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मैंगी का भ्रम जाल टूट रहा है

'मां की खुशियों की रेसिपी' मैगी के 'हेल्दी' होने के दावों पर मचा बवाल एक बड़े बवंडर की शक्ल ले चुका है । देश भर में हुए कई शोधों में मैगी खाने के लिए असुरक्षित मानी गई है। दिल्ली समेत देश के कई राज्यों मैगी की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। सेना की कैंटीन में भी मैगी पर पाबंदी लगा दी गई है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर हमारे देश में खाने को लेकर क्या नियम हैं?

यूं तो मैगी बहुतों की पसंद है लेकिन इसका कड़वा सच जानने के बाद अगर आप इसे अभी तक खा रहे हैं तो खाना छोड़ सकते हैं। मैगी में मोनोसोडियम ग्लूमेट (Monosodium glutamate) मिला होता है जो आपके शरीर में खुद बन सकता है। इसे MSG भी कहा जाता है। लेकिन जो MSG हमारे घर में मैगी की शक्ल में है वो आपके शरीर में कई विकृतियां पैदा कर सकता है जिसमें स्कीन प्रॉब्लम, खुजलाहट, उल्टी, अस्थमा और कई अन्य हृदय संबंधी रोग हो सकते हैं। मैगी के लिए उपयोग में लायी जाने वाली MSG चुकन्दर से बनती है।

 

क्या हैं नियम- 1. फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड्स रूल्स 2011 के मुताबिक स्वाद में इजाफा करने वाले एमएसजी (मोनोसोडियम ग्लूटमेट) 12 महीने के बच्चों को नहीं दिया जाना चाहिए। 2. 50 खाने की चीजों में एमएसजी के इस्तेमाल पर मनाही है। 3. नवजात शिशुओं के मिल्क प्रॉडक्ट्स में 0.2 पीपीपी (पार्ट्स प्रति मिलियन) से ज्यादा एमएसजी की इजाजत नहीं है। 4. खाद्य पदार्थों (चाय, बेकिंग पाउडर, डीहाइड्रेटेड प्याज, ड्राइड हर्ब्स आदि) में एमएसजी की मात्रा अधिकतम 10 पीपीएम हो सकती है।

 

क्या और क्यों है MSG? दरअसल, एमएसजी (मोनोसोडियम ग्लूटमेट) ऐसा तत्व है जो हमारे नर्वस सिस्टम को उत्तेजित कर देता है। इससे खाना ज्यादा स्वादिष्ट लगने लगता है।

 

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