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कुछ वायरल सच की पड़ताल करने वाली पुस्तक

अक्सर जब भी भगत सिंह की चर्चा होती है तो मूवी हो या किसी का लेख, ये जरूर बताया जाता है कि वो फांसी से पहले जेल में लेनिन की किताब पढ़ रहे थे, ऐसे में कोई ये बताए कि वो वीर सावरकर की दो किताबें भी न केवल पढ़ रहे थे, बल्कि उनसे नोट्स लेकर अपनी डायरी में भी लिख रहे थे तो काफी लोग चौंक जाएंगे। भगत सिंह और सावरकर के आपसी रिश्तों पर इससे भी ज्यादा बताती है पत्रकार/ब्लॉगर विष्णु शर्मा की किताब-इतिहास के 50 वायरल सच।

इतिहास पर अपने ब्लॉग्स के लिए बेस्ट ब्लॉगर अवार्ड्स पाने वाले विष्णु शर्मा की एक और किताब मार्केट में आ गयी है। पहली किताब ‘गुमनाम नायकों की गौरवशाली गाथाएं’ जहां ऐसे पच्चीस गुमनाम नायकों के बारे में थी, जिनकी उपलब्धियां या कुर्बानियां हैरान कर देने वाली होने के बावजूद नई पीढ़ी के लिए वो गुमनाम हैं। वहीं, ये नई किताब भी सोशल मीडिया पर सक्रिय उस नई पीढ़ी के लिए वाकई में सहेजने वाला दस्तावेज होगी, जो भारत के इतिहास में जरा सी भी दिलचस्पी रखती है। नए पत्रकारों के लिए तो ये और भी ज्यादा जरूरी है, इसमें जिन मुद्दों का जिक्र है, वो अक्सर राजनीति में उठते रहते हैं।

इस पुस्तक का नाम या टाइटिल ही अपने आप में काफी कुछ कहता है-‘इतिहास के 50 वायरल सच’। इस पुस्तक में ऐसे कई मुद्दे आप पाएंगे, जिनके बारे में आपने सोशल मीडिया फेसबुक, ट्विटर पर जुबानी जंग होती देखी होंगी। कोई कुछ दावा करता है और कोई कुछ। अक्सर अपने-अपने फील्ड के दिग्गज भी तमाम झूठे-सच्चे दावे करते हैं। पत्रकार और इतिहासकार भी अपनी-अपनी विचारधाराओं के हिसाब से अक्सर गलत फैक्ट्स के साथ जनता को प्रभावित करते हैं। ऐसे में आम जनता के लिए सच जानना काफी मुश्किल हो जाता है।

विष्णु शर्मा ने इस पुस्तक में इतिहास से जुड़े ऐसे 50 टॉपिक्स उठाये हैं, जिन पर पिछले कुछ सालों में काफी विवाद रहा है, जैसे क्या वाकई सरदार पटेल को पहले पीएम के लिए नेहरूजी से ज्यादा वोट मिले थे? गांधीजी की आख़िरी ख्वाहिश क्या वाकई में वही थी, जिसका दावा अमित शाह ने किया था? क्या अकबर की अस्थियों का अंतिम संस्कार एक जाट ने जबरन कर दिया था? ताजमहल को लेकर विवाद बार बार आखिर क्यों होता है? प्लेबॉय मैगजीन में नेहरूजी के इंटरव्यू का सच क्या है? क्या गांधीजी जिन्ना को पहला पीएम बनाना चाहते थे? खान हीरो की सास का नाम मुसलमानों की नसबंदी से क्यों जोड़ा जाता है?

ऐसे तमाम मुद्दे हैं, जिनके बारे में रेफ़्रेंसेज के साथ विष्णु शर्मा ने सच बताने की कोशिश की है। हालाँकि कई मुद्दों पर उन्होंने कहा है कि रिसर्च अभी जारी है, इसलिए अगले एडिशन में शामिल किये जायेंगे। इस पुस्तक को आप अमेजॉन पर ऑनलाइन आर्डर देकर देश के किसी भी हिस्से में माँगा सकते हैं। अभी किंडल ई बुक (51 रुपए), हार्डबैक (400 रुपए) और पेपरबैक फॉर्मेट में दो सौ रुपए में उपलब्ध है। ज्यादा जानकारी के लिए गूगल पर किताब का नाम सर्च करके प्रभात बुक्स और अमेजॉन के लिंक देख सकते हैं।

साभार-https://www.samachar4media.com से

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