Saturday, May 25, 2024
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हिंदुत्व एक विराट जीवन दर्शन है

पारंपरिक और सामान्य व्यावहारिक शब्दों में सिंधु प्रदेश के निवासी हिंदू कहलाते हैं। हिंदुत्व शब्द का सबसे पहले राष्ट्रवादी चिंतक, 1857 के आंदोलन को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और अपने लेख के माध्यमों से सामान्यजन और स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए अपनी आहुति देने वालों के विचारों में राष्ट्रवाद की भावना का लौ और अलख को अर्जित करने वाले महान स्वंतत्रयवीर राष्ट्रवादी चिंतक वीडी सावरकर ने वर्ष 1923 में किया था, शाब्दिक आशय में हिंदुत्व जीवन जीने का एक तरीका या आत्मा( शरीर पर मन का नियंत्रण ) की स्थिति से है जो सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रकृति की भावना पर आधारित है। हिंदुत्व उदारवाद, समाजवाद और गांधीवाद के समान एक दर्शन है ,जो संपूर्ण समाज के आनंद( सुख और दुख के सापेक्ष स्थिति) को प्रदान करने वाला गत्यात्मक दर्शन है।

हिंदुत्व में शासक (सरकार ) और शासित (जनता) के अधिकार, कर्तव्य और आचार संहिता के अनुपालन पर संकेंद्रण किया गया है। हिंदुत्व जीवन जीने का एक तरीका , राष्ट्रीय परंपरा एवं अनुशासन है जिसमें भौतिकवाद, सनातन धर्म ,अस्पृश्यता विहीन समाज,उत्पीड़न विहीन समाज, शोषण विभिन्न समाज, देशभक्ति और पंथनिरपेक्ष तत्वों की मौलिक विशेषता है ।हिंदुत्व भारतीय संस्कृति और भारतीयता का जय घोष है। हिंदुत्व का महानतम मौलिक विशेषता उदारवाद का संप्रेषण, सहिष्णुता, समाज को समायोजित करने वाली गुरुत्वीय शक्ति और वैश्विक स्तर की समस्त शक्तियों को आत्मसात करने वाले तत्वों से है। हिंदुत्व के अंतर्गत सभी धर्मो का उन्नयन बिना किसी द्वेष ,पूर्वाग्रह और भेदभाव के हुआ है।

हिंदुत्व ईसाई और इस्लाम की तरह कोई पंथ नहीं है, बल्कि सामाजिक, आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों का सार्थक समुच्चय है ,इसके मुख्य विषय वस्तु में आध्यात्मिक स्वतंत्रता है। इन समस्त मार्गो या आध्यात्मिक दृष्टिकोण जो दूसरों की आध्यात्मिक स्वतंत्रता को स्वीकार करें और उन्नयन के लिए प्रोत्साहित करते हैं ,सभी के सार्थक समुच्चय को हिंदुत्व कहते हैं। हिंदुत्व की अवधारणा भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अमृत रूपी तत्व के रूप में समाहित है, यह हमारी पार्थिव के मुख्य परंपराओं, संस्कृतियों ,संस्कारों और अनुशासन के आंतरिक आत्मा (भारत माता) के दिशा को प्रतिनिधित्व करती है।

इसके सारतत्व को श्री अरविंदो ने कहा है कि “सनातन धर्म भारतीय राष्ट्रीयता के आधारशिला है”। ऐतिहासिक रूप में ऐसी सामंजस्यविरोधी शक्तियां बलवती होती गई जो सनातन धर्म को निस्तेज करना चाहती थी, उनके प्रतिक्रिया स्वरूप हिंदुत्व समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए सेतुविचार का कार्य किया और समकालीन में सकारात्मक बदलाव के लिए वायु देवता के सदृश्य सक्रिय हैं। हिंदुवाद के समरूप संस्कृति हिंदुत्व है। हिंदुवाद का संहिताकरण ही हिंदुत्व है।

हिंदुत्व ने चालीस शताब्दियों तक शासन किया था। हिंदुत्व हिंदू लोगों की धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ उनके सामाजिक और सांस्कृतिक प्रथाओं और उनके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को संदर्भित करने के लिए किया जाता है ।मौलिक रूप से हिंदुत्व समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों को उन्नयन करता है। हिंदुत्व के एक छोटे उपसमुचय के रूप में हिंदू धर्म मात्र एक शाखा है। हिंदुत्व की उपादेयता को रेखांकित करते हुए सावरकर जी का कहना था कि हिंदुत्व हिंदू दर्शन की एक विशिष्ट तस्वीर पेश करते हैं। समय के साथ हिंदुत्व हिंदू धर्म का मार्गदर्शन सिद्धांत बन जाता है।

सावरकर को भारत में हिंदू राष्ट्रवाद के वैचारिक गठन का अग्रणी मुखिया के तौर पर जाना जाता है। हिंदुत्व एक वृहद संकल्पना है ।हिंदुत्व एक ऐसी अवधारणा है जिसके व्यापक उपादेयता से संकीर्ण विचारों से निजात मिलता है।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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