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अध्यात्म गंगा
 

  • महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद जी का सम्मान

    महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद जी का सम्मान

    स्वामी प्रंनवानंद सरस्वती महाराज कार्यक्रम के दौरान कहा की सनातन धर्म भारत की संस्कृति है। जिसे बीते 70 वर्षों से कहीं ना कहीं दबाया जा रहा था। लेकिन अब एक बार फिर से लोगों के मन में राष्ट्र के प्रति चेतना जाग रही है

  • कलिकाल में हनुमान जी की भक्ति का महत्व

    कलिकाल में हनुमान जी की भक्ति का महत्व

    मान्यता है कि हनुमान जी कलियुग के जाग्रत देव हैं जो भक्तों को बल, बुद्धि, विवेक प्रदान करके भक्तों की रक्षा करते हैं। हनुमान जी के स्मरण से रोग, शोक व कष्टों का निवारण होता है। मानसिक कमजोरी व दुर्बलता के दौर में हनुमान जी का स्मरण करने मात्र से जीवन में नये उत्साह का संचार होता है।

  • हनुमान का वानर रुप क्या है?

    हनुमान का वानर रुप क्या है?

    आप्त काल में बुद्धिमान और विद्वान जनों से संकट का हल पूछा जाता है। जैसे युद्धकाल में ऐसा निर्णय किसी अत्यंत बुद्धिवान और विचारवान व्यक्ति से पूछा जाता है। पशु-पक्षी आदि से ऐसे संकट काल में उपाय पूछना सर्वप्रथम तो संभव ही नहीं हैं। दूसरे बुद्धि से परे की बात है। इसलिए स्वीकार्य नहीं है।

  • रामायण से क्या सीखें

    हमारे देश के लोग रामायण पढ़ते हैं, नित्य रामलीला देखते हैं, परन्तु उस पर विचार कुछ भी नहीं करते । उनका लीला देखना या नित्य रामायण पढ़ना ऐसा है जैसे एक बकरी का बाग में जाना।

  • आनन्द का सनातन प्रवाह

    आनन्द का सनातन प्रवाह

    हिन्दूदर्शन या सनातन विचार ने विचार के चैतन्य स्वरूप या तारक शक्ति के विराट स्वरूप को समझाऔर सनातन सभ्यता के रूप में निरन्तर विस्तारित किया।जीवन और जीव की जड़ता या मारक शक्ति को स्वीकार नहीं किया।

  • वेदों के पांच ऋषि

    वेदों के पांच ऋषि

    ये पांच ईश्वरीय गुणों वाले ऋषि है और अग्नि रूपी ईश्वर की आदित्य, रूद्र और वसु तीन दिव्यशक्तियाँ हैं। वसु 24 वर्ष तक ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला है और शरीर को स्वस्थ और पूर्णायु तक बसाए रखने की शक्ति रखने वाला है। रूद्र 44 वर्ष तक ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए अपने ज्ञान और कर्म से रोगों को दूर करने वाला है

  • जीवन में कर्म की प्रधानता

    जीवन में कर्म की प्रधानता

    'कर्मकाण्ड' के अर्थों में भी बहुत कुछ विकार हुआ है। श्री शंकर स्वामी के समय में कर्मकाण्ड का केवल यही अर्थ लिया जाता था कि यज्ञों के विषय में प्रचलित कुछ क्रियाएं करना, जैसे पात्र साफ करना, वेदी बनाना,

  • जब टाल्सटाय आत्म हत्या  करने पहुँच गए

    जब टाल्सटाय आत्म हत्या करने पहुँच गए

    अब ऐसे व्यक्तियों को भगवान का साक्षात्कार करना कितना सरल हो सकता है। कवि हृदय चाहिए, कल्पनाशील मन चाहिए। और फिर ऐसी तरकीबें हैं कि कल्पनाशील मन को और कल्पनाशील बनाया जा सकता है। जैसे उपवास करके! अगर लंबा उपवास किया जाए,

  • वेदों में जल का महत्व

    वेदों में जल का महत्व

    वेदों में जल कई प्रकार के वर्णित किये गए हैं और उनके सम्बन्ध में यह कहा गया है कि वे सबके लिए प्रदूषणशामक एवं रोगशामक हों:

  • पुनर्जन्म -विवेचन

    एक शरीर को त्याग कर दूसरा शरीर धारण करना ही पुनर्जन्म कहलाता है। चाहे वह मनुष्य का शरीर हो या पशु, पक्षी, कीट, पतंग आदि कोई भी शरीर।

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