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देलवाड़ा जैन मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित करने मांग

राज्यसभा सांसद डांगी ने सदन में उठाया मुद्दा, बताया अद्वितीय स्थापत्य कला

राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने देलवाड़ा जैन मंदिरों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की मांग की है। उन्होंने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान मंगलवार (3 फरवरी 2026) को यह मुद्दा उठाया। इस दौरान सांसद डांगी ने बताया कि राजस्थान के सिरोही जिले में माउंट आबू की अरावली पर्वत श्रृंखला की चोटी पर स्थित ये मंदिर भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला, अद्वितीय संगमरमर शिल्पकला और सांस्कृतिक उत्कृष्टता के अनुपम उदाहरण हैं

कांग्रेस नेता व राज्य सभा सदस्य डांगी ने सदन को देलवाड़ा जैन मंदिरों के प्राचीन इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि इनका निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य हुआ था। यहां 5 श्वेतांबर जैन मंदिर हैं, जिनमें ‘विमलवसहि’ और ‘लूणवसहि’ विशेष रूप से कलात्मक और विशिष्ट हैं। अन्य प्रमुख मंदिरों में महावीर स्वामी मंदिर, पीतलहर मंदिर और पार्श्वनाथ मंदिर शामिल हैं।

हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते है मंदिर परिसर में उपलब्ध शिलालेखों के अनुसार, वर्ष 1031 ईस्वी में 1500 शिल्पियों और 1200 श्रमिकों ने 14 वर्षों के अथक प्रयासों से इन मंदिरों का निर्माण किया था। श्वेत संगमरमर से निर्मित इन मंदिरों पर 18.53 करोड़ रुपए की लागत आई थी। इनकी छतों, गुंबदों और तोरणद्वारों पर की गई अलंकृत नक्काशी और नायाब शिल्पकला हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है।

जैन तीर्थंकरों की 57 देहरियों में है मूर्तियां स्थापित डांगी ने बताया कि मंदिर में जैन तीर्थंकरों की 57 देहरियों में मूर्तियां स्थापित हैं। इनमें भगवान ऋषभदेव के अतिरिक्त मां सरस्वती, लक्ष्मीजी, अंबाजी के साथ नृसिंह अवतार के हिरण्यकश्यप वध, श्रीकृष्ण द्वारा कालिया दमन और शेषनाग की शैय्या की मूर्तियां भी शामिल हैं। इन मंदिरों में जैन संस्कृति के साथ-साथ उस युग की लोक संस्कृति, नृत्य-नाट्य कला के अद्भुत और चित्ताकर्षक शिल्प-चित्र भी अंकित हैं।

सांसद डांगी ने शिल्प सौंदर्य की सूक्ष्मता, कोमलता और अलंकरण की विशिष्टता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि गुंबदों की छतों पर स्फटिक बिंदुओं की भांति झूमते कलात्मक पिंड, मेहराबों का बारीक अलंकरण और शिलापट्टों पर उत्कीर्ण पशु, पक्षियों, वृक्षों, लताओं तथा पुष्पों की आकृतियां अलौकिक आनंद की अनुभूति प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि यहां की वास्तुकला और शिल्प कौशल अद्वितीय हैं, जिसकी मिसाल विश्व में कहीं नहीं मिलती।

साहित्यकार डॉ दिलीप धींग ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा देलवाड़ा मंदिर पर 14 अक्टूबर 2009 को बहुरंगी स्मारक डाक टिकट पाँच रुपए के मूल्य वर्ग का जारी हुआ है । राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अध्यक्ष जिनेंद्र जैन ने सांसद सदस्य डांगी के इस प्रयास का स्वागत करते हुए उन्हें जैन समाज की और से धन्यवाद ज्ञापित किया।

नारी शक्ति महिला सशक्तिकरण: 5 साल में करोड़ों के टर्नओवर का अवसर

इंदौर। लुनिया विनायक ग्रुप ऑफ कंपनीज़ द्वारा संचालित “नारी शक्ति महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम” महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत पहल है। इस योजना से जुड़कर महिलाएं नियमित आय के साथ 5 वर्षों में करोड़ों रुपये के टर्नओवर वाला स्वयं का व्यवसाय खड़ा कर सकती हैं।

कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं को गृह उद्योग से उद्यमिता की ओर ले जाया जाएगा। इसमें फूड इंडस्ट्री, हैंडिक्राफ्ट, वुडन क्राफ्ट, स्मॉल स्किल फार्मिंग एवं बी-फार्मिंग जैसे रोजगारोन्मुख उद्योग शामिल हैं।

लुनिया विनायक ग्रुप महिलाओं को न्यूनतम निवेश में LLP रजिस्ट्रेशन, आवश्यक मशीनरी, कच्चा माल, कार्य प्रशिक्षण तथा तैयार उत्पादों की बाय-बैक सुविधा उपलब्ध कराएगा। उद्योग 0% लॉस और 0% वेस्टेज मॉडल पर संचालित होगा, साथ ही सभी सरकारी कंप्लायंस की जिम्मेदारी भी ग्रुप द्वारा ली जाएगी।

ग्रुप के अनुसार, प्रत्येक महिला अपने उद्योग के माध्यम से 10 से 50 लोगों को रोजगार दे सकेगी। यदि 10,000 महिलाएं जुड़ती हैं, तो लगभग 5 लाख रोजगार सृजन संभव होगा।

पीनटबटरजेली ने लॉन्च किया नया मार्केटप्लेस; 2028 तक स्कॉलरशिप के लिए दिया जाएगा कमीशन

डलास, टेक्सास। कम्युनिटी-संचालित डिजिटल पहल, पीनटबटरजेली (PJELLY) ने आज एक कॉमर्स-ड्रिवन मार्केटप्लेस (व्यापारिक मंच) के लॉन्च की घोषणा की है। इस मंच को विशेष रूप से इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि इससे होने वाली कमाई का एक हिस्सा स्कॉलरशिप फंडिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यह पहल एक स्ट्रक्चर्ड कमीशन मॉडल पर आधारित है।

 

इस नए मार्केटप्लेस के जरिए उपयोगकर्ता स्टैंडर्ड ‘एफिलिएट लिंक्स’ का उपयोग करके थर्ड-पार्टी उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच प्राप्त कर सकेंगे। मार्केटप्लेस की गतिविधियों से प्राप्त होने वाला कमीशन, प्रोजेक्ट की सार्वजनिक आवंटन नीति के तहत स्कॉलरशिप फंड में जमा किया जाएगा। यह नीति 2028 तक लागू रहेगी। खास बात यह है कि इस मार्केटप्लेस को बिना किसी अतिरिक्त परिचालन लागत के विस्तार (scale) करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसका अर्थ है कि जैसे-जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ेगा, स्कॉलरशिप की राशि भी उसी अनुपात में बढ़ती जाएगी। यह मार्केटप्लेस अब लाइव है और दुनिया भर में उपलब्ध है। शुरुआत में इसमें कंज्यूमर गुड्स, टेक्नोलॉजी, किताबें और शैक्षणिक सामग्री जैसी श्रेणियां शामिल की गई हैं।

परिचालन स्वतंत्रता (Operational Independence)

यह मार्केटप्लेस एक ‘क्यूरेटेड पोर्टल’ के रूप में कार्य करता है, जो छात्रों को टेक्नोलॉजी, शैक्षणिक संसाधनों और जीवनशैली से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं के विविध इकोसिस्टम तक पहुंचने की अनुमति देता है। यद्यपि यह मार्केटप्लेस विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त ब्रांडों तक पहुंच प्रदान करता है, लेकिन यह व्यापक इकोसिस्टम से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। इसमें प्रदर्शित थर्ड-पार्टी रिटेल विक्रेताओं के साथ कोई औपचारिक विज्ञापन समझौता (endorsement) या संयुक्त उद्यम (joint venture) नहीं है।

मार्केटप्लेस में भाग लेना पूरी तरह से वैकल्पिक है, और प्लेटफॉर्म के अन्य हिस्सों का उपयोग करने के लिए कोई भी खरीदारी करना अनिवार्य नहीं है। कमर्शियल फंडिंग के अलावा, यह प्लेटफॉर्म ‘पीयर-टू-पीयर’ (P2P) स्कॉलरशिप योगदान का भी समर्थन करता है, जिससे कम्युनिटी के सदस्य सीधे किसी छात्र या स्कॉलरशिप पहल के लिए फंड दे सकते हैं।

शिक्षा तक पहुंच में मदद

आवंटित स्कॉलरशिप फंड का उपयोग पात्र छात्र शैक्षणिक सामग्री, जैसे कि किताबें आदि खरीदने के लिए कर सकते हैं, जो प्लेटफॉर्म के एफिलिएट मार्केटप्लेस के जरिए उपलब्ध थर्ड-पार्टी विक्रेताओं से ली जा सकेंगी।

प्रोजेक्ट के एक प्रतिनिधि ने कहा, “यह लॉन्च प्लेटफॉर्म की गतिविधियों को एक निश्चित सामाजिक उद्देश्य के साथ जोड़ने का एक सोचा-समझा प्रयास है। मार्केटप्लेस से मिलने वाले कमीशन को स्कॉलरशिप के लिए आवंटित करके और वैकल्पिक पीयर-टू-पीयर योगदान का समर्थन करके, हम प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई रास्ते तैयार कर रहे हैं।”

प्रोजेक्ट ने बताया कि स्कॉलरशिप की पात्रता, आवंटन प्रक्रियाओं और भविष्य के प्लेटफॉर्म विकास से संबंधित अतिरिक्त जानकारी आगामी घोषणाओं में साझा की जाएगी।

पीनटबटरजेली (PJELLY) के बारे में

पीनटबटरजेली (PJELLY) एक कम्युनिटी-संचालित डिजिटल पहल है जो सामाजिक प्रभाव के उद्देश्यों, जैसे शिक्षा तक पहुंच और भूखमरी राहत (hunger relief) से जुड़े प्रयासों पर केंद्रित है। यह प्रोजेक्ट स्वतंत्र रूप से संचालित होता है और स्टैंडर्ड एफिलिएट कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदर्शित किसी भी थर्ड-पार्टी ब्रांड से संबद्ध या उनके द्वारा समर्थित नहीं है। पीनटबटरजेली, वेरिटास नेटवर्क होल्डिंग्स (Veritas Network Holdings) का एक ब्रांड और ट्रेडमार्क है।

महत्वपूर्ण सूचना: यह प्रेस विज्ञप्ति केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और यह कोई प्रस्ताव, आग्रह या निवेश की सिफारिश नहीं है।

भारत के लिए अस्वीकरण (DISCLAIMER FOR INDIA): “क्रिप्टो उत्पाद और एनएफटी (NFTs) अनियंत्रित हैं और अत्यधिक जोखिम भरे हो सकते हैं। ऐसे लेन-देन से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए कोई विनियामक सहारा (regulatory recourse) उपलब्ध नहीं हो सकता है।”

मीडिया संपर्क: PeanutButterJelly Communications ईमेल: information@peanutbutterjelly.io

मार्केटप्लेस: www.peanutbutterjelly.io/marketplace वेबसाइट: www.peanutbutterjelly.io X (Twitter): @PButterJelly टेलीग्राम: t.me/PBJelly_Official

स्रोत: वेरिटास नेटवर्क होल्डिंग्स

श्री सहर्ष बाजपाई ने पश्चिम रेलवे के प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी का पदभार ग्रहण किया

मुंबई। भारतीय रेल कार्मिक सेवा (IRPS) के 1999 बैच के वरिष्‍ठ अधिकारी श्री सहर्ष बाजपाई ने मंगलवार, 03 फ़रवरी 2026 को पश्चिम रेलवे के प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी का पदभार ग्रहण किया।

इससे पूर्व श्री बाजपाई भारतीय रेल में विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं कार्मिक संबंधी पदों पर कार्य कर चुके हैं। आपने उत्तर पूर्वोत्तर रेलवे, मध्य रेल तथा महाराष्ट्र मेट्रो में प्रमुख भूमिकाओं का निर्वहन किया है। आपके द्वारा संभाले गए उल्लेखनीय पदों में वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी, पुणे; अध्यक्ष, रेलवे भर्ती प्रकोष्‍ठ, मध्य रेल; उप मुख्य कार्मिक अधिकारी; अतिरिक्त मंडल रेल प्रबंधक, पुणे; महा मेट्रो में महाप्रबंधक (मानव संसाधन); तथा मध्य रेल में प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी शामिल हैं।

श्री सहर्ष बाजपाई ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर (MPA) की डिग्री प्राप्त की है। आपको मानव संसाधन प्रबंधन, कार्मिक प्रशासन तथा नीति निर्माण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। अपने करियर के दौरान आप मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) को सुदृढ़ करने, कार्मिक प्रशासन में सुधार लाने तथा कर्मचारी-केंद्रित शासन पद्धतियों को बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं।

फील्ड इकाइयों एवं मुख्यालय स्तर पर आपके व्यापक अनुभव ने आपको कार्मिक प्रबंधन के प्रति संतुलित एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने में सक्षम बनाया है। श्री बाजपाई ने INSEAD, सिंगापुर; ICLIF, मलेशिया; KOTI, दक्षिण कोरिया; तथा SWJTU, चीन जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी भाग लिया है।

सोशल मीडिया कंपनियों का छलावा, आपके ही सवालों और जानकारियों को आपके खिलाफ प्रयोग करने का षड़यंत्र

यह संपादकीय लेख E295: इंजीनियरिंग लीडर्स के लिए संचार नामक श्रृंखला का हिस्सा है। इस पाठ्यक्रम में, इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों को एक ऐसे विषय को प्रस्तुत करने की चुनौती दी गई थी जो उन्हें रुचिकर लगे और जिसे तकनीकी और गैर-तकनीकी पाठकों के व्यापक समूह तक पहुँचाना था। यह एक राय का लेख है, इसलिए यहाँ व्यक्त किए गए विचार न तो यूसी बर्कले और न ही फंग इंस्टीट्यूट के हैं और न ही उनके द्वारा समर्थित हैं।

आपने आखिरी बार कब किसी ऐसे व्यक्ति से बात की थी जिसके राजनीतिक विचार आपसे भिन्न हों? क्या उन बातचीत में किसी ने भी विवादित “तथ्य” का ज़िक्र किया? क्या आपने अपने किसी परिचित को अपने राजनीतिक विचारों पर और अधिक दृढ़ होते देखा है?

ब्राउन विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्रियों द्वारा 2020 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार , संयुक्त राज्य अमेरिका अन्य प्रमुख लोकतांत्रिक देशों की तुलना में अधिक तेज़ी से राजनीतिक रूप से ध्रुवीकृत हो रहा है। इसका एक कारण पिछले दशक में इंटरनेट और सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव है। हाल के वर्षों में, सोशल मीडिया साइटें उपयोगकर्ताओं की भागीदारी और ऐप पर बिताए गए समय को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किए गए अनुशंसा एल्गोरिदम का उपयोग करने लगी हैं। दुर्भाग्य से, इन एल्गोरिदम के कुछ दुष्प्रभावों में सूचनात्मक प्रतिध्वनि कक्ष, गलत सूचनाओं का प्रसार, या उपयोगकर्ताओं को अत्यधिक चरम, संभावित रूप से हानिकारक विचारधाराओं वाले समुदायों से परिचित कराना शामिल है। ये कारक पिछले दशक में मीडिया और सरकार के प्रति राष्ट्रीय अविश्वास में वृद्धि, घरेलू आतंकवाद में वृद्धि और अमेरिका के भीतर राजनीतिक ध्रुवीकरण में वृद्धि में योगदान करते हैं।

अधिकांश सोशल मीडिया साइटें आपके ब्राउज़िंग इतिहास से डेटा एकत्र करती हैं ताकि एल्गोरिदम के माध्यम से साइटों पर आपके अनुभव को अधिक व्यक्तिगत बनाया जा सके। वे अनुशंसा और पूर्वानुमान एल्गोरिदम का उपयोग करके उन पृष्ठों का सुझाव देते हैं जो आपको पसंद आ सकते हैं, यह इस आधार पर होता है कि क्या आप कोई विशिष्ट नेटफ्लिक्स शो देखते हैं, आप इंस्टाग्राम पर किसे फॉलो करते हैं, या आपने Google पर क्या खोजा है। हालांकि इस प्रकार के एल्गोरिदम उपयोगकर्ता अनुभव को अनुकूलित करने में मदद करते हैं, लेकिन इनके संचालन और आधुनिक सूचना उपभोग पर इनके प्रभावों को लेकर कई नैतिक बहसें हुई हैं।

प्यू रिसर्च सेंटर के एक लेख में , लेखक रेनी और एंडरसन ने इस बात पर गहराई से विचार किया है कि कैसे एल्गोरिदम ऐसे प्रतिध्वनि कक्ष बनाते हैं जिनके परिणामस्वरूप लोगों के बीच बड़े राजनीतिक विभाजन पैदा होते हैं, क्योंकि वे अलग-अलग राजनीतिक विचारों वाले लोगों से बातचीत करने में असमर्थ हो जाते हैं। लेखकों का कहना है कि इसका कारण यह है कि एल्गोरिदम “कॉर्पोरेट डेटा संग्राहकों द्वारा निर्मित फ़िल्टर बुलबुले और साइलो बनाते हैं; वे लोगों को विचारों और विश्वसनीय सूचनाओं की व्यापक श्रृंखला तक पहुँचने से रोकते हैं और आकस्मिक खोजों को समाप्त कर देते हैं।” हम न केवल एक राष्ट्र के रूप में राजनीतिक रूप से अधिक विभाजित हो रहे हैं, बल्कि कुछ लोग अपने विश्वासों में इतने कट्टरपंथी हो रहे हैं कि नफरत फैलाने वाले समूहों और घरेलू आतंकवाद में भाग लेने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है, इस हद तक कि घरेलू आतंकवाद के शोधकर्ता और अनुभवी सुरक्षा अधिकारी भी बेहद चिंतित हो गए हैं ।

एल्गोरिदम कॉर्पोरेट डेटा संग्राहकों द्वारा आकार दिए गए फ़िल्टर बुलबुले और साइलो बनाते हैं; वे लोगों को विचारों और विश्वसनीय जानकारी की एक विस्तृत श्रृंखला के संपर्क में आने से रोकते हैं और आकस्मिक खोजों को समाप्त करते हैं।

TikTok ऐप पर किए गए एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि कैसे कोई उपयोगकर्ता बहुत कम समय में और सीमित मात्रा में सामग्री के आधार पर कट्टरपंथी बन सकता है। इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम ट्रांसफोबिक सामग्री के साथ जुड़ने का प्रभाव था। जब कोई उपयोगकर्ता केवल ट्रांसफोबिक सामग्री के साथ इंटरैक्ट करने लगा, तो TikTok एल्गोरिदम ने तेजी से दक्षिणपंथी वीडियो अनुशंसाओं की संख्या और विविधता बढ़ा दी। टीम ने अनुशंसा एल्गोरिदम के आधार पर होमपेज पर मौजूद “फॉर-यू पेज” में दिखाए गए लगभग 450 वीडियो का विश्लेषण किया। हालांकि उन्होंने केवल ट्रांसफोबिक सामग्री के साथ इंटरैक्ट किया, फिर भी उन्होंने पाया कि “फॉर-यू पेज” तेजी से स्त्री द्वेष, नस्लवाद, श्वेत वर्चस्ववादी विश्वास, यहूदी-विरोध, षड्यंत्र, घृणा के प्रतीक और अन्य आम तौर पर घृणित या हिंसक वीडियो से भर गया। इन TikTok वीडियो की औसत लंबाई 20 सेकंड है, जिसका अर्थ है कि 450 वीडियो देखने के बाद उपयोगकर्ता ने ऐप पर लगभग दो घंटे बिताए हैं। सैद्धांतिक रूप से, कोई उपयोगकर्ता तीन घंटे से भी कम समय में राजनीतिक रूप से कट्टरपंथी बन सकता है। विडंबना यह है कि ट्रांसफोबिक सामग्री को साइट पर प्रतिबंधित किया जाना चाहिए क्योंकि यह टिकटॉक के व्यवहार संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है।

मेटा, जो न केवल अपने मूल नाम वाले ऐप फेसबुक बल्कि इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और कई अन्य ऐप्स की भी मालिक कंपनी है, सोशल मीडिया के क्षेत्र में व्यापक पहुंच रखती है। पिछले पांच वर्षों में, मेटा को अपने एल्गोरिदम, गोपनीयता और उपभोक्ता डेटा के उपयोग से संबंधित कई अन्य आरोपों का सामना करना पड़ा है। 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के समय के आसपास, मेटा (उस समय फेसबुक) ने एक अध्ययन किया जिसमें पाया गया कि उसके एल्गोरिदम चरमपंथी सामग्री के उपयोग में भारी वृद्धि के लिए जिम्मेदार थे। विशेष रूप से, अनुशंसा टूल के कारण सभी चरमपंथी समूहों में शामिल होने वालों में से 64% शामिल हुए। इनमें से अधिकांश चरमपंथी समूहों में शामिल होने वाले “ग्रुप्स यू शुड जॉइन” फीचर और “डिस्कवर” पेज के एल्गोरिदम का परिणाम थे। फेसबुक की अनुशंसा प्रणालियों और चरमपंथी समूहों में वृद्धि के बीच का संबंध हमारे वर्तमान राजनीतिक विभाजन के लिए एक गंभीर मुद्दा है।

अक्टूबर 2021 में, मेटा के कई कर्मचारियों ने मुखबिर बनकर कंपनी के भीतर मौजूद कई गंभीर नैतिक समस्याओं का खुलासा करने वाले आंतरिक दस्तावेज़ जारी किए। “द फेसबुक पेपर्स” के नाम से जाने जाने वाले इन दस्तावेज़ों से पता चलता है कि सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी अपने प्लेटफॉर्म और एल्गोरिदम के कारण उत्पन्न वैश्विक मुद्दों पर किस प्रकार बारीकी से नज़र रख रही थी। इसके अलावा, इन दस्तावेज़ों में इस बात का भी प्रमाण शामिल था कि चुनाव समाप्त होते ही कंपनी ने 2020 में गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए लागू किए गए उपायों को हटा दिया था। यह कंपनी अपने एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली, डेटा माइनिंग की पहुंच और अपनी लापरवाही (चाहे अनजाने में हो या जानबूझकर) के प्रभाव से भली-भांति परिचित है, फिर भी वे इस तथ्य को शायद ही कभी स्वीकार करते हैं कि उनके प्लेटफॉर्म बड़ी मात्रा में गलत सूचनाओं के प्रसार को बढ़ावा देते हैं। इसके बजाय, वे समाज को लाभ पहुंचाने और कंपनी के लक्ष्यों को लाभ पहुंचाने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं; अक्सर वे कंपनी के लक्ष्यों को ही चुनते हैं।

मैंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों पर चरमपंथी राजनीतिक विचारों और समूहों के पनपने और फैलने के तरीकों के बारे में बात की है, जिसका एक कारण उनके अनुशंसा और पूर्वानुमान एल्गोरिदम का डिज़ाइन है। इन प्लेटफॉर्मों को चलाने वाली कंपनियां अपनी जानबूझकर की गई लापरवाही के परिणामों से पूरी तरह अवगत हैं, फिर भी उन्होंने इन ऐप्स और एल्गोरिदम के डिज़ाइन में सुधार के लिए बहुत कम प्रयास किए हैं। चूंकि सोशल मीडिया रोजमर्रा की जिंदगी के कई पहलुओं से गहराई से जुड़ गया है, इसलिए सूचना के स्रोत के रूप में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का उपयोग पूरी तरह से बंद करना लगभग असंभव होगा। इसके बजाय, इन कंपनियों द्वारा हमारे डेटा और इन साइटों पर प्रसारित होने वाली जानकारी को संभालने के तरीके के बारे में अधिक सार्वजनिक जागरूकता और पारदर्शिता होनी चाहिए, और जनता को नुकसान से बचाने के लिए अधिक कानून बनाए जाने चाहिए। इस बीच, उपयोगकर्ताओं को अपने व्यक्तिगत जीवन और समाज में सोशल मीडिया के कई संभावित खतरनाक प्रभावों के बारे में जागरूक होना चाहिए।

इन कंपनियों द्वारा हमारे डेटा को संभालने के तरीके, इन साइटों पर प्रसारित होने वाली जानकारी और जनता को नुकसान से बचाने के लिए और अधिक कानून बनाने के बारे में अधिक सार्वजनिक जागरूकता और पारदर्शिता होनी चाहिए।

साभार- https://funginstitute.berkeley.edu/ से

‘संघ के 100 वर्षों की यात्राः मुंबई में 7 व 8 फरवरी ‘नए क्षितिज’ कार्यक्रम में डॉ. मोहन भागवत संबोधित करेंगे

मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर ने पत्रकार वार्ता में “संघ की 100 वर्षों की यात्रा: नया क्षितिज” शीर्षक से होने वाले दो दिवसीय कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 7 और 8 फरवरी 2026 को नेहरू सेंटर ऑडिटोरियम, वर्ली, मुंबई में सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत जी की उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा।

आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत इससे पूर्व दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता में इसी प्रकार की व्याख्यान श्रृंखलाएं सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी हैं। मुंबई का यह कार्यक्रम देशव्यापी इस व्याख्यान श्रृंखला का समापन कार्यक्रम होगा। श्री आंबेकर ने बताया कि पूर्व आयोजनों में प्राप्त जनसहभागिता और प्रतिक्रिया अत्यंत उत्साहवर्धक रही है।

मुंबई कार्यक्रम में दो दिनों में कुल चार सत्र आयोजित किए जाएंगे। शुक्रवार, 7 फरवरी को दो सत्र अपराह्न 3:30 बजे से सायं 7:30 बजे तक होंगे, जबकि शनिवार, 8 फरवरी को दो सत्र प्रातः 9:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित किए जाएंगे।

सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत जी मुख्य उद्बोधन देंगे। दूसरे दिन एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित होगा, जिसमें आमंत्रित प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत प्रश्नों एवं विचारों पर वे अपने विचार व्यक्त करेंगे।

श्री आंबेकर ने बताया कि संघ “पंच परिवर्तन” की अवधारणा पर विशेष बल दे रहा है— परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, नागरिक शिष्टाचार, स्वबोध तथा पर्यावरण संरक्षण। उन्होंने बताया कि परम पूजनीय सरसंघचालक जी इन पांच आयामों पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे तथा राष्ट्रीय और सामाजिक महत्व के समसामयिक विषयों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।

उन्होंने बताया कि संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता में इसी प्रकार की व्याख्यानमालाएं पहले ही आयोजित हो चुकी हैं, और मुंबई में होने वाली यह व्याख्यानमाला इस श्रृंखला की अंतिम कड़ी होगी। पिछली सभी व्याख्यानमालाओं को मिला गया प्रतिसाद अत्यंत उत्साहवर्धक रहा है। वरळी स्थित नेहरू सेंटर सभागार में ७ और ८ फरवरी को कुल ४ सत्रों का आयोजन किया गया है। पहले दिन दोपहर ३:३० से शाम ७:३० बजे तक २ सत्र होंगे, जबकि दूसरे दिन सुबह ९:३० से दोपहर १:३० बजे तक २ सत्र आयोजित होंगे। पहले दिन परम पूज्यनीय सरसंघचालक का उद्बोधन होगा, जबकि दूसरे दिन प्रश्नोत्तर सत्र होगा। इस सत्र में परम पूज्यनीय सरसंघचालक उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों की शंकाओं का निरसन करेंगे।

अपने उद्बोधन में परम पूज्यनीय सरसंघचालक विशेष रूप से पंच परिवर्तन की अवधारणा पर प्रकाश डालेंगे। साथ ही स्थानीय स्तर पर स्वयंसेवकों द्वारा किए जा रहे कार्य को भी उपस्थित जनों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

निमंत्रित व्यक्तियों को कुल १० श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें अर्थव्यवस्था, न्यायपालिका, प्रशासन, कला, खेल, धर्म, राजनीति, कॉर्पोरेट क्षेत्र, सिनेमा तथा अन्य क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। इस कार्यक्रम की तैयारियां पिछले चार महीनों से चल रही हैं। मुंबई और आसपास के क्षेत्रों से लगभग १२०० गणमान्य व्यक्तियों को निमंत्रित किया गया है, जिनमें से ८०० से ९०० के बीच उपस्थित रहने की संभावना है।

श्री सुनीलजी आंबेकर ने मुंबई में ९० वर्ष पहले शुरू हुए संघ कार्य की यात्रा का संक्षिप्त परिचय दिया। साथ ही देशव्यापी चल रहे गृह संपर्क अभियान की जानकारी भी दी। महाराष्ट्र में अक्टूबर माह से गृह संपर्क अभियान प्रारंभ हुआ है। इसी प्रकार मंडल स्तर पर हिंदू सम्मेलनों तथा सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन किया जा रहा है।

पत्रकार वार्ता में कोंकण प्रांत के संघचालक श्री अर्जुन चांदेकर भी उपस्थित थे।

विस्तृत जानकारी के लिए संपर्क करें:

आकाशजी शाह: +९१ ९७७३६ १६२७७
संदीपजी पाटील: +९१ ९७४३२ ३२६१३

यह विकासमुखी बजट हैः डॉ. अश्वनी महाजन

स्वदेशी जागरण मंच, 1 फरवरी, 2026 को वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 का स्वागत करता है। इसमें कोई शक नहीं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ की वजह से वैश्विक चुनौतियों और अनिश्चित वैश्विक बाज़ार के बावजूद; और बड़ी आर्थिक ताकतों द्वारा ज़रूरी मिनरल, सेमीकंडक्टर और कई दूसरी चीज़ों की सप्लाई सहित ग्लोबल वैल्यू चेन को हथियार बनाने की कोशिशों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था काफी अच्छी हालत में है, और लगातार चौथे साल दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। गिरता रुपया, लगातार व्यापार और भुगतान शेष घाटा, और बढ़ते सार्वजनिक निवेश के साथ निजी निवेश बढ़ने की संभावना के बारे में अनिश्चितता ने वित्त मंत्री के लिए कई चिंताएँ खड़ी कीं हैं, जिनमें से कुछ को आर्थिक सर्वेक्षण में भी बताया गया है। ऐसा लगता है कि बजट में नीति की बड़ी दिशा साफ़ है, कि भारत न सिर्फ़ खुद को वैश्विक उथल-पुथल से बचाने की कोशिश करेगा, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग को मज़बूत करके अर्थव्यवस्था को आगे भी ले जाएगा, सिर्फ़ मज़बूती के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक अहम खिलाड़ी बनने के लिए भी।

सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ मटीरियल, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट, केमिकल और कैपिटल गुड्स समेत सात रणनीतिक क्षेत्रों को समर्थन और मज़बूत करने के बजट प्रस्ताव एक अच्छा कदम है, जिसका मकसद आत्मनिर्भर भारत बनाना है। लंबे समय से, भारत इन सामानों की सप्लाई के लिए दूसरे देशों, खासकर चीन पर निर्भर रहा है। बजट में इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की गई है, और इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। इससे न सिर्फ़ चीन पर हमारी निर्भरता कम होगी, बल्कि अर्थव्यवस्था को बड़ी ताकतों द्वारा शोषण से भी बचाया जा सकेगा, जो ग्लोबल वैल्यू चेन को हथियार बनाने की कोशिश कर रही हैं। सिर्फ़ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया रेयर अर्थ मटीरियल की आपूर्ति को लेकर चीन के नखरे झेल रही है। ऐसा नहीं है कि भारत में रेयर अर्थ मटीरियल की कमी है, बल्कि हमारे पास इन ज़रूरी मिनरल के खनन, प्रसंस्करण और मैन्युफैक्चरिंग में क्षमता की कमी है। बजट में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिजों के धनी राज्यों में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने और उनकी खनन, प्रसंस्करण, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने में मदद का प्रावधान एक अच्छा कदम है।

देश में कंटेनरों की भारी कमी और चीन पर भारी निर्भरता को देखते हुए, बड़े बजट के साथ दुनिया भर में मुकाबला करने वाला कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने की घोषणा एक बड़ा कदम है।

मैन्युफैक्चरिंग को एक और बड़ा बढ़ावा बायो-फार्मास्युटिकल्स में मिला है। यह ध्यान देने वाली बात है कि बायोफार्मास्युटिकल्स, जिसमें बायोसिमिलर भी शामिल हैं, कैंसर, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी की बीमारी और कई दूसरी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों (एनसीडी) के इलाज में क्रांति ला सकते हैं, जिससे न केवल बीमारी का बोझ कम हो सकता है, बल्कि स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च भी काफी कम हो सकता है।

श्रम प्रधान टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक व्यापक प्लान बजट में एक बड़ा कदम है। इसके अलावा, ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज’ पहल की शुरुआत से खादी और हैंडलूम को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, सूक्ष्म लघु लघु और मध्यम उद्यमों(एमएसएमई ) को समर्थन करने के लिए 10,000 रुपये का आवंटन भी एक स्वागत योग्य कदम है।

बजट में पूंजीगत ख़र्च (कैपेक्स) को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है, जिसमें प्रभावी कैपेक्स जीडीपी का 4.4 प्रतिशत होगा, जो न सिर्फ अब तक का सबसे ज़्यादा है, बल्कि राजकोषीय घाटे से भी ज़्यादा है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, और हम कह सकते हैं कि सरकार उपभोग के लिए नहीं, बल्कि असल में इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी पूंजीगत परिसंपत्तियाँ बनाने के लिए उधार ले रही है।

नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और 20 नए अब राष्ट्रीय जलमार्ग हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी बढ़ावा दे सकते हैं।

प्रस्तावों का एक और ज़रूरी हिस्सा विकसित भारत के लिए पेशेवर तैयार करना है। स्वास्थ्य क्षेत्र में, अगले पांच सालों में 100,000 सहायक स्वास्थ्य पेशेवर, 1.5 लाख केयरगिवर्स, और 20,000 वेटेरिनरी पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये कुछ ऐसी पहलें हैं, जो कौशल के अंतराल को दूर करने के लिए ज़रूरी हैं, और हमारे युवाओं की रोज़गार प्राप्त करने की क्षमता को बेहतर बनाने में बहुत मदद कर सकती हैं।

किसानों की आमदनी बढ़ाने के मकसद से, बजट में मत्स्ययन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास, तटीय इलाकों में फिशरीज़ वैल्यू चेन को मज़बूत करना, स्टार्टअप्स और महिला ग्रुप्स को फिश फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स (एफपीओ) से जोड़ना, क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी प्रोग्राम लागू करना, और लाइवस्टॉक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स जैसे उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र को समर्थन करना शामिल है। लाइवस्टॉक उद्यमों को आधुनिक बनाने और डेयरी और पोल्ट्री के लिए एकीकृत मूल्य शृंखला विकसित करने की भी योजना है।

इसके अलावा, तटीय इलाकों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी फसलों के साथ उच्च मूल्य कृषि को बढ़ावा दिया जाएगा। पहाड़ी इलाकों में बादाम, अखरोट और पाइन नट्स जैसे उत्पाद भी गांव की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

हमने देखा है कि 7.4 प्रतिशत की ग्रोथ रेट, 2 प्रतिशत से कम महंगाई और लगातार घटता राजकोषीय घाटा, यह दिखाता है कि अर्थव्यवस्था काफ़ी मज़बूत स्थिति में है। हालांकि, गिरता रुपया, वैश्विक उथल-पुथल, टैरिफ और वैल्यू चेन के हथियार बनने जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं, जिन्हें केंद्रीय बजट 2026-27 में सुलझाने की कोशिश की गई है। बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 प्रतिशत (संशोधित अनुमान) से घटाकर 4.3 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इससे महंगाई को नियंत्रण में रहने का एक और कारण मिलता है।

कुल मिलाकर, यह बजट मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोज़गार में बढ़ोतरी को बढ़ावा देता हुआ, कौशल अंतराल को भरता हुआ लगता है। यह गांवों और किसानों को मज़बूत बनाते हुए महंगाई को कंट्रोल करने और उच्च मूल्य कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के ज़रिए आमदनी बढ़ाने की भी कोशिश करता है।

डॉ अश्वनी महाजन
राष्ट्रीय सह संयोजक
स्वदेशी जागरण मंच
धर्मक्षेत्र, सेक्टर-8, आर.के.पुरम,
नई दिल्ली।
वेब: www.swadeshionline.in

श्री हरि शंकर वर्मा ने रेलवे बोर्ड के सदस्य (ऑपरेशंस एवं व्यवसाय विकास) का कार्यभार संभाला

श्री हरि शंकर वर्मा, 1987 बैच के आईआरटीएस अधिकारी, ने रेलवे बोर्ड के सदस्य (ऑपरेशंस एवं व्यवसाय विकास) और भारत सरकार के पदेन सचिव का पदभार संभाल लिया है। इस पद को संभालने से पहले वे रेलवे बोर्ड में महानिदेशक (सुरक्षा) के रूप में कार्यरत थे।

अपने शानदार करियर के दौरान श्री वर्मा ने भारतीय रेलवे में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है, जिनमें शामिल हैं : अपर मंडल रेलवे प्रबंधक, मध्य रेलवे, मुंबई; मंडल रेलवे प्रबंधक, सलेम डिविजन, दक्षिण रेलवे; मुख्य यात्री यातायात प्रबंधक, मध्य रेलवे, मुंबई; प्रधान मुख्य ऑपरेशंस मैनेजर, हुबली, दक्षिण-पश्चिम रेलवे और महानिदेशक, भारतीय रेलवे परिवहन प्रबंधन संस्थान, लखनऊ। इन सभी पदों पर रहते हुए श्री वर्मा ने कई रिकॉर्ड/उपलब्धियां हासिल कीं।

भारतीय रेलवे के महानिदेशक (सुरक्षा) के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय रेलवे के सुरक्षा रिकॉर्ड को नई ऊंचाइयों पर ले जाया गया। प्रक्रिया सुधार पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही बड़ी दुर्घटनाओं की संख्या में भारी कमी आई है।

श्री वर्मा को दो बार माननीय रेल मंत्री पुरस्कार और महाप्रबंधक स्तर पर कई पुरस्कार मिले हैं। उन्होंने सिंगापुर, मलेशिया और इटली से प्रबंधन का प्रशिक्षण प्राप्त किया है और उन्हें रेलवे यातायात एवं प्रबंधन के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है।

वर्ष 2026-2027 के केंद्रीय बजट की मुख्‍य बातें

भाग – 1

केंद्रीय वित्‍त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन ने आज संसद में वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट प्रस्‍तुत किया। बजट की मुख्‍य बातें इस प्रकार हैं:-

कर्तव्‍य भवन में तैयार किया गया पहला बजट तीन कर्तव्‍यों से प्रेरित है:-

  1. पहला कर्तव्‍य – उत्‍पादकता और प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाने  तथा वैश्विक उथल-पुथल के परिदृश्‍य में लचीलापन लाकर आर्थिक विकास को तेज करना और उसकी गति बनाए रखना
  2. दूसरा कर्तव्‍य- भारत की समृद्धि के पथ में सशक्‍त साझेदार बनाने के लिए लोगों की आकांक्षाएं पूरी करना और उनकी क्षमता बढ़ाना।
  3. तीसरा कर्तव्‍य – सरकार की सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुकूल- यह सुनिश्चित करना कि सार्थक भागीदारी के लिए प्रत्‍येक परिवार, समुदाय और क्षेत्र की संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक पहुंच उपलब्‍ध हो।
  4. बजट अनुमान
  5. गैर ऋण प्राप्तियां  और कुल व्‍यय क्रमश: 36.5 लाख करोड और 53.5 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है। केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है।
  6. सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड रुपए और दिनांकित प्रतिभूतियों से शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है।
  • गैर ऋण प्राप्तियों का संशोधित अनुमान 34 लाख करोड रुपए है जिसमें से केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियाँ 26.7 लाख करोड रुपए हैं।
  • कुल व्‍यय का संशोधित अनुमान 49.6 लाख करोड रुपए है जिसका पूंजी व्‍यय करीब 26.1 लाख करोड रुपए है।
  1. बजट अनुमान 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
  2. वर्ष 2025-26  के बजट में संशोधित राजकोषीय घाटा 2025-26 के बजट अनुमान जीडीपी के 4.4 प्रतिशत के समान है।
  3. ऋण से जीडीपी अनुपात संशोधित अनुमान 2025-26 में जीडीपी के 56.1 प्रतिशत की तुलना में बजट अनुमान 2026-27 में जीडीपी का 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
  4. पहला कर्तव्‍य– आर्थिक विकास को तेज करना और बनाए रखना तथा छह हस्‍तक्षेपों का प्रस्‍ताव है
  • सात रणनीतिक और फ्रंटि‍यर क्षेत्रों में विनिर्माण
  1. बायोफार्मा शक्ति (ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के जरिए स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल को बेहतर करने की रणनीति) की घोषणा। भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केन्‍द्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्‍य से अगले पांच वर्ष के लिए दस हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ बायोफार्मा शक्ति का प्रस्‍ताव।
  • तीन नए राष्‍ट्रीय फार्मास्‍युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्‍थानों (एन.आई.पी.ई.आर.) के निर्माण तथा सात मौजूदा संस्‍थानों के उन्‍नयन के लिए बायोफार्मा केन्द्रित नेटवर्क।
  • एक हजार से अधिक मान्‍यता प्राप्‍त इंडिया क्लिनिकल ट्रायल्‍स स्‍थलों का नेटवर्क बनाया जाएगा।
  1. उपकरण और सामग्री बनाने, फुलस्‍टेक इंडिया आई.पी. डिजाइन करने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए इंडिया सेमीकंडक्‍टर मिशन 2.0 शुरू किया जाएगा।
  2. अप्रैल 2025 में आरंभ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स कलपुर्जे विनिर्माण योजना को गति देने के लिए बजट बढ़ाकर चालीस हजार करोड़ रुपये करने का प्रस्‍ताव।
  3. खनन, प्रसंस्‍करण, अनुसंधान और विनिर्माण को प्रोत्‍साहन देने के लिए समर्पित दुर्लभ धातु गलियारों की स्‍थापना के उद्देश्‍य से खनिज समृद्ध ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को सहायता देने का प्रस्‍ताव।
  4. घरेलू रसायन उत्‍पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए कलस्‍टर आधारित बनाओ और चलाओ मॉडल के आधार पर तीन समर्पित कैमिकल पार्क स्‍थापित करने की योजना लाई जाएगी।
  5. पूंजी सामान क्षमता मजबूत करना
  6.  
  • डिजिटल रूप से सक्षम ऑटोमेटेड सर्विस ब्‍यूरो के रूप में दो स्‍थानों सी.पी.एस.ई. द्वारा हाईटेक टूल रूप स्‍थापित किए जाएंगे, जो उच्‍च गुणवत्‍ता के कलपुर्जों का बड़े पैमाने पर और कम लागत से स्‍थानीय स्‍तर पर डिजाइन, परीक्षण और विनिर्माण करेंगे।
  • उच्‍च मूल्‍य और प्रौद्योगिकी के लिहाज से उन्‍नत सी.आई.ई. के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए निर्माण संवर्धन और अवसंरचना उपकरण योजना(सी.आई.ई.) शुरू की जाएगी।
  • पांच वर्ष की अवधि में दस हजार करोड़ रुपये के बजट आवंटन के साथ कंटेनर विनिर्माण योजना लाने प्रस्‍ताव।
  1. वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम की घोषणा
  1. रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर, मानवनिर्मित फाइबर और नए जमाने के फाइबर में आत्‍मनिर्भरता के लिए राष्‍ट्रीय फाइबर योजना।
  2. मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्‍नयन और साझा परीक्षण तथा प्रमाणन केन्‍द्रों के लिए पूंजी सहायता के साथ आधुनिक पारंपरिक क्‍लस्‍टरों के लिए वस्‍त्र विस्‍तार और रोजगार योजना।
  1. चैलेंज मोड में मेगा टेक्‍सटाइल पार्क स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव
  2. खादी, हथकरघा और हस्‍तशिल्‍प की मजबूती के लिए महात्‍मा गांधी ग्राम स्‍वराज पहल शुरू करने का प्रस्‍ताव। इससे देश के बुनकरों, ग्राम उद्योगों, एक जिला-एक उत्‍पाद पहल और ग्रामीण युवाओं को लाभ होगा।
  3. इससे वैश्विक बाजार संपर्क, ब्रांडिंग करने में मदद मिलेगी और प्रशिक्षण, कौशल, गुणवत्‍ता और उत्‍पादन को समर्थन मिलेगा।

 

  1. लीगेसी औद्योगिक समूहों के पुनरुद्धार की योजना
  • अवसंरचना और प्रौद्योगिकी उन्‍नयन के जरिए लागत स्‍पर्धा और दक्षता में सुधार के लिए दो सौ लीगेसी औद्योगिक समूहों के पुनरुद्धार की योजना लाने का प्रस्‍ताव।
  1. चैंपियन एस.एम.ई. बनाना और सूक्ष्‍म उद्यमियों को समर्थन
  • एम.एस.एम.ई. को चैंपियनों के रूप में विकास करने में सहायता के लिए त्रिस्‍तरीय दृष्टिकोण- दस हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ एस.एम.ई. ग्रोथ फंड शुरू करने का प्रस्‍ताव।
  • दो हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ वर्ष 2021 में बनाए गए आत्‍मनिर्भर भारत फंड को समर्थन जारी रहेगा।
  • विशेष रूप से टीयर टू और टीयर थ्री शहरों में कॉर्पोरेट मित्र कार्डर विकसित करने के लिए आई.सी.ए.आई., आई.सी.एस.आई, आई.सी.एम.ए.आई. जैसे व्‍यवसायिक शिक्षा संस्‍थानों को सुविधा उपलब्‍ध कराई जाएगी।
  1. अवसंरचना को ठोस प्रोत्‍साहन
  • वित्‍त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजी व्‍यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा।
  • ऋणदाताओं को आंशिक ऋण गारंटी उपलब्‍ध कराने के लिए अवसंरचना जोखिम गारंटी फंड स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव।
  • समर्पित आर.ई.आई.टी. स्थापित करने के जरिए सी.पी.एस.ई. की महत्‍वपूर्ण रियल एस्‍टेट परिसंपत्तियों के पुनर्चक्रण की प्रक्रिया तेज करने का प्रस्‍ताव।
  • पूर्वी भारत में डानकूनी से पश्चिमी भारत के सूरत को जोड़ने के लिए नए समर्पित माल गलियारे बनाए जाएंगे।
  • जलचर और अंगुल जैसे खनिज समृद्ध और कलिंग नगर जैसे औद्योगिक केंद्रों को जोडने के लिए ओडिशा में एनडब्‍ल्‍यू-5 से शुरुआत के साथ अगले पांच वर्ष में 20 नए राष्‍ट्रीय जलमार्ग चालू किए जाएंगे।
  • अपेक्षित श्रम शक्ति के विकास के लिए क्षेत्रीय उत्‍कृष्‍टता केंद्रों के रूप में प्रशिक्षण संस्‍थान स्‍थापित किए जाएंगे।
  1. इनलैंड जलमार्गों और तटीय पोत परिहवन की हिस्‍सेदारी 6 प्रतिशत से बढाकर वर्ष 2047 तक 12 प्रतिशत करने के लिए तटीय कार्गो प्रोमोशन स्‍कीम आरंभ की जाएगी।
  • सी-प्‍लेन के स्‍वदेशी निर्माण के लिए प्रोत्‍साहन दिया जाएगा और लास्‍ट माइल तथा दूरदराज क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाया जाएगा और पर्यटन को प्रोत्‍साहन दिया जाएगा।
  • संचालन को समर्थन उपलब्‍ध कराने के लिए सी-प्‍लेन वी.जी.एफ. स्‍कीम शुरू की जाएगी।
  1.  
  2. दीर्घावधि ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्‍चत करना।
  • कार्बन टैक्‍चर उपयोग और भंडारण (सी.सी.यू.एस.) प्रौद्योगिकियों के लिए अगले पांच वर्ष की अवधि के लिए 20 हजार करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा।
  1. शहर आर्थिक क्षेत्रों का विकास
  • शहर आर्थिक क्षेत्र (सी.ई.आर.) के लिए पांच वर्षों की अवधि‍ के लिए पांच हजार करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा।
  • पर्यावरण अनुकूल टिकाउ यात्री प्रणाली को प्रोत्‍साहन देने के लिए मुम्‍बई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बैंगलुरू, हैदराबाद-चेन्‍नई, चेन्‍नई-बैंगलुरू, दिल्‍ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलिगुडी़ के बीच सात हाई स्‍पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
  • वित्‍तीय स्‍थि‍रता, समावेश और उपभोक्‍ता सुरक्षा के उपाय करते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण के साथ कदम-ताल मिलाते हुए बैंकिंग क्षेत्र की व्‍यापक समीक्षा के उद्देश्‍य से ‘’विकसित भारत के लिए बैंकिंग’’ पर उच्‍च-स्‍तरीय समिति गठित करने का प्रस्‍ताव।
  • पॉवर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम के पुनर्गठन का प्रस्‍ताव।
  • भारत की उभरती आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुसार विदेशी निवेश के लिए अधिक समकालीन और उपयोक्‍ता अनुकूल रूपरेखा के लिए विदेश मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण लिखत) नियमावली की व्‍यापक समीक्षा का प्रस्‍ताव।
  • बड़े शहरों द्वारा उच्‍च मूल्‍य के म्‍यूनिसिपल बॉण्‍ड जारी करने को प्रोत्‍साहन करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का सिंगल बॉण्‍ड जारी करने पर सौ करोड़ रुपये का प्रोत्‍साहन देने का प्रस्‍ताव।
  1.  
  2. दूसरा कर्तव्‍य- लोगों की आकांक्षाएं पूरी करना और क्षमता बढ़ाना
  • विकसित भारत के मुख्य संचालक के रूप में सेवा क्षेत्र पर ध्‍यान केन्द्रित करने के लिए उपायों की सिफारिश करने हेतु उच्‍चाधिकार प्राप्‍त ‘शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम’ स्‍थायी समिति के गठन का प्रस्‍ताव। यह फैसला भारत को वर्ष 2047 तक दस प्रतिशत की वैश्विक हिस्‍सेदारी के साथ अग्रणी बनाएगा।
  1. विकसित भारत के लिए पेशेवर लोग तैयार करने
  • संबद्ध स्‍वास्‍थ्‍य सेवा पेशवरों (ए.एच.पी.) के लिए मौजूदा संस्‍थानों का उन्‍नयन किया जाएगा  और निजी तथा सरकारी क्षेत्रों में नए ए.एच.पी. संस्‍थानों की स्‍थापना की जाएगी।
  • अगले पांच वर्ष में एक लाख ए.एच.पी. जोड़े जाएंगे।
  • वृद्धों की चिकित्‍सा और संबद्ध देखभाल सेवाओं को शामिल करते हुए मजबूत देखभाल सेवा परिवेश बनाया जाएगा। अगले कुछ वर्षों में डेढ़ लाख देखभाल सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
  1. आयुष
  2. तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्‍थान स्‍थापित किए जाएंगे
  • प्रमाणन परिवेश के उच्‍च मानकों के लिए आयुष फार्मेसी और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्‍नयन करने तथा अधिक कुशल कार्मिक उपलब्‍ध कराने और पारंपरिक दवाओं के लिए साक्ष्‍य आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और जागरुकता को बढ़ावा देने के लिए जामनगर में डब्‍ल्‍यू.एच.ओ. वैश्विक पारंपरिक चिकित्‍सा केन्‍द्र के उन्‍नयन का प्रस्‍ताव।
  1. पशुपालन
  • सरकार 20 हजार से अधिक पशु डॉक्‍टरों की उपलब्‍धता करेगी।
  • नि‍जी क्षेत्र में पशु रोग विशेषज्ञ और पैरा पशु शल्‍य महाविद्यालय, पशु अस्‍पताल, नैदानिक प्रयोगशालाओं और प्रजनन सुविधाओं के लिए ऋण संबद्ध पूंजी सब्सिडी सहायता योजना शुरू करने का प्रस्‍ताव।
  1. ऑरेंज इकोनॉमी
  • इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्‍नोलॉजी, मुम्‍बई को 15 हजार माध्‍यमिक विद्यालयों और पांच सौ महाविद्यालयों में ए.वी.जी.सी. कंटेंट क्रिएटर लैब (सी.सी.एल.) स्‍थापित करने में सहायता प्रदान करने का प्रस्‍ताव।
  1. शिक्षा
  • सरकार बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरीडोर के आसपास चुनौती मार्ग के माध्‍यम से पांच विश्‍वविद्यालय टाउनशिप का ‍निर्माण करने में राज्‍यों की सहायता करेगी।
  • वी.जी.एफ./पूंजीगत सहायता के माध्‍यम से प्रत्‍येक जिले में एक महिला छात्रावास की स्‍थापना की जाएगी।
  1. पर्यटन
  • मौजूदा राष्‍ट्रीय होटल प्रबंधन और केटरिंग प्रौद्योगिकी परिषद का उन्‍नयन करते हुए राष्‍ट्रीय आतिथ्‍य संस्‍थान की स्‍थापना का प्रस्‍ताव।
  • आई.आई.एम. के सहयोग से हाईब्रिड मोड में मानकीकृत, उच्‍च गुणवत्‍ता वाले 12 सप्‍ताह के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के जरिए 20 पर्यटन स्‍थलों में 10 हजार गाइडों के कौशल उन्‍नयन के लिए प्रायोगिक योजना शुरू की जाएगी।
  • सांस्कृतिक, आध्‍यात्मिक और विरासत महत्‍व वाले सभी स्‍थानों के डिजिटल दस्‍तावेज तैयार करने के लिए नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड की स्‍थापना की जाएगी।
  1.  
  2.  
  3.  
  4. विरासत और संस्‍कृति पर्यटन
  • लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, अदिचनाल्‍लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस जैसे 15 पुरातात्विक स्‍थलों को जीवंत और अनुभवजन्‍य सांस्‍कृतिक गंतव्‍य के रूप में विकसित करने का प्रस्‍ताव।
  1. खेल
  • अगले दशक में खेल-कूद के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्‍ताव।
  1. तीसरा कर्तव्‍य- सबका साथ- सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है और इसके लिए निम्‍नलिखित चार क्षेत्रों में लक्षित प्रयास करने की आवश्‍यकता है:-
  2. किसानों की आय बढ़ाना
  • किसानों की आय बढ़ाने के लिए मत्‍स्‍य पालन, पांच सौ जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास, पशुपालन,  उच्‍च मूल्‍य वाली कृषि को प्रोत्‍साहन दिया जाएगा।
  1. उच्‍च मूल्‍य कृषि
  2. सरकार उच्‍च मूल्‍य वाली फसलों की खेती समर्थन देगी जैसे:-
  • तटवर्ती इलाकों में नारियल, चंदन, कोको, काजू जैसे उच्‍च मूल्‍य वाली फसलों को सहायता प्रदान की जाएगी।
  • नारियल उत्‍पादन में प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाने के लिए नारियल संवर्धन योजना का प्रस्‍ताव।
  • पूर्वोत्‍तर में अगर के पेड़ों और पर्वतीय क्षेत्रो में बादाम, अखरोट और खुमानी जैसे गिरीदार फलों को प्रोत्‍साहन दिया जाएगा।
  • वर्ष 2030 तक भारतीय काजू और कोको को प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में बदलने के लिए, भारतीय काजू और कोको के लिए समर्पित कार्यक्रम का प्रस्‍ताव।
  1. भारत-विस्‍तार
  • केन्‍द्रीय बजट में भारत-विस्‍तार का प्रस्‍ताव, जो बहुभाषीय ए.आई. टूल है और जिसे ए.आई. प्रणाली सहित कृषि संबंधी प्रणालियों के लिए, आई.सी.ए.आर. पैकेज सहित एग्रीस्‍टैक पोर्टल के रूप में एकीकृत किया गया है।
  1. मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और ट्रॉमा केयर के लिए प्रतिबद्धता
  • उत्‍तर भारत में मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए निमहंस-टू की स्थापना की जाएगी।
  • रांची और तेजपुर में राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍थानों का क्षेत्रीय शीर्ष संस्‍थानों के रूप में उन्‍नयन किया जाएगा।
  1. पूर्वोदय राज्‍यों और उत्‍तर-पूर्व क्षेत्र पर ध्‍यान
  • दुर्गापुर में बेहतर संपर्क नोड के साथ एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे के विकास, 5 पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में 5 पर्यटन स्‍थलों के निर्माण और 4000 ई-बसों के प्रावधान का प्रस्‍ताव।
  • अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास के लिए नई योजना।
  1. 16वां वित्‍त आयोग
  • सरकार ने 16वें वित्‍त आयोग की सिफारिश के अनुसार वित्‍त आयोग अनुदान के रूप में वित्‍त वर्ष 2026-27 के लिए राज्‍यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये उपलब्‍ध कराए।
  1.  
  2. भाग-2
  3. प्रत्‍यक्ष कर
  4. नया आय कर अधिनियम
  • नया आय कर अधिनियम, 2025, दिनांक 01 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो जाएगा।
  • सरलीकृत आय कर नियमावली और प्रपत्रों को शीघ्र ही अधिसूचित कर दिया जाएगा। नए फॉर्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है ताकि, आम नागरिक आसानी से उसका अनुपालन कर सके।
  1. जीवन जीने की सुगमता
  • किसी साधारण व्‍यक्ति को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा अधिनिर्णीत ब्‍याज को आय कर से छूट दी जाएगी और इस मद में स्रोत पर काटा गया कर देय नहीं होगा।
  1. टी.सी.एस. को तार्किक बनाना
  • विदेश यात्रा कार्यक्रम पैकेज की बिक्री पर टी.सी.एस. दर को बिना किसी राशि निर्धारण के मौजूदा 5 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से कम करते हुए दो प्रतिशत करने का प्रस्‍ताव।
  • मानव श्रम आपूर्ति के लिए सरलीकृत टी.डी.एस. प्रावधानों से श्रम गहन कारोबारियों को लाभ होगा।
  • छोटे करदाताओं के लिए नई योजना का प्रस्‍ताव, जिसमें नियम आधारित स्‍वचालित प्रक्रिया से, कर-निर्धारण अधिकारी के समक्ष आवेदन दाखिल करने के स्‍थान पर कम अथवा शून्‍य कटौती प्रमाण-पत्र करना संभव हो सकेगा।
  • करदाताओं की सुविधा के लिए डिविडेंट, निवेश से प्रपत्र 15जी अथवा प्रपत्र 15एच स्‍वीकार करने के लिए सिंगल विंडो।
  • संशोधित रिटर्न के लिए समयसीमा मामूली शुल्‍क के भुगतान के साथ 31 दिसम्‍बर से बढ़ाकर 31 मार्च की गई।
  • कर रिटर्न फाइल करने के लिए अलग-अलग समय सीमा का प्रस्‍ताव।
  • किसी अनिवासी द्वारा अचल संपत्ति की बिक्री पर टी.डी.एस. की कटौती की जाने और टैन की आवश्‍यकता के बजाए निवासी क्रेता के पैन आधारित चालान के माध्‍यम से जमा कराए जा सकते हैं।
  • छोटे करदाताओं को अपनी विदेशी आय या संपत्ति की घोषणा के लिए एकमुश्‍त छह महीने की छूट की योजना।
  • जुर्माने और मुकद्दमेबाजी को तार्किक रूप देना।
  • आई.टी. आकलन और जुर्माने की कार्यवाही को सामान्‍य रूप से एकीकृत करने का प्रस्‍ताव है।
  • करदाताओं को अपनी पुन: आकलन कार्यवाही के बाद रिटर्न अपडेट कराने की अनुमति होगी।
  • आय का गलत विवरण देने पर अतिरिक्‍त आय कर के भुगतान के साथ छूट दी जा सकेगी।
  • आय कर अधिनियम के तहत मुकद्दमेबाजी की रूपरेखा को तार्किक बनाया गया है।
  1. सहकारिता
  • दूध, तिलहन, फल या सब्जियों की आपूर्ति में लगी प्राथमिक सहकारी संस्‍थाओं को पहले से उपलब्‍ध कटौती का विस्‍तार अब पशुचारे और बिनौले की आपूर्ति करने वालों तक भी किया गया है।
  • किसी अधिसूचित राष्‍ट्रीय सहकारी संघ द्वारा दिनांक 31 जनवरी 2026 तक कंपनियों में दिए गए उनके निवेश पर प्राप्‍त लाभांश आय पर तीन वर्ष की अवधि के लिए छूट देने का प्रस्‍ताव।
  1. भारत के विकास इंजन के रूप में आई.टी. क्षेत्र को सहायता
  • सॉफ्टवेयर विकास सेवाओं, आई.टी. समर्पित सेवाओं, ज्ञान प्रक्रिया आउटसोर्सिंग सेवाओं और सॉफ्टवेयर विकास से संबंधित सेवाएं 15.5 प्रतिशत के एक समान सेफ हार्बर मार्जिन के तहत आएंगी।
  • आई.टी. सेवाओं के लिए सेफ हार्बर प्राप्‍त करने की सीमा को तीन सौ करोड़ रुपये बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपये किया जा रहा है।
  • ए.पी.ए. में शामिल होने वाली कम्‍पनी को उपलब्‍ध संशोधित विवरणी की सुविधा उसकी संबद्ध संस्‍थाओं को भी प्रदान की जाएगी।
  1. वैश्विक व्‍यापार और निवेश आकर्षित करना
  • किसी ऐसी विदेशी कंपनी के लिए 2047 तक कर मे रियायत दी जाएगी, जो भारत से डाटा केन्‍द्र सेवाओं का उपयोग करके वैश्विक तौर पर क्‍लाउड सेवाएं प्रदान करती है।
  • यदि, डाटा सेंटर सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी संबंधित कंपनी है तो उसे लागत पर 15 प्रतिशत का सेफ हार्बर भी प्रदान किया जाएगा।
  1. कर प्रशासन
  • भारतीय लेखांकन मानक में ही आय परिकलन और प्रकटन मानकों के लिए अपेक्षाएं शामिल करने के हेतू कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और केन्‍द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड की संयुक्‍त समिति गठित की जाएगी। वर्ष 2027-28 से आय परिकलन और प्रकटन मानकों पर आधारित प्रथक लेखांकन अपेक्षाओं को समाप्‍त कर दिया जाएगा।
  1.  
  2. अन्‍य कर प्रस्‍ताव
  • बायबैक के कराधान में परिवर्तन को इसलिए लाया गया कि प्रवर्तकों द्वारा बायबैक रूट का अनुचित उपयोग रोका जा सके। कॉरपोरेट प्रवर्तकों के लिए प्रभावी कराधान 22 प्रतिशत और गैर-कॉरपोरेट के लिए 30 प्रतिशत होगा।
  • एल्‍कोहल युक्‍त लिकर, स्‍क्रैप और खनिजों के विक्रेताओं के लिए टीसीएस दरों को तर्कसंगत बनाते हुए 2 प्रतिशत किया जाएगा और तेंदु पत्‍ते पर 5 प्रतिशत की दर को घटाकर दो प्रतिशत किया जाएगा।
  • वायदा सौदों पर ऑप्‍शन प्रीमियम और ऑप्‍शन कार्यकलाप दोनों पर एसटीटी की मौजूदा 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर लगेगा।
  • मैट को अंतिम कर बनाए जाने का प्रस्‍ताव है, इसलिए 01 अप्रैल, 2026 से कोई और क्रेडिट संचय नहीं होगा। इस परिवर्तन के अनुरूप 15 प्रतिशत की मौजूदा मैट दर को कम करके 14 प्रतिशत किया जा रहा है।
  1. अप्रत्‍यक्ष कर :
  2. शुल्‍क सरलीकरण
  3. समुद्रीचमड़ा और वस्त्र उत्पाद
  • निर्यात हेतु सी-फूड उत्पादों के प्रसंस्करण हेतु इस्तेमाल किए गए विशेष घटकों के कर मुक्त निर्यात की सीमा को एफओबी वैल्यू के मौजूदा 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत किया जाएगा।
  • चमड़ा अथवा सिंथेटिक फूटवियर के निर्यात के लिए उपलब्ध कर मुक्त निर्यात, उसके विशेष उत्पादों के लिए भी अनुमत होगा।

ऊर्जा संक्रमण एवं सुरक्षा :

  • बैटरियों के लिए लीथियम-आयन सेलों के निर्माण हेतु इस्तेमाल में आने वाली पूंजीगत सामग्रियों के लिए मूलभूत सीमाशुल्क की छूट का विस्तार।
  • सोलर ग्लास के निर्माण में इस्तेमाल हेतु सोडियम एंटीमोनेट के आयात पर मूलभूत सीमाशूल्क से छूट मिलेगी।

न्यूक्लियर पावर:

  • न्यूक्लियर पावर परियोजनाओं के लिए आवश्यक सामग्रियों के आयात पर मौजूदा मूल-भूत सीमा शुल्क का वर्ष 2035 तक विस्तार किया जाएगा।

महत्वपूर्ण खनिज:

  • महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए आवश्यक पूंजीगत सामग्रियों के आयात के लिए मूल-भूत सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी।

 

बायोगैस मिश्रित सीएनजी:

  • बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क के भुगतान की गणना के समय बायोगैस के पूरे मूल्य पर छूट दी जाएगी।

असैनिक एवं रक्षा विमानन:

  • असैनिक, प्रशिक्षण एवं अन्य विमानों के निर्माण के लिए आवश्यक कलपुर्जों पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी।
  • रक्षा क्षेत्र की ईकाइयों द्वारा रख-रखाव, मरम्मत अथवा अन्य आवश्यकताओं में इस्तेमाल किए जाने वाले विमान के पुर्जों के निर्माण हेतु आयात किए जाने वाले कच्चे माल पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी।

इलैक्ट्रॉनिक्स:

  • माइक्रोवेब ओवन के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले विशेष पुर्जों पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी।

विशेष आर्थिक क्षेत्र:

  • विशेष आर्थिक क्षेत्रों से लेकर घरेलू टैरिफ क्षेत्र में पात्र विनिर्माण संयंत्रों द्वारा विक्रय की सुविधा हेतु एक विशेष एकबारगी उपाए का प्रस्ताव किया गया है, जिसके लिए रियायती दरों का प्रस्ताव किया गया है। ऐसे विक्रय की मात्रा उनके निर्यात के निर्धारित अनुपात तक सीमित होगी।

जीवन की सुगमता:

  • व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए आयात की जाने वाली सभी कर योग्य सामग्रियों पर टैरिफ दर को 20 प्रतिशत के घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा।
  • 17 दवाओं/औषधियों पर मूलभूत सीमाशूल्क में छूट दी जाएगी।
  1. अतिरिक्त असाध्य रोगों के लिए दवाओं/औषधियों के व्यक्तिगत निर्यात को कर मुक्त किया जाएगा।
  2.  

सीमा-शुल्क सरलीकरण प्रक्रिया

वस्तुओं के सुगम और त्वरित संचालन में कम से कम हस्तक्षेप

विश्वास आधारित प्रणालियां

  • एईओ के रूप में परिचित टियर 2 और टियर 3 प्राधिकृत आर्थिक प्रचालकों के लिए शुल्क स्थगन अवधि को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन किया गया है। पात्र विनिर्माणकर्ता और आयातकों के लिए भी समान शुल्क स्थगन सुविधा का प्रस्ताव।
  • सीमा शुल्कों पर बाध्यकारी अग्रिम नियम की वैधता अवधि को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष किया गया।
  • कार्गों के समाशोधन के लिए अधिमान्य व्यवहार हेतु एईओ प्रमाणन का लाभ लेने के लिए सरकारी एजेंसियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • जिन वस्तुओं के आयात के लिए किसी अनुपालन की आवश्यकता नहीं है, विश्वस्त आयातक द्वारा प्रवेश बिल दायर करने और वस्तुओं के आगमन पर सीमा-शुल्क को उनके समाशोधन औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अपने आप सूचना मिल जाएगी।
  • सीमा-शुल्क भंडारण,ऱ स्व-प्रकटन, इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग और जोखिम आधारित लेखा-परीक्षा के साथ एक भंडार संचालक केंद्रित प्रणाली में बदला जाएगा।

 

व्यापर सुगमता

  • विभिन्न सरकारी एजेंसियों से कार्गों समाशोधन के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को इस वित्त वर्ष के अंत तक एकल और परस्पर जुड़े डिजिटल विंडो के माध्यम से निर्बाध बनाया जाएगा।
  • खाद्य, औषधि, पौध, पशु और अन्य वन्य जीव उत्पादों, जो निषिद्ध कार्गों का 70 प्रतिशत होता है, के समाशोधन शामिल प्रक्रियाओं को अप्रैल 2026 तक संचालन रूप दिया जाएगा।
  • जिन वस्तुओं के लिए कोई अनुपालन आवश्यकता नहीं है, उन वस्तुओं को आयातक द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करने के तत्काल बाद समाशोधित किया जाएगा।
  • सभी सीमा-शुल्क प्रक्रियाओं के लिए एकल, एकीकृत और मापनीय प्लेटफॉर्म के रूप में सीमा-शुल्क एकीकृत प्रणाली 2 वर्षों में शुरु की जाएगी।
  • गैर-सन्निविष्ट स्कैनिंग और उन्नत इमेजिंग तथा जोखिम आकलन हेतु एआई प्रौद्योगिकी उपयोग सभी प्रमुख पत्तनों में कंटेनर को स्कैन करने के उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

 

निर्यात के नए अवसर

  • विशेष आर्थिक क्षेत्र अथवा बीच समुद्र में मछ्ली पकड़ने वाले भारतीय नौकाओं द्वारा पकड़ी गई मछली को शुल्क मुक्त किया जाएगा। विदेशी पत्तन पर ऐसी मछली के उतराई को निर्यात वस्तु के रूप में माना जाएगा।
  • ई-कॉमर्स के माध्यम से वैश्विक बाजार में पहुंच के लिए भारत के छोटे व्यवसाय, कारीगरों और स्टार्टअप की आकांक्षाओं को सहायता प्रदान करने के लिए कुरियर निर्यात प्रति खेप 10 लाक रुपए की वर्तमान मूल्य सीमा को पूरी तरफ से हटाया जाएगा।
  • अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान सामान निकासी से जुड़े प्रावधानों के संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। संशोधित नियमों से वर्तमान समय की यात्रा संबंधी वास्तविकताओं के अनुरूप शुल्क मुक्त भत्ते में वृद्धि होगी।
  1. सभी बकायों का भुगतान करके विवादों का समाधान चाहने वाले ईमानदार करदाता अतिरिक्त राशि का भुगतान करके अपने मामले बंद कर सकेंगे।

केंद्रीय बजट 2026-27 का सारांश

युवा शक्ति संचालित बजट गरीब, शोषित व वंचित समुदायों पर विशेष ध्यान के सरकार के संकल्प पर जोर देता है

कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला बजट, जो तीन कर्तव्यों से प्रेरित है

पहला कर्तव्य है आर्थिक वृद्धि को तेज करना व बनाए रखना

दूसरा कर्तव्य है लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमता का निर्माण करना

तीसरा कर्तव्य सबका साथ सबका विकास के विज़न से जुड़ा है

नया आयकर अधिनियम, 2025; अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा, सरलीकृत आयकर नियम और फॉर्म जल्द ही अधिसूचित किए जाएगे

जुर्माना और अभियोजन को युक्तिसंगत बनाने के लिए प्रक्रियाओं की गुणत्मकता को कम करना जरूरी

कुछ प्राथमिक सहकारी समितियों को प्राप्त रियायत को पशु खाद्य और कपास बीच तक विस्तारित किया जाएगा

15.5 प्रतिशत साझा सेफ हार्बर मार्जिन के साथ सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं की एकल श्रेणी

आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर सुविधा हेतु 300 करोड़ रुपये की सीमा को बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये किया गया

विदेशी क्लाउड सेवा प्रदात्ता को 2047 तक टैक्स हॉलीडे दिया जाएगा

अनुमान आधार पर टैक्स देने वाले सभी अप्रवासियों को न्यूनतम वैकल्पिक टैक्स से छूट

कर निर्धारण वर्ष 2027-28 से आईसीडीएस पर आधारित पृथक लेखा जरूरत को समाप्त करने के लिए मंत्रालय इंडएएस को संशोधित करने हेतु संयुक्त समिति का गठन करेगा

वायदा सौदों पर एसटीटी को वर्तमान के 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया जाएगा

बैटरी के लिथियम आयन सेल के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले पूंजीगत वस्तओं को प्राप्त मूल सीमा शुल्क छूट को विस्तार दिया जाएगा

महत्वपूर्ण खनिज के प्रसंस्करण के लिए आवश्यक पूंजीगत वस्तु के आयात के सीमा शुल्क पर छूट दी जाएगी

व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात की जाने वाली वस्तुओं पर लगने वाले टैरिफ दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा

17 औषधियों या दवाओं पर मूल सीमा शुल्क से छूट दी जाएगी

बायोफॉर्मा शक्ति, जिसका कुल परिव्यय 10,000 करोड़ रुपये है बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन के लिए इको-सिस्टम का निर्माण करेगी

भविष्य के चैम्पियन के रूप में एमएसएमई बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई विकास निधि का प्रस्ताव

सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बीई-2025-26 के 11.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया

पर्यावरण की दृष्टि से सतत यात्री प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए शहरों के बीच सात उच्च गति रेल गलियारे ‘वृद्धि परिवहन सम्पर्क’ के रूप में विकसित किए जाएंगे

भारतीय रचना प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई 15,000 उच्च माध्यमिक विद्यालयों तथा 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेट निर्माण लैब की स्थापना करेगा

उच्च शिक्षा और एसटीईएम संस्थानों में छात्राओं की चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रत्येक जिले में लड़कियों के लिए एक छात्रावास का निर्माण किया जाएगा

सरकार ने घोषणा करते हुए कहा कि आईआईएम की साझेदारी में, हाईब्रिड मोड में एक मानक, उच्च गुणवत्ता वाले 12-सप्ताह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के माध्यम से 20 पर्यटन स्थलों में 10,000 गाइड के कौशल का उन्नयन किया जाएगा

खेलो इंडिया मिशन अगले दशक में खेल क्षेत्र को परिवर्तित कर देगा

एक बहु-भाषी एआई उपकरण के रूप में भारत-विस्तार कृषि पोर्टलों और कृषि तौर-तरीकों पर आईसीएआर पैकेज को एआई प्रणालियों के साथ एकीकृत करेगा

विदेशी यात्रा पैकेज पर वर्तमान के 5 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया है

सीमा शुल्क भंडार गृह रूपरेखा का बदलाव भंडार गृह संचालक केन्द्रित प्रणाली के किया जाएगा, जिसमें स्व-घोषणा, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और जोखिम आधारित लेखा की व्यवस्था होगी

वित्त वर्ष के अंत तक विभिन्न सरकारी एजेंसियों से कार्गो निकासी मंजूरियों को एकल और आपस में जुड़े डिजिटल विंडो के जरिए निर्बाध रूप से प्रसंस्कृत किया जाएगा

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया।

भाग-क

 

वित्त मंत्री ने कहा कि माघ पूर्णिमा के पवित्र अवसर और गुरु रविदास की जन्म जयंती के मौके पर कर्तव्य भवन में तैयार हुआ यह पहला बजट 3 कर्तव्यों से प्रेरित हैः

पहला कर्तव्य है- उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाते हुए तथा उथल-पुथल भरी वैश्विक स्थिति के प्रति सहनीयता का निर्माण करके आर्थिक वृद्धि को तेज करना तथा इसे बनाए रखना ।

दूसरा कर्तव्य है- लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनके क्षमता का निर्माण करना; भारत की समृद्धि के मार्ग में उन्हें मजबूत भागीदार बनाना।

तीसरा कर्तव्य सबका साथ-सबका विकास के विज़न से जुड़ा है। यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र के पास संसाधनों, सुविधाओं तथा सार्थक भागीदारी के लिए अवसरों तक पहुंच की सुविधा हो।

युवा शक्ति संचालित बजट, जो गरीब, शोषित और वंचित समुदायों के प्रति सरकार के संकल्प पर जोर देता है, पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश विकसित भारत हासिल करने की दिशा में विश्वास से भरे कदम उठाता रहेगा, समावेश के साथ महत्वाकांक्षा का संतुलन करेगा। बढ़ते व्यापार और पूंजी की जरूरतों के साथ एक बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में भारत को वैश्विक बाजारों के साथ मजबूती से एकीकृत होना चाहिए, निर्यात में वृद्धि करनी चाहिए तथा लम्बी अवधि के स्थिर निवेश को आकर्षित करना चाहिए।

उन्होंने उल्लेख किया कि देश बाहरी वातावरण का सामना कर रहा है, जिसमें व्यापार और बहु-पक्षवाद को नुकसान हुआ है तथा संसाधनों और आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच में बाधाएं आई है। नई तकनीकें निर्माण प्रणालियों में बदलाव ला रही है, जबकि जल, ऊर्जा तथा महत्वपूर्ण खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद, 350 से ज्यादा सुधारों की शुरूआत की गई है। इनमें जीएसटी सरलीकरण, श्रम संहिताओं की अधिसूचना, अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का युक्तिकरण शामिल है। उच्च स्तरीय समितियां गठित की गई है और इसके साथ नियम समाप्त करने तथा अनिपालन जरूरतों को कम करने के लिए केन्द्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है।

पहला कर्तव्य आर्थिक वृद्धि को तेज करना व बनाए रखना है। पहले कर्तव्य के तहत छह क्षेत्रों में हस्तक्षेप कार्यक्रमों का प्रस्ताव दिया गया है।

  1. 7 रणनीतिक और सीमा क्षेत्रों में विनिर्माण का विस्तार करना
  2. विरासत औद्योगिक क्षेत्रों का पुनर्निर्माण करना
  3. चैम्पियन एमएसएमई बनाना
  4. अवसंरचना पर सशक्त बल देना
  5. लम्बी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता को सुनिश्चित करना
  6. नगर आर्थिक क्षेत्र विकसित करना

 

वैश्विक बायोफॉर्मा निर्माण केन्द्र के रूप में भारत को विकसित करने के लिए बायोफॉर्मा शक्ति, जिसका कुल परिव्यय 10,000 करोड़ रुपये है, बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन के लिए अगले पांच वर्षों में इको-सिस्टम का निर्माण करेगी। रणनीति में शामिल है- तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) और सात वर्तमान संस्थानों के उन्नयन के साथ बायोफॉर्मा पर केन्द्रित नेटवर्क। यह 1000 मान्यता प्राप्त भारत क्लिनिक जांच स्थलों के एक नेटवर्क का निर्माण करेगा। वैश्विक मानक हासिल करने तथा एक समर्पित वैज्ञानिक समीक्षा कैडर व विशेषज्ञों के माध्यम से समयावधि मंजूर करने के लिए केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को मजबूत किया जाएगा।

श्रम गहन वस्त्र क्षेत्र के लिए, पांच उपभागों के साथ एकीकृत कार्यक्रम का प्रस्ताव किया गया हैः

रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर, मानव निर्मित फाइबर और नए युग के फाइबरों में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना; मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन और सामान्य परीक्षण एवं प्रमाणन केन्द्रों के लिए पूंजीगत सहायता के साथ पारम्परिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना; मौजूदा योजनाओं को एकीकृत एवं सुदृढ़ करने और बुनकरों एवं कारीगरों के लिए लक्षित सहायता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम; वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ वस्त्र और परिधानों को बढ़ावा देने के लिए टेक्स-इको पहल; उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से वस्त्र कौशल इको-सिस्टम के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए समर्थ 2.0 ।

विकास के प्रमुख इंजन के रूप में एमएसएमई को मान्यता देते हुए, 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई विकास निधि का प्रस्ताव दिया गया है ताकि भविष्य के चैम्पियनों का निर्माण किया जा सके और निर्धारित विशेषताओं के आधार पर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा सके।

वित्त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में गुणात्मक वृद्धि हुई है जो वित्त वर्ष 2014-15 के 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर बीई 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ रुपये हो गई है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि इस गति को बनाए रखने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में इसे बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा।

कार्गो के पर्यावरण रूप से टिकाऊ आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने नए समर्पित फ्रेट कॉरिडोर का प्रस्ताव दिया, जो पूर्व में दानकुनी को पश्चिम के सूरत से जोड़ेगा; अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों (एनडब्ल्यू) का संचालन प्रारंभ होगा। इसकी शुरूआत ओड़िशा में एनडब्ल्यू 5 से की जाएगी, जो खनिज की प्रचुरता वाले क्षेत्र तालचर और अंगुल व कलिंग नगर जैसै औद्योगिक केन्द्र को पारादीप और घामरा पत्तनों से जोड़ेगा। आवश्यक कार्यबल के विकास के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के रुप में प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की जाएगी।

 

इस बजट का लक्ष्य शहरी आर्थिक क्षेत्रों के विशिष्ट विकास कारकों के आधार पर, शहरी आर्थिक क्षेत्रों (सीईआर) का मानचित्रण करके समूहों की आर्थिक स्थिति का उपयोग करने के लिए शहरों की क्षमता को और अधिक बढ़ाना है। सुधार-सह-परिणाम आधारित वित्तपोषण तंत्र से चुनौती मोड के माध्यम से उनकी योजनाओं को लागू करने में प्रति सीईआर 5 हजार करोड़ रुपये का आवंटन का प्रस्ताव दिया गया है।

पर्यावरणीय रूप से सतत् यात्री प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए, हम शहरों के बीच विकास संयोजक के रूप में सात उच्च-गति रेल कॉरीडोर विकसित किए जाएंगे-

  1. मुंबई-पुणे
  2. पुणे-हैदराबाद
  3. हैदराबाद-बेंगलुरु
  4. हैदराबाद-चेन्नई
  5. चेन्नई-बेंगलुरु
  6. दिल्ली-वाराणसी
  7. वाराणसी-सिलीगुड़ी।

 

वित्त मंत्री ने कहा कि दूसरा कर्तव्य आकांक्षाओं को पूरा करना और क्षमता निर्माण करना है। सरकार के सतत् और सुधार उन्मुख प्रयासों के जरिए 25 करोड़ व्यक्ति गरीबी की रेखा से ऊपर उठ गए है।

चिकित्सा पर्यटन सेवाओं के लिए भारत को एक वैश्वक केन्द्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने राज्यों को सहायता देने के लिए एक योजना का प्रस्ताव दिया, जिसके तहत राज्य निजी क्षेत्र के सहयोग से पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केन्द्र स्थापित कर सकते है। यह केन्द्र एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल भवन के रूप में कार्य करेंगे, जिनमें चिकित्सा, शिक्षा और शोध करने की सुविधाएं मौजूद होगी। इन केन्द्रों में आयुष केन्द्र, चिकित्सा केन्द्र, पर्यटन केन्द्र एवं स्वास्थ्य जांच, बाद के देखभाल और पुनर्वास की अवसंरचना होंगी। यह केन्द्र डॉक्टर और एएचपी के साथ-साथ स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए विभिन्न नौकरियों का विकल्प प्रस्तुत करेगे।

पशु चिकित्सा पेशेवरों की संख्या 20,000 तक करने के लिए ऋण से जुड़े पूंजीगत सब्सिडी का प्रस्ताव दिया गया है ताकि निजी क्षेत्र में पशु चिकित्सा और पारावेट कॉलेज, वेटेनरी, पशु चिकित्सालय, जांच प्रयोगशाला, प्रजनन सुविधा की स्थापना के लिए समर्थन दिया जा सके।

भारत का एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र एक बढ़ता हुआ उद्योग है। अनुमान है कि 2030 तक इस क्षेत्र में 20 लाख पेशेवरों की जरूरत होगी। वित्त मंत्री ने भारतीय रचना प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई को समर्थन देने का प्रस्ताव दिया, ताकि संस्थान 15,000 उच्च माध्यमिक विद्यालयों तथा 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेट निर्माण लैब की स्थापना कर सके।

उच्च शिक्षा एसटीईएम संस्थानों में अध्ययन और प्रयोगशाला कार्य की लम्बी अवधि छात्राओं के लिए चुनौती पैदा करती है। वीजीएफ/पूंजीगत समर्थन के जरिए प्रत्येक जिले में लड़कियों के लिए एक छात्रावास की स्थापना की जाएगी।

वित्त मंत्री ने वर्तमान के राष्ट्रीय होटल प्रबंधन और केटररिंग प्रौद्योगिकी परिषद का उन्नयन करके राष्ट्रिय आतिथ्य संस्थान की स्थापना करने का प्रस्ताव रखा। यह शिक्षा जगत, उद्योग जगत और सरकार के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने आगे 20 पर्यटनों स्थलों में 10,000 गाइडों के कौशल का उन्नयन करने के लिए एक पायलट योजना का प्रस्ताव रखा। इसके लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान के साथ साझेदारी में हाईब्रिड मोड में 12 सप्ताह के एक मानक उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के जरिए गाइडों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

खेलो इंडिया कार्यक्रम के जरिए खेल प्रतिभाओं को मार्गदर्शन व सहायता प्रदान करने के कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए वित्त मंत्री ने अगले दशक में खेल क्षेत्र को परिवर्तित करने के लिए खेलो इंडिया मिशन के शुभारंभ का प्रस्ताव रखा।। यह मिशन निम्न सुविधाएं प्रदान करेगा। क.) प्रशिक्षण केन्द्रों के समर्थन से प्रतिभा विकास के लिए एकीकृत तरीका ख.) कोच और सहायककर्मियों का प्रणालीगत विकास ग.) खेल विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एकीकरण घ.) खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा मंच प्रदान करने के लिए प्रतियोगिताएं और लीग ड.) प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के लिए खेल अवसंरचना का विकास।

 

वित्त मंत्री ने कहा कि बजट का तीसरा कर्तव्‍य जो सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है, यह सुनिश्चित करता है कि किसानों की आय में वृद्धि हो, दिव्‍यांगजन सशक्‍त बनें, मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और ट्रॉमा केयर तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कमजोर समूहों का सशक्तिकरण हो,  विकास और रोजगार के अवसरों में तेजी लाकर पूर्वोदय राज्‍यों और पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर ध्‍यान केंद्रित हो।

वित्त मंत्री ने एक भाषीय टूल – भारत विस्‍तार (कृषि संसाधनों तक पहुंच के लिए वर्चुअल एकीकृत प्रणाली)  – का प्रस्‍ताव किया जो एक बहुभाषीय एआई टूल है और जिसे एआई प्रणाली सहित कृषि संबंधी प्रणालियों के लिए आईसीएआर पैकेज सहित एग्रीस्‍टैक पोर्टल के रूप में एकीकृत किया गया है। इससे कृषि उत्‍पादकता में वृद्धि होगी, किसानों को उचित निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा और अनुकूल परामर्श सहायता प्रदान करते हुए जोखिम को कम करेगा।

लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए,  संवर्धित और नवाचार वित्तपोषण के माध्‍यम से क्‍लस्‍टर स्‍तरीय संगठनों के भीतर सामुदायिक स्‍वामित्‍व वाले खुदरा आउटलेट के रूप में स्‍व-सहायता उद्यम (शी) मार्ट स्‍थापित किए जाएंगे।

वित्त मंत्री ने मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और ट्रॉमा केयर पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए निमहांस-2 की स्‍थापना की घोषणा की और रांची तथा तेजपुर में राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍थानों को शीर्ष क्षेत्रीय  संस्‍थानों के रूप में अपग्रेड करने की बात कही।

वित्त मंत्री ने दुर्गापुर में बेहतर संपर्क नोड के साथ एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक कॉरीडोर के विकास, 5 पूर्वोदय राज्‍यों में 5 पर्यटन स्‍थलों के निर्माण और 4000 ई-बसों के प्रावधान का प्रस्‍ताव रखा। उन्‍होंने अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास हेतु एक योजना का प्रस्‍ताव रखा। इस योजना में मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थस्‍थल भाषांतरण केंद्र, संपर्क एवं तीर्थ यात्रियों की सुविधाएं शामिल होंगी।

राजकोषीय समेकन

ऋण से जीडीपी अनुपात संशोधित अनुमान 2025-26 में जीडीपी के 56.1 प्रतिशत की तुलना में, बजट अनुमान 2026-27 में जीडीपी के 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। गिरता हुआ ऋण और जीडीपी अनुपात धीरे-धीरे ब्‍याज भुगतान पर व्‍यय को कम करके प्राथमिक क्षेत्र के व्‍यय के लिए संसाधनों को मुक्‍त करेगा। संशोधित अनुमान 2025-26 में, राजकोषीय घाटे का अनुमान जीडीपी के 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो 2025-26 के बजट अनुमान के बराबर है। ऋण समेकन की नई राजकोषीय दूरदर्शिता के अनुरूप, बजट अनुमान 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

 

संशोधित अनुमान 2025-26

गैर-ऋण प्राप्तियों का  संशोधित अनुमान 34 लाख करोड़ रुपये है। जिनमें से केंद्र की निवल कर प्राप्तियां 26.7 लाख करोड़ रुपये है। कुल व्‍यय का संशोधित अनुमान 49.6 लाख करोड़ रुपये है जिनमें से पूंजीगत व्‍यय लगभग 11 लाख करोड़ रुपये है।

बजट अनुमान 2026-27

वर्ष 2026-27 में गैर-ऋण प्राप्तियां और कुल व्‍यय का अनुमान क्रमश: 36.5 लाख करोड़ रुपये और 53.5 लाख करोड़ रुपये है। केंद्र की निवल कर प्राप्तियों का अनुमान 28.7 लाख करोड़ रुपये है। राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण हेतु, दिनांकित प्रतिभूतियों से निवल बाजार उधारी का अनुमान 11.7 लाख करोड़ रुपये है। शेष वित्तपोषण छोटी बचतों और अन्‍य स्रोतों से आने की संभावना है। सकल बाजार उधारी का अनुमान 17.2 लाख करोड़ रुपये है।

 

भाग-ख

प्रत्यक्ष कर

प्रत्यक्ष करों में आम बजट 2026-2027 में कई नए सुधार प्रस्तावित हैं। नया आयकर अधिनियम 2025 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा। इसके अतिरिक्त, सरलीकृत आयकर नियमावली और प्रपत्रों को शीघ्र ही अधिसूचित कर दिया जाएगा। प्रपत्रों को इस प्रकार पुनः डिजाइन किया गया है कि आम नागरिक इसे बिना किसी कठिनाई के इसका अनुपालन कर सके।

टीसीएस दरों में कटौती भी प्रस्तावित है। विदेश यात्रा कार्यक्रम पैकेज की बिक्री पर बिना किसी राशि निर्धारण के मौजूदा 5 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से कम करते हुए 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अतिरिक्त, शिक्षा प्राप्त करने और चिकित्सा उद्देश्यों के के लिए उदारीकृत धनप्रेषण योजना (एलआरएस) के अतंर्गत टीसीएस दर को 5 प्रतिशत से कम करके 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है।

कार्यबल सेवाओं की आपूर्ति को टीडीएस के प्रयोजनार्थ विशिष्ट रूप से संविदाकारों को भुगतान के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। इन सेवाओं पर टीडीएस की दर 1 प्रतिशत अथवा 2 प्रतिशत मात्र होगी। छोटे करदाताओं के लिए एक योजना का प्रस्ताव है जिसमें नियम आधारित स्वचालित प्रक्रिया से, कर निर्धारण अधिकारी के समक्ष आवेदन दाखिल करने के स्थान पर कम अथवा शून्य कटौती प्रमाण-पत्र प्राप्त करना संभव हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, एक सांकेतिक शुल्क के भुगतान पर विवरणियों को संशोधित करने के लिए उपलब्ध समय को 31 दिसम्बर से 31 मार्च तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके अतिरिक्त, कर विवरणियों को दाखिल करने के लिए अगल-अलग समय-सीमा रखने का भी प्रस्ताव है।

छात्रों, युवाओं पेशेवरों, तकनीकी कर्मचारियों, अन्यत्र चले गए अनिवासी भारतीयों और ऐसे अन्य छोटे करदाताओं की व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने के लिए, इन करदाताओं के लिए एक निश्चित आकार के नीचे आय अथवा परिसंपत्ति को प्रकट करने के लिए 6 माह की विदेशी परिसंपत्ति प्रकटीकरण योजना शुरू करने का प्रस्ताव है।

दंड और अभियोजन को युक्तिसंगत बनाना

दंड और अभियोजन को युक्तिसंगत बनाने के लिए आम बजट 2026-27 में  कार्यवाहियों की विविधता कम करने का प्रस्ताव रखा गया है। कर निर्धारण एवं दंड कार्यवाहियों को एक सामान्य आदेश के माध्यम से एकीकृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पूर्व-भुगतान की मात्रा 20 प्रतिशत से कम करके 10 प्रतिशत की जाएगी और इसकी गणना केवल मुख्य क्रमांक पर होती रहेगी। मुक्दमेबाजी को कम करने के लिए एक अतिरिक्त उपाय के रूप में करदाता को संगत वर्ष के लिए लागू दर के अतिरिक्त 10 प्रतिशत कर दर के साथ विवरणी को पुनर्निर्धारण कार्यवाहियों के पश्चात भी अद्यतन करने की अनुमति दी जाएगी।

बजट में कम कर की सूचना एवं गलत सूचना देने के मामलों में, दंड और अभियोजन से उन्मुक्ति प्रावधान को विस्तारित करने का प्रस्ताव है। ऐसे मामलों में करदाता को देय कर और ब्याज के अलावा अतिरिक्त आयकर के रुप में कर राशि के 100 प्रतिशत का भुगतान करना अपेक्षित होगा। इसके अतिरिक्त आयकर अधिनियम के अतंर्गत अभियोजन ढ़ांचे को युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। लेखा बहियों और दस्तावेजों को प्रस्तुत न करना तथा वस्तु रुप में भुगतान के मामले में टीडीएस का भुगतान करने की आवश्यकता अपराध नहीं होगी। 20 लाख रुपये से कम के सकल मूल्य वाली अचल विदेशी परिसम्पत्ति का गैर-प्रकटीकरण करने पर फिलहाल कोई दंड नहीं है। दिनांक 01.10.2024 की पुरानी तिथि से प्रभावी उनको अभियोजन से उन्मुक्ति का प्रस्ताव रखा गया है।

सहकारिता

श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में अपने बजट भाषण में कहा कि, अपने सदस्यों द्वारा जुटाए या उत्पादित दुग्ध, तिलहन, फल अथवा सब्जियों की आपूर्ति में संलग्न प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए कटौती की पहले से ही अनुमति है, अब उनके सदस्यों के लिए उत्पादित पशु चारा और कपास के लिए बीज की आपूर्ति को इस कटौती में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। नई कर व्यवस्था के अंतर्गत अंतर-सहकारी समिति लाभांश आय को इसके सदस्यों में आगे संवितरण की सीमा तक कटौती के रूप में अनुमति दिए जाने का प्रस्ताव है। किसी अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी संघ द्वारा दिनांक 31.01.2026 तक कंपनियों में किए गए उनके निवेश पर प्राप्त लाभांश आय पर 3 वर्ष की अवधि के लिए छूट देने का भी प्रस्ताव है। यह छूट केवल तभी प्रदान की जाएगी जब उक्त लाभांश को इसके सदस्य सहकारी समितियों में आगे वितरण किया जाएगा।

भारत के विकास इंजन के रूप में आईटी क्षेत्र को सहायता

भारत की विकास यात्रा में आईटी सेक्टर के महत्व को रेखांकित करते हुए बजट में सॉफ्टवेयर विकास सेवाओं, आईटी समर्पित सेवाओं, ज्ञान प्रक्रिया आउटसोर्सिंग सेवाओं और सॉफ्टवेयर विकास से संबंधित संविदागत अनुसंधान और विकास सेवाओं को उन पर लागू 15.5 प्रतिशत के एक समान सेफ हार्बर मार्जिन के साथ सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं की एकल श्रेणी के अंतर्गत सम्मिलित किए जाने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर प्राप्त करने की सीमा को 300 करोड़ रुपये से पर्याप्त रुप से बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये किए जाने का प्रस्ताव है। आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर का अनुमोदन एक स्वचालित नियम आधारित प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा और एक बार किसी आईटी कम्पनी द्वारा इसके लिए आवेदन करने पर कंपनी की इच्छानुसार इसी सेफ हार्बर को 5 वर्षों की अवधि के लिए जारी रखा जा सकता है।

अग्रिम मूल्य निर्धारण करार (एपीए) करने की इच्छुक आईटी सेवा कंपनियों के लिए आईटी सेवाओं हेतु एकपक्षीय एपीए प्रक्रिया को तेज करने का प्रस्ताव किया गया है, जिसे दो वर्ष की अवधि के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। करदाताओं के अनुरोध पर 2 वर्ष की अवधि को आगे 6 महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है। एपीए में शामिल होने वाली कंपनी को उपलब्ध संशोधित विवरणी की सुविधा उसकी संबद्ध संस्थाओं को भी प्रदान किए जाने का प्रस्ताव है।

वैश्विक व्यापार और निवेश आकर्षित करना

संसद में आम बजट 2026-27 प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसी विदेशी कंपनी के लिए वर्ष 2047 तक कर रियायत प्रदान करने का प्रस्ताव है जो भारत से डाटा केन्द्र सेवाओं का उपयोग करके वैश्विक स्तर पर क्लाउड सेवाएं प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि यदि डाटा सेंटर सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी एक संबंधित कंपनी है तो, उस लागत पर 15 प्रतिशत का सेफ हार्बर प्रदान का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के लिए इनवॉयस बैल्यू के 2 प्रतिशत के प्रॉफिट मार्जिन पर किसी बांडेड वेयरहाउस में कंपोनेंट वेयरहाउस के लिए अनिवासियों को सेफ हार्बर प्रदान करने का प्रस्ताव है। लगभग 0.7 प्रतिशत का परिणामी कर प्रतिस्पर्धी क्षेत्राधिकार के मुकाबले काफी कम होगा।

भारत में टोल विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ऐसे किसी अनिवासी को आयकर से 5 वर्षों के लिए छूट प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया है जो बॉन्डेड क्षेत्र में किसी टोल विनिर्माता को पूंजीगत वस्तुएं, उपकरण अथवा टूलिंग उपलब्ध कराता  है। वैश्विक प्रतिभा के विशाल पूल को भारत में लम्बी अवधि के लिए काम करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए अधिसूचित योजनाओं के अतंर्गत 5 वर्षों की प्रवास अवधि के लिए अनिवासी विशेषज्ञ की वैश्विक (गैर-भारत स्रोत) आय के लिए छूट प्रदान करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त उन सभी अनिवासियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) से छूट प्रदान की जाएगी, जो अनुमानित आधार पर कर का भुगतान करते हैं।

 

कर प्रशासन

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सिविल और रक्षा विमानन क्षेत्र में सिविलियन, प्रशिक्षण और अन्य एयरक्राफ्ट के विनिर्माण के लिए अपेक्षित घटकों और पुर्जों पर मूल सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी और रक्षा क्षेत्र इकाइयों द्वारा अनुरक्षण, मरम्मत अथवा ओवरहॉल जरूरतों में प्रयोग किए जाने वाले विमानों के पुर्जों के विनिर्माण के लिए आयातित कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क में छूट प्रदान की जाएगी।

इसके अलावा विशेष एक बारगी उपाय के रूप में विशेष आर्थिक क्षेत्र में पात्र विनिर्माण इकाइयों द्वारा रियायती शुल्क दरों पर घरेलू प्रशुल्क क्षेत्र (डीटीए) को बिक्री की सुविधा प्रदान करने की पेशकश की गई  है।

जीवन जीने की सुगमता बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री ने कहा कि निजी उपयोग के लिए सभी शुल्क योग्य आयातित वस्तुओं पर प्रशुल्क दर को 20 प्रतिशत से कम करते हुए 10 प्रतिशत किया जाएगा। 17 औषधियों अथवा दवाओं पर मूल सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी। उपचार में प्रयुक्त औषधियों, दवाओं और विशेष चिकित्सा प्रयोजन खाद्य (एफएसएमपी)  के निजी आयातों पर शुल्क से छूट के प्रायोजनार्थ 7 अतिरिक्त असाधारण रोगों को जोड़ा जाएगा।

सीमा शुल्क प्रक्रिया

वस्तुओं के सुगम और त्वरित संचलन के लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में कम से कम हस्तक्षेप होगा। इसके अलावा टियर 2 और टियर 3 प्राधिकृत प्रचालकों जिन्हें एईओ कहा जाता है, के लिए शुल्क स्थगन अवधि को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन किया जाएगा। पात्र विनिर्माताओं – आयातकों को भी यही सुविधा प्रदान की जाएगी। सीमा शुल्कों पर बाध्यकारी अग्रिम नियम की वैधता अवधि को वर्तमान 3 वर्ष  से बढ़ाकर 5 वर्ष किये जाने  का प्रस्ताव है। सरकारी एजेंसियों को उनके कार्गो के समाशोधन में अधिमान्य व्यवहार हेतु एईओ प्रत्यायन का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

बजट में सीमा शुल्क भंडारण फ्रेमवर्क को स्व-प्रकटन, इलेक्ट्रॉनिक  ट्रेकिंग और जोखिम आधारित लेखा परीक्षा के साथ भंडार संचालक – केंद्रित प्रणाली में बदला जाएगा।

व्यापार करने की सुगमता

व्यापार करने की सुगमता के लिए विविध प्रकार के कदम उठाए गए हैं। उदाहरण के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों से कार्गों समाशोधन के लिए अपेक्षित अनुमोदनों की प्रक्रिया को इस वित्त वर्ष के अंत तक एकल और परस्पर जुड़े हुए डिजिटल विंडो के माध्यम से निर्बाध बनाया जाएगा। जिन वस्तुओं के लिए किसी अनुपालन की अपेक्षा नहीं है, उन वस्तुओं को आयातक द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करने के तत्काल बाद सीमा शुल्क द्वारा समाशोधित किया जाएगा। सभी सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के लिए एकल, एकीकृत और मापनीय प्लेटफॉर्म के रूप में सीमा शुल्क एकीकृत प्रणाली (सीआईएस) 2 वर्षों में शुरू की जाएगी।  इसके अलावा गैर सन्निविष्ट स्कैनिंग और उन्नत इमेजिंग तथा जोखिम आकलन हेतु एआई प्रौद्योगिकी का उपयोग सभी प्रमुख पत्तनों में प्रत्येक कंटेनर को स्केन करने के उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

केंद्रीय बजट 2026-27 विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में अथवा बीच समुद्र में मछली पकड़ने वाली भारतीय नौकाओं द्वारा पकड़ी गई मछली को शुल्क मुक्त बनाता है। विदेशी पत्तन पर ऐसी मछली की उतराई को निर्यात की वस्तु के रूप में माना जाएगा। बजट भारत के छोटे व्यवसायों, कारीगरों और स्टार्ट-अप की अकांक्षाओं में सहायता प्रदान करने के लिए कुरियर निर्यातों पर प्रति खेप 10 लाख रुपए की वर्तमान मूल्य सीमा को पूरी तरह हटाने की भी पेशकश करता है।

अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के दौरान सामान की निकासी को शासित करने वाले प्रावधानों में संशोधन किया जाएगा। संशोधित नियमों से वर्तमान समय की यात्रा संबंधी वास्तविकताओं के अनुरूप शुल्क मुक्त भत्ते में वृद्धि होगी। इसके अलावा सभी बकायों का भुगतान करके विवादों का निपटान करने के इच्छुक ईमानदार करदाता दंड के बदले अतिरिक्त राशि का भुगतान करके अपने मामलों को बंद करने में सक्षम होंगे।