नई दिल्ली। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद ( आईसीपीआर) के सहयोग से दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘ दौलत राम कॉलेज’ में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “श्रीमद् भगवद गीता एवं भारतीय नैतिकता” के विषय पर हुआ। इस संगोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ.बालमुकुंद पाण्डेय जी, राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, केशव कुंज झंडेवालान रहे ,जबकि संगोष्ठी के मुख्य वक्ता आचार्य ( डॉ.) रजनीश कुमार शुक्ल, पूर्व कुलपति अंतरराष्ट्रीय वर्धा विश्वविद्यालय रहे एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. सच्चिदानंद जोशी अध्यक्ष, राष्ट्रीय कला केंद्र दिल्ली रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. बालमुकुंद पांडे जी ने सभी अतिथियों को हृदय तल से आभार एवं धन्यवाद प्रेषित किए ।उनका कहना है कि श्रीमद् भगवद गीता एक ऐसा ग्रंथ है जो हर देश काल में प्रासंगिक है। श्रीमद् भगवद गीता एक सभ्यागत संस्कार एवं जीवन का नियमपूर्वक संचालित करने का मौलिक ग्रंथ है। यह ” सनातन विचार को लोकमानस तक पहुंचाने का ग्रंथ है”। इसके आदर्शों एवं मूल्यों को जीवन में आमुख करने से “हर चुनौती” पर नियंत्रण पाया जा सकता है। “यह एक ग्रंथ ही नहीं बल्कि व्यक्तिओं को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक, आभार एवं अनुशासित करने का मौलिक आमुख है।”
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आचार्य (डॉ.) रजनीश कुमार शुक्ला जी ने श्रीमद् भगवद गीता को कर्मयोग की प्रणेता बताएं। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भगवद गीता भारत के नहीं अपितु समस्त सनातन संस्कृति का परम पूजनीय मौलिक ग्रंथ है जो प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा एवं असीमित उत्साह का संचार करता है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर ( डॉ.) सविता राय जी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त की एवं श्रीमद् भगवद गीता की उपादेयता को रेखांकित किया। कार्यक्रम की संयोजिका प्रोफेसर (डॉ.) सोनिया जी ने सभी का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज के आचार्य डॉ. ए.के दुबे जी, डॉ. एस .के. मिश्रा, डॉ. शत्रुंजीत सिंह, श्री सचिन रतन झा, विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं कॉलेज के छात्र एवं छात्राओं की ऊर्जावान उपस्थित रही ।

