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लाईफ लाईन एक्सप्रेस को नई ज़िंदगी दी प्रभु ने

देश के दूरदराज के इलाकों में मरीजों की मदद के लिए रेलवे ने स्वास्थ्य मंत्रालय से हाथ मिला कर मुहिम के तौर पर लाइफ लाइन एक्सप्रेस चलाई है। इस मुहिम में चलती रेलगाड़ी में तमाम बीमारियों की जांच व इलाज की सुविधा है। लाइफ लाइन एक्सप्रेस नाम की इस गाड़ी में कैंसर और परिवार-नियोजन सेवा के लिए नए डिब्बे जोड़े गए हैं। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह से इसका और बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। रेलवे लाइन पर दौड़ते अस्पताल को मिली नई ताकत के साथ इसका पहला चक्कर सतना के लिए लगेगा जहां यह 15 दिसंबर से 15 जनवरी तक रुकेगी। वहां इलाज के बाद इसे देश के दूसरे हिस्सों में ले जाया जाएगा।
गुरुवार को रेलमंत्री सुरेश प्रभु और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नए डिब्बों के साथ इस गाड़ी का उद्घाटन किया। पहले मंगलावर को उद्घाटन होना था लेकिन तमिलनाडुू की मुख्यमंत्री जयललिता के निधन की वजह से इसे टाल दिया गया था। जोड़े गए नए डिब्बों में एक सर्विइकल, ब्रेस्ट और ओरल कैंसर की जांच और इलाज के लिए होंगे। साथ ही परिवार नियोजन के लिए भी अलग डिब्बा होगा। इस ट्रेन में तीन आॅपरेशन थिएटर और सात आॅपरेशन टेबल मौजूद हैं। इस गाड़ी के पहुंचने पर स्थानीय प्रशासन की मदद से मरीजों का पंजीक रण व जांच व इलाज किया जाएगा।
यह चलता-फिरता अस्पताल देश के दूरदराज के इलाकों में पहुंचता है। करीब 20 से 25 दिन एक इलाके में रुक कर मरीजों का इलाज करता है। अब से पहले मोतियाबिंद व दूसरी छोटी-मोटी बीमारियों की सर्जरी की जाती रही है। ट्रेन में विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सों और नकनीकी कर्मचारियों के अलावा सफाई कर्मियों क ा पूरा दल मौजूद है।
कई सालों से चल रही इस ट्रेन में पहले चार तरह की सर्जरी की ही सुविधा थी। लेकिन इसकी जरूरत व क्षमता को देखते हुए इसे और मजबूत करने की पहल की गई है। अब दो नए डिब्बों के साथ इसके इलाज की क्षमता को और अधिक मजबूत किया गया है। रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक, अब तक लाइफ लाइन एक्सप्रेस से छोटी-बड़ी मिलाकर दस हजार सर्जरी की गई। पांच बोगियों वाली यह ट्रेन गुरुवार से सात डिब्बों की हो गई है।



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