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देश के ज्वलंत मुद्दों का ‘स्पंदन’ है मीडिया चौपाल के ये सार्थक आयोजन

एक समय था जब देश के आम आदमी की आखरी उम्मीद कोई अखबार या पत्रकार ही हुआ करता था, देश भर में एक आम कहावत प्रचलित थी कि ज्यादा कुछ हुआ तो अखबार में छप जाएगा-यानी किसी घटना, घोटाले या खबर का अखबार में छप जाना इस बात का प्रमाण होती थी कि इस पर सरकार और प्रशासन हरकत में आएगा, और होता भी वही था, खबर छपते ही उसका असर होता था। लेकिन आज मीडिया एक ऐसी मंडी के रूप में पहचान बना चुका है जहाँ खबरें तो बहुत है मगर उनका असर कहीं नहीं होता। हर खबर दूसरी खबर को उतार फेंकती है। टीवी पर किसी चैनल पर कोई एक खबर सनसनी पैदा करे इसके पहले ही दूसरे चैनल पर कोई दूसरी खबर सनसनी पैदा करने को तैयार हो जाती है। टीवी पर आजकल वो सब खबरें ब्रेकिंग न्यूज़ बन और राष्ट्रीय सुर्खी बन जाती है जिस खबर को आज से दस साल पहले कोई गली मोहल्ले का अखबार भी छापने में शर्म महसूस करता था। कहने का मतलब ये है कि अब कोई खबर असर पैदा नहीं करती, हाँ पाठक और दर्शक के मन में एक वितृष्णा, बैचेनी और हताशा जरुर पैदा करती है।

लेकिन मीडिया की मंडी में इन सबसे हटकर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जिसकी चर्चा मीडिया के लोगों में ही आपस में हो कर रह जाती है, वो सब उन पाठकों और श्रोताओं तक नहीं पहुँचता जो मैनलाईन मीडिया की खबरों से उकता चुके हैं और उनसे पीछा छुड़ाना चाहते हैं।

स्पंदन संस्था के माध्यम से भोपाल के श्री अनिल सौमित्र विगत कई वर्षों से मीडिया के मित्रों को एक मंच पर लाकर सकारात्मक और समाजिक सारोकार से जुड़े विषयों को लेकर मीडिया चौपाल का आयोजन करते आ रहे हैं। इस मीडिया चौपाल में ऑन लाईन मीडिया, इंटरनेट, सोशल मीडिया, वेब साईट और प्रिंट से लेकर टीवी पत्रकारिता से जुड़े लोगों की भागीदारी तो होती ही है, जिन विषयों पर चर्चा आयोजित की जाती है उन विषयों से जुड़े विशेषज्ञ भी इसमें शामिल होकर मीडिया से सीधा संवाद करते हैं। यह एक बौध्दिक आयोजन न होकर एक ऐसे खुले मंच के रूप में काम करता है जहाँ संवाद के माध्यम से देश के राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक से लेकर पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को समझने, उनकी गहराई में जाने की सार्थक कोशिश होती है।

आज जब देश का मैनलाईन मीडिया बलात्कार, दुर्घटना, घोटालों की खबरों और नेताओं के दो दो कौड़ी के बयानों की क्रिया-प्रतिक्रिया में उलझा रहता है, ऐसे में स्पदंन के माध्यम से अनिल सौमित्र देश के प्रमुख संस्थानों, विश्वविद्यालयों और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े आश्रमों को एक मंच पर लाकर देश के ज्वलंत मुद्दों पर सार्थक संवाद का आयोजन करना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण काम तो है ही उनका ये अभिवन प्रयास एक सार्थक व सृजनात्मक संदेश भी देता है।

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इस बार ये चौपाल हरिद्वार में पांचवी चौपाल का आयोजन 22-23 अक़्टूबर, 2016 निष्काम सेवा ट्रस्ट, हरिद्वार, उत्तराखंड में आयोजित किया जा रहा है। मीडिया चौपाल 2016 ‘विज्ञान-विकास और मीडिया के अंत:संबंधों और विभिन्न आयामों की पड़ताल’ विषय पर केन्द्रित होगा। इंडिया वाटर पोर्टल, सीएसआईआर – राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं सूचना स्रोत संस्थान (निस्केयर), अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, इंडियन साइंस राइटर्स एसोसिएशन तथा दिव्य सेवा प्रेम मिशन हरिद्वार के संयुक्त तत्वावधान में हो रही इस मीडिया चौपाल में ‘विज्ञान-विकास और मीडिया के अंत:संबंधों और विभिन्न आयामों की पड़ताल’ पर इससे संबंधित विषयों के विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।

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इसके पहले मध्यप्रदेश शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के साथ मिलकर स्पंदन ने लगातार तीन वर्षों तक मीडिया चौपाल के माध्यम से मीडिया के विविध रूपों, अवसर और चुनौतियों पर व्यापक चर्चा सत्रों का आयोजन कर मीडिया के मित्रों को विज्ञान की ताकत का और विज्ञान की दुनिया से जुड़े लोगों को मीडिया की सार्थक उपयोगिता का एहसास हुआ। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के सहयोग से वर्ष 2012, 2013 और 2014 में “मीडिया चौपाल” का आयोजन किया गया था। 12 अगस्त 2012 को “विकास की बात विज्ञान के साथ – नये मीडिया की भूमिका” विषय पर एक दिवसीय चौपाल का आयोजन भोपाल में हुआ था, जबकि 14-15, सितम्बर, 2013 को “जन-जन के लिए विज्ञान, जन जन के लिए मीडिया” विषय पर वेब संचालक, ब्लॉगर्स, सोशल मीडिया संचारक और आलेख-फीचर लेखकों भोपाल में एक मंच पर मिले।

इसी प्रकार 11-12 अक्टूबर, 2014 को नई दिल्ली में “नद्य: रक्षति रक्षित:” विषय पर दो दिवसीय चौपाल का आयोजन नई दिल्ली में किया गया था। इस मीडिया चौपाल में विचारक के एन गोविन्दाचार्य, श्री सुरेश प्रभु, सांसद और पत्रकार प्रभात झा, राज्यसभा सांसद और नर्मदा समग्र के अध्यक्ष अनिल माधव दवे, वरिष्ठ पत्रकार जवाहरलाल कौल, जल विशेषज्ञ अनुपम मिश्र, विज्ञान संचारक डा. मनोज पटेरिया, विज्ञान भारती के संगठक जयकुमार, मध्यप्रदेश सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार डा. प्रमोद कुमार वर्मा, बाढ़ के विशेषज्ञ दिनेश मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय, जयदीप कर्णिक, रामेन्द्र सिन्हा, हितेश शंकर, के. जी. सुरेश, पर्यावरण स्तंभकार देवेन्द्र शर्मा, पंकज चतुर्वेदी, भाषाविद हेमंत जोशी, प्रमोद दूबे सहित अपने अपने क्षेत्र के कई दिग्गज शामिल हुए।

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