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जो धर्म में बाधक नहीं वही सच्चा मीत : सुधा सागर जी महाराज

– पंचकल्याणक महोत्सव शुरू, धूमधाम से निकली शोभायात्रा
कोटा/खानपुर। चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र खानपुर का चप्पा चप्पा सुसज्जित, वैभवशाली, सजावट से परिपूर्ण और दुल्हन की तरह सजा नजर आया, ये ही नहीं जगह-जगह स्वागत द्वार, महकते पुष्प की सजावट, रंगोली और ना जाने कितने ही प्रकार से सजावट का दृश्य मन मन को मोह गया। ये अवसर था पंच कल्याणक महोत्सव का। हजारों की संख्या में श्रावक अन्य धर्म समाज के लोगों ने शिरकत कर आनंद की अनुभूति की, इस दौरान भव्य घटयात्रा निकाली गई जिसमें मंगल कलश सिर पर धारण किए महिलाएं सजी-धजी वेशभूषा में मंगल गीत गाते हुए चल रही थी, वहीं युवतियों और युवकों की टोली नाचते गाते पंचकल्याणक महोत्सव की शोभा बढ़ा रहे थे, बैंड की मधुर ध्वनि गगनचुंबी सुधा सागर जी महाराज के जयघोष लगा रहे थे। सुधा सागर जी महाराज के ससंघ में जोश उत्साह के साथ पूरा चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र खानपुर झालर, ढपली, मंजीरे और शंखनाद की जय ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। चारों और धर्म की प्रभावना के साथ धर्म ध्वज पताका लहरा रही थी। ऐतिहासिक घटयात्रा में जन-जन की रही भागीदारी, इस दौरान महावीर जी, अशोक जी, सुरेश जी, विमल जी, पाटनी परिवार आरके मार्बल वालों को ध्वजारोहण का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस दौरान पांडाल शुद्धिकरण भी हुआ।

इस अवसर पर चन्द्रोदय तीर्थ क्षेत्र चांदखेडी जैन मंदिर खानपुर में प्रवचन के दौरान सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि जो धर्म में बाधक नहीं बने वही सच्चा मीत होता है। कान है पर सुनने का मन नहीं, मुख है पर खाने का मन नहीं हो रहा, वैभव को भोगने का मन नहीं हो रहा ऐसी अनुभूति जिसे हो जाए जैन धर्म ऐसी आत्मा को खोजता है। उन्होंने कहा कि सारा जगत कहता है मुझे भोजन कब मिलेगा जबकि जैन दर्शन भोजन को त्याग करने की बात कहता है। प्रवचन के दौरान महाराज श्री ने जीवन में भोजन, पुण्य, सुख दुख, अंतरात्मा, अनुभूति, अंधकार व प्रकाश पर विस्तार से व्याख्या करते हुए जीवन में इसके उपयोग को बताते हुए श्रावक का जीवन सफल हो ऐसे उद्गार व्यक्त किए।

20 तीर्थंकर सहित कुल 164 प्रतिमाएं प्रतिष्ठित होंगी
हुकम जैन काका ने बताया कि ध्वजारोहण राष्ट्र गौरव पाटनी परिवार द्वारा हुअ। निर्यापक मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज सहित ससंघ मुनि महासागर महाराज, मुनि निष्कंप सागर महाराज, क्षुल्लक गंभीर सागर, धैर्य सागर सहित नौ मुनि संघ के सानिध्य में होगा। महोत्सव में त्रिकाल चौबीसी की 72 भूत, भविष्य और वर्तमान की प्रतिमाओं सहित 20 तीर्थंकर सहित कुल 164 प्रतिमाएं प्रतिष्ठित होंगी। प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रहमचारी प्रदीप सुयश होंगे।

पंचकल्याण के दौरान ये होंगे कार्यक्रम
14 से 19 दिसम्बर को आयोजित हो रहे पंचकल्याण महोत्सवक की शुरूआत मंगलवार को हो गई। इस दौरान गर्भ कल्याणक पूर्वाद्ध के साथ 15 को गर्भ कल्याणक उत्तराद्ध होगा, 16 को जन्म कल्याणक होगा, तीर्थंकर बालक का जन्म सहित दोपहर 1 बजे पिच्छी परिवर्तन होगा, इसमें अशोकनगर के विजय दुर्रा टीम द्वारा विशेष आयोजन होगा। 17 दिसंबर को तप कल्याणक में युवराज आदि कुमार का राज्य अभिषेक सहित अन्य आयोजन होंगे, 18 दिसंबर को ज्ञान कल्याणक होगा, महामुिन आदि कुमार की आहार चर्या सहित अन्य आयोजन होंगे। 19 दिसंबर को मोक्ष कल्याणक होगा, इसमें जिन बिम्ब स्थापना से लेकर कलशारोहण सहित अन्य आयोजन होंगे। पंचकल्याणक में पहली बार तमिलनाडु के इरोड शहर के लिए चंद्रप्रभु भगवान की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इरोड के समाज की ओर से 30 साल से किराए के हॉल में मंदिर का संचालन हो रहा है, वहां के जैन समाज के 14 घरों की ओर से मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, अभी यहां मंदिर बन गया है, जहां यह मूर्ति प्रतिष्ठित की जाएगी। पंचकल्याण को लेकर जैन समाज सहित अन्य समाज में हर्ष का वातावरण है।

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