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केरल के मंत्री मोदी से विकास का ज्ञान लेने गुजरात आएंगे

काँग्रेस शासित केरल से वरिष्ठ मंत्रियों की अगुवाई में विधायक का एक समूह वहां शहरी विकास को लेकर की गई पहलों का अध्ययन करने जा रहा है। केरल के 11 विधायकों-मंत्रियों का प्रतिनिधिमंडल राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री के. सी. जोसफ के नेतृ्त्व में 12 दिसंबर को वहां पहुंचने के बाद राज्य सरकार की ओर से शहरी विकास को लेकर उठाए गए कदमों का अध्ययन करेगा।

गुजरात जाने वाली टीम में जोसफ, वित्त मंत्री केएम मणि, शहरी और अल्पसंख्यक मंत्री मंजलमकुझी और पंचायती राज्य मंत्री एमके मुनीर के अलावा सीपीएम, सीपीआई और नैशनल सेक्युलर कॉफ्रेंस के विधायक शामिल होंगे। जोसफ वरिष्ठ कांग्रेस नेता हैं, जबकि मणि केरल कांग्रेस (मणि) के नेता हैं। मुनीर मुस्लिम लीग से आते हैं। कार्यक्रम के मुताबिक, सभी विधायक वहां के कुछ पर्यटन स्थलों का भी मुआयना करेंगे।

इधर कांग्रेस के वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने 32 पन्नों की बुकलेट जारी कर गुजरात के विकास मॉडल की धज्जियां उड़ाई हैं। इससे पहले राज्य के श्रम मंत्री एसबी जॉन की 18 अप्रैल, 2013 को अहमदाबाद में मोदी से हुई मुलाकात के बाद केरल की राजनीति में भूचाल आ गया था। लेफ्ट पार्टियों के निशाने पर आए मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने स्पष्टीकरण दिया था कि मुलाकात के लिए उनकी अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने जॉन से स्पष्टीकरण भी मांगा था। बाद में जॉन ने माफी भी मांगी थी।

साल 2009 में सीपीएम ने मोदी के काम की तारीफ करने वाले अपने सांसद एपी अब्दुल्लाकुट्टी की सदस्यता रद्द कर दी थी। बाद में अब्दुल्लाकुट्टी कांग्रेस के टिकट पर कन्नूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। केरल के श्रीनारायण मठ द्वारा मोदी को एक कार्यक्रम का मुख्य अतिथि बनाने की कांग्रेस और सीपीएम ने आलोचना की थी, जबकि वरिष्ठ सीपीएम नेता वीएस अच्युतानंदन ने इसी मुद्दे पर कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया था।

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कैमरे में कैद हुई तरुण तेजपाल की बेशर्मी!

महिला पत्रकार के यौन उत्पीड़न के आरोपों में फंसे तहलका के संपादक तरुण तेजपाल की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दरअसल गोवा पुलिस को होटेल से मिली सीसीटीवी फुटेज ने पीड़िता के बयान में बताए गए तथ्यों की पुष्टि की है।

फुटेज की जांच कर रही टीम में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि जिस लिफ्ट में कथित रूप से यौन उत्पीड़न की घटना हुई थी, उसके बाहर की सीसीटीवी फुटेज विक्टिम के बयान की पुष्टि करती है। इस फुटेज से तेजपाल की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। पीड़िता ने बुधवार को मैजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया था।

'होटेल के ब्लॉक-7 की लिफ्ट के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की सात नवंबर की फुटेज में यह साफ है कि लिफ्ट में कुछ गलत हुआ था।' उन्होंने कहा, 'फुटेज में शुरुआत में दिखाई देता है कि तेजपाल और पीड़िता हॉलिवुड ऐक्टर रॉबर्ट डीनीरो को उनके कमरे तक छोड़ते हैं। तेजपाल रात लगभग नौ बजे लिफ्ट में युवा पत्रकार के साथ प्रवेश करते दिखाई देते हैं और इस दौरान उनके हाथ महिला के कंधों पर हैं।'

'डेढ़ घंटे बाद रात करीब साढ़े 10 बजे तेजपाल ग्राउंड फ्लोर पर उसी लिफ्ट के पास महिला को अंदर खींचते दिखाई दे रहे हैं।' अधिकारी ने बताया कि फुटेज में लिफ्ट लगभग दो मिनट बाद दूसरी मंजिल पर खुलती दिखाई देती है। उन्होंने कहा, 'महिला अपने कपड़े ठीक करते हुए लिफ्ट से बाहर आती और सीढ़ियं से नीचे उतरती नज़र आ रही है तथा तेजपाल उसका पीछा करते दिखाई देते हैं।'

महिला पत्रकार ने तेजपाल पर आरोप लगाया है कि उसने तहलका द्वारा आयोजित 'थिंक फेस्ट' के दौरान सात और आठ नवंबर को उसका उत्पीड़न किया था। पत्रकार ने तहलका की मैनेजिंग एडिटर (जिन्होंने गुरुवार को पद से इस्तीफा दे दिया) शोमा चौधरी को पिछले सोमवार को इस संबंध में ई-मेल भेजकर शिकायत की थी। इस मामले का संज्ञान लेते हुए गोवा पुलिस ने तेजपाल के खिलाफ बलात्कार और शील भंग करने का मामला दर्ज किया है। हालांकि तेजपाल ने शुरुआत में इस घटना के लिए महिला से माफी मांगी थी, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि यह, 'शराब के नशे में किया गया हंसी मजाक' था और सबकुछ 'सहमति' से हुआ था। पत्रकार ने तेजपाल के दावों का खंडन किया है।

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जैन संत की हत्या से आहत समाज ने की संतों की सुरक्षा की मांग

मुंबई। महाराष्ट्र के रायगड़ जिले में सोमवार की रात हुई जैन संत प्रशांत विजयजी महाराज की निर्मम हत्या से आहत जैन समाज के प्रमुख लोगों ने संतों की सुरक्षा की मांग की है। विधायक श्री मंगल प्रभात लोढ़ा के नेतृत्व में महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक श्री संजीव दयाल से मिलकर एक प्रतिनिधि मंडल ने इस केस को फास्ट ट्रैक अदालत में चलाने और हत्या के असली उद्देश्य को जानने एवं तहकिकात के लिए पुलिस की एक टीम तत्काल आरोपियों से संबंधित स्थानों पर भेजने की मांग की है। विधायक लोढ़ा के साथ इस प्रतिनिधि मंडल में जैन शक्ति फाउंडेशन के राष्ट्रीय महामंत्री कनक परमार, वर्धमान संस्कार धाम के अतुल शाह, डॉ. विनोद कोठारी, डॉ. प्रवीण जैन, राजूभाई लोढ़ा, भरत बाफना एवं जयंतीलाल सोट्टानी सहित कुछ अन्य प्रमुख लोग थे।  

पुलिस महानिदेशक श्री दयाल से मिलने के बाद विधायक लोढ़ा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक ने समाज की दोनों मांगों पर आवश्यक कारवाई करने के आदेश दिए एवं संतों की सुरक्षा पर तत्काल विशेष ध्यान देने का आश्वासन दिया। विधायक लोढ़ा ने बताया कि संतों के लिए मांगे जाने पर तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन भी पुलिस महानिदेशक ने दिया।  

सोमवार को रायगड़ जिले के रोहा कस्बे के पास पोतनेर गांव में सुप्रसिद्ध जैन संत परम पूज्य प्रशांत विजय महाराज साहब रात को करीब दस बजे सोने जा रहे थे, तभी दो लोगों ने उनके सिर पर सरिए से वार किया। जिससे महाराज साहब की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई। विधायक लोढ़ा ने सरकार से मांग की है कि संतों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए जाएं एवं जिससे घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने इस घटना से आहत जैन समाज की भावनाओं को पुलिस महानिदेशक के समक्ष रखा एवं हत्यारों को जल्द से जल्द सजा की मांग की।

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‘केबीसी-7’ की महिला करोड़पति बनी फिरोज फातिमा

22 साल की फ़िरोज़ फ़ातिमा ने 'केबीसी-7' में एक करोड़ रुपए का इनाम जीता।� इस सत्र के आख़िरी एपिसोड में उत्तर प्रदेश की फ़िरोज़ फ़ातिमा ने एक करोड़ रुपए की इनामी राशि जीती।

फ़िरोज़ विज्ञान की छात्रा हैंऔर इनाम जीतने के बाद उन्होंने कहा कि वो अपने पिता के इलाज के लिए गए लोन को चुकाएंगी और बचे पैसे से बिज़नेस करेंगीं।

रविवार, एक दिसंबर को इस एपिसोड का प्रसारण होगा।

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चड्ढा की कंपनी ने 2 करोड़ रुपये लगाए

इसी साल जून में बनाई गई कंपनी थ्राइविंद आर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के अंदर प्रूफ्रॉक को रखा गया था। 10 जुलाई को कंपनी ने इसके दो शेयरधारकों को 10 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बांट दिए, जिसमें 72 फीसदी शेयर तेजपाल के पास बाकी के 28 फीसदी शेयर नीना तेजपाल को दे दिया गए।

26 अगस्त को चड्ढा होटल प्राइवेट लिमिटेड ने 2 करोड़ रुपये में 1800 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से 11,111 शेयर खरीद लिए।

इंडियन एक्सप्रेस को दिए बयान में चड्ढा समूह के प्रवक्ता ने बताया कि हमने इसमें फायदा देखा और इसमें निवेश किया। हमारा इरादा था कि एक बार जब यह बिजनेस मॉडल चल निकले तो मुनाफा कमा कर हम निकल जाएं। हम इसके प्रतिदिन के काम में शामिल नहीं थे।

एक्सप्रेस ने जब नीना तेजपाल से ईमेल कर इस वेंचर के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने इसके बार में कोई जवाब नहीं दिया।

दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके, एम ब्लॉक में प्रूफॉक का काम अब भी चल रहा है। क्लब तहलका के ऑफिस के कुछ बिल्डिंग आगे की बिल्डिंग में है। वहां काम कर रहे लोगों ने बताया कि इसका काम जुलाई में शुरू हुआ था और अगले तीन महीनों में यह पूरा बनकर तैयार हो जाएगा। रियल एस्टेट एजेंटों का कहना है कि इस जगह का किराया सालाना 6.5 करोड़ रुपये के आसपास होगा।

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कोलगेट, पामोलिव जैसी कंपनियों ने खूब दिखाए फर्जी विज्ञापन

भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) ने सितंबर महीने में कई प्रमुख कंपनियां के 121 विज्ञापन अभियानों के खिलाफ शिकायतों को सही ठहराया है। इन कतिपय विज्ञापनों में अवैध सामग्री दिखाई गई है या बड़े बड़े दावे किए गए हैं। इन कंपनियों में हिंदुस्तान यूनीलीवर, कोलगेट पामोलिव, ग्लेक्सोस्मिथक्लाइन, पिरामल हेल्थकेयर, आइडिया सेल्यूलर, गोदरेज व बायस शामिल हैं।

एएससीआई की ग्राहक शिकायत परिषद (सीसीसी) के अनुसार आलोच्य महीने में दिग्भ्रमित करने वाले विज्ञापनों से जुड़ी अधिकतर शिकायतें शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पर्सनल केयर खंड से जुड़ी थी। शिक्षा क्षेत्र में 88 विभिन्न विज्ञापनों को दिशा निर्देशों का उल्लंघन करने वाला माना गया। इनमें ट्राइमफेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट तथा इनलिंगुआ बेंगलूर का विज्ञापन शामिल है। ग्लेक्सोस्मिथक्लाइन कंज्यूमर हेल्थकेयर का जूनियर हार्लिक्स संबंधी विज्ञापन, कोलगेट पामोलिव, कोलगेट स्ट्रांग सबंधी विज्ञापन इसमें शामिल है।

 

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राजपाल यादव को जेल भेजा

दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉमेडियन राजपाल यादव को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजने के आदेश दिए हैं।  राजपाल पर पांच करोड़ रूपये के गबन करने का आरोप है। इस मामले में उनकी पत्नी को भी आरोपी बनाया गया है। यह आरोप दिल्ली के एक बिजनेसमैन ने लगाया है जिसकी शिकायत के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजपाल को दस दिनों की रिमांड में ले लिया।

जस्टिस श्रीधर एस मुरलीधर ने राजपाल की पत्नी को न्यायालय की कार्यवाही खत्म होने तक रजिस्ट्रार जनरल के दफ्तर में उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।

न्यायाधीश ने इस जोड़े का पक्ष रख रहे दो वकीलों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का नोटिस जारी किया है।

राजपाल के खिलाफ दिल्ली के एक व्यापारी एम जी अग्रवाल ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। उनका आरोप है कि राजपाल ने उनसे अपनी फ़िल्म अता पता लापता फ़िल्म के लिए पांच करोड़ रूपये उधार लिए थे। राजपाल ने अदालत को भी भरोसा दिलाया था कि वह पैसे लौटा देंगे मगर ऐसा नहीं हुआ और इसी वजह से कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया।  

सोमवार को भी इस मामले में कोर्ट में काफी ड्रामा हुआ चला था। सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई होनी थी।पेशी पर राजपाल तो आये मगर उनकी पत्नी नहीं आईं थीं।इसपर कोर्ट काफी नाराज हुआ मगर राजपाल को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा।उल्टा वह कोर्ट को चकमा देकर भाग खड़े हुए।उन्होंने बहाना बनाया कि वह पत्नी को साथ लेकर आते हैं मगर खुद भी गायब हो गए। कोर्ट ने इसे अपनी अवमानना मानते हुए राजपाल,उनकी पत्नी और दो वकीलों को जमकर लताड़ा और दस दिन की जेल का फरमान सुना दिया।

 

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तलवार दंपत्ति की सजा के बहाने हम अपने बच्चों के दिलों में भी झाँकें

देश की अब तक सबसे बहुचर्चित दोहरे कत्ल संबंधी 'मर्डर मिस्ट्रीÓ का अदालत की ओर से पटाक्षेप हो चुका है। लगभग साढ़े पांच वर्ष पूर्व 16 मई 2008 को नोएडा में हुए आरूषि तलवार व हेमराज के कत्ल पर गाजि़याबाद की सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए आरूषि के माता-पिता नुपुर तलवार व डॉक्टर राजेश तलवार को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है।
 

अदालत ने भले ही बिना पर्याप्त सुबूत और गवाह के ही इन्हें आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है परंतु आपराधिक गतिविधियों पर नज़र रखने वाले विश£ेषक शुरु से ही इस बात पर संदेह कर रहे थे कि हो न हो यह दोहरा कत्ल आरूषि के माता-पिता द्वारा ही अंजाम दिया गया है तथा इस दोहरी हत्या का कारण तलवार दंपति द्वारा अपनी 14 वर्षीय पुत्री को 45 वर्षीय अपने घरेलू नौकर नेपाली मूल के हेमराज के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा जाना है। लिहाज़ा इसे शुरु से ही ऑनर किलिंग माना जा रहा था। परंतु चूंकि तलवार दंपति इतने संभ्रांत व प्रतिष्ठित वर्ग से संबद्ध थे तथा इस दोहरे हत्याकांड के बाद उन्होंने लंबे समय तक बड़ी ही खूबसूरती और सफाई के साथ जांच अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की। इससे थोड़ा-बहुत संदेह तो ज़रूर होने लगा था कि हो सकता है तलवार दंपति के अतिरिक्त इस परिवार से रंजिश रखने वाले किसी दूसरे व्यक्ति ने ही यह अपराध अंजाम दिया हो।

इस मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में नाकाम रहने वाली सीबीआई ने तो मामले में अपनी क्लोज़र रिपोर्ट भी अदालत में पेश कर दी थी। परंतु गाजि़याबाद की सीबीआई की विशेष अदालत ने इसी क्लोज़र रिपोर्ट को ही मुकद्दमे का आधार मानकर सुनवाई पूरी की और आखिरकार इस आधार पर तलवार दंपति को आजीवन कारावास की सज़ा सुना डाली कि चंूकि तलवार दंपति के घर में हत्या के समय केवल तलवार दंपति ही वहां मौजूद थे लिहाज़ा इस दोहरे हत्याकांड को उन्होंने ही अंजाम दिया है।

मुकद्दमे संबंधी इस पूरे प्रकरण में एक बात और भी विचारणीय है कि वर्तमान दौर में उपलब्ध तमाम आधुनिक वैज्ञानिक एवं तकनीकी साधनों व मशीनों के बावजूद सीबीआई अथवा दूसरी जांच एजेंसियां तलवार दंपति से न तो हत्या का सच उगलवा सकीं न ही झूठ पकडऩे वाली मशीन उनके 'झूठÓ को पकड़ सकी। बहरहाल साढ़े पांच वर्ष तक चले इस रहस्यमयी हत्याकांड के पेचीदा मुकद्दमे में सीबीआई अदालत द्वारा 204 पृष्ठों का अपना जो फैसला सुनाया गया है उसके बाद तलवार दंपति अब गाजि़याबाद की डासना जेल में अपनी नई भूमिका शुरु कर चुके हैं। डाक्टर राजेश तलवार को कैदी नंबर 9342 के रूप में नई पहचान दी गई है तथा उन्हें जेल के स्वास्थय विभाग संबंधी टीम में सेवा करने का काम सौंपा गया है। इसी प्रकार नुपुर तलवार डासना जेल में कैदी नंबर 9343 के रूप में चिन्हित की जाएंगी तथा उनका काम कैदियों को शिक्षित करना होगा। रविवार के अतिरिक्त प्रतिदिन सुबह दस बजे से सायं पांच बजे तक उन्हें अपनी ड्यूटी देनी होगी। इसके बदले इन्हें पारिश्रमिक भी प्रदान किया जाएगा।              

कानून के जानकारों के अनुसार इस बात की पूरी संभावना है कि तलवार दंपति को संभवत: उच्च न्यायालय से ही बरी कर दिया जाएगा। अन्यथा उच्चतम न्यायालय से तो उन्हें अवश्य बरी कर दिया जाएगा। परंतु हेमराज की विधवा निचली अदालत के फैसले से संतुष्ट तो ज़रूर है मगर वह अपने पति की हत्या के लिए तलवार दंपति को फांसी की सज़ा दिए जाने की मांग करती सुनाई दी। इसका मुख्य कारण यही था कि हत्या के फौरन बाद तलवार दंपति ने जांच को गुमराह करने के लिए सर्वप्रथम हेमराज पर ही कत्ल का इल्ज़ाम लगाया था। परंतु हेमराज की लाश उन्हीं के घर की छत पर  मिलने पर जांच की दिशा बदल गई।

हेमराज की विधवा को इसी बात पर अधिक गुस्सा है कि तलवार दंपति ने एक तो उसके पति की हत्या की दूसरे उसकी लाश को छिपाकर उसी को हत्यारा बताने का दु:स्साहस भी किया। इतना ही नहीं बल्कि तलवार दंपति ने जांच के दौरान कई मोड़ पर और कई बार जांच एजेंसियों को हत्या के संबंध में गुमराह करने की कोशिश की। अदालत ने तलवार दंपति को जो सज़ा सुनाई है उसमें आरूषि व हेमराज की उनके द्वारा हत्या किए जाने के अतिरिक्त हत्या संबंधी साक्ष्यों को नष्ट करने तथा इस संबंध में होने वाली जांच को गुमराह करने जैसे संगीन आरोप भी शामिल हैं।              

इस पूरे प्रकरण को लेकर कुछ ज्वलंत प्रश्न भी सामने आते हैं। जिनका जवाब अदालत तो नहीं परंतु समाज को ही तलाशना पड़ेगा। एक तो यह कि संभ्रांत एवं विशिष्ट परिवार की परिभाषा क्या है? क्या चंद पैसे पास आ जाने, गोल्फ खेलना शुरु कर देने, घर में अकेले या दोस्तों के साथ बैठकर व्हिस्की के जाम टकराने, लायंस क्लब या रोटरी क्लब के सदस्य बनने या जिमख़ानों में जाकर जुआ खेलने अथवा क्लब में डांस करने मात्र जैसी खोखली व ढोंगपूर्ण बातों से कोई व्यक्ति संभ्रांत अथवा विशिष्ट कहा जा सकता है?

 उपरोक्त परिस्थितियां ही ऐसी होती हैं जोकि तथाकथित संभ्रांत परिवार के बच्चों को गलत रास्ते पर चलने तथा गलत दिशा में अपना दिमाग दौड़ाने का मौका व समय उपलब्ध कराती हैं। ज़ाहिर है जब माता-पिता अपनी ऐशपरस्ती और मनोरंजन में मशगूल हैं तो माता-पिता की उपेक्षा का शिकार उनका बच्चा भी अपनी मनमर्जी के रास्ते पर आसानी से चल पड़ेगा। और आधुनिकता के इस दौर में जबकि घर बैठे कंप्यूटर,मोबाईल फोन, लैपटॉप तथा इनपर दिखाई जाने वाली तरह-तरह की अच्छी-बुरी वेबसाईटस मौजूद हैं फिर आखिर वह मां-बाप अपने बच्चों को किसी गलत राह पर जाने से कैसे रोक सकते हैं जिन्हें अपनी ऐशपरस्ती से ही फुर्सत नहीं? यदि तलवार दंपति ने पहले से ही इस बात पर निगरानी रखी होती कि जवानी की दहलीज़ पर कदम रखने जा रही उनकी इकलौती पुत्री घर में रहने वाले नौकर से इतना अधिक घुलने-मिलने न पाए तो शायद नौबत यहां तक न पहुंचती। परंतु ऐसा नहीं हो सका। और माता-पिता की निगरानी के अभाव में आरूषि-हेमराज प्रकरण यहां तक आ पहुंचा कि तलवार दंपति को इन दोनों को मौत के घाट उतारना पड़ा।              

आरूषि-हेमराज दोहरे कत्ल को लेकर एक और बात साफतौर पर उजागर होती है कि भले ही कोई भारतीय अपने धन व संपन्नता के बल पर कितना ही पाश्चात्य होने का अभिनय क्यों न करे परंतु हकीकत में उसके अंदर भारतीय संस्कृति व भारतीय परंपरा ही प्रवाहित होती रहती है। यदि इस प्रकार की घटना पश्चिमी देशों में हुई होती और कोई माता-पिता अपने नौकर को अपनी पुत्री के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देख लेता तो संभवत: मामला दोहरे कत्ल तक तो कतई नहीं पहुंचता। क्योंकि पश्चिमी संस्कृति व स यता ऐसी बातों को इतना अधिक महत्व नहीं देती है। परंतु हमारे देश में तथा दक्षिण एशिया के और कई देशों में इस प्रकार के रिश्तों को अवैध व असहनीय माना जाता है।

परिणामस्वरूप तथाकथित ऑनर किलिंग के नाम से कहीं न कहीं किसी न किसी की हत्या होने की खबरें आती रहती हैं। निश्चित रूप से किसी की हत्या करना समाज व कानून की नज़र में बहुत बड़ा अपराध है और ऐसा हरगिज़ नहीं होना चाहिए। परंतु इस वास्तविकता से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि हमारे देश में बेटी की इज़्ज़त को जिस प्रकार परिवार की इज़्ज़त व आबरू से जोड़कर देखा जाता है उस सोच के मद्देनज़र यह घटना यदि डाक्टर राजेश तलवार के अतिरिक्त किसी दूसरे परिवार में भी घटी होती तो भी संभवत: उसका अंजाम भी यही होना था। कोई भी भारतीय माता-पिता अपनी किशोरी को अपने घर के नौकर के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखना कतई सहन नहीं कर सकते।

इसमें तलवार दंपति का कोई अति विशेष दोष नहीं बल्कि इस प्रकार के मानसिक हालात के पैदा होने का कारण तलवार दंपति का भारतीय समाज में परवरिश पाना तथा यहां उनका संस्कारित होना ही शामिल है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत वर्ष ही वह देश है जहां लड़कियों को पैदा होते ही मार दिया जाता था ताकि परिवार के लोगों का सिर किसी के आगे झुकने न पाए। ऐसी संस्कृति व परंपरा वाले देश में कोई माता-पिता अपनी 14 वर्षीय बेटी को घर के नौकर के साथ आपत्तिजनक अवस्था में आखिर कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं? आरूषि-हेमराज की हत्या व इसके बाद तलवार दंपति को सुनाई गई सज़ा से संबंधित उपरोक्त सुलगते सवालों के जवाब भारतीय समाज ज़रूर तलाश कर रहा है।

                                                                    

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निर्मल रानी                                                            

1618, महावीर नगर

अंबाला शहर,हरियाणा।

फोन-0171-2535628

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असाधारण तेरह कहानियों का संग्रह है फराज़ की नई पुस्तक ‘द अदर साइड’

अपनी पहली रोमांटिक पुस्तक ‘ट्रूली डिपली मेडली’ की जबरदस्त सफलता के उपरान्त युवा लेखक फराज़ काज़ी अपनी नई पुस्तक ‘द अदर साइड’ को लेकर फिर से चर्चा में हैं। हाल ही में पुस्तक का विमोचन समारोह नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जहां लोकप्रिय गायिका शिबानी कश्यप, डिजाइनर संजना जाॅन और पैरानाॅर्मल एक्सपर्ट गौरव तिवारी ने फराज़ काज़ी व विवेक बनर्जी द्वारा लिखित इस नई पुस्तक का विमोचन किया।

‘द अदर साइड’ में जाने-माने लेखक विवेक बनर्जी ने फराज़ का साथ दिया है और यह फराज़ की पहली रोमांस पुस्तक जिसने फराज़ को ‘द निकोलस स्पाकर््स आॅफ इंडिया’ की ख्याति दिलायी से बिल्कुल अलग है। ‘ट्रूली डिपली मेडली’ के लिए पाठकों एवम् आलोचकों ने फराज़ को काफी सराहा और उन्हें नेशनल बुक ट्रस्ट आॅफ इंडिया द्वारा नेशनल डेबू यूथ फिक्शन अवार्ड से भी नवाजा गया है।

अपनी दूसरी पुस्तक और विवेज बनर्जी के साथ साझेदारी के विषय में फराज़ ने कहा कि ‘विवेक सर के साथ काम करके स्वयं को भाग्यशाली महसूस कर रहा हूँ, क्योंकि उनके योगदान के चलते विषय में असरदार बदलाव आया। हमने साथ मिलकर ‘द अदर साइड हेतु’ दूसरे पक्षों पर खासा ध्यान दिया है। हालांकि इस वर्ग की और भी पुस्तकें बाज़ार में मौजूद हो सकती हैं लेकिन हमने जिस अंदाज में इस किताब पर काम किया है वह एक विशिष्ट पहल है। विश्व में पहली ही बार एक ऐनिमेटेड कवर वाली किताब है ‘द अदर साइड’। जिसके कवर का अनावरण हाल ही में डिजीटल प्लेटफाॅर्म पर किया गया है। इसके अतिरिक्त यूट्यूब यूज़र्स हेतु हमने दो टीज़र भी जारी किये है और हमें उम्मीद है कि किताब के विषय के अनुकूल यह टीजर्स पाठकों को वास्तव में डराने में कामयाब रहेंगे।’’

रोमांस से रोमांच की तरफ रूख करने के विषय में फराज़ ने बताया कि ‘बतौर लेखक मैं किसी एक शैली में नहीं बंधना चाहता। मेरी रोमांस पुस्तक की सफलता ने मुझे काफी उत्साहित जरूर किया लेकिन मैं केवल रोमांस आधारित किताब ही नहीं लिखना चाहता। दूसरे विषय में काम करना काफी चुनौतिपूर्ण अनुभव रहा क्योंकि यह विषय ऐसा है जिसे बहुत ज्यादा लेखकों ने नहीं अपनाया है। एक अन्य कारण यह भी रहा कि वास्तविकता में भारत मिथकों और लोककथाओं का देश है और हमारी एक समृद्ध परंपरा है। हम सभी को जीवन के एक मोड़ पर किसी न किसी रूप में भूतिया कहानियों का से सामना होता है और मौज-मस्ती भरे युवा सफर में हम अक्सर डरावनी कहानियों एवम् घटनाओं पर चर्चा करते हैं। ऐसे में जरूरी था कि कोई इस विषय पर लिखने की पहल करे और उस डर की चर्चा करे जो हमने अनुभव किया है साथ ही एक अज्ञात डर के साथ जीना सीख पायें।’

‘द अदर साईड’ 13 असाधारण कहानियों का संग्रह है; एक ऐसी दुनिया जो हमारी आंखे देखना नहीं चाहती, हमारे कान जिसके बारे में सुनना नहीं चाहते, जिसे हम पूरी तरह से अनदेखा कर देना चाहते हैं। यह पुस्तक हर उस व्यक्ति के लिए है जो बहादुरी के साथ एक ऐसे सफर के आमंत्रण को स्वीकार कर सकता है जहां वास्तविकता कल्पना मात्र है, जहां मंजिल की तरफ बढ़ते कदम धुंधले हो जाते हैं, एक ऐसी राह जो विचित्र अनुभवों से प्रेरित है। इस सफर की हर कहानी एक अंजाने डर से रूबरू कराते हुए खौफनाक डर पैदा करती है।

इस मौके पर पैरानाॅर्मल एक्सपर्ट गौरव तिवारी ने कहा कि, ‘यह एक जबरदस्त पुस्तक है जो डर के प्रति आपकी सोच को बदल देगी।’
विमोचन के अवसर पर गायिका शिबानी कश्यप ने विशेष रूप से तैयार पंक्तियां गुनगनायी जो कि फराज़ काज़ी और उनकी पुस्तक को समर्पित था। लोगों की फरमाईश पर शिबानी ने गीत ‘सजना आ भी जा…’ भी प्रस्तुत किया।

डिजाइनर संजना जाॅन ने फराज़ की सराहना करते हुए कहा कि ‘जबरदस्त किताब है, मैने जब इसे पढ़ना शुरू किया तो इसे नीचे रखने को मन ही नहीं किया। बहुत अच्छा अनुभव रहा इस पुस्तक को पढ़ना।’

 सम्पर्क सूत्रः शैलेश कुमार नेवटिया – 9716549754

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उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार से आएगी देसी मसालों में बहार

राजस्थान और गुजरात के दूर-दूर तक फैले निर्जन इलाकों में मसालों के तौर पर इस्तेमाल होने वाली औषधियों, बीजों और फलों की खेती का खास महत्त्व है। आमतौर पर इन्हें बीज मसालों के नाम से जाना जाता है। ये बीज मसाले उन कम फसलों में शुमार है जो ऐसी विषम परिस्थितियों में भी उगाई जा सकती हैं जिनकी पैदावार के लिए कम लागत आती है, साथ ही बाजार में इन मसालों की अच्छी कीमत मिलती है। इसलिए राजस्थान और गुजरात को देशभर में 'बीज मसालों के कटोरे' के नाम से जाना जाता है, हालांकि देश के अन्य राज्यों में भी इस मसालों की पैदावार होती है।

राजस्थान धनिया, मेथी और अजवायन के उत्पादन में आगे है। इसके अलावा गुजरात जीरा, सुआ और सौंफ के उत्पादन में अहम हिस्सेदारी निभाता है। अन्य राज्यों में पंजाब अजमोद के उत्पादन के लिए प्रसिद्घ है तो उत्तर प्रदेश और बिहार कलौंजी के नाम से लोकप्रिय मसाले का उत्पादन करते हैं। भारत के दक्षिणी हिस्से में स्थित राज्यों में भी इन मसालों की पैदावार होती है। आंध्र प्रदेश में जीरे और मेथी का उत्पादन काफी मात्रा में होता है। अन्य दक्षिणी राज्यों में मुख्य रूप से काली मिर्च और इलायची का उत्पादन होता है जिन्हें फसल आधारित बीज मसालों की फेहरिस्त में शामिल नहीं किया जाता है। अन्य राज्यों में पैदा किए जाने वाले दूसरे बीज मसालों में शिया जीरा और विलायती सौंफ प्रमुख हैं।

दुनिया भर में सिर्फ भारत ही एक ऐसा देश है जहां व्यावसायिक रूप से मूल्यवान लगभग सभी बीज मसालों का उत्पादन देश के किसी न किसी हिस्से में जरूर होता है। इस तरह भारत दुनिया का सबसे बड़ा बीज मसाला उत्पादक और उपभोक्ता देश है। दुनिया की लगभग 60 फीसदी जरूरतें भारत के जरिये ही पूरी होती है। सबसे खास बात यह है कि मसालों का निर्यात पिछले पांच सालों के दौरान मूल्य की दृष्टिï से 15 फीसदी और आकार की दृष्टिï से 8.7 फीसदी की दर से वृद्घि कर रहा है। पिछले साल अकेले जीरा 1,093 करोड़ रुपये की ऊंची कीमत पर पर पहुंच गया जिसकी वजह से जीरा कृषि निर्यात के मामले में अग्रणी फसलों में शुमार हो गया। बाहरी कारोबार में दूसरे मसाले खासतौर पर सौंफ, अजमोद और मेथी की पैदावार में भी वर्ष 2011-12 के मुकाबले वर्ष 2012-13 करीब 55 फीसदी का इजाफा हुआ।

निर्यात के मामले में शानदार प्रदर्शन का मतलब कतई यह नहीं लगाया जा सकता कि घरेलू बीज मसालों के कारोबार में सबकुछ ठीक चल रहा है और यह कारोबार ऊंचाइयों को हासिल कर चुका है। निर्यात में आई इस बढ़ोतरी की प्रमुख वजह भारत के कारोबारी प्रतिद्वंद्वी सीरिया की ओर से होने वाली आपूर्ति की कमी है। सीरिया के घरेलू हालात ठीक नहीं होने के कारण वहां से आपूर्ति में गिरावट दर्ज की गई। लेकिन सिर्फ ऐसा नहीं है कि मुकाबला सिर्फ सीरिया से है। चीन, तुर्की और ईरान जैसे देश भी भारत को तगड़ी टक्कर दे रहे हैं।

हालांकि भारत का उत्साह बढ़ाने वाला तथ्य यह है कि हमारे पास उत्पादन में इजाफा करने और गुणवत्ता में सुधार करने की असीमित संभावना है। इससे वैश्विक मसाला बाजार में देश की हिस्सेदारी को आसानी से बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा अंतरराष्टï्रीय मसाला बाजार काफी तेजी से बढ़ रहा है। साफ है कि इन उत्पादों के भारतीय निर्माताओं और निर्यातकों के लिए भी उम्मीदें बढ़ रही हैं। दुनिया भर में इन मसालों की बढ़ती मांग की एक प्रमुख वजह भारतीय खाने की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता भी है। मांग बढऩे की एक अन्य वजह दवा, प्रसाधन और सुगंधित द्रव्य बनाने वाले उद्योगों में इन चीजों का बढ़ता इस्तेमाल भी है।

अजमेर स्थित राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र (एनआरसीएसएस) के निदेशक बलराज सिंह निर्यात में होने वाली बढ़ोतरी के कुछ अन्य कारणों पर प्रकाश डालते हैं। इनमें एनआरसीएसएस और अन्य शोध संस्थानों द्वारा प्रवर्तित तकनीकी और भारतीय मसाला बोर्ड सहित अन्य एजेंसियों की ओर से चलाए जा रहे प्रचार कार्यक्रम भी शामिल हैं। एनआरसीएसएस ने इन फसलों की कई अलग-अलग और पहले से बेहतर प्रजातियां विकसित कर ली हैं और खेती के नए तरीके भी ईजाद किए हैं। इसके अलावा संगठन इन फसलों को सूखे, रोगों और कीटों से बचाव के तरीके और इनकी गुणवत्ता सुधारने की ओर ध्यान दे रहा है।

देश में बीजीय मसाला क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी मुश्किल पैदावार के बाद का बुरा प्रबंधन और मूल्य वर्धन की कमजोर प्रक्रिया है। इन मसालों का 80 फीसदी तक निर्यात कच्चे माल के तौर पर किया जाता है। उत्पादन के बाद बेहतर तकनीकी और प्रसंस्करण के जरिये उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाकर निर्यात से होने वाली आय में इजाफा किया जा सकता है। बेहतर गुणवत्ता के बीजों खासकर अधिक उत्पादन करने वाले बीजों की कमी भी उत्पादकता और उत्पादन बढ़ाने के मामले में एक बड़ी बाधा है। उत्पादन के बदले उचित कीमत न मिलने के कारण भी किसान इन फसलों का रकबा बढ़ाने से कतराते हैं। बीजीय मसालों के कारोबार में मौजूद क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए इन सभी मसलों पर जल्दी से जल्दी गौर किया जाना चाहिए।

साभार- बिज़नेस स्टैंडर्ड से

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