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पत्रकार गौरव सावंत ने बच्चों के लिए लिखी वीर सैनिकों की गाथाएँ

विभिन्न युद्धों में भारतीय जवानों की वीरगाथाओं से बच्चों को रूबरू कराने के लिए इंडिया टुडे टीवी के संपादक गौरव सावंत बच्चों के लिए एक नई सचित्र बुक सीरीज ‘वीर गाथा’ लेकर आए हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर जारी इस श्रृंखला में उन्‍होंने इन असली हीरो की जिंदगी के बारे में बताने की कोशिश की है।

गौरव सावंत इससे पूर्व ‘डेटलाइन कारगिल’ भी लिख चुके हैं, जिसके लिए उन्‍हें काफी प्रशंसा मिली थी। गौरव सावंत ने बताया कि वह इस किताब के माध्यम से आने वाली पीढ़ी को देश के जांबाज सैनिकों की वीर गाथाओं के बारे में बताना चाहते हैं क्योंकि आज के बच्चे क्रिकेट से लेकर फिल्म स्टार के बारे में तो बहुत कुछ जानते हैं लेकिन वह इस पहलू से अनभिज्ञ हैं। इस किताब को सचित्र छापे जाने के बारे में उन्होंने बताया कि इसे खासकर बच्चों (7-11 आयुवर्ग) के लिए तैयार किया गया है। जब बच्चे इन कहानी से भलीभांति वाकिफ हो जाएंगे, तब वरिष्ठ छात्रो के लिए वह कुछ लिखेंगे।

गौरव ने बताया कि बच्चों के लिए इस तरह की किताब तैयार करना काफी मुश्किल था और इसके लिए उन्होंने जीतोड़ मेहनत की। गौरव के अनुसार, ‘इस प्रोजेक्ट के लिए हमने बच्चों का भी सहयोग लिया और उनकी सलाह के आधार पर जरूरी बदलाव भी किए। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने भी इस प्रोजेक्ट में काफी रुचि दिखाई और उन्होंने ही इसे सचित्र छापने का सुझाव दिया ताकि बच्चों को यह रुचिकर लगे और वे इसे आसानी से समझ सकें।’

गौरव ने बताया, ‘इस बुक सीरीज में हमने सेना के जवानों की फैमिली के जीवन को भी दर्शाया है। इसमें बताया गया है कि सैनिकों के बच्‍चों की जिंदगी दूसरे बच्चों से अलग होती है। रात को सोते समय उन्‍हें आम बच्चों की तरह राजकुमार-राजकुमारियों की कहानी नहीं सुनाई जाती बल्कि उन्हें ऐसे साहसी जवानों के बारे में बताया जाता है जो देश पर मर-मिटने के लिए तैयार रहते हैं।’ गौरव सावंत ने बताया, ‘ मेरे पिता ब्रिगेडियर चितरंजन सावंत लंबे समय तक गणतंत्र दिवस परेड की कमेंटरी करते रहे हैं। रात को हमें मेजर शैतान सिंह और सोमनाथ शर्मा जैसे वीरों की कहानियां सुनाई जाती थीं और युद्ध की ऐसी-ऐसी बातें बताई जाती थीं जिनके बारे में उस समय हम ज्यादा नहीं जानते थे। उसी तरह की स्टोरियों को इस बुक सीरीज के माध्यम से बच्चों को बताने के लिए यह कदम उठाया गया है।’

स्मृति ईरानी ने इन देश भर के बच्चों के लिए इन कहानियों को विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवादित करने का निर्णय लिया है। यदि इस पर एक फिल्म बनाई जाए तो यह काफी बेहतर कदम होगा।

साभार- http://www.samachar4media.com/ से

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