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  • वैज्ञानिक सोच के लोकतंत्र’ के प्रतिष्ठापक थे प्रोफ़ेसर यशपालःडॉ. चन्द्रकुमार जैन

    वैज्ञानिक सोच के लोकतंत्र’ के प्रतिष्ठापक थे प्रोफ़ेसर यशपालःडॉ. चन्द्रकुमार जैन

    राजनांदगांव। प्रख्यात शिक्षाविद और धुरंधर वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर यशपाल सही अर्थ में भारतीय वैज्ञानिक सोच के टर्निंग प्वाइंट थे। बहुविषयक चिंतन से जुड़े दिग्विजय कालेज के हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ.चंद्रकुमार जैन ने उनके अवसान को एक युग का अंत मात्र नहीं, आने वाले युगों की भी एक अपूरणीय क्षति निरूपित किया है।

  • डाक विभाग द्वारा : ’सुंदर भारत’ थीम पर फोटोग्राफी का आयोजन

    यदि आप फोटोग्राफी का शौक रखते हैं तो आप द्वारा लिया गया फोटो भी डाक टिकट पर स्थान पा सकता है। भारतीय डाक विभाग ऐसे लोगों के लिए इस 'स्वतंत्रता दिवस' पर एक सुनहरा मौका लेकर आया है, जहाँ डाक टिकट पर आप द्वारा क्लिक किया गया मौलिक फोटोग्राफ स्थान पा सकता है।

  • एक हिंदी प्रेमी का दर्द

    एक हिंदी प्रेमी का दर्द

    प्रेम चन्द अग्रवाल यूको बैंक से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवा निवृत्त हैं, जहाँ ये राजभाषा अधिकारी के रूप में हिंदी कार्यान्वयन से जुड़े रहे। ये अम्बाला शहर व अम्बाला छावनी क्षेत्र के सभा महाविद्यालयों और 30-35 उच्च विद्यालयों में हिन्दी सम्बन्धी कार्य करते रहे हैं।

  • निर्मम बैंक व्यवस्था

    निर्मम बैंक व्यवस्था

    कंप्यूटर युग में, जब हर शाम भारतीय रिज़र्व बैंक को सम्पूर्ण बैंकिंग उद्योग के आंकड़े मिल जाते हैं, ऐसे में नोट्बंदी के छह महीने बाद सरकार की ये दलील कि पुराने नोट अभी भी गिने जा रहे हैं

  • नाग पंचमी पर विशेषः  भारत के सांस्कृतिक दूत हैं सपेरे

    नाग पंचमी पर विशेषः भारत के सांस्कृतिक दूत हैं सपेरे

    भारत विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं का देश है। प्राचीन संस्कृति के इन्हीं रंगों को देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में बिखेरने में सपेरा जाति की अहम भूमिका रही है, लेकिन सांस्कृतिक दूत ये सपेरे सरकार, प्रशासन और समाज के उपेक्षित रवैये की वजह से दो जून की रोटी तक को मोहताज हैं।

  • थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” नाट्य दर्शन के 25 वर्ष पर दिल्ली में 3 दिवसीय नाट्य उत्सव

    थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” नाट्य दर्शन के 25 वर्ष पर दिल्ली में 3 दिवसीय नाट्य उत्सव

    काल को चिंतन से गढ़ा और रचा जाता है. चिंतन आपके भीतर से सृजित होकर वैश्विक क्षितिज को पार कर विश्व में जीता है.कला मनुष्य को मनुष्य बनाती है. कलात्मक चिन्तन ही मनुष्य के विष को पीने की क्षमता रखता है.1990 के बाद का समय दुनिया के लिए ‘अर्थहीन’ होने का दौर है.

  • जमीन से जुड़े कोविन्द से जगी है नयी उम्मीदें

    जमीन से जुड़े कोविन्द से जगी है नयी उम्मीदें

    देश के नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का शपथ ग्रहण के बाद पहला उद्बोधन नयी आशाओं एवं उम्मीदों को जगाता है। उन्होंने उचित ही इस ओर ध्यान खींचा कि हमारी विविधता ही हमें महान बनाती है।

  • फेंगशुई : चीनी लूट और गुलामी का एक अदृश्य हथियार

    फेंगशुई : चीनी लूट और गुलामी का एक अदृश्य हथियार

    यह घटना एक परिचित के साथ घटी थी,उन्होंने बाद में सुनाया था। जब गृह प्रवेश के वक्त मित्रों ने नए घर की ख़ुशी में उपहार भेंट किए थे। अगली सुबह जब उन्हेंने उपहारों को खोलना शुरू किया तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं था!

  • दूरदर्शन का लोगो बदलेगा, नया लोगो भेजें एक लाख का ईनाम

    सार्वजनिक प्रसारणकर्ता दूरदर्शन ने अब बदलाव की दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं और इस कवायद के तहत दूरदर्शन की पहचान बन चुका उसका लोगो, या यूं कहें कि उसका प्रतीक चिन्ह भी बदल जाएगा।

  • ओशो का वह प्रवचन, जि‍स पर ति‍लमि‍ला उठी थी अमेरि‍की सरकार और दे दि‍या जहर!

    ओशो का वह प्रवचन, जि‍स पर ति‍लमि‍ला उठी थी अमेरि‍की सरकार और दे दि‍या जहर!

    ओशो का वह प्रवचन, जिससे ईसायत तिलमिला उठी थी और अमेरिका की रोनाल्‍ड रीगन सरकार ने उन्‍हें हाथ-पैर में बेडि़यां डालकर गिरफ्तार किया और फिर मरने के लिए थेलियम नामक धीमा जहर दे दिया था। इतना ही नहीं, वहां बसे रजनीशपुरम को तबाह कर दिया गया था और पूरी दुनिया को यह निर्देश भी दे दिया था कि न तो ओशो को कोई देश आश्रय देगा और न ही उनके विमान को ही लैंडिंग की इजाजत दी जाएगी।

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