एनीमे ने जापान को एक ‘कल्चरल सुपरपावर’ के रूप में स्थापित किया, इसकी दीवानगी पूरे विश्व में दिख रही है। स्टूडियो घिबली (Studio Ghibli) न केवल जापान की एनीमे इंडस्ट्री का एक प्रमुख स्तंभ है, बल्कि यह जापान की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर (Soft Power) को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने का एक प्रमुख माध्यम भी है। इसकी शुरुआत 1985 में हायाओ मियाज़ाकी (Hayao Miyazaki) और इसाओ ताकाहाता (Isao Takahata) ने की थी। स्टूडियो ने अपनी गहरी भावनात्मक कहानियों, पर्यावरणीय संदेशों, सांस्कृतिक मूल्यों और असाधारण एनीमेशन के माध्यम से पूरी दुनिया में जापानी संस्कृति और विचारधारा का प्रसार किया।
विचारणीय है की 145 करोड़ की आबादी वाले भारत से ऐसे नए विचार, अभिनव नवाचार और व्यवहार बाहर क्यों नहीं आते हैं? क्या इतनी विपुल आबादी का देश दूसरे देशों की उत्पाद क्रांति का खाद-पानी मात्र ही बनकर रहेगा या अपने स्वत्व के बोध से ऐसे सोशल मीडियाई और डिजिटल नवाचारों का भी उदय भी करेगा जहाँ भारतीय दोयम दर्जे के नागरिक बन अपने संस्कृति, परंपरा और समाज के लिए ट्रोल न किये जाएँ?
Regards
Shivesh Pratap
Technology-Management Consultant, Author, Public Policy Analyst
B.Tech.(EC) & IIM Calcutta Alumnus
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