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रिक्सॉस होटल्स इजिप्ट ने भारत के तेजी से बढ़ते वेडिंग मार्केट के लिए डेस्टिनेशन मैनेजमेंट को नई ऊंचाई दी

भव्य भारतीय शादियों के लिए शार्म एल शेख के एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने के साथ, Rixos Hotels Egypt बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने हेतु अपनी सेवाओं और क्षमताओं को और सशक्त बना रहा है

शर्म अल शेख, मिस्र।  इस विशेष आयोजन में दुनिया भर से लगभग 600 विशिष्ट मेहमानों ने भाग लिया, जो कई प्राइवेट जेट्स और बड़े चार्टर फ्लाइट्स के माध्यम से शार्म एल शेख पहुँचे। यह उपस्थिति इस आयोजन के वैश्विक महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। पूर्ण गोपनीयता और विशिष्ट अनुभव सुनिश्चित करने के लिए, Club Privé by Rixos की सभी 26 विला, साथ ही होटल की सभी सुइट्स और प्रीमियम आवास श्रेणियाँ पूरी तरह से आरक्षित की गईं। तीन दिनों तक Rixos Radamis Sharm El Sheikh एक संपूर्ण इमर्सिव डेस्टिनेशन के रूप में संचालित हुआ, जहाँ विशाल इवेंट वेन्यूज़, बीचफ्रंट स्टेज और विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए प्रोडक्शन क्षेत्रों के माध्यम से एक विश्वस्तरीय अनुभव प्रस्तुत किया गया।

इस आयोजन का सबसे यादगार क्षण रहा 15 मिनट का अद्भुत ड्रोन शो, जिसमें 500 सिंक्रोनाइज़्ड ड्रोन ने शार्म एल शेख के आकाश में एक शानदार दृश्य रचा। यह प्रस्तुति पूरे आयोजन की भव्यता, नवाचार और प्रोडक्शन उत्कृष्टता का प्रतीक बनी।

इस भव्य शादी के लिए महीनों तक गहन तैयारी की गई, जिसमें मिस्र, दुबई, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस के अग्रणी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों का सहयोग शामिल रहा। जटिल स्टेज संरचनाओं, अत्याधुनिक तकनीकी इन्फ्रास्ट्रक्चर, विज़ुअल इफेक्ट्स और लॉजिस्टिक्स तक—हर पहलू को 24/7 चलने वाली एक निरंतर प्रोडक्शन प्रक्रिया के माध्यम से सटीक रूप से निष्पादित किया गया। आयोजन के बाद मिली प्रतिक्रियाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि शार्म एल शेख को अब केवल एक वैकल्पिक स्थान नहीं, बल्कि भारतीय शादियों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन ब्रांड के रूप में देखा जा रहा है। उल्लेखनीय रूप से, इसी नेटवर्क से जुड़े कई परिवारों ने भविष्य में अपनी शादियों को Rixos Radamis Sharm El Sheikh में आयोजित करने में गहरी रुचि व्यक्त की है।

इससे पहले भी राष्ट्राध्यक्षों की मेज़बानी, वैश्विक शिखर सम्मेलन और Jennifer Lopez तथा Enrique Iglesias जैसे अंतरराष्ट्रीय सुपरस्टार्स के कॉन्सर्ट आयोजित कर चुके Rixos Radamis Sharm El Sheikh ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि भारतीय शादियाँ उसके डेस्टिनेशन मैनेजमेंट विज़न का एक रणनीतिक स्तंभ हैं।

आयोजन पर टिप्पणी करते हुए, Rixos Hotels Egypt के मैनेजिंग डायरेक्टर, श्री एरकान यिल्दिरिम ने कहा, “Rixos में हमने केवल होटल संचालित करने से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर डेस्टिनेशन क्रिएशन की दिशा में कदम बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों द्वारा हमारी सर्वोच्च आवास श्रेणियों का पूर्ण आरक्षण, हमारे विज़न पर उनके विश्वास को दर्शाता है। इस आयोजन के बाद कई परिवारों ने भविष्य में अपनी शादियों को यहाँ आयोजित करने की इच्छा जताई है, जो शार्म एल शेख की बढ़ती वैश्विक आकर्षण शक्ति को और मजबूत करता है। आने वाले समय में हम इस डेस्टिनेशन में और भी अधिक महत्वाकांक्षी विज़ुअल प्रोडक्शन्स और अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

भारतीय बाज़ार से आने वाली हाई-प्रोफाइल शादियों और विशिष्ट आयोजनों की मेज़बानी के माध्यम से, Rixos Hotels Egypt शार्म एल शेख को वैश्विक डेस्टिनेशन मानचित्र पर लगातार ऊपर ले जा रहा है और इसे लक्ज़री सेलिब्रेशन, डेस्टिनेशन वेडिंग और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है।

टीईकेसीई (TEKCE ) ने नए रियल एस्टेट पार्टनर और सहयोगी कार्यक्रमों के साथ वैश्विक पहुंच बढ़ाई

टीईकेसीई (TEKCE )  के नए पार्टनर और सहयोगी कार्यक्रम प्रॉपर्टी प्रोफ़ेशनल्स और कंटेंट क्रिएटर्स को रियल-टाइम CRM विज़िबिलिटी, 7,000 से ज़्यादा वेरिफ़ाइड लिस्टिंग्स के लिए व्हाइट-लेबल एक्सेस और विदेशी बिक्री के लिए एक पारदर्शी, ट्रैक करने लायक वर्कफ़्लो प्रदान करते हैं।

मलागा, स्पेन

TEKCE Real Estate ने एक विस्तारित पार्टनर प्रोग्राम और एक नए सहयोगी प्रोग्राम का ऐलान किया है जो क्रॉस-बॉर्डर प्रॉपर्टी सेल्स को और ज़्यादा पारदर्शी और पारस्परिक रूप से फ़ायदेमंद बनाते हैं। ये प्रोग्राम MyTEKCE प्लैटफ़ॉर्म और TEKCE ऐप के व्हाइट-लेबल वर्ज़न पर रन करते हैं, जिससे पार्टनर्स और सहयोगियों को रियल-टाइम ट्रैकिंग, ब्रांडेड क्लाइंट अनुभव और स्पेन, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की और उत्तरी साइप्रस में TEKCE के 7,000 से भी ज़्यादा प्रॉपर्टी पोर्टफ़ोलियो के लिए एक्सेस मिलती है।

 

 

रियल एस्टेट आखिरकार एक भरोसे का बिज़नेस है। हमने अपना मॉडल इस तरह बनाया है कि हर हितधारक स्पष्ट रूप से देख सके कि क्या हो रहा है, कब और क्यों,” TEKCE Real Estate के COO, Ozkan Tekce ने कहा। “MyTEKCE और हमारे पार्टनर इकोसिस्टम के ज़रिये, आप न केवल TEKCE के साथ सहयोग करते हैं, बल्कि आप अपने ब्रांड, अपने ग्राहकों और पहली पूछताछ से लेकर कमीशन के भुगतान तक पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता के साथ हमारे सिस्टम में काम करते हैं। एक पार्टनर के तौर पर हमें जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, वे सभी इस सिस्टम की आधारशिला बन गईं। हमने इस प्रोग्राम को इस तरह डिज़ाइन किया है कि हमारे पार्टनर्स को कभी भी उन्हीं रुकावटों का सामना न करना पड़े।

 

वैश्विक पहुंच और स्थानीय नियंत्रण

ब्रोकरेज फ़र्मों और स्वतंत्र सलाहकारों के लिए डिज़ाइन किया गयाTEKCE का पार्टनर प्रोग्राम दुबई में स्पेन के खरीदार को सेवा देने वाले एजेंट या स्टॉकहोम में तुर्की के एक क्लाइंट को सेवा देने वाले सलाहकार को TEKCE के इंफ़्रास्ट्रक्चर और इन्वेंट्री में काम करने और अपने ग्राहक संबंधों को बनाए रखने में मदद करता है।

 

MyTEKCE, TEKCE द्वारा डेवलप किया गया एक अत्याधुनिक अंतर्राष्ट्रीय रियल एस्टेट पार्टनरशिप प्लैटफ़ॉर्म है। ये यूज़र्स को पारदर्शी और रियल-टाइम में क्लाइंट्स को रजिस्टर, ट्रैक और मैनेज करने की सुविधा देता है। पार्टनर्स को MyTEKCE प्लैटफ़ॉर्म पर शामिल किया जाता है, जहां वे TEKCE के CRM में क्लाइंट स्टेटस, खरीदार की प्राथमिकताएं, कम्युनिकेशन लॉग, व्यूइंग टूर, ऑफ़र का स्टेज, बिक्री मूल्य, और कमीशन के स्टेटस को ट्रैक कर सकते हैं, जिससे अनिश्चितता कम होती है और बैक-चैनल संबंधी चिंताएं दूर हो जाती हैं।

 

TEKCE ऐप एक व्हाइट-लेबल सॉल्यूशन के तौर पर उपलब्ध है, जिससे पार्टनर्स TEKCE के वेरिफ़ाइड, रोज़ अपडेट किए गए अंतर्राष्ट्रीय पोर्टफ़ोलियो का फ़ायदा उठाते हुए अपनी ब्रांड आइडेंटिटी (लोगो, विज़ुअल्स, कॉन्टेक्ट लिंक्स) के तहत हज़ारों लिस्टिंग्स प्रस्तुत कर सकते हैं। ये एंटरप्राइज़-ग्रेड क्षमता को लोकल पर्सनलाइज़ेशन के साथ जोड़ता है। TEKCE टीम के सैकड़ों मेंबर्स द्वारा प्रतिदिन किया गया कार्य आखिरकार हमारे पार्टनर्स तक पहुंचता है, जिससे उन्हें हमारी सामूहिक विशेषज्ञता की पूरी ताकत मिलती है।

 

व्यापक दर्शकों के लिए एक लाभकारी मॉडल

TEKCE का सहयोगी कार्यक्रम प्रॉपर्टी प्रोफ़ेशनल्स से परे पुराने खरीदारों और विक्रेताओं, ट्रैवल एजेंसियों, इन्फ्लुएंसर्स, ब्लॉगर्स, यूट्यूबर्स, SEO एक्सपर्ट्स, डिजिटल मार्केटर्स और अन्य क्रिएटर्स तक फ़ैला हुआ है जिनके पास सक्रिय दर्शक वर्ग है। जुड़ने के बाद, सहयोगी MyTEKCE के ज़रिये यूनीक लिंक्स बनाते हैं, अपने दर्शकों को TEKCE लिस्टिंग्स से जोड़ते हैं, और वेरिफ़ाइड ट्रांज़ैक्शन्स पर रेफ़रल आय अर्जित करते हैं—रियल एस्टेट एजेंट बनने की ज़रुरत के बिना। ये मॉडल सभी हितधारकों के लिए एक पारदर्शी और लाभकारी सिस्टम के आतुर पर तैयार किया गया है।

 

वेरिफ़ाइड स्टॉकअंतर्राष्ट्रीय फ़ुटप्रिंट

TEKCE 5 देशों में 20 ऑफ़िस ऑपरेट करता है, जिसमें स्पेन (एलिकांटे, बार्सिलोना, मलागा), तुर्की (अलान्या, अंकारा, अंताल्या, बोडरम, बुर्सा, फ़ेथिये, इस्तांबुल, इज़मिर, मेर्सिन, ट्रैबज़ोन, यालोवा), संयुक्त अरब अमीरात (दुबई), उत्तरी साइप्रस (किरेनिया), और स्वीडन (स्टॉकहोम) में केंद्र शामिल हैं। ये व्यापक नेटवर्क पार्टनर्स और संबद्ध कंपनियों को क्रॉस-बॉर्डर क्लाइंट्स के लिए भरोसेमंद सप्लाई और ज़मीनी स्तर की विशेषज्ञता प्रदान करता है।

 

पार्टनरशिप मापे जाने लायक होनी चाहिए,” Ozkan Tekce ने कहा। “हमारा CRM-आधारित मॉडल हर स्टेप दिखाता है ताकि पार्टनर्स और संबद्ध कंपनियां पारदर्शिता के आधार पर लॉन्ग-टर्म बिज़नेसेस बना सकें। इन प्रोसेसेस को सपोर्ट करने के लिए, हमने एक समर्पित पार्टनर मैनेजमेंट टीम स्थापित की है। सभी हितधारक अब अपने लिए ख़ास तौर से नियुक्त पार्टनर प्रतिनिधियों की मदद से अपने वर्कफ़्लो को और ज़्यादा आसानी से और बेहतरीन तरीके से मैनेज कर सकते हैं। हमारे पार्टनर और संबद्ध नेटवर्क्स अब 100 से भी ज़्यादा देशों में फ़ैले हुए हैं, जो एक साझा मिशन को सपोर्ट करते हैं: एक पारदर्शी, तकनीक-संचालित और जन-केंद्रित रियल एस्टेट इंडस्ट्री का निर्माण करना।

 

TEKCE Real Estate का परिचय

TEKCE एक ग्लोबल रियल एस्टेट कंपनी है जिसके 5 देशों में 20 ऑफ़िस हैं। डिजिटल-फ़र्स्ट दृष्टिकोण, बहुभाषी लोकल टीमों और अपने मालिकाना हक़ वाले CRM इकोसिस्टम के साथ, TEKCE खरीदारों, विक्रेताओं, भागीदारों और सहयोगियों के लिए एक पारदर्शी और डेटा-आधारित अनुभव प्रदान करता है। MyTEKCE और TEKCE ऐप संपूर्ण पारदर्शिता और व्हाइट-लेबल ब्रांडिंग की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भरोसेमंद सहयोग मुमकिन हो पाता है।

 

और ज़्यादा जानकारी के लिए tekce.com/corporate/partnership और tekce.com/corporate/affiliate-program देखें।

जब दूसरे समाप्त हो जाते हैं, तब आतंक अपनों को भी नहीं छोड़ता : विजय मनोहर तिवारी

विजय दिवस की पूर्व संध्या पर जनसंचार विभाग के प्रायोगिक पत्र ‘पहल’ के बांग्लादेश विशेषांक का लोकार्पण

भोपाल।
‘बंगलादेश विजय दिवस’ की पूर्व संध्या पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के प्रायोगिक पत्र ‘पहल’ के बांग्लादेश विशेषांक का लोकार्पण विश्वविद्यालय परिसर स्थित भारत रत्न लता मंगेश्कर सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बीबीसी के पूर्व वरिष्ठ पत्रकार सलमान रावी, बंगाली एसोसिएशन कालीबाड़ी के महासचिव सलिल चटर्जी तथा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय मनोहर तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।

इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. तिवारी ने अध्ययनशीलता, प्रयोगधर्मिता और समसामयिक विषयों की गहन पड़ताल पर बल देते हुए कहा कि बांग्लादेश के संदर्भ में यह स्पष्ट होता है कि जब अन्य विकल्प समाप्त हो जाते हैं, तब आतंकवाद अपनों को भी नहीं छोड़ता। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे पत्रकारिता को केवल सूचना नहीं, बल्कि जिम्मेदार सामाजिक हस्तक्षेप के रूप में देखें।

बीबीसी के पूर्व विशेषज्ञ संवाददाता सलमान रावी ने कहा कि आज की पत्रकारिता का सबसे बड़ा संघर्ष रील, मीम और सरोकार-विहीन कंटेंट की बाढ़ से है। उन्होंने कहा कि ऐसे दौर में पत्रकारिता के विद्यार्थियों को शोध, मुद्दों की गहरी समझ और संदर्भ के साथ प्रस्तुति की क्षमता विकसित करनी होगी, तभी वे विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों बनाए रख सकेंगे।

बंगाली एसोसिएशन कालीबाड़ी के महासचिव सलिल चटर्जी ने बांग्लादेश की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के समय की सकारात्मक सोच किस प्रकार धीरे-धीरे कट्टरता की ओर बढ़ती गई। उन्होंने बांग्लादेश में बंगाली समुदाय के साथ हो रहे अन्याय और उनकी घटती जनसंख्या पर भी चिंता व्यक्त की। पहल के इस विशेषांक की सराहना करते हुए उन्होंने नवोदित पत्रकारों से कहा कि उनकी लेखनी में सवाल पूछने का साहस और पीड़ितों के दुःख को अभिव्यक्त करने की संवेदनशीलता दोनों का संतुलन होना चाहिए।

कार्यक्रम में पहल की प्रकाशन प्रक्रिया से जुड़े विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, कुलसचिव डॉ.पी.शशिकला एवं प्राध्यापकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन महक पवानी और मानसी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन पहल की संपादकीय टीम के समन्वयक शांतनु सिंह ने प्रस्तुत किया।

भाजपा में युवा नेतृत्व की नई आहट पर भरोसा

भारतीय राजनीति में लंबे समय से जिस क्षण की प्रतीक्षा थी, वह अब एक निर्णायक मोड़ पर आ खड़ी हुई है। दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय नेतृत्व की बागडोर युवा हाथों में सौंपने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नितिन नबीन को पार्टी का नया कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यद्यपि यह नियुक्ति औपचारिक रूप से अस्थायी कही जा रही है, किंतु जिस प्रकार से इस निर्णय का पार्टी के भीतर और बाहर स्वागत हो रहा है, उससे यह संकेत स्पष्ट हैं कि भविष्य में उन्हें ही पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया जा सकता है। यह नियुक्ति केवल एक संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की कार्यशैली, नेतृत्व-चयन और भविष्य-दृष्टि में आए एक बड़े परिवर्तन का उद्घोष है। भारतीय जनता पार्टी संसदीय बोर्ड का यह निर्णय न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अब तक लिए गए साहसिक, अप्रत्याशित और दूरगामी परिणाम देने वाले निर्णयों की श्रृंखला का एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय भी है।
नितिन नबीन बिहार की राजनीति में कोई नया नाम नहीं हैं। वे पांच बार विधायक रह चुके हैं और जमीनी राजनीति की बारीकियों से भलीभांति परिचित हैं। संगठन और सरकार-दोनों के अनुभव से संपन्न नितिन नबीन ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया है। इसके साथ ही संगठन के विभिन्न स्तरों पर उन्होंने जिस अनुशासन, रणनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है, वही उन्हें इस पद के लिए स्वाभाविक विकल्प बनाता है। उनका राजनीतिक व्यक्तित्व केवल भाषणों तक सीमित नहीं, बल्कि संगठन खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और वैचारिक प्रतिबद्धता बनाए रखने की क्षमता से परिपूर्ण है। यही गुण भाजपा की आत्मा भी है-जहां व्यक्ति नहीं, संगठन सर्वोपरि होता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति का एक स्थायी गुण रहा है-नए चेहरों पर भरोसा और पीढ़ीगत नेतृत्व का निर्माण। चाहे वह केंद्र सरकार में मंत्रियों का चयन हो, राज्यों में मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति हो या संगठन में बदलाव-मोदी ने बार-बार यह साबित किया है कि वे भविष्य की राजनीति को आज गढ़ने में विश्वास रखते हैं। नितिन नबीन का चयन भी इसी विचारधारा का प्रतिफल है। यह निर्णय संकेत देता है कि भाजपा अब केवल चुनाव जीतने की पार्टी नहीं रहना चाहती, बल्कि अगले दो-तीन दशकों के लिए एक स्थायी वैचारिक और संगठनात्मक नेतृत्व तैयार कर रही है।
युवा पीढ़ी, विशेषकर पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को आकर्षित करने की दृष्टि से यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि वैचारिक संतुलन का केंद्र भी होता है। इस पद पर नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहमति और समर्थन अनिवार्य माना जाता है। भाजपा की चुनावी सफलताओं में संघ की भूमिका सदैव निर्णायक रही है-चाहे वह विचार-प्रसार हो, कार्यकर्ता निर्माण हो या सामाजिक संपर्क। पिछले कुछ चुनावों में जिन परिस्थितियों का सामना पार्टी को करना पड़ा, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि भाजपा संगठन और संघ के बीच पूर्ण सामंजस्य कितना आवश्यक है। ऐसे में नितिन नबीन का चयन यह संकेत देता है कि संघ और पार्टी नेतृत्व के बीच गहन विमर्श और सहमति के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। यह नियुक्ति भाजपा को वैचारिक रूप से और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
नितिन नबीन के सामने सबसे बड़ी और तात्कालिक चुनौती पश्चिम बंगाल के आगामी चुनाव हैं। यह राज्य लंबे समय से भाजपा के लिए रणनीतिक और वैचारिक दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहा है। यहां केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति, राष्ट्रवाद और सामाजिक संतुलन की भी परीक्षा होती है। एक संगठनात्मक अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन की वास्तविक कसौटी यहीं होगी। यदि वे बंगाल में संगठन को नई धार देने, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और जनता के बीच विश्वास स्थापित करने में सफल होते हैं, तो उनका नेतृत्व स्वतः ही प्रमाणित हो जाएगा। यही वह मंच है, जहां उनका रुतबा, कौशल और रणनीतिक दृष्टि राष्ट्रीय राजनीति के सामने स्पष्ट होगी।
भाजपा की राजनीति में एक विशेष परंपरा रही है-जहां कयास कुछ और होते हैं और निर्णय बिल्कुल अलग दिशा से आता है। अनेक नाम चर्चा में रहते हैं, अनेक चेहरे मंजिल के निकट आकर भी ठहर जाते हैं, किंतु अंतिम निर्णय अक्सर सबको चौंकाने वाला होता है। यही भाजपा की ‘चमत्कार करने वाली’ संगठनात्मक शैली है। नितिन नबीन का मनोनयन भी इसी परंपरा का हिस्सा है। यह निर्णय उन तमाम अटकलों पर विराम लगाने की क्षमता रखता है, जो लंबे समय से अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के भीतर चल रही थीं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भाजपा में पद नहीं, क्षमता निर्णायक होती है।
नितिन नबीन भारतीय राजनीति की उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसने संगठनात्मक निष्ठा, वैचारिक स्पष्टता और सतत जनसंपर्क को अपनी राजनीतिक पहचान बनाया है। छात्र राजनीति से लेकर सक्रिय सार्वजनिक जीवन तक उनका सफ़र अनुशासन, कर्मठता, राष्ट्रीयता और संघर्ष की पाठशाला रहा है। वे जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करने वाले, जनता की समस्याओं को संवेदनशीलता से समझने वाले और उन्हें प्रशासनिक व राजनीतिक मंचों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने वाले नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। नितिन नबीन की कार्यशैली में युवाओं के प्रति विश्वास, विकासोन्मुख सोच और पारदर्शिता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे पद को नहीं, दायित्व को प्राथमिकता देते हैं और संगठन के मूल्यों के अनुरूप निरंतर आगे बढ़ते रहे हैं।
नितिन नबीन सिन्हा कायस्थ समुदाय के एक भारतीय राजनीतिज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह दिग्गज भाजपा नेता नवीन किशोर सिन्हा के बेटे हैं। अभी उन्हें जेपी नड्डा की जगह पर भाजपा का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है जो अध्यक्ष के चुनाव तक कार्यभार संभालेंगे। वे वर्तमान में बिहार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री है। उन्होंने 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में लगभग 84,000 वोटों से जीत हासिल की। पिछले चुनाव में उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को भारी अंतर से हराया था। पुष्पम प्रिया चौधरी भी इस चुनाव में भारी अंतर से हार गईं। वे पटना जिले के बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले बिहार विधान सभा के सदस्य हैं। 2 मार्च 2017 को, नबीन ने बिहार कांग्रेस के नेता अब्दुल जलील मस्तान के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया और उनकी नागरिकता पर सवाल उठाया। मस्तान ने कथित तौर पर एक रैली में भीड़ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को जूतों से मारने के लिए कहा था।
भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक सशक्त संगठनात्मक आंदोलन है, जिसकी आत्मा उसका अनुशासित, समर्पित और वैचारिक रूप से सजग कार्यकर्ता है। पार्टी का संगठनात्मक ढाँचा बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सहभागिता, संवाद और सामूहिक निर्णय की परंपरा को मजबूत करता है। संगठन नेतृत्व के प्रति कार्यकर्ताओं का अटूट विश्वास, स्पष्ट दिशा और नेतृत्व की पारदर्शिता भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है। यहाँ कार्यकर्ता स्वयं को सत्ता का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सहभागी मानता है। यही कारण है कि भाजपा में नेतृत्व और कार्यकर्ता के बीच विश्वास, प्रतिबद्धता और परस्पर सम्मान का संबंध दिखाई देता है, जो पार्टी को निरंतर सशक्त और गतिशील बनाए रखता है।
नितिन नबीन का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मनोनयन केवल एक व्यक्ति की नियुक्ति नहीं, बल्कि भाजपा के भविष्य की राजनीति का स्पष्ट संकेत है। यह युवा नेतृत्व, वैचारिक प्रतिबद्धता, संगठनात्मक अनुशासन और संघ-समन्वय का संगम है। यदि नितिन नबीन इस जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाते हैं-विशेषकर पश्चिम बंगाल जैसी कठिन राजनीतिक भूमि पर-तो वे न केवल भाजपा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेंगे, बल्कि भारतीय राजनीति में युवा नेतृत्व की नई परिभाषा भी गढ़ेंगे। यही वह क्षण है, जहां राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि दृष्टि, धैर्य और दूरदर्शिता का प्रमाण बन जाती है।

प्रेषकः


(ललित गर्ग)
ई-253, सरस्वती कुंज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज,
दिल्ली-110092, मो. 9811051133

राहुल सांकृत्यायन और लोकभाषा

राहुलजी की साहित्यसाधना या तपस्या की सबसे बड़ी उपलब्धि उनका लोकोन्मुखी दृष्टिकोण है ।उन्होंने न कभी सामान्य जन को भुलाया ,न परम्परा को , न समष्टिभाव को और न लोकमंगल को।
१९३३ में गंगा के पुरातत्त्व विशेषांक में महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने एक निबन्ध लिखा था , जिसमें उन्होंने लोकसाहित्य के संकलन की प्रेरणा दी थी और उसके महत्त्व का प्रतिपादन किया था ! हिन्दी में लोकसाहित्य के प्रति जागरण का यह सबसे पहला स्वर था ! उन्हॊने स्वयं भी कौरवी के लोकगीतों और लोककथाओं का संकलन किया , जो. “आदि हिन्दी के गीत और कथाएं ” नाम से प्रकाशित हुआ !
उनकी घुमक्कड़ी का प्रयोजन लोकजीवन से जुड़ा हुआ है।
काशी नागरी प्रचारिणी सभा ने सभा ने जब हिन्दी साहित्य के वृहद इतिहास की योजना बनाई तो आपने हिन्दी की लोकभाषाओं और उनके साहित्य का प्रश्न उठाया , परिणाम-स्वरूप सोलहवें खंड को हिन्दी की लोकभाषा और साहित्य पर केन्द्रित किया गया ! उसके प्रधान संपादक राहुलजी ही थे , हालाँकि इस बीच वे चीन की यात्रा पर चले गये थे और डा. कृष्णदेव उपाध्याय को अपना सहायक नियुक्त कर दिया था !इस ग्रन्थ में उन्होंने कुलुई , चंबियाली और काँगड़ी जैसी लोकभाषाओं को भी स्थान दिया था !
लोकसाहित्य को लेकर लिखे गये अनेक शोधप्रबन्धों की भूमिका उन्होंने लिखी ! वे लोकसाहित्य की शब्दावली को लेकर बहुत सावधान थे और चाहते थे कि इस प्रकार की शब्दावली के कोश तैयार किये जायें ! वे स्वयं भी अपने लेखन में इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करते थे !
लोक संबंधी उनका दृष्टिकोण इसके भी आगे बढ़ चुका था , उन्होने लोकभाषाओं को और लोकसाहित्य को जागरण का माध्यम बनाया ! उन्होंने स्वयं भी भोजपुरी में ८ नाटकों की रचना की और उनमें लोकधुन के आधार पर स्वयं भी गीत लिखे ! लोक से उनका संबंध अकादमिक ही नहीं था , इस बात को किसान -आन्दोलन में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका से जाना समझा जा सकता है ।
पंडित विद्यानिवासमिश्र बहुत समय तक महापंडित राहुलसांकृत्यायन के साथ रहे थे ।एक दिन वे कुशीनगर गये । वहाँ भगवान्‌ बुद्ध की प्रतिमा है, जिसमें वे महानिर्वाण की मुद्रा में लेटे हुए हैं ।राहुलसांकृत्यायन ने प्रतिमा के चरणों में माथा नवाया ।मिश्रजी ने भी नवाया ।लेकिन मिश्रजी माथा नवाने के बाद थोड़े मुस्करा दिये। राहुलबाबा ने उनकी मुस्कान को देखा भी और समझ भी लिया ,आखिर बाबा कम्युनिस्ट थे ।
राहुलबाबा बाहर आकर बोले – पंडित ! तुमने सोचा होगा कि मैंने बौद्ध चीवर छोड़ दिया है , बुद्ध का मेरे लिये क्या महत्त्व ?देखो पंडित ! सच यह है कि मनुष्य कहीं न कहीं झुकना चाहता है , वह भले ही किसी ग्रन्थ के आगे झुके ,किसी ढूह के आगे झुके ,कहीं भी झुके !झुकने में उसकी हेठी नहीं होती । झुकने के कारण ही उसके मन में ऊंचे उठने का एक नया संकल्प उभर आता है ।महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने कहा था कि विगत ढाई हजार साल के अन्तराल में संसार में बुद्ध से बडा कोई विचारक नहीं हुआ , जिसने मनुष्यता को बहुत दूरतक प्रभावित किया ।
राहुल की लोकोन्मुखी दृष्टि थी ।बहुत से लोग यह सोचते थे कि राहुल जैसा महापंडित क्यों निपट गंवार लोगों के बीच इतना समय नष्ट कर देता है ??एक दिन विद्यानिवासमिश्र जी ने उनसे पूछ ही लिया ,विद्यानिवासमिश्र जी उन दिनों राहुलजी के साथ पारिभाषिक-शब्दावली के काम में लगे थे , युवा थे ।राहुलजी ने ज्ञान का एक सूत्र देते हुए कहा कि – “देखो, हरेक आदमी के पास जीवन का अनुभव होता है,उसमें एक अद्वितीयता होती है और उसे विनम्र भाव से ग्रहण करना चाहिये ।”एक दिन विद्यानिवासमिश्र जी के गांव के एक चाचा उनसे मिलने आये , वे दो दर्जा पास थे , किताब पढ लेते थे ।
उन्होंने अज्ञेय का उपन्यास “शेखर : एक जीवनी” भी पढा था ।उस दिन वे राहुलजी से बतिया रहे थे कि अज्ञेयजी राहुलजी से मिलने आ गये ।राहुलजी ने अज्ञेयजी के सामने ही गांव के चाचा से पूछा कि आपने ” शेखर : एक जीवनी” पढा है ?उन्हें क्या पता था कि उपन्यास का लेखक सामने ही आया हुआ है, वे बोले -का बताई , अज्ञेय मिलते त उनके दुइ हाथ लगवतीं , शेखर के कहीं क त नाहीं रख लें ! राहुलजी खिलखिला कर हंस पडे और अज्ञेयजी मुसकाने लगे ।जब चाचा ऊपर चले गये तब अज्ञेयजी ने कहा कि -देखिये मुझे मंजूरी मिल गयी , इतने कम पढे आदमी तक शेखर संवेदना जगा सका !राहुलजी ने भी कहा कि संवेदना सच्ची हो तो हृदय में उतर जाती है !
राहुल सांकृत्यायन ने जनता की लड़ाई लड़ी । राहुल सांकृत्यायन ने भोजपुरी में नाटक लिखा था > जोंक !इसमें राहुलसांकृत्यायन ने जमींदार को खून चूसने वाले जोंक के रूप में चित्रित किया था !दुर्दिनमां के हलक हरान , रे फ़िकिरिया मारलक जान !बैल बेच रजवा के दे लूँ छोड़इ नहिं बेईमान !जमींदार के जुलुम होइबे चेतइ भाइ किसान ! अमवारी में जमींदार के गुंडों ने राहुलबाबा को पीटा था , जमींदार का हाकिमों पर असर था , परिणाम-स्वरूप राहुलजी को जेल की हवा भी खानी पड़ी !
जिस साहित्य में जनता की लड़ाई नहीं है , जिस साहित्य में करुणा नहीं है , जिस साहित्य में लोकजीवन की संवेदना नहीं है , वह साहित्य नहीं,कचरा है।
महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने मातृभाषा शीर्षक निबन्ध लिखा था और भारत में लोकभाषाओं के जनतन्त्र का सवाल उठाया था ।
राहुलजी का भोजपुरी में लिखा हुआ एक पत्र
हर्नक्लिफ ,हैपी वैली , मसूरी
21.6.52
रघुबंस भैया,
चिट्ठी पाइके औ इ खबरि सुनिके मन बड़ परसन्न भइल कि ” भोजपुरी ” पतिरिका निकरे के बा । जबले मतारी के दूध के साथ पीयल भाखा के मान-सम्मान ना बढी तबले गरीब जनता के उधार ना होई, येहि बात में कौनो अनेसा नइखे । ई बहुत अचरज और अफसोस के बात इहो जो दुई करोड़ भोजपुरिहा बेटा-बेटी के रहतौ हमनी के भाखा के कतहूँ पुछार नइखे , उ टावर-टूवर लेखा बाटके भिखारी बनल बिया ।
भोजपुरी के कवन रुप होखे के चाहीं , ओमे कविता में कथा में कइसे लिखेके चाहीं, सबदन में इस्तिरी मैं पुरुखा के विचार कइसे होखे के चाहीं , एहि सब बातन के फेर में अबहिन पड़े के नइखे । अबहिन त निमन-निमन चीज कविता में हो , चाहे बतकही में, लिखके आवे के चाहीं ।
हमनी के भाखा में छपरा , आरा , और बनारस-आजमगढ में फरक बाटे और फरक तो दस-दस कोस में देखल जाला । एके अबहिन फिकिर करैके काम नइखे । जेकर बोली जौना इलाका के होखे , उ अपने बोली में लिखो , आगे चलके अपने रहता निकरि आई । भोजपुरिहा जवान अपनी बोली में जे किछु थोड़ा-बहुत लिखत बा‌डे , ओसे पता लागता जे भोजपुरी भाखा के आग उजियार बा ।
हम इहै चाहत बानी कि मिरजापुर , बनारस , जौनपुर , आजमगढ , गाजीपुर , बलिया , गोरखपुर , देवरिया , छपरा , चौपारन औ आरा के सब भोजपुरिहा भाई अपना बुद्धि , बल , पौरुख , बिरताई से समुचा देस के फैदा करावे खातिर अपनी भाखा के मदत से उठिके खड़ा होई जाव । ” भोजपुरी ” चिरंजीवी रहे , इहे हमार मनसा बा ।
अपने के
राहुल
( भोजपुरी वर्ष 1 , अंक 1 जुलाई , 1952 )
(लेखक साहित्यिक विषयों पर शोधपूर्ण लेखन करते हैं)

साभार- https://www.facebook.com/share/1EDpowgSFt/ से

प्राचीन मंदिरों और पिरामिडों की “ऊर्जा तरंगें” विज्ञान की पकड़ से बाहर,यह एक रहस्य कम नहीं!

दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं—भारत,मिस्र और दक्षिण अमेरिका ने ऐसी इमारतें बनाईं जिनके बारे में आज भी वैज्ञानिक पूरी सच्चाई नहीं समझ पाए हैं। इन प्राचीन संरचनाओं में एक समान बात है,लोग दावा करते हैं कि यहाँ एक अदृश्य ऊर्जा,अजीब कंपन या शांत लेकिन तीव्र फील्ड महसूस होती है।
विज्ञान इसे अक्सर Placebo Effect ध्वनि कंपन या भू-चुंबकीय बदलाव कहकर टाल देता है। लेकिन तथ्य यह है कि कई जगहों पर उपकरणों ने माइक्रो-इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स,कंपन और मैग्नेटिक एनोमलीज़ रिकॉर्ड की हैं। तो क्या यह सिर्फ कल्पना है? या प्राचीन सभ्यताएँ सचमुच ऊर्जा को समझती थीं?
आइए इस रहस्य को गहराई से समझते हैं।
1. भारतीय मंदिरों की ऊर्जा: विज्ञान और आध्यात्म का संगम
भारत के प्राचीन मंदिरों की मुख्य संरचना वास्तु शास्त्र और नाद योग पर आधारित है। ये सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं बल्कि ऊर्जा केंद्र (Energy Nodes) के रूप में डिज़ाइन किए गए थे।
(A) गर्भगृह ऊर्जा का फोकस पॉइंट
अधिकतर मंदिरों का गर्भगृह एक पिरामिडनुमा गुंबद के नीचे होता है। वास्तु के अनुसार यह आकार ऊर्जा को खींच कर केंद्र में जमा रखता है। वैज्ञानिक विश्लेषण कहता है:
* पिरामिड आकार प्राकृतिक रूप से EM (Electromagnetic) वेव्स को फोकस करता है।
* अंदर का घेरा ध्वनि तरंगों को रेज़ोनेंस देता है।
इसलिए लोग यहाँ ध्यान लगाने पर अलग अनुभव महसूस करते हैं।
(B) क्रिस्टल और ग्रेनाइट के शिवलिंग
कई शिवलिंग ग्रेनाइट से बने हैं। ग्रेनाइट में Quartz होता है जो Piezoelectric Effect पैदा कर सकता है मतलब दबाव या तापमान बदलने पर हल्की EM तरंगें। उपकरणों ने सोमनाथ,काशी और त्र्यम्बकेश्वर जैसे स्थानों पर माइक्रो-टेस्ला स्तर की असामान्य EM रीडिंग पकड़ी हैं। विज्ञान इसे
Geological anomaly कहता है लेकिन यह सवाल खुला है कि ऐसे ही स्थान ही पूजा के केंद्र क्यों बने?
(C) ध्वनि कंपन: घंटी,शंख और मंत्र
मंदिर की घंटियाँ 432Hz–528Hz की रेंज में गूंजती हैं जो मानव मस्तिष्क को Theta-State की ओर ले जाती है (गहरा ध्यान)। गर्भगृह में यह ध्वनि बार-बार उछलती है और एक वाइब्रेशन फील्ड बनाती है। क्या यह ऊर्जा है? या सिर्फ ध्वनि? इस पर बहस आज भी जारी है।
2. मिस्र के पिरामिड: रहस्य और ज्यामिति की पराकाष्ठा
पिरामिडों को आज भी वास्तुकला का चमत्कार माना जाता है,लेकिन इनके अंदर उत्पन्न होने वाली ऊर्जा सिर्फ कहानियाँ नहीं कुछ प्रयोग इसे साबित करते हैं।
(A) पिरामिड “एंटीना” की तरह क्यों behave करता है?
2018 की एक वैज्ञानिक रिसर्च में पाया गया कि गिज़ा का ग्रेट पिरामिड रेडियो वेव्स को अपने केंद्र में फोकस करता है। जैसे कोई विशाल एंटीना। किस उद्देश्य से बनाया गया? आज भी रहस्य है।
(B) इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों पर असर
कई शोधकर्ताओं ने नोट किया कि कुछ चैंबर्स में कैमरे और मैग्नेटिक उपकरण खराब हो जाते हैं। क्या यह भू-चुंबकीय गड़बड़ी है? या पिरामिड की संरचना का प्रभाव? यह स्पष्ट नहीं है।
(C) संरचना का “हीलिंग इफेक्ट”
कई लोग दावा करते हैं कि पिरामिड-आकार के कमरों में रखी चीजें-
* जल्दी खराब नहीं होतीं
* पानी का pH बदल जाता है
* शरीर की थकान कम होती है
अभी तक कोई अंतिम वैज्ञानिक मॉडल इसे पूरी तरह नहीं समझा पाया।
3. इंका सभ्यता: चट्टानों में छुपा कंपन्न
दक्षिण अमेरिका की इंका सभ्यता की संरचनाएँ भी ऊर्जा रहस्य से भरी हैं।
(A) कंपास का घूम जाना
साक्सेहुआमान और माचू पिच्चू में कुछ स्थानों पर कंपास अचानक उत्तर दिशा छोड़ देता है। यह local magnetic anomalies हैं,पर वे इसी जगह क्यों केंद्रित हैं?
(B) Sun Gate और UV Radiation
कुछ शोधकर्ताओं ने यहाँ UV radiation में असामान्य उछाल पाया। शायद स्थान की ऊँचाई,पत्थर की संरचना और सूर्य का कोण? या कोई और ऊर्जा? अभी तक कोई निश्चित जवाब नहीं।
4. क्या वास्तव में ये ऊर्जा तरंगें हैं?
विज्ञान की सीमाएँ:-
वर्तमान विज्ञान हमेशा मापने योग्य और दोहराने योग्य परिणाम पर चलता है। लेकिन ये ऊर्जा फील्ड्स अक्सर-
* माइक्रो-लेवल पर होती हैं
* हर समय स्थिर नहीं रहतीं
* वातावरण,तापमान,नमी से बदलती हैं
इसलिए इन पर एक महान सिंगल एक्सप्लेनेशन अभी तक नहीं मिल पाया।
5. क्या प्राचीन लोग ऊर्जा विज्ञान समझते थे?
यह एक दिलचस्प बात है भारत के कईं मंदिर,पिरामिड,इंका चट्टानें तीनों जगहों पर लेआउट,दिशा,ज्यामिति,खनिज,ध्वनि इनका चयन बिना वैज्ञानिक उपकरणों के भी असाधारण रूप से सटीक है। यह संकेत देता है कि प्राचीन सभ्यताओं के पास एक ऐसा ज्ञान था जिसे हम आज “ऊर्जा विज्ञान” कह सकते हैं,लेकिन इसकी भाषा हम खो चुके हैं।
विज्ञान अभी यह नहीं मानता कि इन जगहों पर “अलौकिक ऊर्जा” है। लेकिन इसे यह भी नहीं पता कि माइक्रो-चुंबकीय बदलाव,रेज़ोनेंस,कंपन और ज्यामितीय फोकसिंग। इतनी सटीकता से कैसे बनाई गई। इतने सबूत मौजूद हैं कि यह सिर्फ कल्पना नहीं,लेकिन इतनी उलझन भी है कि इसे पूर्ण विज्ञान नहीं माना जा सकता। असली सच शायद इस बीच कहीं है,जहाँ प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान मिलते हैं।

साभार- https://www.facebook.com/share/p/17ayHKAsGq/ से

संस्कृत भाषा और सनातन परंपराओं के लिए चार बहुआयामी उपक्रम

आज के तेजी से बदलते समय में जहाँ शहरीकरण और डिजिटल क्रांति ने हमारे जीवन के हर आयाम को प्रभावित किया है, वहीं प्राचीन संस्कृत विद्या एवं सनातन परंपराएं कहीं न कहीं पीछे छूटती जा रही हैं। गांवों से शहरों की ओर पलायन, आधुनिक जीवनशैली, और पारंपरिक ज्ञान एवं सेवाओं के लिए पारम्परिक स्रोतों का अभाव इस स्थिति का मुख्य कारण बना है। इसी संदर्भ में, संस्कृत और उससे जुड़े सामाजिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक विषयों को पुनः जन-जन तक पहुँचाने तथा उनके सम्यक् विकास के लिए हम चार प्रमुख उपक्रमों के माध्यम से एक दूरदर्शी डिजिटल योजना प्रारंभ करने जा रहे हैं।
१. शिक्षण (Education)
संस्कृत भाषा, कर्मकांड, ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, कथा वाचन जैसे विषयों की जनसामान्य तक पहुँच एवं सम्पूर्ण ज्ञानवर्धन के लिए एक समर्पित डिजिटल माध्यम विकसित किया जाएगा। इस मंच पर विद्वानों एवं विशेषज्ञों द्वारा संस्कृत में पठनीय, श्रुत्य एवं सुलभ सामग्री प्रस्तुत की जाएगी। यह जन शिक्षण का आधार बनेगा, जिससे श्रद्धालु, विद्यार्थी, और रुचि रखने वाले बिना किसी भौतिक बाधा के ज्ञान ग्रहण कर सकेंगे।
२. प्रशिक्षण (Training)
शिक्षण के बाद इसका दूसरा चरण होगा विशेषज्ञ प्रशिक्षण। इच्छुक विद्यार्थियों, युवाओं को ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे कर्मकांड, ज्योतिष, व्रत, पूजा-पाठ, कथा वाचन जैसे क्षेत्र में प्रवीण बन सकें। इस प्रशिक्षण के उपरांत उन्हें सेवा के विभिन्न क्षेत्र जैसे मंदिर, धार्मिक समारोह, विवाह संस्कार आदि से जोड़ा जाएगा, जिससे पारंपरिक ज्ञान का व्यवहारिक अनुप्रयोग सुनिश्चित हो सके।
३. सेवा (Service)
जान-माने विद्वान, प्रशिक्षित पंडितों, ज्योतिषियों, कथावाचकों और कर्मकांड विशेषज्ञों का एक व्यापक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इस डेटाबेस के माध्यम से आवश्यकतानुसार सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही, कर्मकांड तथा धार्मिक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले विक्रेताओं को भी इस सेवा क्षेत्र से जोड़ा जाएगा, जिससे अध्ययन से लेकर सेवा तक का पूरा चक्र पूर्णतः डिजिटलीकृत हो सके। यह पारंपरिक सेवाओं को आधुनिकता से जोड़ने का प्रथम प्रयास होगा।
४. भक्ति एवं प्रसारण (Devotion and Broadcasting)
एक विशेष यूट्यूब चैनल प्रारंभ किया जाएगा, जिसके माध्यम से धार्मिक कथाएं, समसामयिक व्रत, पर्व, त्यौहारों की महत्ता तथा उनके अनुकरण के योग्य प्रवचन नियमित रूप से प्रसारित किए जाएंगे। यह चैनल परंपरा एवं आधुनिकता के बीच पुल की भांति कार्य करेगा और घर-घर तक संस्कृत तथा धर्म से जुड़े संदेश पहुँचाएगा।
विशेष प्रावधान एवं गुणवत्ता
यह उपक्रम केवल डिजिटल माध्यम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के प्रमुख संस्कृत महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ इस मंच से जुड़ेंगे। केवल वे ही सेवा क्षेत्र में सम्मिलित होंगे जिन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा में संस्कृत शिक्षा ग्रहण की हो या विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त डिग्री प्राप्त की हो। इस प्रकार सेवा की प्रामाणिकता और गुणवत्ता की स्थापना सुनिश्चित होगी।
साथ ही, संस्कृत से जुड़े संगीत, चिकित्सा, कला इत्यादि अन्य क्षेत्र के विद्वानों को भी इस मंच पर पंजीकृत होने का अवसर दिया जाएगा, ताकि संस्कृत विद्या का समग्र और बहुआयामी विकास हो सके।
यह डिजिटल उपक्रम संस्कृत भाषा और उसकी समृद्ध परंपराओं को जीवित रखने, जन-जन तक पहुँचाने तथा समकालीन समाज में उनकी उपयोगिता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आपका इस पर क्या दृष्टिकोण है? क्या आपको यह उपक्रम उपयोगी प्रतीत होता है? यदि आप इस विचार से सहमत हैं और डिजिटल माध्यम से जुड़ना चाहते हैं, तो कृपया अपनी विशेषज्ञता कमेंट बॉक्स में दर्ज करें। आपकी सहभागिता इस पहल को सफल बनाने में अति आवश्यक है।

 

क्या सनातन का विरोध और अपमान ही सेक्युलर राजनीति है ?

भारत विभाजन के साथ मिली स्वाधीनता से कोई सबक न लेते हुए भारत की राजनीति आज तक तुष्टिकरण के आधार पर चलती रही है।मुस्लिम वोट बैंक को प्रसन्न करने के लिए तथाकथित समाजवादी लालू ने सम्मानित नेता आडवाणी जी को जेल में डाल दिया और एक कदम आगे बढ़ते हुए मुलायम सिंह ने निहत्थे रामभक्तों को गोलियों से भुनवा दिया, कांग्रेस साम्प्रदायिक हिंसा बिल ले आई वो तो भला हो उस समय विपक्ष में होने के बाद भी भाजपा ने इसे पारित होने से बचा लिया। मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण ही पाकिस्तान को सटीक उत्तर देने की जगह अमन का तमाशा किया जाता रहा। मात्र इतना ही नहीं मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए भारत की सनातन संस्कृति को अनेकानेक प्रकार से चोट पहुंचाई जाती रही । वर्ष 2014 में केन्द्रीय नेतृत्व प्रदान करते हुए नरेन्द्र मोदी जी ने तुष्टिकरण के कारण सनातन संस्कृति को हुई क्षति की भरपाई करने के प्रयास किए हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद एक बार फिर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले दल और अधिक कटु होकर सनातन हिंदू धर्म पर प्रहार कर रहे हैं । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को उनकी दो दिवसीय भारत यात्रा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीमद्भगवद्गीता का रूसी अनुवाद भेंट किया। इसको देखकर कांग्रेस और वामपंथी दलों  ने न केवल प्रधानमंत्री वरन  श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति आपत्तिजनक शब्दों  का उपयोग करते हुए इसका विरोध किया। कांग्रेसियों ने गीता के लिए मूल शब्द का प्रयोग  किया जो एक अक्षम्य अपराध है ।

वर्ष 2026 में पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव हैं अतः इन दो प्रान्तों में  सनातन प्रतीकों तथा हिन्दू समाज को अपमानित करने का कार्य भी सबसे अधिक और सबसे तेजी से हो रहा है। पश्चिम बंगाल में वहां के तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर ने गुलामी की मानसिकता से ग्रसित होकर बाबर के नाम की एक  मस्जिद की आधारशिला रखी और प्रशासन चुपचाप खड़ा रहा क्योंकि इस हरकत को मुख्यमंत्री का मौन समर्थन था। उसकी देखादेखी बिहार और तेलंगना में भी कुछ कट्टरपंथी मौलानाओं ने बाबरी नाम की मस्जिद व स्मारक बनाने का ऐलान करके साप्रंदायिक तनाव बढ़ाने का काम आरम्भ कर दिया  है। इस बाबरी भूत को वह सभी दल प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से समर्थन दे रहे हैं जिनकी राजनीति मुस्लिम तुष्टिकरण से चलती है और जो संविधान की किताब हाथ में लेकर घूमते हैं ।

उत्तर प्रदेश में सपा मुखिया सपरिवार शौर्य दिवस को सलीम चिश्ती की दरगाह पर चादर चढ़ाकर हिन्दुओं को चिढ़ाते दिखे । सपा मुखिया का तुष्टिकरण में संलिप्त यह कृत्य जनता समझ रही है। सपा मुखिया समय समय पर ऐसे बयान देते रहते हैं जिससे सनातन हिन्दू समाज आहत हो। महाकुंभ से लेकर लेकर अयोध्या के दीपोत्सव तक उन्होंने हिन्दू परम्पराओं का उपहास करते हुए उन्हें  ढोंग बताया।

वहीं कांग्रेस ने तो हिंदू सनातन आस्था के सभी केन्द्रों  का अपमान करने की सुपारी ही ले रखी है। कर्नाटक में तो मुस्लिम तुष्टिकरण का खुला खेल चल ही रहा है। हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार मुख्यमंत्री  सुखविंदर सिंह “सुक्खू “ को हिंदू बच्चों के राधे -राधे  बोलने पर आपत्ति है। तेलंगाना के कांग्रेस मुख्यमंत्री रेवंत  रेड्डी लगातार  सनातन और हिंदुओं के विरुद्ध  आग उगल रहे हैं। रेवंत रेड्डी ने हिंदुओं  पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा कि हर व्यक्ति और हर काम के लिए एक अलग भगवान होता है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा हिंदू कितने भगवानों को मानते हैं ? तीन करोड़ हैं, इतने सारे क्यों हैं? जो लोग विवाहित हैं उनके लिए एक भगवान  है हनुमान, जो लोग दो शादी करते हैं उनके लिए अलग भगवान हैं  और जो लोग शराब पीते हैं वह मुर्गी खाते हैं उनके लिए अलग भगवान हैं। हर ग्रुप  का अलग भगवान है। रेड्डी के बयान से हिंदुओं की भावनाओं का आहत होना स्वाभाविक था । हिंदू संगठनों  ने मुख्यमंत्री से माफी  मांगने को कहा किंतु मुस्लिम परस्त रेवंत रेड्डी  अपने बयान पर कायम हैं ।

उधर तमिलनाडु में भगवान मुरुगन के मंदिर में दीप जलाने को लेकर द्रमुक सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए न्यायालय की भी अवहेलना कर रही है। तमिलनाडु से ही हिन्दू और सनातन समाज को डेंगू -मलेरिया जैसे रोगों की संज्ञा दी जाती रही है।

आश्चर्य की बात ये है कि सनातन हिन्दू धर्म का अपमान करने वाली इस राजनीति को “सेक्युलर” कहा जाता है।  छद्म धर्मनिरपेक्षता का ये खेल लम्बा चल चुका है अब इसे समाप्त होना ही होगा।

मिजोरम में पहली बार 119 कारें रेल से पहुंचीं

सैरांग रेलवे स्टेशन पर पहली बार सीधे ऑटोमोबाइल रैक आया, जिसमें गुवाहाटी के पास चांगसारी से 119 मारुति कारें थीं। यह ऐतिहासिक कदम आइजोल में गाड़ियों की उपलब्धता बढ़ाएगा, लंबे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करेगा, और मिजोरम के ऑटोमोबाइल सेक्टर, जिसमें डीलर्स, सर्विस प्रोवाइडर्स और ग्राहक शामिल हैं, उन्हें फायदा पहुंचाएगा, जो राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उपलब्धि इंडियन रेलवे की कनेक्टिविटी बढ़ाने, क्षेत्रीय विकास को सपोर्ट करने और पूरे देश में समावेशी विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दर्शाती है।

ऑटोमोबाइल अनलोडिंग

बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन मिजोरम के लिए बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दुर्गम भूभाग से सावधानीपूर्वक काटकर बनाई गई यह लाइन 51.38 किलोमीटर लंबी है और 45 सुरंगों से होकर गुजरती है। यह रेलवे लाइन क्षेत्र के देश के शेष भाग के साथ रणनीतिक एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस रेल लाइन का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को किया था। इस अवसर पर उन्होंने आइजोल (सैरांग) और दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल) के बीच राजधानी एक्सप्रेस, आइजोल (सैरांग) और गुवाहाटी के बीच मिजोरम एक्सप्रेस और आइजोल (सैरांग) और कोलकाता के बीच एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही मिजोरम का भारत के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क में पूर्ण एकीकरण हो गया।

नई रेल सेवाओं को लेकर यात्रियों की प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है। तीनों ट्रेनें पूरी क्षमता के साथ चल रही हैं, जिनमें सैरांग-आनंद विहार टर्मिनल राजधानी एक्सप्रेस 147 प्रतिशत, सैरांग-गुवाहाटी मिजोरम एक्सप्रेस 115 प्रतिशत और सैरांग-कोलकाता एक्सप्रेस 139 प्रतिशत शामिल हैं। यात्रियों के लिए ये ट्रेनें सुविधाजनक, किफायती और समय बचाने वाली हैं। रेल संपर्क से प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों तक यात्रा आसान हो गई है। साथ ही, आसपास के राज्यों में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच भी बेहतर हुई है।

बैराबी-सैरांग लाइन पर माल ढुलाई का काम उद्घाटन के तुरंत बाद शुरू हो गया। 14 सितंबर 2025 को पहली माल ढुलाई में असम से आइजोल तक 21 सीमेंट वैगन ले जाए गए। तब से, इस मार्ग पर सीमेंट, निर्माण सामग्री, वाहन, रेत और पत्थर के टुकड़े जैसी आवश्यक वस्तुओं का परिवहन किया जा रहा है।

सैरांग से पहली पार्सल खेप भी 19 सितंबर 2025 को बुक की गई थी, जब एंथुरियम के फूलों को पार्सल वैन (सैरांग-आनंद विहार टर्मिनल राजधानी एक्सप्रेस) के माध्यम से आनंद विहार टर्मिनल तक पहुंचाया गया था। 17 सितंबर से 12 दिसंबर 2025 के बीच कुल 17 रेक संचालित किए गए। ये विकासक्रम दर्शाते हैं कि यह लाइन एक विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर बन रही है, जिससे परिवहन लागत कम हो रही है और मिजोरम के आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास में समर्थन मिल रहा है।

हाड़ोती के मिशन बाल मन तक ने बनाई राष्ट्रीय पहचान: 35 हजार बच्चें साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े

कोटा । हाड़ोती में बच्चों में साहित्य के प्रति रुचि जागृत कर उन्हें कहानी कविता लेखन से जोड़ने के लिए विगत दो वर्षों से संचालित बाल साहित्य मेलों के मिशन बाल मन तक कार्यक्रम ने राष्ट्रीय पहचान बनाई है। बच्चों को कुछ समय मोबाइल से दूर रख कर उन्हें साहित्य से जोड़ने का यह कार्यक्रम विगत दो वर्षों से राजस्थान के सूचना एवं जन संपर्क विभाग के कोटा स्थित पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. प्रभात कुमार सिंघल की पहल पर संस्कृति, साहित्य, मीडिया फोरम द्वारा कुछ साहित्यकारों के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। समापन समारोह बाल रंगोत्सव सोमवार को सिमलिया के बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित किया जाएगा।
डॉ. सिंघल ने बताया कि बाल साहित्य मेलों का आयोजन अपने आप में अनूठा नवाचार है। इसमें सरकारी एवं निजी विद्यालयों में  कहानी – कविता लेखन, कविता पाठ, निबंध लेखन, चित्रकला,प्रश्नोत्तरी,विचित्र वेशभूषा, मेंहदी मांडना, रंगोली, नृत्य,हस्तशिल्प खिलौने निर्माण प्रतियोगिताएं, बाल गोष्ठियां और बाल मेलों के आयोजन आदि गतिविधियां आयोजित की गई हैं।
उन्होंने बताया कि बाल मेलों के आयोजन में साहित्यकार  जितेंद्र निर्मोही , रामेश्वर शर्मा रामू भैया, स्नेहलता शर्मा, डॉ. वैदेही गौतम, डॉ.अपर्णा पाण्डेय, डॉ. शशि जैन डॉ. इंदु बाला शर्मा, डॉ. प्रीति मीणा, डॉ. हिमानी भाटिया, डॉ. सुशीला जोशी, रेखा पंचोली, संजू शृंगी,  रीता गुप्ता, साधना शर्मा, रेणु सिंह राधे,  विजय जोशी, योगेंद्र शर्मा, महेश पंचोली,  विजय कुमार शर्मा, राम मोहन कौशिक, कालीचरण राजपूत,  आर. के. शर्मा, झालावाड़ की रेखा रेखा सक्सेना, सुरेश कुमार निगम, झालावाड़, मोहन सेन का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ है।           साथ ही रंगीतिका संस्था कोटा, समरस संस्थान गांधीनगर जिला कोटा इकाई, आर्यन लेखिका मंच , अंतरराष्ट्रीय महिला काव्य मंच की कोटा इकाई एवं श्री करनी नगर विकास समिति, गोरधनपुरा , मदर टेरेसा स्कूल सहित कई सरकारी और निजी विद्यालयों और इनके पदाधिकारियों का  सहयोग प्रमुख रूप से प्राप्त हुआ।
 उन्होंने बताया कि साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा के सहयोग से आयोजित बाल कविता एवं कहानी लेखन राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 10 राज्यों के 204 प्रतिभागियों ने भाग लेकर मिशन बाल मन तक कार्यक्रम को राष्ट्रीय पहचान प्रदान की है। इस कार्यक्रम में इस वर्ष में  41 शैक्षिक संस्थाओं में बाल साहित्य मेलों का आयोजन किया गया जिनसे 35 हजार से ज्यादा बच्चें जुड़े तथा 19 हजार से ज्यादा बच्चों ने प्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी की है । करीब 1500 बच्चें कहानी लेखन विधा से जुड़े । विविध आयोजनों में विजेता रहे 415 बच्चों ने प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त कर विजेता रहें।