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मेड इन इंडिया कारों का अमेरिका में जलवा

भारत में निर्मित कारों का तीसरा सबसे बड़ा बाजार

भारत में बनने वाली कारों के लिए मार्च में समाप्त पिछले वित्त वर्ष में अमेरिका तीसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार बन गया है। उससे एक साल पहले तक 30 लाख डॉलर मूल्य के निर्यात के साथ अमेरिका भारतीय कार निर्यातकों के लिए शीर्ष 80 देशों में भी शामिल नहीं था।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2018 में भारत से अमेरिका को 65.4 करोड़ डॉलर मूल्य की कारों का निर्यात किया गया। यह तेजी मुख्य रूप से प्रमुख कार विनिर्माता फोर्ड के एक मॉडल की वजह से आई है। कंपनी ने अपने चेन्नई संयंत्र में बनने वाली ईकोस्पोर्ट एसयूवी को पिछले साल से अमेरिका निर्यात करना शुरू किया है। भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार 1.69 अरब डॉलर के साथ मैक्सिको है और उसके बाद दक्षिण अफ्रीका (66.6 करोड़ डॉलर) का स्थान है। वित्त वर्ष 2017 में ब्रिटेन तीसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार था लेकिन वित्त वर्ष 2018 में भारत से निर्यात होने वाले 7.1 अरब डॉलर मूल्य के कुल कार निर्यात में से 9 फीसदी से अधिक अमेरिका को निर्यात किया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अमेरिकी कार विनिर्माताओं को अधिक से अधिक स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने पिछले साल फोर्ड और जनरल मोटर्स के प्रमुखों के साथ बैठक से पहले ट्वीट किया था, ‘मैं चाहता हूं कि यहां कारें बेचने के लिए नए संयंत्र लगाए जाएं।’ फोर्ड इंडिया अमेरिकी कार विनिर्माता फोर्ड मोटर कंपनी की सहायक इकाई है और अमेरिका सहित विभिन्न बाजारों में निर्यात के लिए भारतीय संयंत्र का पूरा फायदा उठा रही है। भारत से कार निर्यात के मामले में फोर्ड ने कोरियाई कार विनिर्माता हुंडई को भी पीछे छोड़ दिया है। अब तक हुंडई भारत से सबसे ज्यादा कारों का निर्यात करती थी। हालांकि फोर्ड ने अलग-अलग देशों के लिए निर्यात का आंकड़ा साझा नहीं किया है।

फोर्ड के लिए अमेरिका अहम निर्यात बाजार है जबकि अन्य कार कंपनियां अमेरिकी बाजार में वाहनों का उतना निर्यात नहीं करती हैं। फोर्ड ईकोस्पोर्ट की घरेलू बाजार में कीमत 7.8 से 11.8 लाख रुपये के बीच है। अगर निर्यात के लिए औसत मूल्य 10 लाख रुपये रखें तो कंपनी ने पिछले साल अमेरिका में 45,000 कारों का निर्यात किया है। हालांकि अमेरिकी बाजार के लिए यह आंकड़ा काफी कम है क्योंकि वहां सालाना 1.7 करोड़ कारों की बिक्री होती है। वाहनों के संगठन सायम के आंकड़ों के अनुसार फोर्ड ने पिछले साल विभिन्न बाजारों में 90,500 ईकोस्पोर्ट का निर्यात किया है। ईकोस्पोर्ट के विनिर्माण के लिए फोर्ड के छह वैश्विक केंद्रों में से एक भारत भी है। वित्त वर्ष 2018 में वाहन उद्योग की ओर से 7,47,287 कारों का निर्यात किया गया।

चालू वित्त वर्ष में भी अमेरिका को कार निर्यात में तेजी बनी हुई है। अगर वित्त वर्ष के पहले महीने का आंकड़ा देखें तो निर्यात के मामले में अमेरिका दूसरा सबसे बड़ा बाजार दिखता है, जहां 9.8 करोड़ डॉलर मूल्य की कारों का निर्यात किया गया। यही रफ्तार आगे भी कायम रही तो इस साल अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका को पीछे छोड़कर भारतीय कारों का दूसरा बड़ा बाजार बन जाएगा।

सा़भार https://m.bshindi.com/ से

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