्री कुमार ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बोर्डों का विश्लेषण और एक अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य होना अच्छी बात है, लेकिन यह हमारी ज़रूरतों के अनुरूप होना चाहिए।

संयुक्त सचिव (सूचना एवं प्रौद्योगिकी) श्रीमती प्राची पांडे ने पाठ्यक्रम विकास और क्रियान्वयन के लिए निर्धारित समयसीमा का पालन करने के महत्व को दोहराते हुए समापन किया।

मुख्‍य विशेषताएं

  1. शैक्षणिक सत्र 2026-27 से तीसरी कक्षा से आगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की शुरुआत, एनईपी 2020 और एनसीएफ एसई 2023 के अनुरूप
  2. एनसीएफ एसई के अंतर्गत एआई और सीटी पाठ्यक्रम, समय आवंटन और संसाधनों का एकीकरण।
  3. दिसम्‍बर 2025 तक संसाधन सामग्री, हैंडबुक और डिजिटल संसाधनों का विकास।
  4. निष्ठा और अन्य संस्थानों के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण, जो ग्रेड-विशिष्ट और समयबद्ध हो।

राष्ट्र की एकता सर्वोपरि : प्रो अंजू श्रीवास्तव हिंदू कॉलेज में राष्ट्रीय एकता दिवस पर शपथ ग्रहण

दिल्ली। देश की एकता सर्वोपरि है क्योंकि देश से बढ़कर और कुछ नहीं हो सकता। हमारे देश के निर्माण में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने बड़ी बड़ी कुर्बानियां दी हैं जिन्हें श्रद्धांजलि देना हमारे भीतर गौरव और पुण्य का भाव जगाता है। राष्ट्रीय एकता दिवस पर हिंदू कालेज में राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आयोजित समारोह में प्राचार्य प्रो अंजू श्रीवास्तव ने कहा कि एकता दिवस सरदार वल्लभ भाई पटेल के अभूतपूर्व योगदान को समझने और उनसे प्रेरणा लेने का पावन अवसर है। प्रो श्रीवास्तव ने स्वयं सेवकों और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलवाते हुए कहा कि देश की एकता को बनाए रखना प्रत्येक देशवासी का पहला कर्त्तव्य है।
आयोजन में महाविद्यालय के कोषाधिकारी प्रो वरुणेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरदार पटेल ने रियासतों का एकीकरण जैसा जटिल और चुनौतीपूर्ण कार्य सहजता से पूरा किया। प्रो रावत ने कहा कि युवा पीढ़ी को हमारे देश के ऐसे नायकों को आदर्श बनाना चाहिए। हिन्दी विभाग की आचार्य प्रो रचना सिंह ने पटेल के व्यक्तित्व की सादगी और गांधीवादी मूल्यों के प्रति सम्मान को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि यह कभी नहीं भुलाया जा सकता कि बैरिस्टर होकर पटेल ने खादी अपनाई और भारतीय मूल्यों के प्रति अपना समर्पण दर्शाया।
राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ पल्लव ने बताया कि एक भारत आत्मनिर्भर भारत आयोजन शृंखला के अंतर्गत हिंदू महाविद्यालय के स्वयं सेवकों ने सक्रिय भागीदारी की है। डॉ पल्लव ने आगामी आयोजनों की जानकारी भी दी।
इससे पहले राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्र अध्यक्ष निशांत सिंह ने प्राचार्य प्रो अंजू श्रीवास्तव और अतिथियों का स्वागत किया। अंत में मीडिया प्रभारी अर्चिता द्विवेदी ने आभार प्रदर्शित किया।

अर्चिता द्विवेदी
जन संपर्क प्रमुख
राष्ट्रीय सेवा योजना
हिन्दू महाविद्यालय, दिल्ली
मो -9452536877