Homeचुनावी चौपालइधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं-जो माइक पे चीखे वो...

इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं-जो माइक पे चीखे वो असली गधा है

चुनावी मौसम में प्रधान मंत्री से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री और छुटभैये नेताओं द्वारा जिस तरीके से गधों का महिमा मंडन किया जा रहा है ऐसे में हिंदी के प्रख्यात कवि स्व ओम प्रकाश ‘आदित्य’ की ये कविता सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियाँ बटोर रही है।

इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं
जिधर देखता हूं, गधे ही गधे हैं

गधे हँस रहे, आदमी रो रहा है
हिन्दोस्तां में ये क्या हो रहा है

जवानी का आलम गधों के लिये है
ये रसिया, ये बालम गधों के लिये है

ये दिल्ली, ये पालम गधों के लिये है
ये संसार सालम गधों के लिये है

पिलाए जा साकी, पिलाए जा डट के
तू विहस्की के मटके पै मटके पै मटके

मैं दुनियां को अब भूलना चाहता हूं
गधों की तरह झूमना चाहता हूं

घोडों को मिलती नहीं घास देखो
गधे खा रहे हैं च्यवनप्राश देखो

यहाँ आदमी की कहाँ कब बनी है
ये दुनियां गधों के लिये ही बनी है

जो गलियों में डोले वो कच्चा गधा है
जो कोठे पे बोले वो सच्चा गधा है

जो खेतों में दिखे वो फसली गधा है
जो माइक पे चीखे वो असली गधा है

मैं क्या बक गया हूं, ये क्या कह गया हूं
नशे की पिनक में कहां बह गया हूं

मुझे माफ करना मैं भटका हुआ था
वो ठर्रा था, भीतर जो अटका हुआ था

spot_img
RELATED ARTICLES

1 COMMENT

Comments are closed.

- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -

वार त्यौहार