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शर्म का लाईव टेलीकास्टः शर्म जो आई ही नहीं

देश के सभी चैनलों के धाँसू संवाददाता देश भर में सभी प्रमुख नेताओं, फिल्मी अभिनेताओं और अभिनेत्रियों से लेकर चौराहे-चौराहे पर कैमरे के साथ पहुँच चुके हैं। चैनलों पर आज बहस का मुद्दा है क्या किसी को शर्म आ रही है। मुद्दे का मुद्दा ये है कि शर्म किस बात पर आना चाहिए, बिहार में मुजफ्फरपुर कांड पर देवरिया कांड पर या सके पहले हो चुके हजारों लाखों कांडों पर या किसी भी कांड, बात, किसी के बयान पर या किसी भी घटना पर।

हर चैनल की चिंता ये है कि उनका रिपोर्टर घर से बाहर निकलते मुख्यमंत्री, मंत्री, विपक्ष के नेता, से लेकर गली मोहल्ले के किसी भी नेता यासामाजिक कार्यकर्ता से ये जाने कि किसको किस बात पर शर्म आना चाहिए और शर्म आ भी रही है कि नहीं। रिपोर्टर और एंकर-एंकरी सभी परेशान हैं, किसी को शर्म आ ही नहीं रही है। रिपोर्टर बेचारा जिसके पास जाता है वो फट से दूसरे नेता का नाम लेकर कहता है उसे शर्म आना चाहिए। रिपोर्टर बेचारा भागकर उस नेता और मंत्री के पास जाता है, उसके चेहरे पर शर्म ढूँढता है, मगर शर्म इतनी बेशर्म है कि इन नेताओं के चेहरे पर आकर फटकती ही नहीं। इस चक्कर में बेचारे रिपोर्टर और एंकर-एंकरी को शर्म आने लगती है कि हम अपने दर्शकों को क्या दिखाएँ।

लेकिन हिम्मते मर्दा, मददे खुदा की तर्ज पर एंकर-एंकरी रिपोर्टर को लगातार उकसाते रहते हैं कि वो नेता, मंत्री और मुख्यमंत्री से लेकर जो कोई वीआईपी टाईप नेता दिख जाए उसके चेहरे पर शर्म दिखाए। मगर कैमरा किसी भी ऐंगल से इनके चेहरे से शर्म दिखा ही नहीं पाता है और बेचारा कैमरामैन शर्मिंदा होने लगता है।

आखिर एक रिपोर्टर हिम्मत करके शर्म की लाईव कमेंट्री करने लगता है। अभी अभी पता चला है कि मुख्यमंत्री जी अपने बंगले के बाहर निकलने वाले हैं और हमारे सूत्रों ने दावा किया है कि वो इस घटना पर शर्मिंदा होंगे। फिर एंकर पूछता है क्या आपको पक्का भरोसा है कि मुख्यमंत्री जी शर्मिंदा होंगे। क्योंकि उन्होंने तो कहा है कि ये घटना तो बहुत छोटी है, और ऐसी घटनाएँ होती रहती है, फिर वो शर्मिंदा कैसे होंगे। रिपोर्टर बेचारा परेशान होकर अपना पसीना पूछता है और हाँफते हाँफते बोलता है, मुझे अपने सूत्रों से पक्की खबर मिली है कि वो बंगले से बाहर होते ही शर्मिंदा होंगे और इसी घटना पर शर्मिंदा होंगे, किसी और घटना पर नहीं। एंकर और एंकरी खुशी से पागल हो उठते हैं, टीवी स्क्रीन पर धड़ाम से ब्रेकिंग न्यूज़ का धमाका होने लगता है। एंकर और एंकरी चिल्ला चिल्लाकर देश को बताते हैं कि जैसा कि हमने कहा था कि मुख्यमंत्री को इस घटना पर शर्म आनी चाहिए, अभी अभी खबर मिली है कि मुख्यमंत्री को शर्म आएगी। हमारा रिपोर्टर मुख्य मंत्री के बंगले के बाहर ही खड़ा है और कैमरामैन भी उसी ऐँगल पर खड़ा है कि जैसे ही मुख्य मंत्री दरवाजे से बाहर आएँगे और उनके चेहरे पर शर्म दिखाई देगी, हम वो अद्भुत क्षण देश के दर्शकों को सबसे पहले बताएँगे। आप देखेंगे कि मुख्य मंत्री को कैसे शर्म आती है। लेकिन मुख्य मंत्री घर से बाहर ही नहीं निकलते।

इधर बेचारा रिपोर्टर फिर शर्म का इंतज़ार करने लगता है। बैचेन एंकर और एंकरी रिपोर्टर से टाईम पास करने को पूछने लगते हैं। आपको तो पत्रकारिता में इतने साल हो गए, आपने कई नेताओँ और मंत्रियों को इतने करीब से देखा है क्या आपने इसके पहले कभी किसी नेता, मंत्री या मुख्य मंत्री को देखा जिसे शर्म आई हो। रिपोर्टर फिर हाँफने लगता है। वह अपने पत्रकारिता के अनुभव का पूरा निचोड़ पेश करते हुए दुःखी स्वर में कहता है, मैने कई घटनाएँ कवर की जिसमें बलात्कार, चोरी, लूट, धोखाधड़ी, अपहरण सब शामिल हैं, लेकिन कभी किसी नेता, मंत्री, पुलिस अधिकारी को शर्म नहीं आई।

तो क्या आपने शर्म से ही कभी बात करने की कोशिश की कि वो इन नेताओँ मंत्रियों और मुख्य मंत्री वगैरह को क्यों नहीं आती।

रिपोर्टर फिर सचेत होकर बोलने लगता है, जी मेरी एक बार शर्म से ही बात हुई थी, बड़ी मिन्नतें करके मैने शर्म से जानना चाहा था कि एक आम आदमी जरा सी गल्ती करे, कहीं किसी की गाली खा ले, पुलिस का थप्पड़ खा ले, किसी का उधार न चुका सके तो उसे शर्म आने लगती है और कई बार तो वह आत्महत्या तक कर लेता है फिर इन नेताओं को शर्म क्यों नहीं आती। इस पर शर्म का कहना था कि शर्म, बेइज्जती, मान सम्मान जैसे जो शब्द हैं उनकी भी अपनी आचार संहिता होती है, उनका भी अपना ईमान धरम होता है। ये हर किसी के घर या किसी के मुँह पर जाकर नहीं बैठ जाते। शर्म का कहना था कि हमने तो नेताओँ, मंत्रियों और मुख्य मंत्रियों के चेहरे पर आना तो कभी का छोड़ दिया क्योंकि हम कितनी भी कोशिश करें उन्होंने अपने चेहरे ऐसे शर्म प्रूफ कर लिये हैं कि लोगों को पता ही नहीं चलता कि शर्म नाम की कोई चीज इनके पास फटकी भी है।

ये सुनकर एंकर और एंकरी दोनों निराश हो जाते हैं और अपने दर्शकों से माफी मांगते हुए कहते हैं कि हमें खुद शर्म आ रही है कि इतनी बड़ी घटना पर हम किसी भी नेता, मंत्री और मुख्य मंत्री को शर्मिंदा नहीं दिखा सके।

इधर फिल्मी अभिनेताओँ और अभिनेत्रियों ने रिपोर्टरों से कहा कि हम तो रात दिन बेशर्मी में ही जीते हैं, हम फिल्मी पार्टियों में बेशर्मी दिखाते हैं, हम अभिनेत्रियाँ कम के कम कपड़े पहकनर बेशर्म होने की प्रतियोगिता में अव्वल आने की कोशिश करती है ताकि किसी शर्मदार फिल्म निर्माता या निर्देशक की नज़र उन पर पड़े और वो अपनी बेशर्मी को फिल्मी या टीवी परदे पर जीवंत कर सकें।

कार्टून साभारः https://www.bbc.com/hindi से



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