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जीवन शैली
 

  • राजस्थानी जायके का कोई जवाब नहीं!

    राजस्थानी जायके का कोई जवाब नहीं!

    राजस्थान को सांस्कृतिक दृष्टि से भारत के समृद्ध प्रदेशों में गिना जाता है। यहां की संस्कृति जहां त्याग, बलिदान एवं शौर्य की अद्भुत दास्तान है वहीं कला, संगीत, साहित्य एवं सांस्कृतिक प्रतीकों एक विशाल सागर है।

  • उम्र का तज़ुर्बा और तज़ुर्बे की उम्र !

    उम्र का तज़ुर्बा और तज़ुर्बे की उम्र !

    ज़िन्दगी सचमुच एक पहेली है.जब आप युवा होते हैं तब जो कुछ आप देखते हैं, उस पर यकीन भी करना सीख जाते हैं, किन्तु जब बुढापा आता है, तब आप समझ पाते हैं कि पहले जो कुछ देखा और माना था, वह हवा में बने महल या पानी में खींची गयी लकीरों से अधिक और कुछ भी नहीं है.

  • बोलने की प्रभावी कला से करें लोगों के दिलों पर राज – डॉ.जैन

    आज के दौर में व्यवहार और रोजगार के क्षेत्र में संवाद कौशल का महत्व बढ़ता जा रहा है,लेकिन, प्रख्यात वक्ता और दिग्विजय कालेज के प्रोफ़ेसर डॉ.चन्द्रकुमार जैन का कहना है कि कुछ लोग हैं जिनके पास कहने योग्य कुछ भी नही होता पर वो अक्सर कुछ न कुछ कह बैठते हैं. दूसरी तरफ ऐसे लोग भी हैं जिनके पास कहने के लिए पूरा खजाना ही होता है पर वे चाहकर भी मौके पर कुछ बोल नहीं पाते हैं। हर तरफ बोलने की कला और अभिव्यक्ति के तौर तरीकों पर इतना जोर दिए जाने के बावजूद बहुतेरे लोग हैं जिनके लिए यह काम पहाड़ जैसा है।

  • चेहरे से बयां हो जाती है ज़िन्दगी

    चेहरे से बयां हो जाती है ज़िन्दगी

    ज़िन्दगी सचमुच एक पहेली है.जब आप युवा होते हैं तब जो कुछ आप देखते हैं, उस पर यकीन भी करना सीख जाते हैं, किन्तु जब बुढापा आता है, तब आप समझ पाते हैं कि पहले जो कुछ देखा और माना था, वह हवा में बने महल या पानी में खींची गयी लकीरों से अधिक और कुछ भी नहीं है.

  • जल संरक्षण मानवीय कर्तव्य और राष्ट्रीय जिम्मेदारी – डॉ.जैन

    राजनांदगंव।  राष्ट्रीय प्रशिक्षक, प्रेरक वक्ता और दिग्विजय कालेज के  प्रोफ़ेसर डॉ.चन्द्रकुमार जैन मानते हैं कि जल संरक्षण आंदोलन, पानी बचाकर देश को संवारने की दिशा में सार्थक कदम है। विश्व जल दिवस पर यहाँ डॉ.जैन ने कहा कि दरअसल जल संरक्षण अभियान एक विश्व स्तरीय सोच की मिसाल बनकर उभरा है। इसमें जन-जन को सहभागी […]

  • एस.एम.एस. से बन रही है एक नई दुनिया

    पिछले लगभग दो वर्ष से प्रतिदिन सुबह लगभग 6 बजे मेरे मोबाइल पर एक टंकार बिना किसी नागा के बजती है और मैं उस टंकार के साथ आने वाले एस.एम.एस. को पढ़ने के लिये उत्सुक हो जाता हॅूं। इसी एस.एम.एस. के साथ मेरी दिन की शुरूआत शुभ और मंगलमय हो जाती है। ये एस.एम.एस. डाॅ. […]

  • जीवन को स्वस्थ कैसे बनाएँ

    1- 90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी। 2- कुल 13 असाधारणीय शारीरिक वेग होते हैं । उन्हें रोकना नहीं चाहिए ।। 3-160 रोग केवल मांसाहार से होते है 4- 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन […]

  • छोड़िये भी ! क्या रखा है इन विचारों में !

    हम अपने मन में चल रहे अविवेकपूर्ण व अतार्किक विचारों से परेशान रहते हैं जिसका हमारे दैनिक जीवन और कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. ये विचार सफल व्यक्ति को असफल व्यक्ति से अलग करते हैं. ये विचार सभी क्लेशों और युद्दों की जड़ हैं क्योंकि अचेतन एवं अतार्किक विचारधारा ही सभी युद्धों को जन्म […]

  • सफल जीवन की एक नई राह बनाएं

    व्यक्ति अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाने के लिये समाज से जुड़कर जीता है, इसलिए समाज की आंखों से वह अपने आप को देखता है। साथ ही उसमें यह विवेक बोध भी जागृत रहता है ‘मैं जो भी हूं, जैसा भी हूं’ इसका मैं स्वयं जिम्मेदार हूं। उसके अच्छे बुरे चरित्र का बिम्ब समाज […]

  • अतीत के खंडहर और भविष्य के हवा महल से निकलने की ज़रुरत

    अभी के दौर में आर्थिक शब्दावली कुछ ज्यादा ही चलन में है, लिहाजा जीवन मूल्यों को भी आयात-निर्यात की नजर से देखा जाने लगा है। लेकिन भारत ने अपने मूल्य न तो अभी तक किसी पर थोपे हैं, न ही उनका निर्यात किया है। इनमें से जो भी दुनिया को अपने काम का लगता है, […]

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