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सिविल सेवा में उर्दू में परीक्षा का विरोध

अमरोहा: जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी महाराज ने सिविल परीक्षा में मुसलमानों के ज्यादा चुने जाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अमरोहा पहुंचे महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद ने इसके साथ ही सरकार से सिविल परीक्षा में द्वितीय भाषा के चयन पर मिलने वाली उर्दू या संस्कृत भाषा पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की है. इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से जल्द ही देश में दो बच्चों के कानून को लाने की मांग की और अयोध्या में राम मंदिर मुद्दे पर भी अपनी राय रखी.

हिंदी-अग्रेंजी में ही होनी चाहिए सिविल एग्जाम
जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी महाराज का कहना है कि सिविल एग्जाम की परीक्षा सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी भाषा मे ही होनी चाहिए और द्वितीय भाषा के चयन पर मिलने वाली उर्दू या संस्क्रत भाषा पर तत्काल रोक लगा देने चाहिए. उन्होंने कहा, ‘पिछले तीन-चार सालों से बड़ी संख्या में मुसलमान आईपीएस और आईएएस बन रहे हैं. हम इस बात का विरोध नहीं कर रहे लेकिन, वो किस पद्धति से आ रहे हैं.’ उन्होंने अपनी बात को बढ़ाते हुए कहा, ‘सिविल परीक्षा में वो द्वितीय भाषा में उर्दू लेते हैं. उर्दू लेने के बाद उर्दू की तो कॉपी जहां जांची जाती हैं वो उर्दू के शिक्षक के द्वारा जांच की जाती हैं, जो मुसलमान होते हैं और ऐसे में चाहे उन्होंने ठीक लिखा हो या न लिखा हो उनको लगभग शत प्रतिशत अंकों से पास कर ही देते हैं इसकी जांच होनी चाहिए.

दो बच्चों का कानून लाए केंद्र सरकार
दो बच्चों के कानून पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार को दो बच्चों का कानून देश में तत्काल लगा देना चाहिए. अगर दो बच्चों का कानून नहीं लगाया गया सख्ती से नहीं लगाया गया तो इस देश में एक नई कई बंटवारे होंगे और ग्रह युद्ध की स्थिति बन जाएगी’. उन्होंने कहा, ‘ऐसा अगर नहीं हुआ तो कहीं न कहीं भारत बिखर सकता है. अगर भारत को एकजुट रखना है तो दो बच्चों का कानून अबिलम्ब भारत की सरकार को लागू कर देना चाहिए’.

राम मंदिर पर भी रखी राय
महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी महाराज ने अयोध्या में राम मंदिर मुद्दे पर भी अपनी राय रखी. उनका कहना था कि अगर इस मामले में कोर्ट से फैसला आने में देरी होती है तो केंद्र सरकार का केंद्रीय मंत्रिमंडल मात्र प्रस्ताव पारित कर दे उस प्रस्ताव से भी वहां मंदिर बन सकता है



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