ध्येय यात्रा एवं कविताई’ सम्पन्न
डॉ.अपर्णा पाण्डेय का साहित्य संसार सीप के मोती जैसा
विरह ताप को दूर मिटाकर , मन का हल्का कर दो क्लेश।
चंद्रमौलि के सिर पर स्थित ,चंद्र रश्मियों से हैं श्वेत।
धन स्वामी कुबेर नगरी वह, धौतहर्म्य उद्यान विशेष ।।
यह है कालिदास के मेघदूतम गीतिकाव्य के हिंदी काव्यानुवाद का एक उदहारण जिसका डॉ.अपर्णा पांडेय ने हिंदी में सरल भाषा में अनुवाद का महत्वपूर्ण कार्य कर हिंदी की के विद्यार्थियों के लिए सुगम बनाया। इस काव्यानुवाद के विषय में आचार्य अग्निमित्र शास्त्री लिखते हैं इस अनुवाद में हिंदी के महाकवि जयशंकर प्रसाद ,आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की शास्त्रीय हिंदी के झलक प्रत्यक्ष रूप से दृष्टिगोचर होती है । अनुवाद का एक उदाहरण देखिए –
स्निग्ध मसारिन अंजन सम कांति, वाले तट पर पहुंच जरा।
सद्य काटे द्विरद दशन सम,श्वेत वर्ण कैलाश भरा।
निरनिमेश तव रूप तुम्हारा, दर्शनीय हो जाए जरा ।
ज्यों गौरांग राम निश्चित, कंधे मध्य दुकूल धरा।।
रचना धर्म काव्य निर्माण की एक कसौटी उनके साहित्य का तुकांत या तुकांत होना भी रहा है । कहने को यह डॉ.पांडेय की प्रथम कृति है पर उपयुक्त कसौटी पर यह कृति खरी उतरती है । एक अन्य उदाहरण देखिए –
जिस अलका के मार्ग सुशोभित अलक गिरे मन्दारों से ।
शीघ्र गमन करने के कारण, स्वर्ण कमल कचनारों से ।।
कुच प्रदेश टूटे हारों से ,औ मोती के हारों से ।
सूर्य उदय होने पर जाती , चिन्ह लिए अभिसरों के ।।
डॉ.पांडेय हाड़ोती अंचल की एक ऐसी रचनाकार हैं जिन्होंने शिक्षिका के रूप में हिंदी सेवा का परचम भारत से बाहर ढाका ( बांग्लादेश ) में भी लहराया। आपने भारतीय विदेश सेवा में चयनित होकर 2013 से 2017 तक प्रतिनियुक्ति पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, नई दिल्ली द्वारा सांस्कृतिक प्रतिनिधि और हिंदी शिक्षक के रूप में ढाका में हिंदी और संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य किया। जहां इंदिरा गांधी सांस्कृतिक केंद्र और आधुनिक भाषा इंस्टीट्यूट ,ढाका विश्वविद्यालय में प्रथम हिंदी पीठ के रूप में भी कार्य किया और ढाका विश्व विद्यालय में ( एक वर्षीय पाठ्य क्रम) शुरू हुआ।”पुराणों में शुकदेव” इनकी गहन अनुसंधानात्मक प्रवृत्ति का मधुर फल है, जिसके द्वारा हम शुकदेव जी के समग्र व्यक्तित्व और कृतित्व को आत्मसात कर सकते हैं। इस कृति पर यह विचार लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली के संस्कृत के विभागाध्यक्ष आचार्य स्व.इच्छाराम राम द्विवेदी”प्रणव” ने व्यक्त किए थे।
परिचय :
डॉ.अर्पणा पांडेय का जन्म साहित्यिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक रूप से समृद्ध परिवार संस्कृत और ज्योतिष के प्रकांड विद्वान आचार्य पिता लाल बिहारी द्विवेदी (लब्ध प्रतिष्ठ राष्ट्रपति पुरस्कार) और माता कृष्णा देवी द्विवेदी के आंगन में चौथी पुत्री के रूप में 1970 में मैनपुरी ,उत्तर प्रदेश में हुआ। आपके भाई आचार्य इच्छाराम द्विवेदी ’प्रणव’ भी संस्कृत और हिंदी साहित्य के ख्यातनाम विद्वान् रहे हैं । डॉ.अपर्णा पाण्डेय विवाह के पश्चात 1988 में कोटा आ गई। कोटा , राजस्थान में निवास कर रहीं हैं। आपने हिंदी और संस्कृत से स्नातकोत्तर की डिग्री और ’पुराणों में शुकदेव-एक समालोचनात्मक अध्ययन’ विषय पर के.एम. इंस्टीट्यूट,आगरा विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। आपने अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर अनेक काव्य गोष्ठियों और शोध संगोष्ठियों में भाग लिया है। साहित्यिक गोष्ठियों में कविता पाठ और शोध कार्यशालों में अपने शोध पत्रों का वाचन किया। बांग्लादेश में भारत के राजदूत हर्षवर्धन श्रृंगला एवं डायरेक्ट जनरल (साउथ एशिया) द्वारा प्रशस्ति पत्र से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी ,जयपुर द्वारा 2023-24 के लिए आपको बांग्ला भाषा की बाल कथाओं की कृति ’प्रिय गल्प’ पर ’रांगेय राघव पुरस्कार’ से सम्मानित किया। इन प्रमुख पुरस्कारों के साथ-साथ दो दर्जन से अधिक संस्थाओं द्वारा आपको पुरस्कृत और सम्मानित किया गया है। आप 2011 में राजस्थान लोक सेवा आयोग से चयनित हो कर शिक्षा विभाग में आई और वर्तमान में सैकंडरी विद्यालय, सुल्तानपुर में सेवारत हैं।

(लेखक डॉ, प्रभात कुमार सिंघल कोटा में रहते हैं और राजस्थान के साहित्य, संस्कृति, पर्यटन व सामाजिक विषयों पर लेखन करते हैं)
समाचार पत्र सामाजिक सरोकारों को भी बखूबी निभा रहे हैं
सरयू नदी का द्वीप : फैला सकता है विरासत की ज्योति
अनियमित बदलती धाराएं
सरयू नदी की दुर्दशा से आस्थावान व्यथित हो जाता हैं। सदियों से अयोध्या की पहचान रही सरयू अपनी धारा कई बार बदल चुकी है। घाटों को छोड़कर नदी कई किमी. तक हट कर संकीर्ण धारा के रूप में प्रवाहित हो जाती है। वाराणसी की तर्ज पर बने अयोध्या के घाटों पर कभी सरयू की लहरें कलकल करती रहती थीं। नदी का जल करीब दर्जन भर घाटों को तृप्त करता था। सुबह स्नान और सूर्य नमस्कार के लिए तो शाम को सरयू आरती के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता था। यह विहंगम दृश्य वाराणसी की गंगा आरती की याद दिलाता था। सरयू आरती भी रस्म अदायगी तक रह जाती है। इसका असर यह है कि कभी कभी घाटों पर भी वीरानी छा जाती है। नदी के बीच में टीले बन चुके बालू को हटाने के ठोस प्रयास नहीं हो पाते हैं। सरयू की पेटी उथली हो चुकी है। घाटी के बीच के हिस्से में गाद के ऊंचे टीले बनते जा रहे हैं। ये टीले इतने विशाल हैं कि बरसात के समय भी दिखाई देते हैं , जब सारा इलाका जल से मग्न हो जाता है। इसका प्रमुख कारण नदी की सफाई न होना है ही, अनियोजित ढंग से हुए अवैध बालू खनन के चलते नदी की धारा में बदलाव हो जाता है।
निलयम पंचवटी द्वीप
सरयू नदी में मुख्य रूप से एक बड़ा द्वीप बन चुका है, जिसे निलयम पंचवटी द्वीप के रूप में विकसित किया जा रहा है। नदियाँ न केवल जीवन का आधार हैं, बल्कि ये सभ्यता और संस्कृति को भी विकसित करती हैं। नदी के बीच पूजा-अर्चना से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है क्योंकि यह प्रकृति के करीब होने और जल संरक्षण के महत्व को समझने का एक सशक्त माध्यम है। यह मान्यता है कि नदियाँ जीवनदायिनी हैं और इनकी पूजा करने से वातावरण में सकारात्मकता आती है। इसी परिकल्पना को साकार करने के लिए रामनगरी में भगवान राम के वन-गमन पर आधारित पंचवटी द्वीप का निर्माण सरयू तट पर हो रहा है। नदी के किनारे गुप्तारघाट से 600 मीटर दूरी पर लगभग 75 एकड़ में 100 करोड रुपए की लागत से यह द्वीप बनाया जा रहा है।
इसका निर्माण श्रीनिलयम संस्था लखनऊ करीब दो वर्षों से करा रही है। इसे अभी पूर्ण रूप से जमीन पर नहीं उतारा जा सका है। सड़क का निर्माण कराकर उसके किनारे सजावटी पौधे लगा दिये गये हैं। लाइटिंग की भी व्यवस्था कर दी गई है। द्वीप के लिए जिला प्रशासन ने माझा जमथरा में श्रीनिलयम संस्था को कई हेक्टेयर भूमि नि:शुल्क उपलब्ध करायी है। माँ सरयू की गोद में बसा श्री निलयम पंचवटी द्वीप मनमोहक सौंदर्य से परिपूर्ण है। दो चरणों में बन रही इस परियोजना के पहले चरण में 40 एकड़ क्षेत्र में कार्य चल रहा है। इसमें श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ‘राम की जीवन यात्रा’ से जुड़ा अनुभव देने की तैयारी है। परियोजना अयोध्या के पर्यटन और धार्मिक महत्व को नई पहचान देने की दिशा में अहम कदम है। इनका लक्ष्य इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल में बदलना है, जो तन, मन और आत्मा के लिए समग्र अनुभव प्रदान करे।
यह परियोजना पर्यटकों को रामायण से जुड़े प्रसंगों की जानकारी और त्रेतायुगीन अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से लॉन्च की गई है। रिसॉर्ट में प्राकृतिक सुंदरता और आधुनिक सुविधाओं का मिश्रण है। अयोध्या में प्रभु रामलला के दर्शन के लिए देश-विदेश से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को राम लला के दर्शन के बाद प्रभु राम के जीवन दर्शन को आत्मसात करने का यहां मौका मिलेगा। प्रकृति और आधुनिक वास्तुकला के अपने सामंजस्य- पूर्ण मिश्रण के साथ, श्री निलयम का लक्ष्य पर्यटकों की लोकप्रियता में श्री राम मंदिर जैसा अन्य विकल्प भी प्रस्तुत करना है। हरे-भरे प्राकृतिक दृश्यों और वनस्पति उद्यानों से लेकर सांस्कृतिक प्रदर्शनियों और साहसिक गतिविधियों तक, हर कोना हर उम्र के मेहमानों के लिए आकर्षण और स्फूर्ति के साथ प्रस्तुत करने की योजना है।
नमामि गंगा परियोजना से प्रेरित
श्री निलयम पंचवटी द्वीप प्रॉजेक्ट के प्रभारी राज मेहता ने बताया कि 2019 में राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में पी एम मोदी ने नमामि गंगा परियोजना को अर्थ गंगा जैसे सतत विकास मॉडल में बदलने का संदेश दिया था। जिससे सदियों से नदियों पर आश्रित लोगों को जोड़ा जा सके। उन्हें रोजगार के नए अवसर मिले, जिससे उनका जीवन स्तर उठ सके। इसी संदेश से प्रेरित होकर श्रीनिलयम पंचवटी द्वीप की संरचना की गई है। श्रीनिलयम पंचवटी में श्रद्धालुओं को राममय बनाने के सारे साधन एक ही परिसर में उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई है। जहां वे प्रवास के दौरान वह आध्यात्मिक सुख का अनुभव कर सकेगें।
पीपे का पुल बनाया जा रहा
अयोध्या के माझा जमथरा में निर्माणाधीन पंचवटी द्वीप पहुंचने के लिए सरयू नदी पर पीपे का पुल बनाया जाएगा। पीपे के इस पुल से चार पहिया वाहन भी द्वीप तक आसानी से पहुंच सकेंगे। पैदल व बाइक से तो उस पर जाया ही जा सकेगा। करीब दो सौ मीटर लंबा यह पुल पांच मीटर चौड़ा होगा। यह पुल लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधीन होगा।
सरयू नदी पर एक नया पीपा पुल बनाने के लिए शासन ने ₹1,46,78,000 की धनराशि स्वीकृत की है, जिसमें से ₹73,39,000 इस वित्तीय वर्ष में जारी कर दिए गए हैं। अवर अभियंता पी पी सिंह ने बताया कि पीपे का पुल बनाने के लिए टेंडर का प्रकाशन हो चुका है। 15 अक्टूबर से 15 जून तक इस पर आवागमन हो सकेगा। 15 जून से बरसात शुरू होने पर इसे प्रांतीय खंड हटा लेगा। उस समय नदी में पानी बढ़ जाएगा। बहाव भी बहुत तेज होगा। 15 अक्टूबर से इस पर आवागमन शुरू होगा।
मुक्त गगन के नीचे विरासत की खास गतिविधियां
इस द्वीप पर कई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जैसे – अयोध्या के बेहतरीन रिट्रीट, श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट में दिव्य शांति और शानदार आराम की व्यवस्था। हरियाली के बीच बसा लक्ज़री टेंट स्टे, विरासत, आध्यात्मिकता और आधुनिक सुविधाओं का एक अनूठा मिश्रण प्रदान करता है, जो एक शांतिपूर्ण और आनंददायक प्रवास सुनिश्चित करता है।
रामकथा अनुभव केंद्र
अयोध्या के श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट में राम अनुभव केंद्र के आध्यात्मिक सार का वातावरण प्रदान करता है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ भक्ति और दिव्य अनुभव का मिलन होता है। भगवान श्रीराम के जीवन और शिक्षाओं में आगंतुकों को डुबोने के लिए डिज़ाइन किया गया यह अनूठा स्थान इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक विरासत को दर्शा रही है।
राम के जीवन चरित्र से जुड़े प्रसंग
प्रभु राम के वनगमन के साक्षी बनाने के लिए राम वनगमन पथ का क्रिएशन किया जा रहा है। द्वीप में भगवान राम की जीवन गाथा को मूर्तियों, भित्तिचित्रों और ऑडियो विजुअल तरीके से मानस के विभिन्न खंडों का प्रस्तुतीकरण किए जाने की योजना है। पंचवटी द्वीप में मूर्तियों के माध्यम से चाहे वह ऋषि मुनि हो या फिर शबरी अहिल्या हो , श्रद्धालुओं को रामायण कालीन प्रसंग को बताने की कोशिश की जा रही है।
ऋषियों के नाम पर कॉटेज
पर्यटन के लिहाज से श्रद्धालुओ के लिए टेंट सिटी हब और बच्चों के एंजॉय के लिए भी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या को आकर्षण के केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। निलयम पंचवटी द्वीप में आने वाले पर्यटकों को प्रभु राम के जीवन चरित्र से जुड़े प्रसंगों की जानकारी के साथ त्रेता युगीन व्यवस्था का भी अनुभव और आभास हो सके ऐसा प्रयास किया जा रहा है। कल्पवास और वैदिक गांव की अनुभूति कराती ऋषियों-मुनियों के नामों से बनी 108 पर्ण कुटी बन रही है।
अन्य रोमांचक गतिविधियां
कचरा व अपशिष्ट जल का ट्रीटमेंट व रिसाइकल प्लांट चालू किया जाएगा। ओडीओपी के तहत अयोध्या के गुड़ व चटाई उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा। मिट्टी से बने बर्तनों- खिलौनों को बढ़ावा दिया जाएगा। घाट की हाट में इनकी बिक्री को प्रोत्साहन दिया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम में भजन संध्या आयोजित होंगी। सन राइज और सनसेट पाइंट विकसित किए जाएंगे। मैजिक-शो, घुड़सवारी, ऊंट की सवारी, तीरंदाजी के साथ ही हस्तरेखा और ज्योतिष शास्त्र विशेषज्ञों के परामर्श की व्यवस्था यहां उपलब्ध कराई जाएगी। नौकायन, पावर बोट, स्पोर्ट्स का इंतजाम भी किया जाएगा।
गंतव्य विवाह
श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट के शांत और आध्यात्मिक वातावरण में स्थित मान सरोवर बैंक्वेट में अपने जीवन के सबसे खास दिन का जश्न मनाया जा सकेगा। विलासिता, परंपरा और दिव्य आशीर्वाद का एक आदर्श मिश्रण,” हमारा बैंक्वेट आपकी शादी” को एक रोचक और अविस्मरणीय अनुभव में बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
योग एवं सत्संग स्थल
श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट के योग एवं सत्संग स्थल पर आध्यात्मिक सद्भाव में डूबने का अवसर मिलेगा । मन, शरीर और आत्मा के पोषण के लिए डिज़ाइन किया गया यह पवित्र स्थान ध्यान, योग और आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए एक शांत वातावरण प्रदान करता है, जिससे अयोध्या के दिव्य स्पंदनों के बीच अपनी अंतरात्मा से जोड़ा जा सकता है। योग से निरोग की अवधारणा को भी साकार किया जा रहा है।
साहसिक एडवेंचर जोन
श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट के एडवेंचर ज़ोन में श्रद्धालु अपनी साहसिक भावना को उजागर कर सकता है। रोमांच की तलाश में हों या परिवार और दोस्तों के साथ मौज-मस्ती की गतिविधिया एडवेंचर ज़ोन प्रकृति के बीच एक रोमांचक क्षण प्रदान करता है।
समग्र स्वास्थ्य के लिए जिम ज़ोन
श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट में समग्र स्वास्थ्य के लिए जिम ज़ोन बनाया जा रहा है। जहां प्रवास के दौरान सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए अनुकूल डिज़ाइन किया गया है। फ़िटनेस के शौकीन हों या बस अपनी दिनचर्या को बनाए रखने के लिए अत्याधुनिक जिम
संसाधन मुहैया कराया जा रहा है। जिससे फिट रहने के लिए एक आदर्श वातावरण मिलेगा।
बच्चों का क्रीडस्थल और मनोरंजन
श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट में पूरे परिवार के लिए सुखद यादें बनाने के लिए बच्चों का क्रीडस्थल और मनोरंजन की भरपूर व्यवस्था की गई है। यहां का किड्स ज़ोन एक जीवंत और सुरक्षित जगह है जहाँ बच्चे खेल सकते हैं, सीख सकते हैं और नई-नई चीज़ें खोज सकते हैं, जबकि माता-पिता आराम से अपने प्रवास का आनंद ले सकते हैं।
जैविक- औषधीय खेती
श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट में, गोबर पर आधारित जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। हमें जैविक खेती के माध्यम से एक स्थायी और स्वस्थ जीवन शैली को
अपनाने के तौर तरीके देखने को मिलेगा।
यहां के हरे-भरे खेत मेहमानों को पारंपरिक खेती, ताज़ी उपज और पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली की खूबसूरती का अनुभव करने का अवसर प्रदान करते हैं। स्थानीय औषधीय आयुर्वेदिक पौधों से जीविका के साधन सृजित करने की योजना है।
शुद्ध स्वादिष्ट सात्विक रेस्टोरेंट
शुद्ध स्वादिष्ट शाकाहारी भोजन प्रसाद और शुद्ध गाय के घी से बने व्यंजन की व्यवस्था की जा रही है। यहाँ हर भोजन एक पवित्र अनुभव है। श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट में स्थित रेस्टोरेंट भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद की समृद्ध परंपराओं से प्रेरित एक प्रामाणिक सात्विक भोजन अनुभव प्रदान करता है।
नए प्याइंटों पर काम
करने की संभावनाएं
नए प्याइंटों पर कुछ और किए जाने के संभावनाएं हैं। (जो संलग्न चित्र में लाल रंग में 1,2,3 और 4 नम्बर के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया गया है।) इसके लिए नदी के जलस्तर को स्थिर करने और बाढ़ नियंत्रण के उपाय करने होंगे। पंचवटी द्वीप के विकास और श्री राम अनुभव केंद्र के निर्माण के तर्ज पर अयोध्या विकास प्राधिकरण और वैज्ञानिक विशेषज्ञ इस दिशा में प्रयास कर सकते हैं। विकास के तहत व्यापार और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है, खासकर जलमार्ग से। नदी में कटान और अनियमित जल स्तर की समस्या के कारण इन योजनाओं को सावधानी पूर्वक और इंजीनियरिंग की सहायता लेना आवश्यक होगा।
1.एक और द्वीप
गूगल मैप पर R4GQ+798 फतेहपुर सरैया मांझा, अयोध्या पर दर्शनीय है। यह श्री संकट मोचन श्री हनुमान मंदिर के पास गूगल मैप पर R42Q+X2X अयोध्या कैंट, 224001 के पास स्थित है।
2.एक और द्वीप
गूगल मैप पर R55F+7XF मांझा कलां पर यहां एक द्वीप विकसित हो सकती है, जो पंचवटी प्राचीन हनुमान मंदिर बाटी बाबा के आश्रम केनिकट है।
3.एक और द्वीप
गूगल मैप R53R+V6F मांझा कलां
पर दिखने वाली एक और द्वीप भी विकसित हो सकती है। यह राजघाट के पार्क के पास स्थित है।
4.एक और द्वीप
गोआश्रय स्थल,अयोध्या गोण्डा राज मार्ग से करीब में ही है। गूगल मैप पर R59H+34R मांझा कलां अयोध्या पर दर्शनीय है। यहां भी नदी तलीय विकास की प्रचुर संभावनाएं हैं।
लेखक परिचय:-
(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए सम सामयिक विषयों,साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करते रहते हैं।
पत्राचार का पता: मकान नम्बर 8/ 2785, निकट लिटिल फ्लावर स्कूल, आनन्द नगर कटरा बस्ती 272001)
पाकिस्तानी सेना प्रमुख की बढ़ी ताकत, सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा ?
दरकता पाकिस्तान कई नागरिक समस्याओं जैसे महंगाई, बेरोजगारी, दैनिक जीवन के उपयोग की वस्तुओं को जुटाने की जद्दोज़हद से जूझ रहा है। बलोचिस्तान, खैबरपख्तूनवा जैसे प्रान्त सुलग रहे हैं। हुक्मरान इनको दबाने के लिए सीमाओं पर आग लगा रहे हैं। इस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का झुकाव भी पाकिस्तान की ओर लग रहा है। इन सबके बीच जिस तरह पाकिस्तानी सेना प्रमुख की शक्तियों को संविधान संशोधन के माध्यम से बढ़ाया गया है वह भविष्य के लिए खतरनाक संकेत दे रहा क्योंकि पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर लगातार आतंकवाद को संरक्षण व पूरा सहयोग कर रहा है।
पाकिस्तान में सेना प्रमुख को मिली शक्तियों के अनुसार अब जब कभी पाकिस्तान का भारत या अफगानिस्तान के साथ युद्ध होगा तब सेना प्रमुख मुनीर ही परमाणु हमला करने का फैसला करेगा। पाक सेना प्रमुख मुनीर को परमाणु हमला करने की यह शक्ति उस समय मिली है जब कुछ दिनो पूर्व ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने बयान दिया है कि पाकिंस्तान चोरी छिपे तथा रूस, चीन और कोरिया लगातार परमाणु परीक्षण कर कर रहे हैं इसलिए हम भी करेंगे।
पाकिस्तानी संसद ने सेना प्रमुख आसिफ मुनीर की शक्तियो को बढ़ाने और सुप्रीम कोर्ट की ताकत को कम करने वाले 27वें संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। पाकिस्तानी नेशनल असेंबली ने इस विधेयक को 234 मतों के बहुमत से पास किया केवल चार सांसदो ने इसके विरोध में मत दिया। यह विधेयक सीनेट से पहले ही पारित हो चुका है। नये कानून के अनुसार मुनीर को चीफ आफ डिफेंस फोर्सज बनाया जा रहा है। यह 27 नवंबर 2025 से लागू हो जाएगा पद मिलते ही उन्हें परमाणु हथियारो की कमांड मिल जाएगी। अपना कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद भी वह अपने पद पर बने रहेंगे और उन्हें आजीवन कानूनी छूट मिलती रहेगी अर्थात नए कानून के अनुसर अब आसिफ मुनीर को आजीवन कोई नहीं हटा सकेगा ।
अब पाकिस्तान की संसद ने अदालतों पर भी अपना नियंत्रण कर लिया है जिसके अंतर्गत अब सरकार तय करेगी कि कौन से जज कौन सा केस सुनेंगे। अब जजों का ट्रांसफर राष्ट्रपति करेंगे । पहले यह अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास था । अब अगर वहां की अदालत मे कोई केस एक साल तक नहीं चला तो वह केस बंद कर दिया जाएगा। नए संविधान संशोधन के बाद अब सुप्रीम कोर्ट की ताकत घट जाएगी और राष्ट्रपति नाम मात्र का सुप्रीम कमांडर रह जाएगा।
पाकिस्तानी संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि अब देश की सेना और ताकतवर हो जाएगी। पाकिस्तान में अब तानाशाही का एक नया दौर देखने को मिल सकता है जो दक्षिण एशिया की शांति के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। पाकिस्तान के विरोधी दल जहां इसे लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बता रहे हैं वहीं पाक प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ इसे राष्ट्रीय एकता के लिए उठाया गया कदम बता रहे हैं। पाकिस्तान में आलोचकों का कहना है कि यह बदलाव देश को सैन्य शासन की ओर ले जा रहा है।
पाकिस्तान का इतिहास रहा है कि व्हां के आर्मी चीफ रिटायर हो जाने के बाद विदेश चले जाते थे लेकिन अब मुनीर न तो रिटायर होंगे और न ही विदेश जाएंगे। लेकिन क्या वहां के अन्य आर्मी कमांडरो को यह बात मंजूर होगी? पाकिस्तान के इतिहास में यह परंपरा रही है कमांडर रिटायरमेंट के बाद यूरोप, सऊदी अरब या अमीरात में आराम का जीवन व्यतीत करने के लिए चले जाते हैं । जनरल अशफाक परवेज कियानी से लेकर जावेद बाजवा तक ने अपने ठिकाने विदेश में बनाए और पूर्वसेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ का हाल तो पता ही है क्या हुआ। किंतु अब आसिफ मुनीर संविधान संशोधन की आड़ लेकर अपने पद पर अजर अमर हो रहे हैं।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिफ मुनीर आतंकवाद को लगातार प्रश्रय दे रहा है। भारत भी आपरेशन सिंदूर के समय तय कर चुका है कि अब अगर भारत पर आतंकवादी हमला हुआ तो वह एक्ट आफ वॉर ही माना जाएगा। 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास बम धमाका हो चुका है जिसकी गहन जांच चल रही है और धमाके के लिंक जैश- ए -मोहम्मद से ही जुड़ते नजर आ रहे हैं।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर भी भारत से पंगा लेने के लिए बैचेन लग रहा है। पाकिस्तान को लगातार भय सता रहा है कि अबकी बार भारत पाकिस्तान को छोड़ेगा नहीं। यदि युद्ध हुआ तो पाकिस्तान को भी कम से कम चार फ्रंट पर युद्ध करना ही पड़ेगा और तब पाकिस्तान अपना अस्तित्व बचाने के लिए भारत पर परमाणु हमला करने की हिमाकत कर सकता है। मुनीर नागरिक समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए कई पैंतरे अपना रहा है और भारत में आतंकी हमले कराना उसी का हिस्सा है। किंतु मुनीर को ध्यान रखना चाहिए कि अब समय बदल चुका है और अबकी बार ऐसी हिम्मत से पाकिस्तान का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित

फोननं. – 9198571540
हिंदू कॉलेज में वंदे मातरम् की डेढ़ सौ वीं वर्षगांठ पर समारोह
अंत में राष्ट्रीय सेवा योजना के विद्यार्थी अध्यक्षा निशांत सिंह ने आभार व्यक्त किया।
अर्चिता द्विवेदी
जन संपर्क प्रमुख
राष्ट्रीय सेवा योजना
हिन्दू महाविद्यालय, दिल्ली
मो -9452536877
हिंदू कॉलेज में नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत पोस्टर प्रतियोगिता
राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में आयोजित प्रतियोगिता में कार्यक्रम अधिकारी डॉ पल्लव ने अभियान के अंतर्गत आगे की गतिविधियों की जानकारी दी और सभी प्रतियोगियों का स्वागत किया।
प्रतियोगिता हिंदू कालेज के मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित हुई जिसमें अनेक महाविद्यालयों के छात्र छात्राओं ने भागीदारी की। हिंदू कालेज विद्यार्थी संसद के प्रधानमंत्री समीर कुमार उपाध्याय ने संयोजन किया और राष्ट्रीय सेवा योजना के अध्यक्ष निशांत सिंह ने आभार प्रदर्शित किया।
अर्चिता द्विवेदी
जन संपर्क प्रमुख
राष्ट्रीय सेवा योजना
हिन्दू महाविद्यालय, दिल्ली
मो -9452536877
जैनाचार्य जवाहर पर डाक टिकट और सिक्का जारी
श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र मुनि ने बताया आचार्य जवाहर लाल ने देश पराधीनता में होने के समय दस हजार से अधिक सत्संगों के माध्यम से जनजागरण का कार्य किया। उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रेरित किया। विशेष रूप से उन्होंने महात्मा गांधी, सरदार पटेल और लोकमान्य तिलक जैसे नेताओं को स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेरित किया। आचार्य जवाहर लाल महाराज ने बाल विवाह, दहेज प्रथा और नशाखोरी का दृढ़ विरोध किया। इस संदर्भ को स्मरण करते हुए राज्यपाल कटारिया ने कहा कि उनके नाम पर जारी यह स्मारक सिक्का और डाक टिकट लोगों को उनके कार्यों की चिरस्थायी याद दिलाते रहेंगे।
ज्ञातव्य हो कि स्मारक सिक्के में अभी तक पूर्व में कुल सात सिक्के जैन संत समाज पर जारी हुए पर स्थानकवासी समाज में यह प्रथम मौका है जब स्थानकवासी जैन आचार्य जवाहरलाल पर स्मारक सिक्का जारी किया गया।
जनजातीय गौरव दिवस : परंपरा, प्रगति और युवा संकल्प
जनजातीय गौरव दिवस भारत की गौरवशाली जनजातीय विरासत को समर्पित एक सजीव श्रद्धांजलि है — साहस, सादगी और प्रकृति के साथ सामंजस्य का वह प्रतीक जिसने सदैव राष्ट्र की आत्मा को समृद्ध किया है। आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत 2021 में प्रारंभ किया गया यह वार्षिक उत्सव हर वर्ष 15 नवम्बर को मनाया जाता है — इस दिन भारतभूमि के महान जननायक भगवान बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था। भारत सरकार ने यह दिन जनजातीय समुदायों के असाधारण बलिदानों और उनकी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देने के लिए समर्पित किया। 15 नवम्बर 2021 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा को समर्पित एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी कर राष्ट्र की ओर से जनजातीय शौर्य और विरासत के प्रति सामूहिक श्रद्धा को अभिव्यक्त किया। तब से जनजातीय गौरव दिवस गौरव, प्रगति और सशक्तिकरण का राष्ट्रीय उत्सव बन चुका है।
*भगवान बिरसा मुंडा : उलीहातू से उलगुलान तक
15 नवम्बर 1875 को छोटानागपुर पठार (वर्तमान झारखंड) के उलीहातू गाँव में जन्मे भगवान बिरसा मुंडा भारत के सर्वाधिक पूज्य जनजातीय क्रांतिकारियों में से एक हैं। मुंडा जनजाति से संबंधित बिरसा का बचपन कठिनाइयों, विस्थापन और अन्याय के अनुभवों से भरा था। 1793 के स्थायी बंदोबस्त अधिनियम (Permanent Settlement Act) ने पारंपरिक खुंटकाटी भूमि व्यवस्था को नष्ट कर दिया, जिससे साहूकारों और ज़मींदारों को जनजातीय भूमि पर कब्ज़े का अवसर मिला।
1886 से 1890 के बीच चाईबासा में बिताए वर्षों ने बिरसा की चेतना को जागृत किया। मिशनरी प्रभाव और औपनिवेशिक अन्याय से विमुख होकर उन्होंने औपचारिक शिक्षा छोड़ दी और रामायण व महाभारत जैसे भारतीय ग्रंथों से आत्मिक प्रेरणा ली। 1895 तक वे अपने लोगों के स्वाभिमान और भूमि पुनः प्राप्ति के लिए एक निर्भीक नेता के रूप में उभरे। उन्हें ब्रिटिश शासन ने गिरफ्तार कर हजारीबाग केंद्रीय जेल में दो वर्ष तक रखा। रिहा होने पर हजारों लोगों ने उन्हें “धरती आबा”—अर्थात धरती के पिता—के रूप में सम्मानित किया।
उन्होंने बिरसाइट संप्रदाय की स्थापना की, जिसने जनजातीय समाज में आत्म-सम्मान, एकता और आस्था का संचार किया तथा शोषण और धर्मांतरण से मुक्ति का मार्ग दिखाया। 1899–1900 का उलगुलान (महाविद्रोह) उनकी इस चेतना का चरम बिंदु था, जिसने झारखंड, ओडिशा, बिहार, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ तक ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। इस आंदोलन ने “मुंडा राज” अर्थात स्वशासन की मांग की। यद्यपि बिरसा मुंडा को ब्रिटिशों ने पकड़ लिया और 9 जून 1900 को रांची जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में 25 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया, पर उनके विचार अमर हो गए। उनके संघर्ष का परिणाम छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (1903) के रूप में सामने आया, जिसने जनजातीय भूमि अधिकारों की रक्षा की। 2000 में उनके जन्मदिवस पर झारखंड राज्य की स्थापना कर राष्ट्र ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
सशक्त होता जनजातीय भारत : शिक्षा से उद्यमिता तक
भगवान बिरसा मुंडा के समानता और स्वाभिमान के सपने को साकार करने के लिए भारत सरकार ने शिक्षा, उद्यमिता, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में अनेक परिवर्तनकारी पहलें की हैं।
2023 में जनजातीय गौरव दिवस पर प्रारंभ किया गया प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM–JANMAN) इसका एक ऐतिहासिक कदम है। ₹24,000 करोड़ की लागत वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य 18 राज्यों और 1 केंद्रशासित प्रदेश के 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) को आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और संपर्क सुविधाएँ प्रदान करना है। इसी दिशा में 2 अक्टूबर 2025 को भगवान बिरसा मुंडा की भूमि से “धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA)” की शुरुआत की गई — ₹80,000 करोड़ के बजट के साथ यह योजना 63,000 जनजातीय गाँवों को सड़कों, मोबाइल नेटवर्क और पक्के मकानों से जोड़ेगी, जिससे पाँच करोड़ से अधिक जनजातीय नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार हेतु 23 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (MMUs) और 30 नई इकाइयाँ DAJGUA के अंतर्गत जोड़ी गईं। विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अंतर्गत सिकल सेल एनीमिया के पूर्ण उन्मूलन का भी लक्ष्य रखा गया है।
शिक्षा जनजातीय उन्नति की आधारशिला है। राष्ट्रभर में 700 से अधिक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। सरकार ने विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और चिकित्सा के क्षेत्र में जनजातीय युवाओं को आगे बढ़ाने पर बल दिया है। 30 लाख से अधिक छात्रवृत्तियाँ दी जा रही हैं, जिनमें से कई विद्यार्थी विदेशों में भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) मातृभाषा में शिक्षा को प्रोत्साहित कर जनजातीय युवाओं को आत्मविश्वास और वैश्विक अवसर प्रदान कर रही है।
उद्यमिता के क्षेत्र में वन धन मिशन ने जनजातीय स्वावलंबन की दिशा में क्रांति लाई है। 3,000 से अधिक वन धन विकास केंद्र (VDVKs) पारंपरिक वनोपज को आधुनिक विपणन और मूल्यवर्धन से जोड़ रहे हैं। 90 से अधिक लघु वनोपज (MFP) वस्तुओं को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के दायरे में लाया गया है, जिससे जनजातीय उत्पादकों को न्यायपूर्ण मूल्य मिल रहा है। भारत द्वारा मनाया गया अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष (International Year of Millets) जनजातीय किसानों की पारंपरिक कृषि-बुद्धि और पोषक अन्नों के संरक्षण का उत्सव भी है।
आज 50,000 से अधिक वन धन स्व-सहायता समूह (SHGs) और 80 लाख समूहों में सक्रिय 1.25 करोड़ से अधिक सदस्य ग्रामीण समृद्धि के प्रेरक बन चुके हैं। इनमें अधिकांश समूह जनजातीय महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं। पीएम-विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों को वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण और विपणन सहयोग देकर उनके पारंपरिक शिल्प को नए अवसर प्रदान कर रही है।
आदि महोत्सव जैसे उत्सवों के माध्यम से जनजातीय कला, संस्कृति और हस्तकला को राष्ट्रीय पहचान मिली है। रांची का बिरसा मुंडा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, राष्ट्रपति भवन का जनजातीय दर्पण संग्रहालय, तथा छिंदवाड़ा और जबलपुर में नए केंद्र इस गौरवशाली धरोहर को सहेज रहे हैं। श्रीनगर और गंगटोक में स्थापित जनजातीय अनुसंधान संस्थान जनजातीय भाषा, कला और ज्ञान परंपरा के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
जनजातीय क्षेत्रों तक योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए विकसित भारत संकल्प यात्रा की शुरुआत खूँटी, झारखंड से की गई, जिसमें एकलव्य विद्यालय नामांकन, सिकल सेल परीक्षण और वन धन उद्यमिता पर विशेष ध्यान दिया गया।
सरकार की इस प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि 2024–25 में जनजातीय कार्य मंत्रालय का बजट 74% बढ़कर ₹13,000 करोड़ हो गया है। पिछले दशक में 100 से अधिक जनजातीय व्यक्तित्वों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है — यह जनजातीय उत्कृष्टता और नेतृत्व की राष्ट्रीय स्वीकृति का प्रतीक है।
विरासत से नेतृत्व तक
जनजातीय गौरव दिवस केवल एक वार्षिक उत्सव नहीं है — यह भारत की विविधता को एक सूत्र में पिरोने वाला आंदोलन है। यह भगवान बिरसा मुंडा सहित उन सभी वीरों के बलिदान को नमन करता है जिन्होंने राष्ट्र की नियति को गढ़ा, और आज की युवा पीढ़ी को बड़े सपने देखने, लगन से सीखने और निर्भीक होकर नेतृत्व करने की प्रेरणा देता है।
जब भारत विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है, तब उसके जनजातीय पूर्वजों की अजेय भावना प्रगति के मार्ग को आलोकित कर रही है। सच्चा विकास वही है जहाँ परंपरा और परिवर्तन, जड़ें और आकांक्षाएँ, दोनों साथ चलें। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का स्वप्न तभी साकार होगा जब जनजातीय समाज भी समान गति से आगे बढ़े — क्योंकि उनका उत्थान ही राष्ट्र की शक्ति है, उनका गौरव ही उसकी विरासत।
जनजातीय गौरव दिवस केवल भारत के गौरवशाली अतीत का उत्सव नहीं, बल्कि एक जीवंत और आत्मविश्वासी भविष्य का वंदन भी है — जहाँ हर जनजातीय स्वर भारत की एकता, गरिमा और प्रगति की जीवंत तस्वीर में अपनी विशिष्ट पहचान जोड़ता है।
(लेखिका दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पीएच.डी. हैं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से संलग्न हैं।)