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‘परोपकार’ तो राजस्थानियों के संस्कारों और दिल में बसता है

मुंबई की अग्रणी सामाजिक संस्था परोपकार ने विगत 20 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में सेवा कार्यों से लेकर, अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों में भागीदारी कर अपनी एक खास पहचान बनाई है।

परोपकार की मुंबई की अंधेरी समिति द्वारा खचाखच भरे भाईदास हाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए जोधपुर से सांसद और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने यादगार भाषण और सहज-सरलता से कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से एक आत्मीय रिश्ता कायम कर सबको अपना मुरीद बना लिया।

कार्यक्रम में उन्होंने अपना भाषण मारवाड़ी में दिया और समाज सेवा के क्षेत्र में आने वाली मुश्किलों की चर्चा की। सेवा कार्यों को लेकर अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मैं जब 2004 में जब राजस्थान में अकाल की स्थिति थी तो हमने देखा कि हजारों लाखों का गौवंश भुखमरी की स्थिति में है, और सबसे बड़ी बात ये है कि हजारों परिवारों के लिये गौवंश ही आजीविका का साधन थी। तब हम कुछ साथियों ने मिलकर गौशिविर लगाने और गायों को चारा-पानी देने की व्यवस्था करने का निर्णय लिया। इस संबंध में जब चर्चा की गई तो पता चला कि एक दिन का अनुमानित खर्च 12 लाख रूपये आएगा। लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी, क्योंकि हम सभी का मानना था कि काम तो ठाकुरजी करते हैं, हमें तो बस काम करने का संकल्प लेना चाहिए। अपनी बात जारी रखते हुए शेखावतजी ने कहा कि हम जैसे तैसे रोज 11 लाख रुपये इकठ्ठे करते और गौ सेवा में लगा देते, हमने एक भी गाय को चारे और पानी के अभाव से मरने नहीं दिया। एक साल तक हमारा ये सेवा कार्य चला और साल भर में हमारे पास 2 करोड़ रुपये बच भी गए। उन्होंने कहा कि अगर देने वाले को ये विश्वास हो कि उसका पैसा सही काम में लगेगा तो फिर कहीं भी किसी भी काम में पैसे की कमी आड़े नहीं आती।

उन्होंने बताया कि वे राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा पर 150 स्कूल संचालित करते हैं और 450 से ज्यादा खेलकूद गतिविधियों का आयोजन करते हैं।

उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद देश ने कई क्षेत्रों में विकास किया देश के बाहर भी हमने नाम कमाया, लेकिन राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सरकार के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं की भी अहम भूमिका रही है।

शेखावतजी ने कहा कि राजस्थानी समाज के खून और संस्कारों में ही सेवा भाव लिखा है। हर राजस्थानी परिवार अपनी कमाई का हिस्सा, परोपकार में, सेवा कार्य में, धार्मिक कार्य आदि में खर्च करता है। यही वजह है कि राजस्थानी समाज के लोग राजस्थान से निकलकर असम, पश्चिम बंगाल से लेकर दक्षिण के किसी भी राज्य में जा बसे हों उन्होंने वहाँ के समाज के साथ अपना ऐसा रिश्ता जोड़ लिया है कि राजस्थानी व्यक्ति को सम्मान और गर्व के साथ देखा जाता है।

परोपकार के सेवा कार्यों की चर्चा करते हुए गजेन्द्रसिंह जी ने कहा कि किसी संस्था को खड़ा करना इतना आसान काम नहीं होता। अपने विचार को पल्लवित कर धरातल पर लाना और सभी तरह के लोगों को उसके साथ जोड़ना, संस्था को चलाने के लिए संसाधन जुटाना, संस्था को सही दिशा में चलाना और अपनी विश्वसनीयता बनाए रखना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती है।

उन्होंने परोपकार के अध्यक्ष श्री शंकर केजरीवाल और परोपकार की अंधेरी समिति के अध्यक्ष श्री अजय महेश्वरी द्वारा समाज को जोड़ने की दिशा में किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस विशाल सभाग्रह में इतने लोगों का मौजूद रहना इनके कार्यों के प्रति सबका विश्वास आपके कार्यों की प्रामाणिकता का प्रमाण है।

श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने मित्र श्री संजय पाराशर के आग्रह पर इस कार्यक्रम में आने की स्वीकृति तो दे दी, मगर जोधपुर से उनको जिस फ्लाईट से मुंबई आना था, वो रद्द हो गई तो वे जोधपुर से रेल यात्रा कर अहमदाबाद पहुँचे और वहाँ से सुबह फ्लाईट मुंबई आए।

 

कार्यक्रम में जाने माने बिल्डर और राजस्थान के ही श्री कमल खेतान, भाजपा नेता श्री जयप्रकाश ठाकुर, विधायक श्री पराग अलवानी, श्री सुनील पाटोदिया, श्री रघुनाथ कुलकर्णी, अभिनेता दिलीप ताहिल आदि उपस्थित थे।

इस अवसर पर श्री भार्गव पटेल द्वारा प्रस्तुत जयश्री कृष्ण नृत्य नाटिका ने दर्शकों को रोमांच और श्रध्दा से भर दिया। 60 से अधिक कलाकार, 100 से अधिक लाईट और हर दृष्य़ में कलाकारों द्वारा हर बार आकर्षक परिधानों के साथ जीवंत नृत्य नाटिका प्रस्तुत करना हर किसी के लिए एक अद्भुत और सम्मोहित करने वाला अनुभव था।

कार्यक्रम के अंत में श्रीनाथजी के जीवंत दर्शन में श्रीनाथजी का श्रृंगारिक स्वरूप इस पूरे कार्यक्रम की श्रेष्ठता की पराकाष्ठा का प्रमाण था।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत संस्था के अध्यक्ष श्री शंकर केजरीवाल, अंधेरी क्षेत्रीय समिति के अध्यक्ष श्री अजय महेश्वरी, श्री राजेंद्र झुनझुनवाला, श्री रामकिशोर दरक, अमरीश चन्द्र अग्रवाल आदि ने किया।



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