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राजीव गाँधी ज्योति बसु को प्रधान मंत्री बनाना चाहते थे!

देश के इतिहास में सबसे अधिक समय 23 वर्ष तक लगातार मुख्यमंत्री रहे प्रख्यात वामपंथी नेता ज्योति बसु अपनी पार्टी की एक ‘भूल’ के कारण 1996 में देश के प्रधानमंत्री नहीं बन पाये और इससे पहले कांग्रेस के नेता राजीव गांधी भी उन्हें दो बार पीएम पद की पेशकश कर चुके थे।

95 वर्ष की उम्र में दुनिया से विदा लेने वाले श्री बसु श्री अमृतपाद डांगे, हीरेन मुखर्जी, अजय मुखर्जी, पीसी जोशी, वी टी रणदिवे की तरह देश के बड़े वामपंथी नेताओं में गिने जाते थे। वह ब्रिटेन की कम्युनिस्ट पार्टी तथा मशहूर कम्युनिस्ट चिंतक एवं लेखक रजनी पामदत्त तथा हैरी पोलिट से प्रेरित होकर कम्युनिस्ट बने थे। ज्योतिंद्र नाथ बसु उर्फ  ज्योति बसु को संयुक्त मोर्चा सरकार में देश का प्रधानमंत्री बनाने का अवसर मिला था लेकिन माकपा की केन्द्रीय समिति ने उसका विरोध किया। बाद में श्री बसु ने प्रस्ताव स्वीकार न करने को ‘ऐतिहासिक भूल’ बताया था। उस समय श्री बसु की जगह श्री एच डी देवगौडा प्रधानमंत्री बने थे।

आठ जुलाई 1914 को एक मध्यमवर्गिय परिवार में जन्मे श्री बसु को उनके माता-पिता वकील बनाना चाहते थे और वह कानून की पढ़ाई करने लंदन भी गए थे लेकिन उन्होंने कभी वकालत नहीं की। माकपा बुधवार को कोलकाता में उनकी जन्मशती का समापन समारोह धूमधाम से मनाने जा रही है। इस समारोह में पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी के अलावा पार्टी से निष्कासित वयोवृद्ध नेता एवं लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी भी भाग लेंगे।

 
1990-91 में राजी नहीं हुए बसु
सीबीआई के निदेशक एवं पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक रहे अरुण प्रसाद मुखर्जी की आत्मकथा के अनुसार श्री गांधी ने भी 1990 तथा 1991 में श्री बसु को प्रधानमंत्री पद की पेशकश की थी लेकिन जब वह राजी नहीं हुए तो श्री चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने। श्री अरुण प्रसाद मुखर्जी तब गृह मंत्रलय में विशेष सचिव थे। 1991 में चंद्रशेखर सरकार के गिरने पर श्री गांधी ने फिर श्री बसु से संपर्क किया, लेकिन माकपा नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ही इस बारे में फैसला करती है। इस तरह वह फिर प्रधानमंत्री बनने से रह गये। 1940 में ब्रिटेन से कानून की डिग्री हासिल करने के बाद भारत लौटने पर वह कोलकाता उच्च न्यायालय में वकील के रूप में दाखिल हुए पर उन्होंने कभी वकालत नहीं की और वह कम्युनिस्ट पार्टी में होल टाइमर हो गए। 1946 में पहली बार रेलवे निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रहे श्री बसु की लोकप्रियता इस बात से प्रमाणित होती है कि वह 1952 से 1996 तक लगातार 11 बार विधायक रहे। वर्ष 1964 में माकपा का गठन हुआ तो वह पहली बार नौ सदस्यीय पोलित ब्यूरो के सदस्य बने।

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