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किसी एक बैंक के भरोसे ना रहें नहीं तो मुसीबत में फँस जाएँगे

एचडीएफसी बैंक के ग्राहक पिछले सोमवार को हैरत में पड़ गए, जब नेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप इस्तेमाल करने की उनकी सभी कोशिशें नाकाम हो गईं। यह सिलसिला दो दिन तक जारी रहा और दोनों में से कोई भी सुविधा काम नहीं कर सकी। बैंक ने दावा किया कि यह तकनीकी गड़बड़ी है और उसे दूर करने की कोशिश जारी है। लेकिन लाखों ग्राहकों को इस गड़बड़ी की मार झेलनी पड़ी। सबसे ज्यादा दिक्कत शायद वेतनभोगी वर्ग को हुई होगी क्योंकि महीने की शुरुआत थी और अधिकतर लोगों का वेतन उसी समय खातों में आता है।

नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग ही नहीं कुछ शाखाओं पर भी दिक्कत देखी गई। मुंबई में प्रमाणित वित्तीय योजनाकार पंकज मठपाल बैंक की एक शाखा पर पहुंचे। उन्होंने बताया, ‘शनिवार को कुछ शाखाओं पर भी सर्वर डाउन थे और लेनदेन नहीं हो पा रहा था। मैंने दूसरी शाखा में जाने का मन बनाया, लेकिन मुझे बताया गया कि उन शाखाओं में भी यही गड़बड़ी है। मेरी किस्मत अच्छी है कि मेरा दूसरा बैंक खाता भी है।’ मठपाल के सामने कोई आपात स्थिति नहीं थी, लेकिन सोमवार तक हजारों लोग भौंचक्के रह गए थे क्योंकि वे अपने घर में काम करने वालों या ड्राइवरों को वेतन देने के लिए पैसा नहीं निकाल पा रहे थे। कुछ लोग नेट बैंकिंग के जरिये बिल चुकाते थे। वे वक्त पर बिल नहीं चुका सके और कुछ लोग अपने परिवारों को ऑनलाइन रकम नहीं भेज सके। मुंबई की मनीषा एस (अनुरोध पर नाम बदला हुआ) बताती हैं, ‘मेरा सैलरी अकाउंट एचडीएफसी बैंक में है, जहां मेरा वेतन आता है। मैंने आपात स्थिति के लिए कुछ रकम भी उसी खाते में रख दी है। मैं दूसरे शहर में रहने वाले अपने परिवार को कुछ रकम भेजना चाहती थी, लेकिन नहीं भेज पाई।’ जो एचडएफसी बैंक के साथ हुआ, उससे सबक मिलता है कि आपात स्थिति के लिए रकम जमा करना ही काफी नहीं है। उसे अलग-अलग जगहों पर जमा करना ज्यादा जरूरी है।

कई खाते खोलिए

वित्तीय योजनाकार हमेशा विविधीकरण पर जोर देते हैं। मठपाल समझाते हैं, ‘कम से कम दो बैंक खाते रखिए – एक किसी निजी बैंक में और दूसरा सरकारी बैंक में।’ अगर आप किसी एक खाते का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं तो आपको परेशानी नहीं होगी क्योंकि आप दूसरे खाते में मौजूद रकम निकाल सकेंगे।

मठपाल कहते हैं, ‘याद रखिए, अगर एटीएम काम कर रहे हों तो भी आपके हाथ बंधे रहेंगे क्योंकि एटीएम से एक दिन में एक निश्चित सीमा तक ही रकम निकाली जा सकती है। इसलिए अगर दो अलग-अलग बैंकों में आपके खाते हैं तो आपको दो जगह से रकम निकाल पाएंगे यानी दोगुनी रकम निकालने की सुविधा आपके पास होगी। इसलिए दो खाते खुलवाना हमेशा अच्छा रहेगा।’ लेकिन उत्साह में दो से ज्यादा बचत खाते खुलवाने न पहुंच जाएं क्योंकि इससे आप अपनी रकम का ज्यादा फायदा नहीं उठा पाएंगे।

नकदी का जवाब नहीं

सबसे ज्यादा तरलता नकदी में होती है, जो फौरन काम आती है। इसीलिए आपात स्थिति के लिए जो भी रकम आपने इकट्ठी की है, उसका एक हिस्सा घर में नकदी के रूप में रखा होना चाहिए। मुंबई में प्रमाणित वित्तीय योजनाकार किरण तैलंग का सुझाव है, ‘मुंबई जैसे महानगर में अगर आप घर पर 15-20 हजार रुपये नकद रखते हैं तो आपका काम चल जाना चाहिए।’ मगर ध्यान रहे कि आपको अनुशासन नहीं खोना है और आपात स्थितियों के लिए रखी रकम खर्च नहीं करनी है।

लिक्विड फंड

आपात स्थिति से निपटने के लिए जमा रकम का कुछ हिस्सा आप घर में रख लेते हैं और बाकी हिस्सा बैंकों में अपने खातों में डाल देते हैं। लेकिन क्या बैंक खातों के अलावा कोई और विकल्प भी है? जवाब है, हां। इस रकम को लिक्विड फंडों में भी डाला जा सकता है। मठपाल कहते हैं, ‘बचत खाते के डेबिट कार्ड की ही तरह निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड जैसे लिक्विड फंडों के साथ भी एक डेबिट कार्ड आता है। इस डेबिट कार्ड की मदद से आप अपने लिक्विड फंड में रकम निकाल सकते हैं। लेकिन इसमें दो शर्तें हैं। एक दिन में आप योजना में मौजूद रकम का अधिकतम 50 फीसदी हिस्सा निकाल सकते हैं और यह रकम 50,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसका अर्थ है कि लिक्विड फंड योजना से कोई भी व्यक्ति एक दिन में अधिकतम 50,000 रुपये निकाल सकता है।’ दिलचस्प है कि इस कार्ड का इस्तेमाल खरीदारी के लिए भी किया जा सकता है। आप एक दिन में कुल जमा राशि की 50 फीसदी रकम के बराबर खरीदारी कर सकते हैं, लेकिन 1 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

म्युचुअल फंड भुनाएं

दिक्कत यह है कि ज्यादातर लिक्विड फंडों के साथ डेबिट कार्ड की सुविधा नहीं होती। इसलिए तैलंग कुछ अलग किस्म का मशविरा देते हैं। उनका कहना है, ‘अपनी फंड कंपनी में हमेशा कई बैंक खातों वाला पंजीकरण फॉर्म भरिए ताकि जब भी आप फंड भुनाएं तो उससे मिली रकम किसी एक खाते में नहीं जाए बल्कि उसी खाते में भेजी जाए, जिसमें आप चाहते हों।’ आप म्युचुअल फंड में पंजीकरण के समय अधिकतम 5 बैंक खाते जुड़वा सकते हैं। आप जो भी यूनिट बेचेंगे, उससे आने वाली रकम इनमें से किसी भी खाते में भेजी जा सकती है। मगर ध्यान रहे कि एक से अधिक खाते खुलवाने का विकल्प आपको उसी वक्त मिलेगा, जब आप पंजीकरण फॉर्म भर रहे हैं और आपको यह सेवा शुरू कराने के लिए अग्रिम यानी पहले से ही अनुरोध करना पड़ेगा।

जहां तक संभव हो, तीन से छह महीने का खर्च आपातकालीन कोष के रूप में अलग रख लेना चाहिए। तैलंग कहते हैं, ‘आपात स्थितियों के लिए जो भी रकम आपने बचाई है, उसे किस-किस जगह रखना है, यह पूरी तरह आपकी पसंद और सुविधा पर निर्भर करता है। कई लोग ज्यादा से ज्यादा हिस्सा लिक्विड फंड में डालना चाहेंगे और बाकी रकम दोनों बैंक खातों में रखना पसंद करेंगे। साथ ही अधिक से अधिक 20,000 रुपये नकदी के रूप में घर पर रखने की भी उनकी इच्छा होगी। हो सकता है कि वरिष्ठ नागरिक इस राशि का बड़ा हिस्सा अपने बैंक बचत खातों में रखना चाहें।’ ज्यादातर लोगों के लिए रकम बांटने का आदर्श अनुपात यह हो सकता है कि 55 फीसदी रकम लिक्विड फंडों में डाली जाए, 20-25 फीसदी दोनों बचत खातों में रखी जाए और 2 से 5 फीसदी रकम नकदी के रूप में घर में रख ली जाए।

साभार- https://hindi.business-standard.com/ से

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