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ब्रिटिश सत्ता के गुलाम नहीं थे भारत के राजा -महाराजा

भारत के जिन बड़े राजाओं से ब्रिटिश शासन की 1 नवंबर 1858 से १५ अगस्त १९४७ तक सन्धि थी और जिसके अनुसार वे सर्वोच्चता तो ब्रिटिश शासन की मानते थे परंतु अपने-अपने क्षेत्र में पूर्ण स्वतंत्रता पूर्वक शासन के अधिकारी थे और जिनके राज्य में एक भी दिन अंग्रेजों का शासन नहीं रहा, उनका विवरण हम नीचे दे रहे हैं:- (यह वे राजा थे जिन्हें 21 अथवा 19 अथवा 17 अथवा 15 अथवा 13 अथवा 11 अथवा नो तोपों की सलामी मिलती थी ।तोपों की सलामी ब्रिटिश शासन द्वारा उनकी शक्ति को दी गई मान्यता का सूचक है। ब्रिटिश शासन अपने वायसराय की सलामी 31 तोपों की मानता था। उसके अनुपात में इन राजाओं की जो शक्ति वह मानता था उन्हें उतनी तोपों की सलामी का उसने विधिक अधिकार दिया अर्थात इतने तोपों की सलामी के योग्य वे ब्रिटिश शासन की दृष्टि में थे और इन राजाओं की सहमति से ब्रिटिश वायसराय को 31 तोपों की सलामी का अधिकार भारत में दिया गया। यह विशुद्ध भारतीय प्रथा थी ।इंग्लैंड की नहीं थी।)

१ ) बडौदा ,ग्वालियर, इंदौर ,हैदराबाद ,,जम्मू , मेवाड़ – उदयपुर और मैसूर ।इन सातमें से प्रत्येक को 21- 21 तोपों की सलामी । २) भरतपुर ,बीकानेर, जयपुर, कोटा, पटियाला, भोपाल, कोल्हापुर और त्रावनकोर । इन 8 में से प्रत्येक को 19- 19 तोपों की सलामी.। ३) अलवर ,भरतपुर, बूंदी, धौलपुर, जोधपुर ,टोंक, करौली, रीवा , कच्छ तथा कोचिन ।इन 10 में से प्रत्येक को 17- 17 तोपों की सलामी। ४) दतिया , देवास जूनियर ,देवास सीनियर ,धार, ओरछा रतलाम ,बांसवाड़ा, सिरोही , डूंगरपुर, जैसलमेर किशनगढ़, रामपुर , प्रताप गढ़,बनारस, भावनगर, जूनागढ़ तथा सिक्किम । इन 17 में से प्रत्येक को 15- 15 तोपों की सलामी। ५) जौरा,झालावाड़, जींद ,कपूरथला ,नाभा, कूच बिहार, ध्रंगध्रा,नवानगर, पालनपुर, पोरबंदर, राजपीपला, और त्रिपुरा।

इन 12 राज्यों को प्रत्येक को तेरह तेरह तोपों की सलामी। ६) अजयगढ़, अलीराजपुर, बावनी , बड़ौदा , चरखारी ,छतरपुर ,नरसिंहगढ़, झाबुआ, पन्ना, राजगढ़, सैलाना ,समथर ,सीतामऊ, बड़वानी ,बिजावर, टिहरी- गढ़वाल ,बैरिया ,बिलासपुर ,सिरमौर ,सुकेत, मंडी, चंबा, काबे ,फरीदकोट, गोंडल ,मलेरकोटला ,मोरबी, राधनपुर, बांकानेर ,पुदुक्कोत्तई, जंजीरा और मणिपुर। इन 32 में से प्रत्येक को 11- 11 तोपों की सलामी । ७) खिलचीपुर , नागौद ,मैहर, बंगलपिल्लई,बालासिनोर, छोटा उदयपुर, दांता ,धर्मपुर ,लोनावाला , सामंतवाडी , बशहर , पाटना,सोनपुर, मयूरभंज, कालाहांडी, भोर , ध्रोल , जाहर, लिंबड़ी, मुंढाल, पालीताणा ,राजकोट, सचिन , बंधवा, शाहपुरा, लोहारू ,सांगली, संत तथा बांसदा। इन २९ में से प्रत्येक को ९- ९ तोपों की सलामी। यह हुए 115 राज्य। इन 115 राज्यों में स्वयं ब्रिटिश पैमाने पर दी गई कुल १४९३ तोपों की सलामी है यानी लग्भग पन्द्रह सौ।जो ब्रिटिश वायसराय की शक्ति से ४८ गुना से अधिक स्वयं ब्रिटिश शासन द्वारा मान्य है ।

इसके अतिरिक्त 615 अन्य राज्य थे जिनकी ब्रिटिश शासन से संधि थी और वह छोटे राज्य थे इंग्लैंड के 18 वीं शताब्दी के राज्यों के आकार के। इन पूरे 615 राज्यों की ब्रिटिश शासन से संधि थी । इस प्रकार कुल मिलाकर 730 राजाओं से ब्रिटिश शासन की संधि थी । यह अधिकृत दस्तावेज है। 615 छोटे राज्यों में से किसी को एक और किसी को दो तोपों की सलामी का अधिकार प्राप्त था। इन्हे पराधीन कहना झूठ है और देशद्रोह है। आपको भारत के बारे में कुछ नहीं पता तो चुप रहना चाहिए । परंतु भारत माता का अपमान नहीं करना चाहिए । वह अक्षम्य अपराध है।