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हरिवंश जी के उपसभापति बनने से हिंदी पत्रकारिता भी गौरवान्वित हुई

राज्यसभा में आज राजग के उम्मीदवार के रूप में उपसभापति पद पर निर्वाचित हुए हरिवंश सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं और राजनीति में वह जयप्रकाश नारायण के आदर्शों से प्रेरित हैं। राज्यसभा में उन्होंने देश के कई ज्वलंत मुद्दे उठाए। हरिवंश को जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज उच्च सदन में उन्हें उपसभापति पद पर निर्वाचित होने के बाद बधाई देते हुए कहा कि वह ‘समाज-कारण’ से जुड़े रहे और ‘राज-कारण’ से दूर रहे हैं। वह कलम के धनी हैं। पीएम मोदी ने हरिवंश के सफर को भी सदन में बताया उन्होंने कहा कि वह पूर्व पीएम चंद्रशेखर के भी चहेते थे। पीएम ने कहा, चंद्रशेखर के साथ करीबी से काम करते हुए हरिवंश जी पहले से ही जानते थे कि प्रधानमंत्री पद से चंद्रशेखर जी इस्तीफा होने वाला है। लेकिन उन्होंने अपनी राजनीति और पत्रकारिता को बिलकुल अलग रखा और अपने अखबार के कर्मचारियों को इस बात की खबर भी लगने नहीं दी कि वह कब इस्तीफा देंगे। यह उनकी नैतिकता और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाता है।

ऐसे ही एक वाकये का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज जिन दशरथ मांझी को दुनिया याद करती है, उनकी कहानी को पहली बार हरिवंश ने ही अपने अखबार प्रभात खबर में प्रकाशित किया था. उल्‍लेखनीय है कि दशरथ मांझी ने पहाड़ चीरकर सड़क बनाई थी. दरअसल उनकी पत्‍नी गर्भवती थीं और प्रसव पीड़ा के दौरान अस्‍पताल ले जाते वक्‍त रास्‍ते में ही उनकी मौत हो गई. दशरथ के गांव में सड़क नहीं थी और अक्‍सर सूखे की चपेट में रहने वाला वह दूरदराज का इलाका था. दशरथ को पक्‍का यकीन था कि यदि सड़क होती तो पत्‍नी का निधन नहीं होता. इसलिए उन्‍होंने अपने गांव के पास के पहाड़ को चीरकर सड़क बनाई.

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिताबदियारा गांव में 30 जून, 1956 को जन्मे हरिवंश को जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और पत्रकारिता में डिप्लोमा की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही मुंबई में उनका ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ समूह में प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में 1977-78 में चयन हुआ। वे टाइम्स समूह की साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ में 1981 तक उपसंपादक रहे। 1981-84 तक हैदराबाद और पटना में बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की। 1984 में इन्होंने पत्रकारिता में वापसी की और 1989 अक्टूबर तक ‘आनंद बाजार पत्रिका’ समूह से प्रकाशित ‘रविवार’ साप्ताहिक पत्रिका में सहायक संपादक रहे। हरिवंश ने वर्ष 1990-91 के कुछ महीनों तक तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त सूचना सलाहकार (संयुक्त सचिव) के रूप में प्रधानमंत्री कार्यालय में भी काम किया। हरिवंश ने एक इंटरव्‍यू में कहा था कि उन्‍होंने 500 रुपये में अपनी पहली नौकरी शुरू की थी.

बाद में महानगरों की पत्रकारिता और बड़े घरानों के बड़े अखबारों-संस्थानों को छोड़कर एक छोटे से शहर रांची में प्राय: बंद हो चुके अखबार ‘प्रभात खबर’ में प्रधान संपादक बने। यहां उन्होंने अखबार में क्षेत्रीय और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता दी। नए प्रयोगों और जन सरोकार से जुड़ी पत्रकारिता के दम पर अखबार को स्थापित किया और शीर्ष पर पहुंचा दिया। ढाई दशक से अधिक समय तक ‘प्रभात खबर’ के प्रधान संपादक रहे हरिवंश को नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने राज्यसभा में भेजा। उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार का बेहद करीबी माना जाता है।

राज्यसभा में आज उपसभापति पद के लिए हुए चुनाव में हरिवंश को 125 और उनके समक्ष खड़े हुए विपक्ष के उम्मीदवार बी के हरिप्रसाद को 105 मत मिले। उपसभापति पद पर निर्वाचित होने के बाद उन्हें सभी दलों के नेताओं ने बधाई दी। किंतु प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बधाई देते समय उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण और लगभग अपरिचित पहलुओं का भी दिलचस्प ढंग से उल्लेख किया।हरिवंश ने कई पुस्तकें लिखी और संपादित की हैं। इनमें ‘दिसुम मुक्तगाथा और सृजन के सपने’, ‘जोहार झारखंड’, ‘झारखंड अस्मिता के आयाम’, ‘झारखंड सुशासन अभी भी संभावना है’, ‘बिहार रास्ते की तलाश’ शामिल हैं।

राज्‍यसभा उपसभापति का चुनाव जीतने के बाद जदयू नेता हरिवंश ने अपने पहले भाषण में अपनी जीवन यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि बलिया में उनका गांव गंगा और घाघरा नदियों के बीच में पड़ता है. वह जिस गांव से आए हैं, वहां एक जमाने में सड़क और बिजली नहीं थी. उन्‍होंने अपने जीवन की शुरुआत दीये से की. बिजली तो बहुत वर्षों बाद नसीब हुई. सड़क नहीं होने के कारण चारपाई पर मरीज को लिटाकर 15 किमी तक अस्‍पताल ले जाया जाता था. बाढ़ में गांव टापू बन जाता था.

अपनी सामाजिक और राजनीतिक चेतना के विकास के बारे में बताते हुए हरिवंश ने जयप्रकाश नारायण से जुड़ा एक संस्‍मरण सुनाया. उन्‍होंने कहा कि एक बार गांव के लोगों ने जेपी से कहा कि आपका तो बड़ा नाम और यश है, यदि आप चाहें तो किसी से कहकर यहां बिजली का प्रबंध करा सकते हैं. इस पर जेपी ने जवाब दिया कि वह ऐसा कह तो सकते हैं लेकिन इस देश में साढ़े पांच लाख गांव हैं और वह हर गांव को अपना ही समझते हैं. ऐसे में अपने गांव के बारे में सुविधा की मांग करने में संकोच होता है.

इसके साथ ही हरिवंश ने कहा कि 2014 में जब से वह राज्‍यसभा के सदस्‍य बने हैं, तभी से उनके मन में दो प्रश्‍न गूंज रहे हैं. उनको साझा करते हुए उन्‍होंने कहा कि दरअसल एक बार बिहार के आरा में एक छात्र ने उनसे पूछा था कि हम लोग लोकतंत्र के लिहाज से वेस्‍टमिंटर मॉडल (संसदीय प्रणाली) को अपनाया लेकिन क्‍या हम लोग सदन में हमारी हजारों साल पुरानी शास्‍त्रार्थ की संस्‍कृति को याद करते हैं जब परस्‍पर संवाद होते थे. बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक जैसे ग्रंथों में जिनका वर्णन मिलता है. इस संदर्भ में उन्‍होंने कहा कि हमको सदन में भी इसका अनुसरण करना चाहिए.

दिल्ली से लेकर पटना तक मीडिया में नीतीश कुमार की बेहतर छवि बनाने में हरिवंश का बड़ा योगदान रहा है।



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