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हरगोविंद खुराना को डूडल से याद किया गूगल ने

गूगल ने नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक हर गोबिंद खुराना को उनके जन्मदिन पर डूडल बनाकर सम्मान दिया। आज उनका 96वें जन्मदिन है।

हर गोबिंद खुराना को डीएनए और सिथेंटिक जीन संरचना को लेकर किए गए काम की वजह से नोबेल पुरस्कार मिला था।

खुराना का जन्म रायपुर के एक गांव में हुआ था और शुरुआती शिक्षा पिता की देख-रेख में हुई थी। लाहौर से अपनी बैचलर और मास्टर्स डिग्री पूरी करने के बाद खुराना पीएचडी करने के लिए लंदन चले गए।

1966 में मिली अमेरिका की नागरिकता-

ज्यूरिख में उन्होंने प्रोफेसर व्लादिमिर प्रिलोग के निर्देशन में न्यूक्लिक एसिड और प्रोटीन पर लंबा रिसर्च किया। 1952 में खुराना कनाडा चले गए और वहां उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया में काम करते हुए नोबेल पुरस्कार से जुड़ी रिसर्च पूरी की। कुछ साल बाद ही प्रोफेसर खुराना कनाडा से अमेरिका चले आए। यहां उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ विसकॉन्सिन में काम किया। उनके काम को देखते हुए ही 1966 में अमेरिका ने उन्हें अपनी नागरिकता दे दी।

ऐसे मिला खुराना को नोबेल पुरस्कार-

प्रोफेसर खुराना को मेडिसिन के क्षेत्र में रॉबर्ट हॉली और मार्शल निरेनबर्ग के साथ जेनेटिक कोड और प्रोटीन सिंथेसिस पर किए गए काम की वजह से 1968 में नोबेल पुरस्कार मिला था। खुराना ने साल 1972 में पहली कृत्रिम जीन संरचना की थी।

2011 में 89 साल की उम्र में प्रोफेसर हर गोबिंद खुराना ने अमेरिका के मैसाच्युसेट्स में आखिरी सांस ली।

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