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वेदों की पढ़ाई के लिए वेद विश्वविद्यालय बनाने की संघ की योजना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) वेदों की पढ़ाई और वेदों पर रिसर्च को प्रमोट किया जाएगा। संघ से जुड़ा संगठन विश्व हिंदू परिषद(वीएचपी) वेद यूनिवर्सिटी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए गुडगांव में करीब 40 एकड़ जमीन ली जा रही है। अभी वीएचपी के वेद विद्यालय और कुछ महाविद्यालय चलते हैं लेकिन यह वेद यूनिवर्सिटी वीएचपी की और संघ के किसी भी संगठन की पहली यूनिवर्सिटी होगी। स्कूल स्तर पर संघ का संगठन ‘विद्या भारती’ शिशु मंदिर और एकल विद्यालय चलाता है।

सूत्रों के मुताबिक वीएचपी की हाल ही में हुई एक मीटिंग में इस वेद यूनिवर्सिटी को लेकर चर्चा भी हुई। जिसमें कहा गया कि वेद को बढ़ावा देने के लिए सिर्फ स्कूल स्तर पर वेद की पढ़ाई ही नहीं बल्कि वेदों में ही ग्रेजुएशन, मास्टर्स और रिसर्च का माहौल तैयार करना होगा। सूत्रों के मुताबिक, अभी इस वेद यूनिवर्सिटी को शुरू करने के लिए जरूरी अप्रूवल लेना बाकी हैं।

शुरुआत वेदों में ग्रेजुएशन से हो सकती है जिसके बाद इसे मास्टर्स और पीएचडी स्तर तक बढ़ाया जाएगा। वीएचपी के एक नेता के मुताबिक अभी वीएचपी के दिल्ली में स्थित हनुमान संस्कृत महाविद्यालय सहित कुछ महाविद्यालय चलते हैं लेकिन यह वेद यूनिवर्सिटी वीएचपी की पहली यूनिवर्सिटी होगी। एक बार यूनिवर्सिटी बन जाने के बाद इससे संबंद्ध महाविद्यालय भी खोले जा सकते हैं। वीएचपी के अभी देश भर में 16 वेद विद्यालय चल रहे हैं।

इन वेद विद्यालयों का शैक्षणिक काम देख रहे आचार्य चंद्रभानु शर्मा ने कहा कि वेद विद्यालय में छठी क्लास से बच्चों को एडमिशन दिया जाता है। पांचवीं तक की पढ़ाई वह किसी भी स्कूल से कर सकते हैं जिसके बाद उन्हें वेदों की पढ़ाई कराते हैं। यह स्कूल 12 वीं क्लास तक हैं और यह एचआरडी मिनिस्ट्री से मान्यता प्राप्त हैं। इनकी परीक्षाएं उज्जैन का वेद विद्या प्रतिष्ठान कराता है। 12वीं के बाद यह स्टूडेंट्स किसी भी कॉलेज में एडमिशन ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि तिरुपति यूनिवर्सिटी सहित कुछ यूनिवर्सिटी हैं जो वेदों की पढ़ाई ही कराते हैं लेकिन इनकी संख्या अभी गिनी चुनी है।

वेद विद्यालय से निकलकर छात्र जब उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं तो दूसरे कॉलेजों में उन्होंने ज्यादातर संस्कृत का ही विकल्प मिल पाता है। वेद विश्वविद्यालय में ये छात्र वेद की पढ़ाई आगे कर सकेंगे और वेदों पर ही रिसर्च भी कर सकेंगे।

साभार- नवभारत टाईम्स से



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