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‘अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव – 2025’ में भारतीय डाक विभाग का स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र

अहमदाबाद में 13 नवंबर से 23 नवंबर 2025 तक आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव’ ज्ञान, साहित्य और संस्कृति का अद्भुत संगम बन गया है। जहाँ एक ओर पुस्तकप्रेमी पुस्तकों के माध्यम से नई जानकारियाँ अर्जित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय डाक विभाग का स्टॉल लोगों को डाक टिकटों के माध्यम से भारत की कला, संस्कृति, इतिहास, शिक्षा और विरासत की विविधता से परिचित करा रहा है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन नेशनल बुक ट्रस्ट एवं अहमदाबाद नगर निगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य महोत्सव में डाक विभाग का स्टॉल नंबर 95 विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहाँ निरंतर आगंतुकों की भीड़ उमड़ रही है।

उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने भी पुस्तक महोत्सव का दौरा किया और बताया कि भारतीय डाक स्टॉल पर पार्सल, स्पीड पोस्ट, ज्ञान पोस्ट, पार्सल पैकेजिंग सर्विस, फिलेटली, माई स्टैम्प, गंगा जल, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के माध्यम से डिजिटल बैंकिंग इत्यादि सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। पुस्तक प्रेमी और प्रकाशक डाक स्टॉल के माध्यम से देश-विदेश में कहीं भी पुस्तकें भेज सकते हैं। इसके अलावा डाकघर बचत सेवाएँ, डाक जीवन बीमा की सुविधा भी उपलब्ध है।

 

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि  पुस्तक महोत्सव पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ विभिन्न आयु वर्ग के पाठकों, लेखकों और प्रकाशकों को एक मंच पर जोड़कर साहित्यिक संवाद और सहयोग को नई दिशा प्रदान करता है। वहीं  फिलेटली प्रेमियों और संग्राहकों के लिए डाक स्टॉल एक अनोखा अवसर प्रदान कर रहा, जहाँ वे न केवल नई सामग्री का अवलोकन कर सकते हैं, बल्कि डाक टिकटों के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर से भी परिचित हो सकेंगे। साहित्य, कला और संस्कृति से जोड़ने में पुस्तकों व डाक टिकटों की अहम भूमिका है। गुजरात  पर आधारित ‘माई स्टैम्प’ के प्रति लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है, जिसमें गाँधी आश्रम, साबरमती स्थित महात्मा गाँधी, पतंग उत्सव और डांडिया नृत्य की डाक टिकट थीम शामिल है।  बच्चों व युवाओं के लिए यह अनुभव अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध हो रहा है, क्योंकि डाक टिकट राष्ट्र के इतिहास, संस्कृति और महत्वपूर्ण घटनाओं को सहज, रोचक और शिक्षाप्रद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। यह स्टॉल पुस्तक महोत्सव के सांस्कृतिक माहौल को और भी समृद्ध और जीवंत बना रहा है।

 

अहमदाबाद मंडल के प्रवर अधीक्षक डाकघर श्री शिशिर कुमार ने बताया कि यहाँ लोग पुस्तक महोत्सव से ही अपनी पसंदीदा पुस्तकें अपने प्रियजनों तक पहुँचाने का आनंद उठा रहे हैं। यहाँ विभिन्न प्रकार के डाक टिकट, विशेष आवरण, रामायण डाक टिकट, श्री राम जन्मभूमि मंदिर पर आधारित खुशबूदार डाक टिकट सेट, खादी पोस्टकार्ड, सौराष्ट्र-कच्छ आधारित पिक्चर पोस्टकार्ड, ओलम्पिक आधारित डाक टिकट, वर्णमाला फिलेटली पुस्तकें, कॉफी मग, टी शर्ट सहित तमाम फिलेटलिक उत्पादों का प्रदर्शन किया गया है। मात्र ₹300 शुल्क में 12 डाक टिकटों की एक माई स्टैम्प शीट तैयार की जाती है, जो जन्मदिन, विवाह वर्षगाँठ, शुभ विवाह, रिटायरमेंट अथवा अन्य यादगार पलों के लिए एक अनोखा और विशेष स्मृति-उपहार बन जाती है। पुस्तक महोत्सव भ्रमण के बाद लेटर बॉक्स के माध्यम से बच्चों द्वारा अपने अनुभवों को सहेजते हुए पत्र भेजने की सुविधा भी यहाँ उपलब्ध है।

गणित के रहस्यमयी सूत्र जो शताब्दियों से रहस्य बने हुए हैं

गणित केवल सूत्र नहीं, बल्कि अन्वेषण की एक यात्रा है —जहाँ हर अनसुलझा प्रश्न नए विचारों, नई खोजों और नई सभ्यता को जन्म दे सकता है।  गणित को अक्सर “सटीक” विज्ञान कहा जाता है। ऐसा विषय जहाँ हर प्रश्न का एक निश्चित उत्तर होता है, हर समीकरण का एक समाधान होता है, और हर सिद्धांत कठोर प्रमाणों की कसौटी पर खरा उतरता है। लेकिन यही गणित जब अपनी गहराइयों में उतरता है, तो अनेक ऐसे रहस्य सामने आते हैं जिन्होंने दुनिया के महानतम गणितज्ञों को भी चुनौती दी है।  गणित में आज भी कई ऐसे गूढ़ रहस्य और समस्याएँ हैं जिनका समाधान दुनिया के श्रेष्ठ गणितज्ञ भी अभी तक नहीं खोज पाए हैं। इन्हें Unsolved Problems in Mathematics कहा जाता है। नीचे सबसे महत्वपूर्ण, प्रसिद्ध और रहस्यमय अभी तक न सुलझे गणितीय रहस्य दिए जा रहे हैं।  इन अनसुलझे रहस्यों का महत्व केवल “कठिन समस्याएँ” होने में नहीं है।
इनकी असली महत्ता इस बात में है कि —

1. रीमान प्रमेय (Riemann Hypothesis)

दुनिया की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेली

1859 में रीमान ने प्राइम नंबरों (prime numbers) के वितरण के बारे में एक धारणा रखी।

इसका सही होना या गलत होना अभी तक सिद्ध नहीं हो पाया।

प्राइम नंबरों के रहस्य खोलने की चाबी इसी के पास है।

पुरस्कार: $1 मिलियन (Clay Millennium Prize)**

2. P vs NP समस्या

कंप्यूटर विज्ञान और गणित का सबसे बड़ा रहस्य

“क्या जो समस्या हम जल्दी जाँच सकते हैं, क्या उसे जल्दी हल भी कर सकते हैं?”

अगर P = NP साबित हो गया तो दुनिया के सभी पासवर्ड, एन्क्रिप्शन, सुरक्षा सिस्टम टूट जाएँगे।

कोई हल नहीं मिला — और यह सदी की सबसे कठिन समस्या मानी जाती है।

पुरस्कार: $1 मिलियन**

3. बिर्च और स्विनर्टन-डायर अनुमेय (BSD Conjecture)

यह एलिप्टिक कर्व (elliptic curves) नाम की ज्यामिति से जुड़ी बहुत कठिन समस्या है।

क्रिप्टोग्राफी, कोडिंग और आधुनिक कंप्यूटर सुरक्षा का आधार यही क्षेत्र है।

अब तक कोई पूरा प्रमाण नहीं।

पुरस्कार: $1 मिलियन**

4. हॉज अनुमेय (Hodge Conjecture)

यह टोपोलॉजी + बीजगणित + ज्यामिति के संगम पर स्थित बेहद कठिन समस्या है।

बताती है कि किसी आकृति के अंदर छिपे “बीजगणितीय आकार” (algebraic cycles) कैसे होते हैं।

इसे हल करने वाला आज तक कोई नहीं।

पुरस्कार: $1 मिलियन**

5. यांग–मिल्स थ्योरी और मास गैप समस्या

भौतिकी और गणित का साझा रहस्य।

यह समझना कि “दिखने में भारहीन पार्टिकल कैसे वास्तविक दुनिया में द्रव्यमान (mass) पाते हैं?”

क्वांटम फील्ड थ्योरी को आधारभूत बनाने के लिए इसका समाधान ज़रूरी है।

पुरस्कार: $1 मिलियन**

6. नवियर–स्टोक्स समीकरण समाधान (Navier–Stokes Smoothness & Existence)

यह समीकरण दुनिया की हर द्रव गति (fluid motion) को बताता है—हवा, पानी, मौसम, समुद्र।

लेकिन… गणित ने अभी तक यह सिद्ध नहीं किया कि

इन समीकरणों का समाधान हमेशा मौजूद होता है

या कभी फट भी सकता है (blow-up)

मौसम विज्ञान, एयरोस्पेस और इंजीनियरिंग सब इसी पर टिके हैं।

पुरस्कार: $1 मिलियन**

7. गोल्डबाख अनुमेय (Goldbach Conjecture)

हर सम संख्या (even number) को दो प्राइम नंबरों के योग से लिखा जा सकता है।
उदाहरण:
20 = 13 + 7
100 = 47 + 53

सभी संख्याओं के लिए सिद्ध नहीं हो पाया है।

280 साल से गणितज्ञ इसे हल नहीं कर पाए हैं।

8. ट्विन प्राइम अनुमेय (Twin Prime Conjecture)

क्या अनंत संख्या में “जुड़वाँ प्राइम” हैं?
उदाहरण: (3,5), (11,13), (17,19)…

बहुत प्रगति हुई है, पर अभी तक प्रमाण नहीं मिला।

9. कोलात्ज़ समस्या (Collatz Conjecture)

सबसे आसान दिखने वाली पर सबसे खतरनाक समस्या।
नियम:

संख्या सम है → 2 से भाग

विषम है → 3n + 1

जो भी आए, उसी पर यही प्रक्रिया दोहराएँ
कहते हैं हर संख्या अंत में 1 पर आती है — पर इसे सिद्ध नहीं कर पाए।

10. “Perfect Cuboid” का रहस्य

क्या ऐसा आयताकार डिब्बा हो सकता है जिसकी सभी 12 धाराएँ, 3 विकर्ण, और अंतर-विकर्ण सब के सब पूर्णांक (integers) हों?

300 साल बाद भी जवाब: पता नहीं।

11. Langlands Program

गणित की एक “ग्रैंड यूनिफाइड थ्योरी”

यह बीजगणित, विश्लेषण, संख्या सिद्धांत और ज्योमेट्री को एक ही ढाँचे में जोड़ने की कोशिश है।

इसे 21वीं सदी का “ब्रह्मसूत्र” कहा जाता है।

12. Sphere Packing (Dimension > 8)

3-D में गेंदों को सबसे सघन रूप में कैसे भरा जाए, इसका हल है।

8-D और 24-D में हल मिल चुका है।

लेकिन इससे ऊपर की dimensions में आज भी रहस्य है।

1. प्राइम संख्याओं का रहस्य — रीमान प्रमेय

प्राइम संख्याएँ गणित का हृदय हैं।
वे अनियमित भी हैं, रहस्यमय भी।
1859 में बर्नहार्ड रीमान नामक गणितज्ञ ने एक प्रमेय प्रस्तुत किया—
जिसके अनुसार प्राइम संख्याओं के वितरण में एक अद्भुत नियमितता छिपी हुई है।

200 से अधिक वर्ष बीत चुके हैं,
परन्तु यह प्रमेय अब भी सिद्ध नहीं हुआ।
इसका समाधान केवल गणित के लिए नहीं,
बल्कि आधुनिक क्रिप्टोग्राफी, इंटरनेट सुरक्षा और कंप्यूटर विज्ञान के लिए भी क्रांतिकारी माना जाएगा।
इसीलिए इसे दुनिया की सबसे कठिन समस्या कहा गया है।

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2. P बनाम NP समस्या — क्या कठिन समस्याएँ सचमुच कठिन हैं?

मान लीजिए आपको किसी Sudoku का सही उत्तर दिया गया।
आप जाँच सकते हैं कि वह सही है या नहीं — केवल कुछ क्षणों में।
परन्तु उसी Sudoku को हल करना कई बार घंटों लगता है।

प्रश्न यह है:
क्या हर समस्या जिसे “जाँचना” आसान है, उसे “हल करना” भी उतना ही आसान हो सकता है?

यदि इसका उत्तर ‘हाँ’ हुआ —
तो दुनिया के सारे पासवर्ड, बैंक सुरक्षा सिस्टम, एन्क्रिप्शन… सब खत्म हो जाएँगे।

यह सिर्फ गणित का नहीं, मानव सभ्यता की सुरक्षा का प्रश्न है।
और आज भी इसका उत्तर अंधकार में है।

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3. कोलात्ज़ समस्या — सरल नियम, भयावह रहस्य

यह समस्या बच्चों का खेल लगती है:

यदि संख्या सम है → 2 से भाग

यदि विषम है → 3n + 1

जो भी निकले, फिर उसी पर यही नियम लागू

कहते हैं कि चाहे आप किसी भी संख्या से शुरू करें,
अंत में आप 1 पर ही पहुँचते हैं।

परंतु इस सरल दिखने वाले खेल को सिद्ध करना आज तक असम्भव साबित हुआ है।
गणितज्ञ पॉल एर्डॉस ने कहा था:

“गणित केवल परमात्मा ही जानता है कि यह आग आखिर कहाँ छिपी है!”

यह समस्या हमें याद दिलाती है कि  गणित की सबसे कठिन चुनौतियाँ कभी-कभी सबसे सरल वाक्यों में छिपी होती हैं।

4. गोल्डबाख अनुमेय — हर सम संख्या का दो भागीदार

यह अनुमान कहता है—
हर सम संख्या दो प्राइम संख्याओं के योग के बराबर होती है।

शताब्दियों का कंप्यूटर परीक्षण, अरबों संख्याओं की जाँच
— सब इस अनुमान को “सही” सिद्ध करते दिखते हैं,
किन्तु गणित में सत्य तब तक सत्य नहीं,
जब तक वह कठोर प्रमाण से सिद्ध न हो।

आज भी यह अनुमान गणित का एक चमकता हुआ प्रश्नचिह्न है।

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5. ट्विन प्राइम — क्या जुड़वाँ प्राइम अनंत हैं?

जैसे: (3,5), (11,13), (17,19)…
ऐसी जोड़ी के प्राइम क्या अनंत हैं?

यह प्रश्न संख्या-सिद्धांत की आत्मा से जुड़ा है।
बहुत प्रगति हुई है, पर पूर्ण प्रमाण आज भी नहीं।

मेला एक, यात्राएँ अनेक: व्यापार मेले में प्रगति और अवसरों की कहानियाँ

नई दिल्ली । दशकों से  व्यापार मेलों ने दिखाया है कि जब लोग, उत्पाद और विचार मिलते हैं, तो बाजार किस तरह विकसित होते हैं। इस वर्ष का भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला “एक भारत श्रेष्ठ भारत” विषयवस्तु के अंतर्गत इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। इसके 44वें संस्करण में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 3,500 से अधिक प्रतिभागी प्रदर्शनी लगाने वाले एक साथ 11 देशों से आ रहे हैं, जो भारत मंडपम को संस्कृति और वाणिज्य के संगम में रूपांतरित रहा है। बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे सहयोगी राज्य, जिनमें झारखंड राज्य केंद्र बिंदु है, न केवल वस्तुएं, बल्कि अपने प्रदेशों की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को भी प्रस्तुत कर रहे हैं।

सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, एमएसएमई, स्टार्ट-अप, अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शकों और कारीगर समूहों के एक ही छत के नीचे आने से यह मेला छोटे उत्पादकों, पारंपरिक शिल्पियों और नए युग के उद्यमियों के लिए भारत के सबसे मजबूत मंचों में से एक के तौर पर विकसित हुआ है।

एक गलियारे में, मिस्र से आए इस्लाम कमाल, अपने संगमरमर के हस्तशिल्प को निहारते आगंतुकों को घनिष्ठता के साथ देखते हैं। उनका परिवार 25 सालों से आ रहा है, जो मेले के बदलते स्वरूप के साथ उनके व्यावसायिक सफर को समझने के लिए काफी है।

वे कहते हैं, “इस क्षेत्र में लगातार प्रगति हुई है। हमें हमेशा अच्छी प्रतिक्रिया मिलती है और मांग भी बढ़ी है।” उनके लिए, भारत मंडपम “अब तक का सबसे बड़ा व्यापार मेला” है, एक ऐसी जगह, जहां सहयोग हमेशा बना रहता है और आगंतुकों की संख्या लगातार बढ़ती रहती है। उनका अनुभव कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के अनुभव से मेल खाता है, जो इसलिए नहीं लौटते, क्योंकि उन्हें आना ही पड़ता है, बल्कि इसलिए कि भारत अपने आप में एक भरोसेमंद बाजार बन गया है।

तुर्की से आने वाले उलास के लिए, यह रिश्ता और भी गहरा है। वे कहते हैं, “हम करीब 24-25 सालों से भारत आ रहे हैं। पहले हम दूसरे व्यापार मेलों में जाते थे, लेकिन अब हम सिर्फ भारत में ही प्रदर्शनी करते हैं।” वे और उनकी टीम साल का आधा वक्त यहीं बिताते हैं, और उन्होंने ऐसे रिश्ते बनाते हैं जो मेले से भी आगे तक चलते हैं।

वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, “हमारे ग्राहक हर साल लौटते हैं। यही हमें प्रेरित करता है।”

एक जगह पर, कोल्हापुरी चप्पलों की दुकान गुलज़ार है। सचिन सातपुते के लिए, यह मेला सिर्फ एक बाजार नहीं है; यह एक सांस्कृतिक स्थल है, जहां विरासत को सराहने और खरीदने वाले खरीदार मिलते हैं।

“इस तरह के आयोजन हमें मार्केटिंग और ब्रांडिंग में बड़ी मदद करते हैं,” वे कहते हैं। 15 दिनों में छः महीने की कमाई: उनके बेचे जाने वाले चमड़े की तरह ही ये आंकड़े भी ठोस हैं।

महाराष्ट्र की शोभा, जो चटनी, अचार और घी का कारोबार करती हैं, कहती हैं, “व्यापार मेले में यह हमारा दूसरा मौका है।” वह अपने पिछले अनुभव को याद करते हुए कहती हैं: “हमने लगभग 2-3 क्विंटल के उत्पाद बेचे, और मेला खत्म होने से 2-3 दिन पहले ही हमारा स्टॉक खत्म हो गया।”

वह इस प्रतिक्रिया को “बहुत अच्छा” कहती हैं, जो छोटे उत्पादकों के लिए एक भरोसा है, जो अक्सर किसी भी चीज से अधिक पहुंच पर निर्भर करते हैं।

यहां आने वाला हर शख्स व्यापार के लिए नया नहीं होता; कुछ तो बस एक अलग बाजार में कदम रख रहे होते हैं। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के मोहम्मद फाजिल आमतौर पर धातु के हस्तशिल्प और सजावटी सामान यूरोप और अमेरिका को निर्यात करते हैं। लेकिन इस बार, वह भारत मंडपम में एक नए उद्देश्य से आए हैं: “हम घरेलू बाजार में और अधिक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं,” वे कहते हैं। उनके लिए यह मेला एक परीक्षण स्थल है, एक ऐसी जगह, जहां ब्रांडिंग होती है और लोग भी आते हैं और हॉल के किसी भी कोने से नए खरीदार निकल सकते हैं।

हालांकि, कुछ यात्राएं बदलाव से कम नहीं होतीं। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, उत्तर प्रदेश के इकराम हुसैन कहते हैं, “यह मेरा व्यापार मेले में दूसरा मौका है, और यह मेरे लिए बहुत फायदेमंद रहा है।” तीन महीने की बिक्री सिर्फ 15 दिनों में: वे इस अवसर को अनोखा बताते हैं।

“यहां मिले मौके ने मुझे अपने व्यवसाय का काफी विस्तार करने में मदद की है,” वे आगे कहते हैं। उनकी कहानी बताती है कि कैसे ऐसे मंच उन कारीगरों के लिए एक प्रेरणा बन सकते हैं, जो अपनी वर्कशॉप से भी बड़ा सपना देखते हैं।

थाईलैंड की किम लगभग 12 सालों से इस मेले में आ रही हैं। वह कहती हैं, “यहां आने वाले ग्राहक आमतौर पर अगले साल दोबारा आते हैं।” मेले के बाद उन्हें थोक में ऑर्डर भी मिलते हैं, जिससे पता चलता है कि यहां बने रिश्ते मेले से भी दूर तक फैले हैं।

मेले में कुछ देर घूमिए और एक नया पैटर्न उभर कर आपके सामने आएगा। चाहे वह मिस्र का संगमरमर हो, थाईलैंड के जेवरात हों, महाराष्ट्र का चमड़ा हो या फिर उत्तर प्रदेश का धातुकर्म, हर प्रदर्शनी वाला प्रगति, दृश्यता, जुड़ाव और आय की बात करता है, जो 14 दिनों के आयोजन से कहीं आगे तक फैली हुई है।

इस तरह के व्यापार मेले बिक्री बढ़ाने से कहीं अधिक करते हैं। ये एक ऐसा माहौल बनाते हैं, जहां कारीगरों को पहचान मिलती है; निर्यातकों को घरेलू बाजार मिलता है, और छोटे उत्पादकों को ऐसे ग्राहक मिलते हैं, जो उनके भरोसेमंद बन जाते हैं।

कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी सम्मानित

कोटा / विजय जोशी को राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर एवं सारंग साहित्य समिति कोटा के संयुक्त तत्वावधान में  कोटा में 16 नवम्बर  को आयोजित संभागीय रचनाकार सम्मेलन में प्रतिवर्ष दिए जाने वाले सम्मान में कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी को उनके साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों एवं साहित्यिक अवदान के लिए “सारंग साहित्य सम्मान – 2024 ” से प्रशस्ति – पत्र और प्रतीक चिह्न भेंट कर शाल एवं साफा पहनाकर सम्मानित किया।
समारोह में साहित्यकार रामदयाल मेहरा एवं रघुराज सिंह कर्मयोगी को सारंग साहित्य सम्मान तथा रमेश नकौड़ा, गौरस प्रचंड एवं महावीर मेहरा को सारंग शिखर सम्मान प्रदान किया गया।
समारोह में राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के सचिव बसंत सिंह सोलंकी के सान्निध्य में इस सत्र के मुख्य अतिथि नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश पांडे विशिष्ट अतिथि साहित्यकार प्रद्युम्न वर्मा रहे तथा अध्यक्षता महाकवि किशन वर्मा ने की। संचालन कवि राम विलास रखवाला ने किया।
 इनको एवं कवि हेमराज सिंह हेम को  इसी दिन  राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर मीडिया हाउस राजस्थान, मीडिया क्लब कोटा, सद्भावना संदेश न्यूज़, वंदे भारत लाइव न्यूज़ चैनल, मयूर टाइम्स न्यूज़ के संयुक्त तत्वावधान में रविवार 16 नवम्बर को संत कंवर राम धर्मशाला में राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर प्रतिभा सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि लेखक – पत्रकार और प्रेस का समाज में  सामाजिक सरोकारों के हित हेतु एक त्रिआयामी सामंजस्य होता है। ये अपने संवेदनात्मक विचारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से समाज के समक्ष रख कर एक दिशा प्रदान करते हैं। फिर चाहे वह मुद्रित मीडिया हो चाहे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ये सभी समयानुरूप परिवर्तित होते जा रहे सामाजिक मूल्यों एवं  उनके प्रभावों का गहनता से अनुशीलन कर व्यक्ति में एक सकारात्मक समझ उत्पन्न कर बदलते समय में सामंजस्य स्थापित करने का महती योगदान प्रदान करते हैं।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित कथाकार एवं समीक्षक  विजय जोशी के अब तक दो हिन्दी उपन्यास – चीख़ते चौबारे, रिसते हुए रिश्ते, छह हिन्दी कहानी संग्रह – ख़ामोश गलियारे, केनवास के परे, कुहासे का सफ़र, बिंधे हुए रिश्ते, सुलगता मौन, वैकुण्ठगामी एवं अन्य कहानियाँ तथा एक हिन्दी बाल कहानी संग्रह – बदल गया मिंकू प्रकाशित हो चुके हैं। विजय जोशी के कथा साहित्य का मूल्यांकन करते हुए विद्वान् साहित्यकारों के सम्पादन में तीन समीक्षा ग्रन्थ और कथा साहित्य तथा समीक्षा साहित्य पर केन्द्रित एक विनिबन्ध प्रकाशित हुए हैं। यही नहीं देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा छह शोधार्थियों को पीएच.डी. तथा एम. फिल. की उपाधि प्रदान की गई है।

बिहार जीत से जागी उम्मीदें भी और चुनौतियाँ भी

बिहार का यह चुनाव केवल एक राजनीतिक मुकाबला नहीं था, बल्कि लोकतंत्र की चेतना, जनता के विश्वास और नेतृत्व की विश्वसनीयता को परखने का अवसर भी था। परिणाम जिस तरह सामने आए, उन्होंने न केवल बिहार बल्कि पूरे देश एवं दुनिया को चौका दिया। यह जीत केवल गठबंधन की सामूहिक ताकत की नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में वर्षों से स्थापित सुशासन मॉडल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जनता के अटूट भरोसे का परिणाम है। बिहार की महिलाओं ने इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाई है-उनकी उम्मीदें, उनका साहस और उनका भरोसा इस परिणाम के मूल में खड़ा दिखाई देता है। बिहार में इतने एकतरफा नतीजे की उम्मीद किसी को नहीं रही होगी।
चुनाव प्रचार के दौरान जो लड़ाई टक्कर की दिख रही थी, वह आखिर में केवल भ्रम साबित हुई। जनता ने न महागठबंधन के बदलाव के नारे पर यकीन किया और न ही प्रशांत किशोर की अलग राजनीति पर भरोसा जताया, बल्कि खुद को परिपक्व एवं जागरूक प्रदर्शित करते हुए मूल्यों एवं विकास के मानकों पर मतदान दिया। आंकड़ों का विश्लेषण होता रहेगा, लेकिन मोटे तौर पर यह परिणाम कई संदेश देता है कि अब बिहार जंगलराज नहीं चाहता, विकास की नई सुबह देखना चाहता है, एसआईआर को वोट चोरी के रूप में दी गयीप्रस्तुति उसे स्वीकार्य नहीं हुई, वह अतीत के भ्रष्ट शासन से मुक्ति के लिये अतीत की त्रासद यादों एवं भविष्य के सुनहरे भविष्य के बीच चयन करते हुए लालू-राबड़ी यादव के शासनकाल की की काली छाया नहीं चाहता। भले ही तेजस्वी यादव पूरे समय इसी नैरेटिव को तोड़ने में लगे रहे कि वक्त बदल चुका है और वह दौर अब नहीं लौटेगा। उन्होंने उल्टे अपराध पर नीतीश सरकार को घेरने की कोशिश की, पर सफल नहीं रहे।
नीतीश कुमार के लिए 20 बरसों में यह पहला विधानसभा चुनाव था, जहां वह गठबंधन का तो चेहरा थे, पर सीएम पद के उम्मीदवार नहीं थे। उनकी छवि को धुंधलाने एवं उन्हें बीमार घोषित करने के भी पूरे प्रयत्न हुए लेकिन, परिणाम ने साबित किया है कि नीतीश अब भी बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतीक एवं सुशासन-पुरुष हैं। वह अब तक नौ बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, कई बार उन्होंने पाला बदला, लेकिन जनता का यकीन उन पर बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह उनकी बेदाग छवि भी है। लेकिन इस बार उनकी चुनौतियां भाी बड़ी है। वैसे लोकतंत्र की खूबसूरती यह है कि जीत जितनी बड़ी होती है, चुनौतियां भी उतनी ही व्यापक हो जाती हैं। बिहार में एनडीए की इस ऐतिहासिक विजय के बाद जिस दौर की शुरुआत हो रही है, वह उत्साह से कहीं अधिक जिम्मेदारी का दौर है। नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बन रहे हैं, यह अपने-आप में निरंतरता, स्थिरता और सुशासन की अपेक्षाओं को नयी ऊँचाई देता है। परंतु अब उनके सामने जो प्रश्न खड़े हैं, वे कहीं अधिक गहरे, जटिल और चुनौतीभरे हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार केवल एक राजनीतिक पराजय नहीं, बल्कि परिवारवादी राजनीति के प्रति जनता की निर्णायक और स्पष्ट निष्पत्ति है। मतदाताओं ने यह संदेश दो टूक दिया है कि राजनीति किसी परिवार, वंश या व्यक्तिगत प्रभुत्व की जागीर नहीं हो सकती। खासकर क्षेत्रीय दलों में फैला वंशवाद, व्यक्तिवाद और उत्तराधिकार की अनिवार्य राजनीति जनता को लगातार विचलित करती रही है। परिणामों ने यह उजागर कर दिया कि अब मतदाता सिर्फ चेहरे और परिवारों के मोहजाल में नहीं फँसना चाहते, बल्कि वे विकास, पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को प्राथमिकता देने लगे हैं। महागठबंधन की हार उसी व्यापक जनभावना का परिणाम है, जिसमें जनता ने यह तय कर दिया कि लोकतंत्र में जनता की सत्ता सर्वाेपरि है, किसी भी राजनीतिक खानदान की नहीं।
बिहार की सबसे बड़ी चुनौती रोजगार की है। वर्षों से यह राज्य बेरोजगारी के दर्द से जूझता रहा है। करोड़ों युवाओं की आंखों में नौकरी, अवसर और सुरक्षित भविष्य का सपना है। चुनावी वादे जिस उत्तेजना के साथ किए जाते हैं, उन्हें व्यवस्थित नीति, धैर्य और राजनीतिक ईमानदारी से लागू करना किसी भी सरकार के लिए आसान कार्य नहीं होता। लेकिन जनता ने इस बार उम्मीदों की जो गठरी सौंपी है, वह स्पष्ट संकेत है कि अब पूरा बिहार ठोस काम चाहता है, खोखले वादे नहीं। दूसरी बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था की है। सुशासन का मॉडल तभी सार्थक है जब आम नागरिक के जीवन में सुरक्षा की ठोस अनुभूति हो। अपराध, राजनीतिक संरक्षण, दंगा-फसाद और अराजकता किसी भी समाज की प्रगति को रोकते हैं। नीतीश कुमार से जनता की अपेक्षा है कि वे एक बार फिर वही कठोरता, वही व्यवस्था और वही संतुलित रणनीति लेकर आएंगे, जिसने कभी ‘जंगलराज’ को समाप्त कर सुशासन का नया इतिहास लिखा था। महिलाओं से किए गए वादे भी अब सरकार की प्राथमिक कसौटी बनेंगे। आधी आबादी ने जिस उत्साह और भरोसे के साथ एनडीए को पुनः सशक्त किया है, यह सरकार के लिए प्रेरणा के साथ-साथ उत्तरदायित्व भी है। सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सम्मान-ये पांच मुद्दे बिहार की महिलाओं की असली जरूरत हैं, और चुनावी वादों का मूल्यांकन भी अब इन्हीं पर होगा।
बिहार की अर्थव्यवस्था की मजबूती केंद्र सरकार के सहयोग पर भी निर्भर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनके विकास-एजेंडे ने इस चुनाव को निर्णायक रूप दिया। जब केंद्र और राज्य की नीतियों में तालमेल होगा, तब ही आर्थिक सुधार, निवेश, उद्योग, रोजगार-सृजन और आधारभूत संरचना के बड़े सपने साकार होंगे। बिहार को अब केवल वित्तीय सहायता की ही नहीं, बल्कि विकास की स्थायी संरचना की जरूरत है, जिससे आने वाली पीढ़ियां लाभान्वित हों। लेकिन इन सबके बीच एक बड़ा प्रश्न मन को झकझोरता है-लोकतंत्र में चुनाव कब तक केवल ‘सौदेबाजी’ बने रहेंगे? कब तक वादों की भीड़, लुभावने नारों और जातीय समीकरणों के आधार पर जनता के विश्वास की खरीद-फरोख्त चलती रहेगी? आखिर लोकतंत्र की स्वस्थ दिशा क्या हो? यह चुनाव परिणाम हमें इस सवाल के सामने खड़ा करता है कि राजनीति को फिर से मूल्यों, दृष्टि, दीर्घकालिक योजनाओं और नैतिकता की ओर लौटना होगा। लोकतंत्र की प्रतिष्ठा तभी बचेगी जब राजनीति भविष्यदर्शी बने, जब चुनाव उत्सव कम और उत्तरदायित्व अधिक हों।
बिहार, जिसे कभी पिछड़ेपन, गरीबी, पलायन और अपराध का प्रदेश कहा जाता था, आज भारतीय लोकतंत्र का एक जीवंत प्रयोगशाला बन गया है। यह प्रदेश भविष्य में किस दिशा में जाएगा, यह केवल सत्ता की नीतियों पर ही नहीं, बल्कि जनता की जागरूकता, मीडिया की ईमानदारी और राजनीतिक दलों की नैतिक प्रतिबद्धता पर भी निर्भर करेगा। आज बिहार के पास अवसर है कि वह खुद को एक प्रगतिशील, शिक्षा-संपन्न, रोजगार-समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में स्थापित करे। बिहार की यह जीत इतिहास में दर्ज होगी-सिर्फ इसलिए नहीं कि परिणाम अप्रत्याशित थे, बल्कि इसलिए कि इसने एक नए अध्याय के लिखे जाने की उम्मीद जगाई है। अब समय है कि यह उम्मीद हकीकत में बदल सके। राजनीति तभी सार्थक होगी जब यह जनता के जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम बने और बिहार इस दिशा में देश के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत कर सके।
प्रेषकः

(ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
फोनः 22727486, 9811051133

भोपाल में बाल साहित्यकार डॉ. युगल सिंह सम्मानित

कोटा / बाल साहित्यकार डॉ. युगल सिंह को भोपाल में ” तारा पांडेय स्मृति बाल साहित्य पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। राजस्थान के साहित्य जगत के लिए खुशी की बात है कि कोटा की बाल साहित्यकार डॉ. युगल सिंह को उनकी बाल साहित्य कृति “हाड़ौती अंचल का बाल साहित्य उद्भव एवं विकास” के लिए आरणी चैरिटेबल ट्रस्ट भोपाल द्वारा आयोजित समारोह में दुष्यंत पांडुलिपि स्मारक संस्थान भोपाल में द्वारा सम्मानित किया गया।  समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. नागेश पांडेय संजय शहाजहांबाद और समारोह के अध्यक्ष मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी भोपाल के निदेशक डॉ.विकास दवे के साथ मीनू पाण्डेय ने  डॉक्टर युगल सिंह को उक्त सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित किया।
डॉ. युगल सिंह ने बताया कि प्रस्तुत पुस्तक में हाड़ौती अंचल में बाल साहित्य का उद्भव एवं विकास क्रम ,प्रमुख बाल साहित्य रचनाकार उनका व्यक्तित्व ,कृतित्व, सभी की रचनाओं के नाम ,रचनाओं पर विस्तृत जानकारी एवं समीक्षाएं लिखीं गई हैं। सभी बाल साहित्यकारों का जीवन परिचय ,सम्मान ,पुरस्कार, विशेष उपलब्धियां आदि का विवरण भी कृति में समाविष्ट किया गया है। हाड़ौती अंचल के बाल साहित्य में कविता, कहानी ,उपन्यास, नाटक ,आत्मकथा ,अनुवाद, आलोचना, समीक्षाएं , बाल पत्र पत्रिकाओं का योगदान आदि का विस्तृत वर्णन है। पुस्तक में हाड़ौती अंचल के 45 रचनाकारों को शामिल किया गया है।
उल्लेखनीय है कि इनके द्वारा इसी विषय पर  डॉ.गीता सक्सेना के निर्देशन  पीएच.डी. की गई है ।  साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही का इस में सहयोग प्राप्त हुआ है। इस कृति का लोकार्पण कोटा में आगामी माह किया जाएगा।
प्रेषकः डॉ. प्रभात कुमार सिंघल, कोटा से  

राष्ट्रीय संग्रहालय में भारत की लिपि संस्कृति के उत्सव के साथ चौथा अक्षर महोत्सव संपन्न

नई दिल्ली। अक्षर महोत्सव 2025, भारतीय लिपियों और सुलेख परंपराओं पर केंद्रित तीन दिवसीय गहन कार्यशालाओं, शैक्षणिक सत्रों, प्रदर्शनों और सांस्कृतिक अनुभवों के बाद, राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली द्वारा सुलेख फाउंडेशन के सहयोग से प्रस्तुत, यह महोत्सव “संस्कृति के स्तंभ के रूप में अक्षर” विषय पर आधारित था और इसमें कलाकारों, संग्रहालय कर्मियों, गैर-सरकारी संगठनों के बच्चों, पूर्व-बुक किए गए स्कूल समूहों, शिक्षकों, डिजाइनरों और परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

यह महोत्सव 14 नवंबर को राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक श्री गुरमीत सिंह चावला और अपर महानिदेशक डॉ. मीनाक्षी जॉली की गरिमामयी उपस्थिति में आरंभ हुआ। राष्ट्रीय संग्रहालय के पूर्व महानिदेशक प्रो. (डॉ.) बुद्ध रश्मि मणि उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि और ज्ञानभारतम मिशन के निदेशक श्री इंद्रजीत सिंह विशिष्ट अतिथि थे। गणमान्य व्यक्तियों ने सुलेखन कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जो संग्रहालय और सुलेख फाउंडेशन की एक क्यूरेटोरियल पहल है।  इसमें भारत की 100 से अधिक समकालीन सुलेख कलाकृतियों को राष्ट्रीय संग्रहालय के संग्रहों में से सावधानीपूर्वक चयनित पांडुलिपियों और शिलालेखों के साथ प्रदर्शित किया गया है। ऐतिहासिक कलाकृतियों और आधुनिक रचनात्मक परंपराओं के बीच संवाद इस प्रदर्शनी का केंद्र बिंदु था, जिसने प्राचीन और समकालीन, विद्वतापूर्ण और कलात्मकता के बीच सेतु का काम किया।

पहले दिन मोनोलाइन सुलेख, अभिव्यंजक ब्रश अक्षरांकन, डिप पेन फाउंडेशन और देवनागरी अन्वेषण पर कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। स्क्रिप्ट क्वेस्ट ट्रेजर हंट और सीटीटीपी बैच 1 सम्मान समारोह ने इस दिन को और भी जीवंत बना दिया, जबकि मिट्टी के बर्तन, मिट्टी के अक्षरांकन, कैरिकेचर, आभूषण निर्माण, लघु चित्रकला और स्क्रैपबुक कला जैसे रचनात्मक क्षेत्रों ने हर उम्र वर्ग के आगंतुकों को आकर्षित किया।

दूसरा दिन 15 नवंबर अकादमिक संवर्धन और सांस्कृतिक समझ पर केंद्रित था। दिन की शुरुआत प्रोफेसर मनीष अरोड़ा के सत्र “शैक्षणिक क्षेत्र में सुलेख” से हुई, जिसके बाद मेंटर रघुनिता गुप्ता, नीलाक्षी ठाकुर और अवनी खुराना के नेतृत्व में एक व्यावहारिक देवनागरी कार्यशाला हुई। शिलालेख गैलरी में, कोमल पांडे और अभिषेक वर्धन ने लेखन उपकरणों और लिपि के स्‍वरूपों के विकास पर एक सत्र का नेतृत्व किया। इसके बाद प्रतिभागियों ने “ऐतिहासिक लिपियों की पुनर्कल्पना” में भाग लिया, एक ऐसी गतिविधि जिसने प्राचीन लिपियों की रचनात्मक पुनर्व्याख्या को प्रोत्साहित किया। एक प्रमुख आकर्षण सुदीप गांधी की कार्यशाला “देवनागरी अक्षररूपों के साथ फॉर्म-प्‍ले” थी, जिसने प्रतिभागियों को देवनागरी के भीतर संरचना और गति की खोज के प्रयोगात्मक तरीकों से परिचित कराया।

अंतिम दिन 16 नवंबर विचारशील चिंतन, तकनीकी अन्वेषण और कलात्मक प्रदर्शन लेकर आया। प्रो. जी.वी. श्रीकुमार ने अपने सत्र “कैलिग्राफी एक बहुसंवेदी अनुभव” के साथ दिन की शुरुआत की। इसमें लेखन के ध्यानात्मक और संवेदी आयामों पर प्रकाश डाला गया। इसके बाद सौरभ केसरी द्वारा एक टूल एक्सप्लोरेशन वर्कशॉप और “एआई और तात्कालिकता के युग में कैलिग्राफी की प्रासंगिकता” पर एक पैनल चर्चा हुई, जिसमें विभिन्‍न समकालीन तौर-तरीके और डिजाइन शिक्षा से बहुमूल्य दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला गया। दोपहर के सत्र के दौरान        द कैलिग्राफी फाउंडेशन का वार्षिक प्रकाशन लॉन्च किया गया। प्रसिद्ध डिजाइनर महेंद्र पटेल ने अपने प्रतिष्ठित करियर की गहरी अंतर्दृष्टि साझा करते हुए “भारतीय टाइपोग्राफिक डिजाइन में फॉर्म और फंक्शन” प्रस्तुत किया। बाद में, मास्टर कैलिग्राफर अच्युत पलाव ने “स्क्रिप्ट इन मोशन” नाम के एक शानदार लाइव डेमोंस्ट्रेशन से दर्शकों का मन मोह लिया। फेस्टिवल का समापन इंटरडिसिप्लिनरी परफॉर्मेंस “डांस, पेंट एंड स्क्रिप्ट इन हार्मनी” के साथ हुआ, जिसके बाद वेलेडिक्टरी और सर्टिफिकेट सेरेमनी हुई।

अक्षर महोत्सव 2025 प्रतिभागियों और आगंतुकों की ओर से हार्दिक सराहना के साथ संपन्न हुआ। तीन दिनों तक चले इस महोत्सव ने सांस्कृतिक, शैक्षिक और कलात्मक परंपरा के रूप में सुलेख के महत्व की पुष्टि करते हुए पहचान, रचनात्मकता और समकालीन अभिव्यक्ति को आकार देने में इसकी निरंतर प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

ग्लोबल टेकनालॉजी डिस्ट्रीब्यूटर काउंसिल ने तकनीक के भविष्य पर चर्चा की

सिंगापुर। टेक्नोलॉजी डिस्ट्रीब्यूटर्स के दुनिया के सबसे बड़े संघ Global Technology Distribution Council (GTDC) द्वारा आयोजित दूसरे वार्षिक Summit APJ इवेंट के लिए इस सप्ताह क्षेत्रीय टेक्नोलॉजी चैनल लीडर्स एकत्रित हुए। इस वर्ष के सम्मेलन में दुनिया के प्रमुख डिस्ट्रीब्यूटर्स, वेंडर्स, एनालिस्ट्स, मीडिया और अन्य संगठनों के अधिकारी शामिल हुए जहां महत्वपूर्ण उद्योग विषयों पर बातचीत और साझेदारी पर जोर दिया। Summit APJ के वक्ताओं ने डिस्ट्रीब्यूशन की अनूठी क्षमताओं और इस बात पर जोर दिया कि इसका निवेश भविष्य के IT ecosystems को कैसे ऑर्केस्ट्रेट (orchestrate) करेगा। नए टेक्नोलॉजी-सक्षम कार्यक्रमों, डिजिटल मार्केटप्लेस और hyperscalers के साथ गठजोड़ के माध्यम से डिस्ट्रीब्यूटर्स वेंडर्स और पार्टनर्स की वर्तमान और अगली पीढ़ी को सशक्त बना रहे हैं।

APJ क्षेत्र की आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता को भी विशेष चर्चाओं और पैनल चर्चाओं में स्वीकार किया गया जिसमें वक्ताओं ने इस क्षेत्र में चैनल संगठनों के लिए विशिष्ट जरूरतों और अवसरों पर प्रकाश डाला साथ ही यह भी बताया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स वेंडर समुदाय के लिए वैश्विक बिक्री ब्रांडिंग और साझेदारी के अवसरों का विस्तार कैसे करते हैं। उभरते बाजारों और इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज के लिए मूल्यवान समर्थन प्रदान करना इन महत्वपूर्ण चैनल ऑर्केस्ट्रेटर्स की सिद्ध क्षमताओं में से एक है।

APJ क्षेत्र ने 2025 में वैश्विक व्यापार तनावों और बदलते टैरिफ के बावजूद अप्रत्याशित विकास दिखाया है। विकास मजबूत रहा है जहां कई देशों ने मजबूत GDP आंकड़े दर्ज किए हैं। हालांकि वह निर्यात उछाल “फ्रंट-लोडिंग” (फर्मों द्वारा टैरिफ की समय सीमा से पहले ऑर्डर देने की जल्दबाजी) से प्रेरित था; उन बदलावों से प्रभावित होने वाले देशों में गिरावट की आशंका है।

GTDC के APJ के मैनेजिंग डायरेक्टर Ananth Lazarus ने कहा, “टेक्नोलॉजी डिस्ट्रीब्यूटर्स वेंडर्स और सॉल्यूशन प्रोवाइडर्स के लिए ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ (force multipliers) हैं, जो सेल्स और पार्टनर समुदायों को स्केल करते हैं और क्षेत्रीय व देश-के-भीतर की चुनौतियों पर काबू पाते हैं। उनके एनेबलमेंट प्रोग्राम और अलायंस डेवलपमेंट व इंटीग्रेशन क्षमताएं रणनीतिक मूल्य प्रदान करती हैं जो विविध बाजारों में सफलता सुनिश्चित करती हैं।

महत्वपूर्ण निवेश डिस्ट्रीब्यूटर्स को अपने ऑपरेशंस को नया रूप देने और परिष्कृत करने तथा इन अमूल्य समुदायों के लिए समर्थन बढ़ाने में मदद करते हैं। GTDC के CEO Frank Vitagliano ने समारोह के उद्घाटन के दौरान कहा, “डिस्ट्रीब्यूटर्स को अपने सामूहिक IT ecosystems की जरूरतों का लगातार मूल्यांकन करना चाहिए और अपने वेंडर व सॉल्यूशन प्रोवाइडर पार्टनर्स को और भी अधिक मूल्य प्रदान करने के लिए इनोवेशन करना चाहिए। हमारा शोध दिखाता है कि वे निवेश रंग ला रहे हैं क्योंकि डिस्ट्रीब्यूटर्स चैनल संगठनों और उनके द्वारा समर्थित ग्राहकों की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी क्षमताओं को विकसित कर रहे हैं, खासकर AI और साइबर सुरक्षा की बढ़ती जटिलताओं के साथ।

Summit APJ से अन्य मुख्य बातें

इस वर्ष के इवेंट ने भविष्य के टेक इकोसिस्टम और IT डिस्ट्रीब्यूशन की विकसित होती भूमिका पर प्रकाश डाला, जिसमें दक्षिण पूर्व एशिया और भारत में टेक सेक्टर की निरंतर वृद्धि शामिल है। यहाँ अन्य ज्ञानवर्धक Summit APJ सत्रों की मुख्य बातें दी गई हैं:

  • EIU के Alex Holmes ने क्षेत्र में सकारात्मक वृद्धि के साथ-साथ कुछ अज्ञात (unknowns) बातों पर भी बात की, जिन पर भविष्य के विकास को बाधित कर सकने के कारण नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि जबकि उभरते बाजार के अवसर और तकनीकी इनोवेशन उद्योग के लिए मजबूत अवसर पैदा कर रहे हैं, अधिकारियों को मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों (monetary and fiscal policies) और मुद्रा के उतार-चढ़ाव (currency fluctuations) में संभावित बदलावों पर ध्यान देना चाहिए जो उन सकारात्मक रुझानों को प्रभावित कर सकते हैं।
  • IDC की Sandra NG ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे AI APJ में प्रयोग से एंटरप्राइज-व्यापी ऑर्केस्ट्रेशन तक विकसित हुआ है, जिसमें संगठन पहले से ही agentic models को अपना रहे हैं जहाँ मनुष्य और इंटेलिजेंट सिस्टम स्वायत्तता के साथ कार्य करते हैं। उन्होंने टेक्नोलॉजी प्रदाताओं के लिए रणनीतिक अनिवार्यताएं भी पेश कीं, इस बात पर जोर दिया कि कैसे AI, data ecosystems और distributed intelligence भविष्य में विशिष्ट प्रतिस्पर्धी लाभ पैदा करेंगे।
  • CRN Asia के Aaron Raj ने एक सफल AI रणनीति बनाने पर एक इंटरैक्टिव चर्चा का संचालन किया। समूह ने Amazon Web Services के Corrie Briscoe, CONTEXT के Joseph Turner, PTC System (S) Pte Ltd के SS Lim और Lenovo के Debdut Maiti के साथ इन कार्यक्रमों के प्रमुख तत्वों को संबोधित किया, जिसमें अपेक्षाएं निर्धारित करना, चुनौतियों पर काबू पाना और नए अवसरों पर सहयोग करना शामिल था।
  • Vitagliano ने वरिष्ठ डिस्ट्रीब्यूशन अधिकारियों के साथ एक ज्ञानवर्धक “व्यू फ्रॉम द टॉप” बातचीत का भी नेतृत्व किया, जिसमें Redington Limited के V.S. Hariharan, Ingram Micro के Luis Lourenco, TD SYNNEX के Jaideep Malhotra, और Westcon-Comstor के Patrick Aronson शामिल थे। पैनलिस्टों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म में निवेश करने और इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज को सक्षम बनाने के साथ-साथ गो-टू-मार्केट रणनीतियों (go-to-market strategies) और व्यापारिक संचालन (business operations) को अनुकूलित  करने पर चर्चा की।
  • GTDC के Dominique Deklerck ने Summit APJ में एक प्री-डे सेशन में सस्टेनेबिलिटी-संबंधित विषयों पर अपडेट साझा किए। चर्चा में सर्कुलर इकोनॉमी के अनुकूलन के लिए हालिया नियामक परिवर्तनों और सर्वोत्तम प्रथाओं को कवर किया गया, इसके अलावा Digital Product Passport (DPP), EPEAT, CSRD और अन्य संबंधित विषयों पर अंतर्दृष्टि भी प्रदान की गई।

काउंसिल का अगला वैश्विक इवेंट GTDC Summit North America, 18-19 फरवरी, 2026 को Oceanside, CA में Mission Pacific & Seabird Resort में होगा। अधिक जानकारी के लिए अभी रजिस्टर करें या GTDC इवेंट्स पेज पर जाएँ।

GTDC के बारे में

Global Technology Distribution Council (GTDC) दुनिया के अग्रणी टेक डिस्ट्रीब्यूटर्स का प्रतिनिधित्व करने वाला उद्योग संघ है। GTDC सदस्य विविध बिजनेस चैनलों के माध्यम से उत्पादों, सेवाओं और समाधानों की $180 बिलियन से अधिक की वार्षिक वैश्विक बिक्री करते हैं। GTDC सम्मेलन रणनीतिक सप्लाई-चेन साझेदारियों के विकास और विस्तार का समर्थन करते हैं जो वेंडर्स, एंड कस्टमर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स की तेजी से बदलती बाजार की जरूरतों को लगातार संबोधित करते हैं। GTDC सदस्यों में AB S.A, Arrow Electronics, CMS Distribution, Computer Gross Italia, D&H Distributing, ELKO, Esprinet, Exclusive Networks, Exertis, Infinigate, Ingram Micro, Intcomex, Logicom, Mindware, Redington Limited, SiS Technologies, Tarsus, TD SYNNEX, TIM AG, VSTECS Holdings और Westcon-Comstor शामिल हैं।

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Anita Lussenburg
Global Technology Distribution Council
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ज़ी को मिला अंतर्राष्ट्रीय गौरव

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Z) ने पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस यानी ESG में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी को S&P ग्लोबल कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट (CSA) 2025 में 100 में से 51 अंक मिले हैं। इस स्कोर के साथ जी दुनिया भर में मीडिया, मूवी और एंटरटेनमेंट सेक्टर की टॉप 5% कंपनियों में शामिल हो गई है।

पिछले एक साल में कंपनी ने ESG के हर पहलू में अपने कामकाज को बेहतर करने पर जोर दिया है। जी ने खास तौर पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, क्लाइमेट गवर्नेंस और ह्यूमन कैपिटल मैनेजमेंट पर मजबूत काम किया है। इसके साथ ही कंपनी ने स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट, डबल मटेरियलिटी असेसमेंट, पॉलिसी इंफ्लुएंस, प्राइवेसी प्रोटेक्शन, साइबर सिक्योरिटी, कार्बन अकाउंटिंग, एनर्जी मैनेजमेंट और कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी कई कदम उठाए हैं।

इन पहलों की वजह से कंपनी का ESG स्कोर 96वें पर्सेंटाइल तक पहुंच गया है। पारदर्शिता से जुड़ी रिपोर्टिंग में कंपनी ने 100 पर्सेंटाइल का परफेक्ट स्कोर हासिल किया। जोखिम प्रबंधन, सप्लाई चेन, टैक्स स्ट्रैटेजी, पानी, मानव अधिकार, मानव संसाधन प्रबंधन और कस्टमर रिलेशन जैसे कई क्षेत्रों में भी जी ने 95वें पर्सेंटाइल से ऊपर प्रदर्शन किया। वहीं, पूरी इंडस्ट्री का औसत स्कोर सिर्फ 22 रहा।

जी एंटरटेनमेंट के CEO पुनीत गोयनका ने कहा कि ESG में मिला यह स्कोर कंपनी की लगातार की जा रही कोशिशों की पहचान है। उन्होंने कहा कि जी ने पिछले वर्ष में अपने वैल्यू चेन के हर हिस्से में स्थिरता को और मजबूत किया है, फिर चाहे वह मजबूत गवर्नेंस हो, पारदर्शिता से जुड़ी रिपोर्टिंग हो या स्टेकहोल्डर्स के साथ बेहतर जुड़ाव। उन्होंने कहा कि दुनिया की टॉप 5% मीडिया कंपनियों में शामिल होना जी को और बेहतर काम करने की प्रेरणा देता है।

S&P ग्लोबल का यह स्कोर बताता है कि कंपनी अपने सेक्टर की दूसरी कंपनियों की तुलना में ESG जोखिमों, अवसरों और प्रभावों को कितनी अच्छी तरह संभालती है। यह मूल्यांकन कंपनी के खुलासों और उसके वर्तमान व पिछले प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।

इस साल जी ने डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी पर बड़े कदम उठाए, जिसकी वजह से कोई भी डेटा ब्रीच नहीं हुआ। कंपनी ने कार्बन अकाउंटिंग, ऊर्जा की बचत, कचरा कम करने और रीसाइक्लिंग पर भी अच्छा काम किया है। आगे भी कंपनी अपने ESG प्रयासों को और मजबूत करने की दिशा में काम करती रहेगी ताकि व्यवसायिक विकास के साथ-साथ समाज पर सकारात्मक असर भी पड़े।

गौरतलब है कि की जी एक प्रमुख कंटेंट और टेक्नोलॉजी कंपनी है जिसकी पहुंच 190 से ज्यादा देशों में है और जिसे दुनिया भर के 1.3 बिलियन से अधिक लोग देखते हैं। टीवी, डिजिटल, फिल्म और म्यूजिक जैसे कई माध्यमों पर विभिन्न भाषाओं में कंटेंट पेश करते हुए कंपनी दुनिया भर के दर्शकों तक अपनी कहानियां पहुंचाती है। एक भारतीय ब्रांड के रूप में, जी दुनिया में उम्मीद और एकजुटता का संदेश फैलाने के लिए लगातार काम कर रही है।

शांति ही नहीं, सह-जीवन के लिये जरूरी है सहिष्णुता

अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस -16 नवम्बर, 2025

विश्व में सहिष्णुता को बढ़ावा देने और जन-जन में शांति, सहनशीलता, स्वस्थता एवं संवेदना के लिये जागरूकता फैलाने के लिए हर वर्ष 16 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य संसार में हिंसा, युद्ध एवं आतंक की भावना और नकारात्मकता को खत्म कर अहिंसा को बढ़ावा देना है। दुनिया में बढ़ते अत्याचार, आतंक, हिंसा और अन्याय को रोकने और लोगों को सहनशीलता और सहिष्णुता के प्रति जागरूकता की भावना जगाने के लिये इस दिवस की विशेष प्रासंगिकता है। यह दिवस सभी धर्मों और अलग-अलग संस्कृतियों को एक होने की प्रेरणा देता है। यह केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य को बचाने की अनिवार्य पुकार है। जिस समय दुनिया विकास और तकनीक की ऊँचाइयों को छू रही है, उसी समय वह असहिष्णुता, हिंसा, युद्ध, आतंक और आक्रोश की गहराइयों में डूबती भी जा रही है। यह विरोधाभास बताता है कि मनुष्य बाहरी रूप से कितना भी समर्थ हो जाए, लेकिन यदि भीतर सहिष्णुता, धैर्य और संवेदना का प्रकाश न हो, तो सभ्यताएँ चमकते हुए भी विघटन के कगार पर खड़ी हो सकती हैं। आज के तनावपूर्ण वातावरण में सहिष्णुता मानवीय संबंधों को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है। यह कमजोरी नहीं, बल्कि वह आंतरिक सामर्थ्य है जो हमें अपने विचारों के साथ दूसरों के विचारों को समझने, स्वीकारने और सम्मान देने की क्षमता प्रदान करती है।
व्यक्तियों, समाजों एवं राष्ट्रों की एक दूसरे के लिये बढ़ती असहिष्णुता ही युद्ध, नफरत एवं द्वेष का कारण है, यही साम्प्रदायिक हिंसा एवं उन्माद का भी कारण है। असहिष्णुता, घृणास्पद भाषण और दूसरों के प्रति भय, नफरत, घृणा एवं द्वेष न केवल संघर्ष और युद्धों का एक शक्तिशाली प्रेरक है, बल्कि इसका मुख्य कारण भी है। जबकि सहिष्णुता वह बाध्यकारी शक्ति है जो हमारे बहुसांस्कृतिक, बहुजातीय और बहुधार्मिक समाज को एकजुट करती है। असहिष्णुता केवल सामाजिक एवं राजनैतिक ताने-बाने को ही छिन्न-भिन्न नहीं करती है, बल्कि इसका देश की अर्थव्यवस्था, उसके विकास एवं अंतर्राष्ट्रीय छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वैश्वीकरण के युग में अंतर्राष्ट्रीय वित्त एवं व्यापार व्यवस्था को मजबूती देने के लिये सहिष्णुता की बड़ी जरूरत है। यह व्यक्तिगत जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है। दरअसल, बदलते लाइफस्टाइल और सामाजिक माहौल की वजह से लोगों के अंदर सहनशीलता लगातार घटती जा रही है।
दुनिया भर में बढ़ते युद्ध, धार्मिक कट्टरता, नस्लीय संघर्ष, जातीय टकराव और सोशल मीडिया पर फैलती नफरत इस बात का प्रमाण हैं कि असहिष्णुता की आग कितनी तेजी से फैल रही है। ऐसे वातावरण में सहिष्णुता केवल सामाजिक मूल्य नहीं, बल्कि मानवता का आधार बन जाती है। मनुष्य जब संवाद खो देता है, जब सुनने की संस्कृति कमजोर पड़ जाती है, जब व्यक्तिगत अहंकार सामूहिक सद्भाव पर भारी पड़ने लगता है, तब असहिष्णुता जन्म लेती है। यही कारण है कि आज की दुनिया में सबसे बड़ी कमी है-संवाद, धैर्य और विविधता को सम्मानपूर्वक स्वीकारने की क्षमता। सहिष्णुता केवल अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए आवश्यक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन की भी अनिवार्यता है। घरों में तनाव बढ़ रहा है क्योंकि हम दूसरों की बात सुनने का धैर्य खोते जा रहे हैं। रिश्ते टूट रहे हैं क्योंकि हम भिन्नता को स्वीकारने के लिए तैयार नहीं। आधुनिक मनुष्य तेजी से प्रतिक्रियाशील हो गया है; छोटी-सी आलोचना भी उसे अस्थिर कर देती है। यदि हम अपने भीतर सहिष्णुता का दीपक जलाएँ, तो जीवन सरल, सुंदर और शांतिमय हो सकता है।
विशेष रूप से राजनीति में सहिष्णुता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। राजनीति राष्ट्र का मार्ग निर्धारित करती है; यदि इसमें असहिष्णुता, अपमान, दुराग्रह और द्वेष बढ़ता है, तो समाज में भी यही भाव प्रसारित होते हैं। आज जब राजनीतिक भाषा में कटुता बढ़ रही है, विपक्ष की नकारात्मकता के कारण लोकतांत्रिक संवाद और राजनीतिक संस्कृति दोनों खतरे में पड़ रहे हैं। राजनीति का मूलभूत उद्देश्य जनता की सेवा और राष्ट्र का विकास है, परन्तु यह तभी संभव है जब विचारों की विविधता को सम्मान मिले, विचार-विमर्श की परंपरा जीवित रहे और नेता विरोधी विचारों को भी सुने। श्रेष्ठ नेतृत्व वही है जो सबको साथ लेकर चले, न कि विभाजन और नफरत की सियासत को हवा दे। सहिष्णुता राजनीति को परिपक्वता प्रदान करती है और सत्ता के अहंकार को मानवीय संवेदना से संतुलित करती है।
धर्म के क्षेत्र में भी सहिष्णुता की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि धर्म का मूल स्वरूप शांति, करुणा, प्रेम और सद्भाव है। लेकिन जब धर्म कट्टरता और संकीर्णता का साधन बनने लगता है, जब लोग अपने मत को सर्वाेच्च और दूसरों के मत को नीचा समझने लगते हैं, तब धर्म का वास्तविक उद्देश्य नष्ट हो जाता है। महावीर, बुद्ध, ईसा, पैगंबर, गांधीकृसभी ने धर्म को मन की शुद्धि और मानवता की रक्षा का मार्ग बताया है, न कि विभाजन और संघर्ष का। धर्म का सार यही है कि हम भिन्नताओं को समझें, दूसरों की आस्थाओं का सम्मान करें और मनुष्यता को सर्वाेच्च मानें। धार्मिक सहिष्णुता किसी समाज की आध्यात्मिक ऊँचाई का मापदंड होती है। सह-अस्तित्व की भावना ही वह आधार है जिस पर उन्नत दुनिया का निर्माण संभव है। हम एक ही धरती पर रहते हैं, एक ही मानव समुदाय से जुड़े हैं, और चाहे किसी भी भाषा, धर्म, जाति या संस्कृति से हों, हमारी नियति एक-दूसरे से गुँथी हुई है। यदि हम साथ रहना सीख लें, एक-दूसरे का सम्मान करते हुए आगे बढ़ें, तो दुनिया हिंसा और तनाव से मुक्त होकर सौहार्द और समृद्धि का नया अध्याय लिख सकती है।
दरअसल, बदलते लाइफस्टाइल और सामाजिक माहौल की वजह से लोगों के अंदर सहनशीलता लगातार घटती जा रही है। सामाजिक माहौल ना बिगड़े और लोग एक दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहे। व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई-झगड़ा एवं युद्ध की स्थितियां बनना आम हो गया है। रूस-यूक्रेन एवं इजरायल-हमाम के बीच लम्बे युद्धों ने विश्व मानव समाज के लिये गंभीर खतरे उत्पन्न किये है। लगातार युद्ध की बढ़ती स्थितियां एवं आतंकवाद की बढ़ना व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व में बढ़ती असहिष्णुता का ही परिणाम है। किसी भी युग में किसी भी देश में जब-जब सहिष्णुता की दीवार में कोई सुराख करने की कोशिश हुई है, तब-तब आसुरी एवं हिंसक शक्तियों ने सामाजिक एकता को कमजोर किया है और विनाश का तांडव रचा है। सहिष्णुता तभी कायम रह सकती है जब संवाद कायम रहे। सहिष्णुता इमारत है तो संवाद आधार। लेकिन प्रतिस्पर्धा और उपभोक्तावाद के जाल में फंस चुके इस विश्व में यह संवाद लगातार टूटता जा रहा है।
संत कबीरदास से लेकर गुरूनानक, रैदास और आचार्य तुलसी आदि संतों ने समाज में सहिष्णुता का भाव उत्पन्न कर सामाजिक समरसता को जन जन तक पहुंचाया। इससे समाज में सही अर्थों में सहिष्णुता की भावना बलवती हुई। संत कबीर हिन्दु-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे। उन्होंने राम-रहीम को एक माना और कहा ईश्वर एक है भले ही उसके नाम अलग-अलग क्यों न हों। आजादी के आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने सहिष्णुता का संदेश घर-घर तक पहुंचाया। गांधीजी सहिष्णुता के साक्षात प्रतीक थे। सहनशीलता हमारे जीवन का मूल मंत्र है।
सहिष्णुता ही लोकतंत्र का प्राण है और यही वसुधैव कुटुम्बकम, सर्वे भवन्तु सुखिनः एवं सर्वधर्म सद्भाव का आधार है। इसी से मानवता का अभ्युदय संभव है। अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस हमें याद दिलाता है कि मनुष्यता का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम कितना स्वीकार करते हैं, कितना समझते हैं और कितनी उदारता से जीते हैं। यह समय की माँग है कि राजनीति में संवाद, धर्म में करुणा और समाज में संवेदना का विस्तार हो। यदि हम सहिष्णुता को विचार नहीं, बल्कि जीवन की शैली बना लें, तो न केवल हमारा व्यक्तिगत जीवन शांतिमय होगा, बल्कि दुनिया भी अधिक सुरक्षित, सुंदर और मानवीय बन जाएगी। यही सहिष्णुता का वास्तविक संदेश है और यही मानवता की सबसे बड़ी आवश्यकता।
प्रेषकः
(ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
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