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ध्येय यात्रा एवं कविताई’ सम्पन्न

इंदौर। हिन्दी के तकनीकी विस्तार के लिए कार्यरत मातृभाषा डॉट कॉम की 9वीं वर्षगाँठ पर रविवार को आनंद मोहन माथुर सभागृह, इन्दौर प्रेस क्लब, इन्दौर में ‘ध्येय यात्रा व कविताई’ का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि हिंदीनामा के संस्थापक अंकुश कुमार एवं अध्यक्षता प्रेस क्लब के अध्यक्ष दीपक कर्दम ने की। प्रेस क्लब उपाध्यक्ष संजय त्रिपाठी विशेष अतिथि रहे।
शब्द स्वागत मातृभाषा के संस्थापक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने किया व अतिथि स्वागत मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नितेश गुप्ता, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. नीना जोशी, अरुण सिर्वी, आशीष पँवार ने किया।
आयोजन में मातृभाषा डॉट कॉम की स्मारिका ‘ध्येय यात्रा’ का लोकार्पण भी हुआ।
मुख्य अतिथि अंकुश कुमार ने कहा कि ‘वर्तमान में साहित्य पत्रकारिता के लिए एकमेव मातृभाषा डॉट कॉम ही कार्यरत है, जिसका ध्येय हिन्दी सेवा है। आज हिन्दी के विस्तार की आवश्यकता भी है।’
प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम ने कहा कि ‘हिन्दी के विस्तार में मातृभाषा का योगदान महत्त्वपूर्ण है, यह हिन्दी का भाल है।’
संजय त्रिपाठी ने मातृभाषा डॉट कॉम के 9 वर्ष पूर्ण होने पर शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
द्वितीय सत्र में वरिष्ठ कवि प्रदीप नवीन ने अध्यक्षता की एवं हरेराम वाजपेयी का आतिथ्य रहा। इस सत्र में कविताओं का पाठ हुआ।
कार्यक्रम में महासचिव प्रदीप जोशी, रमेशचंद्र शर्मा, मणिमाला शर्मा, अभिषेक रघुवंशी, मनीष मक्खर, लक्ष्मीकांत पण्डित, दर्शना टकले, डॉ. नीरज दीक्षित, सौरव गौसर सहित शहर के प्रबुद्ध साहित्यकार शामिल हुए।
 ‘कविताई’ में नारायण कुमावत, काजल तिवारी, डॉ. अरूण सिरवी, आशीष पंवार, निशा रघुवंशी, सुधाकर मिश्र, रिया मोरे, पारस बिरला, ⁠कुलश्रेष्ठ शर्मा, आकाश यादव, आरडी माहोर, सरला मेहता, श्रीधरा पटेल, संदीप बिरला, चेतन जोशी, गौरव गुर्जर, सुषमा व्यास ‘राजनिधि’, मानवर्धन तिवारी, गोपाल गर्वित व मणिमाला शर्मा ने काव्यपाठ किया ।

डॉ.अपर्णा पाण्डेय का साहित्य संसार सीप के मोती जैसा

यक्षों की अलका नगरी में, लेकर पहुंचो तुम संदेश।
विरह ताप को दूर मिटाकर , मन का हल्का कर दो क्लेश।
चंद्रमौलि के सिर पर स्थित ,चंद्र रश्मियों से हैं श्वेत।
धन स्वामी कुबेर नगरी वह, धौतहर्म्य उद्यान विशेष ।।

यह है कालिदास के मेघदूतम गीतिकाव्य के हिंदी काव्यानुवाद का एक उदहारण जिसका डॉ.अपर्णा पांडेय ने हिंदी में सरल भाषा में अनुवाद का महत्वपूर्ण कार्य कर हिंदी की के विद्यार्थियों के लिए सुगम बनाया। इस काव्यानुवाद के विषय में आचार्य  अग्निमित्र शास्त्री लिखते हैं  इस अनुवाद में हिंदी के महाकवि जयशंकर प्रसाद ,आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की शास्त्रीय हिंदी के झलक प्रत्यक्ष रूप से दृष्टिगोचर होती है । अनुवाद का एक उदाहरण देखिए –

स्निग्ध मसारिन अंजन सम कांति, वाले तट पर पहुंच जरा।
सद्य काटे  द्विरद दशन सम,श्वेत वर्ण कैलाश भरा।
निरनिमेश तव  रूप तुम्हारा, दर्शनीय हो जाए जरा ।
ज्यों गौरांग  राम निश्चित, कंधे  मध्य दुकूल धरा।।

रचना धर्म  काव्य निर्माण की एक कसौटी उनके साहित्य का तुकांत या तुकांत होना भी रहा है । कहने को यह डॉ.पांडेय की प्रथम कृति है पर उपयुक्त कसौटी पर  यह कृति खरी उतरती है । एक अन्य उदाहरण देखिए –

जिस अलका के मार्ग सुशोभित अलक गिरे मन्दारों से ।
शीघ्र गमन करने के कारण, स्वर्ण कमल कचनारों से ।।
कुच प्रदेश टूटे हारों से ,औ मोती के हारों से ।
सूर्य उदय होने पर जाती , चिन्ह लिए अभिसरों के ।।

डॉ.पांडेय हाड़ोती अंचल की एक ऐसी  रचनाकार हैं जिन्होंने शिक्षिका के रूप में हिंदी सेवा का परचम भारत से बाहर ढाका ( बांग्लादेश ) में भी लहराया। आपने भारतीय विदेश सेवा में चयनित होकर 2013 से 2017 तक प्रतिनियुक्ति पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, नई दिल्ली द्वारा सांस्कृतिक प्रतिनिधि और हिंदी शिक्षक के रूप में ढाका में हिंदी और संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य किया। जहां इंदिरा गांधी सांस्कृतिक केंद्र और आधुनिक भाषा इंस्टीट्यूट ,ढाका  विश्वविद्यालय में  प्रथम हिंदी पीठ के रूप में भी कार्य किया और ढाका विश्व विद्यालय में ( एक वर्षीय पाठ्य क्रम) शुरू हुआ।”पुराणों में शुकदेव” इनकी गहन अनुसंधानात्मक प्रवृत्ति का मधुर फल है, जिसके द्वारा हम शुकदेव जी के समग्र व्यक्तित्व और कृतित्व को आत्मसात कर सकते हैं। इस कृति पर यह विचार लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली के संस्कृत के विभागाध्यक्ष आचार्य  स्व.इच्छाराम राम द्विवेदी”प्रणव” ने व्यक्त किए थे।

रचनाकार हिंदी, संस्कृत और बांग्ला  भाषाओं पर समान अधिकार रहती हैं। इन्होंने हिंदी भाषा  में गद्य और पद्य विधाओं में संस्मरण,ग़ज़ल ,उपन्यास ,निबंध ,गीत, समीक्षाएं आदि लेखन के साथ-साथ संस्कृत और बांग्ला पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद किया। इनका उन्मेश, प्रवासी मन काव्य संग्रह आध्यात्मिक ,सांस्कृतिक ,राष्ट्रीय भाव भूमि से ओतप्रोत है। इस संग्रह की कविताओं से मानवता एवं देश प्रेम के स्वर गूंजते हैं । इनके गीत, ग़ज़लों में प्रेम, विरह , बिछोह, पीड़ा के भावों को सहज ही महसूस किया जा सकता हैं। यह काव्य संग्रह ढाका प्रवास के दौरान लिखी गई ऐसी कृति है जिसमें महिलाओं के मन में रूढ़िवादी सोच के प्रति तीव्र आक्रोश,  तो उससे मुक्त होने की छटपटाहट भी दिखाई देती है। साथ ही कविताएं  उदात्त प्रेम की पक्षधर हैं ,जो कण-कण  में ईश्वरीय रूप को दृष्टिगत करती हैं । कवि ,समीक्षक स्व. वीरेंद्र विद्यार्थी लिखते हैं कि “आत्मा के चिर संतति ” गीति – संस्कृति का प्रथम प्रस्फुटन जगत और जीवन का खूबसूरत दर्पण  बन गया है। जिसके जूम लेंस में आलोकित अतीत रक्त रंजित  इतिहास की  कौन किरचें वर्तमान का भाष्य भविष्य की भव्यता सृष्टि का व्याकरण अपने को बार-बार निहारते, निखारते  और पैनाते रहते हैं ।
आपने  बांग्ला भाषा के लेखक “बंदे अली मियां “की पुस्तक “प्रिय गल्प” कहानियों का हिंदी में अनुवाद किया। इन कहानियों का उद्देश्य बच्चों को प्राकृतिक परिवेश से जोड़ना उनकी बाल सुलभ कल्पनाओं को चित्रित करना है। इस पुस्तक की भूमिका ढाका में इनके छात्र रहे सैयद मेहंदी हसन ,संपादक देवन बाग साप्ताहिक समाचार पत्र ,ढाका द्वारा लिखी गई है। उनका मानना है कि साहित्य किसी देश विशेष या स्थल विशेष से संबंध नहीं होता। वरन वह तो संपूर्ण विश्व  से संबंधित होता है। इन कहानियों की विशेषता यह है कि यह कहानियां बाल केंद्रित हैं । बाल मनोविज्ञान को शिष्टता के साथ ,सरलता के साथ प्रस्तुत करना अत्यधिक कठिन कार्य है, परंतु डॉ. पांडे ने बाल मनोविज्ञान को समझने के लिए उनके भाव धरातल पर उतरकर उतनी ही सहजता से,सफलता से और संवेदना के साथ अनुवाद किया है । लेखक के विचारों के साथ तादात्म्य  स्थापित में किए बिना प्रभावी अनुवाद नहीं किया जा सकता है।
इस संदर्भ में मैं कुछ कहानियों “परियों का देश”, “चलो आम इकट्ठा करें”,” चंदा मामा का देश” आदि  प्रभावी हैं। युवावस्था के प्रेम पर आधारित दो उपन्यास”तड़प “और “दो मित्रों की कथा” लिखे हैं।
इनकी प्रकाशित संस्मरण  कृति” विदेश प्रवास और हिंदी सेवा” पर  साहित्यकार श्री जितेंद्र   निर्मोही  भूमिका में लिखते हैं  अपर्णा पांडे का अपना शिल्प है । संस्मरण में उनका स्व और पर वेश दोनों बोलते हैं। संस्मरण के मूल में भारतीयता है। यही कारण है कि उनके संस्मरण कहीं-कहीं भारतीय चिंतन के ध्वजवाहक हो जाते हैं। वह अपने पूर्ण परिवेश को भारतीय चिंतन के साथ संस्मरण में समाहित करने का प्रयास करती हैं । हमारा “वसुधैव कुटुंबकम” वाला नजरिया जब वह लेकर चलती हैं, तो बांग्लादेश की मिट्टी से भी भारतीयता की खुशबू खोज निकालती हैं। उनके संस्मरण साहित्य का आस्वाद जब कोई पाठक लेता है, तो उसका मन होता है ,यही तो चाहता था मैं ! विदेश में रहकर जो लोग हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति की सेवा में लगे हुए हैं ,यह संस्मरण उनकी बानगी  है और आने वाली पीढ़ी के लिए दिशा निर्देश । ऐसी कृतियों के कुछ अध्याय पाठ्यक्रम में शामिल होने आवश्यक है।
आपका लेखन आपके भ्राता श्री आचार्य इच्छाराम द्विवेदी “प्रणब “जी और पिता श्री आचार्य लाल बिहारी द्विवेदी के साहित्य से प्रेरित है। वह ज्योतिष, पुराण और वैदिक विद्वान के रूप में संस्कृत साहित्य जगत में और हिंदी साहित्य जगत में  विशेष स्थान रखते थे । घर में बचपन से ही साहित्यिक वातावरण था। आश्रम के वातावरण में पली – बढ़ी और संतों का सान्निध्य  प्राप्त हुआ। इनके पिता स्वयं भी उत्तर प्रदेश के सुप्रसिद्ध  श्रीमद्भागवत कथा वाचक और ज्योतिष विद्या के प्रकांड विद्वान रहे । घर पर साहित्यिक माहौल था। गोपाल दास नीरज , कुंवर बेचैन, राजेंद्र मिश्र, बच्चू लाल अवस्थी ,राधा वल्लभ त्रिपाठी, आचार्य रमाकांत शुक्ल जैसे विख्यात संस्कृत के प्रकांड विद्वानों का घर पर प्रतिवर्ष संस्कृत शोध संगोष्ठियों में ,काव्य गोष्ठियों में,  हिंदी गोष्ठियों में आना – जाना होता था । अतः आध्यात्मिक  और साहित्यिक वातावरण होने के कारण बचपन से ही लेखन में रुचि जागृत हुई।
 आपने  सांख्यदर्शन  की पुस्तक  का हिंदी भाषा में  काव्यानुवाद किया। इस पुस्तक की भूमिका पद्मश्री से अलंकृत” आचार्य रमाकांत शुक्ल” ने लिखी है  । यह  पुस्तक अनेक विश्व विद्यालयों में  पाठ्यक्रम में शामिल है। अनेक विद्वतजनसरलातिसरल मार्ग से छात्रों को समझाने के लिए अनेक शैक्षिक उपाय करते हैं। डॉक्टर अपर्णा पांडेय ने हिंदी काव्यानुवाद को अति सरल रीति से समझाने का प्रयास किया है। सांख्य कारिका के काव्यानुवाद से आपने जन साधारण  को ज्ञान की धारा में पूरी तरह से मिलने  का अवसर प्रदान कर स्तुत्य प्रयास किया है।

    युवाओं को भारतीय भाषा ,ज्ञान और संस्कृति से अवगत कराना  और जिज्ञासा पैदा कर अपनी संस्कृति के प्रति श्रद्धा भाव पैदा करना इनके लेखन का मूल उद्देश्य है। आपकी अब तक निम्नानुसार कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। आप कथेत्तर विधा में हिन्दी के प्रति  प्रतिबद्ध और समर्पित हैं ।अभी तक इन्होंने दस पुस्तकें  योगदर्शन (हिंदी अनुवाद), श्रीमद् भगवद गीता (हिंदी अनुवाद), सांख्यकारिका (हिंदी काव्यानुवाद), मेघदूतम (हिंदी काव्यानुवाद), प्रिय गल्प ( बांग्ला कहानियों का हिंदी में अनुवाद), उन्मेश, प्रवासी मन काव्य संग्रह), सुनो काव्य संग्रह), वैचारिक पुष्प गुच्छ एवम समीक्षाएं (शोधपरक और मौलिक निबंध), विदेश प्रवास और हिंदी सेवा (संस्मरण) तथा पुराणों में शुकदेव (शोध प्रबन्ध) कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं।आपने आई. एम.पुणे, हरिहर आश्रम, कनखल, हरिद्वार, सर्वभाषा साहित्यकार कुंभ, अजमेर सहित अनेक मंचों पर अपने अनेक शोध पात्रों का प्रस्तुतिकरण किया है। साथ ही आपने साहित्य  साधना के अंतर्गत कोटा के अनेक मंचों से काव्यपाठ किया है। आपने 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन मारीशस 2018 में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर  वहां प्रसूनजोशी (निदेशक, फिल्म प्रमाणन बोर्ड, भारत),  कुंवर बेचैन,  अशोक चक्रधर जैसे ख्यातनाम साहित्यकारों से लेखन हेतु प्रेरणा प्राप्त की।

परिचय :
डॉ.अर्पणा  पांडेय का जन्म साहित्यिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक रूप से समृद्ध परिवार  संस्कृत और ज्योतिष के प्रकांड विद्वान आचार्य पिता  लाल बिहारी द्विवेदी (लब्ध प्रतिष्ठ राष्ट्रपति पुरस्कार) और माता कृष्णा देवी द्विवेदी के आंगन में चौथी पुत्री के रूप में 1970 में मैनपुरी ,उत्तर प्रदेश में हुआ। आपके भाई आचार्य इच्छाराम द्विवेदी ’प्रणव’ भी संस्कृत और हिंदी साहित्य के  ख्यातनाम  विद्वान् रहे हैं । डॉ.अपर्णा पाण्डेय विवाह के पश्चात 1988 में कोटा आ गई। कोटा , राजस्थान में निवास कर रहीं हैं। आपने हिंदी और संस्कृत से स्नातकोत्तर की डिग्री और ’पुराणों में शुकदेव-एक समालोचनात्मक अध्ययन’ विषय पर के.एम. इंस्टीट्यूट,आगरा विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।  आपने अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर अनेक काव्य गोष्ठियों और शोध संगोष्ठियों में भाग लिया है। साहित्यिक गोष्ठियों में कविता पाठ और शोध कार्यशालों में अपने शोध पत्रों का वाचन किया। बांग्लादेश में भारत के राजदूत  हर्षवर्धन श्रृंगला एवं डायरेक्ट जनरल (साउथ एशिया) द्वारा प्रशस्ति पत्र से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी ,जयपुर द्वारा 2023-24 के लिए आपको बांग्ला भाषा की बाल कथाओं की कृति ’प्रिय गल्प’ पर ’रांगेय राघव पुरस्कार’ से सम्मानित किया। इन प्रमुख पुरस्कारों के साथ-साथ दो दर्जन से अधिक संस्थाओं द्वारा आपको पुरस्कृत और सम्मानित किया गया है। आप 2011 में राजस्थान लोक सेवा आयोग से चयनित हो कर शिक्षा विभाग में आई और वर्तमान में सैकंडरी विद्यालय, सुल्तानपुर में सेवारत हैं।

संपर्क : मोबाइल – 7734833428
डॉ.प्रभात कुमार सिंघल
(लेखक डॉ, प्रभात कुमार सिंघल कोटा में रहते हैं और राजस्थान के साहित्य, संस्कृति, पर्यटन व सामाजिक विषयों पर लेखन करते हैं) 

समाचार पत्र सामाजिक सरोकारों को भी बखूबी निभा रहे हैं

कोटा।  व्यावसायीकरण और राजनीतिक प्रभाव होने के बावजूद भी समाचार पत्र सामाजिक सरोकारों को भी बखूबी निभा कर अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। साहित्य, धर्म -समाज, परम्पराओं, सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करते हुए समाज और सरकार के बीच सेतु का कार्य करते हैं।
यह विचार आज संस्कृति, साहित्य, मीडिया फोरम कोटा के संयोजक डॉ. प्रभात कुमार सिंघल द्वारा राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर आयोजित मोबाइल ग्रुप समूह संगोष्ठी में साहित्यकारों और पत्रकारों ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा सामाजिक सरोकारों के साथ –  साथ लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका की वजह से आज भी चौथे स्तंभ के रूप में मजबूत पहचान बनाए हुए है।
ओडिशा के साहित्यकार दिनेश कुमार माली ने कहा प्रेस हमारे लोकतंत्र का सबसे प्रमुख स्तंभ है जो  सामाजिक परिदृश्यों को बदलने की अहम भूमिका होती है। जब-जब राजनीति लड़खड़ाती है, तब-तब ईमानदार एवं निडर प्रेस ही उसे सँभाल सकती है।
सलूंबर की बाल साहित्यकार डॉ. विमला भंडारी ने कहा आजादी के समय जो प्रेस में भूमि का निभायी उसका यह आज दिन तक असर कायम है कि व्यक्ति का विश्वास प्रिंट मीडिया पर कायम है। अखबार या पत्र- पत्रिकाओं में छपी खबर को जनता सत्य मानती है  प्रेस का भी यह दायित्व रहा कि उसने सच्चाई को कभी नहीं छुपाया और जनता के सम्मुख रखा। इतना ही नहीं उसने आगे बढ़कर मार्गदर्शन भी दिया इसीलिए प्रेस को मशाल के रूप में भी चिन्हित किया गया है।
अजमेर के साहित्यकार और मीडिया विशेषज्ञ डॉ .संदीप अवस्थी ने कहा पत्रकारिता सच्चे अर्थों में राष्ट्र और उसके नागरिकों के लिए एक त्याग,समर्पण है।
तभी पत्रकार रात दिन कार्य करते हैं। माखनलाल चतुर्वेदी,माधव सपरे,महावीर प्रसाद द्विवेदी,राजेंद्र माथुर,धर्मवीर भारती, प्रभाष जोशी,कन्हैयालाल नंदन,एसपी सिंह,विनोद मेहता आदि की लंबी  समृद्ध परम्परा है। इनकी शैली पर पत्रकारिता के पाठ्यक्रम में किताब होनी चाहिए। जयपुर के साहित्यकार नंद भारद्वाज प्रेस की निष्पक्षता पर जोर देते हैं।
कोटा के साहित्यकार राजकुमार प्रजापति ने कहा प्रेस का सामाजिक सरोकार समाज के विकास और कल्याण के लिए उसकी भूमिका से जुड़ा होता है। जब मीडिया निष्पक्षता और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करती है, तो उसके कई सकारात्मक सामाजिक प्रभाव होते हैं: – जनजागरण, सत्य की खोज, लोकतंत्र की रक्षा, सामाजिक एकता और सद्भावना, सकारात्मक पहल की प्रेरणा और वंचित वर्गों की आवाज बनती है।
साहित्यकार रामेश्वर शर्मा ‘ रामू भैया ‘ ने कहा समाज के आर्थिक , धार्मिक, आपराधिक, राजनीतिक,  स्वास्थ्य , शिक्षा  , विचार अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता और सीमा, आदि  अनेकों बीसियों सरोकारो को आज प्रेस की मदद के बिना आवाज मिलने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। जिम्मेदार प्रेस ही राष्ट्रीय- अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों  में शान्ति तथा सौहार्द की नींव को ठोस धरातल देता है।
 कोटा की साहित्यकार डॉ .वैदेही गौतम ने कहा मानव सभ्यता के विकास में प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रेस के माध्यम से प्रकाशित व प्रसारित संदेशों की प्रकृति सार्वजनिक होती है जो समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचती है, सहृदय पाठक का साधारणीकरण प्रेस के माध्यम से ही होता है , अतः प्रेस समाज के उत्थान व विकास के लिए अत्यावश्यक है। विजय जोशी ने कहा प्रेस से जुड़े सभी आयाम यथा पत्रकार और लेखक तथा इनके विचारों को मुद्रित करने में अपरोक्ष रूप से सहयोग करने वाले व्यक्ति और व्यक्ति समूह परिवर्तित होते जा रहे समाज के समक्ष जीवन मूल्यों की आभा को दृष्टिगोचर करने में लगें हैं।
कवि और लेखक विवेक कुमार मिश्र ने कहा मीडिया आम आदमी के संघर्ष को केंद्र में रखकर कार्य करता है। कोई भी मीडिया क्यों न हो वह जनता की आवाज को सामने लाता है। मीडिया की विश्वसनीयता भी जन जन की आवाज को उठाने में ही है।
डॉ.अपर्णा पांडेय ने कहा पत्रकार अनेक दबावों के मध्य भी सजग प्रहरी की तरह अपना धर्म निभाता रहा है। पूर्व मुख्य प्रबन्धक स्टेट बैंक विजय माहेश्वरी ने कहा प्रेस समाज के विभिन्न वर्गों की नीति, परंपराओं, मान्यताओं तथा सभ्यता एवं संस्कृति के प्रहरी के रूप में भूमिका निभाती है। प्रेस  सरकारों और जनता के मध्य भी सेतु का काम करती है।  प्रेस किसी भी प्रकार के दबाव, लोभ या डर से दूर रहकर अपनी शक्ति का सदुपयोग जनहित में करे और समाज का मागदर्शन करे। संयोजक ने सभी का आभार व्यक्त किया।

सरयू नदी का द्वीप : फैला सकता है विरासत की ज्योति

अनियमित बदलती धाराएं

सरयू नदी की दुर्दशा से आस्थावान व्यथित हो जाता हैं। सदियों से अयोध्या की पहचान रही सरयू अपनी धारा कई बार बदल चुकी है। घाटों को छोड़कर नदी कई किमी. तक हट कर संकीर्ण धारा के रूप में प्रवाहित हो जाती है। वाराणसी की तर्ज पर बने अयोध्या के घाटों पर कभी सरयू की लहरें कलकल करती रहती थीं। नदी का जल करीब दर्जन भर घाटों को तृप्त करता था। सुबह स्नान और सूर्य नमस्कार के लिए तो शाम को सरयू आरती के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता था। यह विहंगम दृश्य वाराणसी की गंगा आरती की याद दिलाता था। सरयू आरती भी रस्म अदायगी तक रह जाती है। इसका असर यह है कि कभी कभी घाटों पर भी वीरानी छा जाती है। नदी के बीच में टीले बन चुके बालू को हटाने के ठोस प्रयास नहीं हो पाते हैं। सरयू की पेटी उथली हो चुकी है। घाटी के बीच के हिस्से में गाद के ऊंचे टीले बनते जा रहे हैं। ये टीले इतने विशाल हैं कि बरसात के समय भी दिखाई देते हैं , जब सारा इलाका जल से मग्न हो जाता है। इसका प्रमुख कारण नदी की सफाई न होना है ही, अनियोजित ढंग से हुए अवैध बालू खनन के चलते नदी की धारा में बदलाव हो जाता है।

निलयम पंचवटी द्वीप

सरयू नदी में मुख्य रूप से एक बड़ा द्वीप बन चुका है, जिसे निलयम पंचवटी द्वीप के रूप में विकसित किया जा रहा है।   नदियाँ न केवल जीवन का आधार हैं, बल्कि ये सभ्यता और संस्कृति को भी विकसित करती हैं। नदी के बीच पूजा-अर्चना से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है क्योंकि यह प्रकृति के करीब होने और जल संरक्षण के महत्व को समझने का एक सशक्त माध्यम है। यह मान्यता है कि नदियाँ जीवनदायिनी हैं और इनकी पूजा करने से वातावरण में सकारात्मकता आती है। इसी परिकल्पना को साकार करने के लिए रामनगरी में भगवान राम के वन-गमन पर आधारित पंचवटी द्वीप का निर्माण सरयू तट पर हो रहा है। नदी के किनारे गुप्तारघाट से 600 मीटर दूरी पर लगभग 75 एकड़ में 100 करोड रुपए की लागत से यह द्वीप बनाया जा रहा है।

 इसका निर्माण श्रीनिलयम संस्था लखनऊ करीब दो वर्षों से करा रही है। इसे अभी पूर्ण रूप से जमीन पर नहीं उतारा जा सका है। सड़क का निर्माण कराकर उसके किनारे सजावटी पौधे लगा दिये गये हैं। लाइटिंग की भी व्यवस्था कर दी गई है। द्वीप के लिए जिला प्रशासन ने माझा जमथरा में श्रीनिलयम संस्था को कई हेक्टेयर भूमि नि:शुल्क उपलब्ध करायी है। माँ सरयू की गोद में बसा श्री निलयम पंचवटी द्वीप मनमोहक सौंदर्य से परिपूर्ण है। दो चरणों में बन रही इस परियोजना के पहले चरण में 40 एकड़ क्षेत्र में कार्य चल रहा है। इसमें श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ‘राम की जीवन यात्रा’ से जुड़ा अनुभव देने की तैयारी है। परियोजना अयोध्या के पर्यटन और धार्मिक महत्व को नई पहचान देने की दिशा में अहम कदम है। इनका लक्ष्य इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल में बदलना है, जो तन, मन और आत्मा के लिए समग्र अनुभव प्रदान करे।

यह परियोजना पर्यटकों को रामायण से जुड़े प्रसंगों की जानकारी और त्रेतायुगीन अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से लॉन्च की गई है। रिसॉर्ट में प्राकृतिक सुंदरता और आधुनिक सुविधाओं का मिश्रण है। अयोध्या में प्रभु रामलला के दर्शन के लिए देश-विदेश से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को राम लला के दर्शन के बाद प्रभु राम के जीवन दर्शन को आत्मसात करने का यहां मौका मिलेगा। प्रकृति और आधुनिक वास्तुकला के अपने सामंजस्य- पूर्ण मिश्रण के साथ, श्री निलयम का लक्ष्य पर्यटकों की लोकप्रियता में श्री राम मंदिर जैसा अन्य विकल्प भी प्रस्तुत करना है। हरे-भरे प्राकृतिक दृश्यों और वनस्पति उद्यानों से लेकर सांस्कृतिक प्रदर्शनियों और साहसिक गतिविधियों तक, हर कोना हर उम्र के मेहमानों के लिए आकर्षण और स्फूर्ति के साथ प्रस्तुत करने की योजना है।

नमामि गंगा परियोजना से प्रेरित

श्री निलयम पंचवटी द्वीप प्रॉजेक्‍ट के प्रभारी राज मेहता ने बताया कि 2019 में राष्‍ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में पी एम मोदी ने नमामि गंगा परियोजना को अर्थ गंगा जैसे सतत विकास मॉडल में बदलने का संदेश दिया था। जिससे सदियों से नदियों पर आश्रित लोगों को जोड़ा जा सके। उन्‍हें रोजगार के नए अवसर मिले, जिससे उनका जीवन स्‍तर उठ सके। इसी संदेश से प्रेरित होकर श्रीनिलयम पंचवटी द्वीप की संरचना की गई है।  श्रीनिलयम पंचवटी में श्रद्धालुओं को राममय बनाने के सारे साधन एक ही परिसर में उपलब्‍ध करवाने की व्‍यवस्‍था की गई है। जहां वे प्रवास के दौरान वह आध्यात्मि‍क सुख का अनुभव कर सकेगें।

पीपे का पुल बनाया जा रहा 

अयोध्या के माझा जमथरा में निर्माणाधीन पंचवटी द्वीप पहुंचने के लिए सरयू नदी पर पीपे का पुल बनाया जाएगा। पीपे के इस पुल से चार पहिया वाहन भी द्वीप तक आसानी से पहुंच सकेंगे। पैदल व बाइक से तो उस पर जाया ही जा सकेगा। करीब दो सौ मीटर लंबा यह पुल पांच मीटर चौड़ा होगा। यह पुल लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधीन होगा।

सरयू नदी पर एक नया पीपा पुल बनाने के लिए शासन ने ₹1,46,78,000 की धनराशि स्वीकृत की है, जिसमें से ₹73,39,000 इस वित्तीय वर्ष में जारी कर दिए गए हैं।  अवर अभियंता पी पी सिंह ने बताया कि पीपे का पुल बनाने के लिए टेंडर का प्रकाशन हो चुका है। 15 अक्टूबर से 15 जून तक इस पर आवागमन हो सकेगा। 15 जून से बरसात शुरू होने पर इसे प्रांतीय खंड हटा लेगा। उस समय नदी में पानी बढ़ जाएगा। बहाव भी बहुत तेज होगा। 15 अक्टूबर से इस पर आवागमन शुरू होगा।

मुक्त गगन के नीचे विरासत की खास गतिविधियां 

इस द्वीप पर कई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जैसे – अयोध्या के बेहतरीन रिट्रीट, श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट में दिव्य शांति और शानदार आराम की व्यवस्था। हरियाली के बीच बसा लक्ज़री टेंट स्टे, विरासत, आध्यात्मिकता और आधुनिक सुविधाओं का एक अनूठा मिश्रण प्रदान करता है, जो एक शांतिपूर्ण और आनंददायक प्रवास सुनिश्चित करता है।

रामकथा अनुभव केंद्र 

अयोध्या के श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट में राम अनुभव केंद्र के आध्यात्मिक सार का वातावरण प्रदान करता है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ भक्ति और दिव्य अनुभव का मिलन होता है। भगवान श्रीराम के जीवन और शिक्षाओं में आगंतुकों को डुबोने के लिए डिज़ाइन किया गया यह अनूठा स्थान इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक विरासत को दर्शा रही है।

राम के जीवन चरित्र से जुड़े प्रसंग 

प्रभु राम के वनगमन के साक्षी बनाने के लिए राम वनगमन पथ का क्रिएशन किया जा रहा है। द्वीप में भगवान राम की जीवन गाथा को मूर्तियों, भित्तिचित्रों और ऑडियो विजुअल तरीके से मानस के विभिन्न खंडों का प्रस्तुतीकरण किए जाने की योजना है। पंचवटी द्वीप में मूर्तियों के माध्यम से चाहे वह ऋषि मुनि हो या फिर शबरी अहिल्या हो , श्रद्धालुओं को रामायण कालीन प्रसंग को बताने की कोशिश की जा रही है।

ऋषियों के नाम पर कॉटेज

पर्यटन के लिहाज से श्रद्धालुओ के लिए टेंट सिटी हब और बच्चों के एंजॉय के लिए भी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए अयोध्‍या को आकर्षण के केंद्र के रूप में स्‍थापित करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। निलयम पंचवटी द्वीप में आने वाले पर्यटकों को प्रभु राम के जीवन चरित्र से जुड़े प्रसंगों की जानकारी के साथ त्रेता युगीन व्‍यवस्‍था का भी अनुभव और आभास हो सके ऐसा प्रयास किया जा रहा है। कल्‍पवास और वैदिक गांव की अनुभूति कराती ऋषियों-मुनियों के नामों से बनी 108 पर्ण कुटी बन रही है।

अन्य रोमांचक गतिविधियां

कचरा व अपशिष्‍ट जल का ट्रीटमेंट व रिसाइकल प्‍लांट चालू किया जाएगा।  ओडीओपी के तहत अयोध्‍या के गुड़ व चटाई उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा। मिट्टी से बने बर्तनों- खिलौनों को बढ़ावा दिया जाएगा। घाट की हाट में इनकी बिक्री को प्रोत्‍साहन दिया जाएगा। सांस्‍कृतिक कार्यक्रम में भजन संध्‍या आयोजित होंगी। सन राइज और सनसेट पाइंट विकसित किए जाएंगे। मैजिक-शो, घुड़सवारी, ऊंट की सवारी, तीरंदाजी के साथ ही हस्‍तरेखा और ज्‍योतिष शास्‍त्र विशेषज्ञों के परामर्श की व्‍यवस्‍था यहां उपलब्ध कराई जाएगी। नौकायन, पावर बोट, स्‍पोर्ट्स का इंतजाम भी किया जाएगा।

गंतव्य विवाह 

श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट के शांत और आध्यात्मिक वातावरण में स्थित मान सरोवर बैंक्वेट में अपने जीवन के सबसे खास दिन का जश्न मनाया जा सकेगा। विलासिता, परंपरा और दिव्य आशीर्वाद का एक आदर्श मिश्रण,” हमारा बैंक्वेट आपकी शादी” को एक रोचक और अविस्मरणीय अनुभव में बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

योग एवं सत्संग स्थल 

श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट के योग एवं सत्संग स्थल पर आध्यात्मिक सद्भाव में डूबने का अवसर मिलेगा । मन, शरीर और आत्मा के पोषण के लिए डिज़ाइन किया गया यह पवित्र स्थान ध्यान, योग और आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए एक शांत वातावरण प्रदान करता है, जिससे अयोध्या के दिव्य स्पंदनों के बीच अपनी अंतरात्मा से जोड़ा जा सकता है। योग से निरोग की अवधारणा को भी साकार किया जा रहा है।

साहसिक एडवेंचर जोन 

 श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट के एडवेंचर ज़ोन में श्रद्धालु अपनी साहसिक भावना को उजागर कर सकता है। रोमांच की तलाश में हों या परिवार और दोस्तों के साथ मौज-मस्ती की गतिविधिया एडवेंचर ज़ोन प्रकृति के बीच एक रोमांचक क्षण प्रदान करता है।

समग्र स्वास्थ्य के लिए जिम ज़ोन 

श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट में समग्र स्वास्थ्य के लिए जिम ज़ोन बनाया जा रहा है। जहां प्रवास के दौरान सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए अनुकूल डिज़ाइन किया गया है। फ़िटनेस के शौकीन हों या बस अपनी दिनचर्या को बनाए रखने के लिए अत्याधुनिक जिम

संसाधन मुहैया कराया जा रहा है। जिससे फिट रहने के लिए एक आदर्श वातावरण मिलेगा।

बच्चों का क्रीडस्थल और मनोरंजन 

श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट में पूरे परिवार के लिए सुखद यादें बनाने के लिए बच्चों का क्रीडस्थल और मनोरंजन की भरपूर व्यवस्था की गई है। यहां का  किड्स ज़ोन एक जीवंत और सुरक्षित जगह है जहाँ बच्चे खेल सकते हैं, सीख सकते हैं और नई-नई चीज़ें खोज सकते हैं, जबकि माता-पिता आराम से अपने प्रवास का आनंद ले सकते हैं।

जैविक- औषधीय खेती

श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट में, गोबर पर आधारित जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। हमें जैविक खेती के माध्यम से एक स्थायी और स्वस्थ जीवन शैली को

अपनाने के तौर तरीके देखने को मिलेगा।

यहां के हरे-भरे खेत मेहमानों को पारंपरिक खेती, ताज़ी उपज और पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली की खूबसूरती का अनुभव करने का अवसर प्रदान करते हैं। स्‍थानीय औषधीय आयुर्वेदिक पौधों से जीविका के साधन सृजित करने की योजना है।

शुद्ध स्‍वादिष्‍ट सात्विक रेस्टोरेंट

शुद्ध स्‍वादिष्‍ट शाकाहारी भोजन प्रसाद और शुद्ध गाय के घी से बने व्‍यंजन की व्‍यवस्‍था की जा रही है। यहाँ हर भोजन एक पवित्र अनुभव है।  श्री निलयम पंचवटी रिज़ॉर्ट में स्थित रेस्टोरेंट भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद की समृद्ध परंपराओं से प्रेरित एक प्रामाणिक सात्विक भोजन अनुभव प्रदान करता है।

नए प्याइंटों पर काम 

करने की संभावनाएं

नए प्याइंटों पर कुछ और किए जाने के संभावनाएं हैं। (जो संलग्न चित्र में लाल रंग में 1,2,3 और 4 नम्बर के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया गया है।) इसके लिए नदी के जलस्तर को स्थिर करने और बाढ़ नियंत्रण के उपाय करने होंगे। पंचवटी द्वीप के विकास और श्री राम अनुभव केंद्र के निर्माण के तर्ज पर अयोध्या विकास प्राधिकरण और वैज्ञानिक विशेषज्ञ इस दिशा में प्रयास कर सकते हैं। विकास के तहत व्यापार और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है, खासकर जलमार्ग से। नदी में कटान और अनियमित जल स्तर की समस्या के कारण इन योजनाओं को सावधानी पूर्वक और इंजीनियरिंग की सहायता लेना आवश्यक होगा।

1.एक और द्वीप

गूगल मैप पर R4GQ+798 फतेहपुर सरैया मांझा, अयोध्या पर दर्शनीय है। यह श्री संकट मोचन श्री हनुमान मंदिर के पास गूगल मैप पर R42Q+X2X अयोध्या कैंट, 224001 के पास स्थित है।

2.एक और द्वीप 

गूगल मैप पर R55F+7XF मांझा कलां  पर यहां एक द्वीप विकसित हो सकती है, जो पंचवटी प्राचीन हनुमान मंदिर बाटी बाबा के आश्रम केनिकट है।

3.एक और द्वीप 

 गूगल मैप R53R+V6F मांझा कलां

 पर दिखने वाली एक और द्वीप भी विकसित हो सकती है। यह राजघाट के पार्क के पास स्थित है।

4.एक और द्वीप 

 गोआश्रय स्थल,अयोध्या गोण्डा राज मार्ग से करीब में ही है। गूगल मैप पर R59H+34R मांझा कलां अयोध्या पर दर्शनीय है। यहां भी नदी तलीय विकास की प्रचुर संभावनाएं हैं।

लेखक परिचय:-

(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए सम सामयिक विषयों,साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करते रहते हैं।

पत्राचार का पता: मकान नम्बर 8/ 2785, निकट लिटिल फ्लावर स्कूल, आनन्द नगर कटरा बस्ती 272001)

पाकिस्तानी सेना प्रमुख की बढ़ी ताकत, सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा ?

दरकता पाकिस्तान कई नागरिक समस्याओं जैसे महंगाई, बेरोजगारी, दैनिक जीवन के उपयोग की वस्तुओं  को जुटाने की जद्दोज़हद से जूझ रहा है। बलोचिस्तान, खैबरपख्तूनवा जैसे प्रान्त सुलग रहे हैं। हुक्मरान इनको दबाने के लिए सीमाओं पर आग लगा रहे हैं। इस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का झुकाव भी पाकिस्तान की ओर लग रहा है। इन सबके बीच जिस तरह पाकिस्तानी सेना प्रमुख की शक्तियों को संविधान संशोधन के माध्यम से बढ़ाया गया है वह भविष्य के लिए खतरनाक संकेत दे रहा क्योंकि पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर लगातार आतंकवाद को संरक्षण व पूरा सहयोग कर रहा है।

पाकिस्तान में सेना प्रमुख को मिली शक्तियों के अनुसार अब जब कभी पाकिस्तान का भारत या अफगानिस्तान के साथ युद्ध होगा तब सेना प्रमुख मुनीर ही परमाणु हमला करने का फैसला करेगा। पाक सेना प्रमुख मुनीर को  परमाणु हमला करने की यह शक्ति उस समय  मिली है जब कुछ दिनो पूर्व ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने बयान दिया है कि पाकिंस्तान चोरी छिपे  तथा रूस, चीन और कोरिया लगातार परमाणु परीक्षण कर कर रहे हैं  इसलिए हम भी करेंगे।

पाकिस्तानी संसद ने  सेना प्रमुख  आसिफ मुनीर की शक्तियो को बढ़ाने और  सुप्रीम कोर्ट की ताकत को कम करने वाले 27वें संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। पाकिस्तानी नेशनल असेंबली ने  इस विधेयक को 234 मतों के बहुमत से पास किया केवल  चार सांसदो ने इसके विरोध में मत दिया। यह विधेयक सीनेट से पहले ही पारित हो चुका है। नये कानून के अनुसार  मुनीर को चीफ आफ डिफेंस फोर्सज बनाया जा रहा है। यह 27 नवंबर 2025 से लागू हो जाएगा  पद मिलते ही उन्हें परमाणु हथियारो की कमांड मिल जाएगी। अपना कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद भी वह अपने पद पर बने रहेंगे और उन्हें  आजीवन कानूनी छूट मिलती रहेगी अर्थात  नए कानून के अनुसर अब आसिफ मुनीर को आजीवन कोई नहीं हटा सकेगा ।

अब पाकिस्तान की संसद ने अदालतों पर भी अपना नियंत्रण  कर लिया है जिसके अंतर्गत अब सरकार तय करेगी कि कौन से जज कौन सा केस सुनेंगे। अब जजों का ट्रांसफर राष्ट्रपति करेंगे । पहले यह अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास था । अब अगर वहां की अदालत मे कोई केस एक साल तक नहीं चला तो वह केस बंद कर दिया जाएगा। नए संविधान संशोधन के बाद अब सुप्रीम कोर्ट की ताकत घट जाएगी और राष्ट्रपति नाम मात्र का सुप्रीम कमांडर रह जाएगा।

पाकिस्तानी संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि अब देश की सेना और ताकतवर हो जाएगी। पाकिस्तान में अब तानाशाही का एक नया दौर देखने को मिल सकता है जो दक्षिण एशिया की शांति के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।  पाकिस्तान के विरोधी दल जहां इसे लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बता रहे हैं वहीं पाक प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ इसे राष्ट्रीय एकता के लिए उठाया गया कदम बता रहे हैं। पाकिस्तान में आलोचकों का कहना है कि यह बदलाव देश को सैन्य शासन की ओर ले जा रहा है।

पाकिस्तान का इतिहास रहा है  कि व्हां के आर्मी चीफ रिटायर हो जाने के बाद विदेश चले जाते थे लेकिन अब मुनीर न तो रिटायर होंगे और न ही विदेश जाएंगे। लेकिन क्या वहां के अन्य आर्मी कमांडरो को यह बात मंजूर होगी? पाकिस्तान के इतिहास में यह परंपरा रही है कमांडर रिटायरमेंट के बाद यूरोप, सऊदी अरब या अमीरात में आराम का जीवन व्यतीत करने के लिए चले  जाते हैं । जनरल अशफाक परवेज कियानी से लेकर जावेद बाजवा तक ने अपने ठिकाने विदेश में बनाए और पूर्वसेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ  का हाल तो पता ही है क्या हुआ। किंतु अब आसिफ मुनीर संविधान संशोधन की आड़ लेकर अपने पद पर अजर अमर हो रहे हैं।

पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिफ मुनीर आतंकवाद को लगातार प्रश्रय दे रहा है। भारत भी आपरेशन सिंदूर के समय तय कर चुका है कि अब अगर भारत पर आतंकवादी हमला हुआ तो वह एक्ट आफ वॉर ही माना जाएगा। 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास बम धमाका हो चुका है जिसकी गहन जांच चल रही है और धमाके के लिंक जैश- ए -मोहम्मद से ही जुड़ते नजर आ रहे हैं।

पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर भी भारत से पंगा लेने के लिए बैचेन लग रहा है। पाकिस्तान को लगातार भय सता रहा है कि अबकी बार भारत पाकिस्तान को छोड़ेगा  नहीं। यदि युद्ध हुआ तो पाकिस्तान को भी कम से कम चार फ्रंट पर युद्ध करना ही पड़ेगा और तब पाकिस्तान अपना अस्तित्व बचाने के लिए भारत पर परमाणु हमला करने की हिमाकत कर सकता है। मुनीर नागरिक समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए कई पैंतरे अपना रहा है और भारत में आतंकी हमले कराना उसी का हिस्सा है। किंतु मुनीर को ध्यान रखना चाहिए कि अब समय बदल चुका है और अबकी बार ऐसी हिम्मत से पाकिस्तान का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित

फोननं. – 9198571540

हिंदू कॉलेज में वंदे मातरम् की डेढ़ सौ वीं वर्षगांठ पर समारोह

दिल्ली। वंदे मातरम दो शब्दों का ऐसा महामंत्र है जिसने लाखों भारतीयों को औपनिवेशिक शासन से लड़ने का साहस प्रदान किया। हमारे राष्ट्रगीत की डेढ़ सौ वीं जयंती देशवासियों को नया उत्साह प्रदान करेगी और राष्ट्रसेवा के हमारे संकल्प को अधिक मजबूत करेगी। हिंदू कालेज में वंदे मातरम की रचना की डेढ़ सौ वीं जयंती पर आयोजित भव्य समारोह में प्राचार्य प्रो अंजू श्रीवास्तव ने कहा कि इस मंत्र का उच्चार कर हमारे क्रांतिकारियों ने हंसते हंसते फांसी का फंदा चूमा था। प्रो श्रीवास्तव ने कहा कि वंदे मातरम बांग्ला के महान उपन्यासकार बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा अक्षय नवमी के शुभ अवसर पर 7 नवंबर 1875 को लिखा गया था। हिंदू कालेज के विशाल सांगानेरिया सभागार में विद्यार्थियों, शिक्षकों और सह शैक्षणिक कर्मचारियों ने सामूहिक स्वर में संपूर्ण वंदे मातरम गायन किया और उल्लास व्यक्त किया। महाविद्यालय की संगीत संस्था अलंकार के विद्यार्थियों के नेतृत्व में वंदे मातरम के बाद अन्य देशभक्ति गीतों का गायन भी हुआ।
इससे पहले समारोह में हिंदू कॉलेज के प्रधानमंत्री समीर कुमार उपाध्याय ने सभी का स्वागत किया। राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में हुए इस आयोजन में में विद्यार्थियों ने तिरंगा शोभा यात्रा भी की। संयोजन कर रहे कार्यक्रम अधिकारी डॉ पल्लव ने कहा कि विश्व भर में वंदे मातरम अकेला ऐसा गीत है जिसका आधार लेकर विभिन्न भारतीय भाषाओं  में अनेक गीतों की रचना हुई। आयोजन में उप प्राचार्य प्रो रीना जैन सहित विभिन्न शैक्षणिक विभागों के प्रभारी शिक्षक भी उपस्थित थे।
आयोजन के दूसरे भाग में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए उद्बोधन का सीधा प्रसारण हुआ। प्रधानमंत्री के उद्बोधन को सभागार में उपस्थित सभी श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक सुना।
अंत में राष्ट्रीय सेवा योजना के विद्यार्थी अध्यक्षा निशांत सिंह ने आभार व्यक्त किया।

अर्चिता द्विवेदी
जन संपर्क प्रमुख
राष्ट्रीय सेवा योजना
हिन्दू महाविद्यालय, दिल्ली
मो -9452536877

हिंदू कॉलेज में नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत पोस्टर प्रतियोगिता

दिल्ली। नशा जीवन को नष्ट कर देता है और इससे बड़ा अभिशाप कोई नहीं है। युवा वर्ग के लिए नशे से बड़ी बुराई और कुछ नहीं इसलिए आवश्यक है कि ऐसी बुराई से अपने को और अपने मित्रों को बचाए रखें। हिंदू कालेज में नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित विश्वविद्यालय स्तरीय पोस्टर प्रतियोगिता के समापन सत्र में उप प्राचार्य प्रो रीना जैन ने कहा कि नशे से बचने के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम देश भर में चलाए जा रहे हैं जिनसे जुड़कर युवा स्वस्थ बने रह सकते हैं। प्रो जैन ने जागरूकता के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना जैसे संगठनों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर अमन रावत,द्वितीय स्थान पर अभिषेक कुमार अंबेश तथा तृतीय स्थान पर सलोनी रहे। उप प्राचार्य प्रो रीना जैन ने विजेताओं को प्रमाण पत्र और नगद राशि प्रदान की। निर्णायक मंडल के अध्यक्ष के रूप में प्रो के के कौल ने सभी प्रतियोगियों की कला की प्रशंसा की।
इससे पहले प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए प्राचार्य प्रो अंजू श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा के परिसर ज्ञान की साधना और आराधना के लिए हैं। परिसरों में किसी मादक पदार्थ का कोई स्थान नहीं हो सकता। प्रो श्रीवास्तव ने युवाओं का आह्वान किया कि नशा मुक्त भारत अभियान को सफल बनाना प्रत्येक विद्यार्थी का कर्तव्य है और इसे पूरा करने के लिए वह उत्साह से आगे आए।
राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में आयोजित प्रतियोगिता में कार्यक्रम अधिकारी डॉ पल्लव ने अभियान के अंतर्गत आगे की गतिविधियों की जानकारी दी और सभी प्रतियोगियों का स्वागत किया।
प्रतियोगिता हिंदू कालेज के मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित हुई जिसमें अनेक महाविद्यालयों के छात्र छात्राओं ने भागीदारी की। हिंदू कालेज विद्यार्थी संसद के प्रधानमंत्री समीर कुमार उपाध्याय ने संयोजन किया और राष्ट्रीय सेवा योजना के अध्यक्ष निशांत सिंह ने आभार प्रदर्शित किया।

अर्चिता द्विवेदी
जन संपर्क प्रमुख
राष्ट्रीय सेवा योजना
हिन्दू महाविद्यालय, दिल्ली
मो -9452536877

जैनाचार्य जवाहर पर डाक टिकट और सिक्का जारी

उदयपुर। स्वतंत्रता सेनानी और जैन संत आचार्य जवाहरलालजी महाराज की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में 16 नवम्बर, रविवार को भारत सरकार द्वारा स्मारक रजत सिक्का और डाक टिकट जारी किए गए। भारत सरकार के डाक विभाग की ओर से आचार्य जवाहरलाल पर 5 रुपए मूल्य का स्मारक डाक टिकट व वित्त मंत्रालय द्वारा 150 रुपए मूल्य वर्ग का सिक्का जारी किया। जसकरण बोथरा फाउंडेशन द्वारा मुम्बई राजभवन में आयोजित विमोचन समारोह में महाराष्ट्र एवं गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने स्मारक डाक टिकट जारी किया। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने स्मारक चतुर्थांश सिक्का जारी किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र शासन में कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और महाराष्ट्र डाक सर्कल के महानिदेशक अमिताभ सिंह सहित समाज के अनेक गणमान्य महानुभाव उपस्थित थे।
इस अवसर पर सरकार द्वारा जारी होने वाली विवरणिका में उदयपुर के साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग द्वारा लिखित आलेख का प्रकाशन किया गया है। आलेख में आचार्य जवाहर के व्यक्तित्व, कृतित्व तथा समाज व राष्ट्र के लिए उनके योगदान को दर्शाया गया है।
श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र मुनि ने बताया कि आचार्य जवाहर भविष्य द्रष्टा भी थे। श्रमण संघ के तृतीय पट्टधर आचार्य देवेन्द्र मुनि जब आठ वर्ष के बालक थे, तब वर्ष 1939 आचार्य जवाहर ने उदयपुर के पंचायती नाहरे में उन्हें देखकर कह दिया था कि यह बालक भविष्य में धर्मोद्योत करने वाला आचार्य बनेगा। डॉ. दिलीप धींग ने बताया कि आचार्य जवाहर के उदयपुर में चार चातुर्मास हुए थे। उनके नाम से उदयपुर में जवाहर जैन विद्यालय और उदयपुर जिले के कानोड़ कस्बे में जवाहर विद्यापीठ चलता है। जवाहर विद्यापीठ से ग्रामीण क्षेत्र के हजारों विद्यार्थी उच्च शिक्षित बने हैं।

श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र मुनि ने बताया आचार्य जवाहर लाल ने देश पराधीनता में होने के समय दस हजार से अधिक सत्संगों के माध्यम से जनजागरण का कार्य किया। उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रेरित किया। विशेष रूप से उन्होंने महात्मा गांधी, सरदार पटेल और लोकमान्य तिलक जैसे नेताओं को स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेरित किया। आचार्य जवाहर लाल महाराज ने बाल विवाह, दहेज प्रथा और नशाखोरी का दृढ़ विरोध किया। इस संदर्भ को स्मरण करते हुए राज्यपाल कटारिया ने कहा कि उनके नाम पर जारी यह स्मारक सिक्का और डाक टिकट लोगों को उनके कार्यों की चिरस्थायी याद दिलाते रहेंगे।

ज्ञातव्य हो कि स्मारक सिक्के में अभी तक पूर्व में कुल सात सिक्के जैन संत समाज पर जारी हुए पर स्थानकवासी समाज में यह प्रथम मौका है जब स्थानकवासी जैन आचार्य जवाहरलाल पर स्मारक सिक्का जारी किया गया।

जनजातीय गौरव दिवस : परंपरा, प्रगति और युवा संकल्प

जनजातीय गौरव दिवस भारत की गौरवशाली जनजातीय विरासत को समर्पित एक सजीव श्रद्धांजलि है — साहस, सादगी और प्रकृति के साथ सामंजस्य का वह प्रतीक जिसने सदैव राष्ट्र की आत्मा को समृद्ध किया है। आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत 2021 में प्रारंभ किया गया यह वार्षिक उत्सव हर वर्ष 15 नवम्बर को मनाया जाता है — इस दिन भारतभूमि के महान जननायक भगवान बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था। भारत सरकार ने यह दिन जनजातीय समुदायों के असाधारण बलिदानों और उनकी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देने के लिए समर्पित किया। 15 नवम्बर 2021 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा को समर्पित एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी कर राष्ट्र की ओर से जनजातीय शौर्य और विरासत के प्रति सामूहिक श्रद्धा को अभिव्यक्त किया। तब से जनजातीय गौरव दिवस गौरव, प्रगति और सशक्तिकरण का राष्ट्रीय उत्सव बन चुका है।

*भगवान बिरसा मुंडा : उलीहातू से उलगुलान तक

15 नवम्बर 1875 को छोटानागपुर पठार (वर्तमान झारखंड) के उलीहातू गाँव में जन्मे भगवान बिरसा मुंडा भारत के सर्वाधिक पूज्य जनजातीय क्रांतिकारियों में से एक हैं। मुंडा जनजाति से संबंधित बिरसा का बचपन कठिनाइयों, विस्थापन और अन्याय के अनुभवों से भरा था। 1793 के स्थायी बंदोबस्त अधिनियम (Permanent Settlement Act) ने पारंपरिक खुंटकाटी भूमि व्यवस्था को नष्ट कर दिया, जिससे साहूकारों और ज़मींदारों को जनजातीय भूमि पर कब्ज़े का अवसर मिला।

1886 से 1890 के बीच चाईबासा में बिताए वर्षों ने बिरसा की चेतना को जागृत किया। मिशनरी प्रभाव और औपनिवेशिक अन्याय से विमुख होकर उन्होंने औपचारिक शिक्षा छोड़ दी और रामायण व महाभारत जैसे भारतीय ग्रंथों से आत्मिक प्रेरणा ली। 1895 तक वे अपने लोगों के स्वाभिमान और भूमि पुनः प्राप्ति के लिए एक निर्भीक नेता के रूप में उभरे। उन्हें ब्रिटिश शासन ने गिरफ्तार कर हजारीबाग केंद्रीय जेल में दो वर्ष तक रखा। रिहा होने पर हजारों लोगों ने उन्हें “धरती आबा”—अर्थात धरती के पिता—के रूप में सम्मानित किया।

उन्होंने बिरसाइट संप्रदाय की स्थापना की, जिसने जनजातीय समाज में आत्म-सम्मान, एकता और आस्था का संचार किया तथा शोषण और धर्मांतरण से मुक्ति का मार्ग दिखाया। 1899–1900 का उलगुलान (महाविद्रोह) उनकी इस चेतना का चरम बिंदु था, जिसने झारखंड, ओडिशा, बिहार, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ तक ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। इस आंदोलन ने “मुंडा राज” अर्थात स्वशासन की मांग की। यद्यपि बिरसा मुंडा को ब्रिटिशों ने पकड़ लिया और 9 जून 1900 को रांची जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में 25 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया, पर उनके विचार अमर हो गए। उनके संघर्ष का परिणाम छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (1903) के रूप में सामने आया, जिसने जनजातीय भूमि अधिकारों की रक्षा की। 2000 में उनके जन्मदिवस पर झारखंड राज्य की स्थापना कर राष्ट्र ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

सशक्त होता जनजातीय भारत : शिक्षा से उद्यमिता तक

भगवान बिरसा मुंडा के समानता और स्वाभिमान के सपने को साकार करने के लिए भारत सरकार ने शिक्षा, उद्यमिता, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में अनेक परिवर्तनकारी पहलें की हैं।

2023 में जनजातीय गौरव दिवस पर प्रारंभ किया गया प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM–JANMAN) इसका एक ऐतिहासिक कदम है। ₹24,000 करोड़ की लागत वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य 18 राज्यों और 1 केंद्रशासित प्रदेश के 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) को आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और संपर्क सुविधाएँ प्रदान करना है। इसी दिशा में 2 अक्टूबर 2025 को भगवान बिरसा मुंडा की भूमि से “धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA)” की शुरुआत की गई — ₹80,000 करोड़ के बजट के साथ यह योजना 63,000 जनजातीय गाँवों को सड़कों, मोबाइल नेटवर्क और पक्के मकानों से जोड़ेगी, जिससे पाँच करोड़ से अधिक जनजातीय नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार हेतु 23 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (MMUs) और 30 नई इकाइयाँ DAJGUA के अंतर्गत जोड़ी गईं। विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अंतर्गत सिकल सेल एनीमिया के पूर्ण उन्मूलन का भी लक्ष्य रखा गया है।

शिक्षा जनजातीय उन्नति की आधारशिला है। राष्ट्रभर में 700 से अधिक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। सरकार ने विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और चिकित्सा के क्षेत्र में जनजातीय युवाओं को आगे बढ़ाने पर बल दिया है। 30 लाख से अधिक छात्रवृत्तियाँ दी जा रही हैं, जिनमें से कई विद्यार्थी विदेशों में भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) मातृभाषा में शिक्षा को प्रोत्साहित कर जनजातीय युवाओं को आत्मविश्वास और वैश्विक अवसर प्रदान कर रही है।

उद्यमिता के क्षेत्र में वन धन मिशन ने जनजातीय स्वावलंबन की दिशा में क्रांति लाई है। 3,000 से अधिक वन धन विकास केंद्र (VDVKs) पारंपरिक वनोपज को आधुनिक विपणन और मूल्यवर्धन से जोड़ रहे हैं। 90 से अधिक लघु वनोपज (MFP) वस्तुओं को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के दायरे में लाया गया है, जिससे जनजातीय उत्पादकों को न्यायपूर्ण मूल्य मिल रहा है। भारत द्वारा मनाया गया अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष (International Year of Millets) जनजातीय किसानों की पारंपरिक कृषि-बुद्धि और पोषक अन्नों के संरक्षण का उत्सव भी है।

आज 50,000 से अधिक वन धन स्व-सहायता समूह (SHGs) और 80 लाख समूहों में सक्रिय 1.25 करोड़ से अधिक सदस्य ग्रामीण समृद्धि के प्रेरक बन चुके हैं। इनमें अधिकांश समूह जनजातीय महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं। पीएम-विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों को वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण और विपणन सहयोग देकर उनके पारंपरिक शिल्प को नए अवसर प्रदान कर रही है।

आदि महोत्सव जैसे उत्सवों के माध्यम से जनजातीय कला, संस्कृति और हस्तकला को राष्ट्रीय पहचान मिली है। रांची का बिरसा मुंडा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, राष्ट्रपति भवन का जनजातीय दर्पण संग्रहालय, तथा छिंदवाड़ा और जबलपुर में नए केंद्र इस गौरवशाली धरोहर को सहेज रहे हैं। श्रीनगर और गंगटोक में स्थापित जनजातीय अनुसंधान संस्थान जनजातीय भाषा, कला और ज्ञान परंपरा के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

जनजातीय क्षेत्रों तक योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए विकसित भारत संकल्प यात्रा की शुरुआत खूँटी, झारखंड से की गई, जिसमें एकलव्य विद्यालय नामांकन, सिकल सेल परीक्षण और वन धन उद्यमिता पर विशेष ध्यान दिया गया।

सरकार की इस प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि 2024–25 में जनजातीय कार्य मंत्रालय का बजट 74% बढ़कर ₹13,000 करोड़ हो गया है। पिछले दशक में 100 से अधिक जनजातीय व्यक्तित्वों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है — यह जनजातीय उत्कृष्टता और नेतृत्व की राष्ट्रीय स्वीकृति का प्रतीक है।

विरासत से नेतृत्व तक

जनजातीय गौरव दिवस केवल एक वार्षिक उत्सव नहीं है — यह भारत की विविधता को एक सूत्र में पिरोने वाला आंदोलन है। यह भगवान बिरसा मुंडा सहित उन सभी वीरों के बलिदान को नमन करता है जिन्होंने राष्ट्र की नियति को गढ़ा, और आज की युवा पीढ़ी को बड़े सपने देखने, लगन से सीखने और निर्भीक होकर नेतृत्व करने की प्रेरणा देता है।

जब भारत विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है, तब उसके जनजातीय पूर्वजों की अजेय भावना प्रगति के मार्ग को आलोकित कर रही है। सच्चा विकास वही है जहाँ परंपरा और परिवर्तन, जड़ें और आकांक्षाएँ, दोनों साथ चलें। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का स्वप्न तभी साकार होगा जब जनजातीय समाज भी समान गति से आगे बढ़े — क्योंकि उनका उत्थान ही राष्ट्र की शक्ति है, उनका गौरव ही उसकी विरासत।

जनजातीय गौरव दिवस केवल भारत के गौरवशाली अतीत का उत्सव नहीं, बल्कि एक जीवंत और आत्मविश्वासी भविष्य का वंदन भी है — जहाँ हर जनजातीय स्वर भारत की एकता, गरिमा और प्रगति की जीवंत तस्वीर में अपनी विशिष्ट पहचान जोड़ता है।

(लेखिका दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पीएच.डी. हैं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से संलग्न हैं।)

आदर्श शासक महाराजा रणजीत सिंह

(13 नवम्बर उनके जन्म दिवस पर विशेष)
वे साँवले रंग का नाटे कद के मनुष्य थे। उनकी एक आँख शीतला के प्रकोप से चली गई थी। परंतु यह होते हुए भी वह तेजस्वी थे। आत्मबल का उदाहरण देखना हो तो महाराजा रणजीत सिंह मे देखना चाहिए महाराजा रणजीत सिंह जी जीतने बड़े योद्धा था उतने ही बड़े उदार महामानव थे।
उनके जीवन के 3 अलभ्य प्रकरण
1- एक बार एक कवि उनके दरबार मे कविता सुनाना चाहता था।
द्वारपाल ने अंदर जाने देने के लिए शर्त रखी कि तुम्हारी कविता मे राजा की एक आँख का जिक्र जरूर हो। (उनकी एक आँख शीतला के प्रकोप से चली गई थी)
अंदर जाकर कवि ने कविता सुनाई –
ओरों की दो दो भली ते केहि के काज
तेरी एक ही आँख मे कोटि आँख की लाज
महाराजा रणजीत सिंह जी ने उसे बहुत पुरस्कार दिया।
2- एक बार उन्होने सेना के साथ जंगल मे पड़ाव डाला भोजन पकाते समय पता चला कि नमक लाना भूल गए। तब किसी ने कहा कि निकट के गाँव मे से जाकर नमक ले आए। जब सैनिक नमक लेकर आए तो महाराजा रणजीत सिंह जी ने पूछा
क्या नमक का मूल्य दे आए ?
सैनिको ने कहा – नमक का भी क्या मूल्य देना।
तभी महाराजा ने कहा तत्काल नमक का मूल्य दे कर आओ। यदि राजा मुफ्त मे नमक लेगा तो उसके सिपाही तो पूरा गाँव ही लूट लेंगे।
3- एक बार महाराजा कहीं जा रहे थे। तभी उनके माथे पर पत्थर आकार लगा। उनके माथे पर से खून बहने लगा। तभी सैनिक एक बुढ़िया को पकड़ लाए जिसने पत्थर फेंका था। बुढ़िया ने हाथ जो कर कहा कि वह अपने पोते के लिए फल तोड़ने के लिए पत्थर फेंका था जो गलती से उनके माथे पर लग गया।
महाराजा ने उस बुढ़िया को तत्काल कुछ धन दिया। सैनिको को बहुत आश्चर्य हुआ। तभी महाराजा ने कहा कि एक पेड़ पत्थर मारने पर फल देता है तो मैं क्या पेड़ से भी गया गुजारा हूँ?
महाराजा रणजीत सिंह को कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली थी, वह अनपढ़ थे। अपने पराक्रम से विरोधियों को धूल चटा देने वाले रणजीत सिंह पर 13 साल की कोमल आयु में प्राण घातक हमला हुआ था। हमला करने वाले हशमत खां को किशोर रणजीत सिंह ने खुद ही मौत की नींद सुला दिया।
बाल्यकाल में चेचक रोग की पीड़ा, एक आँख गवाना, कम उम्र में पिता की मृत्यु का दुख, अचानक आया कार्यभार का बोझ, खुद पर हत्या का प्रयास इन सब कठिन प्रसंगों नें रणजीत सिंह को किसी मज़बूत फौलाद में तबदील कर दिया। उनके राज में कभी किसी अपराधी को मृत्यु दंड नहीं दिया गया था। रणजीत सिंह बड़े ही उदारवादी राजा थे, किसी राज्य को जीत कर भी वह अपने शत्रु को बदले में कुछ ना कुछ जागीर दे दिया करते थे ताकि वह अपना जीवन निर्वाह कर सके। वो महाराजा रणजीत सिंह ही थे जिन्होंने हरमंदिर साहिब यानि गोल्डन टेम्पल का जीर्णोधार करवाया था।
महाराजा रणजीत सिंह न गौ मांस खाते थे ना ही अपने दरबारियों को इसकी आज्ञा देते थे। सन 1805 में महाराजा ने भेष बदलकर लार्ड लेक शिविर में जाकर अंग्रेजी सेना की कवायद, गणवेश और सैन्य पद्दति को देखा और अपनी सेना को उसी पद्दति से संगठित करने का निश्चय किया. प्रारम्भ में स्वतन्त्र ढंग से लड़ने वाले सिख सैनिको को कवायद आदि का ढंग बड़ा हास्यापद लगा और उन्होंने उसका विरोध किया पर महाराजा रणजीत सिंह अपने निर्णय पर दृढ रहे।
महान इतिहासकार जे. डी कनिंघम ने कहा था-
” निःसंदेह रणजीत सिंह की उपलब्धियाँ महान थी। उसने पंजाब को एक आपसी लड़ने वाले संघ के रूप में प्राप्त किया तथा एक शक्तिशाली राज्य के रूप में परिवर्तित किया।
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