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बच्चों की संस्था “मैजिक बस” के लिए अभिषेक बच्चन ने लॉस एंजेल्स में जुटाया धन

वैसे “मैजिक बस” कोई जादुई सवारी नहीं है, जिसमे अभिषेक बच्चन अपने परिवार के साथ घूमने के लिए निकले हैं, पर कुछ लोगों की ज़िंदगी में एक संस्था जिसका नाम “Magic Bus” है किसी जादुई सवारी से कम भी नहीं है। इस संस्था ने छोटे बच्चों और किशोरों के लिए बहुत से अनोखे काम किये हैं और ये संस्था 12 से 18 वर्षों के बच्चों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। अगर संछिप्त शब्दों में “मैजिक बस” की बात करें तो ये गरीब बच्चों के सपनों में रंग भरने का काम करती है। ये संस्था एक कमज़ोर कन्धों पर काबिज़ सपनों का सहारा बनती है और उनको सार्थक बनाती है।

 

अभिषेक ने जीता सबका दिल
अभिषेक बच्चन इसी संस्था का उत्साहवर्धन करने और संस्था के लिए पर्याप्त धन जुटाने के लिए इन दिनों अमेरिका में हैं। बीते शनिवार को लॉस एंजेल्स के एक सभागार में उन्होंने इस संस्था के लिए धन अर्जित किया, बच्चों का उत्साहवर्धन किया और वहां उपस्थित सभी मेहमानों को इस संस्था की सहायता के लिए अनुमोदन किया। इस कार्यक्रम में मुंबई की झुग्गी झोपड़ी से आये तीन बच्चों पार्वती, अलीषा और सर्वानन ने शिरकत की और उन्होंने बताया की किस तरह मैजिक बस ने उनकी ज़िंदगी बदल दी। सबसे पहले अलीषा आयीं और उन्होंने बताया कि किस तरह वे फ़ुटबाल खेलना चाहती थी लेकिन, ये लड़कों का खेल है, कहकर उनको दुत्कार दिया जाता था। फिर किसी ने उन्हें मैजिक बस के बारे में बताया और संस्था के संपर्क में आते ही, न सिर्फ संस्था ने उन्हें सही शिक्षा दी बल्कि इस लायक बनाया की आज वे फुटबाल की नियमित खिलाडी हैं और लड़कों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। मुंबई से ही आये “सर्वानन” को किसी समय रोज़ सिर्फ 100-150 रूपये मिल पाते थे और इसी छोटी सी राशि से वे अपना और अपने परिवार का पेट भर रहे थे। इस दौरान वे स्कूल भी नहीं जा सकते थे क्योंकि न तो उनके पास पैसे थे और न ही उनके पास समय। फिर उन्हें भी मैजिक बस ने सहारा दिया, उन्होंने अपना हाई स्कूल पूरा किया और अपनी बाकी की पढाई पूरी कर के उन्होंने भाभा एटॉमिक सेंटर में अपना पहला इंटरव्यू दिया और अपने पहले ही प्रयास में ही वो सफल हो गए।

एक समय में सिर्फ १०० रुपये की आमदनी वाले सर्वानंद इस समय २५००० रूपए की वेतन पर काम करते हैं और वे कहते हैं कि ये सब इसलिए सम्भव हुआ क्योंकि मैजिक बस जैसी संस्था ने उनको सहारा दिया। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में उन्होंने अपनी बात हिंदी में कहीं और इस बीच अभिषेक ने उनकी बातों का न सिर्फ इंग्लिश में अनुवाद किया बल्कि उनकी जीवन यात्रा के पहलुओं के बारे में भी विस्तार से बताया। इसके बात “पार्वती” आयीं। सबसे खास बात ये थी कि मुंबई की झुग्गी से आयी पार्वती ने इंग्लिश में अपनी बात कही और सबने इसकी सराहना की और भरपूर आनंद लिया। जो लोग स्टेज की महत्ता समझते हैं, वे जानते होंगे की स्टेज से बोलना आसान नहीं होता, चाहे हम अपनी मातृभाषा में ही क्यों न बोल रहें हों। ऐसे में इतने बड़े स्टेज पर इंग्लिश में अपनी बात कहना वो भी कैलिफोर्निया के दर्शकों सामने ये बताता है कि उसने कोई कोई साधारण यात्रा नहीं की। पार्वती ने न सिर्फ अपनी पढाई पूरी की बल्कि आज वो अपना जीवन ऐसे व्यक्ति के साथ बिता रही जिसको उन्होंने खुद चुना है।

दरअसल, इन तीन बच्चों की कहानी ये बताती है कि थोड़ी सी मदद से इन बच्चों के टूटे आत्म विश्वास को जोड़ा जा सकता है और वे सक्ष्छ्म हैं वो सब कुछ पा लेने के लिए जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। पार्वती के आत्मविश्वास की झलक इस से भी मिलती है की वे भविष्य में मैजिक बस की सीईओ बनना चाहती हैं। जब उन्होंने ये कहा, सबने खड़े होकर पार्वती का अभिवादन किया और ये सन्देश है उन सबके लिए जो आगे बढ़ना चाहते हैं। अभिषेक बच्चन की शालीनता, उनका सहज व्यवहार सबका दिल जीतने वाला था और उनकी गरिमामय उपस्थिति ने इस समारोह में चार चाँद लगा दिए।

Matthew Spacie ने 1999 में शुरू किया “मैजिक बस” का सफर
Matthew Spacie ने बताया की 1999 में उन्होंने इस संस्था की स्थापना की और आज लगभग 10 लाख बच्चे इस संस्था से जुड़े हैं। उनसे बातचीत के दौरान उन्होंने बतया इसकी शुरुआत एक रग्बी मैच के दौरान हुई। मैथू मुंबई में ही रहते हैं और उन्होंने बताया कि अपने रग्बी प्रैक्टिस मैच के दौरान वे अक्सर कुछ बच्चों को देखते थे जो बड़ी ललक से उनको खेलते हुए देखते थे। मैथू ने उनको सिखाने के बारे में सोचा पर जब उनको उनकी आर्थिक दशा के बारे में पता चला तो उन्होंने उनकी सहायता के बारे में सोचा और यहीं से उनकी मैजिक बस की यात्रा शुरू हुई।

 

अमित और अर्पिता भंडारी “मैजिक बस” अमेरिका लेकर आये
धीरे-धीरे ये यात्रा बढ़ती गयी और मैथू ने इस संस्था को अमेरिका लाने का फैसला किया। अमित भंडारी जो “बायोऊर्जा” के फाउंडर हैं, उन्होंने इस मैजिक बस के USA चैप्टर की शुरुआत की। पहले सिर्फ 40-50 लोगों के समूह ने लगभग 50 हज़ार डालर एकत्रित किया और ये धनराशि काफी थी ये विश्वास देने के लिए कि मैजिक बस को सफलतापूर्वक अमेरिका में भी चलाया जा सकता है। इसके बाद अमित जी की धर्मपत्नी, अर्पिता भंडारी भी इस संस्था का हिस्सा बनी और दोनों ने अपने पूरे परिवार सहित इस मैजिक बस को अपना पूरा समर्थन दिया। भंडारी परिवार का मानना है की मैजिक बस का काम करने का तरीका पूरी तरह पारदर्शी है और इस संस्था में परिवर्तन लाने की छमता है इसलिए वो सब पूरी तरह से इस संस्था को समर्पित हैं। अमित भंडारी, गूगल के श्रीराम और मैथू ने मिलकर आज मैजिक बस को एक नयी ऊंचाई प्रदान की है।

अभिषेक बच्चन और उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय बच्चन ने इस संस्था को अपना पूरा समर्थन दिया है और लगता है आने वाले समय में इस “मैजिक बस” के नन्हे यात्री अपने भविष्य नई पटकथा लिखेंगे।

लॉस एंजेल्स से रचना श्रीवास्तव, फोटोग्राफ-अविनाश श्रीवास्तव

रचना श्रीवास्तव अमरीका में रहती हैं और वहाँ रह रहे भारतीय लोगोॆं की गतिविधियों पर नियमित रूप से लिखती हैं। )

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