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वीके सिंह की मजबूरी छा गई सोशल मीडिया पर

नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में पाकिस्तान दिवस के कार्यक्रम से लौटने के बाद विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने लगातार कई ट्वीट करके इस कार्यक्रम में शामिल होने पर 'सफाई' दी और अपनी 'खीज' निकाली।

 

हालांकि अपने एक ट्वीट में उन्होंने ये भी कहा कि ये उनका कर्तव्य था जिसे करने के लिए वो बाध्य थे। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान उच्चायोग ने अलगाववादी नेता मसरत आलम को भी आमंत्रित किया था लेकिन मसरत ने तबियत खराब होने की बात कहकर कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया था।

उधर विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह के लगातार ट्वीट्स को लेकर ट्विटर पर जबर्दस्त प्रतिक्रियाएं हो रही हैं। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लिखा है, “ये उम्मीद करना कितना बेतुका है कि वीके सिंह पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस समारोह में न जाते।

 

ऐसे कूटनीतिक मौकों पर जाना बतौर विदेश राज्य मंत्री उनका काम है।”वहीं पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है, “क्या वीके सिंह इस सरकार में पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने सरकार से अपनी असहमति दिखाई है। और इस बार भी ट्विटर पर।”

 

जबकि कांग्रेस नेता मनीष तिवारी कहते हैं कि यदि वीके सिंह को इतनी ही शर्मिंदगी महसूस हो रही है तो उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। मनीष तिवारी ने ये भी लिखा है कि पहले कई मंत्री पाकिस्तान उच्चायोग के के आयोजनों में जाने से इनकार कर चुके है।

 

वहीं एक यूज़र अर्षित पाठक ने वीके सिंह और मनीष तिवारी दोनों के ट्वीट्स पर टिप्पणी की है और लिखा है, "वीके सिंह की नाराज़गी उनका कर्तव्य है जबकि मनीष तिवारी का काम ही नाराज़ होना है।"

 

पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन ने भी वीके सिंह के ट्वीट्स पर आश्चर्य जताया है कि और कहा है कि यदि वो अपनी इच्छा से नहीं गए तो उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।

 

जे अंबादी अपने अकाउंट पर लिखते हैं, "नाराजगी को ट्विटर पर लाने में वीके सिंह को एक घंटा लग गया और बाद में इसका दोष उन्होंने मीडिया पर मढ़ दिया।"

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सोशल मीडिया पर किसी के खिलाफ लिखना कानूनी जुर्म नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने साइबर कानून की व‌िवादित धारा 66ए को रद्द कर दिया है। सोशल मीडिया पर ‌टिप्‍पणी करने के मामले पुलिस अब आननफानन गिरफ्तारी नहीं कर सकेगी। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि आईटी एक्ट की धारा 66ए संव‌िधान के अनुच्छेद 19(2) के अनुरूप नहीं है।

 

उल्लेखनीय है कि अनुच्छेद 19(2) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता का ‌अधिकारी देती है। सुप्रीम कोर्ट ने ताजा फैसला 66ए समेत कुछ अन्य धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनाया है।

 

इस फैसले से पहले आईटी एक्ट की धारा 66ए के तहत सोशल नेटवर्किंग साइटों पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने पर पुलिस किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती थी, जिसकी संवैधानिक वैधता को कई लोगों ने चुनौती दी थी। इस मुद्दे पर सरकार की ओर से तर्क पेश किए जाने के बाद न्यायाधीश जे चेलमेश्वर और न्यायाधीश आरएफ नरीमन की पीठ ने 26 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

 

सुप्रीम कोर्ट ने धारा 66A को रद्द करते हुए कहा कि कि ये धारा सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को झटका है। हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले में साफतौर से कहा है कि सोशल साइट पर बेलगाम होकर कुछ नहीं लिखेंगे। कुछ लिखने या पोस्ट करने से पहले विचार करना जरूरी होगा।

 

हालांकि सरकार की ओर से सुनवाई के दौरान कोर्ट में तर्क दिया गया था कि अगर ये एक्ट खत्म होता है तो इसके दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाएगी।

 

आपको बता दें कि इस फैसले से पहले धारा 66ए के तहत सोशल नेटवर्किग साइट्स पर विवादास्पद पोस्ट डालने पर तीन साल तक की कैद का प्रावधान था।

 

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ओर से आए इस फैसले के बाद किसी की भी आनन-फानन में गिरफ्तारी नहीं होगी। जिसकी मांग याचिकाकर्ताओं की ओर से की गई थी।

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चर्चों के गोरखधंधों का पर्दाफाश करती है फादर लोमियो की ये पुस्तक

मदर टैरेसा पर उठा विवाद अभी थमा भी नही है कि एक ईसाई संगठन से जुड़े कैथोलिक विश्वासी पी.बी.लोमियों की हालही में आई पुस्तक ‘‘ ऊँटेश्वरी माता का महंत” ने ईसाई समाज के अंदर चर्च की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल उठा दिये है।

“ऊँटेश्वरी माता का महंत”  र्शीषक से लिखी गई 300 रु. की यह पुस्तक एक येसु समाजी (सोसाइटी ऑफ जीजस) कैथोलिक पादरी (फादर एंथोनी फर्नांडेज) जिन्होंने अपने जीवन के 38 वर्ष कैथोलिक चर्च की भेड़शलाओं का विस्तार करने में लगा दिए, चर्च की धर्मांतरण संबधी नीतियों का परत दर परत खुलासा करती है और साथ ही चर्च नेतृत्व का फरमान न मानने वाले पादरियों और ननों की दुर्दशा को बड़ी ही बेबाकी से उजागर करती है।

“ऊँटेश्वरी माता का महंत” र्शीषक से लिखी गई यह पुस्तक कैथोलिक चर्च व्यवस्था, रोमन कूरिया, जेसुइट कूरिया पर कई स्वाल खड़े करते हुए ‘‘उतरी गुजरात”  के कुछ हिस्सों में चर्च द्वारा अपनी भेड़शलाओं को बढ़ाने का चौंकाने वाला खुलासा करती है – कि, विदेशी मिश्नरियों की धर्म प्रचार क्षमता का लोहा मानना पड़ेगा। स्पेनिश फादर गैर्रिज ने यह देखा कि ‘ऊँट इस क्षेत्र का प्रधान पशु है’-(रेगिस्तान का जहाज) यह इस बंजर जमीन पर रहने वालों का परिवारिक अभिन्न अंग है व्यापार का साधन भी है। अतः ऊँट से संबधित रक्षक देवी के रुप में उन्होंने मदर मेरी को एक ‘नया अवतार’ प्रदान किया, ‘‘ऊँटेश्वरी माता” -ईशूपंथियों, ऊँट-पालकों की कुल माता!

विदेशो से आर्थिक सहायता प्राप्त कर उन्होंने मेहसाना क्षेत्र के बुदासान गांव में 107 एकड़ का विशाल भूखण्ड खरीद कर पहाड़ी नुमा जमीन पर एक विशाल वृक्ष के नीचे एक ‘डेहरी’ (चबूतरा) का निमार्ण करवाया और घोषणा की, कि यह डेहरी ऊँटेश्वरी माता की ‘डेहरी’ है। यह देवी जगमाता है। जो ऊँटों की रक्षा करती है।

फादर एंथोनी फर्नांडेज को आदिवासियो व मूल निवासियों को ईशुपंथी बनाने के काम पर लगाया गया था। उन्होंने जब वस्तु स्थिति का सामना किया तो उन्हें मिशनरियों की कुटिलता और धोखेबाजी का आभास होता गया। फादर एंथोनी इस तथ्य से बहुत आहत थे कि विदेशी मिशनरियों का मुख्य उदे्श्य, उत्तरी गुजरात के आदिवासियों और अनुसूचितजातियों का धर्मांतरण करवाना ही था, चाहे इसके लिए कोई भी नीति क्यों न अपनानी पड़े। वास्तव में उनके विकास से उनका कोई लेना देना नहीं था। सभी योजनाएं चाहे वह समाज सेवा, शिक्षा एवं स्वस्थ्य सेवाएं हो, वे केवल उन्हें लालच वश ही प्रस्तुत की जा रही थी।

इस हकीकत को सामने लाने का प्रयास करने वाला अब नहीं हैं – उनका देहान्त पिछले साल  11 मई  2014 को बनारस में हो चुका हैं – वह व्यक्ति थे फादर एन्थनी फर्नांडेज – येसु समाजी – एक कैथोलिक प्रीस्ट – एक सच्चा सन्यासी, एक सच्चा संत और एक राष्ट्रभक्त हिन्दुस्तानी।

महात्मा गांधी की भूमि – गुजरात में जन्मा – पला – बढ़ा, यह कैथोलिक प्रीस्ट गुजरातियों की धार्मिक आस्था का पर्याय था। गुजरात के महान संत नरसिंह मेहता के गीत और भजनों में रमा हुआ था – ’’वैष्णव जन तेने कहिए, जो पीर पराई जाने रे” – पराई पीर को दूर करने, पीड़ितों का कल्याण करने की साफ नीयत लिये हुए फादर एन्थनी फर्नांडेज, जेसुइट समाज (कैथोलिक चर्च) का अंग बन गया। उत्तरी गुजरात, जो अक्सर कम वर्षा का शिकार रहता हैं – के गरीब किसानों और आदिवासियों के लिए कैथौलिक जेसुइट मिशनरियों द्वारा चालयें जा रहे राहत कार्यों में अपने सुपीरियरों और प्रोविंशियलों द्वारा लगा दिया गया। लेकिन जब उसे इन देशी विदेशी मिशनरियों की धूर्ता और देश के प्रति षड्यंत्रों से साक्षात्कार हुआ तो उसने उनका पुरजोर विरोध करने के उपाय तलाशना शुरू कर दिया। लेकिन क्या यह ’’अकेला चना”  भाड़ फोड़ सका?

ईसाइयत में शुरु से ही पूरी दुनियां को जितने का एक जानून रहा है और इसके इस कार्य में जिसने भी बाधा खड़ी करने की कौशिश की वह इस साम्राज्यवादी व्यवस्था से सामने ढेर हो गया। भारत में भी पोप का साम्राज्यवाद उसी नीति का अनुसरण कर रहा है। अगर कोई पादरी या नन व्यवस्था के विरुद्व कोई टिप्पणी करते है तो उनका हाल भी फादर एंथोनी फर्नाडिज जैसा ही होता है क्योंकि चर्च व्यवस्था में मतभिन्नता के लिए कोई स्थान नहीं है। इसी कारण भारत में कैथोलिक चर्च को छोड़ चुके सैकड़ों पादरी ओर नन चर्च व्यवस्था के उत्पीड़न से बचने के लिए ‘‘कैथोलिक चर्च रिफॉर्मेशन मूवमेंट (केसीआरएम) का गठन कर रहे है।

“ऊँटेश्वरी माता का महंत”  के नायक फादर एंथोनी फर्नांडेज को भी ‘ईसा की तरह कू्रसित’ (सलीबी मौत) करने का लम्बा षड्यंत्र चल पड़ा। इस संघर्ष में वह अकेला था – उसके साथ कोई कारवां नहीं था। ईसा भी तो अकेले ही रह गये थे – उनके शिष्य उन्हें शत्रुओं के हाथ सौंप कर भाग गये थे और जिस यहूदी जाति के उद्धार के लिए वे सक्रिय थे वही जनता रोमन राज्यपाल पिलातुस से ईसा को सलीब पर चढ़ाये जाने के लिए प्रचण्ड आन्दोलन कर रही थी। यही हुआ था – ऊंटेश्वरी माता के इस महंत –  फादर टोनी फर्नांडेज़ के साथ।

प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक श्री कुमारप्पा (जो कि स्वयं कैथोलिक ईसाई थे) का विचार था: – पश्चिमी देशों की सेना के चार अंग हैं – ’”थल सेना, वायु सेना और नौसेना तथा चर्च (मिशनरी) ।“  इन्हीं चार अंगीय सेना के बलबूते पर पश्चिमी देश पूरे विश्व पर राज्य करने की योजना रचने में माहिर हैं।“  आज की परिस्थतियों में एक और सेना भी जोड़ी जा सकती हैं – वह पांचवी सेना हैं ’’मीडिया”

वर्तमान समय में अविकसित या अर्द्धविकसित देशों की प्राकृतिक सम्पदाओं – तेल – वनों – खनिजों की जितनी समझ पाश्चात्य देशों की हैं, उतनी समझ या जानकारी स्वयं इन देशों की सरकारों को नहीं हैं।

इस पुस्तक में स्पेनिश मिशनरियों द्वारा अपनाई गई ’’ऊँट की चोरी” करने की नायाब तरकीब बताई गई हैं – इस चोरी की विधि में केवल ऊँट ही नहीं चुराया जा सकता हैं अपितु ऊँट पालकों की जर जमीन, मान मर्यादा, धर्म-संस्कृति आदि सभी पर हाथ साफ किया जा सकता हैं। यहाँ तक की आदिकाल से चली आई सामाजिक एकता और समरसता को भी आसानी से विभाजित किया जा सकता है।

इन विदेशी मिशनरियों की सोच है किः – ’’यदि कोई ’’ईसाई युवती”  अपनी पूर्व जाति के, ’’गैर-ईसाई” युवक से विवाह करना चाहती है, तो उसे मना मत करो – कालान्तर में वह अपने पति व सास-ससुर तक को ईसाई बना लेगी और उसके बच्चे तो पैदायशी ईसाई होंगे ही।’’

आपने कई बार ’’समानान्तर सरकार”  शब्द भी सुना होगा या पढ़ा होगा। लेकिन समानान्तर सरकार या पैरलल गवन्रमेंट का असली स्वरूप क्या होता है? कैसा होता हैं? इस तथ्य से शायद रू-ब-रू नहीं हुए होंगे – ‘‘ऊँटेश्वरी माता का महंत” में आप को यह तथ्य भी समझ में आ जायेगा। कुल 107 एकड़ तिकोनी जमीन पर स्थापित ’’वेटिकन नगर राज्य”  किस प्रकार से विश्व के तमाम देशों में किस तरह अपनी समानान्तर सरकार चला रहा है यह तथ्य फादर टोनी की कहानी पढ़कर ही जाना जा सकता है।

“ऊँटेश्वरी माता का महंत”  पुस्तक में चर्च के साम्राज्यवाद का जिक्र जिस तरीके से किया गया है उसे पढ़कर देशभक्त भारतवासियों की आँखें खोल देने वाला है।  पुस्तक का लेखक बताता है कि भारत में वेटिकन की ’’समानान्तर सरकार”  स्वतंत्रता से पूर्व 1945 में ही स्थापित हो गई थी (जब यहाँ कैथोलिक बिशप्स कान्फ्रेंस ऑफ इण्डिया ;ब्ठब्प्द्ध का गठन हो गया था तथा वेटिकन का राजदूत (इंटरनुनसियों) नियुक्त हो गया था। भारत सरकार और राज्य सरकारों तथा उच्चधिकारियों पर इसकी कितनी मजबूत पकड़ हैं – को भी आप स्पष्ट रूप से देख-समझ सकेंगे – समाज सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के खेल द्वारा यह समानान्तर सरकार जनता द्वारा चुनी गई सरकारों को अपने पॉकिट में किस तरह और किस ठसक से रखती हैं, आप कल्पना ही नहीं कर सकते! इस कार्य में पांचवी सेना ’’मीडिया” भी अपना अहम रोल अदा करती हैं।

“ऊंटेश्वरी माता का महंत”  पुस्तक उन लोगों को अवश्य ही पढ़ना चाहिए जो राष्ट्रीयता, स्वाभिमान और सार्वभौमिकता के मायने समझते हैं और उन्हें भी पढ़ना चाहिए जो धर्मों की चारदीवारी में कैदी जीवन बिता कर कूपमण्डूक स्थिति में जीवित रहकर, स्वयं को सार्वभौम समझे हुए है। इस पुस्तक में अप्रत्यक्ष रूप से उन लोगों के लिए भी संदेश उपस्थित हैं, जो धर्मान्तरितों की ’’घर वापसी”  चाहते हैं।

यह पुस्तक धर्मांतरित ईसाइयों की दयनीय स्थिति और चर्च नेतृत्व एवं विदेशी मिशनरियों द्वारा भारत में धर्मांतरण के लिए अपनाई जाने वाली घातक नीतियों और चर्च के राष्ट्रीय – अतंरराष्ट्रीय नेटवर्क का भी खुलासा करती है। पुस्तक में आज की परिस्थितियों का सही आंकलन हैं और इसके घातक परिणामों को रोकने के कुछ उपाय भी ढूंढने के प्रयास किये गए हैं।

“ऊंटेश्वरी माता का महंत” पुस्तक बताती है कि धर्मों की स्थापना, मानव समाज को विस्फोटक स्थिति से बचाए रखने के लिए, ’’सेफ्टी वाल्व”  के रूप में हुई है। लेकिन जब यह ’’सेफ्टी डिवाइस” (रक्षा उपकरण) गलत और अहंकारी लोगों की निजी संपत्ति बन जाते हैं, तो मानवता के लिए खतरा बढ़ जाता है। वर्तमान समय में, ऐसे ही स्व्यंभू धर्म माफियाओं की जकड़ में प्रायः प्रत्येक धर्म आ गया है। अतः अब समय आ गया है, कि ऐसे तत्वों को सिरे से नकारा जाये ताकि मानवता सुरक्षित रहे।“

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साभार- http://dalitchristian.com/ से

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इंडोनेशिया में शुरु हुआ ‘जी-हिबुरान’

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (जील) ने इंडोनेशिया में 'जी-हिबुरान' नाम से मनोरंजन चैनल लॉन्च किया है। अंग्रेजी में इसका मतलब है कि ‘जी एंटरटेनमेंट’ और हिंदी में ‘जी मनोरंजन’।

 नए चैनल में लोकप्रिय भारतीय धारावाहिकों को स्थानीय रूप में इंडोनेशियाई दर्शकों के लिए प्रसारित किया जाएगा। पिछले 14 महीने में समूह ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में यह तीसरा चैनल शुरू किया है। इससे पहले ‘जी बायोस्कोप’ और ‘जी नंग’ चैनल क्षेत्र में शुरू किए गए थे।

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मारवाड़ी सम्मेलन की गाजियाबाद शाखा का पदस्थापन समारोह

गाजियाबाद। दिल्ली प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन की गाजियाबाद शाखा का पदस्थापन समारोह होटल दिल्ली सीजल्स, सूर्यनगर में आयोजित किया गया जिसमें दिल्ली प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष श्री पवन कुमार गोयनका एवं महामंत्री श्री राजकुमार मिश्रा  मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। गाजियाबाद शाखा के अध्यक्ष श्री राजेश जालान एवं महामंत्री श्री शशि खेमका ने अतिथियों का स्वागत किया। 

नई शाखा के पदाधिकारियों के चयन पर अपनी शुभकामनाएं देते हुए श्री पवन कुमार गोयनका ने दिल्ली और एनसीआर में मारवाड़ी समाज के सुदृढ़ संगठन की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि मारवाड़ी समाज दिल्ली और एनसीआर में अपनी जनकल्याणकारी, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों के लिए तत्पर हो। 
इस अवसर पर श्री राजकुमार मिश्रा ने कहा कि मारवाड़ी समाज के लोगों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के जरिये हर क्षेत्र में कामयाबी हासिल की है। श्री मिश्रा ने सम्मेलन के द्वारा दिल्ली और एनसीआर में संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। 

गाजियाबाद शाखा के अध्यक्ष श्री राजेश जालान ने बड़ी संख्या में उपस्थित मारवाड़ी भाइयों का स्वागत करते हुए कहा कि आप लोगों ने मारवाड़ी समाज को एकजुट करने का जो बीड़ा उठाया है, उसके निश्चित ही सकारात्मक परिणाम आयेंगे। उन्होंने कहा कि मारवाड़ी समाज ने अनेक क्षेत्रों में सफलता हासिल की है, लेकिन वह राजनीति के क्षेत्र में पीछे है। समाज को एकजुटता के साथ इस क्षेत्र में आगे आना चाहिए। श्री जालान ने गाजियाबाद ने प्रतिभावान छात्रों को सम्मानित करने, वृद्धों के जीवन को खुशहाल बनाने एवं महिला उत्थान के कार्यक्रमों को बड़े पैमाने पर आयोजित करने का संकल्प किया। 

शाखा के नवनिर्वाचित महामंत्री श्री शशि खेमका ने राष्ट्र के निर्माण में मारवाड़ी समाज के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि हमारे समाज ने देश के कोने-कोने में जाकर उन क्षेत्रों का विकास किया, अनेक जनकल्याणकारी वृहद योजनाओं को आकार दिया। सेवा और परोपकार के कार्यों में एक अलग पहचान बनायी है। गाजियाबाद में भी सम्मेलन अनेक योजनाओं को हाथ में लेकर सामाजिक जागृति के उपक्रम करेगा। 

इस अवसर पर शाखा के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का अभिनंदन किया गया। श्री ललित गर्ग, श्री राजेश गुप्ता, श्री ओम जालान, श्री मनीष जालान, श्री सुरेश अग्रवाल आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। 

 प्रेषकः
(बरुण कुमार सिंह)
311-312, देविका टावर्स
चंद्रनगर, गाजियाबाद-201011
मो. 9968126797

फोटो परिचयः 
दिल्ली प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष श्री पवन कुमार गोयनका सम्मेलन की गाजियाबाद शाखा के पदस्थापन समारोह को संबोधित करते हुए।

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राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं रूप में कृष्ण कुमार यादव ने कार्यभार संभाला

राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के नए निदेशक डाक सेवाएं के रूप में भारतीय डाक सेवा वर्ष 2001 बैच के अधिकारी श्री कृष्ण कुमार यादव ने  16 मार्च 2015 को कार्यभार ग्रहण कर लिया। इस क्षेत्र के अधीन कुल 10  डाक मंडल हैं।  इनमें जोधपुर-जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, चुरू, झुंझुनू, नागौर, पाली, सीकर, सिरोही-जालोर, श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ शामिल हैं। 

मूलतः उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद के निवासी श्री यादव इससे पूर्व  इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं के पद पर कार्यरत थे। एक कुशल प्रशासक के रूप में श्री यादव इससे पूर्व सूरत, लखनऊ, कानपुर, अंडमान निकोबार एवं इलाहाबाद में विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके है।  श्री कृष्ण कुमार यादव चर्चित हिन्दी साहित्यकार व ब्लाॅगर भी हैं और विभिन्न विधाओं में उनकी 7 पुस्तकें  प्रकाशित हो चुकी हैं। 

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प्रो.सूरज भान सिंह का लंबी बीमारी के बाद कल रात देहरादून में निधन !

प्रसिद्ध भाषा चिंतक और शिक्षाविद प्रो. सूरजभान सिंह का जन्म सन् 1936 में देहरादून में हुआ थ।  शिक्षाः अंग्रेज़ी, हिंदी और भाषाविज्ञान में एम.ए. और दिल्ली विश्वविद्यालय से भाषाविज्ञान में पीएच डी थे।  सन् 1988 से 1994 तक  नयी दिल्ली में भारत सरकार के वैज्ञानिक व तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष रहे।
आपके मार्गदर्शन में अंग्रेज़ी-हिंदी की पारिभाषिक शब्दावली और कोशविज्ञान का कंप्यूटरीकरण किया गया.

इससे पूर्व 10 वर्षों तक अर्थात् सन् 1995 तक आप केंद्रीय हिंदी संस्थान के नयी दिल्ली और आगरा के केंद्रों में प्रोफ़ेसरके रूप में कार्य करते रहे. सन् 1997 से 2004 तक  सी डैक, पुणे में आप सलाहकार रहे और इस पद पर कार्य करते हुए आप कंप्यूटर और वैब-आधारित ‘लीला’ हिंदी स्वयं शिक्षक  सीरीज़ और ‘मंत्र ’ नामक अंग्रेज़ी-हिंदी अनुवाद प्रणाली के अनेक प्रोग्रामों से संबद्ध रहे. रोमानिया के बुकारेस्ट विश्वविद्यालय और फ्रांस के पेरिस विश्वविद्यालय में आप विज़िटिंग प्रोफ़ेसर रहे औरअमेरिका केपेन्सिल्वेनिया विश्वविद्यालय में विज़िटिंग प्रोफ़ेसर रहते हुए आपने कंप्यूटर-साधित अंग्रेज़ी-हिंदी अनुवाद प्रणाली को सुगम बनाने के लिए हिंदी का कंप्यूटर व्याकरण विकसित किया.

प्रकाशनः ‘हिंदी का वाक्यात्मक व्याकरण’ ( 1985 ), ‘हिंदी भाषाः संरचना और प्रयोग’ (1991), ‘अंग्रेज़ी-हिंदी अनुवाद व्याकरण’ (2003).

मान-सम्मानः  भाषाविज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट और प्रशंसनीय कार्य करने के लिए अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हुए।

संपर्क सूत्र

 पताः आई- 127, नारायण विहार, दिल्ली- 110028.  मोबाइलः 8587094808

परिवार जन

 श्रीमती उमा सिंह (धर्मपत्नी), पुत्रीः मीनाक्षी थापा, दामादः कर्नल थापा, 

पुत्रः 1. मनीष सिंह – सुनीता (पत्नी), 2.आशीष सिंह – अंजली (पत्नी)  3. विकास सिंह- अनीता (पत्नी)  

वैश्विक हिंदी सम्मेलन की ओर से 
 भाषाविद् प्रो. सूरजभान सिंहजी को सादर नमन व विनम्र श्रद्धांजलि।

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विदेशी कंपनिियाँ आगे आई मोदीजी का सपना परा करने के लिए

फ्रांस, जर्मनी, इटली और चीन समेत छह देशों की 12 प्रतिष्ठित कंपनियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रॉजेक्ट डायमंड क्वॉड्रिलैटरल बुलट ट्रेन प्रॉजेक्ट का ठेका लेने की दौड़ में शामिल हो गई हैं।

रेलवे मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'डायमंड क्वॉड्रिलैटरल हाई स्पीड रेल नेटवर्क प्रॉजेक्ट के तीन कॉरिडोर का संभाव्यता अध्ययन करने के लिए टेंडर में 12 इंटरनैशनल कंपनियां भाग ले रही हैं। दिल्ली एवं मुंबई, मुंबई एवं चेन्नै और नई दिल्ली-कोलकाता हाई स्पीड रेल कॉरिडोर्स के लिए संभाव्यता अध्ययन करने के लिए निविदाएं मंगाई जा रही हैं। सर्वे के इस ठेके को हासिल करने के लिए सियुआन समेत चीन की चार कंपनियां, जर्मनी की डीबी इंटरनैशनल, फ्रांस की सिस्टारा, स्पेन की सेनर और इटली की इटालसर के अलावा बेल्जियम की एक कंपनी ने निविदा में भाग लिया है।

अधिकारी ने बताया कि एक कंपनी को डायमंड क्वॉड्रिलैटरल प्रॉजेक्ट के सिर्फ एक ही कॉरिडोर का संभाव्यता अध्ययन ही करने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह निविदा खोली गई और जुलाई तक चार महीनों के अंदर विजेताओं के बारे में निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि तीनों कॉरिडोर्स की अनुमति लागत करीब 30 करोड़ रुपये है।

2 लाख करोड़ के डायमंड क्वॉड्रिलैटरल प्रॉजेक्ट का लक्ष्य हाई स्पीड ट्रेनें चलाकर महानगरों के बीच यात्रा में लगने वाले समय को कम करना है। हाई स्पीड ट्रेन 300 किमी. प्रति घंटा की चाल से चलेगी। मौजूदा समय में सुपरफास्ट राजधानी एक्सप्रेस दिल्ली से मुंबई के बीच करीब 16 घंटे में दूरी तय करती है। हाई स्पीड ट्रेन के चालू होने का बाद यात्रा का समय करीब आधा रह जाएगा। इसी प्रकार दिल्ली एवं अन्य महानगरों के बीच लगने वाले समय में भी बुलट ट्रेन के चालू होने के बाद कमी आ जाएगी।

मौजूदा समय में डायमंड क्वॉड्रिलैटरल प्रॉजेक्ट के भाग के रूप में दिल्ली-चेन्नै रूट का संभाव्यता अध्ययन चीन कर रहा है।

साभार-इकॉनामिक टाईम्स से 

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दूसरों की मालिश कर पेट पाल रहे पहले हिंद केसरी पहलवान

वर्ष 1958 में देश के पहले हिंद केसरी पहलवान का खिताब जीतने वाले रामचंद्र केसरी आज दूसरों की मालिश व रोगियों का उपचार कर किसी तरह घर चला रहे हैं। 200 से ज्यादा पुरस्कार जीत चुके केसरी को पूर्व प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद भी अब तक 50 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है।

नेपानगर के पुराने जर्जर मकान में पत्नी सीताबाई के साथ रह रहे 83 वर्षीय श्री केसरी आज भी युवाओं को कुश्ती के दांवपेंच सिखा रहे हैं। हालांकि अब वे अखाड़े नहीं जाते, लेकिन घर के आसपास रहने वाले युवाओं को स्वस्थ्य जीवन जीने की कला में पारंगत करते हैं। प्रशिक्षण देकर कई युवाओं को पहलवान बना चुके हैं।

250 से ज्यादा कुश्तियां लड़ीं

रामचंद्र पहलवान ने 1950 से 1965 तक 250 से ज्यादा कुश्तियां लडीं। 1992 तक नेपा मिल के अखाड़े में पहलवानों को कुश्ती के दांवपेंच सिखाए। करीब 40 साल के पहलवानी जीवन में उन्होंने छोटे-बड़े 100 से ज्यादा पहलवान तैयार किए। इनमें से रतन पहलवान, प्रताप पहलवान, घन्सुभाई पहलवान, मदनमोहन पहलवान आदि राज्य स्तर तक प्रतिभा दिखा चुके हैं।

पहली कुश्ती: ज्ञानीराम को पटखनी दी 

हिंद केसरी भारतीय शैली की राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप है। यह ऑल इंडिया एमेच्योर रेसलिंग फेडरेशन (एआईएडब्ल्यूएफ) से संबद्ध है। 1958 में इसकी शुरुआत हुई थी। 1 जून 1958 को पहली स्पर्धा हैदराबाद के गोसा महल स्टेडियम में हुई थी।

इसमें रामचंद्र ने थल सेना के नामचीन पहलवान ज्ञानीराम को मात्र सात मिनट में पटखनी देते हुए हिंद केसरी का खिताब जीता था। 2011 से पहली बार महिला प्रतिभागियों को भी हिंद केसरी स्पर्धा में भाग लेने की अनुमति प्रदान की गई। श्री केसरी ने बाद में इंदौर के नामचीन पहलवान अमरसिंह, जबलपुर के हन्‍नू पहलवान, हैदराबाद के सुभान पहलवान आदि को भी पटखनी दी।

महाभारत में ऑफर हुआ था भीम का रोल 

श्री केसरी के पिता बाबूलाल भी कुशल पहलवान थे। पिता की परंपरा को उन्होंने आगे बढ़ाया। रामचंद्र को फिल्म निर्माता बीआर चोपड़ा ने प्रसिद्ध टीवी सीरियल महाभारत में भीम के रोल के लिए चयनित किया था, लेकिन जिस दिन उन्हें मुंबई पहुंचना था, उसके एक दिन पूर्व पिता का देहांत हो गया। इसके चलते वे मुंबई नहीं जा सके।

प्रधानमंत्री कर चुके हैं सम्मानित

1981 में दिल्ली में हुए एशियाई गेम्स में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने श्री केसरी को सम्मानित करते हुए 50 एकड़ जमीन देने की घोषणा की थी। इसके बाद राजस्व विभाग ने नेपानगर क्षेत्र में जमीन का चयन भी किया, लेकिन विभागीय प्रक्रियाओं में मामला अटक गया। 10 जून 2013 को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने दो लाख का चेक देकर श्री केसरी का सम्मान किया था। रुस्तमे हिन्द स्व.दारासिंह के हाथों भी श्री केसरी सम्मानित हो चुके हैं।

कोरे आश्वासन मिले 

आज भी पुराने जर्जर मकान में रह रहा हूं। बारिश के दिनों में छत टपकती है। पूर्व प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद मुझे अब तक जमीन नहीं मिल सकी। पेंशन और रेलवे पास के लिए भी मैंने गुहार लगाई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब क्षेत्र के जनप्रतिनिधि राष्ट्रपति पुरस्कार दिलाने का आश्वासन दे रहे हैं। अब देखते हैं इस आश्वासन का क्या होता है?

साभार: http://naidunia.jagran.com/ से 

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शुद्ध जल – भविष्य के लिए जल

उदयपुर।। विश्व जल दिवस के अवसर पर झील मित्र संस्थान , झील संरक्षण समिति व डॉ मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित " शुद्ध जल – भविष्य के लिए जल " विषयक वृहत संवाद में समग्र जल प्रबंधन पर विचार विमर्श किया गया।

जल विशेषज्ञ डॉ अनिल मेहता ने कहा कि उदयपुर घाटी का अपना एक विशिष्ठ प्राकृतिक एवं भौतिक स्थान है।  घाटी का यह स्वरुप ही उदयपुर में जल की उपलब्धता एवं शुद्धता को सुनिश्चित करता है। बड़े पैमाने पर घाटी की पहाड़ियों की कटाई , वन विनाश से जल उपलब्धता कम हुई है तथा प्रदुषण का स्तर बढ़ा है। जल ग्रहण क्षेत्र में हुई विकृतियों के कारण भू जल पुनर्भरण , प्रवाह पर दुष्प्रभाव पड़ा है तथा मिटटी के कटाव में तेजी आई है।

झील मित्र संस्थान के तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि जल स्त्रोतों में विषैले रसायन , सीवर आदि समाहित हो रह है।  जल को भौतिक व रासायनिक रूप से साफ़ कर देना ही उसके स्वास्थ्य का सूचक नहीं है। जैव विविधता का होना ही जल स्त्रोतों के स्वास्थ्य का पैमाना है। एनएलसीपी ने एक अवसर उदयपुर की झीलों की गुणवत्ता सुधारने का दिया था किन्तु वह अवसर खूबसूरती बढ़ने की कवायद में खो दिया।  जल शुद्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।

जलसंचयक महेश गढ़वाल ने कहा कि शहर की बढ़ती जल जरुरत को पूरा करने के लिए वर्षा जल संचयन के प्रयासों में तेजी लाये तो वर्त्तमान  भविष्य के लिए जल की बहुतायत हो जाएगी ।शासन प्रशासन को वर्षा जल संचयन हेतु सहायता एवं जो लोगव् संस्थान इसमें लगे हुए है  उन्हें मदद व् प्रोत्साहित करना चाहिए।

ट्रस्ट सचिव नन्द किशोर शर्मा ने कहा जल असीमित नहीं है।  जल का उपयोग मितव्ययी होना चाहिए। उदयपुर के लिए झीले पेयजल स्त्रोत है। झीलों में कचरा , पोलिथिन,खाद्य सामग्री आदि नहीं डाले ये कचरा पात्र नहीं है । जलीय गुणवत्ता ही मानव व प्रकृति के स्वास्थ्य को बचा सकती है। जलस्त्रोतों को बचाने  में नागरिकता का भाव जरुरी है। वरिष्ठ नागरिक रमेश सिंह ने कहा कि झीलों के किनारे शौच निवृति को रोका जाना चाहिये।

संवाद से पूर्व स्वरुप सागर से घरेलू कचरा,बदबू युक्त खाद्य सामग्री, सड़ा  मांस, शराब की बोतले, पॉलीथिन, जलीय घास निकाली। श्रमदान में रमेश सिंह राजपूत,रामलाल गेहलोत,अम्बालाल नकवाल,डालू गमेती,हरीश चन्द्र पुरोहित , बी  एल पालीवाल,अजय सोनी ,बंसी लाल मीणा,विक्की कुमावत,दीपेश स्वर्णकार, तेज शंकर पालीवाल ,नन्द किशोर शर्मा ने भाग लिया।

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