लंदन। भारतीय उच्चायोग और कथा यू के के तत्वावधान में कल एक बेहतरीन मुशायरा नेहरू केंद्र में आयोजित किया गया जिसे सुन कर लगा कि भारत से हज़ारों मील की दूरी पर भारतीय मूल के शायर अपनी शायरी के माध्यम से अपनी संस्कृति का झंडा बुलंद किए हुए हैं।
फ़हीम अख़्तर की ग़ज़ल “आशिक़ को कहाँ होश के सजदे का हो पाबंद , ये इश्क़ की बरकत है गुनहगार नहीं था “ से मुशायरे का आग़ाज़ हुआ , फिर इश्क़ मोहब्बत के साथ ही रोज़मर्रा की सामाजिक , राजनैतिक सचाइयों को दर्शाती ग़ज़लों और नज़्मों का सिलसिला घंटों जारी रहा ।
आशुतोष कुमार , ज्ञान शर्मा , सरबजीत ढाक , आशीष मिश्रा , माथे तलत सिद्दीकी , शाज ख़ान और मुंबई से पधारे प्रदीप गुप्ता ने रंग जमा दिया . “ऐसा क्या कुछ घट गया है इन दिनों में , आदमी क्यों बंट गए हैं दो ध्रुवों में “ इन पंक्तियों पर प्रदीप गुप्ता ने वाहवाही बटोरी।
लंदन के जाने माने कथाकार तेजेन्द्र शर्मा ने इस मुशायरे को अपने कुशल संचालन से एक नई ऊर्जा प्रदान की . नेहरू केंद्र के निदेशक नरोम जे सिंह , भारतीय उच्चायोग की सांस्कृतिक आतिशे अनुराधा पांडेय, लंबे समय से बर्नेट से काउंसलर और साहित्यकार ज़किया ज़ुबेरी, पूर्व संसद और लेबर नेता वीरेंद्र शर्मा और अनेक गणमान्य प्रवासी भारतीय उपस्थित थे.